बुंदेलखंड की डायरी
फर्जी एनकाउंटर
व्यवस्था के प्रति पनपता आक्रोश
रवींद्र व्यास
बुंदेलखंड के मध्य प्रदेश वाले भाग में लोग दंगल का लुफ्त ले रहे थे , तो वही उत्तर प्रदेश वाले झांसी जिले में एक अलग तरह का दंगल चल रहा था | झांसी जिले का यह दंगल " न्याय " और " अन्याय " के बीच चल रहा है | इस दंगल में दोनों ओर से एक साथ कई कई धुरंदर मैदान में अपना दमखम दिखा रहे हैं | कौन जीतेगा कौन हराया जाएगा यह आने वाले समय में ही तय होगा | जब लोग सामाजिक ,राजनैतिक ,और शारीरिक दंगल में व्यस्त हों तो भला रावण के पुतले जलाने की औपचारिकता करने की किसे फुरसत है |
बुंदेलखंड के लोगों के लिए ओरछा किसी तीर्थ स्थल से कम नहीं है | ओरछा के महल में श्री राम, राजा के रूप में विराजमान हैं | लोगों की मान्यता है की श्री राम अयोध्या में नहीं बल्कि ओरछा में रहते हैं ,और लोग उन्हें राजा राम के रूप में पूजते हैं , राजा की ही तरह उनको गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया जाता है | एक राजा के रहते कोई दूसरा यहाँ कैसे आ सकता है , इसी के चलते यहाँ मंत्री गण को गार्ड ऑफ़ ऑनर नहीं दिया जाता , रात्रि विश्राम करने से भी वे बचते हैं |
ऐसी राम राजा सरकार की नगरी ओरछा में इस बार रावण के पुतले का दहन नहीं हुआ तो ओरछा धाम के लोग दुखी हो गये । दुखी तो रावण दहन कराने वाली समिति के लोग भी हुये हैं ।समिति के लोगों ने अपेक्षा की थी कि आधुनिक राम के अनुयायी उनकी आर्थिक मदद करेंगे ,जिससे वे बुराई के प्रतीक रावण का पुतला जला लेंगे | अब इन समिति वालों को कौन समझाए कि मदद देने में सक्षम लोग राम के आचरण से नहीं बल्कि रावण के अनुसरण से सक्षम हुए अब वे भला हैं रावण का पुतला दहन कैसे देख सकते हैं |
अनाचार और अत्याचार का तत्काल में ही उदाहरण ओरछा के समीप के जिले झांसी उत्तर प्रदेश में देखने को मिल गया | झांसी जिले के गुरसरायें थाना क्षेत्र में पुष्पेंद्र यादव को मौत के घाट उतार दिया गया | झांसी जिले करगुवाँ गाँव के रहने वाले पुष्पेंद्र यादव ना तो कोई इनामी बदमाश था ना ही उस पर ऐसे कोई संगीन मामले दर्ज थे | उसका दोष सिर्फ इतना था कि वह अपने दो ट्रकों के माध्यम से गिट्टी और बालू ढुलाई का काम करता था |पुलिस ने अपनी कहानी में बताया है कि मौठ थाना के इन्स्पेक्टर धर्मेंद्र सिंह चौहान पर हमला कर उनकी कार लूटकर भाग रहा था , गुरसरायें थाना क्षेत्र में एक मुठभेड़ में मारा गया उसके दो साथी भाग निकले | पुलिस ने उसकी कार से दो कट्टा (तमंचा ) ,कारतूस और मोबाइल जप्त किये हैं |
पुलिस कथा में यह भी बताया गया है की घायल इन्स्पेक्टर को झांसी मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया उसके बाद पुलिस के सर्च आपरेशन के दौरान यह इनकाउंटर हुआ | माइनिंग एक्ट के दो मामलों सहित उस पर पुलिस रिकार्ड में तीन मामले दर्ज थे | इनमे ऐसा एक भी मामला नहीं था जो गंभीर अपराध की श्रेणी में आता हो | लोग जिनसे सुरक्षा की आश लगाते हो अगर वही तंत्र लोगो को मारने लगे तो लोगों का विश्वास व्यवस्था से उठने लगता है | पुष्पेंद्र की पत्नी ने तो शिवांगी यादव ने तो साफ़ कह दिया है कि अगर इस मामले में न्याय नहीं मिला तो आत्महत्या कर लूँगी|
व्यवस्था के प्रति पनपता अशंतोष
