बुंदेलखंड की डायरी

बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर सक्रीय हुए संगठन
रवीन्द्र व्यास
जब घर में विवाद होने लगे परिवार में असमानता का व्यवहार होने लगे तो घर के भाई भाई में बटवारा हो जाता है | कुछ ऐसे ही हालात बुंदेलखंड में पिछले कई सालों से पनप रहे हैं | दो राज्यों में विभाजित बुंदेलखंड को एक करने और उसे अलग राज्य बनाने की मांग फिर एक बार जोर मार रही है | इस जोर आजमाइस के पीछे भी बीजेपी वा ,उमा भारती का 2014 का चुनावी आश्वासन और मायावती के शासन काल में पृथक बुंदेलखंड राज्य के लिए उत्तर प्रदेश में प्रस्ताव पारित करना मुख्य कारण बताये जा रहे हैं |अलग राज्य की मांग को लेकर कहीं लोग सर मुंडवा रहे हैं तो कहीं पी एम् मोदी जी के नाम पत्र लिखे जा रहे हैं ,तो कहीं इंटर कालेज की छात्राये पी एम् मोदी जी को राखी भेज कर अलग राज्य की मांग कर रही हैं | दूसरी तरफ मध्यप्रदेश क्षेत्र के बुंदेलखंडी निर्विकार भाव से अलग राज्य की मांग को समझने का जतन कर रहे हैं |
बुंदेलखंड का नाम लेते ही लोगों के जेहन में जो तस्वीर उभरती है वह बदहाली और बेबसी कीहोती है| संपन्न धरा के लोग बेबसी से मुक्ति का रास्ता अलग राज्य में तलाशते हैं |इसके पीछे बड़ा कारण जो उभर कर सामने आया है , वह बुंदेलखंड के साथ हुए असमानता के व्यवहार को जिम्मेदार माना जाता है | असमानता का यह राजनैतिक षड्यंत्र उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में समान रूप से रहा है | जिसके चलते बुंदेलखंड की संम्पन्न धरा के लोग सियासत दानो के सामने लाचार और बेबस हो गए | दोनों प्रदेशो की राज्य सरकारें बुंदेलखंड इलाके से बेशकीमती खनिजों ,जंगल ,जमीन और जल का दोहन तो करती रही बदले में मिला कुछ नहीं | रोजगार के नाम पर बाहरी लोगों को नोकरिया , बिजली बुंदेलखंड में बनी रोशन हुए महानगर , खजुराहो के अलावा , पर्यटन की अपार संभावनाओं के बावजूद बुंदेलखंड के पर्यटन को कभी महत्व नहीं दिया गया |प्रचार खूब हुआ अब ये होगा बुंदेलखंड में पर जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने रहे |

दरअसल सरकारों की रीति नीतियों ने बुंदेलखंड से छलावा ही किया है | बुंदेलखंड में खेती के अलावा भी अपनी कमाई के साधन थे , छोटे -छोटे कुटीर उद्योग थे , जो लोगों की जरुरत को पूर्ण करने के साथ अपने परिवार का भरण पोषण करने में लोगों को सक्षम बनाते थे | यहां बने जूतों का जिक्र करते हुए कृषि पंडित की उपाधि से विभूषित राजेंद्र मेहतों बताते हैं कि जब राजेंद्र प्रसाद जी देश के राष्ट्रपति थे उस समय कृषि के एक कार्यक्रम में हम लोगों को राष्ट्रपति भवन जाने का मौका मिला | इस मौके पर हम भी अपने बुंदेली परिधान में गए थे | वहा तैनात अधिकारियों को हमारे जूते (पनाइयाँ ) इतनी पसंद आई की वह उसके मुँह मांगे दाम देने की बात करने लगे , खैर हमने उन्हें वह जूते अपनी तरफ से भेंट स्वरुप दे दिए | यहां का पीतल उद्योग , , , सन सुतली उद्योग , हस्त निर्मित कागज़ उद्योग , लोहा निर्माण का उद्योग , शिल्पकारी का कारोबार दम तोड़ चुका है | कभी यहां के बुनकर इतने संम्पन्न थे की उनके पास किसी तरह की कमी नहीं थी , इसी तरह पान की खेती से लोग मालामाल थे | आज बुनकर और पान किसान मजदूरी को मजबूर हैं |
1857 की क्रान्ति के पहले जिस बुंदेलखंड में आजादी की शोले भड़कने शुरू हो गए थे ,उसी बुंदेलखंड में अलगबुंदेलखंड राज्य के लिए अब शोले भड़कने लगे हैं | बुंदेलखंड राज्य निर्माण के लिए अलग अलग सत्याग्रहअभियान पिछले कई वर्षो से जारी है | सत्याग्रह के इस अभियान में स्थानीय लोगों के अलावा कांग्रेस , सपा ,बसपा ,और बीजेपी के लोग खुल कर समर्थन दे रहे हैं |पर पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग पर जितना जोर उत्तर प्रदेश वाले बुंदेलखंड इलाके में है उसका 10 फीसदी भी जोर मध्य प्रदेश वाले बुंदेलखंड इलाके में नहीं दिखता |
अब तो इस अभियान में स्कूली छात्राये भी मैदान में आ गई हैं | महोबा नगर सहित इस जिले के कई गाँवों की हजारों बेटियों ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को राखी भेजी |महोबा जिले से लगभग 10 हजार राखियां प्रधान मंत्री मोदी जी के नाम भेजी गई | इन बच्चियों ने मोदी जी से राखी की लाज रखने की अपील करते हुए अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग की है । महोबा के साहित्यकारों ने भी अखिल भारतीय साहित्य परिषद के बैनर तले पृथक बुंदेलखंड राज्य के समर्थन में प्रधानमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा और आंदोलन का समर्थन किया।
