25 सितंबर, 2016

बुंदेलखंड डायरी 

बुंदेलखंड में बिकती बालायें 

रवीन्द्र व्यास 

बुंदेलखंड के ओरछा में  प्रथम श्रेणी न्यायाधीश  प्रदीप दुबे के सर्च वारंट पर पृथ्वीपुर पुलिस द्वारा निबोरा गाँव से एक उड़ीसा की महिला को  बरामद किया ।  रश्मिता को उड़ीसा की ही एक महिला दलाल ने दो बार बेचा था । बुंदेलखंड में महिलाओं की खरीद बिक्री का यह कोई
 पहला मामला नहीं है । इस इलाके में घटते लिंग अनुपात के कारण यहां  दुल्हन  खरीद बिक्री  का  कारोबार खूब फल फूल रहा है । खरीद कर लाइ गई ये दुल्हनें कई बार एक ऐसे भृम जाल में फसती हैं जहां मानवता भी शर्म सार हो जाती है । पिछले दो  दशकों से तेजी पकड़ते इस कारोबार पर नारी कल्याण की बात करने वाले स्वयं सेवी संघठन लगभग मौन हैं । पुलिस का रवैया तो और भी  गजब है वह मामला ही खरीद बिक्री का नहीं बनाती है । 
       
 रश्मिता के पहले खरीददार पति  जेरोन निवासी लखन यादव के आवेदन  पर  न्यायलय के सर्च वारंट जारी किया था ।  पृथ्वीपुर पुलिस ने पीड़िता को बबलू यादव के चंगुल  निबोरा गाँव से बरामद किया गया ।  रश्मिता ने पुलिस और कोर्ट को बताया  मीना उसे  पढ़े लिखे 
और संपन्न परिवार के  लड़के से शादी कराने की बात कहकर  उड़ीसा से जेरोन लेकर आई थी । जहाँ उसने लखन यादव को बेचकर इसकी 
शादी करा दी। लखन जब कुछ दिनों बाद बाहर मजदूरी पर गया, तो दलाल मीना ने रश्मिता को बहला फुसलाकर और भी अमीर व्यक्ति से
 शादी कराने का झांसा देकर निबोरा गाँव के बबलू यादव को 60 हजार रूपये में बेच दिया था । जहाँ उसे मिली जलालत भरी जिंदगी , वह 
तो पहले पति का प्रयास था जो उसे मुक्ति मिल गई । पुलिस ने मीना सहित  दस लोगों पर मामला तो दर्ज किया है किन्तु इसमें कहीं 
खरीदने बेचने का अपराध दर्ज नहीं किया है ।  
                            उड़ीसा की रश्मिता के साथ घटी यह घटना बुंदेलखंड की कोई पहली घटना नहीं है । आज भी ऐसी ही एक घटना 
भुलाये नहीं भूलती , जून 2005  की तपती गर्मी में जब हम अपने एक पत्रकार साथी के साथ छतरपुर जिले के गोयरा गाँव एक उड़ती हुई
 सूचना पर पहुंचे । जिले का सबसे दूरस्थ गाँव और उस पर मोटर साइकिल की सवारी , उबड़ खाबड़ पथरीले रास्तों ने मोटर साइकिल के
 टायर ट्यूब को भी बेदम कर दिया । एक किमी तक हम दोनों उसे घसीटते हुए मोटर साइकिल के डाक्टर के पास पहुंचे । उसने तमाम तरह
 के जतन कर  जीवन दाई हवा भरी , तब कहीं जाकर हम दोनों फिर सवार हो कर गोयरा गाँव पहुंचे । बड़ी मुश्किल से गाँव के कमलेश दुवेदी
 के घर पहुंचे , उस घर के बाहर ही जानवर बाँधने का बाड़ा  था जिसमे एक महिला पड़ी दिखी । हमें गाँव के ही एक युवक ने बताया की यह 
वही उड़ीसा की महिला है जिसे यहां रखा जाता है । इसी की तलास में तो हम  दोनों यहां तक आये थे , पर जो कुछ भी हम देख रहे थे और महसूस कर रहे थे वह रोंगटे खड़े करने वाला था । की कोई व्याक्ति इतना भी गिर सकता है की एक महिला के साथ जानवरों की तरह 
 व्यवहार करने लगे ।  हम दोनों कुछ वीडियो  शाट बनाकर वापस आ गए । छतरपुर में यहां के महिला संघठन से ,पुलिस अधिकारियों को
 सारी कहानी बताई । दूसरे दिन दलबल के साथ पहुंचे और उसे मुक्त कराया गया । उसने जो कहानी बताई वह भी हैरान करने वाली थी ।
उड़ीसा के बालंगी जिले के रामसिया चंदलोई गाँव की रहने वाली सविता मिश्रा को संदना  गाँव के शारदा प्रसाद मिश्रा ने 5 हजार में  खरीद कर 
लाये थे । तीन माह बाद उन्होंने सविता को दस हजार में कमलेश दुवेदी को बेच दिया था । पुलिस ने कमलेश ,उसके भाई और भाभी पर
 मामला दर्ज किया था । 
                                                    इस घटना से सबक लेते हुए तत्कालीन डी आई जी वरुण कपूर ने उड़ीसा से शादी कर लाइ
 गई युवतियों की सूचि बनवाई थी । अकेले चंदला विधान सभा इलाके में इस तरह के 978 मामले सामने आये थे । उनके जाने के बाद 
मामला फाइलों में दब कर रह गया । 
                                                 बुंदेलखंड इलाके में घटते लिंग अनुपात और लोगो की बदलती सोच के कारण वैवाहिक 
समस्याओं का सामना ग्रामीण इलाको के लोगो को करना पड़ता है । कहीं पानी के कारण शादी नहीं हो पाती तो कहीं गाँव के दुर्गम इलाके में 
होना एक समस्या बन जाता है । ऐसे में कुछ लोगों ने विवाह की दलाली का धंधा अपना लिया ।  शादी कराने के  उड़ीसा ,झारखण्ड , पश्चिम
 बंगाल , मध्य प्रदेश के बालाघाट , इलाके से लड़कियों के माता पिता को शादी कराने का कहकर बेच देते हैं । ऐसे लोगों की शादी मात्र एक 
एफिडेविट पर नोटरी करा देता है । शादी के दलालों का यह नेटवर्क बुंदेलखंड के झाँसी , ललितपुर , हमीरपुर , बांदा , महोबा ,उरई , जालौन ,दतिया ,सागर ,दमोह, छतरपुर ,टीकमगढ़ और पन्ना जिले में खूब फल फूल रहा है । 

