03 मार्च, 2020

विकास पथ पर बुन्देलखण्ड

बुंदेलखंड की डायरी   
रवीन्द्र व्यास 
इसे बुंदेलखंड की बदनसीबी  ही कहें कि  विभाजित बुंदेलखंड में विकाश के लिए अलग अलग मापदंड अपनाये जा रहे हैं |  2020 के फरवरी माह की 29 तारीख उत्तर प्रदेश वाले बुंदेलखंड इलाके के लिए विकाश की नई सौगात लेकर आया | जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चित्रकूट में 15 हजार करोड़ की लागत वाले बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे का शिलान्यास किया | यह एक्सप्रेस वे बुंदेलखंड का वह विकाश पथ होगा जिसके  समानांतर  औधोगिक डिफेन्स कॉरिडोर का निर्माण होगा |  इस औधोगिक विकाश से प्रत्यक्ष तौर पर बुंदेलखंड के चित्रकूट ,बांदा ,महोबा,हमीरपुर ,जालौन और इटावा जिले लाभान्वित होंगे | दूसरी ओर  मध्य प्रदेश वाला बुंदेलखंड  विकाश की इस  धारा से दूर रहेगा |  एसा नहीं कि मध्यप्रदेश वाले बुन्देलखण्ड के लोगों ने इसके प्रयास नहीं किये , प्रयास तो किये पर सफलता नहीं मिली ।                                       
   

  29  फरवरी को जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी चित्रकूट पहुंचे तो बुंदेलखंड के लोगों का उत्साह देखते ही बनता था , आखिर उन्हें विकाश का नया पथ जो मिलना था |  मोदी जी ने भी लोगों को निराश नहीं किया , चित्रकूट की महिमा का बखान करते हुए उन्होंने भाषण की शुरुआत गोस्वामी तुलसी दास के  भजन से की | "  चित्रकूट के घाट पर भई सन्तन की भीड़ ----- आप सभी को यहां देख कर ऐसी ही अनुभूति इस सेवक को हो रही है |  अपने छोटे से वाक्य में  उन्होंने  जनता जनार्दन को मालिक बता कर खुद को सेवक के रूप में लोगों के सामने पेश किया | चित्रकूट की महिमा का बखान करते हुए उन्होंने  इस पवित्र भूमि को भारतीय समाज की तप स्थली  बताया जहा प्रभु  श्री राम ,लक्ष्मण ,सीता जी ने अपना एक बड़ा समय बिताया , वन में रहकर किस तरह से मर्यादा के अनेक संस्कार गढ़े ,इसकी अनंत कथाये हैं | भारत रत्न नाना जी देशमुख का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा दो दिन पहले ही नाना जी की पुण्य तिथी पर देश में उन्हें याद किया गया | नाना जी ने इसी पुण्य भूमि से भारत के स्वावलम्बन की नीव रखी थी | 

