01 फ़रवरी, 2012

अनकही

 
किसे सुनाऊं हाले गम 

पिछले कुछ दिनों में बुंदेलखंड इलाके के कई नेताओं  से मिलने का समय  मिला | कुछ देश दुनिया का दर्द सब को बेचैन किये था |  कुछ उनकी सुनी कुछ अपनी सुनाई ,चर्चा चलती रही |  सब कुछ एसा लग रहा था मानो देश के इनसे बडे शुभ चिन्तक कहीं हें ही नहीं | उनके अन्दर झांकने का जब हमने कुछ प्रयाश किया तो उनका दर्द बाहर निकल ही आया | कहने लगे क्या बताएं प्रदेश में सरकार तो हमारी है किन्तु कोई सुनने वाला ही नहीं है | इलाके में तो अधिकारियों ने लूट मार मचा रखी है | पुलिस को क्या कहें ये तो डकेतों की पर्याय हो गई है |  मुख्य मंत्री को भी बताया की यदि हालत यही रहे तो लोगों का विशवास टूट जाएगा , और तीसरी बार सरकार बनाने का सपना चकना चूर हो जाएगा | मुख्य मंत्री जी सुन तो लेते हें पर करते कुछ नहीं हें | अब तो हमे भी लगने लगा है की उमा भारती की बी.जे.पी. में वापसी के बाद से शिवराज को बुंदेलखंड के तीन जिलों( छतरपुर,पन्ना,और टीकमगढ़) से कोई मतलब नहीं रह गया है | वे यहाँ एसे अधिकारी भेज रहे हें जो हम लोगों की कम कांग्रेसियों की ज्यादा सुनते हें |
बात चली थी भ्रष्टाचार से की सत्ता धारी नेता किस तरह से भ्रष्टाचार कर रहे हें : पर वे आखिर अपने दल के दलदल में कैसे पत्थर फेकते कीचड़ तो उन्ही पर आकार लगता | एक बात कह कर वे मौन हो गए जो एसा कर रहे हें उनको जनता सबक सिखाएगी |

18 जनवरी, 2012

खजुराहो के शिल्प ने खूब लुभाया पर्यटकों को


खजुराहो के शिल्प ने खूब लुभाया पर्यटकों को 

खजुराहो /रवीन्द्र व्यास / 
खजुराहो दुनिया में अपने आप में एक एसा स्थान है जिसका किसी से मुकाबला नहीं किया जा सकता है |  यहाँ के मंदिरों में जीवन की फिलोअस्फी छिपी है  | दुनिया के किसी भी मंदिर या दूसरे स्थानों पर आपको सिर्फ एक पहलू नजर आयेगा पर यहाँ आपको  धर्म, अध्यात्म, योग , भोग  जिंदगी का दर्शन सभी कुछ देखने को मिलेगा | यही  कारण है की खजुराहो के इन मंदिरों को देखने के लिए देश दुनिया से रिकार्ड संख्या में  पर्यटक आये | इस बार जो  पर्यटक आये उनने अब तक के सारे रिकार्ड तोड़ दिए | 
                                                                  खजुराहो के भारतीय पुरातत्व के प्रमुख राहुल तिवारी ने बतया की   खजुराहो  के मंदिरों को इस बार 97356  विदेशी  और  2 लाख 53 हजार  544  भारतीय पर्यटकों ने खजुराहो के मंदिरों को देखा | खजुराहो के इतिहास  में अब तक का ये सबसे बड़ा रिकार्ड है |  2010  में 234954  भारतीय  और 90721  विदेशी  पर्यटकों ने  दुनिया की इस अनुपम कला को देखा |   
 पिछले एक दशक में देखा जाये तो  इस दशक की शुरुआत  पर्यटकों की संख्या में गिरावट से हुई थी | 2000  में जहां 54417  विदेशी  और 185639 भारतीय पर्यटक आए  वहीँ  2001  में इनकी संख्या 51718 और 159582 ,वर्ष 2002 में तो और गिरावट आई 24093  और 122617  पर्यटक ही आये | 2003 में कुछ सुधार हुआ 34436  और 125570  पर्यटक आये | 2004  में पर्यटकों की संख्या में उछाल आया इस साल 63090 विदेशी और 140466 भारतीय पर्यटकों ने मंदिरों को देखा | 2004  से शुरू हुआ पर्यटकों के आकर्षण का यह सिलसिला बरकरार है | और हर साल पर्यटकों में खजुराहो का आकर्षण बढता ही जा रहा है | खजुराहो आने वाले टूरिस्टों में इटली ,फ़्रांस , स्पेन,हालेंड , अमेरिका,ब्रिटेन,जर्मनी ,कोरिया,जापान, के टूरिस्ट ज्यादा आते हें \
खजुराहो आये स्पेन के गिओवाने (giovane) कहते हें की उन्होने काफी पहले खजुराहो के बारे में सुन रखा था , तभी से उन्होने खजुराहो  आने के बारे में तय किया था \ खजुराहो को नेट पर सर्च किया  फिर यहाँ आये | जब यहाँ आये तो हमने जो सुन रखा था उससे कही ज्यादा बेहतर यहाँ पाया | ये एक दम शांत जगह है  यहाँ के मंदिरों की कला कृतियाँ तो एक दम अदभुत हें | होलैंड की  श्रीमती लोमेलार्स ( lomlers)  कहती हें की दुनिया में खजुराहो के मंदिर अपने आप में अनोखे हें | 
यहाँ ट्रेवेल एजेंसी के प्रबंधक अजय कश्यप ने बताया की मध्य भारत का छोटा टूरिस्ट  इलाका है , मंदिरों के साथ  यहाँ का शांत और प्राक्रतिक वातावरण विदेशी टूरिस्टों को खूब भाता है , विदेसी  टूरिस्ट  यहाँ कामसूत्र  और यहाँ  के आर्किटेक्ट को देखने आता है | वे मानते हें की हवाई यातायात से जुडे होने के कारण संपन्न विदेशी टूरिस्ट तो यहाँ आ जाते हें किन्तु खस्ता हाल सड़कों के कारण मध्य वर्ग के टूरिस्ट यहाँ आने से परहेज करते हें | यदि सड़कों और रेल की बेहतर व्यवस्था हो हो जाए तो यहाँ देशी टूरिस्टों के साथ विदेशी टूरिस्टों की भी संख्या बढ जायेगी | 

