12 फ़रवरी, 2023

Uma Bharti/Sharab_दारु पर दंगल

बुंदेलखंड की डायरी 









रवींद्र व्यास 


 मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों  दारु को लेकर दंगल मचा है दारु को लेकर देश प्रदेश के सियासतदान एक दूसरे के खिलाफ मैदान में नजर आ रहे हैं इस मामले को लेकर दिल्ली और बिहार में अलग तरह के सियासी संघर्ष देखने को मिल रहे हैं तो मध्य प्रदेश में एक अलग राजनैतिक नौटंकी देखने को मिल रही है इन सबके बीच अगर शराब को लेकर  जमीनी हकीकत देखी जाए तो  मामले दिल दहलाने वाले सामने आते हैं मामले चाहे  जहरीली शराब से मौत के  हो अथवा शराब के जहर से विकृत होते मानव मन में पनपते पशु के मामले हो दोनों ही दशाओं में मानवता की ही मौत होती है 

   

 हाल ही में बुंदेलखंड के छतरपुर जिले के गुलगंज थाना क्षेत्र  में एक ऐसा ही नजारा देखने को मिला   रजपुरा गाँव में  ६ फरवरी की रात एक 24 वर्षीय दो बच्चों की माँ की गला दबाकर  हत्या  कर दी गई थी | उसके ४ वर्ष के पुत्र और ८ माह की बच्ची को धारदार हथियार से घायल कर दिया गया था | पुलिस ने ह्त्या के आरोप में  गौरीशंकर राजपूत( 30 )को हिरासत में लिया  । आरोपी ने पूछताछ जो बताया वह मानवता को शर्मशार करने वाला था | उसने बताया कि  उसने महिला  के पति व ससुर को  नया ट्रैक्टर खरीदने पर अपने घर पर शराब एवं मुर्गा पार्टी का बहाना बनाकर बुलाया था रात्रि में जब दोनों  नशे में बेसुध हो गए  तो  वह उनके  घर में घुसकर उसके पत्नी के साथ  बलात्कार का प्रयास करने लगा ,|  महिला  ने  आरोपी गौरीशंकर के चेहरे , मुंह , नाक , गर्दन पर नोंचा तो आरोपी ने महिला  का गला दबाकर हत्या कर दी | मौके पर दोनों बच्चे  रोने लगे ,यह देख उसने  उनके ऊपर लोहे के हंसिये से गले पर बार किया , जिससे दोनों लहूलुहान हो गये और आरोपी हंसिये को वहीं फेंक कर मौके से भागकर वापस  घर पर चल रही पार्टी में शामिल हो गया । 

                                                  बुंदेलखंड अथवा देश प्रदेश में शराब के कारण हुई वारदात की  यह कोई पहली घटना नहीं है | इस तरह की वारदात आये दिन कहीं ना कहीं से देखने सुनने को मिल जाती हैं | कहीं शराब के लिए पुत्र पिता अथवा माता की हत्या करता है तो कहीं मित्र मित्र की हत्या कर देता है | शराब के नशे में दुष्कर्म के भी मामले सामने आते हैं ,तो शराब  के नशे के लिए लोग अन्य आपराधिक वारदातों को अंजाम देने लगते हैं |

बुंदेलखंड में इस नशा ने तो ऐसा तांडव मचाया है कि हजारों परिवार सिर्फ जुआ और शराब में बर्बाद हो गए


 

                                 प्रदेश में शराबबंदी  को लेकर पूर्व मुख्य मंत्री  उमा भारती  अभियान चलाए हुए हैं  | उनका यह अभियान भले ही राजनैतिक हो और पार्टी और सरकार पर दबाव बनाने वाला माना जा रहा हो पर उनके इस अभियान को महिलाओं का बड़ा समर्थन मिल रहा है इसी माह की शुरुआत में  उमा भारती ने  ओरछा में शराब दुकान के सामने गाय बांध कर  गायों को केले और चारा  खिलाया। उन्होंने कहा कि लोग   शराब नहीं, दूध पियें । उन्होंने लोगों से ये भी कहा कि मुझे फांसी पर लटका दो , क्योंकि इसके लिए में सबसे बड़ी दोषी हूँ ,क्योंकि मेने ही सरकार के लिए वोट मांगे | ये किसी भी सरकार का धर्म नहीं है कि वह लोगों की लत का उपयोग पैसे बनाने में करे | सरकार ने ज्यादा राजस्व वसूली के लिए रामराजा सरकार  मंदिर के पास दुकान आवंटित कर दी इसका यहां के सभी लोगों ने  विरोध किया था पर कोई सुनवाई नहीं हुई



