21 जनवरी, 2018

सरकार और नेता आनंद में मगन जनता पलायन को विवश


बुंदेलखंड की डायरी 

 

रवीन्द्र व्यास 


देख तमाशा शासन का 
बुंदेलखंड का जन मानस हैरान है  ।
उसे यह नहीं समझ आ रहा है कि यहां  भूख से  लोग यहां जान गँवा रहें हैं | 
भूख मिटाने के लिए घर व्दार छोडने को मजबूर हैं |   
 उस बुंदेलखंड मे  सरकारी  आनंद महोत्सव लोगों के जख्मों पर नमक से कम नहीं लग रहे |  
जनता  आनंदित हो ना हो पर आनंदम तो जारी है
बेशर्मी का आलम ये है कि यहां के  नेता भी  खेल खिला रहे  ।

बुंदेलखंड के  जिले सूखे की मार से त्रस्त हैं ,दाना _ पानी के लिए  लोग पलायन कर रहें हैं | इसके ठीक विपरीत मध्य प्रदेश सरकार द्धारा आयोजित आनंद उत्सव मनवाने के लिए प्रशासन मजबूर है |  कहते हैं ना कि  आनंद जीवन में हो ना हो पर महशूस करो कि हम आनंद में हैं , पर मध्य प्रदेश सरकार तो बुंदेलखंड में जबरिया तौर  पर आनंद की अनुभूति दिलाने में जुटी है |  छतरपुर जिले का एक दलित उपसरपंच  अपने परिवार के साथ दिल्ली में मजदूरी करने को मजबूर है | वहीँ जिले का एक मात्र   दलित विधायक  अपनी और अपने इलाके की जनता की उपेक्षा से दुखी है | दोनों के ही जीवन में आनदं  का अभाव है | 



