बुंदेलखंड की डायरी
सियासी समन्वय
रवीन्द्र व्यास
बुंदेलखंड के सागर संभाग की 26 विधान सभा सीटों पर हर राजनैतिक दल समन्वय बनाने की जुगत में जुटे है | इसकी मुख्य वजह यह भी मानी जा रही है की पार्टी के साथ प्रत्यासी की छवि भी विधान सभा चुनाव में प्रभावित करती है | बीजेपी जहां इस मुद्दे को लेकर काफी गंभीर है, वही कांग्रेस में अब भी आपसी समन्वय का अभाव है | बीजेपी अपनी सियासी रणनीति के तहत कई विधायकों के टिकट काटने वाली है वही कई के सीटों में परिवर्तन करने जा रही है | कांग्रेस के गठबंधन फार्मूला फेल हो जाने से भी बीजेपी खासी उत्साहित है | पिछले दिनों खजुराहो आये सपा नेता अखिलेश यादव ने जिस तरह से कांग्रेस पर निशाना साधा है उसके कई राजनैतिक मायने निकाले जा रहे हैं |
मध्य प्रदेश में पिछले दिनों जिस तरह से कांग्रेस और बीजेपी से अलग हट कर सियासी गठबंधन बने हैं उससे बीजेपी अपने को कही ज्यादा लाभ की स्थिति में पा रही है | चुनाव के तीन माह पहले सर्वेक्षण रिपोर्टो में बीजेपी का जनाधार घटा था उसने बीजेपी के लिए चिंता जरूर पैदा की थी | पर चुनाव आते आते बीजेपी ने इस अंतर में कमी लाई है उसने पार्टी की राह आसान जरूर कर दी है | इसका लाभ भी बीजेपी को बुंदेलखंड इलाके में मिल सकता है | बसपा और सपा के अलग चुनाव लड़ने की घोषणा ने बुंदेलखंड इलाके में कांग्रेसी नेताओं को चिंतित किया है | असल में बुंदेलखंड और विंध्य का अधिकाँश इलाका उत्तर प्रदेश की सीमा से लगता है , इस इलाके में सपा और बसपा अपनी सियासी जमीन बनाये हुए है | बहुजन समाज पार्टी जहाँ कांग्रेस के वोट बैंक को प्रभावित करती है वही समाजवादी पार्टी कांग्रेस और बीजेपी के आंशिक वोट बैंक को प्रभावित करती है |
कांग्रेस और बीजेपी से टिकिट ना मिलने पर नाराज नेता इन पार्टियों में अपना राजनैतिक भविष्य तलाशते हैं और कई बार उन्हें सफलता भी मिल जाती है | सियासत की चाह में बीजेपी नेता विजय बहादुर सिंह को जब पार्टी ने टिकिट नहीं दिया तो वे चंदला विधान सभा से सपा के टिकिट पर चुनाव मैदान में उतरे और चुनाव जीते , तीन बार विधायक रहने के बाद जब यह विधान सभा क्षेत्र सुरक्षित क्षेत्र हो गया तो वापस लौट कर बीजपी में आ गए | कांग्रेस से टिकिट की चाह रखने वाले विक्रम सिंह को जब टिकिट नहीं मिला तो छतरपुर विधान सभा क्षेत्र से वे सपा के टिकिट पर चुनाव लड़े और जीते | 2008 वा 2013 में कांग्रेस से टिकिट लेकर राजनगर विधान सभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे और चुनाव जीते | २००८ में ही कांग्रेस के पूर्व विधायक शंकर प्रताप सिंह ने छतरपुर विधान सभा सीट से मिली कांग्रेस टिकिट ठुकरा दी थी | , वे इस बात को लेकर नाराज थे कि कांग्रेस ने उन्हें राजनगर से प्रत्यासी नहीं बनाया | इसी नाराजगी के चलते उन्होंने बीएसपी का दामन थामा और बीएसपी के टिकिट पर राजनगर से चुनाव लड़कर कांग्रेस से ही हार गए || 2008 में टीकमगढ़ जिले की निवाड़ी विधान सभा सीट से समजावादी पार्टी की मीरा यादव चुनाव जीती | ये अलग बात है कि विशुद्ध जातीय आधार पर अपना राजनैतिक वजूद कायम करने वाली बीएसपी को अब तक बुंदेलखंड के सागर संभाग में एक भी बार सफलता हासिल नहीं हुई , | जबकि सपा ने कई बार अपने प्रत्यासी जिताने में सफलता पाई है |
बसपा और सपा का समन्वय
पिछले दिनों खजुराहो में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश में नये राजनीतिक समीकरण बनने के संकेत दिए थे । उन्होंने इशारो इशारो में ही कांग्रेस नेतृत्व को खरी_ खरी सुनाई थी |गठबंधन के सवाल पर अखिलेश यादव ने साफ़ किया की कांग्रेस एक बड़ा दल है और इस नाते उसकी जिम्मेदारी बनती है की वह छोटे दलों को भी साथ लेकर चले | हम तो चाहते थे की कांग्रेस से गठबंधन हो , पर कांग्रेस को लगता है कि हममे बल नहीं है ,| अब हालात बदल चुके हैं अब गठबंधन की बात हमारी बीएसपी के साथ चल रही है और लगभग तय भी है | गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से हमारा गठबंधन हो चुका है | बुआ भतीजे की यह यारी बुंदेलखंड और विंध्य में एक बड़े राजनैतिक उलट फेर की ओर संकेत तो करते हैं पर इसका सीधा लाभ बीजेपी को मिलेगा ऐसा यहाँ के राजनैतिक जानकार मानते हैं |
बसपा की काट और उमा का साथ
सर्वे से सियासी बदलाव
इस बार के विधान सभा चुनाव कई मायने में अनोखे साबित होंगे | सत्ता पाने के लिए कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने ही पार्टी का आंतरिक सर्वेक्षण कराया है | दोनों ही दलों ने जितने वाले और हारने वाले प्रत्यासियो की समीक्षा की है | जिस बुंदेलखंड से बीजेपी को 80 फीसदी सीटों पर सफलता मिलती थी उस इलाके में इस बार उलटी सियासी बयार देख कर , पार्टी ने बड़े परिवर्तन के संकेत दिए हैं | जनाधार खिसकते मंत्रियो की सीटों में बदलाव के साथ पार्टी के लिए भविष्य में उपयोगी साबित होने वाले विधायकों की सीटों में बदलाव किया जा सकता है ,वही पार्टी स्तर पर और विधान सभा में अपने खराब परफॉर्मेंस के लिए पहचान बनाने वाले विधायकों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा | कांग्रेस ने सर्वे के अनुसार पार्टी के टिकटों को तय कर लिया है , कांग्रेस में यह पहली बार होगा की जब बुंदेलखंड में पार्टी नेता के दबाव में नहीं बल्कि जीत के समीकरण पर बुंदेलखंड में टिकिट देगी | कांग्रेस की इन टिकिटों की घोषणा संभवतः नवमी के आस पास हो सकती है |
सियासत के बदलते समीकरणों के बीच जीत का सेहरा किस के सर बंधेगा यह बहुत कुछ प्रत्यासियो के चेहरे सामने आने के बाद साफ़ होगा | पर सियासी समीकरणों में बीजेपी और कांग्रेस की इस बार राह आसान नहीं मानी जा सकती है | कांग्रेस को जहाँ बसपा से वही बीजेपी को सवर्ण समाज पार्टी से नुक्सान होने के हालात दोनों ही दलों को बेचैन अवश्य किये हैं |


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