                                   बुंदेलखंड इलाके में शादी की समस्या और उड़ीसा से लड़की लाकर शादी करने के मामले की गहराई से पड़ताल 
करने वाले वीक मैगजीन के ब्यूरो चीफ दीपक तिवारी  बताते हैं की  समस्या  लोगों की सोच में है । वे बताने लगे की हम उड़ीसा में जाकर उन लोगों से भी मिले जिन्होंने अपनी बेटियों की शादी बुंदेलखंड इलाके में की है । उड़ीसा में जो भी यहां शादी करते हैं वे आकर सारा कुछ पता करते हैं उसके बाद शादी करते हैं । कुछ जो अति गरीबी के कारण यहां नहीं आ पाते ऐसे लोग इन दलालो के चंगुल में फस जाते हैं और इस तरह की घटनाये सामने आ जाती हैं । उड़ीसा से आने के बाद हमने बुंदेलखंड के कई इलाकों का दौरा किया , अधिकांशतः परिवारों में उड़ीसा की लडकिया 
मिली जिन्होंने अपने वैवाहिक जीवन पर संतोष व्यक्त किया ।  
                                    
                                        दरअसल बुंदेलखडं इलाके में लड़कियों की कमी के कारण , दूसरा  लोगों की सोच कुछ इस तरह की हो गई है की वे अपनी बेटी की शादी गाँव में नहीं करना चाहते । तीसरा रोजगार भी एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है ,। इसी तरह की परेशानियों के कारण  विवाह के लिए लोगों को शादी के चलते फिरते एजेंट से संपर्क करना पड़ता है । कई बार ऐसे भी फसते  हैं की दुल्हन सब लेकर चंपत हो जाती है । तो कई बार दुल्हन ऐसे लोगों के चक्कर में फस जाती है की उसकी दशा सविता या रश्मिता जैसी हो जाती है । 

