03 अप्रैल, 2016

Bundelkhand Dayri




बुंदेलखंड में जल की जद्दोजहद 

रवीन्द्र व्यास 

बुंदेलखंड में सूरज की तपन के साथ पीने के पानी  की समस्या और भयावह होती जा रही है । बुंदेलखंड क्षेत्र के सभी १३ जिलों से पानी  को लेकर लोगों की जद्दो जहद जारी है । जैसे जैसे गर्मी अपने चरम पर पहुंचेगी  हालात और भी गम्भीर होंगे ।  मध्य प्रदेश  बुंदेलखंड इलाके की जल समस्या को लेकर तो पिछले दिनों सरकार के दो मंत्रियों के बीच तीखी तकरार भी  हुई पर इस  तकरार का कोई सार नहीं निकला । देखा जाए तो जल और जीवन एक ही राशि के शब्द हैं , जाहिर है जल बिन जीवन की कल्पना संभव नहीं है । इसी लिए शायद पुरखों की यह बात लोग आज भी याद करते हैं की जहां पानी के श्रोत ना हो ऐसे स्थान पर  नहीं रहना  चाहिए । जल ही जो जीवन का आधार और सम्रद्धि और विपत्ति का कारक भी है । इस महत्व पूर्ण तथ्य को जानते हुए भी सरकार के तंत्र और समाज ने इसके महत्व् को नहीं समझा । अब प्यास लगने पर कुए खोदने की दशा निर्मित हुई है । मध्य प्रदेश सरकार अब ठेके पर देगी नल जल योजनाएं । 

                               पिछले दिनों सागर से एक खबर अखबारों में सुर्खियों से छपी की सागर नगर को जिस राजघाट बाँध से पानी दिया जाता है वह डेड स्टोरेज की तरफ बाद रहा है। इस बाँध में  जितना पानी है उससे सिर्फ 30  दिनों तक लोगों को पानी दिया जा सकता है ।  इस कारण नगर के लोगों पानी अब एक घंटे की जगह आधा घंटा दिया जाएगा । अभी तक सागर  नगर के तीस हजार नल कनेक्शन धारियों  को  ६ करोड़ लीटर पानी  सप्लाई किया जाता था । अप्रेल में जब यह हालात हैं तो आने वाले 90 दिनों में स्थिती क्या होगी अंदाजा लगाया जा सकता है ।  दरअसल नगर की पुरानी पाइप लाइनों के कारण अक्सर पाइप लाइने फूट जाती हैं और पानी सड़क पर बहता रहता है । इस स्थिती को सुधारने के लिए 200 करोड़ की लागत से मुख्य  पाइप लाइनों में बदलाव किया जाएगा । 
सागर नगर निगम के अलावा यहां के जागरूक नागरिक भी सचेत हुए हैं , और उन्होंने नगर के बेकार पड़े कुओं का सफाई अभियान भी शुरू किया है । कुओं के सफाई के इस अभियान में यहां की महिलाएं भी पीछे नहीं हैं । इस अभियान के तहत अब तक अनेको कुओं को  उपयोग लायक बनाया गया है । दरअसल सागर के लोगों ने राजघाट बाँध से पानी आने के पहले  पानी को लेकर  कई तरह की परेशानियो का सामना किया है ।
देखा जाए तो जल संकट में सिर्फ सागर शहर ही नहीं बल्कि पूरा जिला है । जिले में लगे 11 हजार से ज्यादा हेंड पम्पों में चार हजार से ज्यादा बंद पड़े हैं । 650 नल जल योजनाओं में से ३०० से ज्यादा नल जल योजनाएं बंद पड़ी हैं ।  ये हालात उस जिले के हैं जहां से बुंदेलखंड के सर्वाधिक सशक्त नेता गोपाल भार्गव  और भूपेंद्र सिंह  मंत्री हैं । मध्य प्रदेश के बाकी बुंदेलखंड इलाके का अंदाज लगाया जा सकता है । 
नलजल योजनाएं  

