31 दिसंबर, 2022

पं गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास_भारत की चेतना बदल रही है || कपिल तिवारी

  

सनातन संस्कृति का प्रभाव और उसकी प्रासंगिकता "

भारत की चेतना बदल रही है || कपिल तिवारी 

भारतीय संस्कृति  संस्कारों की जनंनी है || विनोद असाटी 

व्याख्यानमाला बुंदेलखंड की लोक संस्कृति एवं लोक साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में कारगर होगी| राकेश मिश्रा 

 छतरपुर//  महराजा छत्रसाल  ऑडिटोरियम में  " सनातन संस्कृति का प्रभाव और उसकी प्रासंगिकता"  विषय पर शुक्रवार को को एक व्याख्यान माला आयोजित की गई |  पंडित गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास द्वारा आयोजित इस छटवी  व्याख्यानमाला के  मुख्य अतिथि  पद्मश्री डॉ  कपिल तिवारी ने   कहा कि समाज में सनातन आदि है अनंत है और हमेशा रहेगा इसकी प्रासंगिकता पर सवाल उठाए ही नहीं जा सकते | 

जनसेवा जनसेवा और सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित प गणेश प्रसाद  मिश्र सेवा न्यास के इस गरिमा पूर्ण  कार्यक्रम के प्रारंभ में मां सरस्वती जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि और द्वीप प्रज्वलन किया गया | कार्यक्रम के मुख्य  अतिथि डॉ  कपिल तिवारी का बाबी असाटी ने और कार्यक्रम के अध्यक्ष  वीरेंद्र असाटी  का नीरज भार्गव  तथा  डॉ राकेश मिश्र का  को कविता  राज ने माल्यार्पण कर स्वागत किया |  इस मौके पर मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा  का अनावरण भी किया गया | 
                        कार्यक्रम के ंप्रारम्भ में डॉ राकेश मिश्र ने न्यास के कार्यो से लोगों को अवगत कराते हुए कहा की न्यास का ""  सनातन संस्कृति का प्रभाव और उसकी प्रासंगिकता "" का यह छटवां आयोजन है |आज की व्याख्यानमाला बुंदेलखंड की लोक संस्कृति एवं लोक साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में कारगर होगीबुंदेलखंड की संस्कृति काफी समृद्ध है, जिसे राष्ट्रीय पटल पर लाने की दिशा में यह व्याख्यानमाला उपयोगी सिद्ध होगी। 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ कपिल तिवारी ने इस  आयोजन के लिए आयोजकों को साधुवाद देते हुए कहा  आज भारत की चेतना बदल रही है | भारत में यह परिवर्तन बहुत लम्बे समय बाद देखने को मिल रहा है | भारत ने अपनी अस्मिता को ना सिर्फ पहचाना है बल्कि इसके लिए उसने दुनिया को भी अपनी एक नई पहचान बता दी है | ये भारतीय सनातन संस्कृति ही है जिसने हमें एक ऐसा ज्ञान दिया है जो सनातन है जिसका ना कोई आदि है और ना कोई अंत है | हर पल नया कर रहा है | उन्होंने सनातन परम्पराओं और संस्कृति के ज्ञान को लेकर आने को आख्यानों के माध्यम से लोगो को और लोक को समझाया भी | उन्होंने जहाँ ज्ञान परम्परा , संत ,ऋषि , की चर्चा की ,उन्होंने कहा  कि देश में सप्तमात्रिका  हम आप सब मानते हैं | सनातन संस्कृति ने ही हमें जीवन का मूल्य बोध दिया है | 
                कार्यक्रम के अध्यक्ष विनोद असाटी ने  कहा की भारतीय संस्कृति  संस्कारों की जनंनी है | सनातन संस्कृति  ही जिसने दुनिया को वसुधेव कुटुम्बकम का सन्देश दिया | सामाजिक समरसता हमारुई संस्कृति का अंग है | इसके सबसे बड़े उदाहरण देश में होने वाले तीज त्यौहार , मेले  वगैरह हैं |  
 कार्यकर्म के संचालक डॉ  विनोद रावत ने सभी  आमंत्रित अतिथियों का  आभार व्यक्त करते हुए कहा की सामजिक चेतना  जाग्रत करने के लिए इस तरह के आयोजन समाज को नै दिशा देते हैं | अंत में डॉ राकेश मिश्र ने अतिथि द्वय को स्मृति चिन्ह भेंट किये | कार्यक्रम का समापन प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी की माता जी हीरा बेन को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के बाद हुआ | 

27 दिसंबर, 2022

Political_Braj Bihari Pateriya_कांग्रेस का हाथ से हाथ जोड़ो अभियान और हाथ छुड़ाकर भागते कांग्रेसी

  कांग्रेस का  हाथ से हाथ जोड़ो अभियान और हाथ छुड़ाकर भागते कांग्रेसी

रवीन्द्र व्यास 

 बुन्देलखण्ड /सागर  /


 

ए आई सी सी  के निर्देशानुसार मध्य प्रदेश के सागर संभाग में भी  हाथ से हाथ जोड़ो अभियान चलाया जा रहा है। कांग्रेस का जहां एक ओर हाथ से हाथ जोड़ो अभियान की तैयारी  चल रही  है वहीं दूसरी तरफ कांग्रेसी ही हाथ छुड़ाकर भागने में लगे हैं। बीजेपी की निगाहें अब बुंदेलखंड के दो और ब्राह्मण विधायकों पर लगी हैं | ऐसा भी नहीं कि सिर्फ कांग्रेस के नेता  ही दल त्याग रहे हो कुछ बीजेपी के नेता भी दल बदलने की जुगत में लगे हैं | 

 राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के शुरुआती दौर में ही सागर जिले  में  पूर्व विधायक अरुणोदय चौबे को कांग्रेस छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। 24 दिसंबर 2022  को कांग्रेस के पूर्व विधायक गुड्डा ब्रज बिहारी पटेरिया ने कांग्रेस का हाथ छोड़कर बीजेपी का कमल थाम लिया। बीजेपी के प्रमुख नेता और मंत्री भूपेंद्र सिंह ने  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से बीजेपी की सदस्यता दिलाई। मुख्यमंत्री श्री  चौहान व मंत्री श्री  सिंह ने भाजपा की सदस्यता लेने वाले श्री पटैरिया का भाजपा में स्वागत भी किया।