बुंदेलखंड के लोगों को  मोदी जी का यह अंदाज खूब भाया | बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे और डिफेन्स कॉरिडोर को  प्रधान मंत्री मोदी ने विकाश का ऐसा पथ बताया जिससे बुंदेलखंड की दशा और दिशा दोनों बदल जायेगी |   इस  एक्सप्रेस वे से उत्तर प्रदेश में व्यापार कनेक्टिविटी बढ़ेगी , चित्रकूट ,बांदा ,महोबा ,हमीरपुर ,जालौन,औरैया ,इटावा आदि जिलों के  लोगों को लाभ मिलेगा | इसके साथ बनने वाले डिफेन्स कॉरिडोर  के लिए बजट में 3700 करोड़ रु का प्रावधान किया गया है |  आने वाले समय में बुंदेलखंड मेक इन इण्डिया का एक बडा केन्द्र बनने वाला है ।यहां लगने वाले बडे उद्योगों से बुन्देलखण्ड के ना सिर्फ छोटे उद्योगों का विस्तार होगा, बल्कि यहाँ के किसानों को भी लाभ होगा, लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे । 
बुन्देलखण्ड में 269,070 किमी का यह एक्सप्रेस वे 6लेन विस्तारीकरण योजना के साथ 4 लेन का बनाया जा रहा है ।चित्रकूट के भरतकूप के  पास से शुरू होकर  यह  बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे बांदा ,हमीरपुर ,महोबा , जालौन होते हुए इटावा के पास यमुना एक्सप्रेसवे में मिल जाएगा |  15 हजार  करोड़ रुपये की लागत वाले इस एक्सप्रेस वे में 14 बडे पुल,268 छोटे पुल,18 फ्लाईओवर, 218 अंडरपास, 4रेलवे ओवरब्रिज 4 टोल प्लाजा, और 7 रैम्पप्लाजा का भी निर्माण किया जाएगा । सरकार ने इसके लिए ९५ फीसदी से ज्यादा भूमि का अधिग्रहण कर लिया है | सरकार ने 21 फरवरी को  2018 में लखनऊ में आयोजित शिखर सम्मलेन में उत्तर प्रदेश में डिफेन्स कॉरिडोर स्थापित करने की घोषणा की थी | इसके लिए  सरकार ने जिन छह  क्लस्टरों की पहचान की थी उनमे से दो  क्लस्टर बुंदेलखंड क्षेत्र में होंगे | इसमें एक क्लस्टर झांसी क्षेत्र में और एक चित्रकूट क्षेत्र  में विकसित किया जाएगा |  क्लस्टरों के विकाश में सरकार ने इस बात का ख़ास ख्याल रखा गया है ,जो भूमि का उपयोग उद्योग के लिए हो वह खेती योग्य ना हो | निश्चित तौर पर सरकार का यह दूर दर्शी कदम माना जा सकता है , ऐसे समय जबकि खेती की भूमि घट रही है और आबादी निर्बाध बढ़ रही है |                                                                 
                                   

  एक ओर जहां उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके की बेहतरी के  लिए  सरकार ने यह एक बड़ा प्रयास किया है , वही मध्यप्रदेश वाला भाग विकाश से अछूता रहेगा | 2018 में जब बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे और  डिफेन्स कॉरिडोर के निर्माण की बात चल रही थी ,उस समय सागर ,और मध्यप्रदेश चैम्बर आफ कॉमर्स के लोगों ने सरकार से मध्य