प्रभु श्री राम का बुन्देलखण्ड से नाता रवीन्द्र व्यास
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का जितना नाता अयोध्या से माना जाता है ,उतना ही नाता उनका बुंदेलखंड से भी माना जाता है । बुंदेलखंड की पावन धरा चित्रकूट में उन्होंने अपना वनवास काल बिताया । दैत्यों के संहार के लिए पन्ना के सारंग धाम में उन्होंने दैत्यों के सर्वनाश के लिए धनुष उठाया ।। पन्ना के सलेहा से दस किमी दूर अगस्त्य ऋषि आश्रम हैं , उनसे मिलने स्वयं श्री राम गए । वहां उन्हें अगस्त ऋषि ने दिव्यास्त्र और धनुष बाण भेंट किया था | बुंदेलखंडके ही गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस लिख कर भक्ति की गंगा दुनिया भर में प्रवाहित कर दी । 448 वर्ष पूर्व रामलला अयोध्या से ओरछा आ गए | कहते तो ये भी हैं कि रामलला अपना दिन बुंदेलखंड के ओरछा में बिताते हैं | सोमवार को जब अयोध्या के देवालय में प्रभु श्री राम की प्राणप्रतिष्ठा होगी उस समय बुंदेलखंड की अयोध्या ओरछा में भव्य और दिव्य कार्यक्रम सीएम की उपस्थिति में होंगे।
२२ जनवरी 2024 को अयोध्या के दिव्य राम देवालय में जब प्रभु श्री राम के दर्शनों का सौभाग्य सनातन धर्मावलंबियों को मिलने लगेगा | इसके साथ ही सनातनियों की 496 वर्ष की अभिलाषा पूर्ण होगी जिसके लिए लाखों सनातनियों ने बलिदान दिया है | असल में अयोध्या में 496 वर्ष पूर्व प्रभु श्री राम जन्म भूमि पर सनातन धर्म की आस्था के विशाल देवालय का मुग़ल आक्रांता ने विध्वंश किया था | बाबर के सेनापति मीरबाँकी द्वारा किये गए इस घृणित कार्य का बदला तो 1992 में ही ले लिया गया था | किन्तु राम जन्मभूमि पर दिव्य देवालय के निर्माण के लिए ३१ वर्ष का समय लग गया | प्रभु श्री राम के इस स्मृति को अक्षुण्य बनाये रखने में साधु सन्यासियों के साथ आर एस एस ,विश्व हिन्दू परिषद् ,बीजेपी , का महत्वपूर्ण योगदान रहा है |
446 वर्ष से रामराजा ओरछा में
ओरछा के रामराजा मंदिर में लगे शिलालेख के अनुसार raamको 446 वर्ष पूर्व ओरछा राज्य के तत्कालीन शासक महाराजा मधुकर शाह जू देव की रामभक्त पत्नी महारानी गणेश कुंअर भगवान श्री राम प्रभु की मूल (असली प्रतिमा) को अपनी गोद मे लेकर अयोध्या से ओरछा तक 8 माह 28 दिनों तक पैदल चलकर लाईं थीं। प्रभु श्री राम ओरछा कैसे आये और कैसे महल में रुक गए इसकी अपनी एक अलग कथा है | आज भी प्रतिदिन प्रातः और संध्या आरती के समय पुलिस द्वारा ’’रामराजा सरकार को गार्ड ऑफ ऑनर देने की परम्परा चैत्र शुक्ल रामनवमी विक्रम संवत 1631 से लगातार चली आ रही है ।

ऐसी मान्यता है कि रात्रि विश्राम के लिए हनुमान जी महाराज ओरछा में रात्रि भोजन के बाद अपने आराध्य श्री राम प्रभु को लेकर अयोध्या जाते हैं और प्रातः पुनः ओरछा लाकर उन्हें रामराजा मंदिर में विराजमान करा देते हैं। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ओरछा में महाकाल लोक की तरह रामलोक को बनवाने की घोषणा की थी | उनके कार्यकाल में इस योजना का काम भी शुरू हुआ था पर वर्तमान में इसमें कुछ शिथिलता आई है | हालांकि वर्तमान सीएम मोहन यादव ने पूर्व की घोषणाओं के क्रियान्वयन की बात कही है | देखना है बुंदेलखंड का यह रामलोक कब तक बनकर तैयार होगा |

सोमवार को जब अयोध्या के देवालय में प्रभु श्री राम की प्राणप्रतिष्ठा होगी उस समय बुंदेलखंड की अयोध्या ओरछा में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव , पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ओरछा में मौजूद रहेंगे । दोनो ही श्री रामराजा सरकार के दर्शन कर, मंदिर परिसर से ही अयोध्या में आयोजित प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखेंगे। शाम को बेतवा नदी के कंचना घाट पर 1 लाख दीप प्रज्वलित किए जाएंगे, बेत्रवती नदी (बेतवा) की आरती भी होगी ।इस ऐतिहासिक मौके पर श्री रामराजा मन्दिर को लाइटिंग व फूलों से आकर्षक ढंग से सजाया गया है। नगर से झंडे व बैनर से इस तरह सजाया गया है मानो अयोध्या जी का ही छोटा रूप हो। नगर के धार्मिक स्थलों पर भक्ति रस की धारा प्रवाहित आज होगी।
