09 नवंबर, 2023

EL_Mahrajpur_2023_साइकिल की रफ्तार ने महाराजपुर में बिगाड़े समीकरण

 साइकिल की रफ्तार ने महाराजपुर में  बिगाड़े समीकरण 

रवीन्द्र व्यास 

 मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले  का   महराजपुर _48  विधान सभा क्षेत्र   पारंपरिक रूप से बीजेपी  का गढ़  माना जाता रहा है। 5 दशक तक अजा के लिए यह सीट सुरक्षित रही | यह बुंदेलखंड की  ऐसी  इकलौती  विधान सभा सीट है जहाँ से 1952 में भी जनसंघ के  प्रत्यासी नाथूराम अहिरवार चुनाव जीते थे |  1977  से अब तक हुए विधानसभा के  10  चुनाव में से 6  बार बीजेपी और 3  बार कांग्रेस और एक बार निर्दलीय  प्रत्यासी चुनाव जीता | परिसीमन के बाद यह क्षेत्र सामान्य हो गया,सामान्य सीट बनने के बाद हुए पहले चुनाव में यहां कांग्रेस से बगावत कर मानवेंद्र सिंह निर्दलीय रूप से विधायक चुने गए। उनके द्वारा शुरू की गई परम्परा अब तक जारी है,2023 के चुनाव में अब बीजेपी से खड़े हुऐ उनके पुत्र को और कांग्रेस विधायक नीरज दीक्षित को भी  बगावत का असर झेलने को मजबूर होना पड़ रहा है।

महाराजपुर विधानसभा क्षेत्र में 13 उम्मीदवार चुनावी रण में हैं जिनमे 8 विभिन्न पार्टियों से हैं तो वहीँ पांच निर्दलीय भी चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं |  यहाँ मुख्य मुकाबला  इंडियन नेशनल कांग्रेस के  नीरज दीक्षितभारतीय जनता पार्टी से कामाख्या प्रताप सिंह, और समाजवादी  पार्टी  के  अजय दौलत तिवारी, के मध्य माना  जा रहा है | जबकि बहुजन समाज पार्टी से इंजी. महेश चन्द्र कुशवाहा मुकाबले में आये प्रत्याशियों के समीकरण बनाने और बिगाड़ने में अहम भूमिका अदा करेंगे |  आम आदमी पार्टी से इंजी. के.आर. पटेल,आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) परसराम पालजन अधिकार पार्टी से गिरजा प्रसाद कुशवाहा  भागीदारी पार्टी से राकेश प्रजापतिनिर्दलीय सचिन चौरसिया,  पुष्पेन्द्र अग्रवाल, , पुरूषोत्तम नायक पुजारीरामपाल अहिरवार और  नृपत कुशवाह निर्दलीय प्रत्यासी के तौर  पर मैदान में हैं | इन प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला 235771 मतदाता १७ नवम्बर को कर देंगे | जिनमे 124088 पुरुष और 111676 महिला जबकि ७ अन्य मतदाता हैं | बीजेपी सरकार की लाड़ली बहना योजना के बाद हर प्रत्याशी का ध्यान महिला मतदाता पर कुछ ज्यादा है | 

 वर्तमान कांग्रेस  विधायक नीरज दीक्षित 2018 का चुनाव 14005 मत से बीजेपी के मानवेन्द्र सिंह से जीते थे | इस बार भी त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है | फर्क इतना है कि 2018 में त्रिकोणीय मुकाबले में  कांग्रेस के बागी राजेश मेहतों  बहुजन समाज पार्टी से मुख्य भूमिका में थे |  इस बार कांग्रेस   के अजय दौलत तिवारी ने समाजवादी पार्टी से प्रत्यासी बन कर कांग्रेस  और बीजेपी प्रत्यासी के सामने जीत पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है | सियासत के जानकारों का मानना है कि 2018 में कांग्रेस के बागी राजेश मेहतों गढ़ीमलहरा क्षेत्र के रहने वाले होने के कारण एवं चौरसिया समाज के कारण उन्होंने बीजेपी के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाईं थी | इस बार हालात विपरीत हैं जिस क्षेत्र से कांग्रेस के नीरज जीते थे ,इस बार उसमे बड़ी सेंध कांग्रेस के दौलत तिवारी लगा रहे हैं | 

क्यों नीरज से नाराज दौलत :

  अपनी नाराजगी का उन्होंने सार्वजनिक खुलाशा  सपा अध्यक्ष  अखिलेश यादव की सभा के दौरान किया | उन्होंने कहा कि  एक साल पहले क्षेत्रीय विधायक नीरज दीक्षित की  एक धोखेबाजी के कारण ही   इस चुनावी महाभारत का बीजारोपण हुआ  था। उन्होंने लोगों को बताया कि  कांग्रेस ने उन्हें नौगांव नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए अधिकृत प्रत्याशी बनाया थाहमारे पार्षद भी बहुमत से जीतकर आए थे फिर भी कांग्रेस विधायक नीरज दीक्षित ने भाजपा के लोगों से मिलकर नौगांव नगर पालिका का अध्यक्ष नहीं बनने दिया। जिस तरह कृष्ण ने पाण्डवों के लिए सिर्फ पांच गांव मांगे थे उसी तरह मैंने भी इनसे सिर्फ नौगांव नगर की सेवा मांगी थी लेकिन नीरज दीक्षित ने छलकपट दिखाकर मुझसे वह सेवा भी छीन ली तभी इस क्षेत्र की जनता ने तय कर लिया था कि अब याचना नहीं रण होगाजीवन जय या कि मरण होगा। आज क्षेत्र की जनता  ऐसे दुर्योधन को सबक सिखाना चाहती है। इसी मंच पर अखिलेश यादव ने कहा अजय दौलत तिवारी को जिस कांग्रेस ने धोखा दिया है उसी कांग्रेस ने हमें भी धोखा दिया है। हमें मिलकर इन धोखेबाजों को सबक सिखाना है। 

दरअसल देखा  जाए तो कांग्रेस नेता चाहे कितना भी ऊपर उठ जाए वह अपने ही लोगों से अपने को असुरक्षित मानता है | यही कारण है कि  किसी भी सार्वजनिक संस्था पर ऐसे लोगों को नहीं बैठने देना चाहता है जो भविष्य में उनके विकल्प बन जाएँ , ऐसे में वे अपनी ही पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करने से नहीं चूकते |      

 सपा का असर  

इस  विधान सभा क्षेत्र की अधिकाँश  सीमाएं उतर प्रदेश के जिलों से लगती हैं | कुछ गाँव तो ऐसे हैं जो उत्तर प्रदेश के गाँवों से सीधे मिलते हैं  | वहीँ उत्तर प्रदेश के कुछगाँवों का पोस्ट ऑफिस नौगांव के नाम से जाना जाता है | हरपालपुर ,नौगांव और गढ़ीमलहरा ऐसे इलाके हैं जहाँ उत्तरप्रदेश के कई लोग अपना व्यापारिक कारोबार करते हैं | इसके साथ ही  इस विधान सभा क्षेत्र में जिस वर्ग विशेष को टारगेट किया जा रहा है वह सपा के अंकुल  माना जा रहा है |  उत्तर प्रदेश से सटे इस इलाके में सपा 1998 से सक्रीय हुई है | 2008 में सपा को 8. 45 फीसदी 2013 में 7. 39 फीसदी मत मिले थे दोनों ही बार अंजुल सक्सेना प्रत्यासी थे | २०१८ में सपा ने प्रीतम यादव को प्रत्यासी बनाया था उन्हें मात्र 3.79 फीसदी मत ही मिले थे | 2023 में सपा ने ब्राम्हण बाहुल्य इस विधानसभा सीट पर ब्राम्हण प्रत्याशी उतारकर कांग्रेस के समीकरण बिगाड़े  हैं | 

