25 सितंबर, 2016

बुंदेलखंड डायरी 

बुंदेलखंड में बिकती बालायें 

रवीन्द्र व्यास 

बुंदेलखंड के ओरछा में  प्रथम श्रेणी न्यायाधीश  प्रदीप दुबे के सर्च वारंट पर पृथ्वीपुर पुलिस द्वारा निबोरा गाँव से एक उड़ीसा की महिला को  बरामद किया ।  रश्मिता को उड़ीसा की ही एक महिला दलाल ने दो बार बेचा था । बुंदेलखंड में महिलाओं की खरीद बिक्री का यह कोई
 पहला मामला नहीं है । इस इलाके में घटते लिंग अनुपात के कारण यहां  दुल्हन  खरीद बिक्री  का  कारोबार खूब फल फूल रहा है । खरीद कर लाइ गई ये दुल्हनें कई बार एक ऐसे भृम जाल में फसती हैं जहां मानवता भी शर्म सार हो जाती है । पिछले दो  दशकों से तेजी पकड़ते इस कारोबार पर नारी कल्याण की बात करने वाले स्वयं सेवी संघठन लगभग मौन हैं । पुलिस का रवैया तो और भी  गजब है वह मामला ही खरीद बिक्री का नहीं बनाती है । 
       
 रश्मिता के पहले खरीददार पति  जेरोन निवासी लखन यादव के आवेदन  पर  न्यायलय के सर्च वारंट जारी किया था ।  पृथ्वीपुर पुलिस ने पीड़िता को बबलू यादव के चंगुल  निबोरा गाँव से बरामद किया गया ।  रश्मिता ने पुलिस और कोर्ट को बताया  मीना उसे  पढ़े लिखे 
और संपन्न परिवार के  लड़के से शादी कराने की बात कहकर  उड़ीसा से जेरोन लेकर आई थी । जहाँ उसने लखन यादव को बेचकर इसकी 
शादी करा दी। लखन जब कुछ दिनों बाद बाहर मजदूरी पर गया, तो दलाल मीना ने रश्मिता को बहला फुसलाकर और भी अमीर व्यक्ति से
 शादी कराने का झांसा देकर निबोरा गाँव के बबलू यादव को 60 हजार रूपये में बेच दिया था । जहाँ उसे मिली जलालत भरी जिंदगी , वह 
तो पहले पति का प्रयास था जो उसे मुक्ति मिल गई । पुलिस ने मीना सहित  दस लोगों पर मामला तो दर्ज किया है किन्तु इसमें कहीं 
खरीदने बेचने का अपराध दर्ज नहीं किया है ।  
                            उड़ीसा की रश्मिता के साथ घटी यह घटना बुंदेलखंड की कोई पहली घटना नहीं है । आज भी ऐसी ही एक घटना 
भुलाये नहीं भूलती , जून 2005  की तपती गर्मी में जब हम अपने एक पत्रकार साथी के साथ छतरपुर जिले के गोयरा गाँव एक उड़ती हुई
 सूचना पर पहुंचे । जिले का सबसे दूरस्थ गाँव और उस पर मोटर साइकिल की सवारी , उबड़ खाबड़ पथरीले रास्तों ने मोटर साइकिल के
 टायर ट्यूब को भी बेदम कर दिया । एक किमी तक हम दोनों उसे घसीटते हुए मोटर साइकिल के डाक्टर के पास पहुंचे । उसने तमाम तरह
 के जतन कर  जीवन दाई हवा भरी , तब कहीं जाकर हम दोनों फिर सवार हो कर गोयरा गाँव पहुंचे । बड़ी मुश्किल से गाँव के कमलेश दुवेदी
 के घर पहुंचे , उस घर के बाहर ही जानवर बाँधने का बाड़ा  था जिसमे एक महिला पड़ी दिखी । हमें गाँव के ही एक युवक ने बताया की यह 
वही उड़ीसा की महिला है जिसे यहां रखा जाता है । इसी की तलास में तो हम  दोनों यहां तक आये थे , पर जो कुछ भी हम देख रहे थे और महसूस कर रहे थे वह रोंगटे खड़े करने वाला था । की कोई व्याक्ति इतना भी गिर सकता है की एक महिला के साथ जानवरों की तरह 
 व्यवहार करने लगे ।  हम दोनों कुछ वीडियो  शाट बनाकर वापस आ गए । छतरपुर में यहां के महिला संघठन से ,पुलिस अधिकारियों को
 सारी कहानी बताई । दूसरे दिन दलबल के साथ पहुंचे और उसे मुक्त कराया गया । उसने जो कहानी बताई वह भी हैरान करने वाली थी ।
उड़ीसा के बालंगी जिले के रामसिया चंदलोई गाँव की रहने वाली सविता मिश्रा को संदना  गाँव के शारदा प्रसाद मिश्रा ने 5 हजार में  खरीद कर 
लाये थे । तीन माह बाद उन्होंने सविता को दस हजार में कमलेश दुवेदी को बेच दिया था । पुलिस ने कमलेश ,उसके भाई और भाभी पर
 मामला दर्ज किया था । 
                                                    इस घटना से सबक लेते हुए तत्कालीन डी आई जी वरुण कपूर ने उड़ीसा से शादी कर लाइ
 गई युवतियों की सूचि बनवाई थी । अकेले चंदला विधान सभा इलाके में इस तरह के 978 मामले सामने आये थे । उनके जाने के बाद 
मामला फाइलों में दब कर रह गया । 
                                                 बुंदेलखंड इलाके में घटते लिंग अनुपात और लोगो की बदलती सोच के कारण वैवाहिक 
समस्याओं का सामना ग्रामीण इलाको के लोगो को करना पड़ता है । कहीं पानी के कारण शादी नहीं हो पाती तो कहीं गाँव के दुर्गम इलाके में 
होना एक समस्या बन जाता है । ऐसे में कुछ लोगों ने विवाह की दलाली का धंधा अपना लिया ।  शादी कराने के  उड़ीसा ,झारखण्ड , पश्चिम
 बंगाल , मध्य प्रदेश के बालाघाट , इलाके से लड़कियों के माता पिता को शादी कराने का कहकर बेच देते हैं । ऐसे लोगों की शादी मात्र एक 
एफिडेविट पर नोटरी करा देता है । शादी के दलालों का यह नेटवर्क बुंदेलखंड के झाँसी , ललितपुर , हमीरपुर , बांदा , महोबा ,उरई , जालौन ,दतिया ,सागर ,दमोह, छतरपुर ,टीकमगढ़ और पन्ना जिले में खूब फल फूल रहा है । 

