15 अक्टूबर, 2018

Bkd _Dayri_Political

बुंदेलखंड की डायरी 

सियासी समन्वय 


रवीन्द्र व्यास 

बुंदेलखंड  के सागर संभाग की 26 विधान सभा सीटों पर  हर राजनैतिक दल समन्वय बनाने की जुगत में जुटे  है | इसकी मुख्य वजह यह भी मानी जा रही है की पार्टी के साथ प्रत्यासी की छवि भी विधान सभा चुनाव में प्रभावित करती है | बीजेपी जहां इस मुद्दे को लेकर काफी गंभीर है, वही कांग्रेस में अब भी आपसी समन्वय का अभाव  है | बीजेपी अपनी सियासी रणनीति के तहत  कई विधायकों के टिकट काटने वाली है वही कई के सीटों में परिवर्तन करने जा रही है | कांग्रेस के गठबंधन फार्मूला फेल हो जाने से भी बीजेपी खासी उत्साहित है |  पिछले दिनों खजुराहो आये सपा  नेता अखिलेश यादव ने जिस तरह से कांग्रेस पर निशाना साधा है  उसके कई राजनैतिक मायने निकाले जा रहे हैं | 


     मध्य प्रदेश में पिछले दिनों जिस तरह से कांग्रेस और बीजेपी से अलग हट कर  सियासी  गठबंधन   बने हैं उससे  बीजेपी अपने को कही ज्यादा लाभ की स्थिति में पा रही है | चुनाव के तीन माह पहले सर्वेक्षण रिपोर्टो में  बीजेपी का जनाधार घटा था उसने बीजेपी के लिए चिंता जरूर पैदा की थी | पर चुनाव आते आते बीजेपी ने इस  अंतर में कमी लाई  है उसने पार्टी की राह आसान जरूर  कर दी है | इसका लाभ भी बीजेपी को बुंदेलखंड इलाके में मिल सकता है | बसपा और सपा के अलग  चुनाव लड़ने की घोषणा ने  बुंदेलखंड इलाके में  कांग्रेसी नेताओं को चिंतित किया है | असल में बुंदेलखंड और विंध्य का अधिकाँश इलाका  उत्तर प्रदेश की सीमा से लगता है , इस इलाके  में सपा और बसपा अपनी सियासी जमीन  बनाये हुए है | बहुजन समाज पार्टी जहाँ कांग्रेस के वोट बैंक को प्रभावित करती है वही समाजवादी पार्टी  कांग्रेस और बीजेपी के आंशिक वोट बैंक को प्रभावित करती है | 

कांग्रेस और बीजेपी से टिकिट ना मिलने पर नाराज नेता इन पार्टियों में अपना राजनैतिक भविष्य तलाशते हैं और कई बार उन्हें सफलता भी मिल जाती है |  सियासत की चाह में बीजेपी नेता विजय बहादुर सिंह को जब पार्टी ने टिकिट नहीं दिया तो वे चंदला विधान सभा से  सपा के टिकिट पर  चुनाव मैदान में उतरे और चुनाव जीते , तीन बार विधायक रहने के बाद जब यह विधान सभा क्षेत्र  सुरक्षित क्षेत्र हो गया तो वापस लौट कर बीजपी में आ गए | कांग्रेस से टिकिट की चाह रखने वाले विक्रम सिंह को जब टिकिट नहीं मिला तो  छतरपुर विधान सभा क्षेत्र से वे सपा के टिकिट पर चुनाव लड़े और जीते |  2008 वा  2013 में   कांग्रेस से टिकिट लेकर राजनगर विधान सभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे और  चुनाव जीते |  २००८ में ही  कांग्रेस के पूर्व विधायक  शंकर प्रताप सिंह ने  छतरपुर विधान सभा सीट से मिली कांग्रेस टिकिट ठुकरा दी थी | , वे इस बात को लेकर नाराज थे कि कांग्रेस ने उन्हें राजनगर से प्रत्यासी नहीं बनाया | इसी नाराजगी के चलते उन्होंने बीएसपी का दामन थामा और बीएसपी के टिकिट पर राजनगर से चुनाव लड़कर कांग्रेस से ही हार गए || 2008 में टीकमगढ़ जिले की निवाड़ी विधान सभा सीट से समजावादी पार्टी की  मीरा यादव चुनाव जीती |  ये अलग बात है कि विशुद्ध जातीय आधार पर अपना राजनैतिक वजूद कायम करने वाली बीएसपी  को अब तक बुंदेलखंड के सागर संभाग में एक भी बार सफलता हासिल नहीं हुई , | जबकि  सपा  ने कई बार अपने प्रत्यासी जिताने में सफलता पाई है |  