19 सितंबर, 2016

URI Attack


हम समीक्षा करते रहे वे सफाया करते रहे

रवीन्द्र व्यास

पाक उस जमी पर आतंकवादियो को प्रशिक्षण देता है जो मूलतः भारत की भूमि है अब उसे पाक अधिकृत
कश्मीर कहा जाता है उसी सर जमी से चार ट्रेंड  टेरिरिस्ट  उरी में सेना के ब्रिगेड मुख्यालय पर हमला करते हे
 सोते समय हुए इस हमले मे 18 जवान शहीद हो जाते हैं चारो आतंकवादी भी मर जाते हैं सेना और सरकार
के लोग घटना स्थल तक जाते हैं और इसे पाकिस्तान का कायराना कृत्य बताते हैं

देश के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी भी कहते हैं की हम उरी में किये गए इस कायराना आतंकी हमले की कड़ी निंदा
करते हैं में देश को यकीन दिलाना चाहता हु की इस घ्रणित हमले के पीछे जो लोग भी हैं उन्हें बक्शा नहीं जाएगा रविवार को हुए हमले के बाद सोमवार को फिर बैठक हुई और सीमावर्ती इलाको की सुरक्षा प्रणाली की समीक्षा की
गई बैठक में मंत्री से लेकर देश के सुरक्षा तंत्र से जुड़े तमाम लोग सम्मलित हुए

देश की जनता तो अब तक यही मानती रही की देश पर राज करने वाले नेता जो भी निर्णय लेंगे वह देश हित में ही
लेंगे उसके सामने जब देश में हुए आतंकी हमलो की फेहरिस्त आती है, जिससे उसे पता चलता है की  की पिछले  सालों में हुए हमलो में चार हजार से ज्यादा जवान शहीद हो गए ऐसी दशा में  वह यह सोचने को मजबूर हो ही
जाता है कि ये देश के नेता अपने ही देश के हैं या कही और के सैन्य मनोविज्ञान कहता है की इस तरह की
निरंतर प्रक्रिया का सामना यदि किसी देश की सेना करती है और उसे प्रतिकार का मौका नहीं दिया जाता तो वह
 सैन्य दल मानसिक तौर पर संघर्ष नहीं कर पाता है युध्द के प्रकारों  में  भी यह माना जाता है की  किसी  देश से
युद्ध कई तरह से लड़ा जाता है सीधा युध्द और , छद्म युद्ध इस छद्म युध्द की भी कई शाखाये हैं जिनमे दुश्मन देश
की अर्थ शक्ति पर आघात करना , सामजिक तौर पर समाज को सत्ता के विरुध्द करना , गोरिल्ला रण नीति के
 तहत दुशमन देश की सेना , संचार , परिवहन , और जन मानस पर आघात करना
 
पाकिस्तान  सीधे संघर्ष में कभी भारत को मात नहीं दे पाया इस कारण वह पिछले तीन दशकों से भारत के साथ
 छद्म युध्द की नीति पर काम कर रहा भारत का  खुफिया तंत्र यह जानता है की दुनिया में सिर्फ भारत ही एक
 मात्र ऐसा देश है जहां आतंकवाद के नाम पर पाकिस्तान सेना द्वारा प्रशिक्षित आतंकवादी हमला करते हैं
जिसे एक तरह से गोर्रिला वार भी कहा  जाता है    इन लोगों ने देश में एक विशाल तंत्र स्थापित कर लिया है ,
जिसे इस्लाम के नाम पर और मदरसों के नाम पर करोडो की धन राशि मुहैय्या कराई जाती है ऐसा भी नहीं है
 की देश का खुफिया तंत्र बिलकुल भी नकारा और बे असर हो , इस तंत्र के पास वे तमाम सूचनाएं हैं जो होनी
चाहिए पर सियासत की मजबूरी और वोटो के भूखे नेताओं ने इनके हाथ बाँध दिए हैं इस तंत्र को संबल
मिले तो देश में ना स्लीपर सेल के सदस्य रह पाएंगे और ना ही माओवाद के नाम पर कत्ले आम मचाने वाले
 और उनके पैरोकार रह पाएंगे