विस क्षेत्र का इतिहास-

 विधानसभा क्षेत्र महराजपुर  कभी जिले की प्रमुख आर्थिक गतिविधियों का केंद्र  माना जाता रहा  है | महराजपुर जिसका नाम सुनते ही "पान" की चर्चा होने लगती है  |खनिज सम्पदा से भरपूर है , उद्योग के नाम पर यहां देश की सबसे पुरानी डिस्लरी आज भी संचालित है |  इसी विधान सभा क्षेत्र में  सैन्य छावनी भी है  | यहाँ के प्राचीन रेलवे स्टेशन हरपालपुर में कभी उद्योगिक गतिविधियां भी संचालित होती थी | यहाँ  बने तीन बाँध लहचूरा ,पहाड़ी बंधा और उर्मिल बाँध एक बड़े आकर्षण का केंद्र हैं |  इन सबके बावजूद यह इलाका अपने देशी पान उत्पादन के कारण देश भर में जाना जाता है |  इस विधान सभा क्षेत्र का नौगांव नगर अंग्रेजो के समय का पोलिटिकल एजेंट का केंद्र रहा | उस समय इसे एक विशिष्ट शैली में बसाया गया था , जो सर्वाधिक चौराहा वाले क्षेत्र में जाना जाता है | वर्तमान में हरपालपुर में उद्योग गतिविधयां और हाथ करधा उद्योग  सरकार की रीति नीति के कारण ठप्प  हैं | ये जरूर हरपालपुर अब जिले के सबसे बड़े अवैध आवसीय विद्यालय संचालित करने का केंद्र बन गया है | स्मार्ट सिटी के रूप में दशकों तक अपनी पहचान बनाने वाला नौगांव इन दिनों अवैध अतिक्रमण की चपेट में है, यहाँ बने इंजिनयरिंग कॉलेज में अधिकाँश फेकल्टी संचालित नहीं होती , | पान किसानो की दशा बदहाल है अब वे देशी पान की जगह कपूरी पान लगाने को मजबूर हो रहे हैं |  बने हुए बांधों का अधिकाँश पानी उत्तर प्रदेश चला जाता है |  

 1952 से  अस्तित्व में आई महराजपुर  विधानसभा सीट  बुंदेलखंड इलाके की ऐसी इकलौती सीट है जहाँ से  1952 में जनसंघ  के नाथूराम अहिरवार विधायक चुने गए थे |  पांच दशक तक यह विधान सभा क्षेत्र अजा के लिए सुरक्षित रहा | 1977  से अब तक हुए विधानसभा के  10  चुनाव में से 6  बार बीजेपी और 3  बार कांग्रेस और एक बार निर्दलीय  प्रत्यासी चुनाव जीता |   1977,1990 ,1993 ,1998 ,औऱ 2003 में  बीजेपी के राम दयाल अहिरवार चुनाव जीते |  

 यह  ऐसी विधान सभा सीट है जिसका राजनैतिक मिजाज शुरू से ही कोंग्रेसी विरोधी रहा है | 1977 के बाद  यहाँ से कांग्रेस जीत के लिए तरसती रही |   1977,1990 ,1993 ,1998 ,औऱ 2003 में  बीजेपी के राम दयाल अहिरवार  2013 में  मानवेन्द्र सिंह चुनाव जीते |  1980 ,1985 और 2018 में कांग्रेस  ,ने चुनाव जीता |  2008 में  परिसीमन के बाद यह विधान सभा क्षेत्र सामान्य हुआ था | 2008  में कांग्रेस ने अपने पूर्व मंत्री मानवेन्द्र सिंह  का टिकिट काट दिया था  | उन्होंने  बगावत कर निर्दलीय प्रत्यासी के तौर पर चुनाव जीता |  2018 में कांग्रेस ने सिंधिया खेमे के सबसे कम उम्र के  नीरज दीक्षित  को प्रत्यासी बनाया | । नीरज ने  2018 में  बीजेपी के विधायक  मानवेन्द्र सिंह को 14005 मतों के बड़े अंतर से हराया था | दरअसल इस विधान सभा के राजनैतिक मिजाज में एक बड़ा परिवर्तन परिसीमन के  बाद देखने को मिल रहा है | पांच दशक बाद जब सामान्य वर्ग के पार्टी कार्यकर्ताओं को मौका मिला तो वे इस अवसर का लाभ लेने से वंचित नहीं रहना चाहते हैं | नतीजतन कांग्रेस और बीजेपी दोनों में ही अंतरकलह जम कर देखने को मिलता है | वर्तमान विधायक नीरज दीक्षित के लोक व्यवहार से लोग संतुष्ट हैं  | पर विधायक के रूप में उनके द्वारा की जा रही पार्टी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की कीमत उन्हें चुनाव में चुकाना पढ़  सकती है | विधायक निधि के बंटन को लेकर ग्राम स्तर पर भी नाराजगी देखने को मिल रही है | 

 2008  में जब कांग्रेस ने अपने सशक्त  दावेदार और प्रदेश सरकार में मंत्री मानवेन्द्र सिंह को महराजपुर से टिकिट काट दिया |  दरअसल मानवेन्द्र सिंह के पूर्वज इसी क्षेत्र के आलीपुरा रियासत के राजा रहे |  अपने रियासती और राजनैतिक रसूख को साबित करने के लिए उन्होंने  निर्दलीय चुनाव लड़ा  | तमाम वोट कटवा नेताओं के खड़े होने के बाद वे 1391 मतों से ही बीजेपी   के गुड्डन  पाठक  को हरा पाए |  

 दूसरी बड़ी चुनावी उठा पटक 2013  के  चुनाव में देखने को मिली थी | जब मानवेन्द्र सिंह को  बीजेपी ने अपना प्रत्यासी बनाया था | इस चुनाव में बीजेपी के प्रमुख राकेश पाठक ने बगावत कर दी |   बीएसपी के टिकट पर  राकेश पाठक चुनावी रण में कूदे तो जरूर किन्तु  15427 मतो से पराजित हो गए  | मानवेन्द्र सिंह को बीजेपी से टिकिट दिए जाने पर पार्टी में  भारी विरोध भी देखने को मिला था | यह ऐसा चुनाव था जिसमे जितने और हारने वाले दोनों ने ही अपनी सम्पूर्ण शक्ति लगा दी थी | इस बार बीजेपी ने मानवेन्द्र सिंह (भंवर राजा ) के पुत्र कामख्या प्रताप सिंह को प्रत्यासी  बनाया है | जिसको लेकर भी पार्टी में अंतरकलह देखने को मिल रहा है , पर बीजेपी से ज्यादा अशंतोष कांग्रेस में देखने को मिल रहा है | 

        

 मुद्दे-

 महराजपुर  विधान सभा क्षेत्र मुख्यतः पान फसलों के उत्पादन के लिए जाना जाता है | देशी पान उत्पादन के सबसे बड़े  क्षेत्र में इसकी गिनती होती है |   यह इलाका आज भी  बुनियादी सुविधाओं का मोहताज है | स्वास्थ्य और शिक्षा, रोजगार ,बिजली  जैसी सुविधाओं के लिए भी इलाके के लोग परेशांन हैं | महराजपुर विधान सभा  क्षेत्र में तीन बड़े बाँध होने के बावजूद ग्रामीण इलाके जल समस्या से जूझ रहे हैं | आर्थिक पिछड़ापन , और तंत्र में बढ़ता भष्टाचार के साथ  कमर तोड़ महंगाई ने लोगों  को त्रस्त किया है |  सबसे बड़ी बात है कि लोगों का जनप्रतिधियों और प्रशासनिक तंत्र से विश्वास उठता जा  रहा है |  | 

विधायक 

1952 नाथूराम अहिरवार जनसंघ 
1967 लक्ष्मणदास अहिरवार कांग्रेस
1972 नाथूराम अहिरवार जनसंघ 