छतरपुर  में जन प्रतिनिधि की दशा कैसी है इसकी एक तस्वीर जिला कलेक्टर कार्यालय से महज 13 किमी दूर  खड़गांय गाँव में देखने को मिली  । इस गांव की  उप सरपंच मंजू अहिरवार पिछले 8 माह से दिल्ली के नोयडा मे मजदूरी करने को मजबूर हैं ।हाल ही में नोयडा से लौट कर आए मंजू के पति कंसू लाल  अहिरवार  ने अपने वापस  आने की जो मजबूरी बताई वह भी कम हैरान करने वाली नही  थी । उसने  बताया कि घर मे शौचालय बनवाने के लिए  आना पड़ा है । अगर घर मे हम शौचालय नही बनवाते तो हमारे परिवार का राशन कार्ड निरस्त हो जाता, जिस कारण हमारे परिवार के भूखे मरने की स्थिति बन जाती,  इसी कारण मजबूर हो कर आना पड़ा । उसने बताया कि हम भले ही उप सरपंच  (पत्नी ) है  पर पेट तो भरना ही है ।  साड़े तीन  एकड़  जमीन तो है, पर  इस बार पानी ही नही है खेत खाली पड़े है । मनरेगा मे मजदूरी के सवाल पर  उसने बताया कि काम ठेका पर होता है, बड़ा काम मशीन से होता है मजदूरी नही मिलती । 3_4 लाख का कर्ज है वह भी चुकाना है  इसलिए मजदूरी के लिए बाहर जाना पड़ा है । शौचालय बनने के बाद फिर चले जायेंगे ।
            लगभग 800 वोटर वाले इस गांव मे पिछले छः माह से  मातमी सन्नाटा पसरा है  । इस गाँव के हालातों की तस्वीर तो उप सरपंच पति ने दिखला दी |   गांव की 88  वर्षीय दलित वृद्धा सुकरति अहिरवार  बताने लगी की ऐसा सूखा हमने अपने जीवन में पहली बार  जाना है | हमारे पास 8 _9  एकड़ जमींन है पर  खाली पड़ी है , तीन में से दो लड़का बहू  मजदूरी के लिए  परदेस चले गए हैं | एक लड़का और नाती हमारी देखभाल के लिए रुक गए हैं | व्रद्धावस्थ पेंशन पहले तो मिल जाती थी पर साल भर से नहीं मिली | कारण जानने पर पता चला की वृद्धा के आधार कार्ड के लिए हाथ का निशान नहीं बन पा रहा है |  गाँव के उदल ने अपने पुत्र मेघराज को 11 तक पढ़ाने के बाद मजदूरी के लिए दिल्ली भेज दिया , उसका बड़ा लड़का और बहू  पहले से ही मजदूरी के लिए गए हुए थे |  बताने लगा पढ़ाई नहीं छुड़ाते तो क्या करते ,पांच लाख का कर्जा देना है , पानी है नहीं सब सूखा है |  गाँव का 82  साल का नेत्रहीन नन्नू अहिरवार अपने द्धार पर  इस आस में पड़ा है की उसे  कोई सहारा दे दे | उसे भी वृद्धावस्था पेंशन अंगूठा निशान के कारण नहीं मिल पा रही है | गाँव के पंच संजय शर्मा कहते हैं कि   60 फीसदी दलित  आबादी और  30 फीसदी ब्राम्हण वर्ग के लोग गाँव से मजदूरी की तलाश मे पलायन कर गये है । पलायन करने वाले परिवार मे जो लोग बचे है वे बूढ़े और बच्चे ही बचे है ।
                       जहां  एक ओर बुंदेलखंड के किसान सूखा के संताप से ग्रसित है वहीं सरकार जगह जगह  आनंद महोत्सव करवा कर किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रही है । हद तो तब हो गई जब  आनंद उत्सव के नाम पर मंच पर बार बालाएं और बेडनियां नृत्य करने लगी ।सागर से 20 किमी दूर चितौरा के माध्यमिक विद्यालय में आनदं  उत्सव के नाम पर   बेड़नियो का नृत्य कराया गया । इसकी जानकारी लगते ही   अभिभावको ने  आपत्ति भी जताई  पर आनंद मे सरबोर तंत्र इसकी कहां परवाह करता है ।
                                               बुंदेलखंड में किसानो की दुर्दशा  और सरकार के आनंद महोत्सव को लेकर  नेता प्रतिपक्ष  अजय सिंह ने सरकार को आड़े हाथो लिया | टीकमगढ़ जिले के पृथ्वीपुर में उन्होंने पत्रकारों से चर्चा में मध्य प्रदेश और  बुंदेलखंड में किसानो की दशा पर चिंता  जताई  और  सरकार पर संवेदन हीनता का आरोप लगाया | कांग्रेस के ये नेता जी पृथ्वीपुर में  एक पूर्व विधायक द्वारा आयोजित खेल प्रतियोगिता के आयोजन में प्रदेश अध्यक्ष  जी  के साथ आये थे | यहां उनका यह प्रवचन "पर उपदेश कुशल बहुतेरे " से कम नहीं लगा | 