 

  बृज बिहारी पटेरिया की गिनती कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में होती रही है। गाँव के सरपंच से अपना राजनैतिक जीवन शुरू करने वाले गुड्डा पटेरिया  3 बार निर्विरोध सरपंच चुने गए । 1986 से 92 तक मंडी अध्यक्ष , 1997 से 2004 तक सहकारी बैंक के अध्यक्ष रहे। 1998 में वे पहली बार देवरी विधानसभा से कांग्रेस उम्मीदवार बने और उन्होंने बीजेपी के भानू राणा को 4866 मत से हराया था |  2003 में कांग्रेस ने उनके स्थान पर हर्ष यादव को टिकट दिया वे भी हार गए |  2008 में कांग्रेस ने फिर से ब्रज बिहारी पटेरिया को  देवरी  से प्रत्यासी बनाया | बीजेपी के  भानू राणा से 1105 वोट से वे हार गए |  2013 में रहली से गोपाल भार्गव के खिलाफ उन्हें कांग्रेस ने प्रत्यासी बनाया था पर वे 51765 मत से हारे थे | 

 गुड्डा पटेरिया के नाम से विख्यात ब्रज बिहारी पटेरिया को जानने  वाले कहते हैं कि वे एक ऐसे नेता हैं जो हर सुख दुःख में जनता के साथ रहते हैं | यदि देवरी में कांग्रेस ने जातीयता का समीकरण ना रचा होता तो उन्हें कोई हरा नहीं सकता था | आज के राजनैतिक दौर में एक  कमी जो उनमे है वह है कि वह सच को सच कहने में संकोच नहीं करते | 


सागर जिले के वे दूसरे बड़े कांग्रेस के नेता  हैं जिन्होंने दल को त्यागा है | इसके पहले बड़े जनाधार वाले नेता अरुणोदय चौबे का  पार्टी से मोह भंग हो गया   । उन्होंने प्रदेश उपाध्यक्ष सहित तमाम पदों सहित कांग्रेस की प्राथमिक सदस्य्ता से त्याग पत्र देकर कांग्रेस से मुंह मोड़ लिया || 

  दोनों मामलो में राजनैतिक  स्थितियां अलग अलग बताई जाती  हैं | जहाँ अरुणोदय चौबे ने अब तक बीजेपी का दामन  नहीं थामा है ,  वही गुड्डा पटेरिया ने पार्टी त्याग कर तत्काल ही बीजेपी की सदस्यता ले ली |  पटेरिया जी अपने इस ह्रदय परिवर्तन के पीछे मीडिया से चर्चा में कह चुके हैं कि हमें पद प्रतिष्ठा और पैसों की कोई लालसा नहीं है | सम्मान का भूखा हूँ , टिकट की इक्षा भी उन्होंने नहीं जताई | पार्टी जो भी  काम देगी उसे पूर्ण निष्ठां और ईमानदारी से करूंगा |  पटेरिया जी कुछ  कहें और सिंह साहब कुछ भी राजनैतिक बयान दें पर बीजेपी के सूत्रों  की खबर पर अगर भरोसा किया जाए तो दोनों एक दूसरे की मज़बूरी बन गए थे |  बीजेपी के पास देवरी से कोई सशक्त प्रत्यासी देवरी में नहीं था और कांग्रेस  ब्राम्हणो की लगातार उपेक्षा पर आमादा थी | मामला चाहे प्रदेश में सत्यव्रत चतुर्वेदी का हो ,अथवा राकेश चौधरी का या फिर अरुणोदय चौबे हो या ब्रज बिहारी पटैरिया का | बीजेपी ने कांग्रेस के इस राजनैतिक भेदभाव का लाभ उठाया ,और इसी को आधार बनाकर बीजेपी के सियासी समीकरण जारी हैं | 



                                              बुंदेलखंड में  तीन कांग्रेस विधायकों पर बीजेपी की निगाह बनी हुई है | समीकरणों को अगर देखा जाए तो इनमे दो ब्राह्मण और एक ठाकुर साहब हैं | कांग्रेस के इन विधायकों के शीघ्र ही बीजेपी में जाने की अटकल बाजी लगाई जा रही हैं स्थानीय स्तर पर इसको लेकर चर्चाये भी खूब होती हैं | इसके पीछे बताया जा रहा है कि पिछले दिनों जो राजनैतिक सर्वे प्राथमिक तौर  पर किया गया उसमे ये बात सामने आई है कि ये तीनो ही फिर से जीतने  की स्थिति में हैं | ऐसी दशा में पार्टी इन्ही पर जोर आजमाइश कर सकती है | अब ये फिर से विधायक बनना चाहते हैं अथवा नहीं यह वक्त ही तय करेगा |


चुनावी दौर में दल और दिल बदलते रहते हैं यह कोई बड़ी बात नहीं है | अब बीजेपी के उपेक्षित नेताओं की बेचैनी देख लीजिये अपने आपको बीजेपी के लिए समर्पित करने वाले लोग ,पार्टी में टिकट ना मिलने से अब घुटन महशूस कर रहें हैं | 2018 में जिनके पार्टी ने टिकट काटे और कुछ हारे ऐसे कई दिग्गज जनसेवक हैं जो अब यह कहने में संकोच नहीं कर रहे हैं कि पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो अपनी उपस्थिति का अहसास पार्टी को जरूर कराएंगे | कैसे कराएँगे यह एक अलग बात है पर माना जा रहा है इसमें कुछ कांग्रेस तो कुछ निर्दलीय किस्मत आजमाने का मन बना चुके हैं | 

      

                                  


