28 अप्रैल, 2020

बहुउपयोगी महुआ वृक्ष पर संकट का साया




बुंदेलखंड की डायरी
बहुउपयोगी महुआ वृक्ष पर संकट का साया
रवीन्द्र व्यास
उत्तर भारत के जंगलों में एक वृक्ष पाया जाता है जिसे लोग महुआ के नाम से जानते हैं |  विशाल वृक्ष महुआ एक ऐसा वृक्ष है   जिसके  फल ,फूल ही नहीं बल्कि वृक्ष के सभी अंग उपयोगी हैं | इस वृक्ष की उपयोगिता और अर्थतंत्र गाँव में जाकर ही समझा जा सकता है | इसीलिए इसे बुंदेलखंड में कई गाँव के लोग कल्प वृक्ष भी कहते हैं |  मार्च अप्रेल का महीना इसके पुष्पों के टपकने का समय होता है | ग्रामीण क्षेत्रो में इस समय का लोग बड़ी ही बेसब्री से इन्तजार करते हैं | इस बार ग्रामीण इलाकों में भी इसके संग्रहण में लोगो को लाक डाउन की समस्या आई | ग्रामीणों की अर्थव्यवस्था को सम्बल देने वाले इस वृक्ष पर भी दबंगों का काला साया मंडराने लगा है |


                                                      महुआ का एक अकेला  वृक्ष केवल अपने फूल और फल से हर वर्ष 5 से 10 हजार की आय करा देता है | मार्च -अप्रेल के महीने में इसके टपकते पुष्पों को एकत्र करने के लिए लोग , रात से ही इस वृक्ष टेल अपना बसेरा बना लेते हैं ,||  महुआ एकत्र करने के बाद उन्हें सुखाया जाता है , कुछ अपने उपयोग में रख लिए जाते हैं बाकी बाजार में बेंच दिए जाते हैं | बाजार में इसके खरीद दार ३० रु से 70 रु प्रति किलो के भाव से खरीद लेते हैं |  घर के इस्तेमाल में इसका उपयोग अनेक तरह के व्यंजन बनाने में होता है  बुंदेलखंड में इसे  बुंदेली मेवा  भी कहते हैं दरअसल इसकी पौष्टिकता और औषधीय गुण अदभुत माने जाते हैं | 

महुआ के ये पुष्प इतने रसीले और मीठे होते हैं कि आदमी तो ठीक जानवर भी यदि इसका स्वाद ले ले तो बार बार उसी वृक्ष के नीचे पहुँच जाता है |  मधु जैसी मिठास लिए इस पुष्प की मादकता का ही असर है कि इससे बड़े पैमाने पर शराब भी बनाई जाती है | इसके फूलने के दौरान ही जंगल में अजब तरह की मादकता छा जाती है |  बंजर जमीन पर भी उग जाने वाला यह  वृक्ष जब लोगों को संम्पन्नता दे, उनको निरोगी बनाये तो लोग इसे कल्प वृक्ष क्यों ना कहें |
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वृक्षों पर दबंगो का कब्जा

 इस गुणकारी वृक्ष की महिमा ही कुछ ऐसी है कि लोगों की नियत डोल  ही जाती है  | जब लोगों की नियत सिर्फ स्वयं के विकाश और संम्पन्नता तक सिमट जाये  तो कुछ भी हो सकता है | ऐसा ही एक वाक़या बताया बड़ामलहरा (छतरपुर ) के    रामकृपाल शर्मा ने | वे बताते हैं कि  सरकार ने  लघु वनोपज के तहत आने वाले आचार, महुआ फूल फल (गुली) आदि को  मुक्त रखा है |  सभी वर्गो को जंगल से सग्रहण करने की छूट दी हुई है | सरकार की मंशा साफ़ है कि इससे गाँव के लोगों की आर्थिक दशा में सुधार होगा |   र बड़ामलहरा वन उप संभाग के  इलाके में महुआ वृक्षों के जंगलों पर और वृक्षों पर  दबंगों ने कब्जा कर लिया है ।  हालात ये हो गए हैं  कि दंवग  कब्जा वाले  महुआ  बृक्षो को पांच -पांच सौ रुपये
 नीलाम करने लगे हैं |  क्षेत्र के दबंगो ने अपनी दबंगई के हिसाब से बटवारा कर लिया है |  दबंग जंगलो से महुआ फूल संग्रहण करने बालों से बतौर टैक्स के रूप मैं आधा बसूल कर रहे हैं।
               कलौथर एवं जसगुवा के ग्रामीणों ने वन मंडलाधिकारी छतरपुर से इस मामले की शिकायत भी की थी | इसके बावजूद कोई कार्यवाही नहीं हुई । दो वर्ष पूर्व बड़ामलहरा क्षेत्र की आधा दर्जन वन सुरक्षा समितियों ने अलग अलग  प्रस्ताव पारित कर वन परिक्षेत्र कार्यालय एवं वन मंडल कार्यालय भेजा था | प्रस्ताव में  उल्लेख किया गया था कि इस क्षेत्र के जंगलों मैं महुआ  के पेड़ अधिकता मैं पाये जाने की वजह से महुआ के  जब फल फूल आते  हैं  उस समय कुछ लोगो  अपना कब्जा  कायम कर लेते हैं |  परिणामतः  अन्य लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाता।इसलिए वन सुरक्षा समितियों के माध्यम से प्रत्येक वन बीट मैं पाये जाने बाले महुआ के पेड़ों की गणना करवाई जाए |   बीट मैं निवास करने बाले लोगों को  फूल फल संग्रहण करने के साथ ही उनकी सुरक्षा का जिम्मा भी सौंपा जाए | वन सुरक्षा समितियों के इस  प्रस्ताव पर  वन मंडल कार्यालय ने  कार्यवाही तो दूर जबाब  देना भी उचित नहीं समझा।

 महुआ के औषधीय गुण

संस्कृत में महुआ को मधुक वृक्ष के नाम से जाना जाता है | वानस्पतिक नाम मधुका लोंगफोलिया है | औषधीय गुणों की खान महुआ वृक्ष की छाल ,पत्तियां, फल, बीज और फल भी अद्भुत गुणकारी हैं | महुआ के फूल में प्रोटीन , कैल्शियम ,फास्फोरस और शुगर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है | सर्दी जुकाम खांसी ,पेट ,बवासीर और श्वसन सम्बन्धी रोगों  में इसके फलों और फूलों का उपयोग किया जाता है |  इसके बीजों का उपयोग निमोनिया ,त्वचा  रोग के लिए किया जाता है  | इस वृक्ष की छाल का काढ़ा भी त्वचा,डायबटीज़ ,अल्सर,और गठिया रोग में भी   बहु उपयोगी है | महुआ के बीजो का तेल भी गठिया रोग में लाभदायक माना जाता है | पशुओ के रोग नाशक के साथ ही  दुधारू पशुओं के  दूध में वृद्धि भी महुआ के पुष्प करते हैं |

बढ़ती आबादी और घटते वृक्ष

अभी हाल ही में 22 अप्रेल को अंतर्राष्ट्रीय  पृथ्वी दिवस मनाया गया , पृथ्वी को बचाने की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपील की गई | दरअसल पृथ्वी का श्रृंगार वृक्ष हैं  और  विकाश की इस दौड़ में पृथ्वी के श्रृंगार को  कोई कसर नहीं छोड़ी | बुंदेलखंड इलाके में  महुआ , अचार ,तेंदू , हर्र ,बहेरा के वृक्ष जंगलों में बहुतायत में पाए जाते थे | अब हालात ये हैं कि तेंदू , आचार , ,हर्र ,बहेरा  के वृक्ष बिलुप्त होने के कगार पर पहुंच गए  हैं। जिस हिसाब से महुआ के वृक्ष काटे जा रहे हैं  वह दिन दूर नहीं जब महुआ प्रजाति के पेड़ भी  संकट ग्रस्त प्रजाति मैं शुमार हो जायेंगे।