                                              उमा  भारती चाहती तो पूर्ण शराब बंदी हैं पर अगर सरकार उनकी  पूर्ण शराबबंदी की मांग  नहीं मान सकती तो इस पर नियंत्रण तो कर सकती है | यह बात स्वयं उमा जी ने सरकार को बता दी है | शराब बंदी को लेकर उमा भारती इतनी उग्र हैं कि वे बीजेपी की सुचिता पर ही सवाल खड़े करने लगी हैं | उन्होंने कहा है  कि    हम भाजपा के लोग राम का नाम लेते हैं राष्ट्र की बात , सनातन की बात और  वैदिक काल की बात करते हैं पर ----- ऐसे समय में मधुशाला की जगह गौशाला होनी चाहिए | अगर ऐसा होता है तो कई मधुशाला अपने आप बंद हो जायेगी अगर नहीं होगी तो हम बंद कर देंगे । उन्होंने  सरकार को चेतावनी दी है कि अगर  शराब नीति हमारे अनुरूप नहीं आई तो शराब दुकानों पर जो होगा  वो नजीर बनेगा।

हाल ही में उमा भारती ने रामराजा की नगरी ओरछा में शराब दुकान को लेकर  ट्वीट कर   कहा कि ओरछा के रामराजा सरकार के मंदिर के पास ही यह दुकान है। हमारे मुख्यमंत्री को स्थानीय सांसद  और विधायक घेरे रहते हैं, लेकिन यदि शिवराज जी को इस शराब दुकान का पता होता तो वे तत्काल कार्रवाई करते। 

दरअसल क्षेत्रीय सांसद डॉ वीरेंद्र खटीक केंद्र में मंत्री भी हैं और विधायक अनिल जैन हैं | सियासी सूत्रों की माने तो इस अभियान को अब कांग्रेस के लोग लपकने की तैयारी में जुट गए हैं

उमा के तेवर से सकते में  सरकार     

  मध्य प्रदेश में 3605  शराब के ठेके और 2611 अहाते हैं | प्रदेश में शराब के कारोबार को बढ़ाने का लिए बीते कुछ वर्षों में बडा काम सरकार ने किया है | शराब पर कोई वेट नहीं बढ़ाया गया | लोगों को सस्ते में शराब मिल सके इसके लिए  दाम नहीं बढ़ाये देशी ठेकों पर अंग्रेजी शराब की भी सुविधा उपलबद्ध कराई गई | नतीज़तन प्रदेश में शराब की खपत बड़ी और सरकार  के खजाने में लगभग 13 सौ करोड़ रु की वृद्धि हुई

साध्वी उमा भारती  के तीखे तेवरों को देखते हुए सरकार अब तक नई शराब नीति नहीं ला पाई है | 1 अप्रेल से नई शराब नीति लागू होगी | हालांकि आबकारी विभाग के आला अधिकारियों ने नई शराब नीति को लेकर प्रारूप तैयार कर लिया है , किन्तु इस पर अंतिम स्वीकृति मुख्यमंत्री  के परामर्श के बाद ही मिलेगी

                              दारू पर मचा यह घमासान  प्रदेश और बुंदेलखंड की सियासत में क्या राजनैतिक   गुल खिलाता है?  यह आने वाले समय में स्पष्ट हो जाएगा।

05 फ़रवरी, 2023

Dharm_ मीडिया में सुर्खियां बना बुंदेलखंड का बागेश्वर धाम

 मीडिया में सुर्खियां बना बुंदेलखंड का बागेश्वर धाम 

बुंदेलखंड की डायरी

 

रवीन्द्र व्यास 

 

 बीते कई  दिनों से  बुंदेलखंड राष्ट्रीय मीडिया में छाया हुआ है | यहां के बागेश्वर धाम के दिव्य दरबार को लेकर बुंदेलखंड सुर्ख़ियों में बना हुआ है इलक्ट्रोनिक और डिज़िटल   मीडिया  के लिए  दिव्य दरबार के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री  एक बड़ी टीआरपी के श्रोत बन गए हैं | धीरेन्द्र महराज को लेकर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के समाचार सुर्खियां बटोर रहे हैं || ये अलग बात है कि देश के मीडिया संस्थान जिस शिद्दत से बुंदेलखंड के बाबा जी पर मेहरबान हैं अगर उसी शिद्दत से वे बुंदेलखंड की  समस्याओं को मीडिया में स्थान देते तो शायद बुंदेलखंड का भी भला होता ,और देश प्रगति के मार्ग में अग्रसर होता | पर यहाँ तो सवाल मीडिया के पापी पेट का है  जो इस तरह की ख़बरों में देश दुनिया में टीआरपी ना दिला पाता  

 