1977 रामदयाल अहिरवार जनतापार्टी 

1980 लक्ष्मणदास अहिरवार कांग्रेस 

1985 बाबू लाल अहिरवार कांग्रेस 

1990 रामदयाल अहिरवार भाजपा 

1993 रामदयाल अहिरवार भाजपा 

1998 रामदयाल अहिरवार भाजपा 

2003 रामदयाल अहिरवार भाजपा 

  महराजपुर_जनरल_48

2008 मानवेन्द्र सिंह निर्दलीय 

2013 मानवेंद्र सिंह भाजपा 

2018 नीरज दीक्षित कांग्रेस 

EL_BJP_ भाजपा कार्यकर्ता को अपने घर पर झंडा लगाने से कोई रोक नहीं सकता ::विष्णुदत्त शर्मा

 भाजपा कार्यकर्ता को अपने घर पर झंडा लगाने से कोई रोक नहीं सकता


भाजपा में प्रत्याशी निमित्त मात्रचुनाव लड़ते है बूथ कार्यकर्ता

बसपा नेता भाजपा में हुए शामिल

 विष्णुदत्त शर्मा

छतरपुर/ // 05/11/2023। भारतीय जनता पार्टी में केवल प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ता बल्कि उसके साथ बूथ का प्रत्येक कार्यकर्ता चुनाव लड़ता है। कार्यकर्ताओं के इसी समर्पण का परिणाम है कि ये संगठन विश्व का सबसे बड़ा कार्यकर्ताओं का संगठन कहा जाता है। भाजपा में प्रत्येक बूथ को मजबूत बनाकर हमारे कार्यकर्ताओं ने बूथ और पन्ना समिति को सशक्त तथा डिजिटल बनाने का काम किया है। चुनाव में कार्यकर्ताओं का उत्साह यह बता रहा है कि इस विधानसभा चुनाव में प्रत्येक बूथ पर भाजपा प्रचण्ड बहुमत से विजयी होकर जीत का नया इतिहास रचेगी। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्षसांसद श्री विष्णु दत्त शर्मा ने रविवार को छतरपुर जिले की राजनगर विधानसभा में कार्यकर्ता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कही। 

प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा  कार्यकर्ता सम्मेलन के पूर्व प्रातः  खजुराहो के वार्ड क्रमांक 10 स्थित बूथ अध्यक्ष  जगनंदन तिवारी के घर पहुंचकर भाजपा का झंडा लगाकर मेरा परिवार भाजपा परिवार अभियान का शुभारम्भ किया।
भाजपा सरकार की जनहितैषी योजनाएँ ही हमारी असली ताकत | 
प्रदेश अध्यक्ष श्री विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने गरीब कल्याण अन्न योजना को अगले वर्षों तक आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री जी के इस अभिनव निर्णय से देशभर के 80 करोड़ नागरिकजन लाभान्वित होंगे। भाजपा की डबल इंजन सरकार की जनहितैषी योजनाओं से प्रत्येक बूथ पर आमजनों को लाभान्वित करने के लिए भाजपा के बूथ कार्यकर्ता कटिबद्ध है। भाजपा सरकार की जनहितैषी योजनाएँ ही हमारी असली ताकत है।
मोदी जी के नेतृत्व में रामंदिर निर्माण की सैंकड़ों वर्षों की प्रतीक्षा समाप्त हुई

चंदला में विधानसभा के त्रिदेव एवं पंच परमेश्वर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सशक्त नेतृत्व का परिणाम है कि हमारा भारत न सिर्फ विकास पथ पर तेज गति से आगे बढ़ रहा है बल्कि देश की पुरातन संस्कृति और हमारे सनातन धर्म का भी अभ्युदय हो रहा है। हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है कि 22 जनवरी 2024 को हमारे आराध्य रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान होंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सैंकड़ों वर्षों से रामभक्तों की राममंदिर बनाने की प्रतीक्षा को समाप्त करते हुए भव्य श्री राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया है। श्री शर्मा ने कार्यकर्ताओं से आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक बूथ पर हर घर पहुंचकर भाजपा सरकार की जनहितैषी योजनाओं और नीतियों की जानकारी दें। पूर्ण विश्वास है कि आपके परिश्रम से भाजपा प्रचंड बहुमत से विजय होगी।
हमारा बूथ कार्यकर्ता सबसे महत्वपूर्णप्रधानमंत्रीराष्ट्रीय अध्यक्ष और गृहमंत्री करते है उनसे सीधा संवाद
प्रदेश अध्यक्ष श्री विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी में बूथ सबसे अहम इकाई होती है और बूथ अध्यक्ष सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति होता हैइस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कीभोपाल में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जेपी नड्डा जी बूथ कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करते है। उन्होंने कहा कि आधुनिक भारत के राजनीतिक चाणक्य कहे जाने वाले हमारे देश के गृह मंत्री श्री अमित शाह भी जब प्रदेश के 10 संभागों में प्रवास करते है तो शक्ति केंद्र प्रभारी और बूथ कार्यकर्ताओं से संवाद करते है। उन्होंने कहा कि चुनाव में भाजपा प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ता उसके साथ बूथ का प्रत्येक कार्यकर्ता चुनाव लड़ता है। राजनगर और चंदला में पार्टी के प्रत्याशी को भारी बहुमत से जीताने की अपील करते हुए प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि सभी एक जूटकर होकर कार्य करें एवं अपने-अपने स्तर पर अपने मोर्चा के कार्यकर्ताओं के साथ बूथ स्तर में पहुंचकर घर-घर जाकर शासन की योजनाएं बताएं। जनसम्पर्क दौरान सभी कार्यकर्ता भाजपा द्वारा किए गए विकास कार्य बताते हुए वंचित लोगों तक लाभ कैसे पहुंचे इसका प्रयास करें तभी हम छतरपुर जिले की हर विधानसभा के प्रत्येक बूथ पर भारी  बहुमत से जीतने में सफल होंगे।
प्रदेश अध्यक्ष ने बूथ अध्यक्ष के घर पार्टी का झंडा लगाकर किया मेरा परिवार-भाजपा परिवार अभियान का शुभारम्भ
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व खजुराहो लोकसभा क्षेत्र से सांसद श्री विष्णु दत्त शर्मा ने रविवार को चुनाव प्रचार की शुरुआत खजुराहो के प्रसिद्ध श्री मतंगेश्वर महादेव के दर्शन और पूजन के साथ की।  प्रदेश अध्यक्ष ने भगवान मतंगेश्वर से प्रदेशवासियों के सुख समृद्धि की कामना की। दर्शन के पश्चात वार्ड क्रमांक 10 स्थित बूथ अध्यक्ष श्री जगनंदन तिवारी के घर पहुंचकर पार्टी का झंडा लगाकर मेरा परिवार भाजपा परिवार अभियान का शुभारंभ किया। प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा ने बूथ अध्यक्ष के घर झंडा लगाकर कार्यकर्ता को सम्बोधित किया। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि हर कार्यकर्ता को अपने घर पर भाजपा का झंडा लगानेदीवार पर कमल का फूल बनाने एवं गले में  भाजपा का गमछा डालने का पूरा अधिकार हैइससे उसे कोई वंचित नहीं कर सकता और ना ही इसमें किसी भी तरह का कोई कानूनी उलझन होती है। उन्होंने कहा कि युवाओं की टोली अपने-अपने मोटरसाइकिल पर भाजपा का स्टीकर और झंडा लगाकर बूथ पर घूमकर पार्टी का पक्ष में वातावरण बनाएं।  
समर्थकों के साथ बसपा छोड़ भाजपा में शामिल हुए रामराजा पाठक
राजनगर में कार्यकर्त्ता सम्मलेन के दौरान भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री विष्णुदत्त शर्मा के समक्ष भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा से प्रभावित होकर बसपा नेता श्री रामराजा पाठक अपने 100 से अधिक समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हुए। प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा ने श्री पाठक और उनके समर्थकों को पार्टी का अंगवस्त्र पहनकर स्वागत किया। बसपा ने श्री रामराजा पाठक को राजनगर से अपना उम्मीदवार बनाया था। उम्मीदवार घोषित करने के पश्चात बीएसपी ने श्री पाठक का टिकट काट दिया था। श्री शर्मा ने श्री रामराजा पाठक का स्वागत करते हुए कहा कि भाजपा अन्य दलों से भिन्न है यहां पार्टी एक परिवार हैपरिवार के सदस्य के रूप में इसे मजबूत करने और विस्तार देने में आपकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।  