व्यवस्था के प्रति लोगों के भरोषे को पहुंची चोट को देख कर तमाम सामजिक और राजनैतिक संघटन मैदान में आ आगये हैं | बुंदेलखंड किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विमल शर्मा ने योगी सरकार से सवाल किया है कि सरकार उन सांसद और विधायकों का एनकाउण्टर क्यों नहीं करती जिन पर २० _ २० मुक़दमे दर्ज हैं | अब वक्त आ गया है जब हम सबको एक हो कर पुष्पेंद्र को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन करना पड़ेगा | समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्री अखिलेश यादव ९ अक्तूबर को पुष्पेंद्र के गाँव अपने लाव लश्कर के साथ करगुवाँ पौहंचे | परिजनों को भरोषा दिलाया कि समाजवादी पार्टी उनके साथ खड़ी है | पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए जरुरी है की पुरे मामले की जांच किसी वर्तमान न्यायाधीश से कराई जाए | उन्होंने पुलिस मुठभेड़ को फर्जी करार दिया |
जांच के आदेश
, जिस समय सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव झाँसी में फर्जी इनकाउंटर मामले में योगी सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे थे उसी समय उत्तर प्रदेश के एडीजे पी वी शास्त्री पत्रकारों को बता रहे थे कि सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार सारे काम किये गए हैं | एसडीम झांसी को जांच सौंपी गई है और हथियारों की जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया है |
मामूली बात पर मार डाला पुष्पेंद्र को
दरअसल इस पुरे मामले में पुष्पेंद्र के ट्रक को सीज किये जाने का मामला सामने आया है | मौंठ पुलिस ने पुष्पेंद्र का ट्रक जप्त कर सीज किया था | अपने ट्रक को छुड़वाने के लिए पुष्पेंद्र थाने गया था ,जहाँ पुष्पेंद्र का इन्स्पेक्टर धर्मेंद्र सिंह चौहान से विवाद हो गया | विवाद के बाद पुष्पेंद्र का एनकाउण्टर हुआ | 6 अक्टूबर को पुलिस ने पुष्पेंद्र यादव ,विपिन और रविंद्र के विरुद्ध मौठ और गुरसराएँ थाने में दो अलग अलग मामले दर्ज किये | इस तरह पुलिस ने उस पर गुंडा एक्ट सहित पांच मामले दर्ज होने की कहानी बताई | दूसरी तरफ इन्स्पेक्टर धर्मेंद्र को कानपुर स्थानांतरित कर दिया गया है | झाँसी सिटी एसपी को श्री प्रकाश द्वेदी को भी हटा दिया गया है राहुल श्रीवास्तव को सिटी एसपी बनाया गया है | इस मामले में पुलिस प्रशासन से लेकर सरकार तक बेक फुट में पहुँच गई है ,जब कि विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का एक बड़ा मौका मिल गया है | मामले को लेकर बुंदेलखंड से लेकर सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश में प्रदर्शनों और धरना का सिलसिला शुरू हो गया है |
उबलता आक्रोश और सुलगते सवालों के बीच जूझते बुंदेलखंड में फर्जी एनकाउंटर मामले के मूल में देखा जाए तो खनिज सम्पदा के अवैध दोहन की कहानी छिपी है | रेत , पत्थर गिट्टी के अवैध कारोबार ने बुंदेलखंड का पर्यावरण संतुलन तो बिगाड़ा ही ,सामाजिक पर्यावरण को बड़ी क्षति पहुंचाई है | झाँसी ,ललितपुर ,बाँदा ,हमीरपुर ,महोबा ,चित्रकूट ,टीकमगढ़,दमोह,सागर ,छतरपुर और पन्ना जिलों में खनिज के अवैध कारोबार के चलते पुलिस ,प्रशासन ,नेताओं , माइनिंग माफियाओं का एक ऐसा गठजोड़ तैयार हो गया है जिसका धर्म सिर्फ धन है | धन ही धर्म है के पालन के लिए बालू खदानों वाले क्षेत्र के थाने की पोस्टिंग धन अर्पण करने पर ही प्राप्त होती है | अर्पण किये गए धन की वसूली के लिए इन वर्दी वालों को और गैर वर्दी वालों को सभी तरह की छूट आलाकमान से मिलती है | यही छूट लोगों में व्यवस्था के प्रति असंतोष की जनक होती है |








