संसद से सड़क तक
रवींद्र व्यास
पृथक बुंदेलखंड राज्य को लेकर जितनी उग्रता उत्तर प्रदेश वाले क्षेत्र में दिख रही है उतनी मध्य प्रदेश वाले क्षेत्र में नहीं दिख रही है | इसके पीछे के अपने कारण हो सकते हैं | सड़क से संसद तक बुंदेलखंड राज्य की गूंज इन दिनों बुंदेलखंड इलाके में गूंज रही है | इसी महिने के पहले हफ्ते में बुंदेलखंड विकाश बोर्ड(उत्तर प्रदेश) के उपाध्यक्ष राजा बुंदेला ने 2024 तक अलग बुंदेलखंड राज्य बनने की बात कह कर सबको चौंका दिया है | ये अलग बात है कि अब यहां के लोगों को राजनेताओं की बातों पर भरोषा नहीं रह गया है |
पिछले दिनों बांदा में क्षत्रिय महा सभा का एक कार्य्रक्रम था | 5 मार्च शनिवार को हुए इस आयोजन में हिस्सा लेने बुंदेलखंड विकाश बोर्ड (यू पी ) के उपाध्यक्ष राजा बुंदेला भी पहुंचे थे | उनकी पृथक बुंदेलखंड राज्य आंदोलन में सक्रियता और निष्क्रियता को लेकर पत्रकारों ने उनसे तीखे सवाल किये | सिनेमा जगत के कलाकार और राजनेता ने जबाब देते हुए कहा कि 2024 तक हर हाल में अलग बुंदेलखंड राज्य बन जाएगा | उन्होंने पत्रकारों को यह भी बताया कि असल में अभी सरकार का राज्य सभा में बहुमत नहीं है इस कारण यह बिल पास नहीं हो सकता | एक दशक से ज्यादा समय तक अलग बुंदेलखंड राज्य के लिए समर्पित रहने वाले राजा बुंदेला , इन दिनों अपनी अलग भूमिका में हैं संभवतः इसी लिए वे इस मुद्दे पर बात तो करते हैं पर कलाकारी के साथ |
क्या संसद में बुंदेलखंड राज्य के मुद्दे पर होगी बहस :
राजा बुंदेला की बात को अगर माना जाए तो आगामी 13 मार्च से शुरू होने वाले संसद सत्र में पृथक बुंदेलखंड राज्य के मुद्दे पर बहस होगी | हमीरपुर से बीजेपी सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल ने 4 फरवरी को अलग बुंदेलखंड राज्य का मुद्दा संसद में उठाया था , जिसे लोक सभा अध्यक्ष ने मंजूर कर लिया है | जब बिल पर बहस होगी तो राजनैतिक दलों के चेहरे बेनकाब हो जाएंगे |
दरअसल हमीरपुर सांसद चंदेल ने 4 फरवरी को एक निजी विधेयक के माध्यम से अलग बुंदेलखंड राज्य निर्माण की मांग को संसद में रखा था | संसदीय चर्चा के नियम 377 के अंतर्गत और अति लोक महत्त्व के मुद्दों पर चर्चा के संसद संसदीय नियम के तहत शून्य काल में 12 फरवरी को भी यह मांग उठाई थी |
हमीरपुर महोबा के बीजेपी सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल ने 2019 के बजट सत्र में भी बुंदेलखंड राज्य का मुद्दा उठाया था । उन्होंने छोटे राज्यों के निर्माण के लिए राष्ट्रीय बोर्ड गठित करने की मांग संसद में उठाई थी । उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के सभी 19 विधायकों ने विधानसभा में अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग उठाई थी। वहीँ बुंदेलखंड इन्साफ सेना के प्रमुख और पूर्व मंत्री बादशाह सिंह मध्य प्रदेश के राजयपाल के सामने अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग रख चुके हैं | ८०_९० के दशक में कांग्रेस के विट्ठल भाई पटेल अलग बुंदेलखंड राज्य बनाने की मांग विभिन्न मंचो से करते रहे थे |
बुंदेलखंड के मसले पर सांसदों का अभियान और उमा का मौन
इन दिनों बुंदेलखंड राज्य की मांग करने वाले तमाम संगठन उमा भारती के 2014 के चुनावी बयान को जम कर वायरल कर रहे हैं ,| असल में उमा जी ने नरेंद्र मोदी के साथ झांसी में मंच साझा करते हुए कह दिया था कि में तीन वर्ष में अलग बुंदेलखंड राज्य बनवाकर ही दम लूंगी | अब वही उमा भारती इस मुद्दे पर कहती हैं कि बुंदेलखंड के मध्यप्रदेश इलाके के लोग इस अलग राज्य के लिए सहमत नजर नहीं आते | जब तक एक राय नहीं बनती तब तक अलग राज्य बनना संभव नहीं है | जबकि उन्ही की पार्टी के उत्तर प्रदेश के सांसद अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग को संसद में मुखरता से उठा रहे हैं |
बुंदेलखंड राज्य :
१ नव १९५६ को राज्यों का विभाजन कर दिया गया था और बुंदेलखंड को दो भागों में बाँट कर देश के नक़्शे से बुंदेलखंड राज्य गायब कर दिया गया था | इस दिन मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड में सरकारी स्तर पर जश्न मनाया जाता है |
आजादी के समय १९४७ में बुंदेलखंड राज्य था जिसका अस्तित्व १२ मार्च १९४८ तक रहा | बुंदेलखंड की राजधानी नौगांव थी और चरखारी के रहने वाले कामता प्रसाद सक्सेना इसके मुख्य मंत्री बने थे | १२ मार्च १९४८ को इसका नाम बदलकर विन्ध्य प्रदेश कर दिया गया और इसमें बघेलखंड को जोड़ दिया गया और राजधानी रीवा बना दी गई । 1 नवम्बर १९५६ को बुंदेलखंड के दो टुकड़े कर आधा हिस्सा यूपी और आधा हिस्सा एमपी में शामिल कर दिया गया था।
असल में नेहरू सरकार के समय गठित राज्य पुनर्गठन आयोग ने बुंदेलखंड राज्य की सिफारिश की थी | आयोग ने ३० सितम्बर १९५६ को केंद्र सरकार को सौंपी रिपोर्ट में १६ राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश बनाने प्रस्ताव सरकार को दिया था । सरकार ने आयोग की रिपोर्ट को दरकिनार कर १४ राज्य व ५ केंद्र शासित प्रदेश बना दिए।
बुंदेलखंड राज्य निर्माण के लिए अलग अलग सत्याग्रह अभियान पिछले कई वर्षो से उत्तर प्रदेश वाले बुंदेलखंड इलाके में जारी है | बुंदेलखंड के विभाजन और
वर्तमान में बुंदेलखंड राज्य की मांग करने वाले आंदोलन कारी मध्य प्रदेश के सागर ,दमोह ,छतरपुर ,टीकमगढ़ ,निवाड़ी और पन्ना तथा उत्तर प्रदेश के ललितपुर,झाँसी, जालौन ,हमीरपुर ,बांदा ,चित्रकूट और महोबा को मिलाकर एक अलग राज्य की मांग कर रहे हैं | हालांकि मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ से सबसे पहले अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग उठी थी | अब उसी मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड भूभाग में अलग राज्य की मांग पर लगभग लोग मौन हैं ,जबकि उत्तर प्रदेश वाले बुंदेलखंड इलाके में यह मांग दिनों दिन जोर पकड़ती जा रही है ||
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