08 जुलाई, 2018

Watar_जल के लिए भगवान् की शरण में जन सेवक

बुंदेलखंड की डायरी 

जल के लिए भगवान् की शरण में जन सेवक
रवीन्द्र व्यास 
कुछ समय पहले  जल को लेकर   आई नीति आयोग की रिपोर्ट  देश  में खतरे की घंटी बजाती है | रिपोर्ट के अनुसार देश की  60 करोड़ की आबादी पानी की गंभीर समस्या से जूझ रही है | देश में हर सालदो लाख लोग गन्दा पानी पीने के कारण काल के गाल में समा जाते हैं | वर्तमान में हम जितना पानी उपयोग कर रहें उसके दो गुने पानी की जरुरत देश के लोगों को होगी | नीति आयोग की यह रिपोर्ट  बुंदेलखंड जैसे इलाके की तस्वीर बयाँ करने के लिए काफी हैं । बुंदेलखंड   लगातार जल अभाव ग्रस्त होता जा रहा है , नदी नालों ,तालाबों और बांधों ने साथ छोड़ दिया है | जून में भी बुंदेलखंड तप रहा है , ऐसे हालात में लोग तो ठीक जन सेवक भी भगवान् की शरण में पहुंच गए हैं , कोई टोने टोटके का सहारा ले रहा  है  तो कोई भगवान् की शरण में पहुंच कर अच्छी वर्षा की कामना कर रहा है  | 

अच्छी वर्षा  के लिये राज्यमंत्री के टोटके :
बुंदेलखंड का हर शक्श  भरपूर वर्षा की कामना कर रहा है, कहीं रामायण पाठ चल रहा है तो कहीं अखंड भजन हो  रहे हैं |  मध्य  प्रदेश सरकार की   पिछड़ा वर्ग-अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री  श्रीमती ललिता यादव ने एक कदम आगे बढ़ कर टोटके का सहार लिया | उन्होंने अपने विधान सभा क्षेत्र  छतरपुर के फूला देवी मंदिर पहुंच कर  मेंढक-मेंढकी की विधि-विधान से शादीकराई |   मंत्री जी  ने अपने इस टोटके को लेकर तर्क दिया कि  जिस प्रकार टिटहरी के अण्डों से अच्छी वर्षा के अनुमान लगाने की प्राचीन मान्यता है उणयसी प्रकार वर्षा के लिये मेंढक-मेंढकी की शादी रचाने की भी परम्परा है। यह अन्धविश्वास नहीं है मगर प्रकृति के संतुलन के लिये ईश्वर की पूजा अर्चना के साथ ही इस प्रकार की परम्परायें भी अपनाना जरूरी हैं। उन्होंने दावा कियाकि  वह अपने विधानसभा क्षेत्र में जनता की भावनाओं के तहत कार्य करती है और कार्यकर्ताओं ने इस प्रकार की परम्परा को करने की ठानी सो आज अच्छी वर्षा के लिये मेघ देवता से सभी ने मां फूलादेवी के समक्ष पूजा अर्चना व मेंढक-मेंढकी की विधि विधान से शादी सम्पन्न कराकर प्रार्थना की है। उन्होंने बताया कि 5 वर्ष पूर्व भी पानी की विकराल समस्या होने पर बघराजन माता मंदिर में इस प्रकार की पूजा-अर्चना की गई थी और ईश्वर ने अच्छी वर्षा की थी।
मंत्री जी पानी के लिए टोटके करें तो भला नगर पालिका अध्यक्ष कैसे पीछे रहें | छतरपुर  पालिका अध्यक्ष अर्चना गुड्डू सिंह भी अपने लाव लश्कर के साथ भगवान् की शरण में पहुंच गई |  उन्होंने  शहर  के  सिद्ध हनुमान मंदिरों में पहुंचकर अच्छी बारिश और समय पर मानसून के लिए मनौती मांगी।शहर के जल संकट को टालने के लिए अर्चना गुड्डू सिंह ने अषाढ़ माह के पहले मंगलवार को हनुमान टौरिया पर पहुंचकर सबसे पहले नारियल रखा और जनेऊ चढ़ाकर भगवान से अच्छी बारिश की कामना की।  