EL_2023_Dayri_सियासत के बदलते समीकरण रवीन्द्र व्यास

 बुंदेलखंड की डायरी 

सियासत के बदलते समीकरण 

रवीन्द्र व्यास 

 

बुंदेलखंड के २६ विधानसभा सीटों पर सियासत के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं बुंदेलखंड के सागर संभाग में बीजेपी और कांग्रेस  ने अपने प्रत्याशी चयन में  सियासी और जातीय समीकरणों  को साधने का प्रयास भी किया है इसके बावजूद भी ये दोनों ही दल कार्यकर्ताओं की बगावत और जातीय समीकरणों के असंतोष से जूझ रहे हैं  |  बीजेपी वोट बैंक का बड़ा आधार माने जाने वाले ओबीसी मतदाता के खिसकने से पार्टी  नेताओं में भी बेचैनी देखी जा रही है ऐसे दौर में गृह मंत्री अमित शाह का चुनाव जीतने  का मन्त्र कितना कारगर रहेगा यह चुनावी परिणाम ही तय करेंगे हाल ही में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चंदला की चुनावी सभा में कांग्रेस को धोखे बाज करार देकर सियासी सनसनी फैला दी 

                  

                  सागर संभाग की 26 विधानसभा सीटों में से सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं २०२३ के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही ओ बी सी के ८ प्रत्याशी ,ब्राह्मण वर्ग के प्रत्याशी उतारे हैं कांग्रेस ने ठाकुर वर्ग पर तो बीजेपी ने जैन वर्ग पर  कुछ ज्यादा भरोसा जताया है कांग्रेस ने ठाकुर  वर्ग से और जैन वर्ग से एक जबकि बीजेपी ने जैन वर्ग से तीन और ठाकुर वर्ग से  चार प्रत्याशी  मैदान में उतारे हैं चुनाव में महिला वर्ग की प्रत्याशियों को उतारने में भी कांग्रेस ने बाजी मारी है कांग्रेस ने पांच विधानसभा क्षेत्रों में महिला प्रत्याशी उतारी हैं तो बीजेपी ने सिर्फ दो विधानसभा क्षेत्र में महिला प्रत्याशी उतारे हैं संभाग की इन २६ विधानसभा सीटों में से अधिकांश पर अपनों ने ही प्रत्याशियों को बड़ी चुनौती दे डाली है |  

 

हिन्दू मतों का विभाजन करने में कांग्रेस कितनी सफल :: 

 

बुंदेलखंड की विधानसभा सीटों  में अधिकांश सीटों पर हार जीत का रास्ता चाहे जो भी  वर्ग तय करता रहे पर  चुनाव के एक वर्ष पहले से ओबीसी ,दलित  वर्ग को साधने और हिंदुत्व के  विरुद्ध भड़काने का सुनियोजित प्रचार अभियान भी शुरू किया गया था गैर भाजपाई राजनैतिक दलों के निशाने पर भाजपा ही थी |     बीजेपी ने अपने स्तर  पर बहुत कुछ ठीक ठाक करने का प्रयास भी किया |  पर इन सबके बावजूद सागर में पूर्व सांसद लक्ष्मी नारायण यादव  के पुत्र सुधीर यादव ने बीजेपी से नाता तोड़ कर झाड़ू पकड़ ली वही राजनगर विधान सभा क्षेत्र में छतरपुर बीजेपी के पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ घासीराम पटेल ने  ने बीजेपी से अलग होकर हाथी की सवारी कर ली पन्ना की कुसुम मेहदेले पहले से ही बीजेपी नेतृत्व से नाराज चल रही हैं उमा भारती की भी नाराजगी जग जाहिर है छतरपुर जिले की बड़ामलहरा से पूर्व विधायक रेखा यादव ने भी पार्टी से नाता तोड़ लिया है |  

जबकि कांग्रेस ने इस वर्ग को साधने के लिए कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव को जिम्मेदारी सौंपी थी अरुण यादव ने बुंदेलखंड के हर विधानसभा क्षेत्र का दौरा कर  पिछड़ा वर्ग को साधने का प्रयास किया |

जातीय जनगणना 

जो कांग्रेस कभी जातीय जनगणना का विरोध करती थी आज वह इसी मुद्दे पर लोगों को कांग्रेस के पक्ष में लामबंद कर रही है हाल ही में जब प्रियंका गांधी दमोह दौरे पर आई तो उन्होंने बीजेपी को ना सिर्फ धर्म के मुद्दे पर घेरा बल्कि  ओबीसी एससी एसटी के मुद्दे पर कहा  कि  हम जातिगत जनगणना  करवाएंगे। इससे पता चल जाएगा कि किस वर्ग के कितने लोग हैं। सरकार जानते ही नहीं तो वो न्याय कैसे करेगी। एक तरह से उनका आरोप था कि बीजेपी सरकार जातिगत जनगणना  ना  कराकर एक तरह से इस वर्ग से अन्याय कर रही है 

                           जातीय  जनगणना के मसले पर बीजेपी भले ही मौन हो पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने कांग्रेस को इस मसले पर जम कर लपेटा वे ३ नवम्बर को छतरपुर जिले के  चंदला में मध्यप्रदेश की  पहली चुनावी सभा करने आये थे |  उन्होंने कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए  कहा कि जिसने देश में आजादी के बाद जातिगत जनगणना रोक लगा  दी वह भी अब कह रहे हैं कि जातिगत जनगणना होनी चाहिए हमारी पार्टी का स्पष्ट मानना  है  कि हमारी सरकार जब भी  बनेगी तो पहला  फैसला जातिगत  जनगणना  का ही लिया जाएगा |  समाजवादी पार्टी  ने सबसे पहले जातिगत की जनगणना  की बात की  अब  सब दलों के लोग बोलने लगे हैं / अब  देश में वह सरकार बनेगी जो जातिगत की जनगणना करवाएगी  |  यह तो राजनीति का  चमत्कार है कि अब दूसरे दल भी जातिगत जनगणना की बात कर रहे हैं |

 

 शाह का  जीत  मंत्र

 

पिछले दिनों  मध्य प्रदेश दौरे पर आये केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने  खजुराहो में सागर संभाग के कार्यकर्ताओं-पदाधिकारियों की  बैठक ली बैठक में अमित शाह ने कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों को "बूथ जीतेंगेचुनाव जीतेंगे"  का मंत्र दिया। दरअसल बीजेपी ने विधानसभा और लोकसभा चुनाव में  ५० फीसदी से ज्यादा मत प्रतिशत पाने का लक्ष्य तय किया है बीजेपी को इस लक्ष्य पाने के लिए बूथ जीतो अभियान पर  फोकस तो करना पडेगा किन्तु बीजेपी में जिस तरह से आंतरिक असंतोष देखने को मिल रहा है उसमे बूथ जीतो मन्त्र कितना कारगर हो पाता है अब शिवराज की नौगांव सभा की ही बात कर लें तो उनकी सभा में बीजेपी के महराजपुर क्षेत्र के बड़े नेता मंच से नदारत रहे जबकि उसी दिन ये नेता नौगांव के ही एक बीजेपी नेता के घर बैठक कर रहे थे असल में महराजपुर में मानवेन्द्र सिंह के पुत्र कामाख्या प्रताप सिंह को टिकट दिए जाने से बीजेपी के नाता नाराज चल रहे हैं 

