Betal crops पान किसान
बुंदेलखंड मे करोडो के पान हुए बर्बाद पान किसान हुए कर्जदार
बुंदेलखंड के छतरपुर, पन्ना, सागर, दमोह, टीकमगढ़, महोबा, ललितपुर जिलों के पान किसानो के लिए कोरोना महामारी अभिशाप बन कर टूटी।
लगातार दूसरे वर्ष आये इस संकट ने पान किसानो की कमर तोड़ कर रख दी।
जब उनकी पान की फसल बरेजो में ही सड़ गई।
असल में गुटका के चलन के बाद सबसे ज्यादा पान की बिक्री का कोई मौका होता है तो वह चैत्र नव दुर्गा से शुरू होता है और शादी -विवाह के समय का होता है।
दुर्भाग्य से दो वर्ष से इसी दौरान कोरोना का प्रकोप बड़ता है, और सब ओर ताला बंदी हो जाती है।
बुंदेलखंड का यह पान देशी पान के नाम से विख्यात है । इस पान को पसंद करने वाले देश ही नही विदेशों में भी बहुतायत मे पाए जाते हैं।
नाजुक फसलों मे जानी जाने वाली यह फसल अगर समय पर नही बिकी तो खराब हो जाती है। लाक डाउन के चलते बुंदेलखंड इलाके की लगभग 400 करोड़ की पान फसल बरेजो में ही लगे लगी बर्बाद हुई है।
एक पारी में 6 से 7 हजार पान का उत्पादन होता है। औस्तन 200 से 300 रुपए मे एक सेकडा पान बिक जाता है।
कौन कौन प्रभावित:
हर फसल और करोबार के ताना बाना जुड़ा रहता है। इस फसल के साथ भी पान किसान के अलावा मजदूर , व्यापारी तथा पान विक्रेता और उनका परिवार सभी प्रभावित होते है।
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