बागेश्वर धाम के  पीठाधीश्वर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री अपनी कथित चमत्कारी शक्तियों के कारण देश भर में चर्चित हो गए हैं  उनकी चमत्कारी शक्तियों के प्रचार प्रसार और उनकी भागवत कथाओं के प्रचार प्रसार में  उनका सोशल मीडिया नेटवर्क भी  अपनी पूर्ण तन्मयता से जुटा है इसी दौरान जब वे जनवरी की पांच तारीख को नागपुर पहुंचे तो उनके विरुद्ध महराष्ट्र की जादू टोना विरोधी जनजागृति प्रचार समिति के अध्यक्ष श्याम मानव ने लिखित शिकायत देकर पुलिस से मामला दर्ज करने को कहा था बाद में पुलिस ने शयाम मानव के सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए मामला दर्ज करने से इंकार कर दिया इसके बाद से तो मीडिया को बैठे बैठाये मसाला मिल गया |  अब दौर शुरू हुआ धीरेन्द्र कृष्ण  आगे आगे और मीडिया पीछे पीछे उनके रायपुर दरबार में उन्होंने मीडिया को कई चमत्कार दिखाए  जिसका मीडिया मौके पर कोई तोड़ नहीं बता पाई इसके बाद जब वे वापस बागेश्वर धाम आये तो यहाँ भी मीडिया के कैमरे और मोबाइल उनका पीछा करते रहे 

                                                 



                                              धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की पूर्ण जन्म कुंडली  लोगों को बताई गई उनके समान्तर आम लोगों की चमत्कारी शक्तियों से लोगों को अवगत कराया गया ,| नौजवान संत के अंतरंग पलों को भी खंगालने के प्रयास  मीडिया ने किये उनकी शादी कब होगी जैसी बातों को सनसनी के तौर पर पेश किया गया जबकि वे स्वयं कह चुके हैं कि हम विवाह करेंगे कब करेंगे किससे करेंगे यह नहीं बताया |  उनके विवाद को लेकर भी खबरों का दौर चला 



दरअसल बुंदेलखंड में अतीत का बताने वाले बहुत सारे लोग हैं जो तांत्रिक क्रियाओं के नाम से जाने जाते हैं | पर उनके पास धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जैसी वाणी का ओज नहीं है ,और ना ही उनमे  राम और भागवत कथा  कहने का सामर्थ्य है इसी कथा प्रसंग में वे सत्य सनातन की बात कहते हैं और  देश के सनातन विरोधियों को ललकारते हैं , उनके यही तेवर सनातनियों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं जबकि विरोधियों  को  रास नहीं आते हैं


केन - बेतवा लिंक परियोजना :

 

 बीते दिनों  नदी जोड़ो परियोजना  के तहत   केन -बेतवा लिंक परियोजना के लिए आम बजट  23 -24  के लिए 3500 करोड़ रु स्वीकृत किये गए |  2022 _23 के आम बजट में केन बेतवा लिंक परियोजना के लिए 1400 करोड़ का बजट आवंटन हुआ था इस परियोजना से एम् पी और यूपी के 14 जिलों  की सिचाई और पेयजल की समस्या का समाधान होगा | असल में यह वह परियोजना है जिसे अटल बिहारी वाजपेई जी के प्रधानमंत्रित्व काल में सबसे पहली स्वीकृति मिली थी | और जब अटल जी खजुराहो में ललितपुर सिंगरोली रेल लाइन का शिलान्यास करने आये थे उस समय भी उन्होंने इस परियोजना की चर्चा मंच से की थी |  २०२३ में देश के 9 राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं | इन चुनावों को संसदीय चुनावों का सेमीफाइनल माना जाता है | इन हालातों में इससे लाभान्वित होने वाले १४ जिलों के 54 विधान सभा क्षेत्र और 10 संसदीय क्षेत्र प्रभावित होंगे | जिसका सीधा लाभ बीजेपी को मिलेगा |  

मध्य प्रदेश के पन्नाटीकमगढ़, छतरपुर,  सागरदमोहदतियाविदिशाशिवपुरी और  उत्तर प्रदेश के बांदामहोबाझांसी  ललितपुर जिलों को लाभ मिलेगा | इन 12 जिलों की 10 लाख 62 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी ,करीब 62 लाख लोगों को पीने का पानी मि सकेगा | योजना पर 90 फीसदी व्यय केंद्र 

सरकार करेगी जबकि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकार 5- 5  फीसदी व्यय करेंगी  \

केन बेतवा  परियोजना से रवि सलों  लिए (  नवंबर से अप्रैल ) एमपी को 1834 एमसीएम  और यूपी  को 750 मिलियन क्यूबिक मीटर  पानी मिलेगा। -

221  किमी लम्बी लिंक केनाल के माध्यम से  बेतवा नदी को बरुआसागर में  जोड़ा जाएगा |  योजना से 103 मेगावाट हाइड्रो पावर और 27 मेगावाट सोलर पावर का उत्पादन होगा

पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बनने वाला  ढ़ोड़न बाँध | केन नदी पर 19633  वर्ग कि.मीजलग्रहण छमता वाले इस मुख्य बांधमें 2853  एम.सी.एम.पानी भंडारण कि छमता होगीइस बाँध के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व  कि 5258  हेक्टेयर_जमीन  सहित कुल 9  हजार हेक्टेयर जमीन डूब जाएगी | इस जमी पर बसे डोंडन , सुकवाहा ,भावरखुवा ,घुघारी ,वसोदा ,कुपी,शाहपुरा  ,पल्कोहा ,खरयानी,और मेनारी गाँ का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा | बाँध से 221  कि.मी.लम्बी मुख्य  नहर उत्तर प्रदेश के बरुआ सागर में जाकर मिलेगा | इस नहर से 1074  एम.सी.एमपानी प्रति वर्ष भेजा जाएगा ,जिसमें_से 659  एम.सी.एमपानी

