25 दिसंबर, 2024

सागर में सियासत का संग्राम

 सागर में सियासत का संग्राम 

रवीन्द्र व्यास 

25/12/24

बुंदेलखंड के सागर में एक बार फिर सियासत के समीकरण बिगड़ रहे हैं |  पूर्व मंत्री  और वर्तमान मंत्री के मध्य बनी अनबन सी एम् के मंच पर भी  देखने को मिली इसके पीछे बीजेपी में  कांग्रेसी संस्कृति   पनपने का आगाज माना जाने लगा है  | सागर इन्वेस्टर सम्मिट के बाद पूर्व मंत्रियों की  सी एम के सामने  नाराजगी का यह दूसरा मौका था वैसे भी बीजेपी के पूर्व मंत्री और वर्तमान मंत्री के मध्य अनबन कई मौकों पर देखने को मिली है |  पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह ने अपने स्वागत से लेकर अपने भाषण में अपने तीखे तेवर मंच पर ही दिखा दिए |  

 

सागर में गौरव दिवस कार्यक्रम के दौरान फोटो ना लगाने से शुरू हुई ।अब अगर सागर जिले में  बीजेपी को इस ऊंचाई तक ले जाने  वाले पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह और गोपाल भार्गव का  फोटो ना लगे तो दोनों का नाराज होना स्वाभाविक है इतना ही नहीं आमंत्रण कार्ड में भी दोनों के नाम नहीं छपवाए गए हालाँकि रातों रात शहर में  नए पोस्टर लगाए गएजिसमें दोनों की फोटो लगाई गई |   जिसका असर गौरव दिवस कार्यक्रम में सी एम् मोहन यादव पुष्कर धामी ,और विधान सभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर की उपस्थिति में दिखा |   

पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह ने अपनी  नाराजगी मंच से ही जाता दी जब मंच पर अतिथियों का स्वागत किया जा रहा था तब भूपेंद्र के स्वागत के लिए  जो गुलदस्ता भेंट किया गया उन्होंने उसको लेने से एक तरह से इंकार कर दिया पहली बार तो उन्होंने इसे बगल में बैठे देवरी विधायक गुड्डा पटेरिया (ब्रज बिहारी पटेरिया )  को दिला दियादूसरी बार भी लेने से इंकार कर दिया तीसरी बार में जब उन्होंने गुलदस्ता  लिया तो सी एम् मोहन यादव को भेंट कर दिया |  

 भूपेंद्र सिंह की तल्खी उनके  भाषण के दौरान भी दिखी भाषण के दौरान भूपेंद्र सिंह ने सभी अतिथियों के  नाम लिए , लेकिन गोविंद सिंह का नाम नहीं लिया। यहाँ तक कि  उन्होंने गोविंद सिंह की बजाय विधायक शैलेंद्र जैन को कार्यक्रम का आयोजक बता दिया । उन्होंने कहा कि ये मत देखो कि मेरी फोटो लगी है या नहींफोटो लगे या ना लगेलेकिन उनका पूरा जीवन सागर और बुंदेलखंड के  विकास के लिए समर्पित रहा है और रहेगा उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधा और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के कार्यों की प्रशंसा भी की जिनके कार्यकाल में सागर का चौमुखी विकास हुआ |  

                                                              ९ बार के विधायक  पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव  मंच पर इस मामले में संतुलित नजर आये उन्होंने सभी के नाम लिए और सागर सहित देश प्रदेश में विकास के लिए बीजेपी सरकार के योगदान को बताने से नहीं  चूके  | हालंकि वे फोटो के मसले पर पहले  पर पहले ही मीडिया से बात कर चुके थे |  मीडिया से चर्चा में उन्होंने  कहा 'फोटो से अगर कोई नेता बना होता तो जयप्रकाश नारायण की कभी फोटो नहीं लगीलेकिन फिर भी वह लोकनायक कहलाते हैंकेवल फोटो लगाने से कुछ नहीं होता है. अगर आदमी दुनिया में याद किया जाए तो अपने कामों से याद किया जाएक्योंकि फोटो से कोई याद नहीं किया जाता है. अपनी मजबूत राजनैतिक छवि के लिए जाने जाने वाले गोपाल भार्गव का यह बयान एक बड़ा राजनैतिक सन्देश माना जा रहा है. 

                                 सागर जिला मोहन सरकार के कार्यकाल में राजनैतिक गुटबाजी का केंद्र क्यों बना है. इसको लेकर लोगों के अलग अलग मत हैं. ऐसा भी नहीं है कि राजनैतिक महत्वाकांक्षा के कारण पहले यहां मनमुटाव  बीजेपी नेताओं और मंत्रियों में देखने को नहीं मिला पहले भी यह सब होता था पर वह अपनी शालीनता की हद में कोई किसी को सार्वजनिक तौर पर किसी को नीचा दिखाने का प्रयास नहीं करता था किसी ने क्या खूब बात कही है कि जब दल का सांस्कृतिक आदान प्रदान होता है तो संस्कृति और उस कार्य पद्धति का असर तो देखने को मिलता ही है 