 बसपा और  सपा का समन्वय 

पिछले दिनों खजुराहो में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश में नये राजनीतिक समीकरण बनने के  संकेत दिए थे  । उन्होंने इशारो इशारो  में ही कांग्रेस  नेतृत्व को खरी_ खरी सुनाई थी |गठबंधन के सवाल पर अखिलेश यादव ने साफ़ किया की कांग्रेस एक बड़ा दल है और इस नाते उसकी जिम्मेदारी बनती है की वह छोटे दलों को भी साथ लेकर चले  |  हम तो चाहते थे की कांग्रेस से गठबंधन हो , पर कांग्रेस को लगता है कि हममे बल नहीं है ,| अब हालात बदल चुके हैं  अब  गठबंधन की बात हमारी  बीएसपी के साथ  चल रही है  और लगभग तय भी है | गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से हमारा गठबंधन हो चुका है |  बुआ भतीजे की यह यारी बुंदेलखंड और विंध्य में एक बड़े राजनैतिक उलट फेर की ओर संकेत तो करते हैं पर इसका सीधा लाभ बीजेपी को मिलेगा ऐसा यहाँ के राजनैतिक जानकार मानते हैं |  

बसपा की काट और उमा का साथ 
बीजेपी को  अब  उमा भारती  में  एक ऐसी राजनैतिक छवि नजर आने लगी है जो बसपा ,सपा और ससपा  के प्रभाव पर लगाम लगा सकती है | इसके चलते इस बार के चुनाव में उन्हें   महत्व पूर्ण दाइत्व सौंपा जा सकता  है | २००८ , और २०१३ के विधान सभा और २००९ वा २०१४ के लोकसभा चुनाव में जो उमा भारती  मध्य प्रदेश की बीजेपी के लिए अछूत जैसी थी अब वह  ख़ास हो गई हैं | हाल के शिवराज के टीकमगढ़ जिले के दौरों के दौरान शिवराज ने जिस तरह से उमा जी के कसीदे पड़े  और उमा भारती ने जिस तरह से शिवराज को अपना बड़ा भाई बताया वह एक नए सियासी समीकरण की तरफ इशारा था |  मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार कभी नहीं चाहती थी की उमा भारती का प्रदेश में दखल बड़े | विप्पत्ति  में   उन्ही उमा  में अब शिव को  संकट से मुक्ति दिलाने वाली देवी नजर आने लगी | असल में उमा भारती ना सिर्फ अपनी लोधी जाति के वोट बैंक को प्रभावित करती हैं बल्कि वे समाज के अन्य तबके को भी प्रभावित करती हैं | तमाम विरोधाभाषों के बीच भी उनके समर्थको  की संख्या  बुंदलखंड और मध्य प्रदेश में अच्छी  खासी है |  

सर्वे से सियासी बदलाव 

इस बार के विधान सभा चुनाव कई मायने में अनोखे साबित होंगे | सत्ता पाने के लिए  कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने ही पार्टी का आंतरिक सर्वेक्षण कराया है | दोनों ही दलों ने जितने वाले और हारने वाले प्रत्यासियो की समीक्षा की है | जिस बुंदेलखंड से बीजेपी को  80 फीसदी सीटों पर सफलता मिलती थी उस इलाके में इस बार उलटी सियासी बयार देख कर , पार्टी ने बड़े परिवर्तन के संकेत दिए हैं |  जनाधार खिसकते मंत्रियो की सीटों में बदलाव के साथ पार्टी के लिए भविष्य में  उपयोगी  साबित होने वाले  विधायकों की सीटों में बदलाव किया जा सकता है ,वही पार्टी  स्तर पर और विधान सभा में  अपने खराब परफॉर्मेंस के लिए पहचान बनाने वाले विधायकों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा  |  कांग्रेस ने  सर्वे के अनुसार  पार्टी के टिकटों को तय कर लिया है , कांग्रेस में  यह पहली बार होगा की जब बुंदेलखंड में  पार्टी नेता के दबाव में नहीं बल्कि जीत के समीकरण पर बुंदेलखंड में टिकिट देगी | कांग्रेस की इन टिकिटों की घोषणा संभवतः नवमी के आस पास  हो सकती है | 
                             सियासत के बदलते समीकरणों के बीच जीत का सेहरा किस के सर बंधेगा यह बहुत कुछ प्रत्यासियो के चेहरे सामने आने के बाद साफ़ होगा | पर  सियासी समीकरणों में  बीजेपी और कांग्रेस की इस बार राह आसान नहीं मानी जा सकती है | कांग्रेस को जहाँ बसपा से वही बीजेपी को सवर्ण समाज पार्टी से नुक्सान होने के हालात दोनों ही दलों को बेचैन अवश्य किये हैं | 