दरअसल  पाकिस्तान की इस हौसला अफजाई में भारत की भूमिका भी महत्व पूर्ण है भारतीय नेतृत्व दुनिया
से डरता रहा ,और समीक्षा करता रहा , दूसरी तरफ पाकिस्तान हमारा  सफाया करता रहा , सबूतों को नकारता
रहा और हम उम्मीद करते रहे की  दुनिया के देश पाकिस्तान को सबक सिखाएंगे दुनिया उसी के साथ होती है
जो सबल और सक्षम हो , इस्रायल जैसा छोटा सा देश अपने रणनैतिक कौसल के कारण दुनिया को ठेंगे पर रखता
है दुनिया भर के सैन्य विज्ञानी मानते हैं की अटैक इस दा बेस्ट डिफेन्स , पर भारत में इसका उलटा होता है
हम ना अतीत से सबक लेते हैं और ना वर्तमान को समझने का प्रयास करते हैं // जय हिन्द //





18 सितंबर, 2016

Bundelkhand Dayri_Rahul Gandhi_Khat

बुंदेलखंड में राहुल  की खाट 

रवीन्द्र व्यास 

उत्तर प्रदेश में चुनावी चक्रव्यू का दौर चल रहा है । इसी दौर में कांग्रेस के राहुल गांधी रथ पर सवार होकर निकल पड़े । इस बार के  चुनावी संग्राम में उन्होंने प्रशांत कुमार को अपना सारथी बनाया है । चुनावी रण में फतह हासिल करने के लिए बाकायदा शस्त्र और शास्त्र की खोज की गई । पीके के एक सदस्य ने झाबुआ की खाटला (खाट ) बैठक का जायजा लिया । इसके कारण और निवारण को समझा गया , जाटों की होने वाली पंचयात और खाट के उपयोग को समझा गया । इसके बाद एक चुनावी शस्त्र खाट अस्तिव में आया । और तय हुआ की उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी खाट सभा करेंगे ।  यही खाट लेकर वह बुंदेलखंड में भी आ गए , पर वे यह नहीं जानते थे की बुंदेलखंड में खाट सभा  या खाट पंचायत नहीं होती थी । बुंदेलखंड में छत्रसाल के चबूतरे पर पंचायत लगती थी और उसी में समाज के निर्णय हो जाते थे । 

                                         खैर खाट लेकर आ गए तो कोई बात नहीं । देवरिया से दिल्ली तक के 2500 किमी के सफर में ऐसे पड़ाव आते ही रहते हैं की कहीं सामाजिक फैसलों का तरीका कुछ और होता है तो कहीं कुछ और । पर अपने पीके भाई ने तय कर दिया तो उसे मानना  गाँधी परिवार के प्रति निष्ठावान हर कांग्रेसी का कर्तव्य है । अब इतने बड़े उत्तर प्रदेश में हर जगह की लोक परम्पराओं को  जानने समझने में अपना समय खराब तो नहीं करेंगे पी के भाई । पहले  चुनाव मुद्दों पर लड़ा जाता था , उसी को ध्यान में रख  रथ पर लिखवा दिया  कर्जा माफ़ , बिजली बिल हाफ ।ये अलग बात है कि अब मुद्दे और देश से ज्यादा जातिवाद के समीकरण पर चुनाव लड़ा जाता  है । 

 राहुल जी को शायद यह समझाइस भी दी गई की  अबकी बार देव स्थलों से दूरी नहीं रखना है । इस कारण जब राहुल गांधी ने बुंदेलखंड की धरा चित्रकूट पहुंचे तो कामदगिरि  पहुंच कर सन्त महात्माओ से आशीर्वाद लिया । इस दौरान उनकी बैठने का तरीका कुछ ऐसा था जैसे नमाज के लिए बैठे हो । सोशल मीडिया में यह फोटो आते ही लोगों ने कमेंट शुरू कर दिए । बांदा में उन्होंने मौलाना हजरत रब्बानी का आशीर्वाद लिया । मौलाना ने आयतें पड़कर राहुल के सर पर फूंक मारकर आशीर्वाद दिया । अपने इस बुंदेलखंड के दौरे के दौरान वे  स्वतन्त्रता सेनानियों के परिवार से भी मिले , स्थानीय और राष्ट्रीय महापुरषो और योद्धाओ की प्रतिमाओ पर माल्यार्पण भी किया ।  महोबा में आल्हा ऊदल की , झाँसी में महरानी लक्ष्मी बाई , झलकारी बाई और चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमाओ पर तो मध्य प्रदेश के हरपालपुर में नेहरू जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया । आम तौर पर कार्यकर्ताओ से दूरी बनाये रखने वाले राहुल गांधी इस बार कार्यकर्ताओ  से  घुल मिल जाने का प्रयास करते रहे । 