08 जनवरी, 2012

खबर दर खबर_ काली लड़कियां से कैसे कराएं नृत्य

  काली लड़कियां से  कैसे कराएं नृत्य
 खजुराहो में नस्ल भेद   का अनोखा मामला सामने आया है | यहाँ काले-गोरे का भेद करके मुंबई से बुलाए गए लोक नृत्य कलाकारों को भगा दिया गया । यहां के कंदारिया शिल्पग्राम में दिन-रात रिहर्सल करने के बाद कलाकारों में से लड़कियों के काले होने का आरोप लगाया गया। परेशान कलाकारों ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
ये कलाकार  लोकनृत्य के लिए किए गए अनुबंध के अनुसार कंदरिया शिल्पग्राम में आए थे। पर इ यहां पर उनके साथ काले-गोरे का भेद करते हुए उन्हें सुबह ४ बजे ही निकाल दिया गया था।  कंदरिया शिल्पग्राम के डांस प्रोग्राम के मैनेजर ई. डिमेलो ने नृत्य के लिए ६ लड़के और ६ लडकियां बुलाई थीं। इस पर वे लोग आ गए और रिहर्सल भी किया। इसके बाद कहने लगे कि अब उन्हें ६ लड़की और ४ लड़के चाहिए हैं। इसके साथ ही एक लड़की को काली लड़की कहकर वापस भेजने के लिए कहा। इस पर पूरे ग्रुप ने ही काम करने से मना कर दिया तो मैनेजर डिमेलो ने उन लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। 
हालांकि मामला पुलिस थाने तक पहुँच गया पर समरथ को नहीं दोष गुसाईं की युक्ति ही यहाँ चरितार्थ होती दिखती है | कंदरिया शिल्प ग्राम का यह कोई पहला मामला नहीं है | इसके पहले राजनगर के एस .डी.एम. ने मनोरंजन कर चोरी के मामले की जांच की थी वह भी दबा दी गई |
नए साल का जश्न :विदेशी महिला को छेड़ा
  फ्रांस से भारत घूमने आई २१ वर्षीय सारामार जोक विगत ३१ दिसंबर को खजुराहो के प्रमोद पैलेस होटल में जश्न मनाने के लिए अपने भारतीय पुरुष मित्र के साथ पहुंची थी। यहां जब नए वर्ष का जश्न मनाया जा रहा था, तभी होटल मालिक प्रणवप्रताप सिंह चंदेल अपने साथियों बजरुद्दीन पुत्र जलालुद्दीन एवं सलमान पुत्र रहमान के साथ नशे में झूमते हुए पहुंचे और विदेशी पर्यटक सारा के मित्र लकी पुत्र रवींद्र सिंह के साथ गाली-गलौज करते हुए झूमाझपटी करने लगे तो फ्रांस की युवती सारा ने इसका विरोध किया। जिस पर उससे पैसों की मांग करते हुए अश्लील हरकतें शुरू कर दी गईं। इस आशय का आरोप लगाते हुए सारा ने खजुराहो थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा कि आरोपियों ने उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर खजुराहो थाना पुलिस ने बीती ३ जनवरी की रात आरोपियों पर धारा ३५४, ३२७, ३४ आईपीसी के तहत मामला पंजीबद्ध कर आरोपियों को अलसुबह गिरफ्तार कर लिया। पर शाम को जब राजनगर कोर्ट में मामला पहुंचा तो सब कुछ बदल गया | फ्रास की लड़की ने एक हलफ नामा दे दिया की हमने जिन लोगों को देखा था वे ये लोग नहीं थे लिहाजा तीनो ही आरोपी जमानत पर छुट गए | हालांकि इसके पीछे की कहानी पैसों से लें दें से जुडी बताऊ जा रही है |