सवाल यही खड़ा होता है कि किसके इसारे पर सागर में यह गुटबाजी हो रही है और कौन इसको हवा दे रहा है ऐसा भी नहीं कि इसकी जानकारी सी एम् मोहन यादव और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वी. डी . शर्मा को ना हो जानकारी दोनों को है पर दोनों ही इस मामले को  लेकर  अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा पाए 

 सागर में चल रही पार्टी की गुटबाजी को लेकर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वी. डी. शर्मा का कहना है कि  हमारा संगठन है दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक दल है पंच सरपंच से लेकर कहां तक भाजपा नेतृत्व कर रही है और मनुष्य है कोई कभी कोई बात हो जाती है लेकिन बीजेपी में मैं आपके को विश्वास के साथ कहना चाहता हूं अपनी हमारी पद्धति है इस पद्धति में हमारी सारी समस्याओं का समाधान हम निकाल लेते हैं जहां तक और हम लोग अपने सिस्टम में सक्षम है और इन सारी चीजों का हम समाधान कर लेंगे |

यह कोई पहला मामला नहीं जब राजनैतिक विरोधाभास सार्वजनिक  तौर  पर बुंदेलखंड के लोगों को देखने को मिला हो इसके पहले भी  , सागर इन्वेस्टर सम्मिट में जिला योजना समिति की बैठक में गोविन्द सिंह द्वारा आयोजित कार्यक्रम में दिवाली आयोजन में  जैसे अनेक कार्यक्रमों में देखने को मिला इसका सीधा असर किस पर पड़ेगा यह सब जानते हैं दूसरी तरफ कांग्रेस है जो यह सब तमाशा देख कर प्रसन्न है कि जिनके कारण पहले कांग्रेस में गुटबाजी के कारण कांग्रेस कमजोर हुई थी अब वह बीजेपी की शोभा बड़ा रहे हैं |   

 


20 दिसंबर, 2024

ken betwa_ उमा भारती और केन बेतवा लिंक परियोजना :: उमा भारती के प्रयासों की अनदेखी

 उमा भारती और  केन बेतवा लिंक परियोजना 

                                                             उमा भारती के प्रयासों की अनदेखी 


रवीन्द्र व्यास 

 बुंदेलखंड  उमा भारती फरवरी 2022 में  छतरपुर जिले के गंज के हनुमान  मंदिर में  प्रसाद चढ़ाती  हैंहनुमान भक्त उमा भारती  ने इसी मंदिर में रेलवे लाइन की तरह ,केन बेतवा लिंक परियोजना की भी  मन्नत मांगी थी ।असल में उमा भारती का मानना है कि बुंदेलखंड के विकास के लिए परिवहन और पानी ऐसी आवश्यकता है जिसके बाद ,बुंदेलखंड विकास की रफ़्तार पकड़ लेगा  दिसंबर  २०२1 में  केन बेतवा लिंक परियोजना से सारे अवरोध हट गए थे  और केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 44605 करोड़ के लागत वाली इस परियोजना को स्वीकृति दे दी थी इसके बाद केन बेतवा के कार्यों की प्रारम्भिक शुरुआत भी हो गई थी , | जिस पर  बुंदेलखंड के लोगों को वर्ष   की प्रतीक्षा क्यों कराई गई इसके पीछे के सियासत की एक अलग कहानी है

फायल फोटो 

 

अटल जी की  जन्म शताब्दी  पर  केन बेतवा लिंक परियोजना की आधारशिला  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रखेंगे | दिसंबर २०२१ में जब इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिली उमा भारती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया | यह बाँध छतरपुर जिले के बिजावर विधानसभा क्षेत्र के ढोंडण गाँव में बनना है | यह स्थान पन्ना टाइगर रिजर्व में आता है |  

 

 

छतरपुर जिले के गंज गाँव के उस हनुमान मंदिर में फरवरी २०२२ में  पहुंची जहाँ उमा भारती ने इस परियोजना के लिए मन्नत मांगी थी उमा भारती ने  इस दौरान  कहा कि बुंदेलखंड से हर वर्ष 10-12  लाख लोग  रोजगार की तलाश में पलायन करते  हैं। उन्होंने इसे बुंदेलखंड की बड़ी समस्या बताते हुए  कहा कि कोई व्यक्ति और  मजदूर अपनी जन्मभूमि छोड़कर नहीं जाना चाहता है |बुंदेलखंड में पलायन  एक बड़ा मामला है , पलायन के पीछे अपने कुछ कारण भी हैं उन्होंने  भरोषा जताया था कि केन बेतवा लिंक परियोजना बनने के बाद पलायन भी रुकेगा |  