तपो भूमि बुंदेलखंड
बुंदेलखंड इलाका ऋषि मुनियों की तपोभूमि रहा है इसका वर्णन सतयुग से लेकर आज तक के अनेकों धर्म ग्रंथों में मिलता है । चित्रकूट में भगवान श्री राम , सीता और लक्ष्मण जी ने अपने वनवास काल का अधिकांश समय बिताया था । यहां के कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा कर उन्होंने बुंदेलखंड की धारा को पावन पवित्र किया था । यहां से वे आगे बड़े और पन्ना जिले के सारंगपहाड़ इलाके में पहुंचे | जिसे अब सारंग धाम कहते हैं यहाँ भगवान् राम ,सीताजी और लक्ष्मण जी से जुडी कई यादे आज भी ताजा हैं । यही वो स्थान भी माना जाता है जहां श्री राम ने दैत्यों के संहार केलिए धनुष उठाया था । धनुषाकार पहाड़ियों की आकृति की तलहटी में बने इस आश्रम में अगस्त मुनी के शिष्य सुतीक्ष्ण मुनि ने वर्षों तपस्या की थी |कहते हैं कि जब भगवान रामयहां पहुचे और उन्होंने दैत्यों के आतंकको जाना तो उन्होंने धनुष उठा कर दैत्योंके संहार का यही संकल्प लिया था |राम चरित्रमानस के अरण्य काण्ड में सुतीक्ष्ण मुनीसे मिलने का वर्णन मिलता है | श्री राम वन गमन मार्ग का जो नक्शा बना है उसमे भी इस स्थान का विशेष उल्लेख है ।
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सारंग धाम के महंत और पुजारियों का मानना है कि त्रेता युग में जब भगवान श्री राम को 14 वर्ष का वनवास मिला था । उस समय सुतीक्ष्ण मुनि यहां उन्ही के लिये तपस्या कर रहे थे । रामचंद्र जी , सीता जी , लक्ष्मण जी, ने आकर उन्हें दर्शन दिए और कुछ समय साथ में बिताया | मुनी की तपस्या में राक्षस गण व्यवधान पैदा करते थे ,इस कारण उन्होंने यहां पर धनुष उठा कर संकल्प लिया था कि इस देश को हम राक्षसों से विहीन कर देंगे । राम का वह धनुष आज भी शिला पर अंकित हैं | यहां का राम कुण्ड सीता कुंड,लक्ष्मण कुंड , सीता रसोई ,और बैठक आज भी उनकी उपस्थिति का एहसास दिलाते हैं । वे बताते हैं कि इन कुण्डों की महिमा भी अपरंपार है, चाहे जितना सूखा पड जाये इनसे चाहे जितना पानी निकाल लो पर ये कभी खाली नहीं होते |

स्थानीय निवासी राम कुंड में साक्षात गंगा मैया का वास मानते है,| 1970की बात है जब कुछ लोगों ने उसे अपवित्र कर दिया था जिस कारण राम कुण्ड सूख गया था । तीन वर्ष तक अखण्ड रामायण और राम धुन के बाद गंगा जी पुन;आई थी ,तब से यह कुण्ड यथावत है । राम जी कुछ समय रहने के बाद आगे चले गये थे ।वर्तमान में राम वनगमन मार्ग का जो नक्शा तैयार किया गया है उसमें इसका उल्लेख है। सर्वेक्षण में भी सभी बातें प्रमाणित पाई गई ।आश्रम में किस तरह से राम की यादों को सहेज कर रखा गया ठीक उसी तरह से यहां मुनि की यादों को भी सहेजा गया है। सुतीक्ष्ण मुनि की संगमरमर की प्रतिमा बरबस ही लोगों का ध्यान खींच लेती है। यहां के बाबा कहते है कि हमें तो आज भी यही लगता है जैसे राम जानकी और लक्ष्मण जी हमारे आस पास ही हों वे दावा करते है कि मुनि के समय की धूनी आज भी वे जला रहे है ।
सुतीक्ष्ण मुनि यहां क्यों आये थे,और क्यों राम से मिलने की जिद में तपस्या की इस सवाल को जानने के लिए अनेक लोगों से चर्चा की लोगों ने बताया कि , सुतीक्ष्ण मुनि,अगस्त्य मुनि के शिष्य थे ।एक बार गुरू कही भ्रमण को जा रहे थे,जाते समय उन्होंने शालिग्राम ’ भगवान को सुतीक्ष्ण मुनि को सौंपते हुए कहा कि जब तक हम लौट कर नहीं आ जाते तब तक तुम शालिग्राम जी की पूजा करते रहना ,सुतीक्ष्ण मुनि ने पूजा करने की बजाए शालिग्राम से जामुन तोड़ने लगे जिस कारण शालिग्राम जी गायब हो गये | अगस्त मुनी जब लौट कर आए तो उन्होंने पूछा कि शालिग्राम जी कहां गये ,तो उन्होंने जवाब दिया कि ‘पुन पुन चंदन पुनपुन पानी, शालिग्राम हिरा गए हम का जानी,| इस बात से नाराज हो कर गुरु जी ने उन्हें अपने आश्रम से निकाल दिया और कहा कि यहां तभी आना जब भगवान को ले कर आओ तभी से सुतीक्ष्ण मुनी ने यहां तपस्या की और जबप्रभु श्री राम यहां आये तो उन्हे लेकर अपने गुरू के पास गये थे ।
