मरने के बाद मेरा शरीर शासन को दे दें ,मेरा एक एक अंग बेच कर कर्जा चुका लें
31 दिसंबर, 2020
Farmar _Soside_मेरे अंग बेच कर कर्ज चुका ले सरकार
28 दिसंबर, 2020
तेंदुए का शिकार
सतना/MP/ 28 /12/20
जिले के रामनगर थाना क्षेत्र के जंगल में तेंदुआ का शव मिला l आशंका जताई जा रही है कि तेंदुए का शिकार किया गया है,l देर रात सूचना मिलने पर वन अधिकारी मौके पर पहुंचे ,और तेंदुए की लाश को कब्जे में लेकर जाँच शुरू की
राम नगर के गौहानी के जंगल में तेंदुए का शव संदिग्ध परिस्थितियों में जंगल सर्चिंग मे बीट गार्ड ने देखा l तेंदुए के शव की सूचना मिलते ही वन विभाग के डीएफओ और मुकुंदपुर वाइट टाइगर रिजर्व की टीम भी मोके पर पहुंची l बताया जा रहा है कि तेंदुए का शव 4 दिन पुराना है, उम्र लगभग 4 वर्ष है, l
कुछ दिन पूर्व ही सफेद टाइगर सफारी मे एक सफेद बाघ का शव मिला था l
27 दिसंबर, 2020
निर्यात होने लगा बुंदेलखंड का गेंहू
बुंदेलखंड की डायरी
बुंदेलखंड के सागर जिले के खुरई का गेंहू पहले से ही काफी विख्यात रहा है ,खुरई के गेंहू की मांग देश के अनेक हिस्सों में काफी व्यापक है | अब बुंदेलखंड के ही झाँसी ,ललितपुर , महोबा, चित्रकूट, ,बांदा ,हमीरपुर ,जालौन , छतरपुर, टीकमगढ़, दतिया जैसे जिलों के गेहूं की मांग देश ही नहीं विदेशों तक में होने लगी है। बुंदेलखंड का गेहूं बांग्लादेश के लोगों को ऐसा भाया कि गेहूं की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। बीते पांच माह में बुंदेलखंड के गेंहू की 20 मालगाड़ी बांग्लादेश भेजी गई है। इन मालगाड़ियों में गेहूं दतिया, ललितपुर, मुरैना स्टेशन से लोड किया गया। बुंदेलखंड के गेंहू से लदी ये मालगाड़ियां बांग्लादेश की बेगमपुर व दर्शना रेलवे साइट पर अनलोड की जाती हैं । रेलवे के आधिकारिक लोग बताते हैं की प्रत्येक मालगाड़ी पर रेलवे को 55 लाख का मुनाफ़ा होता है | बुंदेलखंडी गेंहू की जावक पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष ज्यादा होने से रेलवे के मुनाफ़ा में भी बढ़ोतरी हुई है | गेंहू के साथ खली और अन्य बुंदेलखंड के खाद्य पदार्थ भी बांग्लादेश भेजे जा रहे हैं |
प्रकृति के भरोषे खेती
बुंदेलखंड देश का वह इलाका है जिसकी अधिकाँश भूमि पथरीली है | भू संरचनाओं की बात करें तो जमीं से 100 फिट नीचे ग्रेनाइट का स्ट्रेटा पाया जाता है ,जो यह बताने के लिए पर्याप्त है कि अगर भू जल की उपलब्धता है तो सिर्फ 100 फिट तक ही है इसके नीचे चट्टानों में पानी की आशा ना के बराबर है | यह स्थिति बुंदेलखंड के अधिकाँश क्षेत्रों में मानी जाती है | पथरीली भूमि के कारण यहां सिचाई के लिए पानी की जरुरत कहीं ज्यादा है | सैकड़ों वर्ष पहले बुंदेलखंड की इस बुनियादी समस्या को समझ लिया गया था , और बुंदेलखंड के अधिकाँश इलाकों में बड़ी संख्या में सिचाई के लिए तालाबों और नहरों का निर्माण किया गया था | इतना ही नहीं तालाबों के निर्माण के साथ ही तालाबों के मध्य में एक कुँए का भी निर्माण कराया जाता था ,ताकि किसी भी प्रकार के अकाल के हालात में जल की उपलब्धता बनी रहे | समय के साथ आधुनिकता का खुमार शासकों पर हावी हुआ और तालाब नष्ट होते चले गए | आज बुंदेलखंड इलाके में तमाम तरह के बाँध होने के बावजूद किसान पानी के लिए परेशान है ,| बुंदेलखंड का अधिकाँश किसान छोटी जोत का है जो ना तो ट्यूब वेळ लगवा सकता है और ना कुआ खुदवा सकता है | ऐसे किसान पडोसी खेत वाले से