 ललितपुर सिंगरौली रेलवे लाइन के शिलान्यास कार्यक्रम का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया था  कि , उस समय अटल जी की सरकार थी और में केंद्र में मंत्री थी | सभी तैयारियां हो चुकी थी  ललितपुर सिंगरोली रेलवे लाइन के शिलान्यास की तभी चुनाव आचार संहिता लग गई | किसी तरह अनुमति लेकर  शिलान्यास खजुराहो में अटलजी ने किया | जब जाने लगे तो वो हमें साथ ले जाना चाहते थे , किन्तु हमने रुकने की उनसे अनुमति ले ली | हम खजुराहो से यहाँ इसी मंदिर तक खुली जिप्सी खुद चलाकर आये  और  मनौती पूर्ण होने पर यहां प्रसाद चढ़ाया | हजारों कार्यकर्ता हमारे साथ आये थे

 यहाँ ये दिलचस्प है कि  ललितपुर सिंगरौली रेलवे लाइन का जब  उद्घाटन हुआ , तब उमा भारती  बीजेपी से बाहर थी , और केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी  , उस समय कांग्रेस वालों ने उमा भारती का  नाम तक  नहीं लिया था | अब   केन बेतवा का जब शिलान्यास होगा तब  उमा भारती  सांसद भी नहीं हैं  , ऐसे में  प्रोटो काल का प्रॉब्लम आएगा , फिर भी उमा भारती खुश हैं की  केन बेतवा  गई | 



जिस समय उमा भारती  गंज के हनुमान मंदिर में मनौती का प्रसाद और भंडारा कर रही थी उस दौरान यहाँ  स्थानीय ग्रामीण के अलावा जिले के तत्कालीन  प्रभारी मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा ,बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा ,और विधायक गण भी मौजूद  रहे  |  


  

 बुंदेलखंड से लेकर देश प्रदेश में बीजेपी का ध्वज फहराने वाली  उमा भारती  इन दिनों राजनैतिक  अछूत हो गई हैं | बीजेपी उनके किये गए कार्यों का श्रेय और सम्मान देने में भी परहेज करने लगी है जिस उमा भारती  के योगदान से  आज केन बेतवा लिंक परियोजना शिलान्यास  तक पहुंची उसे ही उनकी पार्टी और उनकी ही सरकार के लोगों ने दरकिनार कर दिया

 

  नदियों को आपस में  जोड़ने का जो सपना अटल जी ने देखा था उसे धरातल पर उतारने का कार्य मोदी जी कर रहे हैं। बुंदेलखंड की तस्वीर बदलने वाली इस परियोजना को गति देने और आने वाले अवरोधों को दूर करने में उमा भारती के योगदान को नहीं भुलाया जा सकता है।  मोदी सरकार में  जल संसाधन मंत्री बनने के साथ ही उन्होंने केन बेतवा लिंक परियोजना को गति देने का कार्य शुरू कर दिया। दोनों राज्यों के सी एम (एम पी,यू पी) के बीच जल बंटवारे को लेकर सहमति बनवाई। फिर मामला चाहे  पन्ना टाइगर रिजर्व  की वन भूमि ,का हो अथवा विस्थापित होने वाले ग्रामीणों हर मामले पर वे सक्रिय रही। वे ऐसी केंद्रीय मंत्री थी जिन्होंने  डोडन बांध के प्रस्तावित स्थल का मौके पर जाकर निरीक्षण किया।


        

गंगऊ बाँध 

दरअसल उमा भारती जब केन बेतवा लिंक परियोजना पर कार्य कर रही थी उस समय वे एम् पी के शिवराज सरकार के अधिकारियों के कारण परेशान रही | उन्हें इस बात की जानकारी मिल गई थी कि एम् पी सरकार में पदस्थ दो आई ए एस अधिकारी   इस प्रोजेक्ट पर अड़ंगा डालने का कार्य कर रहे  है | प्रधान मंत्री से जुडी इस महत्त्व पूर्ण योजना पर अवरोध उत्पन्न करने का साहस किसके इसारे पर कर रहा है , इसका खुलासा भी काफी समय बाद हुआ | खुलासा  भले ही विलम्ब से हुआ पर एक अधिकारी की बदनीयती के कारण योजना की लागत कई गुना बढ़ गई

                  

 केन बेतवा लिंक परियोजना देश दुनिया के लिए एक मॉडल योजना भी थी , उमा भारती  ने पीएम मोदी जी के निर्देश पर इसमें आ रही  रुकावटों का निपटारा कर 2017 में ही इस परियोजना को शिलान्यास की स्थिति में ला दिया था | स्वयं प्रधान मंत्री भी 2017 के अंत में इसका शिलान्यास करना चाहते थे | किन्तु एमपी सरकार की इसमें कुछ आपत्तियां  लगा दी  थी | बाद में चुनाव आ गए जिसके कारण योजना फिर ठन्डे बस्ते में पहुंच गई



              असल में उमा भारती का मानना है कि बुंदेलखंड में पानी और परिवहन की व्यवस्था हो जाए तो यह इलाका भी समृद्धि की ओर अग्रसर हो जाएगा । इसी के चलते उन्होंने दशकों पुरानी ललितपुर सिंगरौली रेलवे लाइन का सपना साकार किया । जिसका शिलान्यास भी अटल बिहारी वाजपेई ने किया था। मतलब अटल जी के शासन काल में बुंदेलखंड के विकास  की दो बड़ी नींव रखी गई थी।राजनीति  में भले ही उमा भारती  बीजेपी के लिए  अनुपयोगी  हो गई हो पर उनके बुंदेलखंड के लिए किये गए कार्यों को अनदेखा नहीं करना चाहिए