 समीकरण बनाते और बिगाड़ते साइकिल और हाथी ,

                सियासी समीकरण बुंदेलखंड में बागी बनाते और बिगाड़ते रहे हैं इस बार भी बागी प्रत्यासी दोनों दलों के सियासी समीकरण बनाने और बिगाड़ने में अहम भूमिका अदा करेंगे हालांकि कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दल ने बागियों पर कार्यवाही करना शुरू कर दिया है | 41 सागर विधान सभा क्षेत्र में बीजेपी के शैलेन्द्र जैन का मुकाबला अपनी ही बहू  कांग्रेस की निधि जैन से है यहां बीजेपी के बागी मुकेश जैन ढाना  आम आदमी से खड़े हैं |  इसी तरह सागर जिले की बंडा विधान सभा क्षेत्र में बगावत सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है यहां बीजेपी के सुधीर यादव ने भी आम आदमी की झाड़ू पकड़ ली है तो शाहगढ़ निवासी रणजोर सिंह ने हाथी की सवारी कर बीजेपी के सामने मुश्किलें कड़ी कर दी हैं टीकमगढ़ में बीजेपी के पूर्व विधायक  के के श्रीवास्तव की बगावत बीजेपी को भारी पढ़  सकती है छतरपुर जिले में भी लगभग हर सीट पर बगावत का यही असर है बगावत का सबसे ज्यादा असर महराजपुर में देखने को मिल रहा है यहाँ बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही बागियों से त्रस्त हैं कांग्रेस के दौलत तिवारी ने साइकिल की सवारी कर कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी बजा दी उनके समर्थन में  पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी की पुत्री निधि चतुर्वेदी प्रचार में जुट गई हैं | | निधि के सपा प्रत्यासी के प्रचार करते ही कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष  ने छतरपुर जिले के कांग्रेस से बगावत करने वाले अजय दौलत तिवारी,निधि चतुर्वेदी,डीलमणि सिंह बब्बू राजाधीरज मिश्रा,अभय तिवारी,पुष्पेंद्र अहिरवार,दिनेश यादव को 6 वर्ष के लिए निष्काषित कर दिया है 

                       अगर २०१८ के  चुनावी परिणाम  देखें  तो सागर संभाग की २६ विधानसभा सीटों में बीजेपी को 37. 44 फीसदी मत मिले थे जो 2013 के चुनाव से 4. 13 फीसदी कम थे कांग्रेस को २०१८ में ३४. ३१ फीसदी वोट मिले जो   2013 के मुकाबले ४.38 फीसदी  वोट  कम थे।  पर उसके दस विधायक चुने गए बसपा और सपा से एक एक विधायक चुना गया देखा जाए तो 2018 में बीजेपी कांग्रेस से मत प्रतिशत में 3.13 फीसदी मतों की बढ़त बनाये रही पर इस बढ़त के बावजूद सीटों का यह खेल बहुत कुछ बागियों ने बिगाड़ा  इस  चुनाव में भी बागी दोनों दलों के लिए एक बड़ी चुनौती बन रहे हैं |  

 

 

EL_SP_Chandla_ अखिलेश का कमल नाथ पर तंज जिसके नाम में ही कमल हो उनसे क्या उम्मीद कर सकते हैं वह बीजेपी की भाषा ही बोलेंगे

 अखिलेश का कमल नाथ पर तंज 

जिसके नाम में ही कमल हो उनसे क्या उम्मीद कर सकते हैं वह बीजेपी की भाषा ही बोलेंगे


छतरपुर /  /  मध्य प्रदेश के मध्य प्रदेश के सबसे पिछड़े इलाके में से एक चंदला विधानसभा क्षेत्र से आज समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की | एम् पी में कांग्रेस से विवाद के बाद यह उनकी पहली सभा थी | जिसमे वे कांग्रेस पर हमला करने से नहीं चूके | 

चुनावी सभा को सम्बोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा  चुनाव में आपने बहुत कुछ पढ़ लिया होगा एक समय ऐसा था हम लोगों को लग रहा था  कि हम लोग गठबंधन में चुनाव लड़ने जा रहे हैं |  बातचीत हुई पता नहीं क्यों और किस कारण बातचीत खत्म हो गई, |  अच्छा किया कांग्रेस ने जो अभी धोखा दे दिया अगर वह बाद में धोखा देते तो हम कहीं के नहीं रहते इसलिए कम से कम चुनाव के पहले धोखा दे दिया और धोखे की वजह से हमें पुष्पेंद्र अहिरवार को चुनाव लड़ना पड़ रहा है | उन्होंने यह भी  कहा कि एक बार धोखा खाया है बाद में धोखा नहीं खाएंगे भले ही हमें अकेले होकर ही चुनाव क्यों ना लड़ना पड़े | देश की राजनीति में समाजवादी पार्टी बड़ा बदलाव ला सकती है | कांग्रेस के कमलनाथ पर तंज कसते  हुए उन्होंने कहा  जिसके नाम में ही कमल हो उनसे क्या उम्मीद कर सकते हैं ,वह बीजेपी की भाषा ही बोलेंगे |  हम पर जातिवादी होने का आरोप लगाते हैं पर समाजवादी कभी जातिवादी नहीं हो सकते | 

जातीय  जनगणना के मसले पर भी उन्होंने कांग्रेस को लपेटा | उन्होंने कहा कि जिसने देश में आजादी के बाद जातिगत जनगणना रोक लगा  दी वह भी अब कह रहे हैं कि जातिगत जनगणना होनी चाहिए | हमारी पार्टी का स्पष्ट मानना   है  कि हमारी सरकार जब भी  बनेगी तो पहला  फैसला जातिगत  जनगणना  का ही लिया जाएगा |  समाजवादी पार्टी  ने सबसे पहले जातिगत की जनगणना  की बात की  अब  सब दलों के लोग बोलने लगे हैं / अब  देश में वही सरकार बनेगी जो जातिगत की जनगणना करावेगी |  यह तो राजनीति का यह राजनीति का चमत्कार है कि अब दूसरे दल भी जातिगत जनगणना की बात कर रहे हैं | 

 मध्य  प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने का जिक्र करते  हुए उन्होंने  कहा की मध्य प्रदेश में सरकार बनी थी उस समय भाजपा और कांग्रेस दोनों ही विधायकों को तलाश रही थी | कांग्रेस को जब  हमने अपने इकलौते  विधायक का  समर्थन दिया तब कहीं जाकर कांग्रेस की सरकार बन पाई थी | 

 लेकिन उसके बाद मध्य प्रदेश में एक ऐसा खेल खेल जो देश में कहीं नहीं खेला गया यहां विधायक खरीदे गए करोड़ों रुपए में बेईमानी से बीजेपी ने सरकार बनाई | आज  कोई विकल्प राजनीति में दे सकता है तो वह समाजवादी पार्टी ही है |  जब से भाजपा आई है उद्योगपतियों की मदद कर रही है उन्होंने नोटबंदी का भी जिक्र किया साथ ही कहा कि   समाजवादी पार्टी की लड़ाई अलग है जो बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों से है दोनों दल एक से हैं उनके दोनों के सिद्धांत दोनों के कार्यक्रम में कोई फर्क नहीं है अगर देश में बदलाव और नए राष्ट्र के निर्माण के लिए कोई काम कर सकता है तो है समाजवादी पार्टी ही कर सकती है |  