प्रदेश वाले इलाके में भी इसी तरह के उद्योगिक कॉरिडोर के निर्माण की मांग की थी | इन लोगों ने तब के मुख्य मंत्री  शिवराज सिंह चौहान , प्रधान मंत्री  नरेंद्र मोदी  को भी पत्र भेजे थे | 2018 में मध्य प्रदेश में बीजेपी सरकार अपने चुनावी मोड़ में थी ,इस लिए शायद उसके पास इसको सुनने की फुर्सत नहीं थी |  पिछले  एक साल से ज्यादा समय से प्रदेश में  कांग्रेस सरकार है | इस सरकार के मुखिया खुद एक बड़े उद्योगपति माने जाते हैं ,पर  उन्होंने भी  बुंदेलखंड के औद्योगिक  विकाश की  कोई योजना अब तक नहीं बताई है |     
                                                    बुंदेलखंड  प्राकृतिक  सम्पदाओं से संम्पन्न इलाका माना जाता है |  खनिज सम्पदा से भरपूर इस इलाके  की अधिकांश आबादी कृषि पर आधारित है | प्राकृतिक  उतार चढ़ाव के चलते यहां  की खेती में कभी लाभ कभी हानि का चक्र चलता रहता है | प्रकृति की  मेहरबानी पिछले तीन दशकों से कुछ  ऐसी हुई है कि  अधिकाँश समय  खेती से हानि उठाते उठाते  किसान  टूट गया , कुछ ने आत्म हत्या का रास्ता अपनाया तो कुछ ने पलायन का | ऐसे समय में इस तरह की योजना  लोगों को  रोजगार के नए अवसर प्रदान कर सकती है | उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ  भी मानते हैं की इन दोनों परियोजनाओं से बुंदेलखंड की तस्वीर जरूर बदलेगी |  डिफेन्स कॉरिडोर के बनने से अब बुंदेलखंड का नौजवान पलायन नहीं करेगा |                                                                                                       
    दरअसल देखा जाए तो  बुंदेलखंड  रक्षा उत्पादों के निर्माण , उनके प्रशिक्षण  के लिहाज से  देश का सर्वाधिक  सुरक्षित इलाका  माना जाता है |  दुशमन की सामान्य पहुंच की रेंज से दूर इस इलाके का सर्वेक्षण , और जल उपलब्धता का आंकलन  कई वर्ष पहले किया गया था | डिफेन्स कॉरिडोर का निर्माण उसी का एक हिस्सा माना जा रहा है | इसी के चलते झांसी में  एक सैन्य हवाई पट्टी पर हवाई अड्डा के निर्माण की भी स्वीकृति दी गई है |  हालांकि मोदी सरकार की इस विकाश योजना पर सपा के अखिलेश यादव सवाल उठा रहे हैं वे कहते हैं सपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में झाँसी से सिदार्थ नगर तक एक्सप्रेस वे बनाने का वायदा किया था |  बीजेपी ने इस  एक्सप्रेस वे में झांसी को अलग कर दिया है , और इटावा पर मेहरबानी दिखा रही है ,यह वाकई अचरज की बात है |  खैर विपक्ष का काम है विरोध करना इस लिए वे अपने धर्म का पालन कर रहे हैं | कुछ अहम् सवाल समाज के लोग जरूर खड़े कर रहे हैं कि क्या  वाकई इससे बुंदेलखंड की तस्वीर बदलेगी ? स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा ? 