18 दिसंबर, 2022

Political_Raja Pateriya_बेकाबू जुबान ने पहुंचाया जेल 

बेकाबू जुबान ने पहुंचाया जेल 

 रवींद्र  व्यास

 बुंदेलखंड में इनदिनों राजनैतिक घमासान मचा हुआ है | सियासतके तमाम परमवीर योद्धा आगामी चुनावी काल को देखकर , जुबां सेलेकर तमाम तरह के सियासी हथियारों में धार देने में  जुटेहैं | चुनावी  काल खंड में सियासी  लोगों को जनता भी याद आती है औरअपने पार्टी के कार्यकर्ताओं की याद सताने लगती है | पिछले कुछ समय में बुंदेलखंड में ऐसा हीराजनैतिक तमाशा देखने को मिल रहा है |  चमड़ेकी यह जबान ही है जो लोगों को जोड़ती भी है और लोगों को तोड़ती भी है | बुंदेलखंड में बड़े बुजुर्ग कहा करते थे कि तन के घाव तो आदमी भुला देता हैपर वाणी से लगे घाव भुलाये नहीं भूलते | वाणी के सयम को लेकरभारतीय दर्शन में ना जाने कितनी  व्याख्याएं की गई हैं | पर सियासत में अब वाणी  एक अस्त्र की तरह इस्तेमाल होने लगा है |

 बुंदेलखंड के कांग्रेसी  नेता  राजा पटेरिया की  जुबान 11 दिसंबर को पन्ना जिले के  पवई में फिसल गई | पार्टी की मंडल बैठक में वे कार्यकर्ताओं को समझाते हैं कि  मोदी इलेक्शन खत्म कर देगा, मोदी धर्म, जाति, भाषा के आधार पर बांट देगा। दलितों का,आदिवासियों का और अल्पसंख्यकों का भावी जीवन खतरे में है। संविधानअगरबचाना है तो मोदी की हत्या करने के लिए तत्पर रहो। हत्या इन द सेंस ... हराने केलिए तैयार रहो। फिसलीजुबां पर काबू करने का उन्होंने जतन  भी खूब किया ,पर १२ दिसंबर को उनका यह  बयान मीडियामें सुर्खियां बन गया | पूर्व मंत्री  राजा पटैरिया ने  सफाई  देते हुए कहा भी  कि "वायरल वीडियो कार्डवितरण के दौरान का है  वीडियो  में मोदी की हत्या की जो बात है वह गलत तरीके से बताई जा रही है | में गांधी को मानने वाला हूँ ,और इस तरह की बात नहीं कर सकता | बीजेपी को तो बैठे बैठाये एक मौका मिल गया ,| प्रदेशसरकार ने बगैर विलम्ब के उन पर मामला दर्ज करा दिया |  सब  इंजीनियर संजय खरे की रिपोर्ट पर पवई थाना पुलिस ने  12 दिसंबर को भादवि  की धारा 451,504, 505(1)(बी ),505(1)(सी ), 506,153b(1)(सी ) के तहत राजा पटेरिया पर मामला दर्ज कर लिया | सुबह पटेरिया को हटा से गिरफ्तार कर ,पवई न्यायालयमें पेश कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया | 


                          माफ़ी मांगने के बावजूद उनकी ही पार्टी के लोगों नेउनका साथ नहीं दिया ,उनको नोटिस सौंप कर तीन दिन में जबाब माँगा गया | अब जो व्यक्ति जेल में हो वह क्या जबाब देगा |हालांकि पार्टी के नेता प्रतिपक्ष गोविन्द सिंह इस मामले में पटेरिया के बचाव में आये तो जरूर पर विलम्ब से | दरअसल राजापटेरिया बुंदेलखंड के पुराने समाजवादी नेता हैं | वे अपनी  उग्र छवि के कारण जाने जाते हैं ,| दिग्विजय सरकार में मंत्री रहे हटा से 1991 में उप चुनाव जीता , पर 1993 का चुनाव वे हार गए 1998 में वे फिर चुनाव जीते उसके बाद वे फिर कोईचुनाव नहीं जीते | पार्टी ने उन्हें 2009 और 2014 में खजुराहो लोकसभा से भी प्रत्यासी बनाया था पर दोनों बार वे चुनाव हारे |     


                                                                    पार्टी की बैठक का विडिओ वायरल होने की भी एक अलग कहानी बताई जा रही है |  पटेरिया जी पवई  से चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे थे | उनकी यह तैयारी पार्टी के ही कुछ नेताओं को रास नहीं आ  रही थी , जैसे ही उन्हें मौका मिला पार्टी के इन्ही ज्ञानियों के इशारे पर विडिओ वायरल कर दिया गया |, जिसका परिणाम सबके सामने है | 

 उपयंत्री भी हुए निलंबित  पवई रेस्ट हाउस में हुई कांग्रेस पार्टी की मंडल बैठक के इस मामले में पन्ना कलेक्टर ने लोक निर्माण विभाग के उपयंत्री संजय खरे और टाइम कीपर को निलंबित कर दिया है | इन पर आरोप है कि इन्होने पवई के रेस्ट हाउस में  कांग्रेस पार्टी को  बैठक करने दी | 

 जमानत के लिए अब हाईकोर्ट जाएंगे 

 राजापटेरिया की जमानत याचिका पवई के अपर सत्र न्यायालय ने शुक्रवार को  निरस्त कर दी है। दो दिन पहले जब  राजापटेरिया ने  जमानत याचिका पर  पुलिस ने केस डायरी पेश करने के लिए दो दिन का समय मांगा था।शुक्रवार को पवई पुलिस ने केस डायरी पेश की ,  अपर सत्र न्यायाधीश एस  श्रीवास्तव ने जमानत याचिका निरस्त कर दी। अब  पटेरिया  जमानत याचिका उच्च न्यायालय में दायर कीजाएगी।

बेकाबू  वाणी सियासत और जीवन  में वाणी का  संतुलन और असुंतलन किस तरह की समस्याएं पैदा कर सकता है इसके कई उदाहरण राजनैतिक और सामाजिक क्षेत्रों में देखने को मिल जाएंगे | पन्ना में राजा पटेरिया के पहले एक जिला शिक्षाधिकारी का भी इसी तरह का मामला सामने आया था | जिसमे वे पत्रकारों को सुधरने के लिए उनको पीटने की बात कहते हैं | इस मामले में पत्रकारों ने कई दिन आंदोलन भी किया , बाद में मंत्री ब्रजेन्द्र सिंह के हस्तक्षेप के बाद शिक्षा अधिकारी को हटाया गया था |                   

06 अक्टूबर, 2022

Political_Damoh_Rambai_विवादों की पर्याय विधायक रामबाई



 दमोह जिले के पथरिया की बसपा विधायक रामबाई परिहार  बीते  शुक्रवार को  जनहित के मुद्दे पर आक्रोशित हो गई और   कलेक्टर एस कृष्ण चैतन्य को खरी खोटी सूना दी |  ठेठ बुंदेली शब्दावली का उपयोग करते हुए उन्होंने कलेक्टर को ढोर,मूर्ख, अंधरा जैसे शब्दों से विभूषित कर दिया | असल में  पहली बार विधायक बनी रामबाई जनप्रतिनिधि को सर्वोच्च मान कर कलेक्टर से भिड़ गई | वे शायद यह नहीं जानती कि इस देश में व्यवस्था का संचालन  प्रशासनिक तंत्र के पास है |  देखा जाए तो राम बाई का  यह कोई पहला विवाद नहीं है , अपने बेलाग बयानों और कार्यों की कारण वे अक्सर सुर्ख़ियों में बनी रहती हैं | जहाँ तक बात प्रशासनिक अधिकारियों के आपस में भिड़ने की है  यह भी प्रदेश का कोई पहला मामला नहीं है |                    

अपशब्दों से नाराज  कलेक्टरने बसपा विधायक पर शुक्रवार की  देर रात  कोतवाली में विधायक रामबाई के विरुद्ध अभद्रता ,और शासकीय कार्य में बाधा का मामला दर्ज  कराया   |   विधायक रामबाई के खिलाफ आईपीसीकी धारा 353, 294, 186 और 506 के तहत पुलिस ने  मामला  दर्ज कर लिया । मामला दर्ज होने के बाद विधायक रामबाई ने अपने कहे और किये पर खेद भी जताया | उन्होंने मीडिया से साफ़ कहा कि में जनता के लिए काम करती हूँ | जनहित के लिए यदि मुझे फांसी पर चढ़ाया जाता है तो में उसके लिए तैयार हूँ | जहाँ तक बात केस दर्ज होने और धाराएं लगाने की तो इनसे मुझे डर नहीं लगता | पहले भी हम पर और हमारे परिवार पर झूठे मामले दर्ज हो चुके हैं |

कलेक्टर पर गुस्सा विधायक जी को यूं ही नहीं आया, वो जो भी कहती कलेक्टर साहब अपनी ठेठ प्रशासनिक शब्दावली का उपयोग करते हुए कह देते चेक करा लूंगा। चेक का यह शब्द विधायक जी को नागवार गुजरा और भड़क गई।दरअसल रामबाई अपने विधान सभा क्षेत्र के नरसिंहगढ़ पंचायत की उन महिलाओं की समस्या को लेकर कलेक्टर के पास पहुंची थी जो पात्र होने के बाद पेंशन के हक से वंचित थी।कुछ ऐसी भी थी जो बीते 15वर्ष से पेंशन की राह देख रही थी।
 विवादों की पर्याय 
रामबाई पथरिया से बीएसपी विधायक रामबाई परिहार 2018 का चुनाव चतुष्कोणीय मुकाबले  में  2205 मतों से जीती थी | उन्होंने अपने निकटम प्रतिद्वंदी बीजेपी के लखन पटेल को हराया था | इस चुनाव में 21 प्रत्यासी चुनावी मैदान में थे जिनमे पूर्व मंत्री डॉ रामकृष्ण कुसमरिया बीजेपी से बगावत कर निर्दलीय मैदान में उतरे  थे | विधायक बनने के बाद से ही रामबाई परिहार सुर्ख़ियों में आ गई थी | कांग्रेस की कमल नाथ सरकार को समर्थन देकर वे अपने आपको किंग मेकर मानने लगी थी | उन्होंने सरकार बनने के कुछ समय बाद ही कह दिया था  कि वह सभी मंत्रियों से ऊपर हैं क्योंकि वहमुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व वाली राज्य में कांग्रेस सरकार की किंगमेकर हैं।असल में 7 जनवरी 2019 को  रामबाई ने  संजीव सिंह कुशवाहा के लिए केबिनेट  मंत्री और अपने लिए राज्य मंत्री का पद की मांग की थी ||                     
विवाद की पर्याय कही जाने वाली रामबाई अपने विधायकी कार्यकाल में कुछ ना कुछ ऐसा करती रही कि वे चर्चाओं में बनी रही | कभी वे बीजेपी सरकार के मंत्री गोपाल भार्गव को चेतावनी देती नजर आई तो कभी अधिकारियों को धमकाती नजर आई | उन्होंने रहली में अगस्त  २०२२ में एक सभा में कहा कि  अभी वे  पथरियाविधानसभा सीट से विधायक हैं लेकिन अब वे रहली के लोगों के आग्रह पर अगले विधानसभाचुनाव में यहां से चुनाव लड़ने  की तैयारी में हैं।इसी दौरान उनका एक वीडिओ  सोशल मिडिया पर वायरल हुआ  जिसमें वह प्रशासन के अधिकारियों को चेतावनी देती नजर  आई कि अगर किसानों के घरों की कुर्की की गई तो वह सही सलामत नहीं लौटेंगे।  
अक्टूबर 2021 में तो उन्होंने एक युवक का कॉलर पकड़ कर ट्रेन से उतार दिया था ,इसका भी वीडिओ सोशल मीडिया में वायरल हुआ था | असल में  कोरोना काल में बंद हुई   राजधानी एक्सप्रेस  फिर से शुरू हो रही थी । दमोह_भोपाल को जोड़ने वाली इस ट्रेन का स्वागत करने  विधायक जी अपने समर्थकों के साथ पथरिया रेलवे स्टेशन पहुंचीं थीं। बीजेपी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के कारण रामबाई ट्रेन में नहीं चढ़ पा रही थी इसी से वे नाराज हो गई थी |                            

  विधायक रामबाई सिर्फ अपने विवादित बयानों के कारण ही सुर्खियां नहीं बटोरती बल्कि वे कभी सार्वजनिक समारोह में ठुमके लगा देती हैं तो कभी बीड़ी बनाती महिलाओ के साथ बीड़ी बनाने   लगती हैं | | विवादों से स्थाई नाता बनाने वाली रामबाई शायद जानती हैं की सुर्ख़ियों में रहना है तो ऐसा कुछ करते रहो जो  सुर्खियां बनती रहे |  बुंदेलखंड में एक कहावत है बदनाम होंगे तो क्या नाम नहीं होगा |                                                                                       

09 जून, 2022

watar_crises जल से जुड़ा है जीवन और अर्थ

जल से जुड़ा है जीवन और अर्थ रवीन्द्र व्यास भारतीय संस्कृति के वेद और पुराणों में जल और उसके महत्व के बारे में विस्तार से लिखा गया है | लिखा ही नहीं गया बल्कि लोगों ने सदियों तक इसे आत्मसात भी किया | जीवन के आधार जल की महत्वत्ता को देखते हुए वैदिक काल से ही जल को धर्म से भी जोड़ दिया गया था | हिन्दू समाज के अधिकाँश संस्कार जल बिन अधूरे हैं | जन्म के समय कुआँ पूजन हो , विवाह के समय मागर माटी का संस्कार हो , अमावस्या, मकर संक्रांति का स्नान हो , अथवा कुम्भ का स्नान हो , कार्तिक स्नान , मृत्यु के बाद मोक्ष तभी मिलता है जब जल में अस्थियां प्रवाहित हो जाती हैं | यही कारण है कि नदियों को माता का दर्जा दिया जाता है | देश दुनिया में जहां भी सभ्यता और संस्कृति का विकाश हुआ है उसके मूल में जल तत्व प्रमुख रहा है | वराह मिहिर द्वारा रचित वृहद संहिता में जल के बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है | जिस जल के महत्व को सनातन काल से भारतीय जन मानस मानता रहा , इसके पीछे धर्म के साथ जीवन और अर्थ का चक्र भी जुड़ा था | उसी संस्कृति को जब देश के जनमानस के द्धारा लोभ और आधुनिकता के नाम पर तिरस्कृत किया जाने लगा तो उसके दुष्परिणाम भी सामने आने लगे | बढ़ते तापमान घटते वृक्षों ने हालातों को बेकाबू किया है | बुंदेलखंड सहित देश के अनेकों राज्य इन दिनों भीषण जल संकट का सामना कर रहे हैं | इन हालातों से निपटने के लिए शासन स्तर पर प्रयास किये जा रही हैं , पर जब तक जल संरक्षण और पर्वावरण के संरक्षण और संवर्धन में आम जन का जुड़ाव नहीं होगा इसके सार्थक परिणाम सामने नहीं आएंगे | पंचायत राज दिवस पर २४ अप्रेल २०२२ को प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने देश के प्रत्येक जिले में 75 _75 तालाब बनाने की घोषणा की | आजादी के आजादी अमृत महोत्सव को भी यादगार बनाने के लिए इन तालाबों को अमृत सरोवर नाम दिया गया | प्रधान मंत्री के इस अभियान का राज्यों में भी असर दिखा , मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रायसेन जिले के काहुला में एक जल संसद आयोजित की और जल अभिषेक अभियान की शुरुआत करते हुए कहा कि हमारी जल संस्कृति के अभिन्न अंग हैं तालाब | उन्होंने प्रदेश के 52 जिलों के 5000 अमृत सरोवरों का वर्चुअली शिलान्यास भी किया | वर्षा जल के संरक्षण के लिए ये अमृत सरोवर लाभ कारी सिद्ध होंगे |हालांकि केंद्र और राज्य सरकारों ने समय समय पर सरोवरों के संरक्षण की योजनाए बनाई और जिस तंत्र के भरोसे इनको पूर्ण करने का जतन किया गया उसी तंत्र ने इस पर पलीता लगाया | बुंदेलखंड क्षेत्र में सदियों पहले वर्षा जल संरक्षण के प्रयास किये गए थे | यह क्षेत्र विरासत में मिली अपनी जल संरक्षण निति के कारण जाना जाता रहा है | यहां की बसाहट भी कुछ इस तरह होती थी कि एक पहाड़ और उसकी तलहटी में गाँव , पानी की व्यवस्था के लिए एक सरोवर | अधिकाँश गाँवों की बसाहट कुछ इसी तरह देखने को मिलती है | गौड़ राजा और चन्देल , बुंदेला शासको के कालखंड को देखा जाए तो पानी के लिए तालाबों का निर्माण इन शासकों की पहली प्राथमिकता रही है | बुंदेलखंड के इन चन्देली तालाबों की संख्या हजारों में थी | जो अपनी बेजोड़ तकनीकी के लिए भी जाने जाते हैं | तालाबों के निर्माण और उनकी योजना को इस तरह बनाया जाता था कि एक तालाब का पानी भर जाने के बाद दूसरे तालाब में , कुंआ और बावड़ी में भी पहुंच जाता था | पन्ना नगर जो पत्थरो पर ही एक तरह से बसा है , पहाड़ी की तलहटी है , पानी का संकट यहां की स्थाई नियति है , यहां बने तालाबों का लिंक सिस्टम लोगों को तब पता चला जब एक कुंए को खाली कराने के लिए मोटर लगाईं गई और वह कुंआ खाली नहीं हो रहा था | पन्ना के तत्कालीन कलेक्टर ने जब इसकी खोज बीन कराई तो पता चला ये कुँए भूमिगत नहरों से तालाब से जुड़े हैं | टीकमगढ़ जिले में जहां सर्वाधिक चन्देली तालाब बने हैं , इन तालाबों को पानी से भरने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने नदी जोड़ो तालाब जोड़ो योजना के तहत प्रयास किये | दुखद पहलू ये है कि इनमे से अधिकाँश तालाब तक, अब भी नदी का पानी नहीं पहुँच पा रहा है |बान सुजारा बाँध से भूमिगत पाइप लाइनों से खेतों और गाँवों तक पानी पहुंचाने का जतन सरकार ने किया इसे आधुनिक तकनीकी का ही कमाल है कि अधिकाँश पाइप लाइने फूट रही हैं और खेतों और गाँवों तक पानी नहीं पहुंच रहा है | असल में बुंदेलखंड के सागर ,दमोह ,पन्ना , टीकमगढ़, निवाड़ी ,दतिया , क्षेत्र मध्य प्रदेश में आते हैं , जब कि झाँसी ,ललितपुर , बाँदा ,महोबा , हमीरपुर , उरई , जालौन , चित्रकूट उत्तर प्रदेश में आते हैं | देश के ये वो जिले हैं जो अपनी समृद्ध शाली परम्पराओं के कारण जाने जाते रहे हैं | मूलतः यह इलाका कृषि पर ही आधारित रहा है | पिछले तीन दशकों में यहां मौसम कुछ ऐसा मेहरबान रहा कि लोग एक दशक में आठ बार प्रकृति के प्रकोप के शिकार हुए | जिसके चलते लोगों को अलग अलग तरह की समस्याओं का समाना करना पद रहा है | ऐसा भी नहीं कि लोगों ने इस समस्या का अपने स्तर पर मुकाबला नहीं किया बांदा का जखनि गाँव इसका सबसे बड़ा उदाहरण है , जहाँ लोगों ने स्वयं जल संरक्षण , और वृक्षा रोपण की दिशा में सार्थक प्रयास किये जिसका उन्हें फायदा मिला | इस तरह की प्रेरणा और गाँव वालों को भी मिली है | ऐसे समय जबकि भूजल भी दिन प्रति दिन पाताल की और जा रहा है ,| केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट बताती है कि देश में 66 फीसदी जलाशयों में 40 फीसदी से भी कम पानी बचा है | मानसून अगर बिगड़ा तो खरीफ फसलों के लिए हालात चिंताजनक हो जाएंगे | नीति आयोग ने 2019 में एक रिपोर्ट में बताया था 2020 तक देश के 21 शहरो में भू जल समाप्त हो जाएगा | इस रिपोर्ट के बाद हड़कंप मच गया था | इन हालातों को देख कर केंद्र सरकार ने अटल भूजल योजना शुरू की थी | इसी साल अप्रेल में केंद्र की मोदी सरकार ने अमृत सरोवर योजना शुरू की है | जिसमे एक हेक्टेयर के तालाब में 10 क्यूबिक जल संरक्षण किया जाएगा | बुंदेलखंड में इस योजना से कितना लाभ होगा यह वक्त ही बताएगा |