बीजेपी सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने  एक उदाहरण देते हुए बताया कि आज जब मैं आ रहा था रास्ते में दो जगह रुका एक जगह मेरा मेरा स्वागत किया गया वहां से कुछ दूर कुछ महिलाएं खड़ी थी उनमें से चार महिला आई हमारे पास हमने उनसे पूछा कि कुछ समाजवादी लाभ मध्यप्रदेश में भी मिलने लगा है कितने को मिल रहा है तो उसमें से  एक ने बताया हमें मिल रहा है तीन को नहीं मिल रहा है यह बीजेपी के लोग इस तरह का भ्रम गांव में फैला रहे हैं कि सबको मिल रहा है जबकि वास्तविकता यह है कि कुछ लोगों को ही इसका लाभ मिल रहा है |उन्होंने उत्तर प्रदेश के उदाहरण को भी समझाया कि किस तरह उत्तर प्रदेश में हमारी सरकार ने एक बड़ा परिवर्तन लोगों को आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में किया है \भाजपा अगर सरकार बनाएगी तो कहीं ना कहीं आपसे पैसा निकलवा ही लेंगे महंगाई के मुद्दे पर उन्होंने कहा भाजपा की यह नीति है कि वह दूसरे तरीके से आप लोगों से पैसा निकलवा लेते हैं आज हर चीज के दाम बड़े हैं पेट्रोल डीजल खाद पानी फसल बीमा, किसान बीमा के नाम पर किसानों को लूटा जा रहा है पर कोई सुनने वाला नहीं बिजली के नाम पर मनमाने  बिल दिए  जा रहे हैं

सरकार को जो काम करना चाहिए वह तो  सरकार करती नहीं है गांव के गांव उजड़ रहे हैं नौजवान रोजगार के लिए पलायन कर रहे हैं 90 से 95 फीसदी नौजवान बेरोजगार घूम रहा है ऊपर से महंगाई की मार है |  उन्होंने इस मौके पर उनके कार्यक्रम में पहुंचे छतरपुर चंदला  के पूर्व विधायक आरडी प्रजापति का धन्यवाद देते हुए कहा कि वह हमारी इस लड़ाई में सहभागी हुए हैं और निश्चित है इससे हमारे प्रत्याशी पुष्पेंद्र अहिरवार की ताकत बढ़ेगी और चंदला विधानसभा में अच्छे मतों से जीतेंगे | इसके लिए आप सबके सहयोग और समर्थन की जरूरत है | 

EL_2023_छतरपुर जिले की छः विधानसभा क्षेत्रों में 84 उम्मीदवार लड़ेंगे चुनाव

 छतरपुर जिले की छः विधानसभा क्षेत्रों में 84 उम्मीदवार लड़ेंगे चुनाव

छतरपुर,  // 02 नवम्बर 2023

 नाम वापसी के बाद छतरपुर जिले की सभी छः विधानसभा में अब 84 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।

 विधानसभा क्षेत्र महाराजपुर में 13 उम्मीदवारों में इंडियन नेशनल कांग्रेस से नीरज दीक्षितभारतीय जनता पार्टी से कामाख्या प्रताप सिंहसमाजवादी पार्टी से अजय दौलत तिवारीभागीदारी पार्टी से राकेश प्रजापतिनिर्दलीय सचिन चौरसियाबहुजन समाज पार्टी से इंजी. महेश चन्द्र कुशवाहाआम आदमी पार्टी से इंजी. के.आर. पटेलनिर्दलीय पुष्पेन्द्र अग्रवालआजाद समाज पार्टी (कांशीराम) परसराम पालजन अधिकार पार्टी से गिरजा प्रसाद कुशवाहानिर्दलीय पुरूषोत्तम नायक पुजारीनिर्दलीय रामपाल अहिरवारनिर्दलीय नृपत कुशवाह।

 विधानसभा क्षेत्र चंदला में 09 उम्मीदवारों में लोकजन शक्ति पार्टी से लखन लाल अनुरागीइंडियन नेशनल कांग्रेस से हरप्रसाद अनुरागीसमाजवादी पार्टी से पुष्पेन्द्र कुमार अहिरवारबहुजन समाज पार्टी से डी.डी. अहिरवारराष्ट्रवादी भारत पार्टी से राजा भईया प्रजापतिजन अधिकार पार्टी से योगेश प्रजापतिभारतीय जनता पार्टी से दिलीप अहिरवारनिर्दलीय रामदीन अहिरवारनिर्दलीय प्रेमचन्द्र वर्मा।

विधानसभा क्षेत्र राजनगर में 19 उम्मीदवारों में भारतीय जनता पार्टी से अरविन्द पटैरियाइंडियन नेशनल कांग्रेस से विक्रम सिंहसमाजवादी पार्टी से बृजगोपाल पटेलबहुजन समाज पार्टी से डा. घासीराम पटेलनिर्दलीय पूनम अहिरवारमालवा कांग्रेस से मु. इमराननिर्दलीय दशरथ कुशवाहाराष्ट्रीय गोंडवाना पार्टी से राजकुमार चौरसियानिर्दलीय बीरेन्द्र पटेलआम आदमी पार्टी से राजू पालनिर्दलीय नीरज भैया जीजन अधिकार पार्टी से हरिमोहन अहिरवारनिर्दलीय भूरा पटेलनिर्दलीय उमाकांत नामदेवनिर्दलीय विपिन शर्मानिर्दलीय विपिनजनता दल (यूनाईटेड) रामकुंवर रैकवारनिर्दलीय अजय सिंह यादवनिर्दलीय प्रमोद कुमार।

 

विधानसभा क्षेत्र छतरपुर में 14 उम्मीदवारों में भारतीय जनता पार्टी से ललिता यादवबहुजन समाज पार्टी से डीलमणि सिंह उर्फ बब्बू राजा बुंदेलानिर्दलीय दीपक अहिरवारजन अधिकार पार्टी से प्रेमचन्द्र अहिरवारसमाजवादी पार्टी से बेनी प्रसाद चंसौरियानिर्दलीय ललता यादवआम आदमी पार्टी से भागीरथ पटेलइंडियन नेशनल कांग्रेस से आलोक चतुर्वेदी पज्जन भैयानिर्दलीय नवाब खानआजाद समाज पार्टी (कांशीराम) से रामचरण अहिरवारनिर्दलीय हरिशचन्द्र राजनिर्दलीय मनोज कुमार अग्रवालसपाक्स पार्टी से एड. राजा प्रजापतिनिर्दलीय जवाहर लाल द्विवेदी।

 

विधानसभा क्षेत्र बिजावर में 14 उम्मीदवारों में भारतीय जनता पार्टी से बब्लू राजेश शुक्लाइंडियन नेशनल कांग्रेस से चरण सिंह यादवसमाजवादी आम जनता दल से रिषि राज यादवबहुजन समाज पार्टी से महेन्द्र कुमार गुप्तानिर्दलीय रामदेवी अहिरवारनिर्दलीय जगदीश प्रसाद मिश्रानिर्दलीय चरण सिंह यादवभारतीय शक्ति चेतना पार्टी से परम लाल पटेलभारतीय सभ्यता पार्टी से लीलाधर राजपूतनिर्दलीय भागीरथ तिवारीआम आदमी पार्टी से अमित भटनागरनिर्दलीय जगदीश शिमल कुशवाहाआजाद समाज पार्टी (कांशीराम) से चेतराम अहिरवारनिर्दलीय मु. फरीद सौदागर।

 

 विधानसभा क्षेत्र मलहरा में 15 उम्मीदवारों मंे निर्दलीय करन सिंह लोधीभारतीय जनता पार्टी से कुुंवर प्रद्युम्न सिंह लोधीनिर्दलीय धर्मेन्द्र कुमार साहूइंडियन नेशनल कांग्रेस से बहिन रामसिया भारतीआम आदमी पार्टी से चन्दाभारतीय शक्ति चेतना पार्टी से देवेन्द्र लोधीनिर्दलीय अर्जुन सिंह चंदेलबहुजन समाज पार्टी से लखन रामटोरियानिर्दलीय हरि सींग गौड़निर्दलीय नारायण अहिरवारनिर्दलीय पन्चू अहिरवारनिर्दलीय बालकिशन काछीविंध्य जनता पार्टी से अनुज दिनेश यादवनिर्दलीय आशुतोष पाठकनिर्दलीय सरमना कुशवाहा।