17 फ़रवरी, 2020

बुंदेली लोक संस्कृति को बचाने का जतन बुंदेली उत्सव


बुंदेलखंड की डायरी 
 बुंदेली लोक संस्कृति को बचाने का जतन बुंदेली उत्सव 
रवीन्द्र व्यास

 वसंत ऋतू को ऋतुओं  का राजा ऐसे ही नहीं कहा जाता है , इस समय वायु मंडल के पांचो तत्व(अग्नि ,जल,वायु,धरा और गगन ) अपने  मन मोहक स्वरुप में होते हैं | प्रकृति मानो अपना नवश्रृंगार कर रही हो ऐसी अदभुत ऋतू में  बुंदेलखंड इलाके में बुन्देली सांस्कृतिक के रंग घरों से निकल कर मंचों पर बिखरने लगते हैं । बुंदेली लोक कला और संस्कृति के रंग ,बुंदेलखंड के कई जिलों में मंच पर देखने को मिल जाते हैं ,पर उनमे से छतरपुर जिले के बसारी गाँव के  बुंदेली उत्सव के रंग कुछ अलग ही हैं |  बुंदेली उत्सव के साथ ही साथ खजुराहो में खजुराहो नृत्य समारोह २० फरवरी से शुरू होगा , वही इस बार ओरछा में  ६ मार्च से तीन दिवसीय नमस्ते ओरछा फेस्टिवल शुरू होगा |
                                                      आधुनिकता की दौड़ में और हम कहीं ना कही अपने सांस्कृतिक मूल्यों ,परम्पराओं और तो और भाषा को ही भूलते जा रहे हैं । लोकसंस्कृति को बचाने और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से अवगत कराने के लिए छतरपुर जिले के एक छोटे से गाँव बसारी में पिछले  23  वर्ष  से बुन्देली उत्सव होता आ रहा है ।२४  वे बुन्देली उत्सव के आयोजन के दौरान १७ फरवरी से २२  फरवरी तक चलेगा | 16 फरवरी को  बुन्देली उत्सव का  शुभारंभ   मप्र के राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने  किया । शुभारम्भ मौके पर बुंदेली उत्सव में बिखरी बुंदेली संस्कृति से वे इतने प्रभावित हुए कि खुद भी अपने को गीत सुनाने से नहीं रोक पाए | श्री राजपूत ने कहा कि   हमारी कला, संस्कृति, रीतिरिवाज, बोली, खेल, गायन और नृत्य आज देश भर में चर्चित हो रहे हैं। उन्होंने फिल्मों में लिए गए कई बुन्देली गीतों को मंच से गाकर सुनाया और कहा कि यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हमारे शब्द और संस्कृति दुनिया का ध्यान खींच रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके सागर जिले की राई लोक नृत्य की टीम को जापान में नृत्य प्रतियोगिता में जब प्रथम पुरस्कार मिला तब दुनिया ने माना कि हमारा लोक नृत्य, हमारी संस्कृति कितनी अनूठी है। उन्होंने  बुन्देली विकास संस्थान एवं पूर्व विधायक मुन्नाराजा के कार्यो की प्रशंसा करते हुए कहा कि  ये उनके ही   प्रयासों   का नतीजा है कि उन्होंने इस अनूठे आयोजन को देश भर में पहुंचाकर बुन्देलखण्ड की कला और संस्कृति को विस्तार दिया है। उन्होंने कहा कि हमें गर्व है कि हम बुन्देलखण्डी हैं।
बुंदेली उत्सव के आयोजन के चलते  इस छोटे से गाँव में एक विशाल स्टेडियम बन गया । इस मैदान पर आयोजन के दौरान जब छोटे छोटे बच्चों को गिल्ली डंडा खेलते हुए लोग देखते हैं तो लोगो को अपने अतीत की बरबस याद आ ही जाती है । अब तो  ये खेल किसी गाँव की गली में भले देखने को मिल जाए शहरों से तो गायब हो चुका है । बच्चे मोबाइल और कम्यूटर के खेल में व्यस्त हैं । बुंदेलखंड की मनमोहक चित्रकारी , महिलाओं की कुश्ती प्रतियोगिता , कबड्डी , बालीबाल , घोड़ो का नाच , रस्सा कसी , बुन्देली व्यंजन प्रतियोगिता बरबस ही लोगों का ध्यान अपनी और खीँचती है । चौपड़ पहले बुंदेलखंड के प्रिय खेंलों में से एक होता था , गाँव गाँव में चौपड़ के फड् जमते थे, हालात बदले अब खेल को जानने और समझने वाले कम लोग ही बचे हैं । यहां इस खेल की प्रतियोगिता देखते ही बनती थी । जब लोग पांसे फेंक कर जयकारा लगाते थे ।

मंचीय कार्यक्रमो में  लोक विधाओं  की महफिले  ना सिर्फ सजेंगी बल्कि उनकी  प्रतियोगिता भी होगी | यहां के मंच पर   बुंदेलखंड के अंचल में अब सीमित और लुप्त होते जा रहे बधाई नृत्य , कछयाई , दीवारी , अहिरयाई , कहरवा , बनरे , लमटेरा , सैर , ख्याल ,दादरा , गोटें , कार्तिक गीत , आल्हा ,बिलवारी ,काडरा , रावला ,सोहरे ,ढिमरयाई , राई और फाग की लय और ताल, एक अलग ही रंग जमाते हैं । अपने आप में अनोखी इन प्रस्तुतियों को देखने सुनने और समझने का मौका यहाँ मिलता है । हम जिन बैलो को छोड़ कर मशीनी युग में जी रहे हैं उन बैलो की बैल गाडी दौड़ प्रतियोगिता भी किसानों को बैलो से लगाव और प्रकृति से जुड़े रहने का सन्देश देती है । इस बार डोंडा (नोका ) दौड़ प्रतियोगिता का भी आयोजन 17 को  हुआ । बुंदेलखंड की सांस्कृतिक विरासत को लिपि वद्ध करने के लिए हर वर्ष की तरह बुन्देली वसंत पत्रिका का विमोचन भी मंत्री जी ने किया  । बुंदेलखंड की विरासत को सहेजने और समृद्ध करने वालों का सम्मान भी हुआ । यहां बुन्देली में बनी  फिल्मो का प्रदर्शन भी पिछले ३-४ वर्षो से किया जा रहा है  ।

