बुंदेलखंड की डायरी
पलायन की बेबसी
रवीन्द्र व्यास
इन दिनों हर व्यक्ति बेचैन सा नजर आता है , कोरोना के खौफ के साये में अब हर कोई है | बुंदेलखंड के 7 जिलों में कोरोना ने अपनी दस्तक दे दी है| वही झांसी में कोरोना के बढ़ते ग्राफ ने भी लोगों की बेचैनी बड़ा दी है | बाहर से लौट रहे मजदूरों को लेकर प्रशासन सतर्कता तो बरत रहा है,पर चोरी छिपे आ रहे लोगों ने प्रशासन को बेचैन कर रखा है | सरकार की रेलगाड़ियां मजदूरों की संख्या के सामने कम पड़ रही हैं | घर पहुँचने को मजबूर मजदूर कहीं अपनी जिंदगी से हाथ धो रहा है तो कहीं लुट रहा है मजदूरों के साथ जब भारत का भविष्य लंगड़ाते हुए चलता है , तो देखा नहीं जाता |
इन दिनों सोसल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीर मन को व्यथित देती हैं | दो बच्चियां अपने माता पिता के साथ वापस अपने गाँव की ओर जा रही हैं | उनसे चला नहीं जा रहा तो वे किसी तरह लंगड़ा कर पैर पटक कर आगे बाद रही हैं | बच्चे तो भारत का भविष्य होते हैं और देश का ये भविष्य अगर लंगड़ा कर चले तो किसे चैन मिलेगा |
चल उड़ जा रे पंछी कि अब ये देश हुआ बेगाना
भूख ,बेबसी ,मज़बूरी और एक अच्छे भविष्य की कल्पना ने गाँव ,कस्बो और छोटे शहरों से लोगो को महानगरों में पहुंचाया | महानगरों की महाकाया को इन लोगों ने अपने श्रम से विशाल स्वरुप दिया , उद्योगों में अपनी कुशलता से कार्य किया | आज उन्ही महानगरों पर कोरोना वायरस ने ऐसा हमला बोला है कि लोगों को फिर से अपने गाँव की और लौटना पड़ रहा है | महानगरों में इन शिल्पियों के पास दो माह से करने की लिए कुछ नहीं था , शिल्प के हर मार्ग पर ताले पड़े हैं | जिनके भरोषे ये महानगरों में रुके थे उनने भी खिलाने से इंकार कर दिया | ऐसे हालातों में इनके सामने घर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था | नतीजन कोई टेंकरों में बैठ कर निकला तो कोई सब्जियों और फलों के ट्रको में छिप कर निकले | जिन्हे कुछ नहीं मिला वे साइकिल लेकर निकले , जिनके पास साइकिल खरीदने के भी पैसे नहीं थे वे पैदल ही निकल लिए |
ऐसे ही आम के ट्रक में छिप कर आ रहे बुंदेलखंड के मजदूर ट्रक पलटने से मारे गए | नरसिंह पुर जिले के एन एच 44 (पूर्व का 26) पर शनिवार रात मुंगवानी-पाठा के समीप आम सेलदा ट्रक पलट गया। इसमें अवैध रूप से बैठाकर ले जा रहे 20 मजदूरों में से 5 की मौत आम कीपेटियों के नीचे दबकर हो गई। 15 घायलों में से 2 की हालत नाजुक होने पर उन्हें जबलपुर मेडिकल हॉस्पिटल रेफरकर दिया गया। जबकि 13 अन्य मजदूरों काजिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। ये सभी मजदूर हैदराबाद में कोरंटीन करने के बादचोरी-छिपे अपने घर झांसी-एटा जा रहे थे। तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्रराज्यों के अलावा सिवनी जिले के तीन-तीन चेकपोस्ट से ये ट्रक गुजरता रहा लेकिनकहीं पर भी इस ट्रक की जांच करने की जरूरत नहीं समझी गई |
इस घटना के हफ्ते भर पहले ही छतरपुर जिले के लोगों ने ऐसा ही एक भयावह मंजर देखा था | चंदला थाना क्षेत्र के पटली गाँव में पांच साल की मासूम और पांच मजदूरों की अर्थियां रखी गई तो हर आँख से आंशू रुक नहीं रहे थे | ताला बंदी के कारण ये मजदूर छतरपुर आना चाह रहे थे | मथुरा बस स्टेण्ड तक जाने के लिए एक टेक्सी में सवार हो गए , तभी एक मिनी ट्रक की जोरदार टक्कर से ये हादसा हो गया | जिला प्रशासन ने सरकार के आदेश पर मथुरा तक एम्बुलेंस भेजकर श्रमिकों के शवों को गाँव तक भेजा गया | सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मृतको के परिजनों को चार चार लाख की सहायता राशि दी है | बीजेपी अध्यक्ष वी डी शर्मा ने अपने लोकसभा क्षेत्र के मजदूरों के साथ हुए इस हादसे पर दुःख जताया ,परिजनों को फोन कर हर विपदा में साथ रहने का विश्वास दिया |