बेबस विधायक 

छतरपुर जिले के चंदला विधान सभा से सत्ता धारी दल बीजेपी के विधायक आर डी प्रजापति   यह कहने में कतई संकोच नहीं करते कि मै एक दलित समाज से आता हूँ   इसलिए प्रशासन न तो हमारी बात सुनता है और ना ही हमारे पत्रो का जबाब देता है । यह दर्द किसी कांग्रेसी विधायक का नहीं बल्कि  सत्ता धारी दल बीजेपी विधायक का है । प्रशासन  की कारगुजारियो से खफा विधायक जी  आर पार के मूड मे है|  विधायक जी के इस दर्द के राजनैतिक मायने कई हो सकते हैं , पर  उनके उठाये गए जायज मुद्दों को  उनपर तरह तरह की तोहमत लगाकर दरकिनार करना प्रशासन  वा सरकार  की एक कला ही मानी जा सकती है |   
                                             विधायक जी प्रशासन से गुहार लगाते हैं कि  रेत खदानो का सीमांकन करवाकर उनके स्वीकृत क्षेत्र तार फेंसिंग (बारी) लगाने , रेत खदानो पर मजदूरों से कार्य कराने , ओवर लोड ट्रक पर कार्यवाही करने | रेत खदानों पर बोर्ड लगाकर पूर्ण जानकारी दर्शाने | रेत खदानों पर काम करने वाले मजदूरों की जानकारी ,  वा मोबाइल न सहित  प्रशासन मंगाए  उसकी जानकारी मुझे दी  जाए | विधायक जी ने अपने  चंदला विधान सभा क्षेत्र में   रेत के अवैध उत्खनन पर रोक लगाने और जांच कराने बावत कलेक्टर छतरपुर रमेश भंडारी को 14 नव 17 को पत्र लिखा था |  कलेक्टर साहब ने इस पत्र  पर ना तो कोई कार्यवाही की और ना ही इस पत्र का जबाब देना उचित समझा | कलेक्टर की इस हरकत से खफा विधायक ने  19 जनवरी को  कलेक्टर के नांम फिर पिछले सन्दर्भ का   पत्र लिखा । और चेतावनी दी है की   हालातों से  मजबूर होकर २२ जनवरी से अनशन पर  बैठेंगे | 

                        विधायक ने  चंदला इलाके में केन  और केल नदी से हो रही  रेत  अवैध उत्खनन के मामले को  विधान सभा  में  भी उठाया था , यहां तक की इस्तीफा भी सौंपा था | मामले की जांच के लिए जांच कमेटी भी बनी पर उस कमेटी ने क्या जांच की विधायक जी को ही  नहीं पता | 
                     अब आप कल्पना कीजिए कि  छतरपुर जिले में सरकार का तंत्र किस प्रकार से चल रहा है ।  एक ओर दलित उपसरपंच मजदूरी के लिए पलायन को मजबूर हैं    , दूसरी तरफ जिले के  दलित विधायक को  अपनी बात मनवाने के लिए  अनशन की चेतावनी देनी पढ रही है । आम  आवाम की  दशा क्या होगी  अंदाजा लगाया जा सकता है ।

14 जनवरी, 2018

पिछड़ेपन के अभिशाप से ग्रस्त बुंदेलखंड


बुंदेलखंड की डायरी 

वित्त मंत्री का जिला भी पिछड़ेपन का शिकार

रवींद्र व्यास 

पिछड़ेपन के शिकार  बुंदेलखंड के तीन जिले नीति आयोग ने  अति पिछड़े  पाए हैं | इनमे मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री का जिला दमोह  और  महिला  बाल विकाश राज्य मंत्री के  छतरपुर जिला के अलावा उत्तर प्रदेश का चित्रकूट जिला सम्मलित हैं | सड़क, स्वास्थ्य ,शिक्षा , पोषण, और विद्दुत व्यवस्था के मामले में ये जिले फिसड्डी साबित हुए हैं |  पिछड़ेपन के इन मानकों के अलावा और भी कई ऐसे बुनियादी आधार हैं जिनके कारण  इन जिलों में उक्त समस्याओं के अलावा और भी कई विसंगतिया हैं जिनकी ओर ध्यान देने की जरुरत ना प्रशांसन समझता है और ना जन सेवक का लबादा पहने जन प्रतिनधि | 
 1960 की आयोग की रिपोर्ट में देश के 123 जिले अति पिछड़ेपन की श्रेणी में आते थे | इनमे अधिकांश जिले बिहार ,उत्तर प्रदेश ,और मध्य प्रदेश के आते थे | आजादी के सात दशक बाद भी कमोवेश वही हालात बने हुए हैं |  नीति आयोग की यंग लाइव्स लाजीट्यूडनल सर्वे रिपोर्ट   के अनुसार इस समय बुंदेलखंड के तीन जिला सहित  देश के 115 जिले अति पिछड़ेपन के शिकार हैं |  बड़ा सवाल यही उठता है की देश में विकाश कहाँ और किसका हुआ ? क्या  समग्र विकाश की जरुरत को देश के नीती निर्धारकों ने नहीं समझा  | या सिर्फ उनके लिए विकाश का पैमाना महा नगरों के विकाश और नगरीय विकाश तक ही सीमित रहा | 2001 की  एन जे कुरियन की रिपोर्ट में देश के 100 टाप जिलों में कोई भी एम् पी ,यूपी ,अथवा बिहार से नहीं था | 2003 में  शंकर अय्यर की एक  रिपोर्ट में 100 जिलों के  अध्ययन  का विवरण दिया  गया था | उन्होंने अपनी रिपोर्ट में पाया था की पिछड़े जिलों के हालातों में  कोई बहुत ज्यादा परिवर्तन नहीं आया है  | 2007 में कांग्रेस की  मनमोहन सिंह  सरकार ने 27 राज्यों के 250 जिलों के लिए बेकवर्ड रीजन ग्रांट फण्ड (बी.आर.जी.एफ. ) योजना शुरू की थी | 2011 में जब योजना आयोग ने इसकी जमीनी सच्चाई जानी तो वह भी राज्य सरकारों के रवैय्ये को देख कर हैरान रह गई | राज्य की सरकारों ने  इस बजट का बड़ा हिस्सा अपने अन्य उपयोग में लिया और पिछड़े जिलों को  उनकी जरुरत के अनुसार  धन राशि  नहीं दी | 