01 अक्टूबर, 2018

BKD_Dayri_Political


बुंदेलखंड की डायरी

  राम पथ से राज पाने की चाह में  कांग्रेस 

रवीन्द्र व्यास

ये बुंदेलखंड है ,जहां की पावन धरा पर भगवान् श्री राम ने 12 वर्ष अपने वनवास के चित्रकूट  में  बिताये थे | | चित्रकूट के बारे में कहा जाता है कि " जा पर विपदा पडत है तेहि आवत
ही देश" | पिछले साढ़े  चार साल से  सत्ता का वनवास भोग रहे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी  ने सियासी विपदा की इस घडी में चित्रकूट के कामता नाथ  से आशीर्वाद लेकर  मध्य प्रदेश का अपना असल राजनैतिक चुनाव प्रचार अभियान शुरू कियाये अलग बात है कि  जिस  बुन्देलखंड की धरा से वे अपने राजनैतिक विरोधियो पर शब्द  वाण चला रहे थे उस धरा के स्वतंत्र राज्य के अस्तित्व के लिए उनके मुख़ार बिंदु से एक शब्द नहीं निकला | जब कि उसी समय   राज्य निर्माण की मांग को लेकर झांसी में  आन्दोलन चल रहा है कांग्रेस नेता और  पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रदीप जैन वा ब्रजेन्द्र व्यास के साथ सैकड़ो कांग्रेसी आंदोलन स्थल पर कर अलग  राज्य की मांग का समर्थन कर रहे थे |


आंदोलन में शामिल हुए कांग्रेस के पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रदीप जैन ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से चाहती है कि बुन्देलखण्ड के विकास के लिये राज्य का निर्माण हो। लेकिन केन्द्र में जब कांग्रेस की सरकार थी, तो बुन्देलखण्ड राज्य निर्माण के प्रस्ताव पर सपा के प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने बुन्देलखण्ड निर्माण का विरोध प्रकट किया था। क्योंकि लोकसभा में सपा से 34 सांसद थे, इसलिये मुलायम सिंह ने इस मुद्दे पर अपनी पकड़ बनाते हुये बुन्देलखण्ड राज्य निर्माण की ओर कांग्रेस को आगे नही बढ़ने दिया। यदि ऐसा नहीं होता तो कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में थी बुन्देलखण्ड राज्य का निर्माण कर दिया गया होता। कांग्रेस आज भी बुन्देलखण्ड राज्य निर्माण की सशक्त पैरवी करती है।

 पूर्व विधायक बृजेन्द्र व्यास कहते हैं  कि बुन्देलखण्ड राज्य निर्माण के बारे में कांग्रेसजन राहुल गांधी से यह अपील करेगें कि आने वाली कांग्रेस सरकार बुन्देलखण्ड राज्य निर्माण में पूर्ण सहयोग करेगी।


 कांग्रेसी नेता चीख चीख कर झाँसी में राहुल गांधी को अलग बुंदेलखंड राज्य के समर्थक होने का दावा कर रहे थे और राहुल जी थे कि बुंदेलखंड राज्य के मसले पर एक शब्द भी बोलने से परहेज कर रहे थे | | उनके निशाने पर तो मोदी जी और शिवराज और बीजेपी  ही  थी ,

  चित्रकूट में राहुल गांधी राम भक्त हो गए , यहां लगे पोस्टरों में उन्हें बाकायदा पंडित और  रामभक्त बता कर  कई तरह के राजनैतिक सन्देश देने के जतन कांग्रेस ने किये |  शिव भक्त से रामभक्त बने  राहुल गांधी कांग्रेस ने शाल , श्रीफल देकर  सम्मानित कर  मंच से नेताओं ने गांधी की मानसरोवर यात्रा की चर्चा कर यह जताने का प्रयास किया की जिस कांग्रेस और कांग्रेस नेता की हिन्दू विरोधी छवि बनाई गई है वह कितना धार्मिक और आस्थावान है


 राजनैतिक तौर पर अगर कांग्रेस की इस रीती नीति को समझा जाए तो , कांग्रेस  भाजपा को उसी के हथियार से घायल करने की रणनीति पर  चलती नजर आती है | इन हालातो में कांग्रेस की  धर्म निरपेक्षता  को हिंदू विरोधी कहना बीजेपी के लिए  आसान  नहीं होगा कम से कम मध्य प्रदेश में यह स्थितियां  कांग्रेस तेजी से बदल रही है | कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ ने हर गाँव में गौशाला और रामपथ गमन  यात्रा शुरू करने की बात कही थी | राहुल गांधी ने  कांग्रेस की रामपथ गमन यात्रा की शुरुआत कराकर बीजेपी के सामने एक बड़ा राजनैतिक धर्म संकट खड़ा कर दिया है |