साई बाबा के सामने भी अपनी झोली फैलाकर शहर के लोगों को जल के लिए मनौती मांगी। इसके बाद वे खड़े हनुमान जी मंदिर, फिर बूढ़े बब्बा हनुमान मंदिर पहुंची। यहां से मोटे के महावीर मंदिर, सटई रोड स्थित बेहर के हनुमान मंदिर, कोतवाली के पास स्थित बालाजी सरकार मंदिर और अंत में अनगढ़ टौरिया के पंचमुखी हनुमान मंदिर पहुंची। इस सभी सिद्ध पीठों पर उन्होंने नारियल रखकर हनुमानजी से अच्छी बारिश की प्रार्थना की।  शनिवार को  अर्चना सिंह शहर के सभी सिद्ध हनुमान मंदिरों में हनुमान चालीसा का संपुट पाठ करेंगी। 
पूर्व में भी नेताओं ने मांगी थी वर्षा की मनौती :
छतरपुर जिले के बीजेपी  नेता भगवान्  की शरण में कभी पीछे नहीं रहते ,|  पिछले साल भी वर्षा ऋतू  में यहां के बीजेपी नेताओं ने भगवान् को खुश करने के कई तरह के जतन किये थे |  बिजावर केविधायक पुष्पेंद्र नाथ पाठक ने तो जटाशंकर धाम में अपनी प्रार्थना की तो नौगांव से चित्रकूट तक की पदयात्र कर  कामता नाथ की परिक्रमा की |  राज्य मंत्री ललिता यादव , बीजेपी अध्यक्ष पुष्पेंद्र प्रतापसिंह भी भगवान् को मनाने में पीछे नहीं रहे थे , | भगवान् ने शायद इनकी प्रार्थना को पिछले साल स्वीकार नहीं किया था ,|
टोटके और मनौतियों पर खड़े हो रहे सवाल 
कांग्रेस नेता आलोक चतुर्वेदी को चुनावी वर्ष में मंत्री जी का टोटका पसंद नहीं आया | उन्होंने बाकायदा एक प्रेस नोट जारी कर  बीजेपी सरकार पर आरोप लगाया है कि  भयावह सूखे की मार झेल रहेबुंदेलखंड के लोगों को बूंद बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।  जनता की इस परेशानी के बीच भाजपा सरकार कहीं नजर नहीं आ रही। उल्टा जनता का ध्यान भटकाने के लिए और सुर्खियों में बने रहनेके लिए भाजपा सरकार की मंत्री ललिता यादव टोने-टोटकों का सहारा ले रही हैं। परंपराओं की आड़ में जनता को मूर्ख बनाना भाजपा नेताओं को अच्छी तरह आता है। 
उन्होंने साफ़ किया कि  डिजिटल युग में मेंढक के विवाह से अच्छी बारिश होगी यह तो पता नहीं लेकिन इतना सभी को पता है कि  छतरपुर जिले में लगभग 70 करोड़ रुपए से अधिक की नल जल योजनाएंसंचालित की गईं। भ्रष्टाचार के कारण अधिकांश नल-जल योजनाएं बंद पड़ी हैं। इसी तरह शहर के तालाब भू-माफियाओं के शिकंजे में हैं। हर साल तालाबों पर अतिक्रमण कर इसका रकबा घटाया जा रहाहै और सरकार तमाशा देख रही है। इसी तरह जिला अस्पताल में पीने को पानी नहीं है।  एक तरफ भाजपा के नेता बुलेट ट्रेन और डिजिटल इंडिया की बात करते हैं और दूसरी तरफ ऐसे अंधविश्वासों मेंजनता को उलझाकर उन्हें मूर्ख बनाने में जुटे हैं।   प्रदेश में भाजपा की सरकार है। मंत्री चाहतीं तो छतरपुर के सूखे से पीडि़त जनता को पानी की स्थाई व्यवस्था करा सकती थीं लेकिन सभी सरकारीयोजनाओं में भ्रष्टाचार का दीमक लगा हुआ है इसीलिए सरकार को टोटकों का सहारा लेना पड़ रहा है।
जल को लेकर बदत्तर होते हालात :  