                                                              दरअसल देखा जाए तो नीति आयोग की रिपोर्ट में बुंदेलखंड के सिर्फ छतरपुर , दमोह और चित्रकूट जिले ही अति पिछड़ेपन की श्रेणी में माने गए हैं |  सड़क, स्वास्थ्य ,शिक्षा , पोषण, और विद्दुत व्यवस्था के मामले में ये जिले  निचले पायदान पर हैं | वास्तविकता ये है कि  बुंदेलखंड  के  पन्ना, टीकमगढ़ , दतिया ,सागर ,उत्तर प्रदेश के ललितपुर ,झाँसी , महोबा , बांदा , हमीरपुर , उरई जिले  के भी हालात कमोवेश ऐसे ही हैं | विकाश के पैमाने पर  देखा जाए तो पोषण के हालात इन जिलों में बद से बदत्तर हैं |  सामाजिक संस्थाओं की रिपोर्टे बताती हैं की कुपोषण के मामले में  बुंदेलखंड के ये जिले  बद्द्तर हालात में हैं | यहां की 80 फीसदी ग्रामीण और 60 फीसदी शहरी महिलाये खून की कमी की शिकार हैं | आधी से ज्यादा आबादी के पास दो जून के भोजन की नियमित व्यवस्था नहीं हे |  स्वास्थ्य के मामले में भी कमाल के हालात हैं , जिलों के अधिकाँश प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कम्पाउण्डर , ए एन एम्  और चौकीदारों के भरोशे चल रहे हैं | जहां डॉ पदस्थ हैं वहां डॉ जाते ही नहीं हैं ,  छतरपुर जिले के ही मुख्य मार्ग पर स्थित कुर्राहां  प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के हालत ये हैं कि वहां डॉ को खुद वहां का चौकीदार नहीं पहचानता |  उपस्थिति पंजी पर सिर्फ डॉ के महीने भर के हस्ताक्षर रहते हैं वह भी उनके परिवार का कोई कर जाता है | बुंदेलखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर झांसी  और सागर में मेडिकल कालेज हैं ,| सागर मेडिकल कालेज तो कागजों में ज्यादा यथार्थ में कम हैं , सागर के कई पत्रकार तो इसे नकली मेडिकल कालेज की संज्ञा देने  चूकते |  छतरपुर में मेडिकल कालेज खोलने और महोबा में  ऐम्स  खोलने के लिए वहां के स्थानीय लोगों ने लंबा संघर्ष भी किया पर उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है | 
                प जवाहर लाल नेहरू कहा करते थे कि किसी भी देश  में सड़के उसकी वो धमनिया हैं जो उसको विकाश पथ पर ले जाती हैं | अटल बिहारी बाजपेई ने  सड़कों के महत्त्व को समझा था और  उनके शासन काल में प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना शुरू हुई थी | इस योजना से बुंदेलखंड के कई दूरस्थ और पहुंच विहीन ग्राम  सड़कों से जुड़े जिसका लाभ भी कई गाँव के लोगों को मिला , इससे ना सिर्फ उनका आवागमन सुलभ हुआ बल्कि उनको अपनी उपज के भी बेहतर दाम मिलने लगे | यह सब जानने के बाद भी  प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना  की रफ़्तार भी अटल जी के हटते ही कछुआ चाल हो गई | कांग्रेस शासन काल में इस योजना को एक तरह से  दफ़न करने का ही प्रयास हुआ |   मध्य प्रदेश  के मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने भी गाँव को सड़कों से जोड़ने के लिए मुख्य मंत्री ग्राम सड़क योजना शुरू की पर इसकी अधिकाँश राशि भ्रस्टाचार की भेंट चढ़ गई , इस योजना की सफलता पर इसलिए भी ग्रहण लगा क्योंकि प्रदेश सरकार ने इसका प्रचार प्रसार तो खूब किया किन्तु  योजना को लेकर बजट प्रावधान ना के बराबर रहा  |  हालात ये हैं की बुंदेलखंड के सैकड़ों गाँव आज भी पहुंच विहीन हैं |
                                                आजादी के पहले बुंदेलखंड का सागर , छतरपुर, झाँसी  शिक्षा के बड़े केंद्र हुआ करते थे | छतरपुर के महराजा महाविद्यालय में लोग पड़ने के लिए भोपाल तक से लोग आते थे |  जो जिला शिक्षा के एक बड़े केंद्र के रूप में स्थापित हो सकता था उस  छतरपुर जिले के 135 स्कूल  शिक्षक विहीन हैं , 130 स्कूल ऐसे हैं जो एक शिक्षक के भरोशे चल रहे हैं |   स्कूलों  शिक्षा का आलम भी अलग है | बुंदेलखंड के इन जिलों  में दर्जनों ऐसे स्कूल हैं जहाँ पदस्थ कोई है और ठेके पर  पढ़ाता  कोई और है |  विद्दुत व्यवस्था के नाम पर  लोग सड़कों पर आते हैं संघर्ष करते हैं , पर इन जिलों के अनेकों गाँव अब भी बिजली की रोशनी से रोशन नहीं हुए हैं|   