असल में बीजेपी अपनी कही बातों से खुद घिरती नजर रही है |  राम मंदिर निर्माण का सपना दिखा कर सत्ता के सिंहासन पर पहुँचने वाली बीजेपी अब तक राम मंदिर का निर्माण नहीं करा पाई | समाज को विभक्त करने वाले एस सी एसटी एक्ट पर कोर्ट के फैसले पर अध्यादेश ला कर पलटने वाली मोदी सरकार अब तक राम मंदिर , समान नागरिक संहिता , जैसे मुद्दों   पर अध्यादेश क्यों नहीं ला पाई अब यह सवाल हर जागरूक नागरिक पूंछने लगा है , जिसका उत्तर देने से  बीजेपी नेता अपने को बचाने में जुटे हैं |  मध्य प्रदेश में तो स्थितियां और भी विकट  हैं  , जिस रामपथ गमन मार्ग से कांग्रेस सत्ता के सिंहासन पर पहुँचने का जतन कर रही है    शिवराज सिंह ने 11 वर्ष पहले चित्रकूट में  २५   करोड़ रु की लागत से    रामपथ गमन मार्ग निर्माण   की घोषणा की  थी ||  यह भी एक संयोग है की श्री राम ने चित्रकूट में 12 वर्ष बिताये थे ,और बीजेपी सरकार की घोषणा को ११ वर्ष हो गए ,उसे शायद राम  से तार जोड़ने के लिए एक वर्ष और चाहिए | हालांकि सरकार ने रामपथ गमन के लिए रिपोर्ट वगैरह भी बनवाई जिस पर  दो करोड़ से ज्यादा की रकम खर्च की | कमेटी भी बनी उसने भी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी , पर राम का मार्ग आसान नहीं हो सका |

चित्रकूट से शुरू होने वाले इस राम पथ गमन मार्ग से सतना,पन्ना, शहडोल, जबलपुर, ‍  आदि जिलों की लगभग ३५ विधान सभा सीटें सीधे तौर पर और 140 विधान सभा क्षेत्र अप्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित होते हैं | जाहिर तौर पर कांग्रेस इस  सियासी रामपथ मार्ग पर बीजेपी की तथाकथित रामभक्ति को बेनकाब करने का प्रयास भी करेगी |

 हालांकि भाजपा    कांग्रेस  पर  धार्मिक उन्माद  भड़काने की राजनीति  करने का आरोप लगाने से नहीं चूकती  है, | वे यह भी सवाल उठा कर राहुल गांधी पर निशाना साध रहे हैं कि  अपने को हिंदू प्रचारित करने वाले राहुल जी  यह भी बताएं कि,उनके पूर्वजों की श्राद्ध किस दिन होती है।

सियासत के इस संग्राम में यह पहली बार देखने को मिल रहा है की बीजेपी की टक्कर में कांग्रेस भी अपने आपको हिंदुत्व से जुड़ा होने और धार्मिक होने का दावा कर रही है | असल में यह बात कांग्रेस को बहुत देर में समझ में आई कि हिन्दुस्तान में हिन्दू  धर्म को नकार कर सियासत नहीं की जा सकती है | सियासत पर बारीक नजर रखने बीजेपी  ने इसे बहुत ही बारीकी से समझा , और मंडल के जबाब में धर्म यात्रा आडवाणी के नेतृत्व में निकाल कर बीजेपी को इस मुकाम पर पहुंचाया की आज वह केंद्र में पूर्ण बहुमत के साथ देश में सबसे बड़ा राजनैतिक दल बन गया |


मप्र में  कांग्रेस  चेहरा

 गुटों में बंटी प्रदेश कांग्रेस को राहुल गांधी  ने चित्रकूट और विंध्य के दौरे से साफ़ सन्देश दे दिया है की  विधानसभा चुनाव में प्रदेषाध्यक्ष कमलनाथ और प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया  ही पार्टी का मुख्य  चेहरा होंगे |  राहुल गांधी के दौरे के दौरान  यह दोनों नेता पूरे समय राहुल के दाएं और बाएं नजर आए |  इस दौरान  राहुल ने भी  किसी तीसरे नेता का नाम तक नहीं लिया। राहुल ने राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने पर कमलनाथ और सिंधिया द्वारा युवाओं को रोजगार दिलाने, किसानों के लिए पूरा जीवन लगाने का वादा किया।


राहुल गांधी के इस दौरे के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह,सत्यव्रत चतुर्वेदी ,नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी,  कांतिलाल भूरिया, अरुण यादव,  आदि रहे मगर गांधी ने कमलनाथ और सिंधिया के अलावा किसी पर ज्यादा गौर नहीं किया। सियासत के जानकार मानते हैं कि राहुल गांधी द्धारा  कांग्रेस के अन्य नेताओ की उपेक्षा पार्टी के लिए शुभ संकेत नहीं हैं \| 


विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

  बुंदेलखंड की डायरी  विकास की उमंग और चुनौतियों के  संघर्ष का  बुंदेलखंड  रवीन्द्र व्यास  दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए    2025  में कई...