                                     चित्रकूट ,बांदा ,महोबा , मऊरानीपुर ,झाँसी के रोड शो और खाट सभा में  राहुल के निशाने पर इस बार बीजेपी ,बीएसपी और समाजवादी पार्टी थी । खाट सभा में किसानों  से फ़ार्म भी भरवाए जा रहे हैं जिसमे किसान से नाम ,पता और कर्ज की राशि की जानकारी ली जा रही है । राहुल गांधी लोगों को बताते हैं  की कांग्रेस कार्यकर्ता ये फ़ार्म भरवाकर मुझे देंगे , में इन फार्मो को पी एम् को देकर कर्ज माफ़ी की मांग करूँगा , यदि नहीं मानी गई तो सत्ता में आते ही दस दिनों के अंदर किसानों का कर्जा माफ़ कर दिया जाएगा । लंबे चोदे भाषण तो वे सभाओं में नहीं देते पर इस बार वे मोदी शैली में ही प्रधान मंत्री मोदी पर आक्रमण कर रहे हैं । वे लोगों से सवाल करते हैं ,अच्छे दिन आये क्या ? काला धन आया क्या ? खातों में पंद्रह पंद्रह लाख आये क्या ? एक लंबी सी चुप्पी होती है , शुरू होती है आरोपों की झड़ी , जो लगभग हर जगह एक समान होती है ।   किसानों की दुर्दशा के लिए उन्होंने तीनो को जिम्मेदार ठहराया ।
                                        मोदी सरकार को पूजिपतियो की सरकार बताते राहुल आरोप लगाते हैं की मोदी सरकार ने देश के  दस बारह उद्योगपतियों का एक लाख दस हजार करोड़ का कर्जा माफ़ किया है । यह राशि मनरेगा के लिए दिए जाने वाले तीन साल के बजट के बराबर है । वायदा किया गया था की दो करोड़ लोगों को रोजगार मिलेगा ,ढाई साल बाद भी किसी को नहीं मिला । किसान अपनी दाल दस रु किलो बेचने को मजबूर होता है और जब वही दाल बाजार में 140 रु किलो में खरीदना पड़ती है । दुनिया बाहर में पेट्रोल की कीमत गिरी हैं पर जनता से 66 रु प्रति लीटर वसूले जा रहे हैं । और यह सब केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण हो रहा है । बुंदेलखंड की बदहाली के लिए सपा ,बसपा और भाजपा को जिम्मेदार बताते हुए उन्होंने कहा की हाथी ने सब कुछ चर गया , सपा की साइकल का पहिया ही निकल गया । भाजपा पर झूठे वायदे करने का आरोप लाग्या । वे यह बताने से भी नहीं चूके की शीला दीक्षित जब दिल्ली की मुख्य मंत्री थी तो उन्होंने दिल्ली का नक्शा बदल दिया था । हमारी सरकार यहां सत्ता में आई तो प्लान नहीं करके दिखाएंगे । बुंदेलखंड के विकाश के लिए हमारी सरकार ने बुंदेलखंड के लिए स्पेशल पैकेज लेकिन यू पी और एम् पी सरकार सारा पैसा चट कर गई । 


