प्रदुम्न की घर वापसी : बड़े राजनैतिक परिवर्तन की ओर बढ़ती बीजेपी
रवीन्द्र व्यास
बुंदेलखंड इलाके के तीसरे बड़े नेता और और दूसरे विधायक ने भी हाथ का साथ छोड़ दिया | प्रदुम्न सिंह लोधी ने बीजेपी में वापसी पर एक ट्वीट भी किया | उन्होंने लिखा आज (रविवार) में अपने पुराने घर भाजपा परिवार में वापस आ गया हूँ | कांग्रेस में अकेलापन महसूस कर रहा था | मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री माननीय शिवराजसिंह चौहान और माननीय बी डी शर्मा जी का बहुत बहुत धन्यवाद | छतरपुर जिले के बड़ामलहरा विधानसभा से कांग्रेस के टिकिट पर निर्वाचित विधायक प्रदुम्न सिंह लोधी की बीजेपी में वापसी की स्क्रिप्ट काफी पहले लिखी जा चुकी थी | उन्होंने अपना त्यागपत्र भी प्रोटेम स्पीकर को शनिवार को ही सौंप दिया था जिसे स्पीकर ने रविवार को स्वीकार कर लिया | बाद में उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा और मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने बीजेपी की सदस्यता ली | सियासत का जो नया अध्याय मध्यप्रदेश की राजनीति के लिए लिखा जा रहा है , उसकी यह सिर्फ एक बानगी मानी जा रही है | पर्दे के पीछे की पटकथा बताती है कि बीजेपी अपने इस नए अभियान से कई दिग्गजों को आइना दिखाने की तैयारी में जुटी है |
लोधी समाज से ताल्लुक रखने वाले प्रदुम्न सिंह मूलतः बीजेपी के ही थे | उमा भारती के ख़ास माने जाने वाले प्रदुम्न को जब 2018 के चुनाव में बीजेपी से टिकिट मिलने की गुंजाइस नहीं दिखी तो उन्होंने दमोह में कमलनाथ के मंच पर कांग्रेस की सदस्यता ली थी | कांग्रेस से टिकिट लेकर बड़ामलहरा से चुनाव लड़ा था | लोधी यादव बाहुल्य इस विधान सभा क्षेत्र में प्रदुम्न सिंह लोधी ने बीजेपी सरकार में मंत्री ललिता यादव को 15779 मतों से शिकस्त दी थी | सियासी सूत्र बताते हैं कि उमा भारती के ख़ास समर्थकों में उनकी गिनती होती रही है | | उमा भारती की राम रोटी यात्रा में भी उन्होंने ख़ास भूमिका निभाई थी | हिंडोरिया राजघराने के प्रदुम्न लोधी हिंडोरिया कृषि उपज मंडी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं | संगठन में भी उन्होंने महत्वपूर्ण दायित्व निभाया था | सियासत के जानकार बताते हैं कि डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया की तरह उनकी भी बीजेपी के नेता जयंत मल्लैया से पटरी नहीं बैठती थी | इन्ही हालातों के चलते कुसमरिया को पथरिया से और प्रदुम्न को बड़ामलहरा से टिकिट दिए जाने पर रोक लग गई थी | हालातों से मजबूर होकर दोनों ने कांग्रेस का हाथ पकड़ लिया था | बीजेपी में वी डी शर्मा के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद दोनों को लगा की अब उनकी संगठन में अनसुनी नहीं होगी तो पहले कुसमरिया और बाद में प्रदुम्न ने घर वापसी की |
प्रदुम्न जिन्हे लोग मुन्ना भइया भी कहते हैं ,उन्होंने बीजेपी की सदस्य्ता लेने के पहले उमा भारती का आशीर्वाद लिया उसके बाद वे बीजेपी अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा के साथ मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलने पहुंचे थे | उनके बीजेपी में प्रवेश करने के साथ ही बुंदेलखंड में राजनैतिक अटकलों का बाजार गर्म हो गया | कहा जाने लगा सिंधिया खेमे के गोविन्द राजपूत , और प्रदुम्न लोधी , कुसमरिया के बीजेपी में आने के बाद बुंदेलखंड के अब चार और विधायक बीजेपी में आ सकते हैं | जिनमे सबसे पहला शक दमोह के कांग्रेस विधायक राहुल लोधी पर गया | प्रदुम्न के चचेरे भाई राहुल लोधी ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी भी कीमत पर बीजेपी में नहीं जाएंगे | प्रदुम्न के बीजेपी में जाने की जानकारी के सम्बन्ध में उन्होंने कहा कि इसकी कोई जानकारी नहीं थी | मार्च माह में जब कांग्रेस में बड़ी तादाद में हड़कंप मची थी उस समय भी इन दोनों पर शक की सुई घूमी थी | मार्च में इन दोनों विधायकों ने संयुक्त पत्रकार वार्ता कर बीजेपी में जाने का खंडन भी किया था | इतना ही नहीं एक बड़े समाचार पत्र द्धारा इनके बीजेपी में जाने की खबर पर दोनों विधायक इतने नाराज हो गए थे कि अखबार के मालिक और सम्पादक को मानहानि का नोटिस भी भेजा था |