21 अप्रैल, 2020

कोरोना प्रभाव _ बिन अर्थ सब व्यर्थ


बुंदेलखंड की डायरी



रवीन्द्र व्यास

बुंदेलखंड के अधिकांश जिले ग्रीन जोन  में हैं फिर भी यहाँ  एक अजब सा सन्नाटा छाया है , गालियां सूनी हैं ,बाजार बंद हैं ,कारोबार ठप्प हैं , खेत खलिहाँन सूने पड़े हैं | किसान परेशान हैं उनको अपनी उपज  को  कम दरों पर बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है | सब्जी किसानो की हालात तो और भी खराब है ,| लोगों की जेबें खाली  हैं  बुंदेलखंड के ग्रामीण इलाकों में  लोग वस्तु विनमय से अपनी जरुरत की पूर्ति करने को मजबूर हो रहे हैं | बिन अर्थ सब व्यर्थ वाली कहावत चरितार्थ हो रही है | | हालांकि इन सब हालातो से निपटने के लिए शासन ,प्रशासन , सामजिक सरोकार से जुड़े लोग और जन प्रतिनधि अपने अपने स्तर से प्रयास करने में जुटे हैं |                                                      बक्स्वाहा के राजू दुबे बताते हैं कि इस बार हमने  टमाटर और शिमला मिर्च लगाईं थी | फसल भी अच्छी हुई थी , लाकडाउन की वजह से  टमाटर  और शिमला मिर्च नहीं बिक पाई जिसके चलते हमें करीब चार लाख का नुकशान हुआ | वो बताते हैं कि असल में बक्स्वाहा से  हमारे टमाटर सागर ,दमोह ,टीकमगढ़ और छतरपुर की मंडियों में आसानी से पहुंच जाते थे जिस कारण अच्छे दाम भी मिल जाते थे |  यह कहानी अकेले राजू की नहीं है इस तरह के हालात अनेकों  गाँवों  में देखने को मिले |  कहीं किसानो ने माटी मोल टमाटर बेंचे तो कहीं जानवरो को फसलें  खिला दी | यह हालात सिर्फ किसी एक जिले में नहीं बल्कि बुंदेलखंड के हर जिले में देखने को मिल रहे हैं |  एक दिन बाद खुलते बाजारों और परिवहन के प्रतिबंधों ने इनकी मुश्किलें बड़ाई हैं |  गर्मियों के मौसम में टमाटर,भिंडी ,लौकी ,तोरई टिंडा ,करेला,पालक ,शिमला मिर्च की खेती होती है |  जल की पर्याप्ता के कारण इस बार फसलें अच्छी हुई थी | पर लोक डाउन के कारण किसानो के अरमानो पर पानी फिर गया |  हर दिन टूटने वाली फसल अगर एक भी दिन आगे पीछे होती है तो इसका असर  उस फसल पर देखने को मिलता है | ऐसी दशा में वह बेचने में योग्य नहीं रह पाती है |                                                 
असर सिर्फ सब्जियों पर ही देखने को नहीं मिला बल्कि  पान और फूलों पर भी देखने को मिला है | बुंदेलखंड के छतरपुर ,पन्ना, दमोह , सागर ,टीकमगढ़ , महोबा ,ललितपुर के कई इलाकों में बड़े भू भाग पर पान की फसलों का उत्पादन होता है | पान की फसल सर्वाधिक नाजुक फसलों में से एक मानी जाती है | पान दुकानों के बंद रहने के कारण  पान अपने बरेजे में ही नष्ट हो रहा है \  यही हालात फूलों की फसलों का भी है |                                                                                             