प्रवचनों से सुधार 
छतरपुर पुलिस को सुधरने  के लिए डीआईजी. वेद प्रकाश शर्मा इन दिनों योग और प्रवचनों का सहारा ले रहे हें |छतरपुर पुलिस लाइन का पुलिस हाल इन दिनों धर्म और अध्यात्म  का केंद्र बना हुआ है | हालांकि लोग उन्हे योग गुरु बाबा रामदेव का शिष्य मानते हें | पुलिस के अधिकारी कहते की यह सब उन्ही की माया है | पहले उन्होने  नशा मुक्ति शिविर लगाया था जिसमे भी कई प्रवचन हुए | अभी हाल ही में   गुजरात में एक आश्रम संचालित करने वाले स्वामी धर्मबंधु महाराज को पुलिस लाइन में आमंत्रित किया गया |  उन्होने पुलिसकर्मियों को ज्ञान दिया की  समाज के प्रति जिम्मेदार हों , समाज का विश्वास हासिल करे , जनता भी सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस पर विश्वास करे , मन पर नियंत्रण रखें , भय, द्वेष, घृणा और छुआछूत से दूर रहें ,|
                              पुलिस को सुधारने के लिए डी.आई.जी. साहब तो तरह तरह के जतन कर रहे हें किन्तु क्या करें कुछ अधिकारियों की आदतें जाती ही नहीं हें | वे तो उन लोगों को भी नशे का आदि बनाने में जुटे हें जो पहले पिटे भी नहीं थे | एसे ही एक अधिकारी को पिवाक्कड़ बनाने के लिय बाकायदा थानों के प्राभारियों को आदेश भी दिया गया है | वे भी अपने अधिकारी के आदेश को भला कैसे टाल सकते हें | इस लिए वे हर हफ्ते ढाई -ढाई  हजार की चार  बोतलें  ग्वालियर से मंगवाते हें |
टी.आई. की  अवैध वसूली
डी.आई.जी. साहब तो प्रवचनों से पुलिस को सुधारने में जुटे हें पर पुलिस है की सुधरती ही नहीं है | एसा ही एक नजारा जिले के हरपालपुर  थाने में देखने को मिला | यहाँ  पदस्थ टीआई और यहां के आरक्षकों के बीच शक्कर से लदी पिकअप को पकडऩे और टीआई द्वारा उन्हें छुड़ाने के प्रयास करने को लेकर बुधवार की रात को दोनों पक्षों के बीच जमकर विवाद हुआ। रात में पुलिस अधीक्षक ने इन आरक्षकों को सस्पेंड कर दिया |
 थाने में पदस्थ आरक्षक बृजेंद्र यादव, प्रमोद शर्मा, प्रवीण त्रिपाठी और सैनिक चंद्रभान  को गश्त कर रहे थे , इसी दौरान  चैकिंग करते हुए पिकअप (यूपी 95 बी 1045) को पकड़ा |,  पिकअप और शक्कर के कागजात मांगने पर गाड़ी चला रहे ड्राइवर जितेंद्र सिंह ने  टीआई या फिर पिक्की सेठ से बात करने के लिए आरक्षकों से कहा,| लेकिन आरक्षकों ने यह गाड़ी थाने में रखवा दी। रात करीब साढ़े 12 बजे की इस घटना के बाद सभी आरक्षक गाड़ी की चाबी और गाड़ी में सवार ड्राइवर सहित तीनों लोगों को थाने में पदस्थ हेड कांस्टेबल लक्ष्मन दाहिया को सुपुर्द करके फिर से गश्ती में निकल गए। और इसकी जानकारी एस.डी.एम., ए.एस.पी.,सी.एस.पी. को एस.पी.को भी फोन लगाया पर हमेशा की तरह उन्होने फोन नहीं उठाया | इसी बीच टीआई हारुन अली को इस मामले की जानकारी लगी। उन्होंने हेड कांस्टेबल  दाहिया से गाड़ी के मामले की जानकारी मांगी और इसे पकडऩे वाले आरक्षकों को अपने निवास पर बुलाया। इन आरक्षकों के अनुसार जैसे ही वे टीआई निवास पर पहुंचे तो टीआई श्री अली ने गाली-गलौज करना शुरु कर दिया और चुपचाप गाड़ी की चाबी वापस करने के लिए कहा, पर आरक्षकों ने बिना किसी कार्रवाई के गाड़ी नहीं छोडऩे की बात कही |

आरक्षक पर मामला दर्ज
टीआई हारुन अली पर वाहनों से वसूली करने और इसका विरोध करने आदि के कारण सस्पेंड हुए तीन आरक्षकों में से एक पर थाने में आपराधिक प्रकरण भी दर्ज किया गया है। इन आरक्षकों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरु होगी। टीआई हारुन अली द्वारा आरक्षक प्रवीण त्रिपाठी पर लगाए गए रोजनामचा लेकर भागने के आरोप पर उसके खिलाफ आईपीसी की धारा ४०६ (अमानत में ख्यानत) का मामला दर्ज किया गया है। इसकी जांच करने के लिए सिविल लाइन टीआई केएस ठाकुर को अधिकृत किया गया है।
अन्याय करना और अन्याय सहना बराबर का पाप डी.आई.जी. के प्रवचनों का असर टी.आई.,एस.पी.,ए.एस.पी.  पर दिखे या ना दिखे पर पुलिस के आरक्षकों पर दिखने लगा है | प्रवचनों का ही असर था की इन आरक्षकों ने सही कर्म के रास्ते को चुना | पर सही कर्म का उन्हे एसा फल मिला जिसकी उन्होने कल्पना भी  नहीं की थी | उनका मकसद साफ़ था  की हरपालपुर थाने में की जा रही टी. आई. की लूट पाट को उजागर करना था |उन्होने किया भी यही पर वे समय के उस चक्र को नहीं पहचान नहीं पाए | जिसमे उन्हे यह देखना आवश्यक था की  इस गेंग का सरदार कितना नेक नियत और ईमानदार है | दूसरों की आँख से देखने वाले सरदार से न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती |

मुआवजे पर बवाल 

मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री अपने को किसान का बेटा कहते हें किसानो के हित की बात कहते हें पर जब किसानो पर विपत्ति आती है तो उसे सुनना भी जरुरी नहीं समझते |
बुंदेलखंड विशेष पैकेज के तहत स्वीकृत बरूआ नाला बांध के डूब क्षेत्र में आ रही जमीन के काबिज किसानों को उचित मुआवजा नहीं दिया जा रह है।प्रशासन के  मनमाने  सर्वे ,  किसानों की जमीन पर जबरिया कब्जे को लेकर हैरान परेशान किसान आन्दोलन को मजबूर है | पूर्व में हुए आंदोलन के समय  प्रशासन ने किसानो को न्याय का भरोषा दिलाया था |पर  आश्वासन पर कोई कार्रवाई होने से पहले ही जमीन अधिग्रहण शुरू कर दिया गया।मजबूरन किसान   इसके विरोध में 2 जनवरीं से   प्रस्तावित बांध स्थल से समीप पनयाराखेरा पर दोबारा  अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन पर बैठ गए। | शनिवार को इस आंदोलन  में  बड़ी संख्या में महिलाओं ने अनशन किया और अपनी मांगो के समर्थन में नारेबाजी की।
अहं का  अहंकार 
जिंदगी से जूझती रही महिला 

पन्ना के जिला अस्पताल में प्रसव के लिए आई  महिला को लेकर अस्पताल के सिविल सर्जन एक सीनियर डॉक्टर के विवाद हो गया।हंगामे के पीछे  पद और प्रतिष्ठा का संघर्ष देखने को मिला जिसके चलते  गर्भवती की जान पर बन आई। निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. एजी विन्चुरकर, वर्तमान सीएस डॉ. राजेश श्रीवास्तव से सीनियर हैं। डॉ. विन्चुरकर के अनुसार वह सीनियर हैं। अब एक सीनियर डॉक्टर अपने जूनियर की बात कैसे माने, इसी पर इतना विवाद बढ़ा कि पूरे अस्पताल में हंगामा मच गया। डॉ. विन्चुरकर ने सीएस पर राजनेताओं से मिलकर उन्हें नीचा दिखाने के  आरोप भ  लगाए । वे  अपनी पत्नी के साथ कोतवाली में  शिकायती पत्र थाना प्रभारी को दे आये । डॉ. राजेश श्रीवास्तव सी.एस. के द्वारा भी एफआईआर दर्ज करवाई गई है, जिसे कोतवाली पुलिस ने धारा २९४, ५०६ के तहत मामला दर्ज कर विवेचना में लिया।
प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला कमलाबाई निवासी ग्राम शिवराजपुरा को अस्पताल में भर्ती कर सीनियर डॉ. मीना नामदेव ने जांच की और सिविल सर्जन डॉ. राजेश श्रीवास्तव को रिपोर्ट दी। इस पर डॉ. श्रीवास्तव ने निश्चेतना विशेषज्ञ से बेहोशी का इंजेक्शन देने को कहा था |
 डॉ. एजी विंचुरकर ने  नाड़ी धीरे चलने और खून की कमी बताकर  कमला देवी के अटेंडर से खून की व्यवस्था करने को कहा| इस  पर सीएस ने  डॉक्टर को अपने चेंबर में बुलाकर जानकारी ली| जहाँ  दोनों में  विवाद हुआ विवाद के बाद  ओटी से गर्भवती महिला कमलाबाई को सतना के लिए रेफर कर दिया गया।
अब इसे क्या कहा जाए जब पडे लिखे वे  लोग जिन से आम जन अपनी जान की दुआ मांगते हें वे ही सड़क छाप लड़ाई लडने लगें तो बाकी से क्या उम्मीद की जा सकती है | 


कलेक्टर की कृपा
छतरपुर जिले के कलेक्टर राहुल जैन इन दिनों महाबलियों पर मेहरबान हें और कमजोरों से खफा | बड़ों का तो वे कुछ बिगड़ नहीं पाते अलबत्ता कमजोरों पर अपना रोब ग़ालिब करते हें| परिवार नियोजन का लक्ष्य पूरा न करने पर कलेक्टर ने बड़ामलहरा ब्लाक के रानीताल के एमपीडब्ल्यू रामलाल अहिरवार का निलंबित कर दिया। 

इसी प्रकार उर्मिला गोस्वामी और महेंद्र चौरसिया की 7 दिन की वेतन काटने के निर्देश दिए। बकस्वाहा ब्लाक में केएस परिहार, डीके विश्वास और विमला यादव की दो वेतन वृद्धि रोकने के निर्देश कलेक्टर ने दिए।

त्लवकुशनगर में परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत किए जा रहे नसबंदी ऑपरेशन कार्यक्रम की कलेक्टर राहुल जैन ने समीक्षा करते हुए लापरवाह 14 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का 7 दिन से 14 दिन तक की वेतन काटने के निर्देश दिए। इसके साथ ही 7 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को शोकाज नोटिस जारी करने को कहा है। उन्होंने 27 जनवरी तक 80 फीसदी लक्ष्य पूरा करने के भी निर्देश दिए।
कुशवाहा के कुश से भयभीत गडकरी नहीं मिले प्रेस से 

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी उत्तर प्रदेश चुनाव के सिलसिले में गुरुवार को खजुराहो एयरपोर्ट पर आए। उनके साथ मप्र की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी थी। । दोपहर 3 बजे वे हैलीकॉप्टर से उप्र के मऊरानीपुर भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में आमसभा करने पहुंचे। 
इसके बाद वहां से वापस शाम 6 बजे वे खजुराहो आए। वापस आकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने भाजपा के नेताओं से मुलाकात की। प्रेस से वे बाबू लाल कुशवाह के भय से नहीं मिले | बाबू के कारण बी.जे.पी. मुश्किलों में फस गई है |
ईई भोपाल अटैच
छतरपुर सिंहपुर बैराज सिंचाई परियोजना के ईई वीएस ओबेराय को मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया ने भोपाल कार्यालय अटैच कर दिया है।  ।  इस परियोजना के तहत उत्तर प्रदेश के चार गांवों की जमीन भी डूब क्षेत्र में आती है। इस जमीन अब तक अधिग्रहण नहीं हो सका है। ईई ओबराय अधिग्रहण की प्रगति के संबंध में संतोषजनक जानकारी नहीं दे पाए। इस मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया ने उन्हें तत्काल प्रभाव से भोपाल कार्यालय अटैच कर दिया।
Oरवीन्द्र व्यास 