जिस ६ मई को छतरपुर जिले में एक साथ पांच मजदूरों की दाहक्रिया हो रही थी उसी रात सागर जिले के बंडा के पास मजदूरों से भरी पिकअप को ट्रक ने टक्कर मार दी इसमें तीन की मौत हो गई | महराष्ट्र से ये 21 मजदूर अयोध्या जी अपने गाँव जा रहे थे | विन्ध्य के 16 मजदूरों की महाराष्ट्र के औरंगाबाद में मालगाड़ी से कटकर मौत की घटना के बाद सरकार ने शवों को लाने के लिए वाहन की व्यवस्था की | मृतकों के परिवार को आर्थिक सहायता भी दी |शहडोल जिले के अतौली गाँव के सबसे ज्याद मजदूर हादसे के शिकार हुए | इस गाँव में अधिकारी ५ लाख की सहायता राशि का चेक लेकर प मृतक मजदूर दीपक के घर पहुंचे | दीपक के पिता ने यह कहते हुए चेक लेने से इंकार कर दिया कि ये आप ही रख लो दीपक की इकलौती निशानी उसके बेटे को पड़ा लिखा कर एक नौकरी दिलवा दो ताकि ये मजदूर ना बने | दो एकड़ जमीन इनके परिवार में है बीपीएल कार्ड ना होने से इनको राशन भी नहीं मिलता | बदत्तर आर्थिक हालात के चलते दीपक को मजदूरी करने जाना पड़ा था |
औरंगाबाद हादसे के बाद प्रवासी मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी के लिए एक याचिका भी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है | याचिका में अनुरोध किया गया है की कोर्ट सरकार को प्रवासी मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी का निर्देश सरकार को दे | दरअसल ये कुछ घटनाएं हैं जो समाज को विचलित करती हैं | ऐसे दौर में भी सीमावर्ती उत्तर प्रदेश में मजदूरों के प्रवेश को लेकर पाबंदी का सामना करना पद रहा है | हर सरकार अपने राज्य को सुरक्षित बनाने में ऐसी जुटी है कि मजदूरों के दर्द का उन्हें कोई ख्याल ही नहीं है ऐसा ही एक मामला छतरपुर-जिले का कैमाहा नाका उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के सीमा नाका पर देखने को मिला | रविवार को यहां गुजरात ,महराष्ट्र सहित अन्य प्रांतों से आये मजदूरों की बेबसी देखते ही बनती थी | उत्तर प्रदेश की पुलिस ने उनके प्रवेश पर पाबंदी लगा दी थी | यूपी प्रशासन की इस हरकत से मजदूरों ने हंगामा किया , इस राष्ट्रीय राजमार्ग कई किमी का जाम लग गया |
महोबा उत्तर प्रदेश और छतरपुर मध्यप्रदेश अधिकारियों की चर्चा के बाद मामला सुलझा और देर शाम को उनको जाने की अनुमति मिली |
उप्र के के रहने वाले ये मजदूर अपनी पत्नी ,बच्चों के साथ अपने अपने साधनो से केमाहा सीमा तक पहुंचे थे | देश के अलग अलग शहरों से पैदल और वाहनों से पहुंचे इन लोगों को यूपी पुलिस ने जाने नहीं दिया | बेबस मजदूरों के सामने समस्या ये थी कि वहां ना खाने की व्यवस्था थी और ना उनके पास इतने पैसे थे कि वे अपने बच्चों को खिला सकें | छतरपुर प्रशासन ने समाजसेवियों की मदद से इनके भोजन पानी की व्यवस्था कराई | वर्तमान दौर में जहां आये दिन मजदूरों के साथ हादसे की खबरें आ रही हैं ऐसे में प्रशासन को भी मानवीय संवेदनाओ का ध्यान रखना चाहिए | ये वो दौर है जब मजदूर महानगरों में बेबसी की जिंदगी जी रहा था | दो माह से उसके पास करने की लिए कुछ नहीं था | फैक्ट्रियां बंद पड़ी हैं और निर्माण कार्यों का काम बंद है | जिनके भरोषे ये महानगरों में रुके थे उनने भी खिलाने से इंकार कर दिया | ऐसे हालातों में इनके सामने घर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा |


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