10 फ़रवरी, 2020

चले थे नायक बनने, बन गए खलनायक

बुंदेलखंड की डायरी 
चले थे नायक बनने, बन गए खलनायक 
रवीन्द्र व्यास 
बुंदेलखंड ,इलाके में जो ना हो जाए वह थोड़ा है ऐसा ही कुछ  नजारा पिछले दिनों छतरपुर जिले में देखने को मिला |  प्रशासनिक षड्यंत्र का ऐसा खेल लोगों को देखने को मिला जिसकी मिसाल देश प्रदेश में कहीं देखने को नहीं मिलती छतरपुर  तहसील के एसडीएम ने ऐसा  जबरदस्त कारनामा कर दिखाया  जो किसी फ़िल्मी पटकथा से कम नहीं था जिसमे  नायक  नजर आने वाला अधिकारी खलनायक  बन जाता है |  
             इस जीवन्त  कथा में  शहर के दबंग माने जाने वाले एसडीएम  अनिल सबकाले अपनी दबंगई के चलते नियम और कानून को दरकिनार करआदेश जारी करते रहे  हैं |   फ़िल्मी खलनायक की तरह उनका  अपना एक गिरोह भी बन जाता  हैं ,| उनके इस काकस मण्डली में   ठेकेदार जन सेवक  , शिक्षा  कारोबारी भूमि कारोबारी  और  सामाजिक प्रतिष्ठा बनाने और बिगाड़ने  वाले पत्रकार भी होते हैं |   अपना यह  किरदार इतनी सफाई से  निभाते  हैं कि  लोगों को लगता है कि वाह क्या काम किया है असल में उनके अधिकाँश कार्यक्रमों के पीछे वसूली का एक अभियान होता है और  लोगों से वसूली के लिए  अपना एक अलग विश्वस्त आदमी हमेशा अपने साथ रखते हैं उसे रेस्ट हाउस में रखा जाता है और स्वयं सर्किट हाउस में  अपना स्थाई बसेरा बना लेते हैं |  लोगो से बातचीत की हर रिकॉर्डिंग अपने  मोबाइल में कर लेते हैं  |  खलनायकी का जो इतना बेहतर किरदार निभा रहा हो भला वह पाने ख़ास लोगों को लाभ से क्यों वंचित करे लिहाजा  उसने  अपने  ख़ास  मित्र  पुष्पेंद्र गौतम  जोकि श्री कृष्णा विश्वविद्यालय के संचालक सदस्य हैं   को लाभ  पहुंचाने के लिए  एक ऐसा  अनैतिक आदेश जारी करते हैं जो उनके गले की फांस बन जाता है पुष्पेंद्र गौतम के विरोधी और खजुराहो विश्व विद्यालय के प्रमुख अभय सिंह भदौरिया  को फ़साने के लिए  वे  अपने ही ऊपर हमले  की  फ़िल्मी कथा तैयार करते हैं और हमला करवाते हैं |                         खलनायकी के इस किरदार में वे  भी फ़िल्मी खलनायकों की तरह एक चूक कर जाते हैं ,नतीजतन उनके सारे षड्यंत्र का पर्दा फास वर्दी वाले कर देते हैं |  7  फरवरी २०२० को पुलिस कप्तान तिलक सिंह ,एस डी एम कार्यालय में 5 फरवरी की  सुबह 9 बजे  हवाई फायर , एसडीएम की गाड़ी और चेंबर में  तोड़फोड़ के मामले में  खुलासा कर देते है पुलिस हमले के  मास्टर माइंड एसडीएम अनिलसपकाले बीजेपी अल्प संख्यक मोर्चा के प्रदेश मंत्री जावेद अख्तर श्री कृष्णाविश्विद्यालय के संचालक पुष्पेंद्र सिंह गौतम  अमित सिंह परिहारअर्जुन श्रीवास और संतोष सोनी  और राजेंद्रसिंह को गिरफ्तार कर लेती है पुलिस ने आरोपियों के पास से कट्टा ,कारतूस,बेसबाल का बेट,लाठी वगैरह जप्त कर लेती है न्यायालय में पेश कर पुलिस अनिल सबकाले , पुष्पेंद्र सिंह जावेद अख्तर और राजेंद्र सिंह को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर ले लेती है |  
                      इस मामले में खुद मास्टर माइंड  एसडीएम  अनिल सबकाले पुलिस को  लिखित रिपोर्ट भी करते हैं पुलिस उनकी रिपोर्ट पर अप क्र ४२/२०२० धारा ३०७,३५३,४२७. ५०६,३४ आईपीसी और सावजनिक संपत्ति निवारण अधिनियम की धारा ३ के तहत मामला भी दर्ज कर लेती है  | वे पुलिस को बताते हैं कि  मुझे ऐसा लग रहा है कि मेंएंटी माफिया के खिलाफ कार्यवाही कर रहा हूँ उसी को दबाने के लिए अज्ञात हमलावरोंने इस तरह की कार्यवाही की है |
विवाद के विश्वविद्यालय :