03 अक्टूबर, 2011

कुबेर का कुआँ




कुआँ  (कूप) /  लोगों की प्यास  बुझाने वाले कुआँ की कहानी भी कितनी अजीब है  | पहले कुआँ खुदवाकर लोग पुण्य कमाते थे | राजा अपनी प्रजा के लिए कुँए खुदवाते थे , ताकि उसकी प्रजा प्यासी ना रहे | लोग जब घर से निकलते थे तो अपने सामान के साथ लोटा ,डोरिया साथ रखते थे ताकि किसी कुँए पर अपनी प्यास बुझा सकें | दुनिया में कुआँ के महत्त्व का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है  की कुँए को लेकर कई तरह की कहावतें समाज में प्रचलित हें | 
बुंदेलखंड में एक इलाका है नोगांव यहाँ अंग्रेजों का पोलिटिकल एजेंट रहता था , उसने भी इस इलाके में कई कुँए बनवाये | 
समय बदला देश आजाद हो गया जनसेवक का तमगा लगा कर लोग देश चलाने लगे | पर उनका व्यवहार क्रूर राजा की तरह हो गया ठीक वेसे ही जैसे अंग्रेजो और लुटेरे मुगलों का रहा | दान धर्म से इन्हे भला क्या वास्ता ये तो स्वयं को भगवान् मानने लगे | इनकी दिलचस्पी पानी वाले कुआँ से ज्यादा तेल वाले कुँए के लिए हो गई | जनता जनार्दन की प्यास बुझाने के लिए इन्होने धरती के सीने पर अनगिनत छेद करवा दिए| बापू का नाम ले-ले कर गाँव में पंचायतें बनवा दी | पंचायतों को पंच  परमेश्वर के हवाले कर दिया | इन पर्मेश्वारों ने भी अपना  आदर्श जनसेवकों को मान लिया | जिन कुओं के खुदवाने से  पुण्य मिलता था ,ये वे कुँए ही डकारने लगे |
पिछले दिनों पन्ना में एक जनसेवक के भाई के द्वारा सात कुँए डकारने का मामला अभी निपटा भी नहीं था , की 
छतरपुर  जिले की काबर ग्राम पंचायत का कुआं का मामला सामने आ गया |  गाँव वालों के लिए यह कुआँ  रहस्यमय हो गया है | १९८३ -८४ में बना यह कुआँ अब तक बन रहा है | दरअसल यह कुआँ सरपंचों के लिए किसी कुबेर के खजाने से कम नहीं है |
१९८३-८४ में जब यह गाँव सीलोन पंचायत में आता था तब सरपंच परम लाल मिश्रा ने इसे १५ हजार की लागत से बनवाया था | 
१९९५- यह  गाँव एक अलग पंचायत हो गया , गाँव के सरपंच बने बालकिशन गौड़  जो २००४ तक रहे | इस दौरान इस कुँए के निर्माण पर मूलभूत और जे आर.वाई.योजना की राशि का ८५ हजार रुपये खर्चा दिखाया गया | 
२००७ में  यहाँ की सरपंच बनी कट्टु बाई अहिरवार  ,इसी योजना के तहत इसमे ४० हजार की राशि खर्च दिखाई गई 
२०१० में अब यहाँ के सरपंच बने हें हरिशंकर पटेल , उन्होने अब इसे नरेगा के तहत बनाने का फैसला किया है , इसके लिए उन्होने ३लाख ६ हजार का प्रस्ताव किया था | उनके प्रस्ताव को तकनिकी स्वीकृति  एस.ड़ी.ओ. पटेरिया ने दे दी है  | 
 जब हम इस गाँव में पहुंचे तो एक अजब नजारा देखने को मिला | बने बनाये कुँए को तोड़ा गया , उसमे लगी ईंटें बाहर निकाल ली गई | कुँए को चीपों से ढक दिया गया | 
अब सरपंच जी और एस.डी.ओ. और सचिव महोदय इस बने बनाये कुँए के नाम पर सरकार को ३लाख का छुना लगायेंगे | 
एसा नहीं की यह मामला जिले के मुखिया की जानकारी में ना हो , मुखिया जी को भी पता है किन्तु क्या करें वे भी जनसेवक के भय से भयभीत हें | आखिर पहली बार मुखिया बने हें कहीं मुखिया गिरी ना चली जाए |