26 मई, 2022

Famliy _ टूटते संयुक्त परिवार:: बढ़ते एकल परिवार

-डॉ. सौरभ मालवीय मनुष्य जिस तीव्र गति से उन्नति कर रहा है, उसी गति से उसके संबंध पीछे छूटते जा रहे हैं. भौतिक सुख-सुविधाओं की बढ़ती इच्छाओं के कारण संयुक्त परिवार टूट रहे हैं. माता-पिता बड़ी लगन से अपने बच्चों का पालन-पोषण करते हैं. उन्हें उच्च शिक्षा दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं. परिवार में लड़कियां हैं, तो वे विवाह के पश्चात ससुराल चली जाती हैं और लड़के नौकरी की खोज में बड़े शहरों में चले जाते हैं. इस प्रकार वृद्धावस्था में माता-पिता अकेले रह जाते हैं. इसी प्रकार शहरों में उनके बेटे भी अकेले हो जाते हैं. संयुक्त परिवार टूटने के कारण एकल परिवार बढ़ते जा रहे हैं. एकल परिवारों के कारण संबंध टूट रहे हैं. संयुक्त परिवारों में बहुत से रिश्ते होते थे. दादा-दादी, ताया-ताई, चाचा-चाची, बुआ-फूफा, नाना-नानी, मामा-मामी, मौसी-मौसा तथा उनके बच्चे अर्थात बहुत से भाई-बहन. बच्चे बचपन से ही इन सभी संबंधों को जानते थे, परन्तु अब एकल परिवारों में माता-पिता और उनके दो या एक बच्चे ही हैं. संयुक्त परिवार टूटने के अनेक कारण हैं. रोजगार के अतिरिक्त परिवार के सदस्यों में बढ़ते मतभेद, कटुता एवं स्वार्थ आदि के कारण भी एकल परिवार बढ़ते जा रहे हैं. ऐसी परिस्थितियों में व्यक्ति नितांत अकेला पड़ता जा रहा है. संयुक्त परिवार में समस्याएं सांझी होती थीं. व्यक्ति किसी कठिनाई या समस्या होने पर परिवार के सदस्यों के साथ विचार-विमर्श कर लेता था. इस प्रकार उसे समस्या का समाधान घर में ही मिल जाता था. संयुक्त परिवार के बहुत से लाभ हैं. परिवार के प्रत्येक सदस्य की सुरक्षा का दायित्व सबका होता है. किसी भी सदस्य की समस्या पूरे परिवार की होती है. यदि किसी को पैसे आदि की आवश्यकता है, तो पैसे बाहर किसी से मांगने नहीं पड़ते. परिवार के सदस्य ही मिलजुल कर सहयोग कर देते हैं. परिवार में सदस्यों की संख्या अधिक होने के कारण घर और बाहर के कार्यों का विभाजन हो जाता है. प्रत्येक सदस्य अपनी योग्यता और क्षमता के अनुसार कार्य कर लेता है तथा अन्य कार्यों से मुक्त रहता है. ऐसे में उसे अपने लिए पर्याप्त समय मिल जाता है. इसके अतिरिक्त संयुक्त परिवार में रसोई एक होने के कारण खर्च भी कम हो जाता है. उदाहरण के लिए दो या तीन एकल परिवार यदि संयुक्त परिवार के रूप में रहते हैं, तो उन्हें अधिक सामान की आवश्यकता होगी. थोक में अधिक सामान लेने पर वह सस्ता पड़ता है. इसी प्रकार तीन के बजाय एक ही फ्रिज से काम चल जाता है. ऐसी ही और भी चीजें हैं. परिवार के किसी सदस्य के बीमार होने पर उसकी ठीक से देखभाल हो जाती है. परिवार के सदस्य साथ रहते हैं, तो उनमें भावनात्मक लगाव भी बना रहता है. इसके अतिरिक्त बच्चों का पालन-पोषण भी भली-भांति आसानी से हो जाता है. उनमें अच्छे संस्कार पैदा होते हैं. वे यह भी सीख जाते हैं कि किस व्यक्ति के साथ किस प्रकार का व्यवहार करना चाहिए. इसमें बड़ों का सम्मान करना, अपनी आयु के लोगों के साथ मित्रवत व्यवहार करना तथा छोटों से स्नेह रखना आदि सम्मिलित हैं. आज परिस्थितियां पृथक हैं. मनुष्य किसी भी कठिनाई या किसी संकट के समय स्वयं को अकेला ही पाता है. यदि परिवार में महिला का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, तो तब भी उसे घर का सारा कार्य स्वयं करना पड़ता है, जबकि संयुक्त परिवार में अन्य महिलाएं होने के कारण उसे आराम करने का समय मिल जाता था. साथ ही उसकी भी उचित प्रकार से देखभाल भी हो जाती थी. एकल परिवार में अकेले