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रवीन्द्र व्यास
छतरपुर/ खजुराहो /३१ अगस्त १५
आज खजुराहो के होटल रेडिसन में हुई केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की कंसल्टिंग कमेटी की बैठक । केंद्रीय मंत्री उमा भर्ती की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में कमेटी के सदस्यों ने गंभीर रूप से केन बेतवा लिंक परियोजना के बारे में विचार विमर्श किया । हालंकि इस बैठक में २१ सदस्यों वाली कमेटी के सिर्फ 12 सदस्य ही हिस्सा लेने आये । जो बैठक के बाद बाँध स्थल ढोंडन गए ।
बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए उमा भारती ने कमेटी के महत्व को बताते हुए कहा की यहां बैठक रखने का मुख्य उदेश्य यह भी था की माननीय सांसद गणो को आधुनिक भारत का जो पहला मानव निर्मित लिंक शुरू होने वाला है केन बेतवा उसको हम स्पॉट पर जा कर देख सकें । उन्होंने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार के असहयोग की बात से इंकार किया । योजना पर वन्य प्राणी कमेटी की आपत्ति पर उन्होंने कहा राज्य सरकार द्वारा जब जबाब पहुंचेगा तब हम उनके जबाब देंगे क्योंकि वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक हुई थी उसमे कौन कौन सी बातें आई हैं उसके लिए में मुख्य मंत्री जी को कहा है , क्योंकि हमारे जो एन डब्लू डी ए के अधिकारी हैं वे मुख्य मंत्री के संपर्क में हैं । और स्टेट वाइल्ड लाइफे बोर्ड के अध्यक्ष स्वयं मुख्य मंत्री होते हैं । एन डब्लू डी ए के अधिकारी उनके साथ बैठ कर मामला सुलझा लेंगे ।
पर्यावरण के सवाल पर उमा भारती थोड़ी से उत्तेजित भी हुई उन्होंने कहा जमीन तो डूब क्षेत्र में आनी है इसमें तीन लाख हेक्टेयर जमीन वो जमीन नेशनल पार्क की है या नहीं है , आप लोग योजना के बारे में इस तरह के सवाल करेंगे तो एक बहुत बड़ी योजना को नुकशान पहुंचाकर लाखों लोगों का पेट काट देंगे । इसलिए न तो वन्य प्राणियों को हानि होने दी जायेगी और ना ही पर्यावरण को हानि होने दी जायेगी ।
योजना के शिलान्यास के सवाल पर उमा जी का कहना था की जल्द रखी जायेगी खाली एम पी यु पी की सरकारों को वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक कर उनकी समस्याओं का समाधान कर योजना प्रस्तुत करना है । उन्होंने यह भी कहा की दोनों राज्य सरकारों ने असहमति नहीं बताई है । योजना की दी पी आर बन गई पब्लिक हियरिंग भी हो गई है ।
दरअसल केन बेतवा लिंक परियोजना को लेकर देश के तमाम पर्यावरण विदों ने असहमति जताई है । एन डी शासन काल में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश अप्रेल २०११ में आये थे उन्होंने इस योजना को नेशनल पार्क की कीमत पर किसी भी तरह से स्वीकृति देने पर असहमति जताई थी । वे इस बात को जान कर हैरान हुए थे की लगभग ६ हजार हेक्टयर नेशनल पार्क की भूमि इस डूब क्षेत्र में आ जायेगी ।