21 सितंबर, 2011

चीन की दादागिरी पर भारत का दमदार जबाब

चीन की दादागिरी पर भारत का दमदार जबाब 
रवीन्द्र व्यास 
भारत ने काफी समय बाद कुटनेतिक तरीके से अपने पडोसी चीन को उसकी तस्वीर दिखाई है | भारत ने वियतनाम  के साथ तेल खोज के करार पर काम करना शुरू किया है | वह भी उस इलाके में जिस पर  चीन अपना दावा जताता है | तेल और प्राक्रतिक गेस का  यह  भण्डार दरअसल वियतनाम का इलाका है | तेल के पीछे चीन हर हाल में इस पर अपना कब्जा ज़माना चाहता है |
 दरअसल पिछले कुछ समय से  चीन ने भारत की घेरा बंदी शुरू की है , कूटनैतिक और सामरिक रण निति के तहत उसने  पहले पाकिस्तान को बल प्रदान किया ,  परमाणु  बम्ब बनाने में उसकी मदद की , यहाँ तक की उसका परमाणु परीक्षण भी अपने यहाँ करवाया | इसके पाक अधिकृत काश्मीर जो भारत का अभिन्न अंग है में सड़क ,रेल मार्ग और बाँध का निर्माण शुरू किया | जब की यह इलाका पाक गैर कानूनी तरीके से कब्जाए है | और एसे इलाके में किसी तीसरे देस जेसे चीन द्वारा कुछ भी करना अंतरास्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है | पाक के बाद चीन ने भारत के सबसे करीबी नेपाल में घुश पैठ की , वहाँ  आज के हालात में चीन का सबसे ज्यादा दखल माना जाता है | इसके बाद चीन ने श्री लंका को भी अपने  कुटनेतिक जाल लपेटा | दूसरी तरफ वह भारत की भूमि गाहे बगाहे अपना दावा ठोकता रहता है , कभी सिक्किम ,अरुणाचल प्रदेश ,तो कभी लेह लद्दाख तो कभी काश्मीर पर |  यहाँ के लोगों को  वह नत्थी बीजा देकर भारत को हमेशा से चिडाता आ रहा है | भारत की सीमा घुस कर उसके सैनिक अपनी नापाक हरकतें करने से भी बाज नहीं आते | हद तो तब हो गई थी जब उसने सिक्किम में देश के प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह के जाने पर ही आपत्ति की थी | 
भारत की तेल कम्पनी ओ.एन.जी.सी. ने  वियतनाम की  पेट्रो वियतनाम के साथ एक करार किया था | इस अनुबंध के अनुसार वियतनाम के समुद्र तट पर पेट्रोल और गैस  निकालने की योजना है | इस योजना पर दोनों देशों ने बड़ा निवेश किया है । चीन  इसे दक्षिण चीन सागर का हिसा बताते हुए  इस पर अपना हक़ जताता है | उसने इस पर आपत्ति भी जताई थी |  भारत ने उसके इस विरोध को दरकिनार करते हुए साफ़ तौर पर कह दिया की वह पी.ओ.के. से दूर रहे |
दक्ष्णि  चीन सागर तेल और गैस का प्रमुख्य गढ़ माना जाता है |इस इलाके को लेकर चीन और वियतनाम के मध्य विवाद काफी समय से चला आ रहा है |१९८२ के संयुक्त राष्ट्र समझौते के तहत इस इलाके के दो तेल क्षेत्रों पर  वियतनाम का अधिकार माना गया है | भारत इन्ही क्षेत्रों में तेल खोज अभियान में वियतनाम के साथ जुटा है | जब की चीन को तो इस इलाके से जहाज़ों की आवाजाही पर भी आपत्ति है | पिछले महीने चीनी नौसेना ने भारतीय जहाज को रोकने का दुसाहस भी किया था |चीन के इस दादागिरी पूर्ण रुख को लेकर आशियान देश भी काफी नाराज हें | 
हालांकि चीन के अलावा इस इलाके पर मलेसिया , ताइवान ,फिलिपिन्स और वियतनाम भी अपना दावा करते हें |
 विश्व का हर सम्रध देश हर हाल में घटते तेल भंडारों को लेकर अपनी रण निति के तहत चल रहा है | हर देश चाहता है की उसका ऊर्जा के सबसे बडे स्रोत पर कब्जा हो | विश्व में अब तक अधिकाँश युद्ध सिर्फ तेल के लिए ही हुए हें |  आने वाले दिनों में जैसी की चीन की मीडिया ने चेतावनी दी है की इसको लेकर युद्ध भी हो सकता है | इस चेतावनी को हल्के में नहीं लेना चाहिए  क्योंकि चीन हर कीमत पर यहाँ से भारत को दूर भगाना चाहेगा  जिसके परिणाम खतारनाक होंगे , क्योंकि कोई भी लोकतांत्रिक सरकार अपनी जनता की अजर में दब्बू का तमगा नहीं लेना चाहती | और यदि इसको लेकर युद्ध होता है तो यह युद्ध सिर्फ चीन भारत तक सिमित नहीं रहेगा बल्की इसमें दुनिया के कई देश शामिल हो जायेंगे ,|
चीन की हरकतों को और अमेरिका की रिपोर्ट को यदि देखा जाये तो कई तथ्य उजागर होते हें | पेंटागन की रिपोर्ट में काफी पहले इस बात का खुलासा किया था की चीन भारत की सीमा पर आधुनिक मिसाइलें तैनात कर रहा है | इसके अलावा चीन बड़ी तादाद में पाक को हथियार भी दे रहा है | मतलब साफ़ है की भारत की बढती शक्ति को वह कुचलने पर आमादा है | भारत पर दबाव बनाने के लिए वह हिंद माहा सागर में भी अपनी गतिविधियाँ बड़ा सकता है | 
इन हालातों में भारत को अपना कूटनैतिक अभियान जारी रखना जरुरी माना जा रहा है , हालांकि यह मुददा २४ से २६ सितम्बर की भारत चीन वार्ता में छाया रहेगा , जब मोंटेक सिंह चीन जायेंगे |