सरकार ने आम  लोगों  की  परेशानी को देखते हुए तीन तीन माह  की  राशन सामग्री बांटने का आदेश दिया था|  संकट के इस  दौर  मे कई  समाज सेवी गरीबों और  भूखों को राशन वितरण कर मदद कर रहे है|  यहां तक बुंदेलखंड में कई जिलों में वृहन्नलला भी सामग्री बाँट कर पुण्य कमा रहे हैं |  वही धवाड समिति की तीन उचित मूल्य की दुकानों में जरुरत मंन्दो के एक माह का  राशन  हड़पा जा रहा है | सरकार  ने तीन माह की राशन सामग्री बांटने का आदेश दिया था , किन्तु इस समिति में मात्र दो माह का ही राशन लोगों को दिए जाने की शिकायत गाँव वालों ने की है  छतरपुर जिले के राजनगर तहसील क्षेत्र की |धवाड सोसाइटी की  उचित मूल्य की दुकानों पर एक ही परिवार के नाते रिस्तेदार सेल्स मेन हैं |   गाँव बालो ने कई बार अधिकारियो से शिकायत की पर  इस  संकट काल में किसी को सुनने की फुर्सत नहीं हैं |   जिस जिले में अधिकारियों की नियत 30 किलो चावल के लिए खराब हो जाए उस जिले में समितियों के कारिंदों की नियत खराब हो जाए तो क्या आश्चर्य | छतरपुर जिले के लवकुशनगर जनपद के  भगौरा गाँव में अजब नजारा  देखने को मिला था | गाँव की शासकीय राशन वितरण  केंद्र से जनपद सीईओ सिकंद्दर खान  30 -40 किलो चावल की बोरी ले गए | ये सब नजारा एक ग्रामीण ने  अपने मोबाइल फोन में रिकार्ड कर लिया | खान साहब तो  बच्चो के मध्यान्ह भोजन के चावल का हिस्सा  ले गए थे | मामले की शिकायत पर छतरपुर कलेक्टर ने जांच करवाई  और जांच में दोषी पाए जाने पर उन्हें  निलंम्बित कर दिया गया |   
गेंहू की खरीद फरोख्त
सरकार ने १५ अप्रेल से गेंहू की खरीद का कार्य शुरू किया है |  पहले छह किसानो को एसएमएस भेज कर खरीद केंद्र पर अनाज लेकर आने को कहा गया था बाद में यह संख्या बढ़ाई गई | खरीद बिक्री के इस खेल में प्रशासन और किसान दोनों ही सामने आई चुनौतियों का सामना कर रहें हैं  | समितियों और मंडी के लोग इस बात को लेकर परेशान हैं कि  उनके पास  पर्याप्त श्रमिक नहीं हैं | लॉक डाउन के कारण  बिहार से आने वाली  श्रमिकों की टीम नहीं आई है |  बिहारी श्रमिकों की यह टीम तौलने , पल्लेदारी और बोरियों को सिलने में निपुण होती थी , उनके ना आने के कारण अब  स्थानीय स्तर पर श्रमिकों को जुटाया जा रहा है जिनके कार्य की गति थोड़ी धीमी है |                                         
    दूसरी तरफ बेबस किसान व्यापारियों को कौड़ियों के दाम पर अपनी फसल बेचने को मजबूर हैं || इसके पीछे किसानो की मज़बूरी के साथ ही अर्थतंत्र का वह प्रवाह भी है जिसके चलते किसान को तत्काल पैसे मिलते हैं | जो उनकी तात्कालिक जरूरतों की पूर्ति के लिए आवशयक होते हैं | पिछले दिनों सागर जिले में ऐसे ही एक व्यापारी को पुलिस ने पकड़ा भी था |                   
 मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के   बुंदेलखंड के 14 जिलों में  सिर्फ तीन  जिलों में ही कोरोना संक्रमित व्यक्ति पाए गए हैं | अधिकाँश जिले  ग्रीन जोन में हैं यह बुंदेलखंड के लिए राहत की बात है | पर लोकडाउन के कारण  किसानो , कारोबारियों ,रोज कमाने खाने वालों  में  अर्थाभाव की पीड़ा देखने को मिल रही है |             
 रवीन्द्र व्यास