पानी की हिस्सेदारी तय करता है और अपनी उपज का बड़ा हिस्सा पानी के एवज में पडोसी को देने को मजबूर होता है | पिछले दिनों छतरपुर जिले के बक्स्वाहा ब्लॉक सुनवाहा गाँव के किसान नाथू राम विश्वकर्मा ने प्रधान मंत्री मोदी जी को एक पत्र लिखा कि मेरे पास एक एकड़ की कृषि भूमि है | साल भर की एक फसल की कमाई बा मुश्किल ११ हजार रु छह माह में होती है | आप बताइये के ये दुगनी कैसे होगी | पत्र में उसने वे तमाम तरह के खर्चे भी लिखे जो खेती में होते हैं , और आय में फसल के वेस्टेज और फसल से होने वाली आय को भी लिखा |
दरअसल हालात से मजबूर बुंदेलखंड का किसान आज भी प्रकृति के भरोसे ही है | इस बार की खरीफ फसल वर्षा की अनियमितता के कारण चौपट हुई थी | रवि फसल अब तक के हालात उनके ठीक हैं जिनके पास सिचाई के साधन हैं , जिनके पास सिचाई के साधनो का अभाव है वे मायूस है वहीँ बिजली की अनियमित आपूर्ति भी किसानो के सामने कई तरह की समस्याएं खड़ी कर रही हैं | बुंदेलखंड के कई इलाकों में इसको लेकर प्रदर्शन भी हो चुके हैं | ऐसे इलाके से अगर कृषि पैदावार का निर्यात होने लगे तो एक अच्छी खबर ही मानी जा सकती है , जरुरत इस बात की है कि निर्यात होने वाली पैदावार को बढ़ाने की दिशा में किसानों को प्रोत्साहित किया जाए |
रेतीले राजस्थान में जायेगी बुंदेलखंड की रेत
25 दिसंबर को बांदा से राजस्थान के भरतपुर के लिए एक मालगाड़ी भरकर केन की रेत भेजी गई | केन की यह रेत निर्माण कार्यों के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है , यही कारण है कि केन नदी के यह रेत जो बाहरी इलाकों में खजुराहो सेंड के नाम से जानी जाती है नेपाल बार्डर तक डम्परों के माध्यमों से अब तक पहुँचती थी | रेल से रेत भेजने का पहले भी कई बार प्रयास हुआ है , एक बार सिंहपुर स्टेशन से भेजी जाने वाली रेत को प्रशासन ने अवैध मान कर जप्त कर लिया था |
ललितपुर स्थित बजाज पावर प्लांट से एश (राख) रूपनगर पंजाब, गाजियाबाद, मैहर व सतना भेजी जाने लगी है। बुंदेलखंड के कई ऐसे उत्पाद हैं जो रेलवे की कमाई का एक बड़ा साधन बन गए हैं | रेलवे के सूत्र बताते हैं कि बुंदेलखंड मिनिरल्स और खाद्य वस्तुओ के परिवहन से झाँसी रेलवे मंडल को 60 से 95 करोड़ रु की सालान आय होती है | परिवहन व्यवस्था के लिए 138 लोग रेलवे में पंजीकृत हैं |
दो लाख वृक्ष विकाश की भेंट चढ़े
बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश के चित्रकूट ,बांदा ,हमीरपुर ,महोबा ,जालौन ,ओरैया ,और इटावा जिले के लगभग दो लाख वृक्षों को काटा गया | सरकार कह रही है की इनकी एवज में दो लाख 70 हजार नए वृक्ष लगवाए जाएंगे | इटावा से चित्रकूट जिले तक बन रहे 296 किलोमीटर लम्बे इस एक्सप्रेस वे के निर्माण पर सरकार 14 हजार 849 करोड़ रु व्यय कर रही है | इसी तरह झाँसी खजुराहो एक्सप्रेस वे के निर्माण में भी हजारों वृक्ष काटे गए | मजे की बात ये है की सरकार कहती है की काटे गए वृक्षों की भरपाई के लिए बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे पर दो लाख सत्तर हजार नए वृक्ष सड़क के दोनों और लगाए जाएंगे |विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड
बुंदेलखंड की डायरी विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड रवीन्द्र व्यास दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए 2025 में कई...
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