अगस्त मुनि का आश्रम
श्री राम की वनवासी वेश में एक मात्र दुर्लभ प्रतिमा
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पन्ना के सलेहासे दस किमी दूर अगस्त मुनि का आश्रम हैं ,| सिद्धनाथ का यह स्थान अपनी अलग पहचान बनाये है |मंदिर के गर्भगृह में एक प्राचीन शिव प्रतिमा , मंदिर परिसर में भगवान राम, ऋषि अगस्त के छोटे-छोटेमंदिर और मूर्तियां मौजूद हैं, | अगस्त मुनि के 108 शिष्य भी यहांसाधना किया करते थे,| यहां की कथा भी लोग बताते है किजब शिव विवाह हो रहा था तो धरती का संतुलन बिगड़ गया था, तबभगवान के कहने पर ऋषि अगस्त यहां आये और उन्होने धरती का संतुलन बनाया और यहांतपस्या की। उन्हें मालूम था दशरथ पुत्र राम वनवास काल मेंयहाँ आएंगे | इसीलिए उन्होंने सुतीक्ष्ण मुनि कोइसके लिए यह दंड दिया था | सुतीक्ष्ण मुनि के साथ स्वयं श्रीराम अगस्त मुनि के आश्रम में पहुंचे । ऋषिने दिव्यास्त्रों के साथ उन्हें एक धनुष बाण भेंट किया था यही से वे नासिक की ओरगए थे । यहाँ आज भी भगवान् श्री राम कीवनवासी वेश में एक मात्र दुर्लभ प्रतिमा है । दक्षिण भारतीय लोगों में अगस्त मुनिकी अत्याधिक मान्यता के कारण बड़ी संख्या में दक्षिण भारत से लोग इस दुर्गम स्थल तकआते हैं ।
राम पथ
उत्तरप्रदेश सरकार ने तो अपने इलाके के 177 किमी के रामपथ के विकाश कार्य शुरू कर दिया है | किन्तु एमपी में बीजेपी सरकार २० वर्षों में सिर्फ कागजी घोड़े ही दौड़ाती रही | बुंदेलखंड के जिसइलाके से स्वयं श्री राम की यादे जुडी ऐसे स्थलों की स्मृतियाँ राममंदिर निर्माणसे जुड़ना आवश्यक ही कहा जाएगा |
चित्रकूट में श्रीराम
बुंदेलखंड के चित्रकूट में प्रभु श्री राम ,सीता माता और लक्ष्मण जी के साथ लगभग ११ वर्ष रहे जबकि एमपी में उन्होंने अपना कुल १२ वर्ष का वनवास बिताया | 16 जनवरी को श्री राम पथ गमन न्यास की पहली बैठक मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में चित्रकूट में हुई | सीएम दिल्ली से सीधे चित्रकूट पहुंचे थे , सियासी सूत्रों का कहना है एमपी के सीएम यह बैठक तब लेने आये जब दिल्ली दरबार में उनसे इस मामले में पूछताछ की गई | बैठक में सीएम साहब ने कहा कि "अयोध्या की तरह ही चित्रकूट में भी विकास कराए जाएंगे. जिन स्थानों से भगवान राम गए हैं , उन स्थानों को सड़क मार्ग से जोड़ा जाएगा.| बैठक में तय किया गया है कि चित्रकूट में कामदगिरि परिक्रमा पथ, बृहस्पति कुंड, मंदाकिनी नदी के लिए चित्रकूट में घाटों का विकास कराया जाएगा.|
दरअसल मध्य प्रदेश में राम वन गमन पथ चित्रकूट से अमरकंटक तक 370 किलोमीटर का माना गया है. | 11 वर्ष चित्रकूट में वनवासी जीवन व्यतीत करने के बाद प्रभु श्री राम पन्ना , सतना, कटनी, जबलपुर, नर्मदापुरम, उमरिया, शहडोल और अनूपपुर ( अमरकंटक ) होते हुए दंडकारण्य की ओर गए थे | लगभग एक वर्ष तक प्रभु श्री राम ने प्रदेश के आठ जिलों में समय बिताया |
अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के कल में जाग्रत हुई मध्य प्रदेश सरकार अब चित्रकूट में वनवासी राम लोक की स्थापना करेगी | इस लोक की स्थापना के लिए राम के जीवन के बारे में जानने वाले पांच लोगों की समिति बनाई जा रही है | इस पार एकीकृत शहरी विकास परियोजना के अंतर्गत 400 करोड़ रुपये से चित्रकूट का विकास किया जाएगा ।