17 अप्रैल, 2020

बुन्देलखण्ड : तबलीग जमात ने बढाई बुन्देलखण्ड की मुश्किलें

बुन्देलखण्ड : तबलीग जमात ने बढाई बुन्देलखण्ड की मुश्किलें: बुंदेलखंड की डायरी तबलीग जमात ने बढाई बुन्देलखण्ड की मुश्किलें   रवींद्र व्यास बुंदेलखंड का इलाका  कोरोना की शुरुआत से लेकर  मार्च ...

बुन्देलखण्ड : नमस्ते ओरछा से जटायु राज बेचैन

बुन्देलखण्ड : नमस्ते ओरछा से जटायु राज बेचैन: बुंदेलखंड की डायरी   नमस्ते ओरछा   से   जटायु राज बेचैन   रवीन्द्र   व्यास    पवित्र नगरी में राम भक्त जटायु राज हुए ...

08 अप्रैल, 2020

6 रुपये के लिए जान जोखिम में

तबलीग जमात ने बढाई बुन्देलखण्ड की मुश्किलें

बुंदेलखंड की डायरी

तबलीग जमात ने बढाई बुन्देलखण्ड की मुश्किलें  

रवींद्र व्यास

बुंदेलखंड का इलाका  कोरोना की शुरुआत से लेकर  मार्च अंत तक कोरोना से एक तरह पूर्णतः मुक्त रहा |  बुंदेलखंड के  उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के सभी जिलों से संदिग्धों की जांच  रिपोर्ट निगेटिव ही आई थी | हाल ही में  तब्लीगी जमात के दो  व्यक्ति  बांदा में कोरोना संक्रमित पाए जाने से  बुंदेलखंड में हड़कंप मच गया |  अमूमन बुंदेलखंड के हर जिले में तब्लीगी जमात से जुड़े लोग रहते हैं |  सरकार और  प्रशासन के सामने तब्लीगी समाज एक दूसरी बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है ,जबकि  पहले से ही प्रशासन तंत्र  मजदूरों ,विदेशियों  और बाहर रह रहे लोगों की वापसी की समस्या को लेकर परेशान है |     इन तमाम हालातों से निपटने के लिए प्रशासन तंत्र हर तरह   से जुटा है |


 बांदा के खुटला मोहल्ले की हिरा मस्जिद से 18 जमातियों को पुलिस  ने बाहर निकाल कर उनका मेडिकल चेकअप  कराया |  इनमे से कुछ ऐसे भी थे जो निजामुद्दीन की मरकज में सम्मलित हुए थे | प्रशासन ने 1 6  सेम्पिल जांच के लिए भेजे थे  | बांदा  के मर्दन नगर इलाके में रहने वाले इस  युवक के कोरोना पोज़िटिव पाए जाने के बाद  प्रशासन ने यहां तमाम तरह की पाबंदिया लगाईं हैं |  लोग बताते हैं कि यह युवक  तब्लीगी जमात के मरकज में सम्मलित हुआ था | इसके ठीक बाद यहां का एक और युवक कोरोना पॉजिटिव पाया गया , यह युवक भी  मरकज में सम्मलित हुआ था | प्रशासन  अब इस तलाश में जुट गया है कि ये लोग किस किस के सम्पर्क में आये थे |   चित्रकूट मंडल से कई  लोग मरकज में सम्मलित हुए थे, ऐसे लोगों के सम्पर्क में आये ३२ लोगों को चिन्हित किया गया है | चिन्हित लोगों के सेम्पल जांच के लिए भेजे गए जिनमे बांदा के दो लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए | पुलिस ने  बांदा जिले के हथौरा के जामिया अरबिया मदरसा प्रबंधन के खिलाफ  जमातियों को छिपाने का मुकदमा दर्ज किया है। मदरसा प्रबंधक औरमरकज से लौटे महाराष्ट्र,आंध्रा के कई छात्रोंके खिलाफ जमातियों को छिपाने और इसकी सूचना प्रशासन को न देने का मुकदमा दर्ज कियागया है।हथौरा मदरसे में जिला प्रशासन ने 31 मार्च की शाम सेही  पुलिस का पहरा बैठा दिया है। मदरसे के  600 से अधिक छात्रोंको होम क्वारंटाइन किया गया है। बांदा जिले के  बिसंडा थाने के शिव गांव के चारजमातियों पर भी दिल्ली मरकज से लौटने की जानकारी छिपाने का मुकदमा दर्ज किया गयाहै।