बुंदेलखंड  जल समस्या  की जानकारी लेने पिछले दिनों , भोपाल , दिल्ली , और मुंबई से पत्रकार भी इलाके में आते जाते रहे हैं वे भी यह जानकार हैरान रह गए की   बुंदेलखंड पैकेज से सागर,छतरपुर, दमोह ,टीकमगढ़ , पन्ना और दतिया जिले में 1287 नल जल योजनाएं तो  बनी हैं किन्तु इनमे से अधिकाँश सिर्फ आंकड़ों की शोभा हैं , इसका लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है
 इनमे छतरपुर जिले में 150 , पन्ना जिले में 280 , टीकमगढ़ में 200 दमोह में 249 , सागर में ३५० और दतिया में 58 नल जल योजनाएं बुंदेलखंड पैकेज से शुरू की गई इसमें नलकूप आधारित प्रति  नलजल योजना पर 6 लाख और कूप आधारित प्रति नलजल योजना पर दस लाख रु व्यय किये गए इन नल जल योजनाओं का जब मौके पर जाकर देखा गया तो अजब नजारा  देखने को मिला इनमे से बहुतायत में  नल जल योजनाएं बंद पाई गई दिलचस्प तो ये देखने को मिला की दिसंबर 15 में  विभाग की मंत्री ने विधान सभा में बताया था की 213 नल जल योजनाएं बंद हैं इनमे 109 जल श्रोत सूखने के कारण , 126  बिजली कट जाने , 81 योजनाएं पंचायत द्वारा नहीं चलाने के कारण और 39 नल जल योजनाएं पाइप लाइन क्षति ग्रस्त होने के कारण बंद पड़ी हैं
 इनमे दमोह जिले में 71 , टीकमगढ़ में 38 ,छतरपुर में 37 ,पन्ना में 31 ,सागर में 28  और दतिया में 8 नलजल योजनाएं बंद होने की बात स्वयं मंत्री ने विधान सभा में लिखित जबाब में स्वीकारी थी
 मंत्री जी ने सत्ता धारी दल के ही विधायक विशवास सारंग को लिखित जबाब तो दे दिया , किन्तु ना मंत्री और ना उनके विभाग के अधिकारियाो ने यह जरुरी नहीं  समझा की  अल्प वर्षा के कारण गाँव -गाँव में जल के हालात को देखते हुए इन योजनाओं को दुरुस्त कराया जाए बल्कि हालात इन नलजल योजनाओं के और भी ज्यादा बुरे हो गए
 पन्ना विधान सभा क्षेत्र से चुनी गई  पीएचई विभाग की मंत्री के  पन्ना जिले में ही नल जल योजनाओं का बुरा हाल है    जिले की  339 नल जल योजनाएं में से 179 योजनाएं  बंद हैं। इनमे  14 स्थानोंमें जलश्रोत सूखने  के कारण , 7 स्थानों पर  पाइप लाईन क्षतिग्रस्त होने के कारण ,  54स्थानों पर पम्प खराब होने के कारण ,66 योजनाएं विद्दुत कनेक्शन काटने के कारण और  22 स्थानों   पर पंचायत   द्वारा नल जल   योजनाओं का संचालन नहीं  करने के कारण नल जल योजनाएं बंद हैं। 16 योजनाएंं विभिन्न कारणों से बंद पड़ी हैं अब आप अंदाज लगा सकते हैं की  विभाग का  मंत्री अपने जिले में ही  नल जल योजनाओं का ठीक ढंग से संचालन नहीं करा पा रहे हो , वह प्रदेश की क्या व्यवस्था कर पाएंगे   विभाग के लोग इनके चालू ना हो पाने के पीछे पंचायत को ज्यादा दोष देते नजर आये
दरअसल पी एच विभाग ग्रामीण इलाको में बुंदेलखंड पैकेज के अलावा भी नल जल योजनाएँ  बनाता है   और इन नल योजनाओं में विभागीय नल जल योजना ,मुख्य मंत्री नल जल योजना के नाम से जाना जाता है अबतक के ग्रामीण इलाकों की नल जल योजनाएं पंचायत को सौंपने के बाद विभाग अपने दायित्व से मुक्ति पा लेता है   सीमित बजट और बिजली की समस्या से जूझती ग्राम पंचायतें इन योजनाओं को सफलता पूर्वक संचालित करने में असमर्थ हो जाती हैं   वैसे यह सारा कार्य सरपंच और सचिव की इक्षा शक्ति पर भी निर्भर करता है