 बेतवा नदी में पहुंचेगा |\

ढोंडन  बांध के अलावा तीन और बां भी मध्य प्रदेश कि जमीन पर बेतवा नदी पर  बनेंगे |रायसेन  विदिशा जिले में बनने वाले मकोडिया बांध से 5685 हेक्टेयर क्षेत्र  में,बरारी बेराज_से 2500  हे.वा केसरी बेराज से 2880  हे. क्षेत्र  में  सिचाई  होगी | लिं नहर से मार्गोंमें 60294  हे. क्षेत्र  सिंचित होगा ,इसमें ध्यप्रदेश के 46599  हेवा उत्तर प्रदेश_के 13695  हे.क्षेत्र  में सिंचाई होगी | ढोंडन बांध से छतरपुर और पन्ना जिले की 3.23  लाख है.जमीन सिंचित होगी होने का दावा किया जा रहा है 

 


                                         केन बेतवा लिंक परियोजना को लेकर बीजेपी  एक बड़ी उपलब्धि बता रही है वहीँ इस परियोजना से विस्थापित होने वाले लोगों का दर्द साझा कर रहे हैं आप नेता अमित भटनागर | वे कहते हैं कि 

प्रशासन मनमानी पर उतारू है, हमे केन बेतवा संबंधी किसी भी धारा या कार्यवाही की कोई जानकारी नहीं दी गई।  केन बेतवा लिंक परियोजना में  गांव विस्थापित होना है लेकिन  प्रशासन द्वारा कोई भी विधिवत जानकारी नहीं दी जाती है। गांव में इस आशय से सम्बंधित कोई भी ग्रामसभा, आमसभा या जन सुनवाई नहीं की गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि कब धारा 11 लगी अभी कौन सी धारा लगी उनको कुछ नहीं पता।  प्रशासन अभी भी अपनी मनमानी से बाज नहीं आया तो जोरदार आंदोलन किया जाएगा।

 प्रसाशन की प्रताड़ना के खिलाफ 26 जनवरी से 31 जनवरी तक  प्रभावितों की पद यात्रा निकाली गई और सांकेतिक जल सत्याग्रह भी किया गया |  

 

Dharm_ बुंदेलखंड की बुड़की बनाम मकर संक्राति

 

 बुंदेलखंड की बुड़की बनाम मकर संक्राति 

रवीन्द्र व्यास 

मकर संक्रांति का पर्व अलग अलग राज्यों और देश में अलग अलग नाम से मनाया जाता है जीवन में ऊर्जा और उत्साह का संचार करने वाला यह पर्व बुंदेलखंड में बुड़की के नाम से भी जाना  जाता है जहां इस पर्व को लेकर धार्मिक,प्राकृतिक  और वैज्ञानिक कारण हैं वहीँ बुंदेलखंड में इससे जुड़े कुछ यादगार तथ्य भी हैं जिनमे रहस्य है रोमांस है और देश पर बलिदान  देने वालों की याद में मेला लगाने की  परम्परा भी है |  वैसे भी सनातन धर्म से जुड़े व्रत और त्यौहार का सिर्फ धार्मिक महत्व भर नहीं है इनका विज्ञान से भी गहरा नाता जुड़ा है बात सिर्फ समझने की है 

मकर संक्रान्ति 

 मकर संक्रांति  दुनिया की एक बेमिशाल खगोलीय घटना क्रम का पर्व है इसी दिन सूर्य देव राशि परिवर्तन कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं  खगोल शास्त्र के अनुसार जब भी कोई गृह किसी राशि अथवा नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो इसे संक्रांति कहते हैं पृथ्वी की गति के कारण इस दिन सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाते हैं सूर्य देव  उदित तो पूर्व दिशा से ही होते हैं किंतु  6 माह वे दक्षिण भाग से और 6 माह उत्तर भाग से उदित होते हैं | ,  इस महत्वपूर्ण खगोलीय घटना सौर्य मंडल और अंतरिक्ष के इन गूढ़  रहस्यों को सदियों पहले सनातन धर्म के ऋषि मुनियों ने जान और समझ लिया था  यही कारण है कि  पंचांग और वैदिक कैलेंडर को  आज भी दुनिया का सबसे सटीक कैलेंडर माना  जाता है 

 धार्मिक महत्त्व 

सूर्य देव के दक्षिणायन को देवताओं की रात ,और  उत्तरायण  को देवताओ का दिन भी कहा जाता हैं। वैदिक काल से ही  उत्तरायण को देवयान कहा गया हैं। यही कारण है कि हिन्दू धर्म में अधिकाँश शुभ कार्य  मकर संक्रांति के बाद  किये जाते हैं।  

