30 अगस्त, 2018

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बुंदेलखंड की डायरी 

बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर सक्रीय हुए संगठन 

रवीन्द्र व्यास 

जब घर में विवाद होने लगे परिवार में असमानता  का व्यवहार होने लगे तो घर के भाई भाई में बटवारा हो जाता है | कुछ ऐसे ही हालात बुंदेलखंड में पिछले कई सालों से पनप रहे हैं | दो राज्यों में विभाजित बुंदेलखंड को एक करने और उसे अलग राज्य बनाने की मांग फिर एक बार जोर मार रही है | इस जोर आजमाइस के पीछे भी  बीजेपी वा ,उमा भारती का 2014 का चुनावी  आश्वासन  और मायावती के शासन काल में पृथक बुंदेलखंड राज्य के लिए उत्तर प्रदेश में प्रस्ताव पारित करना मुख्य कारण बताये जा रहे हैं |अलग राज्य की मांग को लेकर  कहीं लोग सर मुंडवा रहे हैं तो कहीं पी एम् मोदी जी के नाम पत्र लिखे जा रहे हैं ,तो कहीं इंटर कालेज की छात्राये पी एम् मोदी जी को राखी भेज कर अलग राज्य की मांग कर रही हैं | दूसरी तरफ मध्यप्रदेश क्षेत्र के बुंदेलखंडी निर्विकार भाव से अलग राज्य की मांग को  समझने का जतन कर रहे हैं | 
                                      बुंदेलखंड  का नाम लेते ही लोगों के जेहन में जो तस्वीर उभरती है वह बदहाली  और बेबसी कीहोती हैसंपन्न धरा के लोग बेबसी से मुक्ति का रास्ता अलग राज्य में तलाशते हैं |इसके पीछे  बड़ा कारण जो उभर कर सामने आया है , वह बुंदेलखंड के साथ हुए   असमानता के   व्यवहार को जिम्मेदार माना जाता  है | असमानता का यह राजनैतिक षड्यंत्र  उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में समान  रूप से रहा  है  |  जिसके चलते बुंदेलखंड की संम्पन्न धरा के लोग सियासत  दानो के सामने लाचार और बेबस हो गए | दोनों प्रदेशो की राज्य सरकारें बुंदेलखंड इलाके से बेशकीमती  खनिजों   ,जंगल ,जमीन और जल का दोहन  तो करती रही  बदले में मिला कुछ नहीं | रोजगार के नाम पर बाहरी लोगों को नोकरिया , बिजली बुंदेलखंड में बनी रोशन हुए  महानगर , खजुराहो के अलावा , पर्यटन की अपार संभावनाओं के बावजूद  बुंदेलखंड  के पर्यटन को कभी महत्व नहीं दिया गया |प्रचार खूब हुआ अब ये होगा  बुंदेलखंड में पर जमीनी  स्तर पर हालात जस के तस बने रहे | 
 


 दरअसल सरकारों की रीति  नीतियों ने बुंदेलखंड से छलावा ही किया है |  बुंदेलखंड  में खेती के अलावा भी   अपनी कमाई के साधन थे , छोटे -छोटे कुटीर उद्योग थे , जो लोगों की जरुरत को पूर्ण करने के साथ अपने परिवार का भरण पोषण करने में लोगों को सक्षम बनाते थे | यहां बने जूतों का जिक्र करते हुए कृषि पंडित की उपाधि से विभूषित राजेंद्र मेहतों बताते हैं कि  जब राजेंद्र प्रसाद जी देश के राष्ट्रपति थे उस समय कृषि के एक कार्यक्रम में हम लोगों को राष्ट्रपति भवन जाने का मौका मिला | इस मौके पर हम भी अपने बुंदेली परिधान में गए थे | वहा तैनात  अधिकारियों  को हमारे जूते (पनाइयाँ ) इतनी पसंद आई की वह उसके मुँह मांगे दाम देने की बात करने लगे , खैर हमने उन्हें वह जूते  अपनी तरफ से भेंट स्वरुप दे दिए | यहां का पीतल उद्योग ,  , , सन  सुतली उद्योग , हस्त निर्मित कागज़ उद्योग ,  लोहा निर्माण का उद्योग , शिल्पकारी  का कारोबार  दम तोड़   चुका है | कभी यहां के   बुनकर इतने संम्पन्न थे की उनके पास  किसी तरह की कमी नहीं थी , इसी तरह पान की खेती से लोग मालामाल थे | आज बुनकर और पान किसान  मजदूरी को मजबूर हैं |   
                      1857 की क्रान्ति के पहले जिस बुंदेलखंड में आजादी की शोले भड़कने शुरू हो गए थे  ,उसी बुंदेलखंड में  अलगबुंदेलखंड राज्य के लिए अब शोले भड़कने लगे हैं | बुंदेलखंड राज्य  निर्माण के लिए अलग अलग  सत्याग्रहअभियान  पिछले कई वर्षो से जारी है |  सत्याग्रह के इस अभियान में स्थानीय लोगों के अलावा कांग्रेस , सपा ,बसपा ,और बीजेपी के  लोग खुल कर समर्थन दे रहे हैं |पर पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग  पर जितना जोर उत्तर प्रदेश वाले बुंदेलखंड इलाके में है उसका 10 फीसदी भी जोर मध्य प्रदेश वाले बुंदेलखंड इलाके में नहीं दिखता |
 
