24 सितंबर, 2017

बुंदेलखंड के नाम पर विधान सभा क्षेत्र तक सीमित हुए मंत्री जी


बुंदेलखंड की डायरी 

नाम बुंदेलखंड का सीमित जिले तक 

रवीन्द्र व्यास 

पिछले दिनों गुजरात के बड़ोदरा में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की राष्ट्रीय बैठक में भाग लेने पहुंचे प्रदेश के गृह और परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने भी भाग लिया | बैठक में भाग लेने की खबर को इस तरह से प्रचारित किया गया कि प्रदेश के गृह मंत्री ने बुंदेलखंड के लिए बड़ा भारी पैकेज केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से माँगा है | जबकि प्रदेश के गृह और परिवहन मंत्री जी बैठक में सिर्फ शिवराज सरकार का यशोगान ही करते रहे और बुंदेलखंड के नाम पर सिर्फ सागर जिला और खासकर खुरई विधान सभा क्षेत्र तक सीमित रहे | भूपेंद्र सिंह का यह दृष्टिकोण बताता है कि  बुंदेलखंड के नेताओं में विकास कराने की दृष्टि कैसी है | 

                                            सरकारी योजनाओं के प्रचार प्रसार की जिम्मेदारी सम्हालने वाले जनसम्पर्क विभाग ने एक विज्ञाप्ति जारी कर प्रेस को बताया था कि मंत्री जी ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए विशेष पैकेज की मांग की है , उन्होंने राहतगढ़ -खुरई -खिमलासा सड़क मार्ग ,बीना -कटनी रेल मार्ग पर और खुरई नगर में खेरा नाका पर ओवर ब्रिज निर्माण कराये जाने की मांग की है |खुरई विधानसभा क्षेत्र में पांच मुख्य मार्गों के निर्माण और उनकी पुल पुलियों के निर्माण की मांग की |  इसी के साथ उन्होंने बुंदेलखंड क्षेत्र में मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल खुरई विधान सभा क्षेत्र में खोलने की मांग की | मंत्री जी ने जिस इलाके में विकाश कार्यों की इतनी मांग की है वह सागर जिले के खुरई विधान सभा क्षेत्र में आता है और उनका निर्वाचन क्षेत्र है | अपने  इस विधान सभा क्षेत्र  को  अगले चुनाव में अपने लिए पूर्णतः सुरक्षित बनाने के लिए   साम दाम दंड भेद नीति का सहारा  लेने से भी नहीं चूक रहे हैं |   साम दाम दंड भेद नीति का सहारा  लेने से भी नहीं चूक रहे हैं |   असल में खुरई मे काग्रेस के दिग्गज नेता  अरूणोदय चौबे की सक्रियता से मंत्री जी की बेचैनी बड़ी है । अब खुरई इलाके का  हर कोई जानने लगा है कि हत्या के जिस मामले मे चौबे जी  आरोपी बनाए गए थे  वह उन पर राजनैतिक इशारे पर मामला दर्ज किया गया है । दूसरा बड़ा कारण यह भी माना जाता है कि  
स्थानीय स्तर पर सत्ता(स्थानीय निकाय ) और संघठन की बागडोर उन्होंने अपने रिश्तेदारो   को दिलवाई, जिसके चलते  उनकी बिरादरी के लोग ही  उनसे खफा हो गए है ।

                                             राजनैतिक सूत्रों का कहना है कि  इस  विधान सभा चुनाव के पहले खुरई को मंत्री जी के प्रभाव से अलग जिला भी बनाया जा सकता है | इसके पीछे तर्क दिए जा रहे हैं की शिवराज के सबसे ख़ास मंत्री जी की जीत पर किसी तरह का प्रश्न चिन्ह नहीं लगना चाहिए | दूसरा 1961 में बनी खुरई तहसील सागर की आबादी और क्षेत्रफल के हिसाब से  सबसे बड़ी तहसील है |  ,1965 से इसे जिला बनाये जाने की मांग उठ रही है | पिछले चुनावों के भी अनुभव बताते हैं की बीजेपी ने चुनावी दौर में जहां जहां अलग जिला बनाने की घोषणा की उसका लाभ पार्टी को मिला |  चुनावी साल में  अब अगर मंत्री जी द्धारा प्रदेश और बुंदेलखंड के अन्य इलाके को दरकिनार कर सिर्फ अपने विधान सभा क्षेत्र के लिए मांग की है तो यह विपक्ष के लिए तो मुद्दा हो सकता है पर उनके राजनैतिक भविष्य के लिए लाभ दायक ही कहा जाएगा | 
बुंदेलखंड मे बीजेपी की जद्दोजहद 