पूर्व विधायक शंकर प्रताप सिंह बुंदेला , 23  साल पहले शुरू किये गए इस आयोजन के सम्बन्ध में बताते हैं कि , इस दौर में हम अपनी , बोली ,भाषा ,संस्कृति को भूलते जा रहे हैं , बुंदेलखंड की यह वाणी और संस्कृति बची रहे इसी लिए यह शुरुआत की थी । आज पाश्चात्य संस्कृति इतनी हॉबी होती जा रही है कि लोगों का खान-पान और रहन-सहन बदल गया है, लोक संस्कृति भूलते जा रहे हैं , बुन्देली बोलने में लोगों को शर्म आने लगी है ।लोग अपने बच्चों को बुंदेलखंडी बोलने पर डांटने लगे हैं , यहां तक की मजदूरी करके लौटे लोग भी बुन्देली छोड़ एक अजीब तरह की हिंदी बोलने लगते हैं ।

शंकर प्रताप सिंह बुंदेला के विचारों से सहमत छतरपुर के प्रमुख साहित्यकार सुरेंद्र शर्मा शिरीष , प्रो बहादुर सिंह परमार , ,के. एल पटेल सहित अनेको साहित्यकार,समाज सेवी बुंदेलखंड की लोकसंस्कृति को बचाने के इस अभियान में जुटे हैं । श्री बुंदेला भले ही इसे गैर राजनैतिक मानकर कार्य करते हैं , अपने इस आयोजन में सभी राजनैतिक दलों के लोगों को जोड़ने का प्रयास भी करते हैं मुख्य अतिथि भी बनाते हैं , पर सियासत करने वाले इसमें भी राजनैतिक रंग देने से नहीं चूकते ।

श्री बुंदेला ने जब यह कार्यक्रम शुरू किया था उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी । शुरुआत के पांच साल तो सरकार और लोगों के सहयोग से ठीक ठाक चले । यह वह दौर था जब सांस्कृतिक विरासत को बचाने के इस अभियान की एक मजबूत नीव बन चुकी थी । सरकार बदली सियासत का और लोगों का मिजाज भी बदल गया । सरकार ने सहयोग पर विराम लगा दिया , सियासत से हित साधने वाले अनेकों लोगों ने मुंह मोड़ लिया । यहां तक की इस आयोजन के समांनातर छतरपुर में एक आयोजन भी उन्ही दिनों सरकार ने कराया , एक ही साल हुआ ।

देखा जाए तो लोकसंस्कृति किसी बैशाखी की मुहताज ७० -८० के दशक तक नहीं रही । लोकसंस्कृति और लोक परंपराएं बुंदेलखंड के लोगों की जीवन की एक शैली थी और है। पर बीते  तीन_चार  दशकों में जिस तेजी से जन रंजन के माध्यमो का विस्तार हुआ उसने देश की तमाम लोकसंस्कृतियो पर आघात पहुंचाया है । हालांकि लोकसंस्कृति के कोई लिखित मापदंड नहीं होते पर इसमें परम्पराओ की जड़ें इतनी गहरी होती हैं की इसको बदलने में सादिया बीत जाती थी । आधुनिकता की जीवन शैली और पाश्चात्य सभ्यता का अंधानुकरण लोगों को अपनी परम्पराओं से अलग कर देता है । ऐसी दशा में वे न घर के रहते ना घाट के । जिस बुन्देली भाषा के बोलने में आज के बुन्देलखण्ड के नव् धनाड्य वर्ग को शर्म आती है , असल में आम जन मानस में यह बात बैठा दी गयी  है कि  रीती रिवाज , लोक गीत , बोली वगैरह गवारुपन है , पाश्चात्य सभ्यता अपनाना ,विलायती शब्दों का प्रयोग आधुनिकता है |   देश के जाने माने साहित्यकार प बनारसी दास चतुर्वेदी ने मधुकर पत्रिका में लिखा था कि बुन्देली भाषा इतनी मधुर और समृद्ध है कि इसके सामने बृज की भाषा कही नहीं लगती ।