 

इन अभ्यर्थियों ने लिए नाम वापिस

 

विधानसभा महाराजपुर से निर्दलीय लेखराम पटेलचंदला से निर्दलीय आर.डी. प्रजापतिनिर्दलीय परशु राम तिवारीबिजावर से निर्दलीय राकेशसमाजवादी पार्टी से रेखा यादवभुवन विक्रम सिंहनिर्दलीय रमाकांत शुक्लानिर्दलीय कैलाश कुशवाहानिर्दलीय छिकोड़ी उर्फ छकियामलहरा से आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) मनोज यादवनिर्दलीय अमितेश प्रताप सिंह ठाकुरनिर्दलीय देवीदीन उर्फ कलन अहिरवारनिर्दलीय मोतीलाल यादव।

Political_SP_बुंदेलखंड की एक और सीट पर सपा को घोषित प्रत्याशी ने दिया झटका

 


बुंदेलखंड की एक और सीट पर सपा को घोषित प्रत्याशी ने दिया झटका 

छतरपुर// २/११/२३ मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में  नाम वापसी के  आखिरी दिन  छतरपुर जिले की बिजावर विधानसभा सीट पर  सपा की प्रत्याशी  रेखा यादव ने अपना नामांकन वापस ले लिया | बताया जा रहा है कि सामाजिक दबाव के चलते उन्होंने यह कदम उठाया है |  

 पूर्व विधायक रेखा यादव  जिले के बड़ामलहरा सीट से 2008 में जनशक्ति पार्टी से और २०१३ में  बीजेपी से विधायक चुनी गई थी | 2018 के चुनाव में उनका टिकट काट कर ललिता यादव को प्रत्यशी बनाया गया था | 2023 के चुनाव के लिए उन्होंने बिजावर विधानसभा से टिकट की दावेदारी की थी | पार्टी ने जब यहाँ से वर्तमान विधायक राजेश शुक्ला को टिकट दिया ,तभी से वह नारज चल रही थी | बाद में वे   समाजवादी पार्टी  शामिल हो गई ,  पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी भी बना दिया था.|  लेकिन आज  नामांकन वापसी के दिन उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया | 

                               बिजावर विधानसभा सीट वही विधानसभा सीट है जिसको लेकर कांग्रेस और सपा में जमकर तकरार हुई | असल में यहाँ से २०१८ का चुनाव कांग्रेस से सपा में आये राजेश शुक्ला ने जीता था | बाद में वे  बीजेपी में शामिल हो गए | अखिलेश के लिए यह सीट कितनी महत्वपूर्ण है इसका अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि  सपा ने यहां से पहले मनोज यादव को प्रत्याशी बनाया था | रेखा यादव के संपर्क करने के बाद उन्होंने टिकट बदल कर रेखा यादव को प्रत्याशी बना दिया था | 

                       अपना नामांकन वापस लिए जाने के सवाल पर पूर्व विधायक रेखा यादव का कहना था , सामाजिक दबाव के कारण यह निर्णय लेना पड़ा | अब वो कहती हैं कि  वर्तमान दौर की राजनीति को देखते हुए अब इस विषय पर आत्ममंथन किया जाएगा | 

Politicla_AAP_हम सर्वे में नही सरकार में आते हैं: भगवंत मान

 हम सर्वे में नही सरकार में आते हैं: भगवंत मान 


छतरपुर/ 26/10/23, आप प्रत्यासियो के समर्थन में रोड शो करने आए आप के नेता और पंजाब के मुख्य मंत्री भगवंत मान ने नुक्कड़ सभा को संबोधित करते हुए,बीजेपी और कांग्रेस पर  जम कर जुबानी  हमला किया।आप की पंजाब सरकार की उपलब्धियां बताई।
 नुक्कड़ सभा को सम्बोधित करते हुए मान ने कहा कि ये देश बहता दरिया है। हमारा प्रयास है कि देश में सब खुशहाल हो।जो आप की सरकार ने पंजाब में किया सारी व्यवस्था सही की ,यहां भी सब बेहतर हो। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि हर घर में रोजगार हो  ,सबको स्वास्थ्य,शिक्षा,मिले।हमने डेढ़ साल में 37हजार लोगों को रोजगार दिया। गरीब का बेटा भी अधिकारी बना । भ्रष्टाचारियों को हमने जेल में डाला , कांग्रेस के वाणिज्य मंत्री रहे एक पूर्व मंत्री के यहां जब ई वी एस का छापा पड़ा तो सोना नगदी मिली नोट गिनने की मशीन मिली ।
पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए उन्होंने कहा मधयप्रदेश की जनता पिछले 18साल से भ्रष्टाचार की चक्की में पिस रही है। मधयप्रदेश को भगवान ने बहुत कुछ दिया, पहाड़ दिए, नदिया दी,जंगल दिए,इस प्रदेश के साथ जो हुआ ,व्यापम जैसे घोटाले यहां हुए। यहां अगर जनता बदल भी दे तो दुबारा एम एल ए खरीद कर सरकार बना लेते हैं। ये लोकतंत्र की हत्या है। आम आदमी पार्टी दिल्ली और पंजाब में शिक्षा,स्वास्थ्य,बिजली,पानी,रोजगार,और व्यापार मे काम कर रही है। एमपी में पार्टी की स्थिति पर उन्होंने कहा कि हमसे एक पत्रकार ने सवाल पूंछा था कि कितनी सीटें आएंगी हमने कहा बहुत आएंगी ,।सर्वे में नाम ना होने पर उन्होंने कहा कि हम सर्वे में नही सरकार में आते हैं ।

Political_SP_अखिलेश की नाराजगी से बदले बुंदेलखंड के समीकरण

 बुंदेलखंड की डायरी 

 अखिलेश की नाराजगी से बदले बुंदेलखंड के समीकरण  

 रवीन्द्र व्यास 

मध्य प्रदेश का  बुंदेलखंड और विंध्य ही वह इलाका होगा जो प्रदेश में सरकार बनाने और बिगड़ने के समीकरण तय करेगा | इसकी महत्वपूर्ण भूमिका और कोई नहीं बल्कि आई ई एन डी ए गठबंधन में सम्मलित दल ही निभायेंगे | इसका एलान हाल ही में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष  अखिलेश यादव ने कर भी दिया है | इस सियासी संघर्ष के  दौर में  सागर संभाग  की सभी २६ विधानसभा सीटों पर मुख्य दल बीजेपी और कांग्रेस ने अपने प्रत्यासी घोषित कर दिए हैं | सियासत के समीकरण बनाने और बिगड़ने वाले दलों ने भी कई विधान सभा क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं | इन दलों से चुनावी मैदान में उतारने वाले अधिकाँश वे लोग ही हैं जिन्होंने  अपने ही दल नाराज होकर सपा ,बसपा और आप  का दामन थामा है | 