            बुंदेलखंड इलाके के सागर संभाग की 26  विधान सभा सीटों में से 6 पर कांग्रेस  और 20 पर बीजेपी को पिछले चुनाव में सफलता मिली थी | इन 20 में से सागर से दो दमोह ,छतरपुर और पन्ना जिले से एक एक मंत्री हैं | जिनमे 4 केबिनेट स्तर के वा एक राज्य मंत्री हैं | कांग्रेस मुक्त हिन्दुस्तान की बात करने वाली बीजेपी के सामने बुंदेलखंड में सबसे बड़ी समस्या यही है की उसे ही अपनी 20 सीटें बचाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है |    पिछले दिनों हुए एक आंतरिक सर्वे में  बुंदेलखंड में बीजेपी और उसके कई मंत्रियो और   विधायकों के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लग गए हैं  | आर एस एस को भी जो फीड बैक मिला उसने भी बीजेपी के लिए चिंता की लकीरें बड़ा दी हैं | इसी को देख कर  यह माना जा रहा है की बुंदेलखंड की कई विधान सभा सीटों पर भारी उलट फेर हो सकता है |  सियासत के इन समीकरणों  को साधने के लिए बीजेपी की  बूथ लेबल तक की तैयारियां तो जारी हैं ही , साथ ही पार्टी ने इस इलाके के कई नेताओं और सांसदों को  उनके विधान सभा क्षेत्र में सक्रीय होने के आदेश दिए हैं | ऐसे ही कई नेताओ  ने  विधान सभा क्षेत्र के दौरे शुरू कर दिए हैं | बीजेपी   इस तरह से जनता की नाराजगी को दूर करने की जुगत में हैं , साथ  ही सर्वे को आधार मानकर बीजेपी के कई ऐसे विधायकों को ठिकाने लगा दिया जाएगा जो पार्टी वा व्यक्ति विशेष के लिए उपयुक्त नहीं माने जा रहे हैं | 

                                          असल में बीजेपी के सामने इस बार दोहरी मुसीबत है , एक तो बीजेपी मुख्यमंत्री शिवराज सरकार के प्रति आंशिक नाराजी, बिजली के नाम हो रही लूट ,  दूसरे मोदी सरकार की नीतियां |  यह बात शायद प्रदेश के गृह वा परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह बखूबी समझते हैं इसी के चलते उन्होंने अपने इलाके में पार्टी जनाधार बड़ाने के साथ व्यक्ति गत जनाधार ज्यादा बढ़ाया | धर्म के कार्यक्रमों से लेकर कांग्रेसियों को बीजपी में लाने का काम उन्होंने खुरई विधान सभा में जोर शोर से किया |  मोदी की योजनाओं का बीजेपी के नेता मंच से खूब जम कर प्रचार करते हैं |  चाहे वह उज्ज्वला योजना हो , जनधन खाता , नोटबंदी , और जीएसटी  का पार्टी स्तर पर प्रचार तो खूब किया जाता है , पर बंद कमरे में बैठ कर कई नेता स्वीकारते हैं की मोदी की  इन योजनाओं के कारण बीजेपी का एक बड़ा तबका पार्टी से दूर हुआ है | इसकी वजह बताते हैं की उज्ज्वला योजना में जो गैस  चूल्हे वा सिलेंडर बांटे गए उन सिलेंडरों को खरीदने की क्षमता बुंदेलखंड के कमजोर तबके के पास नहीं हैं | इसी तरह जन धन खाते खुल तो जरूर गए  जीरो बेलेंस पर बैंक की मनमानी के कारण और ट्रांजेक्शन पर होने वाली कटौती के कारण आम आदमी भी परेशान हे | नोटबंदी के कारण  इलाके का कारोबार तो प्रभावित हुआ ही , साथ ही लोगों के घरों में जमा विपत्ति काल के लिए जमा पूंजी भी समाप्त हो गई |  इसी तरह जीएसटी पर सरकार कहती है कि एक देश एक कर पर , एक देश सात कर की प्राणली और मासिक रिटर्न ने छोटे व्यापारियों और जनता को लुटने पर मजबूर कर दिया |  
                                         इसके ठीक विपरीत कांग्रेस अपने चुनावी अभियान में बहुत ही सुस्त चाल से आगे बढ़ रही है | अनिश्चय और गुट बाजी के भंवर में फसी कांग्रेस के नेता ही तय नहीं कर पा रहे हैं कि किन मुद्दों को उठाये और किन को छोड़ें | गुटबाजी का आलम ये है कि पार्टी प्रत्याशी तो दूर की बात है पार्टी के जिला अध्यक्ष के लिए ही एक राय नहीं बन पा रही है | प्रकोष्ठों के अध्यक्षों की बात तो बाद की बात है | 
                                          
