21 सितंबर, 2011

चीन की दादागिरी पर भारत का दमदार जबाब

चीन की दादागिरी पर भारत का दमदार जबाब 
रवीन्द्र व्यास 
भारत ने काफी समय बाद कुटनेतिक तरीके से अपने पडोसी चीन को उसकी तस्वीर दिखाई है | भारत ने वियतनाम  के साथ तेल खोज के करार पर काम करना शुरू किया है | वह भी उस इलाके में जिस पर  चीन अपना दावा जताता है | तेल और प्राक्रतिक गेस का  यह  भण्डार दरअसल वियतनाम का इलाका है | तेल के पीछे चीन हर हाल में इस पर अपना कब्जा ज़माना चाहता है |
 दरअसल पिछले कुछ समय से  चीन ने भारत की घेरा बंदी शुरू की है , कूटनैतिक और सामरिक रण निति के तहत उसने  पहले पाकिस्तान को बल प्रदान किया ,  परमाणु  बम्ब बनाने में उसकी मदद की , यहाँ तक की उसका परमाणु परीक्षण भी अपने यहाँ करवाया | इसके पाक अधिकृत काश्मीर जो भारत का अभिन्न अंग है में सड़क ,रेल मार्ग और बाँध का निर्माण शुरू किया | जब की यह इलाका पाक गैर कानूनी तरीके से कब्जाए है | और एसे इलाके में किसी तीसरे देस जेसे चीन द्वारा कुछ भी करना अंतरास्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है | पाक के बाद चीन ने भारत के सबसे करीबी नेपाल में घुश पैठ की , वहाँ  आज के हालात में चीन का सबसे ज्यादा दखल माना जाता है | इसके बाद चीन ने श्री लंका को भी अपने  कुटनेतिक जाल लपेटा | दूसरी तरफ वह भारत की भूमि गाहे बगाहे अपना दावा ठोकता रहता है , कभी सिक्किम ,अरुणाचल प्रदेश ,तो कभी लेह लद्दाख तो कभी काश्मीर पर |  यहाँ के लोगों को  वह नत्थी बीजा देकर भारत को हमेशा से चिडाता आ रहा है | भारत की सीमा घुस कर उसके सैनिक अपनी नापाक हरकतें करने से भी बाज नहीं आते | हद तो तब हो गई थी जब उसने सिक्किम में देश के प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह के जाने पर ही आपत्ति की थी | 
भारत की तेल कम्पनी ओ.एन.जी.सी. ने  वियतनाम की  पेट्रो वियतनाम के साथ एक करार किया था | इस अनुबंध के अनुसार वियतनाम के समुद्र तट पर पेट्रोल और गैस  निकालने की योजना है | इस योजना पर दोनों देशों ने बड़ा निवेश किया है । चीन  इसे दक्षिण चीन सागर का हिसा बताते हुए  इस पर अपना हक़ जताता है | उसने इस पर आपत्ति भी जताई थी |  भारत ने उसके इस विरोध को दरकिनार करते हुए साफ़ तौर पर कह दिया की वह पी.ओ.के. से दूर रहे |