 अब तो इस अभियान में स्कूली छात्राये भी मैदान में आ गई हैं | महोबा  नगर सहित इस जिले के कई गाँवों की हजारों बेटियों ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को राखी भेजी |महोबा जिले से लगभग 10 हजार राखियां प्रधान मंत्री मोदी जी के नाम भेजी गई |   इन बच्चियों  ने मोदी जी से राखी की लाज रखने की अपील करते हुए  अलग  बुंदेलखंड राज्य की मांग की है ।  महोबा   के साहित्यकारों ने भी अखिल भारतीय साहित्य परिषद के बैनर तले पृथक बुंदेलखंड राज्य के समर्थन में प्रधानमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा और आंदोलन का समर्थन किया। 
उत्तर प्रदेश के महोबा नगर में २८ जून से बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर यहां के प्रमुख समाज सेवी तारा पाटकर अनिश्चित कालीन अनशन चला रहे हैं | उनके इस अभियान  स्थानीय के साथ साथ बुंदेलखंड के अन्य जिलों से भी भरपूर सहयोग मिल रहा है | पिछले दिनों यहां के ढाई सौ से ज्यादा लोगों ने सर मुंडवाकर पृथक बुंदेलखंड राज्य के आंदोलन का समर्थन किया था | बजरंग दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणवीर पटेरिया भी अपने समर्थकों के साथ अनशन स्थल पर पहुँच कर अलग राज्य की मांग का समर्थन कर  चुके हैं |
 
