पदमाबती का चमत्कारिक धाम जहाॅ गिरे थे माॅ के पदम
शिव कुमार त्रिपाठी
शिव कुमार त्रिपाठी
बुंदेलखंड के पन्ना नगर के उत्तर पश्चिम छोर पर किलकिला नदी के समीप यह प्राचीन देबी मंदिर स्थित है । मंदिर को स्थानीय बोली मे बडी देबन कहते है। लोकमान्यता के अनुसार प्राचीन काल मे इस क्षेत्र मे पदमाबत नाम के एक नरेश हुआ करते थे, जो शक्ति के उपासक थे उन्होने अपनी आराध्य देबी माॅ दुर्गा को पदमाबती नाम से इस प्राचीन मंदिर मे स्थापित किया \ कलान्तर मे इस क्षेत्र का नाम इसी मंदिर के कारण पदमाबतीपुरी हुआ जो बाद मे परना और बर्तमान मे पन्ना बना \ पदमाबती देबी का उल्लेख भबिष्य पुराण तथा बिष्णु धर्मोत्तर पुराण मे किया गया है\ भारत की शकितपीठो मे एक ये शक्तिपीठ है माॅ का जहाॅ हार गिरा बो मैहर के नाम से जाने लगा और पन्ना मे माॅ का पदम यानि दाहिना पैर गिरा तो इस शक्तिपीठ का नाम पदमाबती शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है \
यहाॅ पर जो भी मनोकामना मानी जाती है पूर्ण होती है मैहर की शारदा माता का जो महत्ब है बही महतब पन्ना की पदमाबती देबी का है ,बुदेलखण्ड के लोग इसे पन्ना की मैहर माता मानते है, मैहर की शारदा माता पबई की कलेही देबी और पन्ना की पदमाबती देबी हबा मे त्रिकोण बनाती है ,जो समान्तार 45 किलांेमीटर की दूरी पर है इसे यंत्र भी माना जाता है ,नबरात्र शुरू होते ही पदमाबती देबी यानि पन्ना मे बउी देबी के नाम से मशहूर इस मंदिर मे सुबह से ही भक्तो की भीड़ लगने लगती है। और जो भी मनोकामना मानी जाती है बो पूर्ण होती है यूॅ तो मंदिर के ग्रर्भ गा्रह मे 7 प्रतिमाएॅ है और मध्य मे बिराजी पदमाबती देबी हर मनोरथ पूर्ण करती है
परीक्षा मे अच्छे अंक प्राप्त करना हो या कैरियर बनाना हो बडी देबी सभी कुछ पूर्ण करती है।
पदमाबती देबी के इस मंदिर का जितना बडा धार्मिक महत्ब है उतना ही ऐतहासिक भी है 925 मे तुर्क यात्री इबने कुरदान ने भी अपने यात्रा अभिलेख मे इस स्थान का बर्णन किया है यहाॅ एक प्राचीन शिलालेख भी है जिसमे बहाम्मी लिपि मे कुछ लिखा गया है जो अपठनीय है और नबरात्र मे कुछ ज्यादा ही भक्तो की भीड होने लगी है और कहते है कि पदमाबती देबी भक्तो को संकटो से तो बचाती ही हे कई बार बालिका रूप मे दर्शन भी देती है
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें