12 मार्च, 2023

EL_2023_बुन्देलखण्ड में बीजेपी की राह नहीं आसान

 बुन्देलखण्ड में बीजेपी की राह नहीं आसान  

रवीन्द व्यास




मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में 2023 का चुनाव लड़ने का मन बना चुकी बीजेपी के लिए  बुंदेलखंड की पथरीली जमींन का रास्ता आसान नहीं होगा | बुंदेलखंड की  क्षेत्र  की 26 विधानसभा  सीटों पर कांग्रेस जहाँ अपनी पकड़ को मजबूत बनाने में जुटी है बुन्देलखण्ड में बीजेपी की राह  आसान नहीं है। बीजेपी अपनी 2013 वाली स्थिति में आने के लिए बेकरार है | सियासी समीकरण में  तेजी  से बदलाव हो रहा है  | हालांकि बुंदेलखंड की सीमावर्ती विधानसभा क्षेत्रो में  सपा और बसपा का  प्रभाव कांग्रेस और बीजेपी के समीकरण बनाने बिगाड़ने में अहम भूमिका अदा करते है  | 


बुंदेलखंड के  सियासी  धरातल पर   इस बार  बीजेपी के सामने चुनौतियां बड़ी हैं | इन चुनौतियों का काट निकालने के लिए बुंदेलखंड में बीजेपी ने अपने स्तर पर कई तरह के समीकरण भी बनाये हैं | सागर जिले में बीना विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस नेता , शशि कथोरिया , सागर के नेमिचन्द्र जैन , और कुछ दिनों पहले ही कांग्रेस के दिग्गज नेता ब्रज बिहारी पटैरिया  बीजेपी में सम्मलित हो गए | दूसरी तरफ कांग्रेस के खुरई से चुनाव लड़ने वाले अरुणोदय चौबे ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था, हालांकि उन्होंने अभी तक बीजेपी की सदस्य्ता नहीं ली है  | दरअसल बुंदेलखंड के तीन कांग्रेस विधायक और बड़े नेताओं के दल बदलने के कारण कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है | इसका असर चुनाव परिणामो में देखने को मिल सकता है | सागर जिले में सुरखी और देवरी ऐसी विधान सभा सीट हैं जिन पर बीजेपी के पास कोई सशक्त प्रत्यासी नहीं था | गोविन्द राजपूत के बीजेपी में आने के बाद सुरखी में बीजेपी को लाभ मिलेगा | ये अलग बात है राजपूत के बीजेपी में आने के बाद सुरखी से 2013  में  141 वोट से चुनाव जितने वाली बीजेपी की पारुल साहू ने  बीजेपी  को  त्याग का कांग्रेस का हाथ थाम लिया था और उप चुनाव में लगभग ४१ हजार वोट से हारी थी | इसी तरह सागर जिले की एक विधान सभा सीट है देवरी जहाँ से कांग्रेस के हर्ष यादव लगातार दूसरी बार चुनाव जीते | बीजेपी ने इस क्षेत्र के लिए  कांग्रेस के पूर्व विधायक ब्रज बिहारी पटैरिया को पार्टी में सम्मलित कर  अपने मनसूबे साफ़ कर दिए हैं कि हर हाल में चुनाव जीतना है | 

                                                2018 के चुनाव परिणाम को देखें तो बुंदेलखंड की २६ विधानसभा सीटों में से कांग्रेस ने 10 , और बीजेपी ने 14 विधान सभा सीटें जीती थी | जितने वाली इन सीटों में ५ हजार से कम  के अंतर से बीजेपी 4 सीट पर और कांग्रेस 5 सीट पर जबकि बीएसपी ने एक सीट पर चुनाव जीता था | बुंदेलखंड में सबसे कम अंतर से  चुनाव जीतने वाले बीजेपी के 35 बीना के महेश राय थे जो कांग्रेस के शशि कथोरिया  से मात्र 460 मत से चुनाव जीते थे , शशि कथोरिया अब बीजेपी में सम्मिलित हो गए हैं |  कम अंतर से जीतने के कारण इस विधानसभा क्षेत्र में दावेदारों की  अच्छी खासी संख्या है |  दूसरे पर 49 चंदला के राजेश प्रजापति थे जो मात्र 1177 मत से चुनाव जीत सके थे | ये वही राजेश प्रजापति  हैं जो अपने आचरण और अपने पिता के कारण हमेशा विवादों में रहते हैं |  इसी तरह कांग्रेस में 50 राजनगर से विक्रम सिंह उर्फ़ नाती राजा  मात्र 732 मत से दमोह के राहुल सिंह 798 मत से चुनाव जीते थे | बाद में राहुल सिंह लोधी बीजेपी में सम्मलित हो गए , और उप चुनाव में वे कांग्रेस के अजय टंडन से चुनाव हार गए | बीजेपी के टारगेट में ये दस सीटें प्रमुखता से हैं |  