बांदा  जिले की सीमाएं   छतरपुर और  पन्ना  जिले के अलावा महोबा ,हमीरपुर ,चित्रकूट से  लगी हैं | सीमाएं लगी होने के कारण  मध्यप्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिले के कलेक्टर ने विशेष सतर्कता बरतने के आदेश दिए हैं |  सीमावर्ती क्षेत्रो से आने जाने वालों पर सख्त पाबंदी लगाईं गई है |  उत्तरप्रदेश के बांदा जिले में कोरोना पॉजीटिव मिलने  के बाद से  बाहर से आने वाले लोगों को बकायदा स्क्रीनिंग के बाद ही क्वारंटाईन किया जा रहा है। सागर रेंज के आईजी अनिल शर्मा ने भी  छतरपुर और पन्ना  जिले का  भ्रमण कर  व्यवस्थाएं देखीं  थी । छतरपुर जिले के  चंदला, गौरिहार  ब्लॉक की सीमाएं सीधे तौर पर बांदा जिले से मिलती हैं |  इन ब्लॉक के सीमावर्ती गाँवों का  मुख्य  कारोबार और  बाजार भी बांदा से ही होता है | इन हालातों को देखते हुए  इन स्थानों पर  विशेष निगरानी पुलिस प्रशासन द्वारा की जा रही है | 

 पन्ना जिले की  अजयगढ तहसील  बांदा जिले की सीमा से लगी है । यहां  उत्तरप्रदेश  को जोडने वाले सभी रास्तों पर  पुलिस का सख्त पहरा लगा दिया गया है।  आम आदमियों की आवाजाही  रोक  दीगयी है।  एसडीएमबी बी पांडेय बताते हैं कि   अजयगढ पन्ना मार्ग को भी पूर्णता बन्द कर दिया गया है। तहसील के कुछ गाँव  जो उत्तरप्रदेशकी सीमा के अंदर  है  चंदौरा, बरोली, खरौनी, नरदहा, रामनई, कटर्रा, मौकज, बीरा, नयागांव,  बीहरसरवरिया, नयापुरवा, कीरतपुरवा का तिराहा, हरनामपुर, खोरा में भी  उत्तरप्रदेश की सीमा से आवाजाही कोबन्द कर दिया गया है। उत्तरप्रदेश कीसीमा से लगे हुए सभी 41 गांव में फिर से सर्वै कराया जा रहा है |

तब्लीगी जमात के  लोगों के झाँसी,महोबा,छतरपुर ,दमोह  और सागर में मिलने के बाद  प्रशासन  बेहद सतर्क है | उसके सामने एक बड़ी चिंता  मध्य प्रदेश के  इंदौर और भोपाल में कोरोना वायरस के तेजी से फैलने को लेकर भी है |  असल में बुंदेलखंड  के सागर ,टीकमगढ़ ,दमोह, छतरपुर ,पन्ना , ललितपुर, झाँसी ,महोबा  और बांदा के  छात्र छात्राये बड़ी संख्या में इंदौर  और भोपाल  में पढ़ाई करते हैं ,कोचिंग  पढ़ने जाते हैं |  हालांकि आवागमन प्रतिबंधित है  इसके बावजूद  भी  सोमवार को एक वाहन में सवार 7  लोगों के इंदौर  से छतरपुर जिले में आने पर  प्रशासन  हलाकान हो गया | सभी को पकड़ कर कोरोंटाइन किया गया |  असल समस्या ये भी है की बाहर से आने वाले अधिकांश लोग अपनी जांच  करवाने  से परहेज करते हैं |