दक्ष्णि  चीन सागर तेल और गैस का प्रमुख्य गढ़ माना जाता है |इस इलाके को लेकर चीन और वियतनाम के मध्य विवाद काफी समय से चला आ रहा है |१९८२ के संयुक्त राष्ट्र समझौते के तहत इस इलाके के दो तेल क्षेत्रों पर  वियतनाम का अधिकार माना गया है | भारत इन्ही क्षेत्रों में तेल खोज अभियान में वियतनाम के साथ जुटा है | जब की चीन को तो इस इलाके से जहाज़ों की आवाजाही पर भी आपत्ति है | पिछले महीने चीनी नौसेना ने भारतीय जहाज को रोकने का दुसाहस भी किया था |चीन के इस दादागिरी पूर्ण रुख को लेकर आशियान देश भी काफी नाराज हें | 
हालांकि चीन के अलावा इस इलाके पर मलेसिया , ताइवान ,फिलिपिन्स और वियतनाम भी अपना दावा करते हें |
 विश्व का हर सम्रध देश हर हाल में घटते तेल भंडारों को लेकर अपनी रण निति के तहत चल रहा है | हर देश चाहता है की उसका ऊर्जा के सबसे बडे स्रोत पर कब्जा हो | विश्व में अब तक अधिकाँश युद्ध सिर्फ तेल के लिए ही हुए हें |  आने वाले दिनों में जैसी की चीन की मीडिया ने चेतावनी दी है की इसको लेकर युद्ध भी हो सकता है | इस चेतावनी को हल्के में नहीं लेना चाहिए  क्योंकि चीन हर कीमत पर यहाँ से भारत को दूर भगाना चाहेगा  जिसके परिणाम खतारनाक होंगे , क्योंकि कोई भी लोकतांत्रिक सरकार अपनी जनता की अजर में दब्बू का तमगा नहीं लेना चाहती | और यदि इसको लेकर युद्ध होता है तो यह युद्ध सिर्फ चीन भारत तक सिमित नहीं रहेगा बल्की इसमें दुनिया के कई देश शामिल हो जायेंगे ,|
चीन की हरकतों को और अमेरिका की रिपोर्ट को यदि देखा जाये तो कई तथ्य उजागर होते हें | पेंटागन की रिपोर्ट में काफी पहले इस बात का खुलासा किया था की चीन भारत की सीमा पर आधुनिक मिसाइलें तैनात कर रहा है | इसके अलावा चीन बड़ी तादाद में पाक को हथियार भी दे रहा है | मतलब साफ़ है की भारत की बढती शक्ति को वह कुचलने पर आमादा है | भारत पर दबाव बनाने के लिए वह हिंद माहा सागर में भी अपनी गतिविधियाँ बड़ा सकता है | 
इन हालातों में भारत को अपना कूटनैतिक अभियान जारी रखना जरुरी माना जा रहा है , हालांकि यह मुददा २४ से २६ सितम्बर की भारत चीन वार्ता में छाया रहेगा , जब मोंटेक सिंह चीन जायेंगे |