उत्तर प्रदेश के महोबा नगर में २८ जून से बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर यहां के प्रमुख समाज सेवी तारा पाटकर अनिश्चित कालीन अनशन चला रहे हैं | उनके इस अभियान स्थानीय के साथ साथ बुंदेलखंड के अन्य जिलों से भी भरपूर सहयोग मिल रहा है | पिछले दिनों यहां के ढाई सौ से ज्यादा लोगों ने सर मुंडवाकर पृथक बुंदेलखंड राज्य के आंदोलन का समर्थन किया था | बजरंग दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणवीर पटेरिया भी अपने समर्थकों के साथ अनशन स्थल पर पहुँच कर अलग राज्य की मांग का समर्थन कर चुके हैं |
असल में पृथक बुंदेलखंड राज्य के मुद्दे पर बीजेपी नेता उमा भारती ने 2014 के चुनाव में वायदा किया था की तीन माह मेंअलग राज्य बनवा दूंगी | तीन माह की जगह चार साल हो गए पर उमा जी का वायदा भी मोदी जी के चुनावी जुमले सेज्यादा कुछ नहीं बन पाया | बुंदेलखंड के लोगों को उमा भारती के अलग राज्य के वायदे पर भरोषा इस कारण भी हो गयाक्योंकि बीजेपी के अटल जी और आडवाणी जी के समय के घोषणा पत्रों में छोटे राज्यों की बात की गई थी | बुन्देलखंडियोंको लगा जो दल ही छोटे राज्यों की बात करता हो उसकी नेता भला क्यों झूठ बोलेगी | पर वह दौर कुछ और था और ये दौरकुछ और है | इस दौर में कुर्सी के लिए बीजेपी का चाल चरित्र और चेहरा सब बदल गया है | अब जो इनकी बातों परविश्वास करे वह गलती विश्वास करने वालों की मानी जायेगी |
मध्य प्रदेश वाले इलाके से सबसे पहले अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग टीकमगढ़ रियासत के राजा वीरसिह ने उठाई थी। टीकमगढ़ से पं बनारसी दास चतुर्वेदी ने बुंदेलखंड राज्य की इस मांग को अपनी पत्रिका मधुकर मे प्रमुखता से प्रकाशितभी किया था । आजादी के बाद बुंदेलखंड राज्य भी बना और उसकी राजधानी भी वर्तमान मध्य प्रदेश के नौगांव मे बनाईगई थी । पं राम सहाय तिवारी इसके पहले प्रधानमंत्री बने थे । राज्य के पुनर्गठन के बाद बुंदेलखंड राज्य भी इतिहास मेदफन हो गया । विन्ध्य प्रदेश फिर मध्य प्रदेश मे बुंदेलखंड का एक बड़ा हिस्सा जोड़ दिया गया । और आधा भाग उत्तरप्रदेश में जोड़ दिया गया था । इस विभाजन के पीछे भी एक तरह का राजनैतिक षड्यंत्र ही था | आजाद भारत के बड़े नेता नहीं चाहते थे की संख्या बल में बुंदेलखंड का महत्व बड़े , यदि इस इलाके के ज्यादा विधायक या सांसद हो गए तो वे सरकार पर प्रभावी हो जाएंगे |
बुंदेलखंड के विभाजन और असमानता ने लोगो को अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग के लिए मजबूर किया । उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके वाले जिले झाँसी ,ललितपुर ,महोबा ,बांदा ,हमीरपुर ,चित्रकूट और जालौन में अपनी जड़ें जमा चुका बुंदेलखंड राज्य का आंदोलन इस चुनावी सीजन में मध्य प्रदेश में अपनी दस्तक देगा | इसके लिए अलग राज्य की मांग करने वाले आधा दर्जन से ज्यादा संगठनों ने एक संयुक्त मोर्चा भी बना डाला है | जिसमे बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा, बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा ,राज्य निर्माण सेना ,क्रान्ति सेना ,विकाश सेना ,क्रान्ति दल और बुंदेली समाज जैसे संगठन इस अभियान में जुटे हैं| हालांकि कहा यह जा रहा है कि बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा 17 सितम्बर से मध्य प्रदेश के सागर,दमोह ,छतरपुर ,टीकमगढ़,पन्ना और दतिया में आंदोलन चलाएगा | इस आंदोलन में ऐसे राजनैतिक दल को वोट ना देने की अपील भी की जायेगी जो बुंदेलखंड राज्य का समर्थन नहीं करते |
जिस संयुक्त मोर्चा के नाम पर अलग बुंदेलखंड राज्य का जाप किया जा रहा है , उस मोर्चा के प्रारम्भिक चरण में ही मोर्चा लग गया है | संयुक्त मोर्चा की बात करने वाले भानु सहाय जो कि बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भी हैं ,अकेले ही छतरपुर और टीकमगढ़ में बैठक कर गए | जाहिर है की ये यदि मोर्चा के कुछ संगठन के पदाधिकारियों को लेकर जाते तो उसका प्रभाव कुछ अलग होता | उनके इस कदम से संयुक्त मोर्चा बिखरने लगा है | ये अलग बात है की बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर सक्रीय संगठनों के पदाधिकारी पृथक राज्य के लिए समर्पण के साथ जुटे हैं |








