बुंदेलखंड
की डायरी
अब
बुंदेलखंड भी पानी दार बनेगा
नव
वर्ष में मिलेगी केन बेतवा की सौगात
रवीन्द्र
व्यास
शनिवार
के दिन शरू होने वाला नव वर्ष 2022 ज्योतषीय गणना के हिसाब से उथल पुथल
भरा होगा | ज्योतिष का आंकलन जो भी हो पर २०२२ बुंदेलखंड के लिए नई सौगात लेकर आ
रहा है | बहुप्रतीक्षित केन-बेतवा लिंक परियोजना का
शिलान्यास और झाँसी- खजुराहो राष्ट्रीय राजमार्ग का लोकार्पण 2022 की 10 जनवरी को
होना तय माना जा रहा है | झाँसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से
इन दोनों योजनाओ के अलावा ग्वालियर रोड ओवरब्रिज का शिलान्यास कराने की भी तैयारी की जा रही है। ये अलग बात है कि अटल जी की इस योजना को धरातल पर उतरने के लिए 18 वर्ष इन्तजार करना पड़ा और योजना की लागत 7 -8 गुना ज्यादा हो गई | जंगल तब भी उजड़ना थे जंगल अब भी उजड़ेंगे , पर इन १८ वर्षों में नए जंगल भी विकसित हो सकते थे |
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने केन
-बेतवा लिंक परियोजना के लिए हरी झंडी महोबा की जन सभा में ही दे दी थी | 19
नवम्बर को महोबा में अर्जुन सहायक सिचाई परियोजना के लोकार्पण के मौके पर
मोदी जी महोबा आये थे | यहाँ उन्होंने स्पष्ट कह दिया था की केन बेतवा लिंक
परियोजना का समाधान भी हमारी ही सरकार ने निकाला है | उनके इस कथन के बाद लोगों ने
अनुमान लगाया था की दिसंबर माह में परियोजना का शिलान्यास होगा| दिसंबर माह की
शुरुआत में इस योजना को केंद्र सरकार से अनुमति मिली |
8 वर्ष में पूर्ण होने वाली इस
परियोजना पर 44605 करोड़ रु व्यय होंगे | मध्य प्रदेश की नदियों पर 7 बाँध और
उत्तर प्रदेश में दो बैराज बनाये जाएंगे | योजना के प्रथम चरण में मुख्य
बाँध छतरपुर जिले में पन्ना टाइगर रिजर्व में केन नदी पर 1233 मीटर लंबा और 72 मीटर ऊंचा बाँध ढ़ोड़न गांव में बनेगा | बांध बनने
से लगभग 9000 हेक्टेयर पन्ना रिजर्व टाइगर का क्षेत्र जलमग्न हो जाएगा |
यहां से 221 किमी लम्बी
लिंक केनाल के माध्यम से बेतवा नदी को बरुआसागर में जोड़ा जाएगा
| योजना से 103 मेगावाट हाइड्रो पावर और 27 मेगावाट सोलर पावर का उत्पादन होगा
| मध्य प्रदेश के पन्ना, टीकमगढ़, छत्तरपुर, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी
और उत्तर प्रदेश के बांदा, महोबा, झांसी व ललितपुर जिलों को लाभ मिलेगा | इन 12 जिलों की 10 लाख 62 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी ,करीब 62 लाख लोगों को पीने का पानी मिल सकेगा | योजना पर 90 फीसदी व्यय केंद्र सरकार करेगी जबकि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकार 5 -5 फीसदी व्यय करेंगी | केन-बेतवा परियोजना से रवि फसलों लिए ( नवंबर से अप्रैल ) एमपी
को 1834 एमसीएम और यूपी को 750 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलेगा।
यूपी के बुंदेलखंड के महोबा, हमीरपुर, झांसी और ललितपुर में 21 लाख मिलियन क्यूबिक पेयजल, जबकि बांदा, झांसी, महोबा, हमीरपुर और ललितपुर में 2.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई का पानी मिलेगा।
पानी पर फसाद
देश में कहीं बाढ़ और कहीं सूखे की स्थिति को देखते हुए अटल जी के प्रधानमंत्रित्व काल में देश की 37 नदियों को आपस मेंजोडने का फैसला लिया गया था | , नदियों को आपस में
जोडने पर 5 लख 60 हजार करोड़ रु .व्यय होने का अनुमान लगाया गया था |
केन
-बेतवा लिंक परियोजना देश की वह
परियोजना है जिसे सबसे पहले शुरू होना था | पर इस परियोजना को लेकर शुरू से ही विवाद की स्थितियां बनती रही | 2005 से यह योजना ही विवादों में रही |
इस
परियोजना के विवाद का सबसे बड़ा मुख्य कारण रहा पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र में