18 सितंबर, 2011

SUn Tempal of Bundelkhand_बुंदेलखंड के सूर्य मंदिर

बुंदेलखंड के सूर्य मंदिर
रवीन्द्र व्यास 
बुंदेलखंड इलाके में सृष्टी के देवता सूर्य के पूजन के अनेकों दुर्लभ प्रमाण मिलते हें | जो यह बताते हें की यहाँ के लोग अनादि काल  से सूर्य की पूजा करते आ रहे हें | और यही वह इलाका है जहाँ ज्योतिषाचार्य  वराहमिहिर ने  विश्व प्रसिद्द सूर्य सिद्धांत की रचना की थी  | भविष्य पुराण की माने तो कालपी के निकट यमुना के तट भगवान् श्री कृष्ण के पुत्र साम्ब ने सूर्य उपासना करके कुष्ट रोग से मुक्ति पाई थी |
 वैदिक काल से ही भारत में सूर्योपासना का प्रचलन रहा है.पहले यह सूर्योपासना मंत्रों से होती थी.बाद में मूर्ति पूजा का प्रचलन हुआ तो सूर्य मन्दिरों का निर्माण हुआ..अनेक पुराणों में यह लेख भी मिलता है,कि ऋषि दुर्वासा के शाप से कुष्ठ रोग ग्रस्त श्री कृष्ण पुत्र साम्ब ने सूर्य की आराधना कर इस भयंकर रोग से मुक्ति पायी थी.प्राचीन काल में भगवान सूर्य के अनेक मन्दिर भारत में बने हुए थे.उनमे आज तो कुछ विश्व प्रसिद्ध हैं देश में बने लगभग १४० सूर्य मंदिरों में यदि किसी इलाके में ये सवाधिक हें तो वह है बुंदेलखंड |.वैदिक साहित्य में ही नही आयुर्वेद,ज्योतिष,हस्तरेखा शास्त्रों में सूर्य का महत्व प्रतिपादित किया गया है
देश में सूर्य  मंदिरों का निर्माण अल्प संख्या में हुआ है | १९८४ इ.तक देश में मात्र १४० सूर्य मंदिर के प्रमाण मिलते हें |  पर बुंदेलखंड में सूर्य मंदिर की संख्या सर्वाधिक है | 
इस हिसाब से देखा जाय तो बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जिले में ९ ,छतरपुर जिले में पाँच, दतिया जिले में ३, सागर ,भिंड ,झाँसी और हमीरपुर  में२- २,पन्ना  नरसिंह पुर,दमोह,गुना, मुरेना ,बांदा,और जिला जालोन में एक -एक सूर्य मंदिर और विग्रह है  | शिवपुरी में ४,और ललितपुर में ७ मंदिरों और विग्रहों  का उल्लेख मिलता है |  इनमे टीकमगढ़ के मड्खेरा के और खजुराहो के  सूर्य मंदिर   को पुरातात्विक द्रष्टि से सर्वोत्तम माना जाता है | वहीँ दतिया के  बाला जी सूर्य मंदिर का धार्मिक द्रष्टि से महत्त्व है |
पहुज नदी के तट उन्नाव कस्बा में सूर्य देव का बाला जी मंदिर है | कहते हें की एक टीले की खुदाई करने पर ब्राह्मण बालक को ६ इंच व्यास का सूर्य यंत्र मिला था , इस चक्र के चारों ओर २१ त्रिभुज हें जो सूर्य के २१ मुखों के प्रतिक हें |जिसे एक छोटा चबूतरा पर स्थापित किया गया था | उस समय झांसी नरेश नारू शंकर कुष्ट रोग से पीड़ित थे , उन्होने यहाँ आकर प्रार्थना की , सूर्य देव की कृपा से वे निरोगी हो गए | उन्होने ही यहाँ मंदिर निर्माण शुरू कराया , तब दतिया के राजा ने  उनसे कार्य बंद कराने का निवेदन किया और स्वयं मंदिर का निर्माण कराया | यहाँ हर रवि वार को मेला सा लगता है | लोक मान्यता है की यहाँ से कोई खाली हाथ नहीं जाता है | उसकी मनोती पूर्ण अवश्य होती है | 
छतरपुर जिले के मऊ सहानिया  सूर्य भगवान् का छोटा सा मंदिर है , कहते हें की यहाँ शादी के बाद यहाँ के लोग आशीर्वाद लेने आते हें | 
कालपी (उ.प्र.)  यमुना नदी के तट पर  काल्प्रियानाथ मंदिर है | भविष्य पुराण के अनुसार भगवान् कृष्ण के पुत्र  साम्ब ने यही सूर्य उपासना की थी , ज्योतिषाचार्य  वराहमिहिर ने यहीं विश्व प्रसिद्द सूर्य सिद्धांत का प्रति पादन किया था |

सूर्य ,चन्द्र ,भूमि ,जल,वायु ,अग्नि  आदि ये पांच तत्व  सृष्टी के मूल कारक माने जाते हें | सिन्धु घाटी की सभ्यता की खुदाई में भी सूर्य पूजा के प्रमाण मिले हें | 
.वैदिक काल में आर्य सूर्य को ही सारे जगत का कर्ता धर्ता मानते थे.|.ऋग्वेद में  देवताओं कें सूर्य का महत्वपूर्ण स्थान है.\सूर्योपनिषद की श्रुति के अनुसार संपूर्ण जगत की सृष्टि तथा उसका पालन सूर्य ही करते है.सूर्य ही संपूर्ण जगत की अंतरात्मा हैं|