                                        बुंदेलखंड  का दमोह जिला  प्रदेश के वित्तमंत्री का जिला होने के बावजूद पिछड़ा पन का शिकार है , वही छतरपुर जिला  महिला बाल विकाश राज्य मंत्री  ललिता यादव का जिला होने के बाद भी कुपोषण और पिछड़ेपन का शिकार है | हालांकि ललिता यादव को मंत्री बने ज्यादा समय नहीं हुआ है , पर वित्त मंत्री जयंत मलइय्या  बीजेपी शासन काल के स्थाई मंत्री हैं | इसके बावजूद  दमोह जिले का पिछड़ापन  प्रदेश सरकार  और मंत्री जी की कार्य प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह जरूर लगाते हैं | सियासत में मस्त रहने वाले जन सेवकों से जनता को ज्यादा उम्मीद भी अब शायद नहीं रही हैं , पर सरकार की रीति नीति को लागू करने वाले प्रशासन तंत्र से उसकी बहुत सारी उम्मीदें रहती हैं | पिछले कुछ वर्षो में जनता ने देखा है की बुंदेलखंड के हर जिले में एक तरह से प्रशासनिक निष्क्रियता का आलम रहा है | अब जब पिछड़ेपन का पैमाना बना  और केंद्र से सख्त चेतावनी मिली तो  छतरपुर,दमोह  और चित्रकूट के कलेक्टर अब एक्शन मोड़ में आए  हैं |  छतरपुर कलेक्टर  रमेश भंडारी ने तो शनिवार को बैठक कर अपनी नाकामियों का गुस्सा अपने अधीनस्थों पर उतारा , वहीँ दमोह जिला के कलेक्टर श्रीनिवास शर्मा ने अपने अधीनस्थों काफी पहले पावर पॉइंट प्रजेंटेशन देकर 2022 तक की रूप रेखा समझाई  और संकल्प लिया की दमोह को अग्रणी जिलों में लाना है | 
                  