 भगवान् श्री कृष्ण ने गीता ज्ञान में अर्जुन से कहा था कि  जब सूर्यदेव उत्तरायण होते हैं और पृथ्वी प्रकाशमय रहती हैं ऐसे शुभ काल में  यदि कोई शरीर का त्याग करता है तो उसे  जन्म-मरण से मुक्ति मिलती हैं |  

लोक मान्यता है कि उत्तरायण में जिसकी मृत्यु होती हैं उसे मोक्ष  प्राप्त हो जाता  हैं। द्वापर युग में भीष्म पितामह जिन्हे इक्षा मृत्यु का वरदान अपनी ही माँ गंगा से मिला था उनकी  मृत्यु को ही ले लीजिये महाभारत युद्ध में जब वे अर्जुन के वाणो से घायल हो गए और वाणों की शैय्या पर वे लेटे  थे असहनीय पीड़ा सहते हुए भी उन्होंने अपनी मृत्यु का समय उत्तरायण को चुना था मकर संक्रांति के दिन ही उन्होंने अपनी देह का त्याग कर मोक्ष को प्राप्त किया था 

इसी शुभ काल में माँ गंगा भी इस लोक धरा पार आई थी कहा जाता है कि मकर संक्रांति के दिन  माँ गंगा ब्रह्म लोक से पृथ्वी लोक में भागीरथ महराज  के पीछे-पीछे कपिल ऋषि के आश्रम से होते हुए  सागर में जा मिली थी।भगीरथ के पूर्वज महाराज सगर के पुत्रों को मुक्ति प्रदान हुआ था. इसीलिए इस दिन बंगाल के गंगासागर में कपिल मुनि के आश्रम पर एक विशाल मेला लगता है.

 सनातन मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उनके घर जाते हैं.शनि देव मकर राशि के स्वामी हैंउनके घर में सूर्य के प्रवेश मात्र से शनि का प्रभाव क्षीण हो जाता है.माना जाता है कि  सूर्य के प्रकाश के सामने कोई नकारात्मकता  समाप्त हो जाती  है.इसी कारण  मकर संक्रांति पर सूर्य की साधना करने से  शनि  दोष भी  दूर हो जाते हैं.

बुंदेलखंड में मकर संक्रांति 

बुंदेलखंड में मकर संक्रांति का पर्व  अलग उत्साह और श्राद्ध से मनाया जाता है माघ माह की शुरुआत और सूर्य उपासना का यह पर्व मौसमी परिवर्तन के साथ सामाजिक और धार्मिक परिवर्तन का भी माना जाता है इस दिन जलाशयों पर लोग स्नान करने जाते हैं शरीर पर पीसी हुई तिल का लेप लगाकर स्नान करते हैं जलाशयों में डुबकी लगाने के कारण इसे बुड़की भी कहा जाता है स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित किया जाता है  इस दिन हर घर में खिउँकद्दी और तिल लाइ ,राजगीर के लाड्डू बनते हैं बाजार में शक्कर के घडिया घुल्ला बनते हैं वहीँ मिटटी के घोड़े बाजार में बिकने आते हैं जिन्हे लोग खरीद कर घर लाते हैं 

 बलिदान :बुंदेलखंड में मकर संक्रांति पर जगह जगह मेले लगते हैं ,| इन्ही मेलों में एक मेला छतरपुर जिले के सिंहपुर में भी लगता है 14 जनवरी 1931 को मकर संक्रांति के दिन यहाँ मेला के साथ स्वतंत्रता सेनानियों का भी जमावड़ा हुआ था अंग्रेज हुकूमत के विरुद्ध उर्मिल नदी पर स्थित चरणपादुका पर उनकी बैठक चल रही थी इसकी खबर पाकर अंग्रेजो के कर्नल फिशर ने चारों और से घेराबंदी कर  गोलियां चलवाई जिसमे यहाँ अनेकों सेनानी वीरगति को प्राप्त  हुए इसे बुंदेलखंड का जलियांवाला बाग़ काण्ड कहा जाता है 

                  रोमांस :बाँदा (उत्तर प्रदेश) जिले में केन नदी के मध्य स्थित भूरागढ़ दुर्ग में मकर संक्रांति के दिन लगता है आशिकों का मेला यहाँ के नट महाबली के मंदिर में मकर संक्रांति के दिन हजारों की संख्या में जोड़े पहुँचते हैं और पूजन करते हैं लोक मान्यता है कि यहाँ विवाहित जोड़े अच्छे जीवन की और प्रेमी प्रेमिका अपने मनपसंद जीवन साथी की  मन्नत मांगने पर मन्नत पूर्ण होती है 

