24 अप्रैल, 2024

ELECTION_2024_ बौद्धिक सम्पदा दिवस पर बुंदेलखंड की तीन लोकसभा क्षेत्र का भविष्य होगा तय

  बौद्धिक सम्पदा दिवस पर बुंदेलखंड की तीन लोकसभा क्षेत्र का भविष्य होगा तय 

रवीन्द्र व्यास  

बुंदेलखंड के सागर संभाग की तीन लोकसभा क्षेत्रों में शुक्रवार  26 अप्रैल को   अपने क्षेत्र और देश के भविष्य चुनने का मतदान करना है | यह वह महत्वपूर्ण दिन है जब दुनिया के लोग इस दिन को  विश्व बौद्धिक सम्पदा दिवस के रूप में मना रहे होंगे |  दरअसल देश दुनिया के लोग   जिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं वे बहुआयामी और जटिल हैं, |  बौद्धिक संपदा किसी भी देश की वह कुंजी है जो उस देश की   रचनात्मकता को एक नई दिशा  देती है, यह नई दिशा ही उस देश और दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने के लिए काम करती है | इस शुभ दिन पर जब मतदान होगा  तो बुंदेलखंड के खजुराहो , टीकमगढ़ और दमोह लोकसभा क्षेत्र में एक सुखद परिणाम की हम आशा कर सकते हैं |
 बुंदेलखंड के टीकमगढ़ ,दमोह और खजुराहो  के 57 लाख से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे | इन तीनो में सर्वाधिक चर्चित लोकसभा क्षेत्र 8 खजुराहो में सर्वधिक मतदाता हैं |  यहां से बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है यहाँ उनका मुकाबला ईडी गठबंधन के सेवा निवृत्त आई ए एस आर बी प्रजापति से है  | वही टीकमगढ़ में केंद्रीय मंत्री डॉ वीरेंद्र खटीक और कांग्रेस  के पंकज अहिरवार से है | वहीँ दमोह लोकसभा क्षेत्र में दो पुराने मित्र एक दूसरे के प्रतिद्वंदी बने हैं , यहाँ बीजेपी ने राहुल लोधी को तो कांग्रेस ने तरबर सिंह लोधी को प्रत्यासी बनाया है | 

बहुचर्चित खजुराहो लोकसभा क्षेत्र :
 यहाँ बीजेपी के वी डी शर्मा  के  विरुद्ध कांग्रेस ने  पिछली लगातार पराजय से शायद हताश होकर एक तरह से पलायन कर लिया था | यह सीट  सपा को सौंप दी थी , सपा प्रत्यासी ने ऐसा नामांकन दाखिल किया कि वह निरस्त हो गया | बाद में कांग्रेस और सपा ने मिलकर   आल इंडिया फारवर्ड ब्लॉक के प्रत्याशी आर बी प्रजापति को समर्थन देकर ईडी गठबंधन का प्रत्याशी बनाया |  हालांकि प्रजापति ने २०२३ के विधानसभा चुनाव में चंदला सीट से राष्ट्रीय भारत पार्टी  से चुनाव लड़ा था , जिस चुनाव में उन्हें मात्र ६९८ मत से संतोष करना पड़ा था | ईडी गठबंधन की चुनावी रणनीति यहाँ  हिन्दुओं को विभाजित कर पिछड़ा दलित  समीकरण बनाकर चुनाव जितने की थी  , वह कितनी सफल हो पाती है इसका भविष्य २६ अप्रेल को तय हो जाएगा | हालांकि बीजेपी के वी डी  शर्मा सामने कमजोर प्रत्याशी होने के बावजूद चुनावी दौर में सक्रीय हैं | 