पानी   को लेकर वाटर ओआरजी के आकड़े बतलाते है  कि  दुनिया के 85 करोड़ लोगों को साफ़  पानी नहीं मिल  पाता  है , जिनमे 60  करोड़ लोग अकेले हिन्दुस्तान के हैं | दुनिया भर में  औरतों का  6 घंटेका समय पानी भरने में खर्च होता है तो बुंदेलखंड में  24  घंटे में से 10 घंटे औरतों का समय पानी भरने में व्यतीत होता है | ये आंकड़े बताते हैं की जल को लेकर हालात कितने चिंता जनक हैं | 
सोशल मीडिया फाउंडेशन की सर्वेक्षण रिपोर्ट बताती है कि बुंदेलखंड के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को पानी के लिए एक से लेकर तीन किलो मीटर  तक चलना पड़ता है | तो कई स्थानों पर ऊँचे नीचेपहाड़ों  को भी पार करना पड़ता है | पानी के  लिए सिर्फ महिलाये ही नहीं बल्कि छोटे छोटे बच्चे भी मीलों पैदल चलने को मजबूर हैं | हालात इस बार इतने पर ही नहीं रुके हैं , मध्य प्रदेश के सागर ,दमोह,छतरपुर ,टीकमगढ़ और पन्ना , उत्तर प्रदेश के झाँसी ,ललितपुर ,महोबा ,बांदा ,हमीरपुर ,उरई  जैसे जिलों में  पानी की कमी के कारण लोगों को रात रात भर जाग कर पानी की तलाश भटकते देखा जासकता है | 
लोगों ने बढ़ाये हाथ :
पन्ना जिला का मोहन्द्रा गाँव  का कभी जल स्तर इतना बेहतर था की लोगो के कुँए पानी से भरे रहते थे ,हेंड पम्प साथ देते थे ,खेती के लिए भी पानी की कोई समस्या नहीं रहती थी | इस बार हालात ऐसेबिगड़े की  गाँव का मडा तालाब भी सूख गया | जहां खाली पानी नहीं पिलाया जाता था वे लोग पानी खरीदने को मजबूर हो गए |  पर इन हालातो में यहां के लोगो ने हार नहीं मानी और कल बेहतर हो इसकेलिए  मडा तालाब की सफाई और खुदाई में लोग जुट गए | प्रशासन जिसे इस तरह के कार्यों में सहयोग करना चाहिए था ,इस मसले पर मौन ही रहा | 
छतरपुर नगर में  कांग्रेस नेता आलोक चतुर्वेदी  पिछले ८_९ सालों से गर्मियों में अपने टेंकर लगाकर  लोगों को   विपरीत और प्रशासनिक असहयोग के बावजूद  पानी उपलब्ध करा रहे हैं |
 नौगांव में 36 करोड़ की जल आपूर्ति व्यवस्था ठप्प होने के बाद  कांग्रेस नेता अजय तिवारी ने अपने फ़ार्म हाउस का  निजी बोर जनता को समर्पित कर दिया | जिंदल और पीएनसी कम्पनी ने अपने २० -२०हजार लीटर क्षमता वाले टेंकर  नगर पालिका को जल सप्लाई के लिए दिए हैं |नौगांव के ही  गगन यादव, सपा नेता प्रीतम यादव एवं टिंकू यादव ने भी अपने निजी बोर से पानी उपलब्ध कराना शुरु कर दिया ।
घुवारा के समीप पनवारी गांव का चंदेलकालीन तालाब  जब अपनी अंतिम सांसें गिनने लगा और लोगों के हलक सूखने लगे  तब इस गांव के लोगों  को 52 एकड़ में फैले पनवारी तालाब का महत्व समझ मेंआया ।
हमेशा की तरह यहां के गांव वालों ने  चंदेलकालीन तालाब के गहरीकरण  के लिए प्रशासन से फरियाद   की ।  प्रशासन  ने  भी हमेशा की तरह गांव वालों की इस जायज़ मांग को अनसुना कर दिया ।  प्रशासनिक उपेक्षा के बावजूद  ग्रामीण हताश नहीं हुए । उन्होंने बाकायदा तालाब का सीमांकन कराया और 52 एकड़ में फैले चंदेलकालीन तालाब को 5 फुट से अधिक गहरा कर दिया। और वो रास्ते भीसाफ़ कर दिये गये जहां से तालाब में पानी आता है । 


