13 नवंबर, 2018

Political_BKD Dayri


बुंदेलखंड की डायरी
विद्रोह का बिगुल
रवीन्द्र व्यास 
 मेने कांग्रेस नहीं छोड़ी है ,लेकिन अगर कांग्रेस ने लगातार 15 सालों तक कोई गलती  की और उस      
गलती को बार बार दोहराया जा रहा है तो अन्याय करना जितना बड़ा पा है ,अन्याय सहना भी उतना ही ड़ा पाप है | इसलिए इस अन्याय के खिलाफ मैंने यह फैसला लिया ,और  मेरे बेटे ने   यह फैसला लिया ,कि वह जनता की अदालत में जाएगा और जनता से फैसला मागेगा कि वो क्या कहती है | ये कहना है  कांग्रेस के  पूर्व                राष्ट्रीय  प्रवक्ता  वा पूर् सांसद,पूर्व विधायक   सत्यव्रत चतुर्वेदी  का | अन्याय सहने वाले सत्यव्रत बुंदेलखंड के अकेले कांग्रेसी नहीं हैं ,उनके जैसे कई हैं पर जो  राजनैतिक मुकाम उन्हें कांग्रेस में हासिल था जब वही अन्याय के शिकार हो सकते हैं तो बाकी का अंदाज लगाया जा सकता है | हालांकि सियासी अन्याय के शिकार बुंदेलखंड में कांग्रेस और बीजेपी में बराबरी से हुए हैं |  इसके पीछे सियासी बिसात के साथ  राजनैतिक  धन पशुओं की धमक भी बड़ी वजह बताई जा रही है |  
बुंदेलखंड देश का वह इलाका है जहां 1857 की क्रान्ति के पहले ही आजादी की लड़ाई शुरू हो गई थी ।बुंदेलखंड के लोगों के बारेमें कहा जाता है कि अपनी आन बान और शान के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने में परहेज नहीं करते हैं  इसी लिए एककहावत भी प्रचलित हैं कि सौ डंडी और एक बुंदेलखंडी। इस चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी जैसे  दल इन्हीं बुंदेलखंडी रणबांकुरोके कारण हैरान परेशान है  अपने आप को भाग्य विधाता मानने वाले इन दलों के भाग्य विधाताओ को भी नहीं  सूझ रहा हैकि करें तो क्या करें ।बुंदेलखंड के ये सियासी रणबांकुरे अपनी आन बान और शान के लिए चुनावी संग्राम में अपना जौहरदिखाने को बेताब हैं । कोई अपना ही रथ लेकर तो कोई दूसरे के रथ पर सवार होकर चुनावी रण में कूदे हैं |   
 8 नवम्बर को    कांग्रेस के  पूर्व  राष्ट्रीय  प्रवक्ता  वा पूर्व सांसद  सत्यव्रत चतुर्वेदी अपने इकलौते  पुत्र  नितिन चतुर्वेदी का  ग्समाजवादी पार्टी से  नामांकन दाखिल कराने छतरपुर जिले के    राजनगर  पहुंचे थे  | इस मौके पर जन  समूह कोसम्बोधित किया और अपनी पीड़ा भी व्यक्त की,,  इशारों इशारों में उन्होंने  काग्रेस के मठाधीशो का चेहरा भी उजागर किया  स्वयं  कांग्रेस ना छोड़ने की बात कहते हुए उन्होंने कहा कि  मेरे बेटे ने   यह फैसला लिया ,कि वह जनता की अदालत मेंजाएगा और जनता से फैसला मागेगा कि वो क्या कहती है | 
                                                                 असल में   सियासत की बिसात पर सत्यव्रत  राजशाही कांग्रेसी सियासत के शिकार हो गए | जिसने योजनाबद्ध तरीके से उनसे छल किया ,| उनके पास राजनगर के कांग्रेसी विधायक विक्रम सिंह स्वयं ये कहने पहुंचे थे  कि  हमारी इस बार स्थिति ठीक नहीं है इसलिए  आप  नितिन (बँटी ) को राजनगर से चुनाव लड़वा दीजिये और हम लोक सभा का चुनाव लड़ेंगे | यह बात कांग्रेस समन्वय समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह के सामने भी स्पष्ट हुई थी | जिस समय विक्रम सिंह ने सत्यव्रत ने राजनगर से चुनाव ना लड़ने की बात कही थी उस समय वहां दर्जन भर से ज्यादा लोग मौजूद थे | और  जब बात आलाकमान के पास पहुंची तो विक्रम सिंह ने इस तरह के  किसी वायदे से इंकार कर दिया | हद तो तब हो गई जब स्वयं महराज ज्योतरादित्य सिंधिया ने  राज परिवार के विक्रम का साथ दिया |  सत्यव्रत यही चूक गए , जो राज परिवार  अपने स्वार्थों के लिए  अंग्रेजों की दासता स्वीकार कर  लेते हो वो भला कांग्रेस की सत्ता आती देख कैसे कुर्सी छोड़ सकते  हैं |  देखा जाए तो सियासत में लोग तात्कालिक लाभ के लिए ऐसे समझौते तो कर लेते हैं पर जिससे समझौते करते हैं उसके  वा उसके परिवार के अतीत के चरित्र को अनदेखा कर जाते हैं | 
                                                                       बुंदेलखंड में टिकिट के लिए  कांग्रेस  की बनी गाइड लाइन की भी धज्जियां उड़ती लोगों ने देखीं 38 हजार मतों  से हारने वाले को  कांग्रेस ने फिर से प्रत्यासी बनाया है जब की ११सो वोट से हारने वाले का टिकिट काट दिया गया | सागर के वरिष्ट कांग्रेसी नेता जगदीश यादव तो कहते हे कांग्रेस पार्टी में हार एक योग्यता है , जो ज्यादा चुनाव हारता है उसे पद और प्रतिष्ठा मिलती है | पार्टी में पैसो वालों का बोलबाला होने का आरोप लगाते हुए  पार्टी से त्यागपत्र  दे दिया |अब वे समाजवादी पार्टी से चुनावी मैदान में हैं |