दमोह : मित्र बने प्रतिद्वंद्वी 

 1989 के चुनाव से बीजेपी ने यहाँ जीत का जो सिलसिला शुरू किया अब तक बरकरार है  2014 और 2019 में यहां से बीजेपी के  प्रहलाद  पटेल ने कांग्रेस के प्रताप सिंह को  बड़े अंतर से हराया था | केंद्र में मंत्री रहे प्रह्लाद पटेल ने २०२३ में विधान सभा चुनाव  में प्रत्याशी बने और और चुनाव जीते | उनके स्थान पर बीजेपी ने  लोकसभा चुनाव में  कांग्रेस से आये राहुल लोधी को प्रत्यासी बनाया तो कांग्रेस में उनके मुकाबले के लिए तरबर सिंह लोधी को प्रत्यासी बना दिया | दोनों मित्रो के मध्य दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है | इस क्षेत्र के १९ लाख १९ हजार ५१० मतदात यहां चुनावी मैदान में किस्मत आजमा  रहे १४ प्रत्यशियों का भविष्य २६ अप्रेल को तय करेंगे | 


टीकमगढ़ लोकसभा क्षेत्र : 

२००८ में परिसीमन के बाद  एक बार फिर टीकमगढ़ (सु) लोकसभा क्षेत्र अस्तित्व में आ गया | 2009 के लोकसभा चुनाव से लेकर 2019 तक के चुनाव में  सागर निवासी बीजेपी प्रत्यासी डॉ वीरेंद्र खटीक  लगातार चुनाव जीतते रहे पार्टी ने २०२४ के चुनाव के लिए  भी उन्हें ही प्रत्यासी बनाया है | कांग्रेस ने उनके मुकाबले के लिए पंकज अहिरवार को प्रत्याशी बनाया है | 

बुंदेलखंड का एकलौता  संसदीय  क्षेत्र है जहाँ  की आठ में से तीन विधानसभा क्षेत्र टीकमगढ़ ,खरगापुर और पृथ्वीपुर में कांग्रेस का कब्जा है जबकि पांच पर बीजेपी का कब्ज़ा है जिन सीटों पर कांग्रेस जीती भी है उसमे से कोई भी ऐसी नहीं है जो जहाँ उसने पांच फीसदी से ज्यादा  मतों के अंतर से बीजेपी को शिकस्त  दी हो  | 

चुनावी नीरसता 

लोकसभा का यह   संभवतः पहला चुनाव है जहां  चुनावी नीरसता देखने को मिल रही है मानो लोगों में उत्साह ना के बराबर हो | प्रासनिक तंत्र की  सक्रीयता नेताओं से ज्यादा देखने को मिली | बड़े नेतों की सभा के नाम पर चुनाव घोषणा के पहले खजुराहो में अमित शाह की , घोषणा के बाद दमोह में १९ अप्रेल को पी एम् मोदी की दमोह में और २४ अप्रेल को सागर में सभा हुई | खजुराहो क्षेत्र के कल्दा मेंछत्तीसगढ़ के सीएम की सभा , २३ अप्रेल को बीजेपी के राष्ट्रिय अध्यक्ष जेपी नड्डा की सभा टीकमगढ़  में  हुई | मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जरूर सागर दमोह टीकमगढ़ और छतरपुर जिले में सभाएं और रोड शो किये | प्रतिद्वंदी दाल की और से किसी बड़े नेता की सभा नहीं हुई | दमोह में जरूर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने सभा की थी |    


13 अप्रैल, 2024

EL_Loksabha_Damohजातीय समीकरणों का इलाका दमोह लोकसभा क्षेत्र अतीत के दोस्त आज के प्रतिद्वंदी





रवीन्द्र व्यास 
 
जीत के लिए  तरसती कांग्रेस 
 दो पूर्व विधायक लोकसभा चुनाव में आमने सामने 
 कांग्रेस से बने थे विधायक अब एक बीजेपी से तो एक कांग्रेस से 
किन्नर अखाड़े की  पीठाधीश्वर दुर्गा मौसी भी चुनावी  मैदान में 