स्थानीय लोगों की मान्यता है कि लगभग  6 शताब्दी यहाँ मकर संक्रांति के दिन ही प्रेमी और प्रेमिका की मौत हुई थी इसके पीछे बताया जाता है कि  भूरागढ़ दुर्ग में  नोने अर्जुन सिंह  किलेदार थे किले में ही छतरपुर जिले के सरबई का एक नट जाति का 21 वर्षीय युवक बीरन नट नौकरी करता था  किलेदार की बेटी और  बीरन नट से  प्यार हो गया किलेदार की बेटी ने  अपने  पिता से  नट से विवाह की जिद की थी   नोने अर्जुन सिंह ने बेटी के सामने शर्त रखी कि अगर बीरन बांबेश्वर पर्वत से किले तक सूत पर चढ़कर नदी पार कर ले और किले तक आ जाए तो उसकी शादी राजकुमारी से कर दी जाएगी.बीरन ने इस शर्त को मानते हुए मकर संक्रांति के दिन कच्चे धागे की रस्सी पर से नदी पार कर किले तक पहुँचने लगा अर्जुन ने जब यह देखा तो उसने दुर्ग  की दीवार पर से रस्सी काट दी बीरन की निचे चट्टान पर गिरने से मौत हो गई अर्जुन की बेटी ने जब यह देखा तो वह भी दुर्ग से उसी चट्टान पर कूद गई ,उसकी भी मौत हो गई बाद में दोनों की वहीँ समाधि बना दी गई कुछ वर्षों बाद यह ंत महाबली का मंदिर बन गया 

तंत्र मन्त्र : बुंदेलखंड के पन्ना जिले में एक ऐतिहासिक नगर है अजयगढ़ यहाँ के अजय पार की पहाड़ी पर स्थित किले पर मकर संक्रांति के दिन एक मेला लगता है यहाँ के प्रसिद्ध तांत्रिक अजयपाल  की इस दिन पूजा होती है सिर्फ मकर संक्रांति के दिन ही अजयपाल बब्बा का मंदिर खुलता है और उनकी पूजा होती है लोक मान्यता है कि इस दिन उनके दर्श से जीवन में किसी तरह की बाधा नहीं रहती |  और यहाँ के छोटे से पत्थर को ले जाकर अगर गौशाला में रख दिया जाए तो पशुओं को किसी तरह की  बीमारी  नहीं होती है 

           दरअसल तांत्रिक अजयपाल बब्बा की यह मूर्ति  लगभग 45   साल पहले चोरी हो गई थी  बाद में इसके चोरो को दिल्ली से पकड़ा गया मामला पन्ना न्यायालय पहुंचा था जहां से इसे पुरातत्व संग्राहलय रीवा के सुपुर्द किया गया था हर साल मकर संक्रांति पर मूर्ति को दो दिन के लिए अजयगढ़ लाइ  जाती है वैसे भी अजयगढ़ का यह स्थान अनेको  रहस्यों से भरा हुआ है 

अलग अलग नाम 

मकर संक्रांति का यह पर्व सिर्फ हिन्दुस्थान में ही नहीं कई अन्य देशो में भी मनाया जाता है इसके नाम भी अलग अलग हैं  दक्षिण भारत में पोंगल उत्तर भारत में लोहड़ी तो खिचड़ी या माघी  उतरायण  मध्य भारत और पश्चिम भारत में इसे संक्रांति के नाम से  तो पंजाब  के क्षेत्रो में लोहड़ी के नाम से जाना जाता हैं  बांग्लादेश में  पौष संक्रान्ति ,नेपाल में  माघे संक्रान्ति या 'माघी संक्रान्ति' ,,थाईलैण्ड   में सोंगकरन ,म्यांमार में  थिंयान,,कम्बोडिया में  मोहा संगक्रान और श्री लंका में  पोंगलउझवर तिरुनल के नाम से जाना जाता है 


05 जनवरी, 2023

Political_ बुंदेलखंड से सरकार का चुनावी अभियान

 बुंदेलखंड से सरकार का चुनावी अभियान  


रवीन्द्र व्यास 

बुंदेलखंड के टीकमगढ़ से मुख्य मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने एक तरह से २०२३ का चुनावी आगाज कर दिया | मुख्य मंत्री ने एक तीर से कई निशाने साधे ,| दरअसल मुख्य मंत्री को बुंदेलखंड इलाके से ही एक बड़ी चुनौती मिल रही है | अपने विरोधी का बगैर नाम लिए उसके राजनैतिक अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह लगाने वाले शिवराज ने टीकमगढ़ से यही शुरुआत की है | उन्होंने मुख्यमंत्री भू-आवासीय अधिकार योजना यहां से शुरू कर  एक बड़ा राजनैतिक चुनावी  सन्देश दिया है | भू -अधिकार पत्र वितरण समारोह में उन्होंने प्रदेश  वाशियों को यह भी बतला दिया कि आप लोग चिंता ना करें हम हर जगह आकर ये अधिकार पत्र देंगे |  