                                   बुंदेलखंड इलाके में शादी की समस्या और उड़ीसा से लड़की लाकर शादी करने के मामले की गहराई से पड़ताल 
करने वाले वीक मैगजीन के ब्यूरो चीफ दीपक तिवारी  बताते हैं की  समस्या  लोगों की सोच में है । वे बताने लगे की हम उड़ीसा में जाकर उन लोगों से भी मिले जिन्होंने अपनी बेटियों की शादी बुंदेलखंड इलाके में की है । उड़ीसा में जो भी यहां शादी करते हैं वे आकर सारा कुछ पता करते हैं उसके बाद शादी करते हैं । कुछ जो अति गरीबी के कारण यहां नहीं आ पाते ऐसे लोग इन दलालो के चंगुल में फस जाते हैं और इस तरह की घटनाये सामने आ जाती हैं । उड़ीसा से आने के बाद हमने बुंदेलखंड के कई इलाकों का दौरा किया , अधिकांशतः परिवारों में उड़ीसा की लडकिया 
मिली जिन्होंने अपने वैवाहिक जीवन पर संतोष व्यक्त किया ।  
                                    
                                        दरअसल बुंदेलखडं इलाके में लड़कियों की कमी के कारण , दूसरा  लोगों की सोच कुछ इस तरह की हो गई है की वे अपनी बेटी की शादी गाँव में नहीं करना चाहते । तीसरा रोजगार भी एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है ,। इसी तरह की परेशानियों के कारण  विवाह के लिए लोगों को शादी के चलते फिरते एजेंट से संपर्क करना पड़ता है । कई बार ऐसे भी फसते  हैं की दुल्हन सब लेकर चंपत हो जाती है । तो कई बार दुल्हन ऐसे लोगों के चक्कर में फस जाती है की उसकी दशा सविता या रश्मिता जैसी हो जाती है । 

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