तीन जिलों में फैले  दमोह लोकसभा क्षेत्र बुंदेलखंड के उन क्षेत्रों में से एक है जिसका अपना एक ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व है | बुंदेलखंड का होने के बावजूद यह इलाका बुंदेला शासकों के आधीन ज्यादा समय तक नहीं रहा | दमोह जिले का स्कन्द पुराण में भी  वर्णन मिलता है | कहते हैं कि स्वर्णमुखी (सुनार ) और व्याघ्रमा (व्यारमा ) नदियों के संगम पर  उदक्कल ( उड़ला )नामक स्थान पर भगवान् श्री कृष्ण के दीक्षा गुरु उपमन्यु के पिता  व्याघ्रपाद  ऋषि का  आश्रम था | आल्हा  के रचयिता जगनिक का जन्म स्थल भी दमोह जिले के सकौर गाँव  (12 वी सदी में ) था | आदमकाल से वर्तमान काल के समृद्ध इतिहास को समेटे दमोह जिला सियासत के बनते बिगड़ते समीकरणों का केंद्र है | 

दमोह लोकसभा सीट जीतने के लिए 35 वर्ष से तरस रही कांग्रेस   

 1962 में अस्तित्व में आई दमोह संसदीय सीट शुरुआत में  में  अनुसूचित जाति के आरक्षित की गई थी |  देश में यह कांग्रेस का दौर था और यहां से  कांग्रेस की सहोद्रा बाई राय  सांसद चुनी गई थी  |  1967 में यह   सीट सामान्य हो गई कांग्रेस के मणिभाई  जे पटेल सांसद चुने गए |  1971  का लोकसभा चुनाव यहाँ दिलचस्प रहा इस चुनाव में कांग्रेस ने पूर्व राष्ट्रपति वी वी गिरी के पुत्र वराहगिरी शंकर गिरी  को  प्रत्याशी बनाया वे एक दिन सिर्फ चुनाव प्रचार के लिए आये और चुनाव जीत  कर चले गए स्थानीय लोग बताते हैं कि  चुनाव प्रचार भी उन्होंने उड़न खटोले से किया था ,और ऊपर से पर्चे फेके थे |  आपातकाल के बाद  1977 में हुए  चुनाव में   जनता पार्टी के नरेंद्र सिंह जू  देव  सांसद चुने गए |  1980 में  कांग्रेस के प्रभुनारायण  और   1984  में कांग्रेस के ही डालचंद जैन यहां से सांसद चुने गए | १९८४ कांग्रेस की जीत का अंतिम चुनाव था , इस चुनाव में कांग्रेस को 51. 41 फीसदी और बीजेपी के नरेंद्र सिंह को 40 . 06 फीसदी वोट मिले थे | 

 1989 के चुनाव से बीजेपी ने यहाँ जीत का जो सिलसिला शुरू किया अब तक बरकरार है |  1989 में बीजेपी  के लोकेंद्र सिंह(56. २९%) ने कांग्रेस के डालचंद्र जैन (३४.४९ %)को हराया था | 1991 में बीजेपी ने जातीय समीकरणों का गणित  साधना शुरू किया  और  रामकृष्ण कुसमरिया को प्रत्याशी बनाया | वे १९९१, १९९६ ,१९९८ ,और 1999 में यहां से चुनाव जीते | इन चार चुनावों में उन्हें औसतन ४६. फीसदी मत मिले | 2004 में बीजेपी ने चंद्रभान सिंह को प्रत्याशी बनाया उन्होंने 45. 98 फीसदी मत पाकर कांग्रेस के तिलक सिंह लोधी (29 . ९८%) को हराया | 2009 में बीजेपी के  शिवराज सिंह लोधी ने कांग्रेस के चंद्रभान भैया  को पराजित किया | असल में चंद्रभान जी टिकट ना मिलने से बीजेपी से नाराज हो गए थे और कांग्रेस के टिकट पर चुनावी मैदान में आ गये थे | 2014 और 2019 में यहां से बीजेपी के  प्रहलाद  पटेल ने कांग्रेस के प्रताप सिंह को  बड़े अंतर से हराया था | 
 