                              



10 सितंबर, 2017

सूखा का संघर्ष

बुंदेलखंड की डायरी

रवीन्द्र व्यास

 उत्तर प्रदेश के सात जिले बाँदा ,हमीरपुर ,चित्रकूट ,महोबा ,झाँसी ,जालौन ,और ललितपुर , मध्य प्रदेश के छः जिले सागर ,दमोह ,छतरपुर ,टीकमगढ़ ,पन्ना और दतिया  जिलों में फैले बुंदेलखंड  का जन मानस इन दिनोंप्रकृति के प्रकोप से चिंतित है  70 हजार वर्ग किमी में फैले और  लगभग दो करोड़ की आबादी वाले इस इलाके के नशीब में सूखा और त्रासदी एक स्थाई नियति बन गई है | मौसम विभाग की भविष्यवाणियो के बावजूद जब वर्षा नहीं हुई तो बुंदेलखंड के हर जिले में सूखा ग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर प्रदर्शन होने लगे | सूखा के इस संकट में लोगों की बेचैनी को समझा जा सकता है | जनता जनार्दन के इस दर्द से बेखबर सियासत का राज रंग अपने शबाब पर चलता चला जा रहा है | यह राज रंग भी चित्रकूट में देखने को मिले |


  जिस दिन मध्य प्रदेश के बिजावर से बीजेपी विधायक पुष्पेंद्र नाथ पाठक चित्रकूट में कामता नाथ की परिक्रमा कर बुंदेलखंड में वर्षा की कामना कर रहे थे , उसी समय चित्रकूट के कलेक्ट्रेट में लोक गठबंधन पार्टी के लोग इलाके में व्याप्त सूखे को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे | लोक गठबंधन पार्टी ने राजयपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर बुंदेलखंड को सूखा ग्रस्त घोषित करने की मांग की | ज्ञापन में मांग की गई कि किसानो को कर्ज के बोझ से मुक्ति देकर ऐसी व्यवस्था की जाए जिससे खेती लाभ दायक बन सके | उपज पर इतना मूल्य किसानो को मिले जिससे लागत खर्च निकलने के बाद पर्याप्त मुनाफ़ा मिले | बिजली और सिचाई की पर्याप्त व्यवस्था , प्रमाणित बीज की व्यवस्था हो | कृषि आधारित उद्योग हर इलाके में स्थापित किये जाए | कृषि उत्पाद मूल्य का तुरंत भुगतान की प्रणाली विकसित की जाए |

                झाँसी जिले के मऊरानीपुर में भारतीय किसान यूनियन भानु ने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर सात सूत्रीय ज्ञापन सी एम् एवं कलेक्टर के नाम एस डी एम् को ज्ञापन सौंपा | सूखा ग्रस्त घोषित करने की मांग के साथ , हर खेत का सर्वे करानेकर्ज माफ़ी की मांग की गई | उरई में शिवपाल सिंह फेन्स एसोसिएसन के बैनर टेल किसानो ने सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा |

         टीकमगढ़ में आम आदमी पार्टी ने अमित खरे के नेतृत्व में प्रदर्शन कर सूखा ग्रस्त घोषित करने की मांग की | प्रदर्शनकारियों ने शिवराज सरकार पर जनता और किसानो से बिजली के नाम पर हो रही लूट का मुद्दा भी उठाया | छतरपुर जिले में तो सूखे के हालात का अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है की जिले के रनगुंवा गाँव के लोग प्रदर्शन करने को मजबूर हो गए |रनगुंवा बाँध के किनारे बसे इस गाँव के लोगों ने युवक कांग्रेस के बैनर टेल प्रदर्शन कर जिले में सूखे की समस्या पर प्रशासन का ध्यान खींचा |जिला कलेक्टर के नाम सौंपे ज्ञापन में सर्वे कर मुआवजा दिलाये जाने की मांग की | कांग्रेस के जिले से इकलौते विधायक विक्रम सिंह ने कलेक्टर को पत्र लिख कर बताया की जिले में अवर्षा के कारण फसलें नष्ट हो गई हैं , जो बची वो कीट पतंगों के कारण नष्ट हो गई हैं | किसानो का खाद बीज मेहनत सब बर्बाद हो गई है | विधायक ने भी सर्वे और मुआवजा की मांग की है |

                छतरपुर के ही किसान नेता प्रेम नारायण मिश्रा के नेतृत्व में किसानो का प्रतिनिधि मंडल कलेक्टर से मिला | मुख्य मंत्री के नाम दिए ज्ञापन में स्पष्ट किया कि अवर्षा के कारण हालात अत्याधिक गंभीर हैं | जलाशय सूख रहे हैं नदी नालों में पानी नहीं हैंफसलें सारी सूख चुकी हैं पानी की कमी के कारण रवि फसल की संभावना नहीं रह गई है | इस हालात में मानव के अलावा पशुओं के लिए भी चारे पानी की विकराल समस्या खड़ी हो गई है | हालात से निपटने के लिए  किसानो को दीर्घ कालिक बगैर ब्याज का ऋण दिया जाए , उनके बच्चों को शिक्षा फ़ीस माफ़ की जाए , जिले के स्टॉप डेम में गेट लगाए जाएँ | राजस्व और सिचाई ऋण ,वा बिजली बिल माफ़ किये जाएँ |

                             मध्य प्रदेश विधान सभा की शासकीय उपक्रम समिति  सभापति यशपाल सिंह सिसोदिया
  के नेत्रत्व्य में आठ सदस्यीय दल   छतरपुर जिले के दौरे पर आया | बिजावर उद्यानिकी विभाग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में सभापति सिसोदिया ने जिले में किसानो की नष्ट हुई फसलों पर चिंता जताई | यहाँ ये भी कम दिलचस्प नहीं है कि जहाँ किसानो की समस्या ,फसलों ,और पानी को लेकर बुंदेलखंड का हर संवेदन शील व्यक्ति चिंतित है वहीँ  बीजेपी के अधिकांश  विधायकों और नेताओं ने   इस मसले पर चुप्पी साध रखी है |                                                चित्रकूट में बीजपी किसान मोर्चा का दो दिवसीय सम्मलेन हुआ  केंद्र और प्रदेश के मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर , शिवराज सिंह भी आये पर बुंदेलखंड के वर्तमान कृषि हालातों पर इनने बोलना शायद इस लिए ठीक नहीं समझा क्योंकि ये लोग तो देश दुनिया की चिंता में व्यस्त रहते हैं देश के किसानो के लिए रीत नीत बनाते हैं इस लिए अलग बुंदेलखंड के किसानो के लिए क्या बोलना | अलबत्ता यह जरूर दोहराया गया कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी  के नेतृत्व वाली सरकार ने  सही अर्थों में किसानोंगरीबों और नवजवानों की चिंता की है। केन्द्र  मध्यप्रदेष की सरकार गरीबों  किसानों के लिए समर्पित है। 5 वर्शों में किसानों की आय को दोगुना करने के प्रधानमंत्री के संकल्प को एक अभियान के रूप में भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के कार्यकर्ता किसानों तक लेकर जायेंगे और उसे धरातल पर उतारने में किसानों की मदद करेंगे।

भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष रणवीर सिंह रावत ने  कांग्रेस पर आरोप लगाया उसकी किसान विरोधी नीतियों के कारण बड़े स्तर पर किसान खेती से पलायन कर चुके हैं। केन्द्र में नरेन्द्र मोदी और प्रदेष के यषस्वी किसान पुत्र मुख्यमंत्री षिवराजसिंह चौहान ने किसानों को केंद्र में रखकर जो नीतियां तैयार की हैं उसकी बदौलत आज मध्यप्रदेष कृशि क्षेत्र में औसत 20 प्रतिषत की कृशि विकास दर के साथ आगे बढ़ रहा है। शिवराजसिंह चौहान के नेतृत्व में सिंचाईबिजलीसड़क और आपदा प्रबंधन पर ध्यान दिया गया है। किसानों के लिए कृशिबागवानीपषुपालनमस्त्यपालनखाद्य प्रसंस्करण आदि क्षेत्रों में किसानों के लिए नवीन योजनाएं लाकर उन्हें लाभकारी बनाया है।                                                           

                      ये सियासत का तकाजा है की जिससे अपनी और पार्टी की सियासत चमके वही बात करनी चाहिए ,इस सम्मलेन भी वही हुआ | हालांकि मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान को चित्रकूट जाते समय खजुराहो विमान तल पर   भाजपा नेता .श्याम त्रिवेदी ने  छतरपुर जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने हेतु ज्ञापन सौंपा |  मुख्यमंत्री  ने अल्पवर्षा की स्थिति पर  सर्वे हेतु आस्वासन  दिया है |

                                             बुंदेलखंड की ७० से ८० फीसदी आबादी खेती पर आश्रित है ,| जिनमे अधिकाँश लघु और सीमांत किसान ही हैं , जिनके जीवन का आधार खेती और मजदूरी ही है | बार बार पड़ने वाले सूखा और अन्य प्राकृतिक आपदा किसानो से उनके जब जीवन का आधार ही छीन लेती है तो उनका बेचैन होना स्वाभाविक है | इस बार की अवर्षा ने भी उसके सामने ऐसे ही हालात बना दिए हैं |  जहां फसलें तो नष्ट हो ही गई हैं उस पर पानी की स्थिति ने उसे चिंतित कर दिया है | बुंदेलखंड के सबसे ज्यादा बाँध वाले ललितपुर जिले के बाँध इस बार 40 फीसदी जल राशि भी संगृहीत नहीं कर पाए , जिसका सीधा असर झाँसी , ललितपुर ,बबीना जैसे नगर पर पडेगा बिजली उत्पादन प्रभावित होगा वह अलग | बांधों के यह हालात अकेले ललितपुर जिले के भर नहीं हैं बल्कि ऐसी ही दशा  झाँसी , महोबा , बांदा , हमीरपुर ,उरई , छतरपुर ,टीकमगढ़ ,दमोह और सागर जिले के बाँध और तालाबों की है |                                                                                      बुंदेलखंड के पत्रकार पिछले कई सालों से बुंदेलखंड में बने स्टॉप डेमो पर गेट ना लगने को लेकर अपने समाचारो की सुर्खिया बनाते रहे हैं | तालाबों पर हो रहे अत्रिक्रमण , नदियों और नालो के उथली करण पर पत्रकारों की कलम चलती रही है | सामाजिक संस्थाए भी इन मसलों को उठाती रही हैं | पर समाज से दूर होती सरकार और प्रशासन को इन जायज समस्यांओ के समाधान की जरुरत ही महशूस नहीं होती |
रवीन्द्र व्यास 

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

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