                     बुंदेलखंड के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए  प्रशासनिक अधिकारियों को सिर्फ    सड़क, स्वास्थ्य ,शिक्षा , पोषण, और विद्दुत व्यवस्था तक सीमित नहीं रहना होगा | बल्कि  जल संरचानो के विकाश , जल श्रोतों के संरक्षण , कृषि की  समस्यायों  और उसके वास्तविक समाधान ,  जंगल  के संरक्षण और संवर्धन  , जमीन के बेहतर उपयोग की कार्य योजना  के साथ  स्थानीय जरुरत के कृषि आधारित  उद्योगों  व्यवस्था पर  जोर देना होगा |  साथ ही बुंदेलखंड के पारम्परिक कुटीर  उद्योगों  को  पुनः जीवन देना होगा |  





07 जनवरी, 2018

बुंदेलखंड में सी एम् ने दिखाए किसानो को सब्जबाग

बुंदेलखंड की डायरी 

बुंदेलखंड में सी एम् ने दिखाए किसानो को सब्जबाग 

रवीन्द्र व्यास 

सूखा की समस्या से बदहाल  बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जिला के पृथ्वीपुर में मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री ने  भावान्तर भुगतान योजना का आयोजन करवाया | जिले के 18452 किसानों के खाते मे कोर बैकिंग से 41 करोड़ रुपये भेजे ।यह वही स्थान है जहां 28 दिसंबर 17 की रात एक किसान के जवान पुत्र ने इस कारण आत्म ह्त्या कर ली थी क्योंकि उसे काम नहीं मिल रहा था । अपने आप को किसान पुत्र बताने वाले शिवराज सिंह से यहाँ के किसानो को उम्मीद थी कि वे  उस पीड़ित किसान  ( पिता) से जरूर मिलने जायेगे जिसने  अपना जवान बेटा खोया है । शायद यहां के किसानो मजदूरो को यह नही पता था कि मुख्यमंत्री यहा किसानों का दर्द बाटने नही बल्कि सियासी सब्ज बाग़ दिखाने  आए थे । पिछले चुनाव में भी दिखाये थे  इस बार भी दिखा कर चले गए ।