10 फ़रवरी, 2020

चले थे नायक बनने, बन गए खलनायक

बुंदेलखंड की डायरी 
चले थे नायक बनने, बन गए खलनायक 
रवीन्द्र व्यास 
बुंदेलखंड ,इलाके में जो ना हो जाए वह थोड़ा है , ऐसा ही कुछ  नजारा पिछले दिनों छतरपुर जिले में देखने को मिला |  प्रशासनिक षड्यंत्र का ऐसा खेल लोगों को देखने को मिला जिसकी मिसाल देश प्रदेश में कहीं देखने को नहीं मिलती | छतरपुर  तहसील के एसडीएम ने ऐसा  जबरदस्त कारनामा कर दिखाया  जो किसी फ़िल्मी पटकथा से कम नहीं था | जिसमे  नायक  नजर आने वाला अधिकारी खलनायक  बन जाता है |  
             इस जीवन्त  कथा में  शहर के दबंग माने जाने वाले एसडीएम  अनिल सबकाले अपनी दबंगई के चलते नियम और कानून को दरकिनार कर, आदेश जारी करते रहे  हैं |   फ़िल्मी खलनायक की तरह उनका  अपना एक गिरोह भी बन जाता  हैं ,| उनके इस काकस मण्डली में   ठेकेदार , जन सेवक  , शिक्षा  कारोबारी , भूमि कारोबारी  और  सामाजिक प्रतिष्ठा बनाने और बिगाड़ने  वाले पत्रकार भी होते हैं |   अपना यह  किरदार इतनी सफाई से  निभाते  हैं कि  लोगों को लगता है कि वाह क्या काम किया है | असल में उनके अधिकाँश कार्यक्रमों के पीछे वसूली का एक अभियान होता है | और  लोगों से वसूली के लिए  अपना एक अलग विश्वस्त आदमी हमेशा अपने साथ रखते हैं | उसे रेस्ट हाउस में रखा जाता है और स्वयं सर्किट हाउस में  अपना स्थाई बसेरा बना लेते हैं |  लोगो से बातचीत की हर रिकॉर्डिंग अपने  मोबाइल में कर लेते हैं  |  खलनायकी का जो इतना बेहतर किरदार निभा रहा हो भला वह पाने ख़ास लोगों को लाभ से क्यों वंचित करे | लिहाजा  उसने  अपने  ख़ास  मित्र  पुष्पेंद्र गौतम  जोकि श्री कृष्णा विश्वविद्यालय के संचालक सदस्य हैं   को लाभ  पहुंचाने के लिए  एक ऐसा  अनैतिक आदेश जारी करते हैं जो उनके गले की फांस बन जाता है | पुष्पेंद्र गौतम के विरोधी और खजुराहो विश्व विद्यालय के प्रमुख अभय सिंह भदौरिया  को फ़साने के लिए  वे  अपने ही ऊपर हमले  की  फ़िल्मी कथा तैयार करते हैं और हमला करवाते हैं |                         खलनायकी के इस किरदार में वे  भी फ़िल्मी खलनायकों की तरह एक चूक कर जाते हैं ,नतीजतन उनके सारे षड्यंत्र का पर्दा फास वर्दी वाले कर देते हैं |  7  फरवरी २०२० को पुलिस कप्तान तिलक सिंह ,एस डी एम कार्यालय में 5 फरवरी की  सुबह 9 बजे  हवाई फायर , एसडीएम की गाड़ी और चेंबर में  तोड़फोड़ के मामले में  खुलासा कर देते है | पुलिस हमले के  मास्टर माइंड एसडीएम अनिलसपकाले , बीजेपी अल्प संख्यक मोर्चा के प्रदेश मंत्री जावेद अख्तर , श्री कृष्णाविश्विद्यालय के संचालक पुष्पेंद्र सिंह गौतम  अमित सिंह परिहार, अर्जुन श्रीवास और संतोष सोनी  और राजेंद्रसिंह को गिरफ्तार कर लेती है | पुलिस ने आरोपियों के पास से कट्टा ,कारतूस,बेसबाल का बेट,लाठी वगैरह जप्त कर लेती है | न्यायालय में पेश कर पुलिस अनिल सबकाले , पुष्पेंद्र सिंह , जावेद अख्तर और राजेंद्र सिंह को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर ले लेती है |  