दरअसल  समस्या के स्थाई समाधान की दिशा में सरकार और जनप्रतिधि  बात तो बहुत करते हैं पर जमीनी हकीकत  कुछ और कहानी कह जाती है | जरुरत है एक ईमानदार पहल की जिसके बारे में नाप्रशासन सोचता है ना जनप्रतिधि | 
बुंदेलखंड की डायरी 
हाथ मिल गए साथ चले पर दिल मिलना बाकी 
रवीन्द्र व्यास 
कांग्रेस की समन्वय यात्रा  ओरछा से शुरू होकर पन्ना में समाप्त  गई | प्रथम चरण  के इस  अभियान में बुंदेलखंड के  टीकमगढ़ ,छतरपुर और पन्ना जिले के कांग्रेसी नेताओ कार्यकर्ताओं के हाथ मिलवाकर दिग्विजय ने हाथ का साथ देने की बात कही । पंगत की संगत मे भी हाथ के साथ रहने की सौगंध दिलवाई।  बुन्देलखंड  और मध्यप्रदेश के संदर्भ मे यदि देखा जाए तो कांग्रेस को कांग्रेसी ही हराते और  जिताते है । दुशमन का दुशमन दोस्त की युक्ति पर ये लोग कांग्रेस का हाथ ही काट देते थे, । ये बात 14 साल के वनवास के बाद  अब कांग्रेस को समझ मे आई है शायद  इसीलिए चुनाव  अभियान से पहले कांग्रेस ने घर जोड़ो अभियान शुरू किया | 
 माना जाता है कि  कोई शुभ कार्य के पहले देवताओ का आशीर्वाद लेने से काम सफल हो जाते है । इसलिए समन्वय समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ओरछा के  रामराजा से आशीर्वाद लेने 31 मई को पहुंचे ।समिति के सदस्यों  के साथ पूजा अर्चना के बाद   दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं वा नेताओं के बीच समन्वय का अभियान शुरू किया  |  ओरछा के राम राजा मंदिर को सियासत के लोग सिद्ध स्थान मानते है, । जब  आपरेशन ब्लू स्टार की बात  आई तो स्वयं इन्दिरा गांधी यहां आशीर्वाद लेने आई थी ।     राजा राम के दरबार में 31 मई 1984 को तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी ने पंजाब में स्वर्ण मंदिर से आतंकवादियों से मुक्त कराने का आशीर्वाद लिया था |यह बात प्रदेश के एक रिटायर्ड  आईएएस अधिकारी अखिलेन्दु अरजरिया ने  अपनी फेसबुक वाल पर लिखी है । उन्होंने लिखा है कि यहा से जाने के बाद इन्दिरा जी ने 3 जून को स्वर्ण मंदिर को आतंकवादियों से मुक्त कराया था ।   नरेंद्र मोदी  2014 का चुनाव जीतेँ  इसके लिए उनके ख़ास समर्थकों ने यहां यज्ञ भी कराया था |  उमा भारती सहित बुंदेलखंड के टीकमगढ़ और झाँसी (यूपी) के अधिकाँश उम्मीदवार चुनावी जीत  लिए यहां रामराजा का आशीर्वाद लेने आते हैं | 
                  2018 मे  ठीक 31 मई के  दिन दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस की एकता व विजय का आशीर्वाद लेकर कांग्रेस की समन्वय यात्रा शुरू की | हालांकि कहा यह जा रहा है की कांग्रेस में समन्वय यह अभियान राहुल गांधी के इशारे पर शुरू किया गया है | समन्वय का जबाबदारी  दिग्विजय के ऊपर छोड़ी गई है , और उनके साथ समन्वय समिति में जिन जिन लोगों को रखा गया है वो कांग्रेस के अलग अलग गुटों से सम्बंधित हैं |  इसके पीछे की वजह भी बड़ी साफ़ बताई जा रही है कि मध्य प्रदेश में दिग्विजय गुट  सर्वाधिक प्रभावी है जिस पर नियंत्रण वे ही कर सकते हैं | बुंदेलखंड में कांग्रेस के हार की बड़ी वजह भी यही गुट बाजी रही , जिसके चलते पार्टी दिग्विजय और  सत्यव्रत  खेमे में बट गई | चुनाव में इन लोगों ने एक दूसरे का हाथ थामना उचित नहीं समझा , नतीजतन पार्टी को  बुंदेलखंड की मात्र 20 फीसदी सीटों से ही संतोष करना पड़ा | 