 टीकमगढ़ विकास खंड की ग्राम पंचायत सुंदरपुर के प्रमुख धार्मिक स्थल बगाज  माता से मुख्य मंत्री शिवराज सिंह ने प्रदेश के लिए मुख्यमंत्री भू-आवासीय अधिकार योजना की शुरुआत की | टीकमगढ़ जिले में इस योजना के तहत 10918 लोगो को भू अधिकार दिए जाने हैं | इतनी भूमि का मूल्य लगभग 130 करोड़ रुपये बताया जा रहा है | मंच के पहले और मंच पर मुख्य मंत्री अलग अंदाज में दिखे | शिवराज पूर्णतः चुनावी रंग में रंगे  नजर आये यहाँ के खुले मैदान में  जहाँ ग्रामीणों को आवासीय भूमि उपलब्ध कराई गई है वहीँ  पट्टा  दिए गए| बाद में वही खुले मैदान में उन्होंने ग्रामीणों के साथ भोजन भी किया | मंच पर पहुँचते ही  उन्होंने कहा कि गरीब ही हमारा भगवान् है | इसके बाद उन्होंने हथेरी गाँव के बुजुर्ग आदिवासी धर्मा सौर के  पैर पूजन किया ,माथे पर तिलक लगाया | कन्या पूजन हमेशा की तरह किया | बगाज  माता की जय, भारत माता की जय और टीकमगढ़ की जनता की जय के साथ उनके भाषण की शुरुआत हुई | 

                        शिवराज सिंह ने  मंच पर एक जगह खड़े होकर भाषण नहीं दिया बल्कि कार्डलेस माइक लेकर मंच पर घूम घूम कर भाषण दिया | उन्होंने लोगों से अपील की "अगर आप लोग मेरे साथ हैं " तो जोर से बोलो बजाज मईया की जय | 

क्यों शुरू की यह योजना , और टीकमगढ़ से ही योजना की शुरुआत करने वजह भी शिवराज सिंह ने बताई | उन्होंने कहा १४ सितम्बर २०२१ को में मोहनगढ़ आया था , मुझे हथेरी गाँव के लोग मिले थे | उन्होंने बताया था कि रहने की जगह नहीं है ,कोई व्यवस्था नहीं है | एक एक घर में 50 - 50 लोग रहते हैं | यह बात घर कर गई तब सोचा योजना बनाना पड़ेगी | जब भगवान् ने धरती ,पानी ,हवा ,नदियाँ ,खदान सब के लिए बनाई हैं तो हम उनके अधिकार को कैसे रोक सकते  हैं | एक तरफ गगनचुम्बी अट्टालिकाओं में रहने वाले लोग हैं दूसरी तरफ ये वे लोग जिनके पास रहने के लिए जमीं ही नहीं है | में यहां बजाज माता की धारा पर  यह संकल्प व्यक्त कर रहा हूँ की मध्यप्रदेश की धरती पर कोई भी व्यक्ति बगैर घर के नहीं रहेगा | हर परिवार पक्के घर में रहेगा | अब प्रदेश में कमाने वाला खायेगा और लूटने वाला जाएगा | 


सरकार की उपलब्धियां और कांग्रेस पर निशाना 

बीजेपी सरकार के मुखिया का भाषण हो और विपक्ष पर निशाना ना हो ,ऐसा हो नहीं सकता | शिवराज ने इस परम्परा का निर्वाह करते हुए कांग्रेस पर निशाँ साधते हुए कहा ५० वर्षो के कांग्रेस शासन काल में टीकमगढ़ में कुछ नहीं किया | दूसरी तरफ अपनी सरकार उपलब्धिया भी गिनाई | घोषणावीर मुख्यमंत्री की छवि मिटाने का भी उन्होंने प्रयास किया | टीकमगढ़ की शिवपुरी पंचायत का नाम कुण्डेश्वर धाम ,और आचर्रा  पंचायत का नाम आचार्य धाम किये जाने की घोषणा की | इसका गजट नोटिफिकेशन वे साथ लेकर आये थे | लोगों को भरोषा दिलाया की टीकमगढ़ के विकाश में कोई कमी नहीं आने देंगे | चुनावी वर्ष में उन्होंने लोगों को तीर्थ दर्शन के लिए हवाई यात्रा की सुविधा देने की बात भी कही | 

भू अधिकार योजना और राजनैतिक तीरंदाजी 

चुनावी वर्ष में भू अधिकार योजना के माध्यम से बीजेपी प्रदेश के एक बड़े मतदाता समूह को अपने पक्ष में करने की कवायद कर रही है |  इसके साथ ही शिवराज सिंह ने प्रदेश के विपक्षी दल और अपनी ही पार्टी  के उन लोगों पर निशाना साधा है जो अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करने का कोई मौका नहीं चूकते | दारु,धर्म और अपनी जाति और  विरादरी के नाम पर अपने को गरीबों का मसीहा साबित करने में जुटे लोगों के लिए यह शिवराज का करारा तमाचा माना जा रहा है | 