15 दिसंबर, 2024

Ken_Betwa_केन बेतवा लिंक परियोजना :बुंदेलखंड में जल और सिंचाई का होगा स्थायी समाधान

 Ken_Betwaकेन बेतवा लिंक परियोजना 

 गगउ बाँध इसके २किम ऊपर बनेगाढोडन बाँध  


बुंदेलखंड में जल और सिंचाई का होगा स्थायी समाधान 


रवीन्द्र व्यास 


 बुंदेलखंड की तकदीर और तस्वीर  बदलने वाली है  केन -बेतवा लिंकपरियोजना।  अटल जी के प्रधानमंत्रित्व काल  में  जब देश की 37  नदियों को आपस में जोड़ने का फैसला लिया गया ,उनमे से एक यह भी थी |  यह देश की वह परियोजना है जिसे सबसे पहले शुरू होना था |  इसका   मुख्य बाँध पन्ना टाइगर रिजर्व  के  ढोडन  गाँव में बनना हैअब देश की नदियों को आपस में जोड़कर जल संसाधन बढ़ाने का सपना देखने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी 25 दिसंबर को मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में महत्वाकांक्षी केन-बेतवा राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना की आधारशिला रखेंगे। इस परियोजना से सिंचाई का स्थाई समाधान तो हो गए साथ ही लाखों लोगों की पीने के पानी की समस्या का भी समाधान होगा |   



इस परियोजना का निर्माण दो चरणों में 8 वर्ष में पूर्ण होगा |   केन  बेतवा  परियोजना से राज्य के छतरपुरपन्ना,टीकमगढ़निवाड़ीदमोह,शिवपुरीदतियारायसेन,विदिशा और सागर जिलों को  और उत्तर प्रदेश के बांदामहोबा,झांसीललितपुर जिले को लाभ होगा । इन जिलों के किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधाएं मिलने से उनकी फसलों की उत्पादकता में वृद्धि होगी और खेती के लिए जल संकट का समाधान होगा।मध्यप्रदेश (8.11 लाख हेक्टेयर) और उत्तर प्रदेश (2.51 लाख हेक्टेयर) में फैले बुंदेलखंड क्षेत्र में 10.62 लाख हेक्टेयर में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराएगाइसके अलावा मध्य प्रदेश में 41 लाख और उत्तर प्रदेश में 21 लाख लोगों को पीने के पानी की समस्या का समाधान होगा 


कहाँ बनेगा बाँध  


  बिजावर विधानसभा क्षेत्र के ढोंडन गाँव में बनेगा ,यह एरिया पन्ना टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आता है इसमें  लगभग ९ हजार हेक्टेयर वन भूमि डूबेगी |  पहले चरण  में केन नदी पर 77 मीटर ऊंचा (288 x 536 मीटर ) एक बांध गंगऊ वियर से लगभग 2.5 किमी  दूरी पर केन नदी पर  बनेगा ढोंडण बाँध । जल संसाधन से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि ढोढन बाँध तक प्रति वर्ष ६५९० एमसीएम पानी आएगा जिसमे से  एम् पी  2350 एमसीएम (83 टीएमसी) का और  उत्तर प्रदेश  1700 एमसीएम (60 टीएमसी) का उपयोग करेगा।  2035एमसीएम शेष जल में से 436 एमसीएम का उपयोग  पन्ना और दमोह जिलों के जलाशय से सीधे प्रस्तावित सालेहा लिफ्ट सिंचाई योजना केलिए किया जाना प्रस्तावित है।   बिजली उत्पादन के लिए दो पावर हाउसएक बांध के निचले स्तर में और दूसरा निचले स्तर की सुरंग के आउटलेट पर भी प्रस्तावित है।जिससे 103 मेगावाट जल विद्युत और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन  होने की उम्मीद जताई गई  है। बिजली उत्पादन का एक हिस्सा परियोजना में सूक्ष्म सिंचाई विकसित करने के लिए उपयोग किया जाएगा। लिंक नहर की कुल लंबाई 221 किलोमीटर  होगी जिसमें 2 किलोमीटर सुरंग भी शामिल है   इस नहर के माध्यम से झाँसी  जिले के बरुआ सागर के परीक्षा डेम में पानी छोड़ा जाएगा |  