          मुख्यमंत्री श्री  चौहान भावांतर भुगतान योजना के  इस कार्यक्रम को  एक  तरह से चुनावी  आयोजन बनाने मे कोई चूक नही की । उन्होंने दावा किया  कि जो अब तक कभी नहीं हुआवो हम करके दिखायेंगे,    प्राकृतिक आपदा हो या कोई दूसरी कठिनाईसूखा हो या और कोई संकटप्रदेश के किसानों को किसी भी सूरत में अकेले नहीं रहने दिया जायेगा। सुख हो या दुखसरकार किसानों के साथ हमेशा रही है और आगे भी रहेगी। जिस जिले में सी.एम् साहब यह सब कह रहे थे  उसी जिले में पिछले तीन  साल मे लगभग सवा सौ किसान मौत को गले लगा चुके हैं । पेट की आग 🔥 बुझाने  के लिए किसान- मजदूर पलायन को मजबूर हैं । गांव गांव में मातमी सन्नाटा पसरा है । यह हालात अकेले टीकमगढ़ जिले भर के नहीं बल्कि मध्यप्रदेश वाले व उप्र वाले बुंदेलखंड इलाके के सभी जिलों के हालात ऐसे ही है ।
  इन हालातो को अपरोक्ष रूप से नजरअंदाज करते हुए  सीएम साहब कहते हैं कि    किसानों का दर्द सरकार की पीड़ा है। सरकार हर वह कदम उठायेगीजिससे किसानों की जिंदगी में खुशहाली आये। हालांकि सीएम ने  टीकमगढ़ जिले में अल्पवर्षा की स्थिति पर चिंता जताते हुए  किसानों से कहा कि चिंता की बात नहीं हैसरकार किसानों को हर मुसीबत से बाहर निकाल लायेगी। उन्होंने लोगों को  बताया कि टीकमगढ़ जिले के लिये सरकार ने 183 करोड़ रूकी सूखा राहत राशि जारी की है। जल्द ही यह राशि किसानों के खातों में  जायेगी । ये अलग बात है कि महिना भर  पहले सरकार ने यह राशि स्वीकृत की थी , इस राशि का लाभ कैसे लेना है इसकी योजना बनने में हो रहे विलम्ब के कारण यह राशि पीड़ित किसानो के खाते में नहीं पहुंची | सरकारी अफसर शाही के  नकरात्मक रुख  के चलते किसानो और आम आदमी की जिंदगी में कैसे खुशहाली  आएगी  यह एक बड़ा सवाल है |  
  मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि  सागर संभाग में इसी गर्मी से जलाभिषेक अभियान के तहत छोटी बड़ी जलसंरचनाओं के निर्माण के साथ-साथ हर गांव हर पंचायत में पानी बचाने के लिये युद्ध स्तर पर काम किये जायेंगे। यहां मौजूद  पुराने चंदेल कालीन  तालाबों को पुर्नजीवितकिया जायेगा। केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत हम टीकमगढ़ जिले के गांव-गांव और खेत-खेत तक पानी पहुंचायेंगे। उन्होंने जिला प्रशासन को जल संरक्षण के काम जल्द से जल्द प्रारंभ करने को कहा।

बुंदेलखंड के सागर संभाग के लोगों के लिए शिवराज सिंह चौहान की पृथ्वीपुर में मंच से कही गई लोकलुभावन बाते कोई नई नही है । यहाँ के लोग जानते है कि जब  उमा भारती मध्यप्रदेश की सीएम थी,  उस समय उन्होंने किसानो की बुनियादी समस्या के समाधान के लिए पंचज  अभियान चलाया था ।जिसमे जन,  जल,जंगल, जमींन,व जानवर को समाहित किया था । शिवराजसिंह ने  अपने 13 साल के कार्यकाल मे पंचज का ऐसा सत्यानाश किया कि  उसका कोई नाम लेवा भी नही बचा । पिछले सालो मे  मध्यप्रदेश सरकार ने नदी पुनर्जीवित योजना शुरू की थी । सागर संभाग के हर जिले से दो नदियों को लिया गया था ।  संभाग की एक भी नदी वास्तव मे पुनर्जीवित नही हो पाई है, कागजो मे हो गई हो तो अलग बात है । जल संरक्षण व जल संरचनाओं के विकास के सब्ज बाग़ 15-16 के सूखा के समय भी दिखाये गये थे, जमीनी हकीकत कुछ और ही है । बुंदेलखंड पैकेज से जल संरक्षण के लिए मिले पैसे का जमकर दुरूपयोग किया गया । नल जल योजना भष्ट्राचार की भेट चढ गई । पिछले विधानसभा चुनाव मे शिवराजसिंह ने लगभग हर चुनावी सभा में कहा था की गाँव की महलिओ को अब पानी के लिए हेंड पम्प और कुँए तक नहीं जाना पडेगा , हर गाँव में नल जल योजना होगी , टोंटी खोलो और पानी ले लो |  लिए उन्होंने बाकायदा भूमिका भी रची थी कि मुझ से गाँव की माताओ और बहनो का पानी को लेकर जो कष्ट है वह देखा नहीं जाता | रही चंदेलकालीन तालाबों को पुनर्जीवित करने की बात तो यह आश यहां के लोग अर्जुन सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल से लेकर अब तक लगाए बैठे हैं, पर इन तालाबों का पुनर्जीवन सिर्फ सभाओं के मंच तक होता है यथार्थ में नहीं | 