ठेके पर नल जल योजनाएं                                    
मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान जिन्होंने विधान सभा चुनाव के समय अपनी बहनो से वायदा किया था की ,पानी के लिए अब दूर नहीं जाना पडेगा और ना हेंड पम्प चलाना पडेगा बस टोंटी खोली और पानी भर लिया । चुनाव के ढाई साल  बाद भी महिलाओ के लिए पानी की समस्या जस की तस रही । बल्कि बुंदेलखंड जैसे इलाके में तो और भी विकराल हो  गई ।  अब मुख्य मंत्री जी ने  इसका समाधान ठेका पद्धत्ति में तलाशा है ।  अब नल जल योजनाओं का निर्माण कार्य पी एच ई नहीं करेगा बल्कि एजेंसी करेगी और उसके संचालन और संधारण का काम भी 20 साल तक एजेंसी को करना होगा । इस योजना के लिए नाबार्ड ने २हजार करोड़ रु दिए हैं । 
प्रदेश में 15058 नल जल योजनाओं में से 12622 चालू और 2436 बंद पड़ी हैं । मध्य प्रदेश में 528637 हेंड पम्पो में से विभाग के आंकड़े 22686 हेंड पम्प बंद बताये जा रहे हैं । जबकि वास्तविकता इससे कहीं ज्यादा हेंड पम्प बंद पड़े हैं । 

जलसंकट को लेकर मुख्य मंत्री भले ही चिंतित हो पर उनके ही मंत्री मंडल के सदस्य इस बात को लेकर कतई गम्भीर नजर नहीं आ रहे हैं । 



 कागजी योजनाएं 
 
सरकार के मंत्री और जन प्रतिनिधि जब गाँव और कस्बों में आते हैं तो बड़ी- बड़ी बातें करते हैं । हर समस्या का समाधान मंच से कर देते हैं पर उनके अमली जामा पहनाने वाले सरकार के तंत्र में इतनी विसंगतियां हैं की उनके क्रियान्वयन में ही वर्षो बीत जाते  हैं । दमोह जिले के हटा कस्बे में 2001 में जल आवर्धन योजना शुरू की गई । इसके लिए फ़िल्टर प्लांट , पाइप लाइन टंकी  वगैरह का काम शुरू किया गया । 15 वर्ष बाद भी यह योजना शुरू नहीं हो सकी । 5 किमी दूर नदी से टंकी तक आने वाली पाइप लाइन जगह जगह से टूटी -फूटी है ।  इस मामले में पी एच ई और नगर पालिका एक दूसरे को दोषी ठहराती हैं । 
छतरपुर जिले के बड़ा मलहरा विकाश खण्ड के बोंकना गाँव में 2008 में एक नलजल योजना बनाई गई थी ।  योजना के तहत गाँव के २००० लोगों को पानी पहुंचाने के लिए एक बड़ी टंकी का निर्माण किया गया था और गाँव में पाइप लाइन बिछाई गई थी । इस योजना से गाँव वालों को आज तक एक बूंद पानी नहीं मिला । अब विभाग के लोगों ने गाँव वालों को बताया है की  गाँव में कोई जल श्रोत नहीं है , चार पांच बोर करवाए हैं वे भी सफल नहीं हैं । अब नदी के पास बोर करवाया है उससे सीधा पानी सप्लाई किया जाएगा । 

यहां विभाग ने यह जरुरी नहीं समझा की जिस नल जल योजना को वो जाल बना रहें हैं , उसका मुख्य तत्व जल कहाँ है ? विभाग के विद्वान इजीनियर असल में योजना के निर्माण के नाम पर मिलने वाली धन राशि के कारण  जल्द बाजी में  इस तरह की योजनाएं बनाते हैं जो बाद में किसी काम की नहीं रहती । धन , समय और श्रम बर्बाद होता सो अलग । कोई प्रतिनिधि इनसे यह सवाल नहीं पूंछता की जब आप मकान या खेती की जमीन खरीदते हैं तो वहां के जल श्रोत का पता करते हैं या नहीं ? 