असल में इस दौर की राजनीति मे कुछ भी स्थाई नहीं रह पाता ,| यह कलयुग का कर्मयोग है जिसमे पहले फल की कामना फिर कर्म करने को प्रधानता दी गई है | प्रदुम्न जी को भी बेहतर फल प्राप्त हुआ घर वापसी के तोहफे के तौर पर नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष बन गए और केबिनेट मंत्री का दर्जा मिल गया |
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कांग्रेसी विधायकों की बीजपी में एंट्री को लेकर देश प्रदेश के सियासी गणित कुछ भी हो पर जमीनी समीकरण कुछ और कहते हैं | प्रदुम्न सिंह लोधी से 15779 मतों से चुनाव हारने वाली पूर्व मंत्री ललिता यादव पार्टी के इस निर्णय से खुश नहीं हैं | उन्होंने जिले के कांग्रेस विधायकों पर आरोप लगाया कि कांग्रेस की 15 महीने की सरकार में छतरपुर जिले के सभी कांग्रेसी विधायकों ने रेत का अवैध कारोबार ही किया हैं। बड़ामलहरा क्षेत्र में भाजपा के कार्यकर्ताओं को प्रताडि़त किया गया। अब अगर प्रदुम्न लोधी भाजपा में आए हैं तो उन्हें पार्टी की विचारधारा को अपनाना होगा ,उसी के हिसाब से चलना होगा । यदि वे पुराने ढर्रे पर चले तो हम उनका विरोध करेंगे। प्रदुम्न से मिली पराजय के सम्बन्ध में उन्होंने कहा कि में अपने को प्रदुम्न लोधी से हारा हुआ नहीं मानती, क्यों कि उन्होंने 2018 के विधान सभा चुनाव की तैयारी अपनी सीट छतरपुर विधानसभा से की थी | पार्टी ने रातों रात उन्हें बड़ामलहरा भेज दिया, जिसके परिणाम स्वरुप दोनों सीट भाजपा को गंवानी पड़ी। इन सीटों के नुकसान से ही प्रदेश में सरकार बनने से रह गई थी। उन्होंने कहा कि अगर वे छतरपुर की सीट से लड़तीं तो कभी नहीं हारतीं।
बीजेपी के पूर्व जिलाध्यक्ष पुष्पेन्द्र प्रताप सिंह ने तत्काल ही ललिता यादव को आइना दिखा दिया | उन्होंने कहा कि ललिता यादव को ऐसा नहीं कहना चाहिए कि सीट बदलने के कारण वे चुनाव हारी थीं। छतरपुर में पिछले चुनाव में अर्चना सिंह सीधी फाइट में सिर्फ 2700 वोट से हारी थी | जबकि 2014 में मोदी की लहर होने के बाद भी ललिता यादव 2100 वोट से चुनाव जीत पायी थीं। पिछले नगर पालिका चुनाव में ललिता यादव का पुत्र पार्षद का चुनाव भी हार गए थे। उन्होंने प्रदुम्न लोधी के भाजपा में शामिल होने का स्वागत किया और कहा कि वे युवा मोर्चा में उनके पुराने साथी रहे हैं अब जिले को पिछड़ा वर्ग से एक युवा और ऊर्जावान नेता मिला है।
मध्य प्रदेश में होने वाले 25 विधान सभा सीटों के उप चुनावों के राजनैतिक समीकरणो में जातीय गणित को समझा जाए तो बुंदेलखंड की बड़ामलहरा और सुरखी सहित 14 विधान सभा सीटें ऐसी हैं जिन पर लोधी मतदाता प्रभावी भूमिका में हैं | उमा भारती के बयान के बाद इस वर्ग के पार्टी से दूर होने की संभावना जताई जा रही थी | इन हालातों में पार्टी ने लोधी समाज के प्रदेश अध्यक्ष और बड़ामलहरा विधायक प्रदुम्न लोधी की घर वापसी कराकर और उन्हे केबिनेट मंत्री का दर्जा देकर ओबीसी मतों पर अपनी पकड़ मजबूत की है | लोधी समाज के बड़े नेताओं में उमा भारती और प्रह्लाद पटेल के बाद प्रदुम्न लोधी का ही नंबर आता है वे समाज के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं | लोधी समाज बीजेपी का स्थाई वोटबेंक भी माना जाता है | हालांकि उन्होंने कांग्रेस छोड़ने की जो वजह मीडिया को बताई है वह सियासी तौर पर किसी के गले नहीं उतर रही है | उन्होंने कहा कि जनता का कर्ज चुकाना है , बुंदेलखंड पिछड़ा और उपेक्षित है लगातार पलायन हो रहा है , कमलनाथ ने उनकी सिचाई परियोजना को स्वीकृत नहीं किया था अब इस सरकार ने तत्काल ४५० करोड़ की सिचाई परियोजना को स्वीकृत कर दिया है | शिवराज और उमा भारती शीघ्र ही उसका भूमि पूजन करंगे |
सियासी समीकरण बताते हैं की बीजेपी का यह दूरगामी दांव है जो आने वाले समय में एक बड़े परिवर्तन की और इशारा कर रही है | सियासत के जानकार कहते हैं की बीजेपी का एक टाइगर अब कमजोर होता जा रहा है ,| उसके स्थान पर पार्टी से जुड़े किसी नए चेहरे पर अगला विधान सभा चुनाव पार्टी लड़ेगी ,| तब तक उन तमाम लोगों को बीजेपी से जोड़ा जाएगा जिनकी विचारधार बीजेपी से मिलती जुलती है |
रवीन्द्र व्यास
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