//रवीन्द्र व्यास//
राष्ट्रीय ध्वज की आचार संहिता के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज या उसकी नकल का इस्तेमाल व्यापार, व्यवसाय या पेशे के लिए नहीं किया जाना चाहिएरिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट-1951 की धारा 123(3) में स्पष्ट है कि किसी भी उम्मीदवार को ऐसा निशान आवंटित नहीं किया जा सकता जो धार्मिक व राष्ट्रीय चिन्ह हो ,और उसमें भावनात्मक अपील हो। इसकेबावजूद इंडियन नेशनल कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस भारतीय तिरंगे का अपनी राजनीति के लिए तिरंगे का इस्तेमाल कर रही हैं / जिस पर रोक और नियंत्रण का दाइत्व चुनाव आयोग का और देश की सर्वोच्च न्याय पालिका का है / आजादी के बाद से पांच दशकों से ज्यादा सरकार पर काबिज रहने वाली कांग्रेस का यह अपराध किसी को शायद नजर नहीं आया /
दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की पार्षद सिम्मी जैन ने याचिका दाखिल की है,याचिका में दलील दी गई है रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट-1951 की धारा 123(3) में साफतौर पर कहा गया है कि किसी भी उम्मीदवार को ऐसा निशान आवंटित नहीं किया जा सकता जो धार्मिक व राष्ट्रीय चिन्ह हो और उसमें भावनात्मक अपील हो। इस एक्ट के तहत इंडियन नेशनल कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को भारतीय तिरंगे के इस्तेमाल से रोका जाए। याचिका में यह आग्रह भी किया गया है कि आयोग कांग्रेस के चुनाव चिह्न ‘हाथ का पंजे’ को वापस लेकर उसे कोई नया निशान आवंटित किया जाए।
दिल्ली समाज कल्याण बोर्ड की दो बार चेयर मेन रह चुकी सिम्मी जैन ने लोगों का यथार्थ से परिचय कराया है / उन्होंने देश के राष्ट्रीय तिरंगे के राजनैतिक इस्तेमाल पर सवाल उठाया है / देखा जाए तो तिरंगे के उपयोग कांगेस और उससे निकली शाखाओं में ही हो रहा है , फिर चाहे वह तृण मूल कांग्रेस हो अथवा राष्ट्र वादी कांग्रेस पार्टी , दोनों दलों का निर्माण कांग्रेस से निकले लोगों ने ही किया / जब की अन्य किसी राजनैतिक दल द्धारा तिरंगे का राजनैतिक उपयोग नहीं किया जाता है / राष्ट्रीय ध्वज की आचार संहिता के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज या उसकी नकल का इस्तेमाल व्यापार, व्यवसाय या पेशे के लिए नहीं किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय ध्वज के सिर्फ चक्र क छोड़ कर शेष ध्वज का इस्तेमाल कांग्रेस द्धारा किया जाता है / हालांकि कांग्रेस के पास यह तर्क है कि यह राष्ट्रीय ध्वज उनकी ही पार्टी की देंन है / शायद इसी कारण कांग्रेस को इस ध्वज के इस्तेमाल का पूर्ण हक़ है , अब ये अलग बात है की देश का संविधान बनाने वाला दल अपने को संविधान से ऊपर मानने लगा है ?
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