15 दिसंबर, 2024

Ken_Betwa_केन बेतवा लिंक परियोजना :बुंदेलखंड में जल और सिंचाई का होगा स्थायी समाधान

 Ken_Betwaकेन बेतवा लिंक परियोजना 

 गगउ बाँध इसके २किम ऊपर बनेगाढोडन बाँध  


बुंदेलखंड में जल और सिंचाई का होगा स्थायी समाधान 


रवीन्द्र व्यास 


 बुंदेलखंड की तकदीर और तस्वीर  बदलने वाली है  केन -बेतवा लिंकपरियोजना।  अटल जी के प्रधानमंत्रित्व काल  में  जब देश की 37  नदियों को आपस में जोड़ने का फैसला लिया गया ,उनमे से एक यह भी थी |  यह देश की वह परियोजना है जिसे सबसे पहले शुरू होना था |  इसका   मुख्य बाँध पन्ना टाइगर रिजर्व  के  ढोडन  गाँव में बनना हैअब देश की नदियों को आपस में जोड़कर जल संसाधन बढ़ाने का सपना देखने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी 25 दिसंबर को मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में महत्वाकांक्षी केन-बेतवा राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना की आधारशिला रखेंगे। इस परियोजना से सिंचाई का स्थाई समाधान तो हो गए साथ ही लाखों लोगों की पीने के पानी की समस्या का भी समाधान होगा |   



इस परियोजना का निर्माण दो चरणों में 8 वर्ष में पूर्ण होगा |   केन  बेतवा  परियोजना से राज्य के छतरपुरपन्ना,टीकमगढ़निवाड़ीदमोह,शिवपुरीदतियारायसेन,विदिशा और सागर जिलों को  और उत्तर प्रदेश के बांदामहोबा,झांसीललितपुर जिले को लाभ होगा । इन जिलों के किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधाएं मिलने से उनकी फसलों की उत्पादकता में वृद्धि होगी और खेती के लिए जल संकट का समाधान होगा।मध्यप्रदेश (8.11 लाख हेक्टेयर) और उत्तर प्रदेश (2.51 लाख हेक्टेयर) में फैले बुंदेलखंड क्षेत्र में 10.62 लाख हेक्टेयर में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराएगाइसके अलावा मध्य प्रदेश में 41 लाख और उत्तर प्रदेश में 21 लाख लोगों को पीने के पानी की समस्या का समाधान होगा 


कहाँ बनेगा बाँध  


  बिजावर विधानसभा क्षेत्र के ढोंडन गाँव में बनेगा ,यह एरिया पन्ना टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आता है इसमें  लगभग ९ हजार हेक्टेयर वन भूमि डूबेगी |  पहले चरण  में केन नदी पर 77 मीटर ऊंचा (288 x 536 मीटर ) एक बांध गंगऊ वियर से लगभग 2.5 किमी  दूरी पर केन नदी पर  बनेगा ढोंडण बाँध । जल संसाधन से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि ढोढन बाँध तक प्रति वर्ष ६५९० एमसीएम पानी आएगा जिसमे से  एम् पी  2350 एमसीएम (83 टीएमसी) का और  उत्तर प्रदेश  1700 एमसीएम (60 टीएमसी) का उपयोग करेगा।  2035एमसीएम शेष जल में से 436 एमसीएम का उपयोग  पन्ना और दमोह जिलों के जलाशय से सीधे प्रस्तावित सालेहा लिफ्ट सिंचाई योजना केलिए किया जाना प्रस्तावित है।   बिजली उत्पादन के लिए दो पावर हाउसएक बांध के निचले स्तर में और दूसरा निचले स्तर की सुरंग के आउटलेट पर भी प्रस्तावित है।जिससे 103 मेगावाट जल विद्युत और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन  होने की उम्मीद जताई गई  है। बिजली उत्पादन का एक हिस्सा परियोजना में सूक्ष्म सिंचाई विकसित करने के लिए उपयोग किया जाएगा। लिंक नहर की कुल लंबाई 221 किलोमीटर  होगी जिसमें 2 किलोमीटर सुरंग भी शामिल है   इस नहर के माध्यम से झाँसी  जिले के बरुआ सागर के परीक्षा डेम में पानी छोड़ा जाएगा |  