मामले के  आरोपी पुष्पेंद्र गौतम और उनके भाई ब्रजेन्द्र सिंह गौतम ने मिलकर छतरपुर में कृष्णा विश्वविद्यालय की स्थापना कर  एक बड़ी सौगात छतरपुर जिले को दी थी अभय सिंह भदौरिया पन्ना रोड पर खजुराहो विश्वविद्यालय की स्थापना करना चाहते थे अपने इस विश्वविद्यालय के लिए उन्होंने  पन्ना रोड पर कदारी गाँव के पास एक भूमि क्रय की थी खजुराहो यूनिवसिटी के संचालक अभय सिंह भदौरिया ने 30 जनवरी को  पत्रकार वार्ता कर  छतरपुर एसडीएम अनिल सपकाले के  कारनामो का खुलाशा किया था उन्होंने सबकाले  पर   एक करोड़ रुपए मांगने और  राशि नहीं  देने पर  भूमि शासकीय घोषित करने की धमकी देने का आरोप लगाया था |   जिस भूमि को एसडीएम शासकीय बताया  उसी भूमि का फोरलेन के तहत 20 लाख का मुआवजा सरकार ने   अभय सिंह भदौरिया  को  दिया। भदौरिया के अनुसार खसरा क्र  336/1 कि भूमि मैंने शरद अग्रवाल से खरीदी थी जिसमें 14 लाख रुपए रजिस्ट्री खर्च किया गया है एवं लगभग 6 लाख रुपए ड्रायवर्सन के लिए चालान से राशि जमा की गई है और एसडीएम ने ही  भूमि का डायवर्सन किया । यही नहीं अपर कलेक्टर न्यायालय द्वारा आदेश दिनांक 14.10.2019 को 336/1 ग्राम कदारी की भूमि को भू स्वामी की जमीन मानते हुए अभय सिंह भदौरिया के पक्ष में फैसला किया गया है। इसके अलावा हाईकोर्ट द्वारा सीमांकन पर आगामी आदेश तक के लिए स्टे दिया गया था। दिलचस्प ये है कि  यह 336 खसरा की जमीन 6 बार खरीदी बेंची  गई और 6 बार नामांतरण भी  किया गया। फोरलेन के मुआवजे में  लोगों को लाखों रुपए की राशि मुआवजे के रूप में दी गई |                
एसडीएम के रूप में अनिल सबकाले ने २५ जनवरी को एक आदेश राजस्व प्रकरण क्र ७०/अ -६-अ /२०१९-२० जारी कर  क़दारी पटवारी हल्का की 13 एकड़ शासकीय जमीन  अपने नाम कराने और  अवैधानिक खरीद बिक्री करने पर  रामनाथ चौबे ,अभय सिंह भदौरिया सहित 13 लोगों पर अपराध धारा 420 ,467 ,468 ,469 ,470 ,471  के तहत मामला दर्ज करने के निर्देश सिविल लाइन थाना पुलिस को दिए थे |  भदौरिया द्वारा 30 जनवरी को पत्रकार वार्ता करने पर  एसडीएम ने 30 जनवरी को पात्र क्र 49 के द्वारा एसपी ,कलेक्टर को पत्र लिख कर  जमीन क्रय विक्रय मामले में कार्यवाही  करने की अपील की गई थी इसी मामले में भदौरिया ने जिला न्यायालय में जमानत का आवेदन दिया था , | एसडीएम पर हमले वाले दिन ५ जनवरी को ही उसके जमानत की तारीख लगी थी \। इस मामले में ।कमिश्नर के निर्देश पर अब  इस मामले की जांच भी फिर से की जा रही है
 सबकाले की जांच और बेचैन राजस्व अधिकारी                        
  अनिल सबकाले हमले  मामले में पुलिस को प्रारम्भिक तौर पर ही षड्यंत्र नजर आने लगा था |  यही कारण है की सीएसपी उमेश शुक्ला ने मीडिया को दिए अपने बयान में अप्रत्यक्ष तौर पर इसका इशारा भी कर दिया था एडिशनल एसपी जयराज कुबेर ने अपने जांच का सिलसिला भी भूमि और विश्वविद्यालय की कड़ी के साथ ही आगे बढ़ाया जब उन्होंने मोबाइल की रिकार्डिंग  ली तो सारी कड़ियाँ खुद बा खुद खुलती चली गई पुलिस के हाथ लगे कृष्णा विश्वविद्यालय के पुष्पेंद्र गौतम और बीजेपी नेता जावेद अख्तर ने हमले की सारी कथा उजागर कर दी |  जिसमे पैसो के लेनदेन के साथ  अपने व्यावसायिक प्रतिद्वंदी भदौरिया को सबक सिखाने की बात कही गई बहरहाल  अनिल सपकाले की  गिरफ्तारी  के बादसागर  कमिश्नर आनंद शर्मा ने उन्हें निलंबित कर   उनकेकार्यकाल की  जांच के आदेश जारी किए हैं। बीते  रविवार को अपर कलेक्टर प्रेम सिंह चौहान एवं एडीशनल एसपी जयराज कुबेर ने एसडीएम कार्यालय में  अनिल सपकाले के द्वारा  जारी किए गए आदेशों  की फाइलों को जब्त किया। 
प्रशासनिक अराजकता दरअसल बुंदेलखंड इलाके में पिछले कुछ वर्षों के दौरान पद के दुरपयोग के अनेकों मामले देखने को मिले हैं जिसके चलते कई छूट भाइये कर्मचारी अधिकारी लोकायुक्त की भेंट भी चढ़े बड़े स्तर पर  अपने पद के दुरपयोग के कई मामले सामने आते रहते हैं पर हालात तब और कष्ट प्रद हो जाते हैं जब बेबस लोगों की कोई सुनने वाला नहीं होता इस मामले में भी ऐसा ही कुछ हुआ है अगर किसी अधीनस्थ  अधिकारी की गैरजिम्मेदाराना हरकतों को उसके वरिष्ठ अधिकारी नजरअंदाज नहीं करते तो शायद  हमले की यह फ़िल्मी पटकथा नहीं देखने को मिलती ।

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