पड़ जाने के कारण व्यक्ति अवसाद का शिकार हो जाता है. अवसाद एक मानसिक रोग है. इस अवस्था में व्यक्ति स्वयं को निराश अनुभव करता है. वह स्वयं को अत्यधिक लाचार समझने लगता है. ऐसी स्थिति में प्रसन्नता एवं आशा उसे व्यर्थ लगती है. वे अपने आप में गूम रहने लगता है. वह किसी से बात करना पसंद नहीं करता. हर समय चिड़चिड़ा रहता है. यदि कोई उससे बात करने का प्रयास करता है, तो वे क्रोधित हो जाता है. कभी वह उसके साथ असभ्य अथवा उग्र व्यवहार भी करता है. मनोचिकित्सकों के अनुसार अवसाद के भौतिक कारण भी होते हैं, जिनमें आनुवांशिकता, कुपोषण, गंभीर रोग, नशा, कार्य का बोझ, अप्रिय स्थितियां आदि प्रमुख हैं. अवसाद की अधिकता होने पर व्यक्ति आत्महत्या तक कर लेता है. अवसाद के कारण आत्महत्या करने के अप्रिय समाचार सुनने को मिलते रहते हैं. ऐसे विचलित करने वाले समाचार भी मिलते हैं कि अमुक व्यक्ति ने सपरिवार आत्महत्या कर ली या परिवार के सदस्यों की हत्या करने के पश्चात स्वयं भी आत्महत्या कर ली. कोरोना काल में जहां संयुक्त परिवारों के लोग एक-दूसरे के साथ मिलजुल कर रहे, वहीं एकल परिवारों के लोग अवसाद का शिकार होने लगे. ‘द लैंसेट पब्लिक हेल्थ’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में अवसाद एवं घबराहट की शिकायतें देखने को मिल रही है. सात दिन या उससे अधिक समय तक कोरोना वायरस संक्रमण से पीड़ित रहे लोगों में अवसाद एवं घबराहट की दर उन लोगों की तुलना में अधिक थी, जो संक्रमित रोगी कभी अस्पताल में भर्ती नहीं हुए अर्थात वे अपने परिजनों के मध्य ही रहे. रिपोर्ट के अनुसार सार्स-कोव-2 संक्रमण वाले ऐसे रोगी जो अस्पताल में भर्ती हुए उनमें 16 महीने तक अवसाद के लक्षण देखे गए, परन्तु जिन रोगियों को अस्पताल में भर्ती नहीं होना पड़ा, उनमें अवसाद और घबराहट के लक्षण दो महीने के भीतर ही कम हो गए. सात दिनों या उससे अधिक समय तक बिस्तर पर रहने वाले लोगों में 16 महीने तक अवसाद और घबराहट की समस्या 50 से 60 प्रतिशत अधिक थी. मनोचिकित्सकों के अनुसार अवसाद से निकलने के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति अपने परिजनों एवं मित्रों के साथ समय व्यतीत करे. किसी भी समस्या या संकट के समय परिजनों से बात करे. स्वयं को अकेला न समझे. सकारात्मक विचारों वाले व्यक्तियों से बात करे. परिजनों को भी चाहिए कि वे अवसादग्रस्त लोगों में सकारात्मक विचार पैदा करने का प्रयास करें, उन्हें अकेला न छोड़ें, क्योंकि ऐसे लोग आसानी से अपराध की ओर अग्रसर हो सकते हैं. उन्हें उनकी किसी भी नाकामी के लिए तानें न दें, अपितु उनको प्रोत्साहित करें तथा उनके आत्मविश्वास को बढ़ाएं. वास्तव में आज तकनीकी ने समस्त संसार के लोगों को जितना समीप कर दिया है, उतना ही एक-दूसरे से दूर भी कर दिया है. मोबाइल के माध्यम से व्यक्ति क्षण भर में विदेश में बैठे व्यक्ति से भी बात कर लेता है. परन्तु मोबाइल के कारण ही लोगों को परिवार के सदस्यों से बात करने का समय नहीं मिल पाता. प्रत्येक स्थान पर लोग अपने मोबाइल के साथ व्यस्त दिखाई देते हैं. परिणामस्वरूप व्यक्ति का अकेलापन बढ़ता जा रहा है. व्यक्ति व्यक्ति से दूर होता चला जा रहा है. आवश्यकता है सामूहिक संवाद की प्रत्यक्ष संवाद मन से भाव से विचार से हमे जोड़ता है दुख :सुख में सहायक होकर साथ होने की अनुभूति प्रदान करता है। ( लेखक- हैपीनेस/ अनुभूति कार्यक्रम के प्रभारी है- बेसिक शिक्षा, उत्तर- प्रदेश )

22 मई, 2022

Univrsity_विश्वविद्यालय में महराजा कालेज का संविलयन हुए 8 माह यू जी सी को जानकारी देंगे तीन साल की