दरअसल पिछले कुछ समय से  प्रदेश में बीजेपी की ही नेता सुनियोजित तरीके से अगड़ा पिछड़ा के नाम पर सियासी जाल बिछा रही थी | उसकी बड़ी काट भी बीजेपी  ने बुंदेलखंड से तलाश ली | यहां के पिछड़े वर्ग से आने वाले एक सांसद जो केंद्र में मंत्री भी हैं उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी प्रदेश में सौंपी जा रही है | इसका बड़ा असर बुंदेलखंड ही नहीं प्रदेश ककी राजनीति में देखने को मिलेगा \  

            

31 दिसंबर, 2022

पं गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास_भारत की चेतना बदल रही है || कपिल तिवारी

  

सनातन संस्कृति का प्रभाव और उसकी प्रासंगिकता "

भारत की चेतना बदल रही है || कपिल तिवारी 

भारतीय संस्कृति  संस्कारों की जनंनी है || विनोद असाटी 

व्याख्यानमाला बुंदेलखंड की लोक संस्कृति एवं लोक साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में कारगर होगी| राकेश मिश्रा 

 छतरपुर//  महराजा छत्रसाल  ऑडिटोरियम में  " सनातन संस्कृति का प्रभाव और उसकी प्रासंगिकता"  विषय पर शुक्रवार को को एक व्याख्यान माला आयोजित की गई |  पंडित गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास द्वारा आयोजित इस छटवी  व्याख्यानमाला के  मुख्य अतिथि  पद्मश्री डॉ  कपिल तिवारी ने   कहा कि समाज में सनातन आदि है अनंत है और हमेशा रहेगा इसकी प्रासंगिकता पर सवाल उठाए ही नहीं जा सकते | 

जनसेवा जनसेवा और सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित प गणेश प्रसाद  मिश्र सेवा न्यास के इस गरिमा पूर्ण  कार्यक्रम के प्रारंभ में मां सरस्वती जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि और द्वीप प्रज्वलन किया गया | कार्यक्रम के मुख्य  अतिथि डॉ  कपिल तिवारी का बाबी असाटी ने और कार्यक्रम के अध्यक्ष  वीरेंद्र असाटी  का नीरज भार्गव  तथा  डॉ राकेश मिश्र का  को कविता  राज ने माल्यार्पण कर स्वागत किया |  इस मौके पर मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा  का अनावरण भी किया गया | 
                        कार्यक्रम के ंप्रारम्भ में डॉ राकेश मिश्र ने न्यास के कार्यो से लोगों को अवगत कराते हुए कहा की न्यास का ""  सनातन संस्कृति का प्रभाव और उसकी प्रासंगिकता "" का यह छटवां आयोजन है |आज की व्याख्यानमाला बुंदेलखंड की लोक संस्कृति एवं लोक साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में कारगर होगीबुंदेलखंड की संस्कृति काफी समृद्ध है, जिसे राष्ट्रीय पटल पर लाने की दिशा में यह व्याख्यानमाला उपयोगी सिद्ध होगी। 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ कपिल तिवारी ने इस  आयोजन के लिए आयोजकों को साधुवाद देते हुए कहा  आज भारत की चेतना बदल रही है | भारत में यह परिवर्तन बहुत लम्बे समय बाद देखने को मिल रहा है | भारत ने अपनी अस्मिता को ना सिर्फ पहचाना है बल्कि इसके लिए उसने दुनिया को भी अपनी एक नई पहचान बता दी है | ये भारतीय सनातन संस्कृति ही है जिसने हमें एक ऐसा ज्ञान दिया है जो सनातन है जिसका ना कोई आदि है और ना कोई अंत है | हर पल नया कर रहा है | उन्होंने सनातन परम्पराओं और संस्कृति के ज्ञान को लेकर आने को आख्यानों के माध्यम से लोगो को और लोक को समझाया भी | उन्होंने जहाँ ज्ञान परम्परा , संत ,ऋषि , की चर्चा की ,उन्होंने कहा  कि देश में सप्तमात्रिका  हम आप सब मानते हैं | सनातन संस्कृति ने ही हमें जीवन का मूल्य बोध दिया है | 
                कार्यक्रम के अध्यक्ष विनोद असाटी ने  कहा की भारतीय संस्कृति  संस्कारों की जनंनी है | सनातन संस्कृति  ही जिसने दुनिया को वसुधेव कुटुम्बकम का सन्देश दिया | सामाजिक समरसता हमारुई संस्कृति का अंग है | इसके सबसे बड़े उदाहरण देश में होने वाले तीज त्यौहार , मेले  वगैरह हैं |  
 कार्यकर्म के संचालक डॉ  विनोद रावत ने सभी  आमंत्रित अतिथियों का  आभार व्यक्त करते हुए कहा की सामजिक चेतना  जाग्रत करने के लिए इस तरह के आयोजन समाज को नै दिशा देते हैं | अंत में डॉ राकेश मिश्र ने अतिथि द्वय को स्मृति चिन्ह भेंट किये | कार्यक्रम का समापन प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी की माता जी हीरा बेन को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के बाद हुआ | 

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