          अखिलेश की नाराजगी ने कांग्रेस की बड़ाई टेंशन  :: ये बात कोई ज्यादा पुरानी नहीं है २८ सितम्बर को खजुराहो में  पत्रकारों के सवालों के जबाब देते हुए ,सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव आई ई एन डी ए गठबंधन को लेकर बहुत ज्यादा उत्साहित दिख रहे थे |  मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी के लिए बड़ी गुंजाइश देख रहे अखिलेश यादव ने यह भी कह दिया था कि  मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी  उन स्थानों पर प्रमुख तौर पर चुनाव लड़ेगी जहां बीजेपी को हम हारने की स्थिति में होंगे ।इस मौके पर उन्होंने बीजेपी को जमकर घेरा भी था और कांग्रेस के प्रति सहनभूति दिखाई थी | यहां तक कि उनके पास टिकट की आस लेकर गए कांग्रेस और बीजेपी के नेताओं को यह कहकर टरका दिया था कि अभी कुछ समय रुक जाओ | उन्हें गठबंधन पर बड़ा भरोषा था | उनका यह भरोषा मध्यप्रदेश के कांग्रेस नेताओं ने ना सिर्फ तोड़ा बल्कि उन्हें उनकी हैसियत का आइना भी दिखा दिया | आग में घी  डालने का कार्य किया मध्य प्रदेश और  उत्तर प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष ने | 

                                  असल में कांग्रेस यह जानती है कि मध्यप्रदेश में दो दलीय समीकरण हैं , ऐसे में अगर वह गठबंधन के नाम पर किसी और को  सीट देते तो नुकसान उनका ही होता ||  लिहाजा तमाम तरह की चर्चाओं के बाद कांग्रेस ने सपा से तालमेल से इंकार कर दिया | हालंकि अखिलेश यादव ने बहुत ज्यादा सीटों की मांग नहीं की थी , उन्होंने मात्र ६ सीटों पर अपनी दावेदारी जताई थी कांग्रेस का यह इंकार सपा सुप्रीमो को इतना नागवार गुजरा कि उन्होंने घोषणा कर दी कि समाजवादी पार्टी मध्यप्रदेश में 50 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी | सपा के मुख्य टारगेट पर उत्तर प्रदेश से सटी बुंदेलखंड , विंध्य और ग्वालियर संभाग की सीटें होंगी | 

बीते तीन दशकों  में समाजवादी पार्टी ने  मध्यप्रदेश विधानसभा  चुनावों में अपने प्रत्याशी उतारे  है। 1997 के उप चुनाव में पहली बार समाजवादी पार्टी के विधायक विजय बहादुर सिंह बुंदेला चंदला से चुने गए | उन्होंने बीजेपी से टिकट न मिलने के कारण नाराज होकर सपा  की साइकिल की सवारी की थी | उप चुनाव जीतने  के बाद वे 1998 और २००३ का चुनाव भी सपा के टिकट पर ही जीते |  चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार सपा  के ,1998 के विधानसभा चुनाव में  चार प्रत्याशी चुनाव जीते ,2003 में सबसे ज्यादा 7 प्रत्याशी ,  2008 और 2018 में भी समाजवादी पार्टी का एक-एक प्रत्याशी चुनाव जीता। ये अलग बात है इनमे से ज्यादातर सत्ताधारी दल के सुर  सुर मिलाते रहे | 

                 सियासत के जानकार  मानते हैं कि पडोसी राज्य में अपनी प्रमुख पहचान  बनाने वाली सपा और बसपा  मत विभाजन में बड़ी अहम भूमिका जरूर अदा करते हैं | इनके प्रत्यासी मध्य प्रदेश में बीजेपी और कांग्रेस के समीकरण जरूर प्रभावित करते हैं | वर्तमान दौर में जब दोनों दल करो या मारो की स्थिति में है , ऐसे में हार जीत बड़े अंतर से संभव नहीं होगी ,तब ये दल दोनों ही प्रमुख दल की की सत्ता के सिंहासन पर पहुँचने में एक बड़ा अवरोध बना सकती हैं | 

मुख्य मुकाबला बीजेपी  और कांग्रेस में

बुंदेलखंड के सागर संभाग की २६ सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस ने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं  | सागर जिले की जिन आठ सीटों पर कांग्रेस ने प्रत्याशी घोषित किए हैं  उनमें से अधिकांश सीटों पर   खुद कांग्रेसी ही संतुष्ट नहीं हैं | चुनाव के साल भर पहले से  सागर की खुरई , बीना , सुरखी और रहली विधानसभा सीट कांग्रेस के टारगेट पर थी | खुरई और बीना में तो आये दिन कांग्रेसी दिग्गजों का मेला लगा रहता था | ऐसे में कांग्रेस ने खुरई में मंत्री भूपेंद्र सिंह के सामने रक्षा राजपूत को , रहली में अजेय मंत्री गोपाल भार्गव के सामने ज्योति पटेल को वहीं  सुरखी में मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत के सामने कांग्रेस ने बीजेपी से आये नीरज शर्मा को प्रत्याशी बनाया है | इसके अलावा कांग्रेस ने नरयावली से बीजेपी के प्रदीप लारिया के मुकाबले फिर से सुरेंद्र चौधरी को फिर से प्रत्याशी बनाया है |   सागर जिले की ये चार विधान सभा सीटें ऐसी है जिसको लेकर लोगों का मानना है कि कांग्रेस ने बीजेपी को एक तरह से वाक् ओवर दे दिया है | 

टीकमगढ़ जिले की तीन विधान सभा सीटों में  कांग्रेस और बीजेपी ने पुराने चेहरों पर ही दांव लगाया है | टीकमगढ़ के पूर्व विधायक के के श्रीवास्तव ने नाराज हो कर पार्टी ही छोड़ दी है |  जतारा में जरुर परिवर्तन किया है कांग्रेस ने यहाँ से किरण अहिरवार को प्रत्यासी बनाया गया है | निवाड़ी जिले में पृथ्वीपुर में  उप चुनाव के प्रत्यासी आमने सामने होंगे | निवाड़ी में कांग्रेस ने बीजेपी से 15 दिन पहले आये अमित राय को प्रत्यासी बनाया है | अमित को प्रत्यासी बनाये जाने का कोंग्रेसियों ने विरोध किया है | 

छतरपुर जिले की छह विधानसभा सीटों  में  से पांच सीटों पर दोनों ही प्रमुख दलों में विद्रोह की स्थिति देखने को मिल रही है |  बिजावर में कांग्रेस के  चरण सिंह यादव , छतरपुर में  आलोक चतुर्वेदी और बीजेपी की ललिता यादव  ,  चंदला में हर प्रसाद अनुरागी  और बीजेपी के दिलीप अहिरवार , महराजपुर में बीजेपी प्रत्यासी  कामाख्या  प्रताप सिंह और कांग्रेस के नीरज दीक्षित , राजनगर में बीजेपी के अरविन्द पटेरिया और कांग्रेस के विक्रम सिंह (नाती राजा ) को अपनों से ही विद्रोह का सामना करना पढ़  रहा है | 

पन्ना जिले की भी तीनो विधान सभा सीटों पर कांग्रेस प्रत्यासी घोषित होने के बाद कार्यकार्ताओं में नारजगी देखने को मिल रही है | वहीँ पवई में वर्तमान विधायक पप्रहलाद लोधी को टिकक़्त दिए जान के बाद से अशंतोष के स्वर तीव्र हो गए हैं |   संजय नगायच ने खुले तौर  पर चेतावनी दे दी है की अगर पांच दिन में परिवर्तन नहीं हुआ तो हजारों कार्यकर्ता पार्टी छोड़ देंगे | 

 दरअसल २०२३ के चुनावों को लेकर हर दल का कार्यकर्ता बनाम नेता यह मान रहा है की यही मौका है जब जनता का रुझान किसी के साथ स्पष्ट रूप से नहीं है | ऐसे मौके का फायदा पार्टी पर दबाव बना कर लिया जा सकता है| यही कारण है कि कहीं कपडे फाड़ने की बात हो रही है तो कहीं नेम प्लेट तोड़ी जा रही है तो कहीं पुतले फूंके जा रहे हैं | दलबदल का अभियान तो कपडे बदलने जैसा चल रहा है |  बहरहाल जो भी सियासत में हो रहा है वह देश और प्रदेश के लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है | 


विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

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