छतरपुर  पन्ना जिले के प्रभावित गाँव 


इस परियोजना के कारण  छतरपुर जिले के 14 गांव और पन्ना जिले  11  गांव  विस्थापित होंगे । इनमें छतरपुर जिले के  भरकुआं,ढोढन खरियानीकुपीमैनारी,  पलकोंहाशाहपुरासुकवाहा,पाठापुरनैगुवांडुंगरिया,कदवाराघुघरीबसुधा  विस्थापित होंगे । इन  विस्थापित गाँव के लोगों  को भैंसखार,राइपुरानंदगांयबट्टन और किशनगढ़ में बसाया जाएगा। इन चारों स्थानों पर जमीन को चिन्हित कर लिया गया है। पत्रा जिले के   गहदराकटहरी बिलहटामझौली,कोनी और डोंडी खमरीकूडऩऔर मरहा  ललाररमपुराजरधोबा और कंडवाहा गांवों  विस्थापित किया जाना है |पन्ना जिले के ये सभी गाँव पन्ना टाइगर रिजर्व में बसे हैं इनके विस्थापन के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व को भूमि भी दे दी गई है 

 पन्ना और छतरपुर जिला प्रशासन के माध्यम से 5  हजार हेक्टेयर जमीन पन्ना टाइगर रिजर्व (पी टी आर) को सौंप दी है। इसमें से 4400 हेक्टेयर छतरपुर जिले में और 600 हेक्टेयर पन्ना जिले में सौंपी गईहै। विस्थापन से खाली होने वाली 1300 हेक्टेयर  जमीन भी पी टीआर को  दी जाएगी।


 केन की अविरल धारा  


 केन नदी म.प्र. के कटनी जिले की  कैमूर की पहाड़ी से निकलती है और 427 किमी की दूरी तय करने के बाद उ.प्र. के बांदा जिले  में यमुना नदी से मिल जाती है। केन एशिया की ऐसी प्रमुख नदी है जो प्रदूषण से मुक्त मानी जाती है |    म.प्र.के  रायसेन जिले से निकलने वाली बेतवा नदी  590 किमी की दूरी तय कर  उ.प्र.के हमीरपुर जिले में यमुना से मिल जाती है।  केन का 28,058 वर्ग किमी और  बेतवा का  46,580  वर्ग किमी का भराव क्षेत्र   है|  केन की कई सहायक नदियों पर कई बाँध और और स्टाप डेम बनने से भी केन की जल धारा प्रभावित हुई है |



केन बेतवा लिंक परियोजना बुंदेलखंड में शुरू होना है इसका इंतजार बुंदेलखंड वासी २००५ _०६ से कर रहे हैं | इस परियोजना के निर्माण में अनेकों तरह की बाधाएं भी आई | मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा , अनेकों सामाजिक संगठन इसके विरोध में मैदान में उतरे थे | अवरोधों का सबसे बड़ा असर ये हुआ की परियोजना की लागत ८ गुना बढ़ गई | निर्माण कार्य शुरू होने के बाद भी दो चरणों में पूर्ण होने वाली इस योजना के पूर्ण होने में ८ वर्ष का समय लगेगा | परियोजना के लिए अनेकों अवरोधों के बाद अब जमीनी धरातल पर कार्य शुरू होगा | इसके पीछे भी  प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ इक्षा शक्ति मानी जा रही है | 


               

कोई टिप्पणी नहीं:

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

  बुंदेलखंड की डायरी  विकास की उमंग और चुनौतियों के  संघर्ष का  बुंदेलखंड  रवीन्द्र व्यास  दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए    2025  में कई...