बुंदेलखंड के सागर संभाग में जगदीश यादव और नितिन चतुर्वेदी अकेले बागी  नहीं हैं | छतरपुर जिले के सेवादल प्रमुख राजेश मेहतों महराजपुर विधान सभा सीट से  हाथी पर सवार हो गए हैं तो बिजावर सीट से राजेश उर्फ़  बबलू शुक्ला साइकिल चलाएंगे |लगभग ११ सौ वोटों से हारने वाले बड़ामलहरा विधान सभा क्षेत्र से  तिलक सिंह लोधी ने  निर्दलीय प्रत्यासी के रूप में नामांकन दाखिल किया है | पवई विधान सभा  सीट के लिए कांग्रेस के अनिल कुमार ने आम आदमी पार्टी का सहारा लिया है | वहीँ पन्ना विधान सभा सीट से कांग्रेस  की अनुपमा  यादव  बीएसपी से , निवाड़ी सीट से  नारायण तिवारी निर्दलीय प्रत्यासी के तौर पर  चुनावी मैदान में हैं |  
                                                                        यह हालात अकेले कांग्रेस में नहीं हैं ,बीजेपी भी इससे अछूती नहीं है | बीजेपी  की  बड़ामलहरा  से  विधायक रही रेखा  यादव ने  निर्दलीय  तो खरगापुर विधान सभा सीट से  बीजेपी के विधायक रह चुके सुरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ़ बेबी राजा  समाजवादी साइकिल पर तो अजय यादव हाथी पर सवार हो गए | महराजपुर विधान सभा सीट से बीजेपी  के महेश मातौल  राष्ट्रीय समानता दल से , चंदला सुरक्षित सीट से अनित्या सिंह  सपा  से , पन्ना  में बीजेपी के बड़े नेता  जयप्रकाश  ने , पृथ्वीपुर सीट से अनिल पांडेय ,और गनेशी नायक ने , जतारा से अनीता खटीक ने  और निवाड़ी विधान सभा सीट से रमेश निराला ने , दमोह और पथरिया से पूर्व मंत्री डॉ रामकृष्ण कुसमरिया ने   बगावत कर निर्दलीय प्रत्यासी के तौर पर चुनावी रण में हैं  | 
                                                                      पन्ना जिले की पवई  विधान सभा सीट से स्थानीय  बनाम बाहरी का मुद्दा इतना  गर्माया की बीजेपी को यहां  से  अपने प्रत्यासी  पूर्व  मंत्री  ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह  को बदलना पड़ा | ब्रजेन्द्र को  पन्ना से  कुसुम मेहदेले का टिकिट काट कर प्रत्यासी बनाया गया | पवई  में  समाजवादी पार्टी के प्रत्यासी प्रह्लाद लोधी को  बीजेपी का प्रत्यासी बनाया गया | इस राजनैतिक उठा पटक  के चलते  यहां से कांग्रेस के भुवन विक्रम सिंह  समाजवादी पार्टी से चुनावी मैदान में आ गए हैं |  भुवन के आने से  कई राजनैतिक  समीकरण इस विधान सभा में बदल गए हैं |  पन्ना में कुसुम मेहदेले का टिकिट कटने  से बीजेपी के पन्ना जिला अध्यक्ष  सहित पार्टी की नौजवान पीढ़ी में उत्साह  देखने को मिल रहा है | पर दूसरी तरफ पार्टी  को कुसुम जी की नारजगी  का खामियाजा भी भुगतना होगा |  
                                                                         स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा बड़ामलहरा  विधान सभा सीट पर भी देखने को मिल रहा  है | यहां  बीजेपी ने  राज्य मंत्री  छतरपुर की ललिता यादव को यहाँ की विधायक रेखा यादव का टिकिट काट कर   चुनाव मैदान  में उतारा है | कांग्रेस ने भी दमोह जिले के प्रदुम्न लोधी को चुनाव मैदान में  उतारा है | स्थानीय लोग वा पार्टी कार्यकर्ता इस बात को लेकर खासे नाराज हैं |  
 बागियों  के कारण  दोनों ही दलों में  बेचैनी देखने को मिल रही है | दूसरी तरफ प्रत्याशियों के चयन को लेकर भी कार्यकर्ताओं में खाशी नारजगी कांग्रेस और बीजेपी में देखने को मिल रही है | छतरपुर विधान सीट पर बीजेपी ने ललिता को हटा कर अर्चना सिंह को अपना प्रत्यासी बनाया है | अर्चना गुड्डू सिंह  पिछले ८-९  वर्षो से छतरपुर नगर पालिका अध्यक्ष हैं | उनकी और उनके पति की कार्यप्रणाली को लेकर  स्थानीय स्तर पर  जो विरोध देखने को मिल रहा है वह किसी से छिपा नहीं है | कांग्रेस उनके इन्ही कारनामो  को लेकर  जनता  को जाग्रत करने में जुटी है | बीजेपी में मचे घमासान  को देखते हुए बीजेपी के संगठन  प्रमुख से लेकर आला नेता तक डेमेज कंट्रोल में जुट गए हैं | दूसरी तरफ डेमेज कंट्रोल के मसले पर  कांग्रेस  की  समन्वय समिति की अब तक कोई पहल सामने नहीं आई है | 

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