छतरपुर  पन्ना जिले के प्रभावित गाँव 


इस परियोजना के कारण  छतरपुर जिले के 14 गांव और पन्ना जिले  11  गांव  विस्थापित होंगे । इनमें छतरपुर जिले के  भरकुआं,ढोढन खरियानीकुपीमैनारी,  पलकोंहाशाहपुरासुकवाहा,पाठापुरनैगुवांडुंगरिया,कदवाराघुघरीबसुधा  विस्थापित होंगे । इन  विस्थापित गाँव के लोगों  को भैंसखार,राइपुरानंदगांयबट्टन और किशनगढ़ में बसाया जाएगा। इन चारों स्थानों पर जमीन को चिन्हित कर लिया गया है। पत्रा जिले के   गहदराकटहरी बिलहटामझौली,कोनी और डोंडी खमरीकूडऩऔर मरहा  ललाररमपुराजरधोबा और कंडवाहा गांवों  विस्थापित किया जाना है |पन्ना जिले के ये सभी गाँव पन्ना टाइगर रिजर्व में बसे हैं इनके विस्थापन के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व को भूमि भी दे दी गई है 

 पन्ना और छतरपुर जिला प्रशासन के माध्यम से 5  हजार हेक्टेयर जमीन पन्ना टाइगर रिजर्व (पी टी आर) को सौंप दी है। इसमें से 4400 हेक्टेयर छतरपुर जिले में और 600 हेक्टेयर पन्ना जिले में सौंपी गईहै। विस्थापन से खाली होने वाली 1300 हेक्टेयर  जमीन भी पी टीआर को  दी जाएगी।


 केन की अविरल धारा  


 केन नदी म.प्र. के कटनी जिले की  कैमूर की पहाड़ी से निकलती है और 427 किमी की दूरी तय करने के बाद उ.प्र. के बांदा जिले  में यमुना नदी से मिल जाती है। केन एशिया की ऐसी प्रमुख नदी है जो प्रदूषण से मुक्त मानी जाती है |    म.प्र.के  रायसेन जिले से निकलने वाली बेतवा नदी  590 किमी की दूरी तय कर  उ.प्र.के हमीरपुर जिले में यमुना से मिल जाती है।  केन का 28,058 वर्ग किमी और  बेतवा का  46,580  वर्ग किमी का भराव क्षेत्र   है|  केन की कई सहायक नदियों पर कई बाँध और और स्टाप डेम बनने से भी केन की जल धारा प्रभावित हुई है |



केन बेतवा लिंक परियोजना बुंदेलखंड में शुरू होना है इसका इंतजार बुंदेलखंड वासी २००५ _०६ से कर रहे हैं | इस परियोजना के निर्माण में अनेकों तरह की बाधाएं भी आई | मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा , अनेकों सामाजिक संगठन इसके विरोध में मैदान में उतरे थे | अवरोधों का सबसे बड़ा असर ये हुआ की परियोजना की लागत ८ गुना बढ़ गई | निर्माण कार्य शुरू होने के बाद भी दो चरणों में पूर्ण होने वाली इस योजना के पूर्ण होने में ८ वर्ष का समय लगेगा | परियोजना के लिए अनेकों अवरोधों के बाद अब जमीनी धरातल पर कार्य शुरू होगा | इसके पीछे भी  प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ इक्षा शक्ति मानी जा रही है | 


               

11 दिसंबर, 2024

Kark Rekha _बुंदेलखंड में कर्क रेखा

 बुंदेलखंड में कर्क रेखा


रवीन्द्र व्यास 

वैसे तो  कर्क रेखा तीन महाद्वीपों ,16 देशों, और 6  जल निकायों से होकर गुजरती है। यह रेखा मध्य प्रदेश के  14 जिलों से होकर निकलती है | हाल ही में  भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ब्यूरो ( ए एस आई ) ने दमोह जिले में सर्वे किया था , और इस बात की पुष्टि की है कि  कर्क रेखा जिले के दो स्थानों से गुजरती है | हालांकि यह एक काल्पनिक रेखा होती है जिसे देखा नहीं जा सकता पर इसका एहसास जरूर किया जा सकता है |वैसे भी  दमोह जिला अपने समृद्ध पुरातात्विक और ऐतिहासिक धरोहर के लिए जाना जाता है | यहाँ मिलते शिलालेख और पुरा सम्पदा इसकी गवाही देते हैं | 

बुंदेलखंड के  दमोह जिले से कर्क रेखा  गुजरती है इसके लिए जिला प्रशासन ने भारत सरकार के  एएसआई को सर्वेक्षण करने हेतु  लिए पत्र लिखा | प्रशासन की इस पहल के बाद जब  एएसआई ने  सर्वे किया तो  जिले के तेंदूखेड़ा विकासखंड के   पिंडरई और बगदरी  गांव में कर्क रेखा के गुजरने की पुष्टि हुई |  . अब इन दोनों जगहों को कर्क रेखा के प्वाइंट के रूप में विकसित किया जाएगा. दोनों स्थानों को चिन्हित कर लिया गया है.

