बुंदेलखंड की डायरी
विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड
रवीन्द्र व्यास
दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए 2025 में कई यादगार सौगातें मिली | बीता वर्ष बुंदेलखंड की सूखी धरती पर विकास की उम्मीदों की बौछार बनकर आया था । जल संकट से उबरते हुए, औद्योगिक उड़ान भरते हुए और बुनियादी ढांचे की मजबूत नींव रखते हुए, इस क्षेत्र ने प्रगति की नई इबारत लिखी। जल जीवन मिशन की नल की धार, बीडा औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार और डिफेंस कॉरिडोर की गूंज ने जीवन को नई रफ्तार दी, जबकि महाकुंभ की प्रदर्शनी और साहित्य उत्सव ने सांस्कृतिक आत्मा को जगाया। २०२५ का अगर संछिप्त विश्लेषण देखें तो यहाँ राजनीति की आग, विकास की उमंग और चुनौतियों का संघर्ष एक साथ बुंदेलखंड की धड़कन बन गया।
राजनीतिक घटनाएँ और विवाद
2025 में बुंदेलखंड की राजनीति में खासकर उत्तर प्रदेश में राज्य की मांग जमकर गूंजी, बीजेपी की प्रभुता पर सवाल उठे और विकास के वादे हवा में लहराए। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के इस दोहरे दिल वाले क्षेत्र में, फरवरी से दिसंबर तक आंदोलन की लपटें भी भड़कीं।फरवरी 2025 में यूपी बजट सत्र में 7 विधायकों ने दिल्ली की तर्ज पर अलग बुंदेलखंड का सपना बुना, 24 फरवरी को अगली रणनीति की ठानी यह एक ऐसी चिंगारी जो पूरे साल सुलगती रही।नवंबर 2025 में बुंदेलखंड राष्ट्र समिति ने फतेहपुर में कोर कमेटी बुलाई, 30 नवंबर को सांसद आवास घेराव का ऐलान भी किया | वहीं, तारा पाटकर ने 635 दिन अनशन के बाद इंडिया गेट पर खून से खत लिखने का संकल्प लिया, पीएम को 50वां पत्र भेजा। 25 दिसंबर को अटल जयंती पर रक्त-पत्र ने तीन नए राज्यों का हवाला देकर मांग को और तेज किया।
लोकल स्तर पर झांसी-ललितपुर, बांदा-चित्रकूट जैसे क्षेत्रों में जाति, हिंदुत्व और विकास के वादों ने तनाव पैदा किया। राष्ट्रीय पी डी ए राजनीति ने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की राजनीति को झकझोरा, पुलिस-प्रशासन के मिश्रित असर ने जनता के दिलों में उम्मीद और निराशा का मिश्रण भरा अपराध पर अंकुश तो लगा, लेकिन शिकायतों की देरी और एनकाउंटरों ने सवाल खड़े किए।
विकास कार्य: सूखे से समृद्धि की उड़ान
जीवनदायिनी केन बेतवा लिंक नदी परियोजना का आगमन, यह परियोजना 2025 की सबसे बड़ी उम्मीद बनी भू-पूजन के साथ सीएम और केंद्रीय नेताओं ने इसे बुंदेलखंड के नव बदलाव का प्रतीक बताया। सूखा खत्म होगा , सिंचाई-पेयजल की समस्या सुलझेगी , कृषि से किसानों का मोहभंग रुकेगा ,इसे एक ऐतिहासिक मोड़ वाला कदम बताया गया ।
औद्योगिक क्रांति
मध्य प्रदेश में 24,240 करोड़ का पैकेज: 29,000 नौकरियाँ, 4 नए मेडिकल कॉलेज की घोषणा।
UP में 34 नीतियाँ
झांसी डिफेंस कॉरिडोर में 14 इकाइयाँ (बीडीएल, डब्ल्यूबी इलेक्ट्रॉनिक्स), गरौठा सोलर पार्क, जालौन-झांसी एक्सप्रेसवे, बीडा के 56,600 एकड़ (एयरपोर्ट, आईटी पार्क)।
MP कैबिनेट: सागर-दमोह फोरलेन (2059 करोड़, 76 किमी), झपान नाला सिंचाई (165 करोड़, 3600 हेक्टेयर), लांच नदी परियोजना, मेडिकल पद (990+615), मसवासी ग्रांट औद्योगिक परिसर में (स्टांप ड्यूटी माफी)।
ये कदम ग्रामीण रोजगार, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी लाएगे,दिल्ली-नागपुर कॉरिडोर ने बुंदेलखंड को राष्ट्रीय धमनियों से जोड़ा।
सामाजिक परिवर्तन:
महिलाओं की मुस्कान, युवाओं की महत्वाकांक्षा ,,जल जीवन मिशन ने हर घर नल, हर दिल राहत दी है।बांदा, झांसी, चित्रकूट में पानी की धार ने महिलाओं को खेतों से आजाद किया, आजीविका के द्वार खोले। महाकुंभ 2025 की स्वच्छ सुजल गाँव प्रदर्शनी ने ग्रामीण महिलाओं की कहानियाँ वैश्विक मंच पर चमकाईं जातिगत भेद भाव में कमी आई, आपसी सहयोग बढ़ा, युवा गाँवों में रुककर सपने बुनने लगे।
पर्यावरण और संस्कृति की धड़कन
पर्ववरण से जुड़े संगठनों ने जल-मिट्टी संरक्षण शुरू किया। बुंदेलखंड लिटरेचर फेस्टिवल और बुंदेली उत्सव ने भाषा पहचान को जिया, युवाओं में अभिमान जगाया। हेरीटेज फेस्टिवल ने ओरछा की सांस्कृतिक आत्मा को नव जागृत किया।
विवाद और चुनौतियाँ: विकास की कीमत, पर्यावरण की पुकार भी खूब सुनाई दी ।
खनन से वनों की कटाई (छतरपुर-पन्ना), भूपेंद्र सिंह पर घोटाले, नौरादेही चीता प्रोजेक्ट पर विस्थापन का विरोध देखने को मिला। पानी की कमी अब भी महिलाओं-बच्चों पर एक बड़ा बोझ है , पर्यावरण समूहों की यह आवाज़ भी गूंजी। रोजगार सृजन धीमा रहा, 71,000 करोड़ निवेश पर सवाल भी उठे।
2025 का असर
कुछ को उम्मीदों का सवेरा लगा , तो कुछ को चुनौतियों का सूरज समझ आया।
राजनीतिक सक्रियता ने आवाज़ दी, केन-बेतवा-डिफेंस जैसे इंफ्रा ने पंख दिए, जल मिशन सशक्तिकरण लाया, संस्कृति ने पहचान मजबूत की। पर्यावरण विवाद बाकी, लेकिन यह साल बुंदेलखंड के सूखे से समृद्धि की भावुक यात्रा की प्रतीक जरूर बनी ।