जीत के जतन                           

दमोह लोकसभा सीट को जीतने के लिए कांग्रेस ने  बंडा के पूर्व विधायक तरबर सिंह लोधी को प्रत्याशी बनाया है || यहां बीजेपी ने भी दमोह के पूर्व विधायक  राहुल भैया लोधी को प्रत्याशी बनाया है | दोनों ही माननीय २०१८ में कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए थे | सरकार बदली राहुल का दिल भी बदला और बीजेपी में आ गए , इसका उन्हें पुरस्कार भी मिला निगम के अध्यक्ष बन गए | उप चुनाव हुआ तो कांग्रेस के अजय टंडन से हार गए | बीजेपी ने उन्हें लोकसभा प्रत्याशी बनाया है , हालांकि इलाके में उनके प्रति लोगों की नारजगी कम नहीं  हुई है पर ये चुनाव मोदी के नाम पर लड़ा जा रहा है जिसका लाभ उन्हें मिल सकता है | 
 

 आठ विधानसभा क्षेत्रो वाले दमोह लोकसभा क्षेत्र में  सात विधान सभा क्षेत्रों में बीजेपी का कब्जा है तो मात्र छतरपुर जिले की बड़ामलहरा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस का कब्जा है | सागर जिले की   देवरी रहली,  बंडा , दमोह जिले की पथरियादमोहजबेरा,और  हटा पर बीजेपी का कब्जा है | दमोह लोकसभा क्षेत्र को लोधी बाहुल्य सीट मानकर यहां कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने ही लोधी बिरादरी के प्रत्याशी को मैदान में उतारा है |  जातीय समीकरणो में उलझे राजनैतिक दल यहां के सियासी समीकरणों  को  समझने में एक बड़ी चूक कर गए हैं | कांग्रेस के सामने एक अच्छा अवसर था जिसका वह प्रत्याशी चयन में लाभ लेने से चूक गई | 

तीन राहुल और दो तरबर चुनावी रण में 

 २६ अप्रैल को दूसरे चरण में होने वाले  चुनाव में यहां मतदान  होगा | नाम वापसी के बाद अब यहां १४ प्रत्याशी मैदान में रह गए हैं | जिनमे  बीएसपी  से इंजीनियर गोवर्धन राज ,भारत आदिवासी पार्टी से मनु सिंह मरावी ,गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से राजेश सिंह सोयाम भारतीय शक्ति चेतना पार्टी से भैया विजय पटेल , निर्दलीय प्रत्याशी के टूर पर कांग्रेस और बीजेपी प्रत्याशी के मिलते जुलते नाम वाले  तरवर सिंह लोधी ,और  राहुल भैया , राहुल भैया , दुर्गा मौसी  नीलेश सोनी नंदन कुमार अहिरवाल  राकेश कुमार अहिरवार ,  वेद राम कुर्मी चुनावी मैदान में हैं |

कटनी जिले की  जनपद सदस्य   किन्नर अखाड़े की  पीठाधीश्वर दुर्गा मौसी भी यहां  से निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं |   कटनी जिले  मुड़वारा तहसील के कनवारा गांव से सरपंच चुनी गई थी सात साल सरपंच भी रही |  इसके बाद  दुर्गा  मौसी  मुड़वारा के क्षेत्र क्रमांक 11 चाका से जनपद सदस्य का चुनाव जीता था।

2019 में प्रयागराज में कुंभ के दौरान उन्हें किन्नर अखाड़े का पीठाधीश्वर बनाया था। इसके बाद हरिद्वार में महामंडलेश्वर की घोषणा की गई। किन्नर अखाड़े को जूना अखाड़े ने अपना समर्थन देकर शामिल किया था। इसमें बग्गी पर सवार होकर पेशवाई धूमधाम से निकाली गई थी। अमृत स्नान कराया गया था।