 कहाँ कहाँ से गुजरती है कर्क रेखा
  मध्य प्रदेश के  रतलाम, उज्जैन, आगर , राजगढ़, सीहोर, भोपाल, विदिशा, रायसेन, सागर, दमोह, कटनी, जबलपुर, उमरिया और शहडोल से होकर यह कर्क रेखा गुजरती है ।भारत में  गुजरात, राजस्थान , मध्य प्रदेश , छत्तीसगढ़ , झारखंड , पश्चिम बंगाल , त्रिपुरा  और मिजोरम जैसे राज्यों से हो कर कर्क रेखा  गुजरती है |  मेक्सिको, लीबिया, बहामास, भारत, ओमान, माली, चीन, संयुक्त अरब अमीरात, चीन, सऊदी अरब, मिस्र, पश्चिमी सहारा, अल्जीरिया सहित 17  ऐसे देश हैं जो कर्क रेखा पर आते हैं.|  
  कर्क रेखा का प्रभाव 

 जून माह में  सूर्य की स्थिति मकर रेखा से कर्क रेखा की ओर बढ़ने को उत्तरायण एवं कर्क रेखा से मकर रेखा को वापसी को दक्षिणायन कहते हैं। इस प्रकार वर्ष ६-६ माह के में दो आयन होते हैं।ग्लोब पर पश्चिम से पूर्व की ओर खींची गई इस  काल्पनिक रेखा  की स्थिति स्थायी नहीं मानी जाती है , समय के साथ इसमें थोड़ा बहुत परिवर्तन  होता रहता है। २१ जून को  सूर्य इस रेखा के एकदम ऊपर होता है |  वह दिन सबसे लंबा व रात सबसे छोटी होती है।  इस दिन सबसे अधिक गर्मी होती है |  सूर्य की किरणें यहां एकदम लंबवत पड़ती हैं। इस समय कर्क रेखा पर स्थित क्षेत्रों में परछाई  छिप जाती है या कहें कि नहीं बनती है। 
भारत में उत्तर से दक्षिण तक कर्क रेखा की अधिकतम लंबाई 3214 किमी और पूर्व से पश्चिम तक अधिकतम चौड़ाई 2933 किमी है. कर्क रेखा की लंबाई राजस्थान में सबसे कम और मध्य प्रदेश में सबसे अधिक है | 
 कर्क रेखा के  स्थान को  काल-गणना के लिए एकदम सटीक माना जाता है। इसे  खगोल-शास्त्र के अध्ययन के लिए है सबसे उचित स्थान माना जाता है ।भारत में उज्जैन से कर्क रेखा  निकलने के कारण ही जयपुर के महाराजा जयसिंह द्वितीय ने यहां वेधशाला बनवाई थी ।

मंदिर की खुदाई में मिले  चांदी के सिक्के




दमोह  जिले का एक गांव है  सादपुर, यहाँ जैन मंदिर के निर्माण के लिए खुदाई की जा रही थी | खुदाई के दौरान यहाँ  चांदी के सिक्के निकले । जैसे ही इसकी खबर लोगोनो को लगी लोग सिक्के बटोरने में जुट गए || जब तक इसकी जानकारी बटियागढ़ थाना पुलिस और मंदिर निर्माण कमेटी को लगती तब तक कई लोग सिक्कों को लेकर चम्पत हो गए | पुलिस और कमिटी को मौके पर कुछ बिखरे हुए सिक्के जरूर मिल गए |  इन सिक्कों पर जॉर्ज पंचम की चित्र और निर्माण काल   1907 से 1916 के मध्य का बताया गया है |पुलिस  मामले की जांच कर रही है और लोगों से  अपील कर रही है  कि जिन्हे भी ये ब्रिटिश कालीन सिक्के मिले हैं वे तत्काल जमा कराये , अन्यथा वैधानिक कार्यवाही की जायेगी | 
                              दरअसल दमोह जिला पुरातात्विक धरोहर का एक बड़ा केंद्र है | यहां कोई पहली बार इस तरह के सिक्के नहीं मिले हैं , इसके पहले भी यहाँ लोगों को इस तरह का खजान मिल चुका है | कई बार यहां लोग गुनिया और तांत्रिकों के सहयोग से प्राचीन स्थलों पर खुदाई करते रहते हैं | जिसके चलते कई ऐतिहासिक स्थल नष्ट भी हुए हैं |

 दस माह पहले भी  दमोह जिले के हटा जनपद क्षेत्र में मादो  गांव से एक  सड़क बनाई जा रही थी । सड़क निर्माण  के लिए  सुदामा लोधी के खेत से मिट्टी खोदी जा रही थी।  खुदाई के दौरान सड़क पर तांबे के सिक्के पाए गए। खुदाई के दौरान मिले सिक्के ग्रामीण अपने साथ ले गए। जिनमें कुछ सिक्कों पर अरबी भाषा में लिखा था तो कुछ पर स्वास्तिक और त्रिशूल के चिन्ह पाए गए।ये सिक्के मुगल काल और गोंडवाना शासन काल के माने गए।
 
 दमोह जिले के सकौर में स्कंदगुप्त काल के चांदी के सिक्के मिले थे। 

   तेन्दूखेड़ा ब्लाॅक के बोरिया गांव और समनापुर में बड़ी संख्या में काले, पीले मोती के साथ ही महिलाओं के पहने जाने वाले गहने मिले थे ।