                                        उत्तर प्रदेश की सीमा से लगने वाली 9 विधानसभा सीट सहित 11 विधानसभा सीट पर बीएसपी और समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस और बीजेपी के समीकरणों में बड़ा परिवर्तन किया है | सबसे ज्यादा असर  निवाड़ी ,पृथ्वीपुर  और जतारा  विधानसभा  सीट पर देखने को मिला था | निवाड़ी में बीजेपी और समाजवदी पार्टी में  और पृथ्वीपुर में  सपा और कांग्रेस में मुख्य  मुकाबला था | २०२३ के चुनाव में इन पार्टियों के अलावा आम आदमी पार्टी अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी में जुटी है | सियासी ख़बरों की माने तो आप ने  इस बार जातीय समीकरणों को ध्यान में रख कर और पार्टी के बागियों पर दांव लगाने की तैयारी की है | 


     बजट पर बवाल : सियासी मुद्दों की तलाश में भटकती कांग्रेस को  बीजेपी ने बजट में बैठे बैठाये मुद्दे दे दिए | दमोह के कांग्रेस विधायक अजय टंडन ने आरोप लगाया था , कि  दमोह उप चुनाव के दौरान  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह  चौहान ने  दमोह में मेडिकल कॉलेज खोलने की बात कही थी | बजट से नदारद है , अब जान आंदोलन ही एक बड़ा रास्ता बचता है | इस मुद्दे को लेकर दमोह जिला कांग्रेस हर विधान सभा क्षेत्र में  जायगी और मुख्य मंत्री को झूठा साबित करने का प्रयास करेगी | दमोह जिले में कांग्रेस अपना जनाधार मजबूत करने में जुटी है | 

                       टीकमगढ़ जिले में भी मेडिकल कॉलेज की मांग की जा रही थी इस मांग को लेकर पूर्व में कई आंदोलन भी हो चुके हैं | सरकार को टीकमगढ़  में मेडिकल कालेज बनाने का प्रस्ताव  जिले के विधायकों ने सर्व सम्मति से दिया था , किन्तु इस बजट में  इसकी कोई घोषणा नहीं हुई | इस बात को हवा देने के अभियान में कांग्रेस जुट गई है |  सागर में भी सीएम शिवराज सिंह चौहान ने राजघाट बाँध को दो मीटर ऊंचा करने की बात कही थी , किन्तु बजट में इसको लेकर कोई बजट ना होने सागर के लोगों को निराशा है | दरअसल सागर जिले के राजघाट बाँध की ऊंचाई बढ़ने का सीधा लाभ नगर की पेयजल व्यवस्था को मिलता | वर्तमान में बाँध का पानी गर्मियों में निचले स्टार पर पहुँच जाने के कारण यहाँ के लोगों को पेयजल की परेशानी का सामना करना पड़ता है | हालंकि सरकार ने दलित वोट बैंक को लुभाने के लिए  संत रविदास मंदिर के लिए 100 करोड़ का प्रावधान बजट में किया है | दूसरी तरफ आधी आबादी को साधने के लिए महिलाओं को हर माह एक हजार रु दिए जाने का प्रावधान बजट में किया गया है | इस पर भी कांग्रेस हमलावर है | 

                                           दमोह में कांग्रेस की संभागीय प्रवक्ता निधि श्रीवास्तव ने एक पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर सीधा आरोप लगा दिया की मुख्यमंत्री बहनो के साथ छलावा करके एक हजार रु में उनके वोट खरीद रहे हैं | उनका कहना था कि चुनाव के कुछ माह शेष रहे हैं , महिलाओं को कागजी खानापूर्ति में ही समय निकल जाएगा |  वही टीकमगढ़ में कांग्रेस की किरण अहिरवार ने कहा है कि कांग्रेस सरकार आने पर महिलाओं को 1500 रु दिए जाएंगे | 

                         दरअसल  चुनावी वर्ष में यह आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा है | जिसे जहाँ भी मौका मिलता है | बीजेपी के नेता अपनी उपलब्धियां बताने में नहीं चूक रही है , एम् पी यूपी की  54  विधानसभा क्षेत्रों को प्रभावित  करने वाली केन बेतवा लिंक परियोजना को एक बड़ी उपलब्धि के टूर पर बताया जा रहा है | इससे ना सिर्फ सिचाई होगी बल्कि बिजली और पेयजल भी लोगों को मिलेगा | छतरपुर में बनने वाले मेडिकल कालेज  को लेकर भी बीजेपी के नेता क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं |                  

                        

        

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