                      इस मामले में खुद मास्टर माइंड  एसडीएम  अनिल सबकाले पुलिस को  लिखित रिपोर्ट भी करते हैं | पुलिस उनकी रिपोर्ट पर अप क्र ४२/२०२० धारा ३०७,३५३,४२७. ५०६,३४ आईपीसी और सावजनिक संपत्ति निवारण अधिनियम की धारा ३ के तहत मामला भी दर्ज कर लेती है  | वे पुलिस को बताते हैं कि  मुझे ऐसा लग रहा है कि मेंएंटी माफिया के खिलाफ कार्यवाही कर रहा हूँ उसी को दबाने के लिए अज्ञात हमलावरोंने इस तरह की कार्यवाही की है |
विवाद के विश्वविद्यालय :
मामले के  आरोपी पुष्पेंद्र गौतम और उनके भाई ब्रजेन्द्र सिंह गौतम ने मिलकर छतरपुर में कृष्णा विश्वविद्यालय की स्थापना कर  एक बड़ी सौगात छतरपुर जिले को दी थी | अभय सिंह भदौरिया पन्ना रोड पर खजुराहो विश्वविद्यालय की स्थापना करना चाहते थे | अपने इस विश्वविद्यालय के लिए उन्होंने  पन्ना रोड पर कदारी गाँव के पास एक भूमि क्रय की थी | खजुराहो यूनिवसिटी के संचालक अभय सिंह भदौरिया ने 30 जनवरी को  पत्रकार वार्ता कर  छतरपुर एसडीएम अनिल सपकाले के  कारनामो का खुलाशा किया था | उन्होंने सबकाले  पर   एक करोड़ रुपए मांगने और  राशि नहीं  देने पर  भूमि शासकीय घोषित करने की धमकी देने का आरोप लगाया था |   जिस भूमि को एसडीएम शासकीय बताया  उसी भूमि का फोरलेन के तहत 20 लाख का मुआवजा सरकार ने   अभय सिंह भदौरिया  को  दिया। भदौरिया के अनुसार खसरा क्र  336/1 कि भूमि मैंने शरद अग्रवाल से खरीदी थी जिसमें 14 लाख रुपए रजिस्ट्री खर्च किया गया है एवं लगभग 6 लाख रुपए ड्रायवर्सन के लिए चालान से राशि जमा की गई है और एसडीएम ने ही  भूमि का डायवर्सन किया । यही नहीं अपर कलेक्टर न्यायालय द्वारा आदेश दिनांक 14.10.2019 को 336/1 ग्राम कदारी की भूमि को भू स्वामी की जमीन मानते हुए अभय सिंह भदौरिया के पक्ष में फैसला किया गया है। इसके अलावा हाईकोर्ट द्वारा सीमांकन पर आगामी आदेश तक के लिए स्टे दिया गया था। दिलचस्प ये है कि  यह 336 खसरा की जमीन 6 बार खरीदी बेंची  गई और 6 बार नामांतरण भी  किया गया। फोरलेन के मुआवजे में  लोगों को लाखों रुपए की राशि मुआवजे के रूप में दी गई |                