दमोह के कोतवाली क्षेत्र में  हल्ले अहिरवार को   मकान की खुदाई के दौरान  ब्रिटिश कालीन 240 चांदी के  सिक्के मिले |  हल्ले इन  सिक्कों को छिपाकर  अपने घर ले आया था | सिक्कों के साथ यह  युवा मजदूर रात भर  सो नहीं सका। अगली सुबह स्थानीय पुलिस स्टेशन में जाकर पुलिस को वो खजाना सौंप दिया। पुलिस ने दिहाड़ी मजदूर हल्ले अहिरवार की इस ईमानदारी भरे कदम की जमकर तारीफ भी की। जिस इलाके से यह सिक्के निकले वहां मराठा लोग रहा करते थे | 

पाषाण युग और  दमोह  

दमोह के सिंग्रामपुर में  पौराणिक काल के पाषाण हथियार मिले थे । पाषाण हथियार इस बात की पुष्टि करते हैं कि यहां  मानव सभ्यता पाषाण युग से ही थी । 5 वीं सदी के मिले  शिलालेख, सिक्के,  मंदिर व अन्य सामग्री यह बताती है कि  यह इलाका   गुप्त साम्राज्य का हिस्सा था।  8 वीं शाताब्दी से 12 वीं शताब्दी के मध्य दमोह जिले का कुछ भाग चेदी साम्राज्य के अंतर्गत आता था। जिसमें कलचुरी राजाओं का शासन था और उनकी राजधानी त्रिपुरी थी । कलचुरी शासकों के स्थापत्य कला का  नोहटा का नोहलेश्वर मंदिर। ऐतिहासिक साक्ष्यों से पता चलता है कि दमोह जिले के कुछ क्षेत्र पर चंदेल का शासन था जिसे जैजाक मुक्ति कहा जाता था। 14 वीं शताब्दी में दमोह में मुगलो का आधिपत्य शासन रहा |   सलैया तथा बटियागढ़ में पाए जाने वाले पाषाण शिलालेखो में खिलजी और तुगलक वंश के शासन का उल्लेख है। बाद में मालवा के सुल्तान ने यहां शासन किया। 15 वीं शताब्दी के आखिरी दशक में गौड़ वंश के शासक संग्राम सिंह ने इसे अपने शक्तिशाली एवं बहुआयामी साम्राज्य में शामिल किया जिसमें 52 किले थे। यह समय क्षेत्र के लिए शांति और समृद्धि का था।

सिंग्रामपुर में रानी दुर्गावती मुगल साम्राज्य के प्रतिनिधि सेनापति आसफ खान, की सेना से साहस पूर्ण युद्ध करते हुए वीरगती को प्राप्त हुई। अपने साम्राज्य की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए उनके संकल्प समर्पण और साहस की बराबरी विश्व इतिहास में नहीं होगी। क्षेत्र में बुंदेलो ने कुछ समय के लिए यहाँ राज्य किया इसके बाद मराठों ने राज्य किया। सन् 1888 में पेशवा की मृत्यु के बाद अंग्रेजों ने मराठों के शासन पर कब्जा किया ।

08 दिसंबर, 2024

Raja Bundela_ खजुराहो राजा बुंदेला के लाखों के लेने देन की जांच करेगी पुलिस पीड़ित ने कहा था सीएम के सामने करूंगा आत्म हत्या

 खजुराहो  राजा बुंदेला के लाखों के लेने देन की जांच करेगी पुलिस 

पीड़ित ने कहा था सीएम के सामने करूंगा आत्म हत्या

रवीन्द्र व्यास 

खजुराहो, में इन दिनों अंतर्राष्ट्रीय खजुराहो फिल्म फेस्टिवल चल रहा है।इसके मुखिया राजा बुंदेला पैसों की देनदारी को लेकर  विवादों में घिर गए हैं। उन पर खजुराहो के ही एक टूर्स एंड ट्रेवल्स के मालिक ने 32 _33 लाख रुपए हड़पने का आरोप लगाया है। हालातों से मजबूर हो कर उसने आत्म हत्या की भी धमकी दे दी है। पुलिस ने मामले को जांच में लिया है।

खजुराहो फिल्म महोत्सव आयोजक एवं प्रयास प्रोडक्शन के  संस्थापक हैं राजा बुंदेला । सिनेमा जगत से राजनीति में आए ,पृथक बुंदेलखंड की आवाज बुलंद की ,फिर धीरे से हवा के साथ चलने लगे। जिसका लाभ भी उन्हें मिला और एम पी सरकार ने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय खजुराहो फिल्म फेस्टिवल करने की जिम्मेदारी सौंप दी। 

नियत अच्छी हो तो परिणाम भी अच्छे मिलते हैं । पर यहां ना नीति अच्छी थी और ना ही नियत लोगों को अच्छी दिखी। यही कारण है कि 10 वा फिल्म फेस्टिवल होने के बावजूद खजुराहो और बुंदेलखंड में कोई बड़ा परिवर्तन दिखाई नहीं दिया। 

ये अलग बात सामने आई कि यहां के साकेत गुप्ता के 32 लाख से ज्यादा की रकम का गोलमाल सामने आ गया। लोगों का तो यह भी दावा है कि वह अकेले नहीं हैं जिनका पैसा राजा बुंदेला ने नहीं दिया इस तरह के और भी कई लोग इस तरह की समस्या से जूझ रहे हैं।