27 मार्च, 2016

Bundelkhand Dayri


अकाल में याद आई जल सुरंगे 
रवीन्द्र व्यास 


अकाल से जूझते बुंदेलखंड में लोगों को  सदियों पुरानी जल सहेजने  परम्परा  और  उसका महत्त्व समझ  आने लगा है  मानो अकाल ने लोगों की अकल के ताले  खोलने में चाबी का काम किया  1744 में पड़े भीषण अकाल ने पन्ना  नगर में एक ऐसा जल तंत्र विकसित हुआ की पत्थरों के इस नगर में कभी पानीका संकट पैदा नहीं हुआ  पर इस  बार के अकाल  ने पन्ना में भी पानी का 
संकट पैदा  कर दिया  संकट पैदा हुआ तो  अब समाधान की दिशा में प्रशासन और लोगों के प्रयास 
शुरू हो गए  अब लोगों को अपने धर्म सागर तालाब और उसकी 56  कुओं से जुडी   जल सुरंगो की 
याद आने लगी है  

   इस बार जब पन्ना का  कभी ना सूखने वाला धर्म सागर तालाब  जब सूखने लगा तो  प्रशासन को आने वाले खतरे का 
अहसास हुआ   पन्ना कलेक्टर शिव नारायण सिंह चौहान स्वयं तालाब देखने पहुंचे  उन्होंने  तालाब  और  उससे जुडी जल
 सुरंगों को समझा  विश्व जल दिवस के मौके पर नगर के बदहाल  तालाबों की  दशा सुधारने के लिए    बैठक  हुई   बैठक   
में प्रशासन , प्रेस ,पॉलिटीशियन , और पब्लिक ने  नगर के मुख्य सरोवर धर्म सागर की  दुर्दशा पर ना सिर्फ चिंता व्यक्त की
 बल्कि दुनिया के  अपने इस  अनोखे जल  सिस्टम वाले तालाब की दशा सुधारने  संकल्प भी लिया   

                    बैठक में कलेक्टर श्री  चौहान ने  धरम सागर तालाब को  पन्ना की पहचान बताते हुए कहा की  यह  प्राचीन 
शासकों की दूरदर्शिता तथा श्रेष्ठ निर्माण कला का प्रतीक है।  सूखे के इस अभिशाप को तालाब का जीर्णोद्धार
 करके हम  बरदान में बदलेंगे। इसके लि जनभागीदारी योजना से 15 लाख , तथा नगरपालिका से 15 लाख 
रूपये की राशि दी जाएगी। जनसहयो से जितनी राशि प्राप्त होगी तनी  ही राशि जनभागीदारी से जारी कर दी जाएगी।
 तालाब की साफ सफाई तथा खुदाई  कार्य  30 मार्च से  30 अप्रैल तक चलेगा   उन्होंने  अपील की इस लक्ष्य को पूरा करने
 के लिए  आम जनता तन मन और धन से सहयोग करें 
            कलेक्टर ने कहा कि धरम सागर तथा लोकपाल सागर को भरने के लिए किलकिला फीडर नहर का  अतिक्रमण हटाए 
जाएंगे।  नगरपालिका धरम सागर सहित सभी  तालाब की साफ सफाई कराए , कचरा डालने वालों पर जुर्माना लगाए। तालाब का 
जीर्णोद्धार करना  हम सबकी जिम्मेदारी है। इसे गहरा करने में  टोकरी मिट्टी हटाने का भी किया गया 
सहयोग अमूल्य होगा। जनभागीदारी योजना से कराए जा रहे इस कार्य में एक एक रूपये का पूरा हिसाब रखा जाएगा। कार्य प्रारंभ 
होने से लेकर कार्य समाप्त होने तक वीडियोग्राफी तथा फोटोग्राफी कराई जाएगी। 
 बैठक में कलेक्टर के आव्हान पर  धरम सागर तालाब जीर्णोद्धार  लिए लोगों ने दिल खोल कर ना सिर्फ 5 लाख 77  
हजार 3 सौ रु की  राशि देने की तत्काल घोषणा की  बल्कि पुष्पेंद्र सिंह  ने अपने संसाधनों से तालाब के एक एकड़  
हिस्से के गहरीकरण का जिम्मा लियातो ब्रजेंद्र सिंह ने १०० डम्पर  मिटटी के परिवहन की जिम्मेदारी ली  समाज 
के सबसे महत्त्व पूर्ण और सामाजिक सरोकारों के लिए अपना जीवन खपाने वाले यहां के पत्रकारों ने भी अपनी क्षमता 
 कहीं ज्यादा धन राशि देने की घोषणा की  लोगों का यह सहयोग बताता है की यहां के लोग किस तरह से अपनी 
पानी की धरोहर को बचाने के लिए बेचैन हैं  जरुरत है सिर्फ उनके इस जज्बे को  एक सही दिशा देने की  
क्या है धर्म सागर तालाब

