बौद्धिक सम्पदा दिवस पर बुंदेलखंड की तीन लोकसभा क्षेत्र का भविष्य होगा तय
रवीन्द्र व्यास
बुंदेलखंड के सागर संभाग की तीन लोकसभा क्षेत्रों में शुक्रवार 26 अप्रैल को अपने क्षेत्र और देश के भविष्य चुनने का मतदान करना है | यह वह महत्वपूर्ण दिन है जब दुनिया के लोग इस दिन को विश्व बौद्धिक सम्पदा दिवस के रूप में मना रहे होंगे | दरअसल देश दुनिया के लोग जिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं वे बहुआयामी और जटिल हैं, | बौद्धिक संपदा किसी भी देश की वह कुंजी है जो उस देश की रचनात्मकता को एक नई दिशा देती है, यह नई दिशा ही उस देश और दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने के लिए काम करती है | इस शुभ दिन पर जब मतदान होगा तो बुंदेलखंड के खजुराहो , टीकमगढ़ और दमोह लोकसभा क्षेत्र में एक सुखद परिणाम की हम आशा कर सकते हैं |
बुंदेलखंड के टीकमगढ़ ,दमोह और खजुराहो के 57 लाख से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे | इन तीनो में सर्वाधिक चर्चित लोकसभा क्षेत्र 8 खजुराहो में सर्वधिक मतदाता हैं | यहां से बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है यहाँ उनका मुकाबला ईडी गठबंधन के सेवा निवृत्त आई ए एस आर बी प्रजापति से है | वही टीकमगढ़ में केंद्रीय मंत्री डॉ वीरेंद्र खटीक और कांग्रेस के पंकज अहिरवार से है | वहीँ दमोह लोकसभा क्षेत्र में दो पुराने मित्र एक दूसरे के प्रतिद्वंदी बने हैं , यहाँ बीजेपी ने राहुल लोधी को तो कांग्रेस ने तरबर सिंह लोधी को प्रत्यासी बनाया है |
बहुचर्चित खजुराहो लोकसभा क्षेत्र :
यहाँ बीजेपी के वी डी शर्मा के विरुद्ध कांग्रेस ने पिछली लगातार पराजय से शायद हताश होकर एक तरह से पलायन कर लिया था | यह सीट सपा को सौंप दी थी , सपा प्रत्यासी ने ऐसा नामांकन दाखिल किया कि वह निरस्त हो गया | बाद में कांग्रेस और सपा ने मिलकर आल इंडिया फारवर्ड ब्लॉक के प्रत्याशी आर बी प्रजापति को समर्थन देकर ईडी गठबंधन का प्रत्याशी बनाया | हालांकि प्रजापति ने २०२३ के विधानसभा चुनाव में चंदला सीट से राष्ट्रीय भारत पार्टी से चुनाव लड़ा था , जिस चुनाव में उन्हें मात्र ६९८ मत से संतोष करना पड़ा था | ईडी गठबंधन की चुनावी रणनीति यहाँ हिन्दुओं को विभाजित कर पिछड़ा दलित समीकरण बनाकर चुनाव जितने की थी , वह कितनी सफल हो पाती है इसका भविष्य २६ अप्रेल को तय हो जाएगा | हालांकि बीजेपी के वी डी शर्मा सामने कमजोर प्रत्याशी होने के बावजूद चुनावी दौर में सक्रीय हैं |
दमोह : मित्र बने प्रतिद्वंद्वी
1989 के चुनाव से बीजेपी ने यहाँ जीत का जो सिलसिला शुरू किया अब तक बरकरार है | 2014 और 2019 में यहां से बीजेपी के प्रहलाद पटेल ने कांग्रेस के प्रताप सिंह को बड़े अंतर से हराया था | केंद्र में मंत्री रहे प्रह्लाद पटेल ने २०२३ में विधान सभा चुनाव में प्रत्याशी बने और और चुनाव जीते | उनके स्थान पर बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से आये राहुल लोधी को प्रत्यासी बनाया तो कांग्रेस में उनके मुकाबले के लिए तरबर सिंह लोधी को प्रत्यासी बना दिया | दोनों मित्रो के मध्य दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है | इस क्षेत्र के १९ लाख १९ हजार ५१० मतदात यहां चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे १४ प्रत्यशियों का भविष्य २६ अप्रेल को तय करेंगे |
टीकमगढ़ लोकसभा क्षेत्र :
२००८ में परिसीमन के बाद एक बार फिर टीकमगढ़ (सु) लोकसभा क्षेत्र अस्तित्व में आ गया | 2009 के लोकसभा चुनाव से लेकर 2019 तक के चुनाव में सागर निवासी बीजेपी प्रत्यासी डॉ वीरेंद्र खटीक लगातार चुनाव जीतते रहे , पार्टी ने २०२४ के चुनाव के लिए भी उन्हें ही प्रत्यासी बनाया है | कांग्रेस ने उनके मुकाबले के लिए पंकज अहिरवार को प्रत्याशी बनाया है |
बुंदेलखंड का एकलौता संसदीय क्षेत्र है जहाँ की आठ में से तीन विधानसभा क्षेत्र टीकमगढ़ ,खरगापुर और पृथ्वीपुर में कांग्रेस का कब्जा है जबकि पांच पर बीजेपी का कब्ज़ा है | जिन सीटों पर कांग्रेस जीती भी है उसमे से कोई भी ऐसी नहीं है जो जहाँ उसने पांच फीसदी से ज्यादा मतों के अंतर से बीजेपी को शिकस्त दी हो |
चुनावी नीरसता
लोकसभा का यह संभवतः पहला चुनाव है जहां चुनावी नीरसता देखने को मिल रही है मानो लोगों में उत्साह ना के बराबर हो | प्रासनिक तंत्र की सक्रीयता नेताओं से ज्यादा देखने को मिली | बड़े नेतों की सभा के नाम पर चुनाव घोषणा के पहले खजुराहो में अमित शाह की , घोषणा के बाद दमोह में १९ अप्रेल को पी एम् मोदी की दमोह में और २४ अप्रेल को सागर में सभा हुई | खजुराहो क्षेत्र के कल्दा मेंछत्तीसगढ़ के सीएम की सभा , २३ अप्रेल को बीजेपी के राष्ट्रिय अध्यक्ष जेपी नड्डा की सभा टीकमगढ़ में हुई | मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जरूर सागर दमोह टीकमगढ़ और छतरपुर जिले में सभाएं और रोड शो किये | प्रतिद्वंदी दाल की और से किसी बड़े नेता की सभा नहीं हुई | दमोह में जरूर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने सभा की थी |
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