18 अगस्त, 2011

अन्ना प्रकरण / जन से बड़ी नहीं हो सकती कोई संस्था


रवीन्द्र व्यास 
इन दिनों देश में जिस की सरकार है देखा जाये तो वह दोहरे मुखोटे वाली सरकार है | जिसका दिखाने का मुखोटा अलग है और करने का अलग | जिसे  लोकतांत्रिक व्यवस्था में यकीन करने वाली नहीं बल्की राजतांत्रिक व्यवस्था वाली सरकार कहा जा सकता  है | इसी लिए उसे लोक से और लोक आंदोलनों से अपने सिंहासन  पर कोई असर समझ नहीं आता | उसे अंग्रेजी हुकूमत की तरह इस तरह के जन आंदोलनों को कुचलने में ही आनंद आता है | पर इस बार उसका दाव उलटा पड़ गया , आजादी के  अहिंसक आन्दोलन की तर्ज पर शुरू हुए अन्ना के इस आन्दोलन ने सरकार की नीव हिलाकर रख दी |
रामदेव के आन्दोलन को कुचलने के बाद सत्ता के मद में चूर हो गई है  सरकार | यही कारण है की सरकार और कांग्रेस के परम ज्ञानी सलाहकारों ने जिन्हे आम जन से कभी कोई सरोकार ही नहीं रहा , ने अपनी ज्ञान की गठरी खोली और ऐसी -ऐसी नायब सलाह दी और दे रहे हें की सरकार की हालत देखते ही बनती है | जिसका परिणाम ये हुआ की देश की जनता ने देखा की ये कैसी सरकार है जो सामने -सामने कहती कुछ है और करती कुछ है | और बेशर्म इतनी की उसे अपने इस दोहरे चरित्र पर कोई शर्म भी नहीं है |
अन्ना हजारे ने जब तपती दोपहर में जंतर -मंतर पर  जन लोकपाल के लिए अनशन किया तो सरकार की नींद उडी , उसके मंत्रियों ने वायदा किया की लोकपाल बिल संसद में रखा जाएगा | जिसमे जनता के लोगों को भी रखा जाएगा | इस मसले को लेकर कई दौर की बातचीत तब तक ठीक ठाक चलती रही जब तक सरकार ने रामदेव के आन्दोलन को कुचल नहीं दिया |  इसके बाद सरकार के मंत्री और प्रवक्ता तो मानो अपने को सुपर पावर समझने लगे | सत्ता बल के  मद में चूर होकर इन लोगों ने दिखावटी लोकपाल बिल संसद में रखा जिसे स्टेंडिंग कमेटी  को सोंपा गया है ,| इस कागजी लोकपाल के विरोध में जब अन्ना ने आमरण अनशन की घोषणा की तो सरकार के कपिल सिब्बल ,पी.चिदम्बरम ,जैसे  इन्ही ज्ञानी सलाहकारों ने फिर सलाह दे डाली   |
सरकार के मंत्रियों और कांग्रेस के ज्ञानियों की सलाह कितनी बेहतर रही होगी ये सब देश की जनता अब देख रही है | लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों के विरोध के अधिकार पर अंग्रेजों की तरह पाबंदी लगा दी , | अन्ना हजारे के प्रति अपमानजनक आरोप लगाये , हद तो तब हो गई जब उन्हे उनके ही घर से गिरफ्तार कर लिया गया | इसके बाद सरकार को शायद ये उम्मीद थी की जन मानस उग्र हो जाएगा और हम उस पर अपनी खाकी वर्दी वाली फोज से हमला कर नेस्तनाबूद कर देंगे | पर अन्ना के सन्देश को लोगों ने स्मरण रक्खा और अहिंसात्मक तरीके से सड़कों पर आ गए | सारे देश के लोग सड़कों पर , अन्ना के लिए लोग तिहाड़ जेल के बाहर बैठे ,हजारों  की संख्या में लोग इंडिया गेट पर जुटे | पर कहीं हिंसा का रत्ती मात्र नजारा देखने को नहीं मिला | 
ये सब देख कर हैरान सरकार के मुखिया और उसके संचालन कर्ताओं ने  इस आन्दोलन के पीछे अमेरिका का हाथ बताने से भी परहेज नहीं किया | शायद उन्हे लगा होगा की आर.एस.एस. का हाथ कहना लोगों को हजम नहीं होगा  | सब ओर से हारकर सरकार ने बुधवार की रात  अन्ना को रामलीला मैदान में १५  दिनों की अनुमति दी है | एक बच्चे ने सवाल किया की अंकल हमे अब तक ये समझ नहीं आ रहा की सरकार संसद में कहती है की हम भ्रष्टाचार के विरोध में हें , फिर उसने अन्ना की बात क्यों नहीं मानी , क्या अन्ना ने भ्रष्टाचार के दायरे में सब को लाने की बात कह कर कुछ गलत कर दिया था ? जिसके कारण उन्हे पकड़ लिया  गया | हमने उसी बालक से पूंछ लिया की बेटा तुम्ही बताओ  की तुम्हे गलत कौन लगता है , हमे तो इसमे सरकार बेवकूफ लगती है | 
लोकपाल बिल को लेकर सियासत भी केसे -कैसे रंग दिखाती है , | जो राजनैतिक दल इस मसले पर गोलमोल जबाब दे रहे थे वे भी  भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लोगों के जन आक्रोश को देख कर सरकार पर हमला करने से नहीं चूके | जन दबाव ने ये साबित कर दिया है की कोई भी सत्ता जन मानस से ऊपर नहीं हो सकता \

Political_bangal _election_बंगाल का फैसला: सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, राजनीतिक चेतावनी भी

  बंगाल का फैसला: सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं , राजनीतिक चेतावनी भी रवीन्द्र व्यास  पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों ने भारतीय राजनीति को एक ब...