 लगभग 75 हजार की आज की जनसंख्या वाले इस पन्ना नगर  और जिले की पहचान देश  दुनिया में एक प्रमुख हीरा 
उत्पादन केंद्र के तौर पर है  मंदिरो , झीलों और प्राकृतिक वातावरण से परिपूर्ण यह इलाका पत्थरों पर बसा है ।                

 ऐसेइलाके में जल व्यवस्था बनाना  दुष्कर कार्य था 17  वी सदी में सभा सिंह को 1739 में पन्ना रियासत का 
राजा घोषित किया गया । उनके राज सम्हालने के बाद 17 44   में  भयानक अकाल पड़ा । लोग दुर्भिक्ष के शिकार होने 
लगे , जल के लिए तरशने लगे , ऐसे समय तत्कालीन राजा ने पन्ना नगर के मदार टुंगा पहाड़ी की तलहटी में विशाल 
तालाब का निर्माण 1745 में धर्म कुंड से  शुरू कराया । कुंड के प्रति लोगों की आस्था को देखते हुए यहां शिव मंदिर का भी 
निर्माण किया गया ।  1752 में जब यह तालाब पूर्ण हुआ तो लोगों ने इसे धर्म सागर नाम  दे दिया । 
    जल सुरंग  
 जब जल सुरंगों की बात आती है तो मध्य प्रदेश के बुरहानपुर की चर्चा की जाती है । बुरहानपुर में जमींन के 80 फिट अंदर 
डेड किमी की जल सुरंग बनी है जिस पर 10 कुए  बने हैं । ये सभी कुए इस जल सुरंग से लबालब भरे रहते हैं । बुरहानपुर 
की इस जल प्रदाय प्रणली की चर्चा तो देश दुनिया में होती है किन्तु पन्ना नगर की इस जल सुरंग प्रणाली की चर्चा कहीं नहीं होती                   पत्थरों पर बसे पन्ना नगर के लिए और यहाँ के राजमहल के लिए जरुरत थी गर्मी के दिनों में भी जल 


व्यवस्था बनाये रखने की । तालाब निर्माण के दौरान  56  से ज्यादा जल सुरंगे बनाई गई थी ,और  सुरंगों को नगर के कुओं 
,पार्क और महल के तालाब से जोड़ा गया था  ।  धर्म सागर तालाब से नगर के कुओं तक जल सुरंगों का जोड़ना अपने आप 
में एक अनोखा प्रयोग था ,। और 264 वर्षों से ये जल सुरंगे कार्य कर रही हैं यह भी आधुनिक इंजीनयरिंग के लिए  किसी 
चमत्कार से कम नहीं है । यदि इन जल सुरंगों को पन्ना की जल धमनिया कहा जाए तो कोई अति संयोक्ति  नहीं होगी ।
                                     जलसंसाधन विभाग में कार्य पालन यंत्री रह चुके और मूलतः पन्ना निवासी  एस के श्रीवास्तव 
बताते हैं की  पन्ना नगर के लिए ये जल सुरंगे किसी वरदान से  कम नहीं हैं । आज जरुरत है ऐसी जल व्यवस्था को समझने 
की और इसको संरक्षित और सुरक्षित रखने की । वे कहते हैं  पन्ना की जल सुरंगों पर व्यापक शोध की आवश्यकता है ।  
                      
क्यों सूखा तालाब  




पन्ना का75  एकड़ में फैला  यह ऐतिहासिक धर्म सागर तालाब  इस बार के अकाल में सूख गया है । बुंदेलखंड इलाके का यह 
 एक ऐसा तालाब है जिसका प्राकृतिक केचमेंट एरिया जबरदस्त है । इसके अलावा  यह ऐसे भू आकृति वाला तालाब है जिसे 
तभी बरबाद किया जा सकता है जब तक  लोग इसके विनाश का संकल्प ना ले लें ।  यहाँ भी ऐसा ही कुछ हुआ ,इसके पीछे
 वजह बताई बताई जा रही है की इसके जल  श्रोत पर अवैध अतिक्रमण कर लिया गया । तालाब के इर्द गिर्द की 
भूमि पर लोगों ने अपनी बसाहट बना ली ।  इन सब का परिणाम हुआ की तालाब  सूख गया । पन्ना के लोग बताते हैं की  पहली 
बार धर्म सागर तालाब को सूखते हुए देखा है । 


Political_bangal _election_बंगाल का फैसला: सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, राजनीतिक चेतावनी भी

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