// इन दिनों बुंदेलखंड इलाके में भक्ति की अनोखी गंगा प्रवाहित हो रही है , हर कहीं यज्ञ -हवंन -पूजन और का सिलसिला चल रहा है , दुखो और मानसिक अशांति से त्रस्त जन भक्ति के इस सरोवर में सुख, शांति और समृद्धि- की तलाश करते हें । यही तो हिंदुस्तान की वह शक्ति है जो उसे संतोष का भाव प्रदान करती है /
मध्य प्रदेश के छतरपुर आये गृहस्थ संत तरुण चौबे जी कहते हें कि _दिनचर्या की शुरूआत अपने आराध्य की स्तुति और पूजा-अर्चना के साथ तो लोग करते हैं और यह कामना भी करते हें कि उनके साथ-साथ दूसरों का भी भला हो, लेकिन शायद यह याद नहीं रख पाते कि भक्ति का ही इस श्रृष्टि में एक ऐसा मार्ग है जिससे सुख, समृद्धि और शांति का मार्ग प्रशस्त होता है।
आडम्बरों से पूरी तरह दूर सहज सरल गृहस्थ संत पं. तरुण चौबे महाराज स्थानीय मेला जलबिहार मैदान में चल रहे 6 दिवसीय रुद्र महायज्ञ, पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं महारुद्राभिषेक अनुष्ठान के चौथे दिन सैकड़ों श्रद्धालुओं के मध्य यह उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि सेवा व्यापक शब्द है। बच्चे माता-पिता की, भक्त ईश्वर की, सबल निर्बलों की, समाजसेवी दीन-दुखियों की और राजनेता जनता की तथा शासकीय कर्मचारी और अधिकारी शासन द्वारा सौंपे गए कार्यो को सेवाभाव से पूर्ण करने का प्रयास करता है। इन सारे क्षेत्रों में व्यक्ति की सोच, दिशा और दशा के साथ-साथ उसका लक्ष्य भी दुरूस्त रहे यह शक्ति उसमें हमेशा निहित रहे इसकी प्राप्ति केवल भक्ति मार्ग से ही संभव है।
इस अनुष्ठान के तैयारियों से लेकर आयोजन के प्रारंभ होने तक और जारी कार्यक्रमों के दौरान जिस तरह से प्रकृति इस अंचल पर महरबान हुई है, उससे यह संतोषप्रद है कि यह पुनीत अनुष्ठान काफी हद तक अपने मकसद की ओर अग्रसर हो रहा है।
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