जीते सांसद 

1962   सहोद्रा बाई राय         कांग्रेस

1967   मणिभाई जे पटेल      कांग्रेस

1971   वराहगिरी शंकर गिरी  कांग्रेस

1977   नरेंद्र सिंह यादवेंद्र सिंह         जनता पार्टी

1980  प्रभु नारायण रामधन    कांग्रेस

1984  डाल चंद जैन   कांग्रेस

1989  लोकेंद्र सिंह    बीजेपी

1991   रामकृष्ण कुसमरिया   बीजेपी

1996  रामकृष्ण कुसमरिया   बीजेपी

1998  रामकृष्ण कुसमरिया   बीजेपी

1999  रामकृष्ण कुसमरिया   बीजेपी

2004  चंद्रभान सिंह लोधी    बीजेपी

2009  शिवराज सिंह लोधी    बीजेपी

2014   प्रहलाद सिंह पटेल    बीजेपी

2019   प्रहलाद सिंह पटेल    बीजेपी


01 अप्रैल, 2024

el_Khj_खजुराहो सीट पर संघर्ष जीत के अंतर का




 खजुराहो सीट पर  जीत का अंतर बढ़ेगा या घटेगा  

रवीन्द्र व्यास 

 प्रदेश की चर्चित लोकसभा सीट  खजुराहो  सहित बुंदेलखंड की लगभग सभी सीटों पर कांग्रेस ने  बीजेपी    को वाक ओवर सा दे दिया है | प्रत्याशियों को लेकर पार्टी  में ही अशंतोष देखने को मिल रहा है | नतीजतन लोग या तो पार्टी छोड़ रहे हैं या फिर घर बैठ कर चुनावी संघर्ष का आनंद  ले रहे हैं | खजुराहो लोकसभा सीट बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा पूर्ण सीटों में से एक है | यहाँ से बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा सांसद हैं और पार्टी के प्रत्यासी भी हैं | उनसे मुकाबले के लिए कांग्रेस ने यह सीट गठबंधन के तहत सपा को सौंप दी |  बसपा ने कमलेश पटेल को प्रत्याशी बनाया है | सपा ने यहां से 30 मार्च को  मनोज यादव को   प्रत्यासी बनाया था अप्रेल फूल के दिन उनको प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया उनके स्थान पर निवाड़ी की पूर्व विधायक मीरा यादव को प्रत्याशी बनाया गया है | 


                                    दिल्ली ,भोपाल और लखनऊ में बैठ  कर सियासी आकलन करने वाले  राजनैतिक पंडित  दावा कर रहे हैं कि खजुराहो लोकसभा सीट पर मुकाबला दिलचस्प होगा |  पर जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है | सपा और कांग्रेस के गठबंधन के सियासी समीकरण बताते हैं कि   २०१९ के चुनाव में  बीजेपी के वी.डी. शर्मा को  ८१११३५ (64. ४६ %) मत मिले थे , |  कांग्रेस की महारानी कविता सिंह को ३१८७५३ (२५. ३३ % ) मत और  सपा को ४००७७ ( 3. १८ )फीसदी मत मिले थे |  कांग्रेस और  सपा  के मत  प्रतिशत को भी अगर जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा  28. 51  फीसदी पर पहुंचता है |  छतरपुर , पन्ना और कटनी जिले तक फैली इस लोकसभा सीट के आठों विधानसभा क्षेत्र पर बीजेपी का कब्जा है |