 विश्वविद्यालय में  महराजा कालेज का संविलयन हुए 8 माह यू जी सी को जानकारी देंगे तीन साल की 

रवीन्द्र व्यास 

 छतरपुर  //  महराजा छत्रसाल  विश्वविद्यालय  अपने अस्तित्व के साथ ही विवादों का पर्याय रहा है | मामला चाहे जिस तरह का हो विवादों से इसका स्थाई नाता सा बन गया है | हाल ही में एक नया मामला सामने आया है जिसमे बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय किस तरह से यू जी सी को भ्रमित करने का षड्यंत्र रच रहा है | अब ये विश्वविद्यालय का षडयंत्री कारी कदम है अथवा विश्विद्यालय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की कोई योजना | यह जांच का विषय हो सकता है | 

     सन 2015 में   यह महराजा छत्रसाल   विश्वविद्यालय अस्तित्व में आया था, ऑटोनॉमस महाराजा कॉलेज को छोड़कर  संभाग के सभी 190 शासकी / अशासकीय कॉलेज जोड़े गए थे  विश्वविद्यालय  में  यू टी डी विभाग ना होने के कारण विश्वविद्यालय  2015 से 2021 तक सिर्फ परीक्षाओं का संचालन करता रहा|  मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा  विभाग ने पत्र क्र एफ 73 -4/2021 /38 -3  दिनांक  24 सितंबर 2021 को आदेश जारी कर महाराजा ऑटोनॉमस कॉलेज को विश्वविद्यालय में विलय करने का आदेश दिया | कुलसचिव ने 27/9/2021 को इसकी अधिसूचना जारी कर शासकीय महाराजा स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय छतरपुर के समस्त संसाधन (समस्त चल अचल संपत्ति)  समस्त अस्तियाँ  अभिलेख दायित्व तथा महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्र सत्र 2021-22 में महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय छतरपुर स्वीकार कर लिए  है | तथा महाविद्यालय छतरपुर  कार्यरत समस्त अधिकारी कर्मचारियों को महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय छतरपुर में संविलय कर लिया गया | इसकी जानकारी यू जी सी को नहीं दी गई |  

 27/9/2021 के बाद विश्वविद्यालय में कार्य की सभी विभागों को वरिष्ठता अनुसार विभाग अध्यक्ष तथा टीम बनाकर यूटीडी विभागों का संचालन  शुरू  किया गया | महराजा महाविद्यालय के विश्वविद्यालय में संविलयन के बाद महराजा छत्रसाल विश्वविद्यालय प्रदेश में सर्वाधिक छात्र संख्या वाला विश्विद्यालय  बन गया | पर विश्व विद्यालय के पास स्वयं के स्वामित्व का कोई भवन नहीं है , प्रोफ़ेसर भी प्रतिनयुक्ति पर हैं जिनका वेतन शासकीय कन्या महाविद्यालय से निकलता है | 

अब  23 -24 मई को यू जी सी का निरीक्षण दल विश्वविद्यालय के 12 (बी) के   निरीक्षण  हेतु आ रहा है | यूजीसी का 12( वीं) के  नियम  है कि किसी भी विश्वविद्यालय में जब यूटीडी का संचालन 3 वर्ष पूर्ण

 कर लेता है  तब उसका निरीक्षण किया जाता है | यह नियम कई सवाल खड़े करता है कि जब महविद्यालय  संविलयन 27 सितम्बर 2021 को किया गया , उसके बाद विश्वविद्यालय में कार्य की सभी विभागों को वरिष्ठता अनुसार विभाग अध्यक्ष तथा टीम बनाकर यूटीडी विभागों का संचालन शुरू  किया| इस आधार पर तो यू टी डी के संचालन को मात्र ८ माह ही हुए हैं | फिर ये तीन साल की रिपोर्ट किस आधार पर देंगे | ये भी दिलचस्प है कि   फरवरी 2021 में  उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने विश्वविद्यालय  में पांच विषयों मे स्नातकोत्तर  यूटीडी कक्षाओं का द्घाटन किया था | जिसमे 25_25 छात्रों  को प्रवेश दिया गया था | विश्व विश्वविद्यालय में 6 मा पूर्व ही  यूटीडी विभाग एवं संकाय के डीन बनाए गए हैं |

  यहां यह भी दिलचस्प है कि  16 मार्च  2022 को  विश्वविद्यालय ने जब  अपना प्रथम दीक्षांत समारोह आयोजित किया  था , उस समय महाराजा ऑटोनॉमस कॉलेज के मेरिट वाले छात्रों को उसमें शामिल नहीं किया गया था | कहा गया था  इनकी अंकसूची और छात्र यूटीडी  के नहीं हैं |  जबकि  संभाग के सभी कालेजों के स्नातकोत्तर कक्षाओं के मेरिट चार वाले छात्रों को राज्यपाल तथा उच्च शिक्षा मंत्री ने  गोल्ड मेडल तथा डिग्री प्रदान की थी | अब वही  कुलपति महोदय  सभी कालेज के विभागों के पिछले 3 वर्षों के परीक्षा परिणाम अकादमी की उपलब्धियां जिसमें सेमिनार, बेविनार , स्पोर्ट्स ,एनसीसी, एनएसएस की उपलब्धियों को 12वीं के प्रोफार्मा में भरकर जानकारी  मांग रहे हैं |

               16 मार्च 2022 को छतरपुर के महराजा छत्रशाल बुंदेलखंड विश्व विद्यालय का  प्रथम दीक्षां समारोह आयोजित हुआ समारोह में  कुलाधिपति और मध्य प्रदेश के राजयपाल मंगू भाई पटेल ने कहा था कि  विश्वविद्यालय की पहचान भवन भौतिक संसाधन से नहीं होती,, ल्कि वहां के संस्कारित छात्रों और शिक्षक से होती है |  शायद प्रदेश के कुलाधिपति और महामहिम राज्यपाल का यह ज्ञान छात्रों के लिए था  गुरु जी के लिए नहीं था |  

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

  बुंदेलखंड की डायरी  विकास की उमंग और चुनौतियों के  संघर्ष का  बुंदेलखंड  रवीन्द्र व्यास  दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए    2025  में कई...