29 नवंबर, 2009

बुंदेलखंड में राहुल की राजनीती

रवीन्द्र व्यास
"ना जीते आशा ना मरे निराशा "


बुंदेलखंड के लोगो की दशा इसी कहावत से मिलती जुलती है |इस दर्द को आजादी दशक बीत जाने के बाद के बाद किसी ने समझा है ,वे है राहुल गाँधी |उनकी रणनीति एक सोची समझी राजनीती के तहत चल रही है |वे इस इलाके के गाव में रात बिताते है ,लोगो के दर्द को करीब से समझने का प्रयास करते है |और उसका समाधान तलाशते है ,ये अलग बात है की वे इस मामले पर उठते विरोधियो के बयानों पर ना कोई ध्यान देते ,ना कोई प्रतिक्रिया करते है |उन्होंने ने इस कार्य के लिए एक अलग टीम तेनात कर रखी है |उनकी यह टीम इस इलाके का दोरा करती है ,यहाँ की ग्रास रूट स्तर की समस्याओ को समझने का प्रयाश करती है | उनके इस दल के लोग गाव के लोगो के सामने अपनी पहचान पत्रकार,स्वयम सेवी कार्यकर्ता अथवा छात्र (रिसर्च स्कोलर ) के रूप में बताते है | ये सारे लोग एकत्र किए गए आकडो को राहुल गाँधी के सामने पेस करते है |ये आधुनिक राजनीत का वो कारपोरेट चेहरा है जो अपने विरोधियो को राजनीत की नई बिशात पर उन्ही के मोहरों से मात देने की तेयारी कर रहा है |
ये राहुल गाँधी की ही राजनीत है  जिसने बुंदेलखंड से कांग्रेस के सफाए के बाद भी ७२६६ करोड़ का पैकेज बुंदेलखंड को दिलाया |  उनके इस प्रयाश का शुरुआत में बीजेपी और बीएसपी ने जम कर विरोध किया था /यहाँ तक शिव राज  और मायावती ने एक सुर में राग अलापा था | पर राहुल राजनीती की इस राग जुगल बंदी से दूर ही रहे ,और अपने काम में व्यस्त रहे ,उन्होंने  एसे नेता की छवि भी बना ली जो वादा करके उस पर अटल रहता है |राहुल की यह राजनीती अगले चुनाव में कांग्रेस के लिए कितनी लाभदायक होगी यह वक्त ही बताएगा |

15 नवंबर, 2009

सेवा का दर्द

लखन तिवारी ये नाम है उस व्यक्ति का जो अस्पताल आने वाले गरीब बेसहारा लोगो की मदद करता था ,जिस मरीज का कोई नही होता उसका साथी बन जाता ,गर्मियों में मटके रख कर मुफ्त में लोगो को ठंडा पानी पिलाता \अपनी रोटी की जुगाड़ भी वह लोगो की सेवा कर किया करता था १५ साल पहले वह नोगाव में कंहा से आया कोई नही जनता ,हर कोई सिर्फ़ इतना जनता है की वो बेसहारों का सहारा है आज वो पेरो से लाचार है चल नही पता ,पिछले दो माह से बुडापे की बीमारियों से ग्रस्त है उसे पेट की आग बुझाने के लिए दो वक्त की रोटी भी अब नसीब नही होती आज उसकी आँखों में अपनी ही दशा के प्रति बेबसी नजर आती है ,पर ना उसे समाज शिकायत है ,ना ही अपने से उसकी इस दशा का पता चलने पर यहाँ के कुछ नोजवानो ने उसे अस्पताल में भरती कराया ,उसके भोजन पानी की व्यवस्था कराइ पर अस्पताल के वे डाक्टर और नर्स उसे भूल गए जिनकी सेवा में वो सदेव तत्पर रहता था वे लोग भी उसे भोल गए जिनकी सेवा में वो जीजान से लगा रहा उसके सेवा कार्य को सम्मान दिया तो सिर्फ़ नोजवानो ने नोजवानो का कार्य निश्चित तो़र पर सराहनीय कहा जा सकता है ,साथ ही उन लोगो पर तमाचा भी जिन्ह्ये आज के नोजवानो से कोई आस नजर नही आती अब अस्पताल में पड़े लखन तिवारी की आँखे मानो एक नही कई सवाल कर रही है ,समाज के उन् ठेकेदारों से जो बिरादरी ,जाति,धर्म और समाज सेवा के नाम पर अपना कारोबार चलाते है ###############

बुन्देलखण्ड मीडिया रिसोर्स नेटवर्क

01 नवंबर, 2009

बदहाल बुंदेलखंड

मध्य प्रदेश और उतर प्रदेश में विभक्त देश का एक एसा इलाका है जंहा की धरा हीरा उगलती है ,कीमती खनिज संपदा से भर पूर इस इलाके की बदनसीबी यह देखिये की यहाँ के लोग अभावो और बदनसीबी में जीने को मजबूर है इस ब्लॉग को बनाने के पीछे भी मकशद यही है की यहाँ की वास्तविकता के बारे में कुछ लिख सकू

"कोंडी नही पास ,मेला लगे उदास " : दुनिया में तरक्की की नई कहानिया लिखी जा रही है ,देश की विकास दर बढ रही है ,कम्पनिया हीरा खोद कर यहाँ से ले जा रही है ,कम्पनिया हीरे से चमक रही है पर ,यहाँ के लोगो की दशा कोडी नही पास मेला लगे उदास जैसी ही है यहाँ किसान कर्ज के बोझ तले आत्म हत्या करने को मजबूर है , पेट की आग की खातिर वो देश ही नही विदेशो में भी जाकर मजदूरी करने को लाचार है

"गरीबी झगडे की जड़ " की ये कहावत इस इलाके में सटीक बैठती है आख़िर बेठे भी क्यो नही ,कहते है ना खाली दिमाग शेतान का ,जब खेत सूखे होंगे ,पेट भूखे होंगे तो ,शेतान तो हावी होगा ना ,यही शेतान झगडा फसाद कराता है ,बेबस लोग या तो मो़त को गले लगा लेते है या जंगल की राह पकड़ लेते है हाल के डकेतों की यही कहानी सामने आई है ,जिसमे जुल्म के कारण वे डकेत बन रवीन्द्र रवीन्द्र , बातें बहुत सी है ,फिर कभी उनपर चर्चा होगी पर में आपको बुंदेलखंड की खट्टी -मीठी बातो से अवगत कराता रहूँगा , समाचार के रूप में या व्यंग के रूप में अथवा कहानी के रूप में ,आप से जुड़ने का प्रयाश होगा

###बुंदेलखंड मीडिया रिसोर्स नेटवर्क ###0

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

  बुंदेलखंड की डायरी  विकास की उमंग और चुनौतियों के  संघर्ष का  बुंदेलखंड  रवीन्द्र व्यास  दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए    2025  में कई...