 समाजवादी पार्टी ने ३० मार्च को  मनोज यादव को खजुराहो संसदीय सीट से मैदान में उतारा था | अप्रेल फूल के दिन सपा को अपनी गलती का कुछ एहसास हुआ और उनके स्थान पर निवाड़ी की पूर्व विधायक मीरा यादव  उनके स्थान पर सपा का खजुराहो से प्रत्याशी बनाया गया | दरअसल मनोज के राजनैतिक सफर में यह दूसरी बार हुआ है |   २०२३ के विधानसभा चुनाव में छतरपुर जिले की बिजावर विधानसभा से सपा से मनोज यादव को टिकट दिया गया था | बाद में उनके स्थान पर रेखा यादव को प्रत्याशी बनाया गया था |  रेखा यादव ने ें एन  वक्त पर अपना नाम वापस ले लिया था | मनोज जी का बुंदेलखंड अंचल से भले ही कोई जुड़ाव ना हो पर वे  उत्तर प्रदेश के मूल निवासी होने के नाते अखिलेश यादव के नजदीकी माने जाते हैं |  भोपाल में रहकर उन्होंने यादव समाज के लिए कार्य किया है | जिसके चलते  उनकी बीजेपी और कांग्रेस के सजातीय  बन्धु  बांधवों से निकटता बताई जाती है | इसी को देखते हुए सपा ने उन्हें अब प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है | 


उत्तर प्रदेश  की   मीरा यादव दीपक  यादव  ने २००८ में एम् पी के निवाड़ी से चुनाव लड़ा और बीजेपी के अनिल जैन को लगभग १५ हजार मत से पराजित किया था | टीकमगढ़ संसदीय क्षेत्र में आने वाली निवाड़ी विधानसभा क्षेत्र से एक बार विधायक बनने के बाद वे लगातार चुनाव हार रही हैं | कांग्रेस का साथ मिलने से उन्हें खजुराहो संसदीय क्षेत्र में अपने लिए समीकरण अनकूल लग रहे हैं | वहीँ कांग्रेस को उम्मीद है कि मीरा यादव को प्रत्यासी बनाने से टीकमगढ़ क्षेत्र में उन्हें लाभ होगा | 

 इस चुनाव में सपा और कांग्रेस का जातीय जनगरणा का फार्मूला इस्तेमाल कर चुनाव में पिछड़ा और अगड़ा का  सियासी दांव खेला जायगा | इसके अलावा बेरोजगारी ,महंगाई ,भ्रष्टाचार और खतरे में लोकतंत्र की दुहाई दी जायेगी |   यह कितना असरकारक होगा इसकी बानगी जनता प्रदेश के विधान सभा चुनाव में देख चुकी है | पर इतना तो तय है कि कुर्सी के लिए समाज में नफरत का जहर घोलने में कोई पीछे नहीं रहेगा | 

 कांग्रेस में पनपता असंतोष 

  आजादी के बाद से  अब तक हुए  लोकसभा के हर चुनाव में  यहां से कांग्रेस प्रत्याशी चुनावी मैदान में रहा | यह पहला मौका है जब कांग्रेस ने यह सीट सपा को दे दी है | मोदी जी को हारने और वोटों के ध्रुवीकरण को रोकने के लिए कांग्रेस की यह राजनैतिक रणनीति हो सकती है | परन्तु क्या यह रणनीति  हर जगह उपयुक्त मानी जा सकती है? यह बड़ा सवाल है और यही सब बात कांग्रेस के दिग्गज नेता कर रहे हैं | कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के इन कदमो से हताश हो कर लोग पार्टी छोड़ बीजेपी का दामन थाम रहे हैं |   हाल ही में २८ मार्च को अपने हजारों समर्थकों के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक   ने  अपने ही  कांग्रेस  से नाता तोड़ कर बीजेपी का दामन थाम लिया | खजुराहो ही नहीं टीकमगढ़ संसदीय क्षेत्र में उनका अच्छा खाशा प्रभाव माना जाता है |  

 सियासत के इन समीकरणों को देख कर कहा जाने लगा है कि बीजेपी  की हर बूथ पर जित की योजना कामयाब हो जायेगी जिसके चलते जीत  का अंतर बढ़ सकता है | 


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