01 अप्रैल, 2024

el_Khj_खजुराहो सीट पर संघर्ष जीत के अंतर का




 खजुराहो सीट पर  जीत का अंतर बढ़ेगा या घटेगा  

रवीन्द्र व्यास 

 प्रदेश की चर्चित लोकसभा सीट  खजुराहो  सहित बुंदेलखंड की लगभग सभी सीटों पर कांग्रेस ने  बीजेपी    को वाक ओवर सा दे दिया है | प्रत्याशियों को लेकर पार्टी  में ही अशंतोष देखने को मिल रहा है | नतीजतन लोग या तो पार्टी छोड़ रहे हैं या फिर घर बैठ कर चुनावी संघर्ष का आनंद  ले रहे हैं | खजुराहो लोकसभा सीट बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा पूर्ण सीटों में से एक है | यहाँ से बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा सांसद हैं और पार्टी के प्रत्यासी भी हैं | उनसे मुकाबले के लिए कांग्रेस ने यह सीट गठबंधन के तहत सपा को सौंप दी |  बसपा ने कमलेश पटेल को प्रत्याशी बनाया है | सपा ने यहां से 30 मार्च को  मनोज यादव को   प्रत्यासी बनाया था अप्रेल फूल के दिन उनको प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया उनके स्थान पर निवाड़ी की पूर्व विधायक मीरा यादव को प्रत्याशी बनाया गया है | 


                                    दिल्ली ,भोपाल और लखनऊ में बैठ  कर सियासी आकलन करने वाले  राजनैतिक पंडित  दावा कर रहे हैं कि खजुराहो लोकसभा सीट पर मुकाबला दिलचस्प होगा |  पर जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है | सपा और कांग्रेस के गठबंधन के सियासी समीकरण बताते हैं कि   २०१९ के चुनाव में  बीजेपी के वी.डी. शर्मा को  ८१११३५ (64. ४६ %) मत मिले थे , |  कांग्रेस की महारानी कविता सिंह को ३१८७५३ (२५. ३३ % ) मत और  सपा को ४००७७ ( 3. १८ )फीसदी मत मिले थे |  कांग्रेस और  सपा  के मत  प्रतिशत को भी अगर जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा  28. 51  फीसदी पर पहुंचता है |  छतरपुर , पन्ना और कटनी जिले तक फैली इस लोकसभा सीट के आठों विधानसभा क्षेत्र पर बीजेपी का कब्जा है |







 समाजवादी पार्टी ने ३० मार्च को  मनोज यादव को खजुराहो संसदीय सीट से मैदान में उतारा था | अप्रेल फूल के दिन सपा को अपनी गलती का कुछ एहसास हुआ और उनके स्थान पर निवाड़ी की पूर्व विधायक मीरा यादव  उनके स्थान पर सपा का खजुराहो से प्रत्याशी बनाया गया | दरअसल मनोज के राजनैतिक सफर में यह दूसरी बार हुआ है |   २०२३ के विधानसभा चुनाव में छतरपुर जिले की बिजावर विधानसभा से सपा से मनोज यादव को टिकट दिया गया था | बाद में उनके स्थान पर रेखा यादव को प्रत्याशी बनाया गया था |  रेखा यादव ने ें एन  वक्त पर अपना नाम वापस ले लिया था | मनोज जी का बुंदेलखंड अंचल से भले ही कोई जुड़ाव ना हो पर वे  उत्तर प्रदेश के मूल निवासी होने के नाते अखिलेश यादव के नजदीकी माने जाते हैं |  भोपाल में रहकर उन्होंने यादव समाज के लिए कार्य किया है | जिसके चलते  उनकी बीजेपी और कांग्रेस के सजातीय  बन्धु  बांधवों से निकटता बताई जाती है | इसी को देखते हुए सपा ने उन्हें अब प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है | 


उत्तर प्रदेश  की   मीरा यादव दीपक  यादव  ने २००८ में एम् पी के निवाड़ी से चुनाव लड़ा और बीजेपी के अनिल जैन को लगभग १५ हजार मत से पराजित किया था | टीकमगढ़ संसदीय क्षेत्र में आने वाली निवाड़ी विधानसभा क्षेत्र से एक बार विधायक बनने के बाद वे लगातार चुनाव हार रही हैं | कांग्रेस का साथ मिलने से उन्हें खजुराहो संसदीय क्षेत्र में अपने लिए समीकरण अनकूल लग रहे हैं | वहीँ कांग्रेस को उम्मीद है कि मीरा यादव को प्रत्यासी बनाने से टीकमगढ़ क्षेत्र में उन्हें लाभ होगा | 

 इस चुनाव में सपा और कांग्रेस का जातीय जनगरणा का फार्मूला इस्तेमाल कर चुनाव में पिछड़ा और अगड़ा का  सियासी दांव खेला जायगा | इसके अलावा बेरोजगारी ,महंगाई ,भ्रष्टाचार और खतरे में लोकतंत्र की दुहाई दी जायेगी |   यह कितना असरकारक होगा इसकी बानगी जनता प्रदेश के विधान सभा चुनाव में देख चुकी है | पर इतना तो तय है कि कुर्सी के लिए समाज में नफरत का जहर घोलने में कोई पीछे नहीं रहेगा | 

 कांग्रेस में पनपता असंतोष 

  आजादी के बाद से  अब तक हुए  लोकसभा के हर चुनाव में  यहां से कांग्रेस प्रत्याशी चुनावी मैदान में रहा | यह पहला मौका है जब कांग्रेस ने यह सीट सपा को दे दी है | मोदी जी को हारने और वोटों के ध्रुवीकरण को रोकने के लिए कांग्रेस की यह राजनैतिक रणनीति हो सकती है | परन्तु क्या यह रणनीति  हर जगह उपयुक्त मानी जा सकती है? यह बड़ा सवाल है और यही सब बात कांग्रेस के दिग्गज नेता कर रहे हैं | कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के इन कदमो से हताश हो कर लोग पार्टी छोड़ बीजेपी का दामन थाम रहे हैं |   हाल ही में २८ मार्च को अपने हजारों समर्थकों के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक   ने  अपने ही  कांग्रेस  से नाता तोड़ कर बीजेपी का दामन थाम लिया | खजुराहो ही नहीं टीकमगढ़ संसदीय क्षेत्र में उनका अच्छा खाशा प्रभाव माना जाता है |  

 सियासत के इन समीकरणों को देख कर कहा जाने लगा है कि बीजेपी  की हर बूथ पर जित की योजना कामयाब हो जायेगी जिसके चलते जीत  का अंतर बढ़ सकता है | 


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