बनने वाला ढ़ोड़न बाँध | केन नदी पर 19633 वर्ग कि.मी. जलग्रहण छमता वाले इस मुख्य बाँधमें 2853 एम्.सी.एम्.पानी भंडारण कि छमता होगी| इस बाँध के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व कि 5258 हेक्टेयरजमीन सहित कुल 9 हजार हेक्टेयर जमीन डूब जाएगी | इस जमीन पर बसे
डोंडन , सुकुवाहा ,भावरखुवा ,घुगारी ,वसोदा ,कुपी,शाहपुरा ,पल्कोहा ,खरयानी,और मेनारी गाँव का अस्तित्वसमाप्त हो जाएगा | बाँध से 221 कि.मी.लम्बी मुख्य नहर उत्तर प्रदेश के बरुआ सागर में जाकरमिलेगी | इस नहर से 1074 एम्.सी.एम्. पानी प्रति वर्ष भेजा जाएगा ,जिसमेसे 659 एम्.सी.एम्. पानी बेतवा नदी में पहुंचेगा |
परियोजना का पहला विवाद टाइगर रिजर्व क्षेत्र को लेकर ही हुआ था | तमाम एनजीओ ने आपत्ति लगाईं थी , मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था | जब तमाम अनुमतियाँ से निजात मिल गई ,तो पानी के लिए फसाद उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच शुरू हो गया | यह विवाद भी तब निपटा जब केंद्र की सरकार ने हस्तक्षेप किया | विश्व जल दिवस के मौके पर हुए त्रिपक्षीय समझौते में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच पानी के बटवारे को लेकर सहमति बनी |
कहाँ
कहाँ बनेगे बाँध
ढोंडन बाँध के अलावा तीन और बाँध भी मध्य प्रदेश कि जमीन पर बेतवा नदी पर बनेंगे |रायसेन , विदिशा जिले में बनने वाले मकोडिया बाँध से 5685 हेक्टेयर क्षेत्र में,बरारी बेराजसे 2500 हे.वा केसरी बेराज से 2880 हे. क्षेत्र में सिचाई होगी | लिंक नहर से मार्गोंमें 60294 हे. क्षेत्र सिंचित होगा ,इसमे मध्यप्रदेश के 46599 हे. वा उत्तर प्रदेशके 13695 हे.क्षेत्र में सिचाई होगी | ढोंडन बाँध से छतरपुर और पन्ना जिले कि 3.23 लाख हे.जमीन सिंचित होगी होने का दावा किया जा रहा है ।
क्या
क्या हुआ
परियोजना के
सर्वेक्षण कार्य करोड़ों खर्च | 2008 में
योजना का प्रारूप हुआ तैयार | वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार को निर्देश परियोजना का
कार्य समय सीमा में किया जाए। वर्ष 2016 में पर्यावरणीय स्वीकृति सरकार को
मिली| पन्ना टाइगर रिजर्व के 5500 हेक्टेयर क्षेत्र डूब में
आने पर , नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ ने सशर्त अपनी सहमति दे दी है। वर्ष 2017 में फिर से परियोजना को लेकर कार्य शुरु जरूर हुआ । यूपी और एम् पी के बीच पानी के बटवारे को लेकर विवाद शुरू हो गया , अपनी
अधिकाँश भूमि डूब क्षेत्र में देने वाले मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश सरकार समझौते
से ज्यादा पानी मांगने लगी यूपीको 700 एमसीएम पानी दिया जाना था , लेकिन उत्तर प्रदेश 930 एमसीएम पानी मांगने लगा था | ,
असर
बाँध के बनने से बुंदेलखंड के 62 लाख लोगों को पीने का पानी उपलब्ध हो सकेगा | वहीँ 10 लाख 62 हजार हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा | शासकीय तंत्र यह भी दावा कर रहा है की बुंदेलखंड में परिवहन के बेहतर होते संसाधनों के साथ पानी की पर्याप्तता विकाश को नै दिशा में ले जाएगा , इस कारण अब उद्योग स्थापित करने वालों को भी सहूलियत होगी | इस परियोजना का मुख्यालय भी झांसी में बनाये जाने की योजना जरूर एम् पी के लिए चिंतनीय है |
बाँध को बनाने के लिए सरकार 9 हजार हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करेगी |, इस भूमि में अकेले टाइगर रिजर्व की 5258 हेक्टेयर भूमि जा रही है । टाइगर रिजर्व के लगभग 13 लाख पेड़ डूब जाएंगे , मानव और वन्य जीव पर ख़तरा होगा सो अलग । जिन बाघों से इस इलाके का नाम दुनिया में रोशन हो रहा है उनके घर भी छिन जाएंगे ।