                              इस मौके पर मुख्यमंत्री श्री चौहान ने 7 करोड़ 85 लाख रूपये के  विकास कार्यों का लोकार्पण और करीब 73 करोड़ 79 लाख रूपये की लागत वाले 27 विकास परियोजनाओं/कार्यो का भूमिपूजन भी किया। मुख्य मंत्री ने घोषणा कर यह जताने का भी प्रयास किया कि किसानो के वह सबसे बड़े हितेषी हैं |   सूखा प्रभावित  किसानों से इस वर्ष ऋण वसूली पर रोक और ,  अगले साल तक के कर्जे का ब्याज सरकार भरेगी|   कर्जा नहीं चुकाने वाले किसानो को  भी 0 प्रतिशत की ब्याज दर से ऋण मिलेगा  समाधान योजना के तहत ऐसे किसानों का ब्याज या चक्रवृद्धि ब्याज सरकार भरेगी। कर्जे के मूलधन को पांच या छः किस्तों में देने की सहूलियत  गरीबों को पट्टा देकर भू-स्वामी बनाने के अलावा उसे पक्का मकान, टीकमगढ़ जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हर साल 15-15 हजार मकान बनाये जायेंगे।पृथ्वीपुर के महाविद्यालय को स्नातकोत्तर का दर्जा और  यहां विज्ञान संकाय की कक्षायें भी खोली जायेंग-पृथ्वीपुर में शीघ्र ही एसडीएम कोर्ट की स्थापना की जायेगी/ मोहनगढ़ में अगले साल से महाविद्यालय स्थापित किया जायेगा। टीकमगढ़ जिले का कोई भी सड़क विहीन नहीं रहेगा। मांग के अनुरूप सभी सड़केंपुल-पुलिया  अन्य निर्माण कार्य किये जायेंगे।जलाभिषेक अभियान के तहत टीकमगढ़ जिले के हर गांव में जल संरचनायें बनाई जायेंगी।
                              मुख्य मंत्री की इन घोषणाओं के बीच उनको याद दिलाया गया कि उन्होंने पिछले चुनाव में निवाड़ी को जिला बनाने की घोषणा की थी उसका क्या हुआ , इस पर वे मौन ही रहे | हालांकि मुक्यमंत्री के निवाड़ी को जिला  बनाये जाने पर मौन रहने पर पृथ्वीपुर वासी प्रसन्न हैं , पर उन्हें उन्हें सीएम की संवेदन हीनता पर कष्ट भी हुआ | 
                             दरअसल देखा जाए तो मुख्य मंत्री शिवराज सिंह का पृथ्वीपुर का यह पूरा कार्यक्रम एक तरह से चुनावी ही था | असल में बुंदेलखंड इलाके से बीजेपी को जो सर्वे रिपोर्ट मिली है उसने बीजेपी और आर एस एस दोनों को बेचैन कर दिया है | रिपोर्ट के मुताबिक़ बुंदेलखंड के लोग अपने विधायकों और  यहाँ के मंत्रियों के कामकाज को लेकर खुश नहीं हैं | यदि यही चेहरे दोबारा मैदान में आते हैं तो पार्टी को एक बड़ी कीमत चुकानी पद सकती है | रिपोर्ट के बाद से ही पार्टी के विधायक ,मंत्री अपना अधिकांश समय अब विधान सभा क्षेत्र में बिताने लगे हैं |  बुंदेलखंड इलाके से बीजेपी की बढ़त बरकरार रहे इसके लिए मुख्य मंत्री का सागर जिले से शुरू हुआ अभियान निरंतर जारी है | दूसरी तरफ आर एस एस  बुंदेलखंड में अपनी सक्रियता तेज कर दी है | वहीँ समाज के जातीय धुर्वीकरण का अभियान भी चलने लगा है |  अब  यह समय ही बातयेगा की बिकने वाले बोट से या मुद्दों के आधार पर जनमत बनेगा \| 
   




विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

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