राधिका  टूर्स एंड ट्रेवल्स कंपनी के मालिक साकेत गुप्ता ने32लाख 37हजार 135 रु मांगने पर राजा बुंदेला द्वारा नहीं देने एवं टालमटोल करने सहित धमकी देने के विरुद्ध कार्यवाही करने का एक आवेदन खजुराहो थाना में दिया है ।शिकायती पत्र की  कॉपी  डीजीपी भोपाल ,आईजी सागर, एसपी छतरपुर और एसडीओपी खजुराहो को भी भेजी है 
 
साकेत गुप्ता ने बताया कि वह राधिका टूर्स एंड ट्रेवल्स खजुराहो का प्रोपराइटर है हमें राजा बुंदेला से 32 _33 लख रुपए मिलना हैl यह 2017 से पेंडिंग है हर बार कहते हैं देंगे मना करते नहीं और देते हैं नहीं 2017 से अब तक का सारा डिटेल भी उन्हें दिया है वह कहते हैं देना है दे नहीं रहे हैं मजबूरी हमें हमें थाना आना पड़ा और शिकायत करना पड़ी वह हमें धमकी भी दे रहे हैं कि इससे सुधरवा देंगे उस सुधरवा देंगे  उल्टा धमकी दे रहे हैं ।उन्होंने बताया कि हमने इनको ट्रेन, फ्लाइट के लिए  बराबर गाडी प्रोवाइड कराई और इनको बराबर साल भर से फॉलो अप कर रहे हैं मेल किया व्हाट्सएप किया स्पीड पोस्ट किया इसकी रिकॉर्डिंग भी है पर इन्होंने किसी का कोई जवाब नहीं दिया अभी  जब इनसे बात हुई तो कहने लगे 13 को बैठकर बात करेंगे हमने कहा जो करना है अभी करो क्योंकि हमें पता है कि 13 को फिल्म फेस्टिवल खत्म होते ही यह चले जाएंगे खजुराहो के ऐसे कई लोग हैं फंसे हुए हैं बड़े लोग तीन चार लोग हैं छोटे बहुत सारे लोग हैं जिनका पैसा इनके पास पेंडिंग पड़ा है 

खजुराहो फिल्म फेस्टिवल में रोजगार मिलने के सवाल पर उनका कहना था यहां के लोगों को कोई रोजगार नहीं मिला है जब से यह फिल्म फेस्टिवल कर रहे हैं तब से बताओ कौन सी शूटिंग खजुराहो में आ गई है ।वो कहते हैं की फिल्म फेस्टिवल से हमें फायदा नहीं होता जबकि उनके खास लोग बताते हैं की फिल्म फेस्टिवल से अच्छा खासा पैसा कमाते हैं और लोकल लोगों को देते नहीं है वेंडर परेशान होते हैं।

अगर वो हमारा पैसा नहीं देते हैं तो हम 11 तारीख को मुख्यमंत्री आने वाले हैं उनको अपना आवेदन देंगे सारा मैटर बताएंगे और वहीं पर आत्महत्या करेंगे। क्योंकि हमें भी लोगों का पैसा देना है लोग हमको परेशान कर रहे हैं हमारा ऑफिस भी बंद हो गया है लड़के जो लगे थे वह भी चले गए हैं मैं मानसिक रूप से बहुत परेशान हूं
  
इस मामले में फिल्म फेस्टिवल के आयोजक राजा बुंदेला ने मीडिया को बताया मेरी अकाउंटेंट की टीम उनसे संपर्क करेगी। मुझे इनके पैसे देना है, पर कितना देना है। इसका आकलन करने के बाद ही बता पाऊंगा, अगर वे कहेंगे कि आज ही पैसे दे दो तो मैं कहा से दे दूं। यह मेरा नहीं, संस्कृति विभाग और केंद्र सरकार का भी कार्यक्रम है। इसका जो भी पैसा आता है, वह सीधे वेंडर के अकाउंट में जाता है। इसमें मेरा कोई लेना-देना नहीं होता, अगर मेरे कार्यक्रम में व्यवधान होगा तो उसकी जवाबदेही सरकार की होगी। मैंने साकेत से बोला था कि फेस्टिवल के बाद 13 दिसंबर को बैठक कर हिसाब साफ कर लेंगे, लेकिन वह आज के लिए ही जिद कर रहा है।

 छतरपुर एस पी अगम जैन ने बताया कि एक आवेदन पत्र प्राप्त हुआ है और उसमें कुछ पैसे के भुगतान संबंधी शिकायत की गई है जिसे लेकर खजुराहो थाना प्रभारी को बताया गया है कि इसमें पूरी जांच करें और इसमें विधिवत कार्रवाई की जाएगी, जो आवेदन है उसमें लगभग 32 लख रुपए की राशि का जिक्र किया गया है ,जो राजा बुंदेला है उनके विरुद्ध ये शिकायत प्राप्त हुई है।

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