14 साल का वनवास काटने के बाद कांग्रसी दिग्गजों को यह ज्ञान मिला है कि अपना राजनैतिक अस्तित्व बचाना है तो पार्टी को फिर से जीवंत बनाना होगा || इसी के चलते दिग्विजय सिंह , सत्यव्रत चतुर्वेदी और उनकी टीम ने  बुंदेलखड का तीन दिवसीय दौरा पूर्ण किया | ओरछा से जब इसकी शुरुआत हुई तो आदत के अनुसार पार्टी कार्यकर्ता अपने अपने नेता के जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे |  इस बात को लेकर दिग्विजय  ओरछा में एक बुजुर्ग कांग्रेसी से कान पकड़कर माफ़ी भी मंगवाई थी | बाद समन्वय समिति का काफिला पृथ्वीपुर होते हुए टीकमगढ़ पहुंचा | टीकमगढ़ ,छतरपुर होते हुए यह समन्वय समिति २ जून को पन्ना पहुंची | हर जगह दिग्विजय ने रात बिताई और पार्टी के आला नेताओं से अलग अलग स्तर पर बातचीत की और समझाइस भी दी | कार्यकर्ताओं से भी मुलाक़ात कर उनकी बाते और समस्याएं सुनी वा समझी | हर जगह उन्होंने पत्रकार वार्ता की | पत्रकार वार्ता में उन्होंने अपने उस दाग को मिटाने का  जतन भी किया जिसके कारण मध्य प्रदेश की सड़के गड्ढों में तब्दील हो गई थी और प्रदेश अन्धकार में डूब गया था | उन्होंने इसका ठीकरा भी तत्कालीन एनडीए सरकार पर फोड़ा , और आज की बेहतर सड़कों और विद्दुत व्यवस्था के लिए अपनी नीतियों को प्रमुख वजह बताया | साथ ही उन्होंने अपने मुख्य मंत्रित्व कार्यकाल में सर्वाधिक रोजगार उपलब्ध कराने का दावा किया |  
          पंगत की संगत में उन्होंने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं से ये संकल्प भी करवाया की हर हाल में कांग्रेस के लिए काम करेंगे | उनका दिलाया यह संकल्प कितना कारगर रहेगा , यह पार्टी के टिकट वितरण के बाद ही साफ़ हो पायेगा | जब टिकट ना मिलने से खफा कांग्रेसी अपने ही दल के प्रत्यासी को हराने में जुट जाते हैं | इन हालातों से निपटने के लिए भी दिग्विजय सिंह और उनकी समिति कितनी सक्रीय रहेगी ? यह सवाल समन्वय कारी कांग्रेसियों को बेचैन किये है | हालांकि दिग्विजय के प्रयासों से पार्टी के एक दूसरे के  विरोधी भी साथ साथ बैठे भी पर कांग्रेसियों के दिल मिलना अभी भी बाकी हैं  , यह साथ कब तक साथ रहेगा और कब टूट जाएगा यह कहा नहीं  जा सकता | अलबत्ता यह जरूर कहा  जा सकता है की कांग्रेस अपने चुनावी अभियान में बहुत पीछे चल रही है जिसकी कीमत भी उसे चुकानी पड़ सकती है | 

Political_bangal _election_बंगाल का फैसला: सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, राजनीतिक चेतावनी भी

  बंगाल का फैसला: सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं , राजनीतिक चेतावनी भी रवीन्द्र व्यास  पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों ने भारतीय राजनीति को एक ब...