मजबूर हुए मजदूर 



 22 मार्च से जनता का काम रुक गया, 24 मार्च से तालाबंदी शुरू हो गई, सारे काम बंद हो गए  हमारे पास कोई काम नहीं था आगे भी काम मिलने की उम्मीद नहीं थी  इस कारण हमने  अपने पैतृक गांव वापस आना ही उचित समझा |  यह कहानी लगभग  बुंदेलखंड  वापस लौटे  लगभग सभी मजदूरों की है |   इन मजदूरों की मज़बूरी का फायदा  उन  ठेकेदारों ने भी उठाया जो  इन्हे मजदूरी के लिए ले गए थे |  ठेकेदारों ने  इनको मिलने वाली आधी रकम का ही भुगतान किया | कहा गया जब लौट कर आओगे तो  पैसा मिल जाएगा |  मजदूरों के सामने दूसरी समस्या आई  उनके परिवहन की  , जाएँ तो जाएँ कैसे  ?  समस्या बड़ी थी पर   अपने घर आने की जल्दी भी थी  , पैदल ही निकल पड़े  , बीच बीच में मिले  परिवहन के साधनो का भी इस्तेमाल करते रहे |  यहां भी इन मजबूर मजदूरों की मजबूरी का फायदा उठाने से  वाहन मालिक नहीं चूके |  एक बात अच्छी रही कि  जहाँ भी इन्हे पुलिस मिली उसने इन लोगों का भरपूर सहयोग किया , जो भी खाने  पीने  को था  वह उपलब्ध कराया गया |  जिला में पहुँचते ही इनका मेडिकल टेस्ट कराया गया, भोजन की व्यवस्था की गई   और  उनके गाँव तक पहुंचाने के लिए वाहन उपलब्ध कराये गए |  गाँव में भी  मेडिकल जाँच हुई  १४ दिन के कोरन्टाइन में रहने की व्यवस्था की गई | इनकी देख रेख के लिए  , पटवारी, आगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, पंचायत सचिव की ड्यूटी लगाईं गई ।   
                  



  मध्यप्रदेश  और उत्तर प्रदेश में फैले  बुंदेलखंड के १४ जिलों के लोग  बड़ी तादाद में मजदूरी के लिए महानगरों की और पलायन करते हैं |   देश में लाक  डाउन   के बाद  इन १४ जिलों  में  5  से 6  लाख लोगों के वापस आने की उम्मीद जताई जा  रही है |  हालंकि  प्रशासनिक आंकड़े  दो ढाई लाख लोगों की वापसी  ही बता रहे हैं |   मजदूरों की वापसी के बाद  लगभग हर जिले में  स्वयं सेवी संस्थाओं  के माफिया सक्रीय हो गए |  वे दावा  करने लगे कि  मजदूरों की कोई जांच नहीं हो रही  गाँव में वे क्वेरनटाइन नहीं किये जा रहे हैं |

                                              अब एक बात  बड़ी साफ़ है कि  कोरोना से संघर्ष लंबा है ,  साधन सिमित हैं , हालात बेहतर बनाने के लिए हर  हिन्दुस्तानी को आगे आना होगा |

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

  बुंदेलखंड की डायरी  विकास की उमंग और चुनौतियों के  संघर्ष का  बुंदेलखंड  रवीन्द्र व्यास  दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए    2025  में कई...