                                            राहुल गांधी खाट सभा में अधिकांशतः लोगों से सवाल जबाब ही करते रहे , सवाल जबाब का यह दौर कुछ लोगों तक ही सीमित  रहा ,बाकी सब तमाश बीन बने रहे । उनमे से अधिकाँश इस चिंता में थे किसी तरह यह खाट उनके घर तक पहुंच जाए ।  हालांकि सवाल जबाब के इस दौर में  चित्रकूट के बमरोहा गाँव की एक आदिवासी महिला मुन्नी बाई ने राहुल गांधी से पूंछा की बिजली तो चार घंटे भी नहीं मिलती , कई ऐसे लोग हे जिनके पास ना खेती की जमीन है और ना ही घर है ,? ऐसे  में कर्ज माफ़ और बिजली हाफ का क्या करेंगे । राहुल यह सवाल सुन सन्न रह गए  कहने लगे धुप बहुत तेज है मुझे आपके सवाल से पसीना आ गया है । सरकार बनने पर सब ठीक हो जाएगा । 
 झांसी में राहुल गांधी को बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना करना पड़ा । यहां के सर्किट हाउस में मोर्चा के अध्यक्ष बाबूलाल तिवारी के नेतृत्व में कार्यकर्ता राहुल का विरोध करने पहुंचे । कार्यकर्ताओ ने नारे बाजी करते हुए कहा की सत्ता बनते ही बुंदेलखंड राज्य की मांग भूल जाते हैं । जबकि बसपा सरकार ने अलग बुंदेलखंड राज्य का प्रस्ताव पास कर दिया था किन्तु केंद्र सरकार ने इसपर कोई ध्यान नहीं दिया । सत्ता चली गई तो फिर बुंदेलखंड की याद आने लगी है । बुंदेलखंड को अब पैकेज नहीं राज्य चाहिए । इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस में धक्का मुक्की भी हुई । 
                मुन्नी का यह सवाल ही बुंदेलखंड की हकीकत बयान करने के लिए काफी है । दरअसल बुन्देलखण्ड  देश का एक ऐसा इलाका हो गया है जिसे दो राज्यों में बाँट कर राज्यों को इस इलाके के लोगों और यहां की खनिज , वन, पुरातत्व  सम्पदा को लूटने का अधिकार मिल गया है । उत्तर प्रदेश में चुनाव हैं तो राज नेता घड़ियालू आंशू बुन्देलखण्ड के लिए बहा रहें हैं । राहुल  खटिया लेकर आकर बता रहे हैं  की हम सत्ता में आये तो किसानों का कर्जा माफ़ कर देंगे बिजली बिल हाफ कर देंगे । अखिलेश डिजिटल लोकतंत्र की बात कह रहे हैं वे 18 वर्ष से ज्यादा की उम्र और दो लाख से कम आय वालों को फ्री स्मार्ट फोन देने की बात कह रहे हैं । इस काम के लिए एक सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है ,  लोगों के रजिस्ट्रेशन का काम भी जल्द शुरू होगा \ आगे आगे देखिये और कौन कौन क्या क्या मुफ्त बांटता है । चुनाव के बाद बुंदेलखंड की दशा  फिर जस की तस हो जायेगी , तब ना कोई वायदों की बरसात होगी और ना सुधार की गुंजाइस होगी । जो भी विकाश होगा वह बनने वाले मुख्य मंत्री के इलाके में होगा ? 