एसडीएम के रूप में अनिल सबकाले ने २५ जनवरी को एक आदेश राजस्व प्रकरण क्र ७०/अ -६-अ /२०१९-२० जारी कर  क़दारी पटवारी हल्का की 13 एकड़ शासकीय जमीन  अपने नाम कराने और  अवैधानिक खरीद बिक्री करने पर  रामनाथ चौबे ,अभय सिंह भदौरिया सहित 13 लोगों पर अपराध धारा 420 ,467 ,468 ,469 ,470 ,471  के तहत मामला दर्ज करने के निर्देश सिविल लाइन थाना पुलिस को दिए थे |  भदौरिया द्वारा 30 जनवरी को पत्रकार वार्ता करने पर  एसडीएम ने 30 जनवरी को पात्र क्र 49 के द्वारा एसपी ,कलेक्टर को पत्र लिख कर  जमीन क्रय विक्रय मामले में कार्यवाही  करने की अपील की गई थी | इसी मामले में भदौरिया ने जिला न्यायालय में जमानत का आवेदन दिया था , | एसडीएम पर हमले वाले दिन ५ जनवरी को ही उसके जमानत की तारीख लगी थी \। इस मामले में ।कमिश्नर के निर्देश पर अब  इस मामले की जांच भी फिर से की जा रही है| 
 सबकाले की जांच और बेचैन राजस्व अधिकारी                        
  अनिल सबकाले हमले  मामले में पुलिस को प्रारम्भिक तौर पर ही षड्यंत्र नजर आने लगा था |  यही कारण है की सीएसपी उमेश शुक्ला ने मीडिया को दिए अपने बयान में अप्रत्यक्ष तौर पर इसका इशारा भी कर दिया था | एडिशनल एसपी जयराज कुबेर ने अपने जांच का सिलसिला भी भूमि और विश्वविद्यालय की कड़ी के साथ ही आगे बढ़ाया | जब उन्होंने मोबाइल की रिकार्डिंग  ली तो सारी कड़ियाँ खुद बा खुद खुलती चली गई | पुलिस के हाथ लगे कृष्णा विश्वविद्यालय के पुष्पेंद्र गौतम , और बीजेपी नेता जावेद अख्तर ने हमले की सारी कथा उजागर कर दी |  जिसमे पैसो के लेनदेन के साथ  अपने व्यावसायिक प्रतिद्वंदी भदौरिया को सबक सिखाने की बात कही गई बहरहाल  अनिल सपकाले की  गिरफ्तारी  के बादसागर  कमिश्नर आनंद शर्मा ने उन्हें निलंबित कर   उनकेकार्यकाल की  जांच के आदेश जारी किए हैं। बीते  रविवार को अपर कलेक्टर प्रेम सिंह चौहान एवं एडीशनल एसपी जयराज कुबेर ने एसडीएम कार्यालय में  अनिल सपकाले के द्वारा  जारी किए गए आदेशों  की फाइलों को जब्त किया। 
प्रशासनिक अराजकता दरअसल बुंदेलखंड इलाके में पिछले कुछ वर्षों के दौरान पद के दुरपयोग के अनेकों मामले देखने को मिले हैं | जिसके चलते कई छूट भाइये कर्मचारी अधिकारी लोकायुक्त की भेंट भी चढ़े | बड़े स्तर पर  अपने पद के दुरपयोग के कई मामले सामने आते रहते हैं , पर हालात तब और कष्ट प्रद हो जाते हैं जब बेबस लोगों की कोई सुनने वाला नहीं होता | इस मामले में भी ऐसा ही कुछ हुआ है | अगर किसी अधीनस्थ  अधिकारी की गैरजिम्मेदाराना हरकतों को उसके वरिष्ठ अधिकारी नजरअंदाज नहीं करते तो शायद  हमले की यह फ़िल्मी पटकथा नहीं देखने को मिलती ।

Political_bangal _election_बंगाल का फैसला: सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, राजनीतिक चेतावनी भी

  बंगाल का फैसला: सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं , राजनीतिक चेतावनी भी रवीन्द्र व्यास  पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों ने भारतीय राजनीति को एक ब...