18 सितंबर, 2011

SUn Tempal of Bundelkhand_बुंदेलखंड के सूर्य मंदिर

बुंदेलखंड के सूर्य मंदिर
रवीन्द्र व्यास 
बुंदेलखंड इलाके में सृष्टी के देवता सूर्य के पूजन के अनेकों दुर्लभ प्रमाण मिलते हें | जो यह बताते हें की यहाँ के लोग अनादि काल  से सूर्य की पूजा करते आ रहे हें | और यही वह इलाका है जहाँ ज्योतिषाचार्य  वराहमिहिर ने  विश्व प्रसिद्द सूर्य सिद्धांत की रचना की थी  | भविष्य पुराण की माने तो कालपी के निकट यमुना के तट भगवान् श्री कृष्ण के पुत्र साम्ब ने सूर्य उपासना करके कुष्ट रोग से मुक्ति पाई थी |
 वैदिक काल से ही भारत में सूर्योपासना का प्रचलन रहा है.पहले यह सूर्योपासना मंत्रों से होती थी.बाद में मूर्ति पूजा का प्रचलन हुआ तो सूर्य मन्दिरों का निर्माण हुआ..अनेक पुराणों में यह लेख भी मिलता है,कि ऋषि दुर्वासा के शाप से कुष्ठ रोग ग्रस्त श्री कृष्ण पुत्र साम्ब ने सूर्य की आराधना कर इस भयंकर रोग से मुक्ति पायी थी.प्राचीन काल में भगवान सूर्य के अनेक मन्दिर भारत में बने हुए थे.उनमे आज तो कुछ विश्व प्रसिद्ध हैं देश में बने लगभग १४० सूर्य मंदिरों में यदि किसी इलाके में ये सवाधिक हें तो वह है बुंदेलखंड |.वैदिक साहित्य में ही नही आयुर्वेद,ज्योतिष,हस्तरेखा शास्त्रों में सूर्य का महत्व प्रतिपादित किया गया है
देश में सूर्य  मंदिरों का निर्माण अल्प संख्या में हुआ है | १९८४ इ.तक देश में मात्र १४० सूर्य मंदिर के प्रमाण मिलते हें |  पर बुंदेलखंड में सूर्य मंदिर की संख्या सर्वाधिक है | 
इस हिसाब से देखा जाय तो बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जिले में ९ ,छतरपुर जिले में पाँच, दतिया जिले में ३, सागर ,भिंड ,झाँसी और हमीरपुर  में२- २,पन्ना  नरसिंह पुर,दमोह,गुना, मुरेना ,बांदा,और जिला जालोन में एक -एक सूर्य मंदिर और विग्रह है  | शिवपुरी में ४,और ललितपुर में ७ मंदिरों और विग्रहों  का उल्लेख मिलता है |  इनमे टीकमगढ़ के मड्खेरा के और खजुराहो के  सूर्य मंदिर   को पुरातात्विक द्रष्टि से सर्वोत्तम माना जाता है | वहीँ दतिया के  बाला जी सूर्य मंदिर का धार्मिक द्रष्टि से महत्त्व है |
पहुज नदी के तट उन्नाव कस्बा में सूर्य देव का बाला जी मंदिर है | कहते हें की एक टीले की खुदाई करने पर ब्राह्मण बालक को ६ इंच व्यास का सूर्य यंत्र मिला था , इस चक्र के चारों ओर २१ त्रिभुज हें जो सूर्य के २१ मुखों के प्रतिक हें |जिसे एक छोटा चबूतरा पर स्थापित किया गया था | उस समय झांसी नरेश नारू शंकर कुष्ट रोग से पीड़ित थे , उन्होने यहाँ आकर प्रार्थना की , सूर्य देव की कृपा से वे निरोगी हो गए | उन्होने ही यहाँ मंदिर निर्माण शुरू कराया , तब दतिया के राजा ने  उनसे कार्य बंद कराने का निवेदन किया और स्वयं मंदिर का निर्माण कराया | यहाँ हर रवि वार को मेला सा लगता है | लोक मान्यता है की यहाँ से कोई खाली हाथ नहीं जाता है | उसकी मनोती पूर्ण अवश्य होती है | 
छतरपुर जिले के मऊ सहानिया  सूर्य भगवान् का छोटा सा मंदिर है , कहते हें की यहाँ शादी के बाद यहाँ के लोग आशीर्वाद लेने आते हें | 
कालपी (उ.प्र.)  यमुना नदी के तट पर  काल्प्रियानाथ मंदिर है | भविष्य पुराण के अनुसार भगवान् कृष्ण के पुत्र  साम्ब ने यही सूर्य उपासना की थी , ज्योतिषाचार्य  वराहमिहिर ने यहीं विश्व प्रसिद्द सूर्य सिद्धांत का प्रति पादन किया था |

सूर्य ,चन्द्र ,भूमि ,जल,वायु ,अग्नि  आदि ये पांच तत्व  सृष्टी के मूल कारक माने जाते हें | सिन्धु घाटी की सभ्यता की खुदाई में भी सूर्य पूजा के प्रमाण मिले हें | 
.वैदिक काल में आर्य सूर्य को ही सारे जगत का कर्ता धर्ता मानते थे.|.ऋग्वेद में  देवताओं कें सूर्य का महत्वपूर्ण स्थान है.\सूर्योपनिषद की श्रुति के अनुसार संपूर्ण जगत की सृष्टि तथा उसका पालन सूर्य ही करते है.सूर्य ही संपूर्ण जगत की अंतरात्मा हैं|

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

  बुंदेलखंड की डायरी  विकास की उमंग और चुनौतियों के  संघर्ष का  बुंदेलखंड  रवीन्द्र व्यास  दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए    2025  में कई...