04 सितंबर, 2016

Bundelkhand Dayri_ Briks


बुंदेलखंड  और ब्रिक्स 
रवीन्द्र व्यास 
पर्यटन और इससे जुड़े कारोबार किसी भी देश ,समाज की अर्थव्यवस्था में अच्छा खासा प्रभाव रखते हैं । कई देशो की अर्थ व्यवस्था  सिर्फ पर्यटन कारोबार पर ही आश्रित है । ऐसे दौर में बुंदेलखंड के खजुराहो में सम्पन्न हुए ब्रिक्स पर्यटन समिट का अपना एक अलग महत्व है । यह इसलिए भी महत्व पूर्ण हो जाता है की दुनिया की लगभग आधी आबादी भारत ,चीन , रूस ,साऊथ अफ्रीका  और ब्राजील में रहती है । ब्राजील को छोड़ कर बाकी देशो के प्रतिनधियों का खजुराहो आना और यहां भारत के पर्यटक स्थलों के विकाश और पर्यटकों के एक दूसरे के  देश में आने जाने पर विचार विमर्श करना , पर्यटन के क्षेत्र में एक सकारात्मक कदम माना जा सकता है ।  
दो  दिवसीय  ब्रिक्स देशों की पर्यटन समिट में  साउथ अफ्रीका के पर्यटन मंत्री सहित  आठ व चाइना के पांच और रूस का एक  सदस्य  शामिल हुआ । इसके अलावा  केंद्रीय पर्यटन सचिव , और उनका दल , उत्तर प्रदेश वा मध्य प्रदेश के पर्यटन सचिव , मध्य प्रदेश के पर्यटन मंत्री ने ,  समिट में  ब्रिक्स देशों के बीच में किस तरीके से पर्यटन को बढ़ावा दिया जाए इस पर  विचार विमर्श किया गया ।  ब्रिक्स देशों के नागरिक इन देशों के स्थित पर्यटन स्थलों को देखने के लिए आसानी से आ सके इसकी कनेक्टिविटी को लेकर भी चर्चा की गई  है। चर्चाये बहुत हुई ब्रिक्स देशो के नागरिको के लिए वीसा नियमो में ढील की , पर्यटन क्षेत्रों में रेल और हवाई   संपर्क बढ़ाने की , आपसी संपर्क और संबंधों के विस्तार के साथ पर्यटन में आधुनिक तकनिकी  के इस्तेमाल पर  व्यापक विचार विमर्श हुआ ।  पर्यटन में महत्व पूर्ण भूमिका निभाने वाले टूर आपरेटर्स ने भी इस सम्मिट में अपने विचार रखे  और एक मार्केटिंग प्लान ब्रिक्स देशो के सामने रखा । पर्यटन में मार्केटिंग के महत्व को बताते हुए टूर ऑपरेटरों को एक उचित प्लेटफॉर्म देने की वकालत भी  की ।

                               ब्रिक्स देशों के इस सम्मिट में आये  उत्तर प्रदेश से आये पर्यटन मंत्रायलय के लोगों ने  पर्यटन के विस्तार को लेकर अपनी कार्य योजना भी बताई । उन्होंने बताया की  हम एक ऐसा टूरिस्ट सर्किल बनाने का प्रयास कर रहे हैं जिसमे बनारस को देख कर पर्यटक इलाहबाद , चित्रकूट , खजुराहो ,और ओरछा होते हुए झांसी पहुंच जाए । इस टूरिस्ट सर्किल में भविष्य में पन्ना , कालिंजर , अजयगढ़ , महोबा  और चरखारी को  जोड़ने की बात भी कही गई । 
                                     देखा जाए तो   बुंदेलखंड में पग पग पर  स्थापत्य कला की  जीवंत  धरोहर मौजूद है , साथ ही है प्रकृति का  अद्भुत वरदान , जैव विविधिता का ऐसा संगम बहुत कम जगह देखने को मिलता है । इस दशक के शुरुआत में पन्ना के तत्कालीन कलेक्टर रविन्द्र पस्तोर ने   बुंदेलखंड को टूरिज्म सर्किट विकसित करने के अपने स्तर पर प्रयास किये थे । उन्होंने पन्ना टाइगर रिजर्व , टाइगर रिजर्व के अंदर मौजूद शील चित्रो , पन्ना के पांडव फाल , कौआ सेहा , ब्रस्पति कुंड , नचना का शिव मंदिर , भगवान् राम के आश्रम शारंग धाम , अगस्त मुनि के आश्रम , अजयगढ़ किला ,  पड़ोस के कालिंजर फोर्ट , चित्रकूट , खजुराहो , जटाशंकर , भीम कुंड , धुबेला , महोबा ,चरखारी , दमोह के बांदकपुर , टीकमगढ़ के बल्देवगढ़ के किला , कुंडेश्वर , ओरछा  को इस टूरिस्ट सर्किल में जोड़ने की बात कही थी ।  उनके जाने के  बाद  उनके प्रयास कागजों में ही दफ़न हो कर रह गए \  बाद में पन्ना कलेक्टर के रूप में आई दीपाली रस्तोगी ने जरूर कुछ सार्थक प्रयास किये और मंदिरो के आस पास के अतिक्रमण हटवाए , अजयगढ़ किला के लिए सीढ़िया बनवाई , उनका प्रयास था की कालिंजर की तरह  अजयगढ़ के किले तक सड़क बनाई जाए , पर यह सफल ना हो सका ।  इसी दौर में छतरपुर के तत्कालीन कलेक्टर रहे अजात शत्रु ने  खजुराहों ,व्यास बदौरा के मंदिर , जटाशंकर , भीमकुण्ड , धुबेला होते  हुए  ओरछा प्रस्थान के सर्किल बनाने का प्रयास किया था । कुर्सी पर व्यक्ति के बदलने के साथ ही योजनाए और सपने दफ़न हो जाते हैं  यही भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था है । 



                                          साउथ अफ्रीका के पर्यटन मंत्री डी ए हेनिकोम   ने भारत की बेरोजगारी पर सवाल उठाया और कहा  कि भारत की अर्थव्यवस्था तो बढ़ रही है लेकिन यहां पर बेरोजगारी पर  भी काबू पाना भी जरुरी है । इसी तरह चीन विकसित देश तो है किंतु वहा भी लोग गरीबी से परेशान है । समाज की इस दशा को पर्यटन कारोबार से काफी हद तक सुधारा जा सकता है । खजुराहो में पर्यटन कारोबार से जुड़े लोग हेनिकोम की इस बात पर अपनी  सहमती  जताते हुए कहते हैं की ब्रिक्स का यह आयोजन भले ही बहुत निर्णायक ना रहा हो किन्तु इतना अवश्य है की खजुराहो में इस तरह के आयोजन होने से खजुराहो , और प्रदेश का  गौरव बड़ा है । लोगों को ये उम्मीद है की जब अक्टूबर में गोवा में ब्रिक्स का सम्मलेन होगा तो खजुराहों में हुई चर्चा का अवश्य ही कोई निष्कर्ष निकलेगा । जिसका लाभ ना सिर्फ   खजुराहो को होगा बल्कि  बुंदेलखंड के तमाम पर्यटक स्थलों को भी होगा । 
दरअसल  टूर ऑपरेटर्स ने मार्केटिंग जो बात कही है वह देश और खाशकर बुन्देलखण्ड इलाके के लिए बहुत ही मार्के की बात कही है । बुन्देलखण्ड के खजुराहो  और बहुत हुआ तो ओरछा  की बात कह कर पर्यटक  को सीमित कर दिया जाता है ।  जब की जरुरत है बुन्देलखण्ड इलाके के समग्र छोटे बडे , धार्मिक  और प्राकृतिक  पर्यटक स्थलों के प्रचार  प्रसार की ।  खजुराहो को यदि इसका केंद्र बनाकर और खजुराहो  के संग्रहालय में बुंदेलखंड के  ऐसे स्थलों की  मॉडल अथवा  छोटी छोटी फिल्मो का प्रदर्शन करें  तो एक  खजुराहो  सड़क मार्ग से आने वाला पर्यटक राह में पड़ने वाले पर्यटक स्थल तक जरूर पहुंचेगा । 

  देश में पर्यटन कारोबार के महत्व को इसी बात से समझा जा सकता है की इस कारोबार से देश के कुल रोजगार में लगभग ९ फीसदी  हिस्सेदारी पर्यटन की है । देश की जी डी पी में भी इसकी हिस्सेदारी  लगभग सवा छह फीसदी मानी जाती है । भारत में पर्यटन कारोबार को बढ़ाने के लिए  सरकार के ये प्रयास काफी महत्व पूर्ण माने जाते हैं । पर पर्यटन कारोबार को बढाने के लिए आवश्यक है ,परिवहन की बेहतर व्यवस्था ,,संचार की सुविधा , सुरक्षा और  विश्राम के लिए सुविधाजनक गेस्ट हाऊस,होटल ,लाज वगेरह , प्रशिक्षित गाइड , और शांत माहौल ।  सरकार का लक्ष्य है की देश में घरेलु और विदेशी पर्यटकों की संख्या बड़े इसके लिए तमाम तरह के जतन  किये जा रहे हैं ।   बुंदेलखंड में इनका  असर कब तक देखने को मिलता है इसका इन्तजार है बुंदेलखंड के लोगो को । 

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

  बुंदेलखंड की डायरी  विकास की उमंग और चुनौतियों के  संघर्ष का  बुंदेलखंड  रवीन्द्र व्यास  दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए    2025  में कई...