असल में पृथक बुंदेलखंड राज्य के मुद्दे पर बीजेपी नेता  उमा भारती ने 2014 के चुनाव में वायदा किया था की तीन माह मेंअलग राज्य बनवा दूंगी | तीन माह की जगह  चार  साल हो गए पर उमा जी का  वायदा भी   मोदी जी के चुनावी जुमले सेज्यादा कुछ नहीं बन पाया | बुंदेलखंड के लोगों को उमा भारती के अलग राज्य के वायदे पर भरोषा इस कारण भी हो गयाक्योंकि बीजेपी के अटल जी और आडवाणी जी के समय के घोषणा पत्रों में छोटे राज्यों की बात की गई थी | बुन्देलखंडियोंको लगा जो दल ही छोटे राज्यों की बात करता हो उसकी नेता भला क्यों झूठ बोलेगी | पर वह दौर कुछ और था और ये दौरकुछ और है | इस दौर में कुर्सी के लिए बीजेपी का  चाल चरित्र और चेहरा सब बदल गया है |  अब जो इनकी बातों परविश्वास करे वह गलती   विश्वास करने वालों  की मानी जायेगी |
    मध्य प्रदेश वाले इलाके से सबसे पहले  अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग  टीकमगढ़ रियासत के राजा वीरसिह ने  उठाई थी टीकमगढ़ से पं बनारसी दास चतुर्वेदी ने बुंदेलखंड राज्य की  इस मांग को  अपनी पत्रिका मधुकर मे प्रमुखता से प्रकाशितभी किया था ।  आजादी के बाद बुंदेलखंड राज्य भी बना और उसकी राजधानी भी वर्तमान मध्य प्रदेश के नौगांव मे बनाईगई थी  पं राम सहाय तिवारी इसके पहले प्रधानमंत्री बने थे  राज्य के पुनर्गठन के बाद बुंदेलखंड राज्य भी  इतिहास मेदफन हो गया  विन्ध्य प्रदेश फिर मध्य प्रदेश मे बुंदेलखंड का एक बड़ा हिस्सा जोड़ दिया गया  और आधा भाग उत्तरप्रदेश में जोड़ दिया गया था  इस विभाजन के पीछे भी एक तरह का राजनैतिक षड्यंत्र ही था | आजाद भारत के  बड़े नेता नहीं चाहते थे की संख्या बल में बुंदेलखंड का महत्व बड़े , यदि इस इलाके के ज्यादा  विधायक या सांसद हो गए तो वे सरकार पर प्रभावी हो जाएंगे | 
बुंदेलखंड के विभाजन  और  असमानता ने लोगो को   अलग  बुंदेलखंड राज्य की मांग के लिए मजबूर किया  उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके वाले जिले झाँसी ,ललितपुर ,महोबा ,बांदा ,हमीरपुर ,चित्रकूट और जालौन में अपनी जड़ें जमा चुका बुंदेलखंड राज्य का आंदोलन  इस चुनावी सीजन में मध्य प्रदेश में अपनी दस्तक देगा | इसके लिए अलग राज्य की मांग करने वाले आधा दर्जन से ज्यादा संगठनों ने एक संयुक्त मोर्चा भी बना डाला है | जिसमे बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा, बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा ,राज्य निर्माण सेना ,क्रान्ति सेना ,विकाश सेना ,क्रान्ति दल और बुंदेली समाज जैसे संगठन इस अभियान में जुटे हैं| हालांकि कहा यह जा रहा है कि बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा 17 सितम्बर से मध्य प्रदेश के सागर,दमोह ,छतरपुर ,टीकमगढ़,पन्ना और दतिया में आंदोलन चलाएगा | इस आंदोलन में ऐसे राजनैतिक दल को वोट ना देने की अपील भी की जायेगी जो बुंदेलखंड राज्य का समर्थन नहीं करते | 
जिस संयुक्त मोर्चा के नाम पर अलग बुंदेलखंड राज्य का जाप किया जा रहा है , उस मोर्चा के प्रारम्भिक चरण में ही मोर्चा लग गया है | संयुक्त मोर्चा की बात करने वाले भानु सहाय जो कि बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भी हैं ,अकेले ही छतरपुर और टीकमगढ़ में बैठक कर गए | जाहिर है की ये यदि मोर्चा के  कुछ संगठन के पदाधिकारियों को लेकर जाते तो उसका प्रभाव कुछ अलग होता | उनके इस कदम से संयुक्त मोर्चा बिखरने लगा है | ये अलग बात है की बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर सक्रीय संगठनों के पदाधिकारी पृथक राज्य के लिए समर्पण के साथ जुटे हैं |     

16 अगस्त, 2018

Election_मतदान नहीं करेंगे ग्रामीण




मतदान नहीं करेंगे ग्रामीण  





छतरपुर// 16 अगस्त 18 जिले के बङामलहरा जनपद पंचायत  अंतर्गत एक पंचायत है बम्होरी खुर्द । इस पंचायत के भदौरा गांव के लोगों ने मतदान के बहिष्कार का निर्णय लिया है ।
 पंचायत की सरपंच हल्ली बाई अहिरवार ने बताया कि भदौरा गांव के लोगों ने 9अगस्त को  मतदान के बहिष्कार का निर्णय सङक की  समस्या को लेकर लिया था । भदौरा गांव से हलवानी तक डेढ किमी सङक बननी है । सङक न होने के कारण गांव वालों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता था । गांव तक जननी सुरक्षा वाहन नहीं आ पाता है, न बीमार व्यक्ति को ले जाने के लिए कोई वाहन आ पाता है । ऐसी दशा में बीमार और लाचार व्यक्ति को ले जाने के लिए चारपाई में  लेकर  डेढ किमी हलवानी गांव तक जाते हैं वहां से टैक्सी (आटो) से अस्पताल तक जाते हैं । 
समस्या के समाधान के प्रयास के संबंध में बताया कि कई-कई तरह के प्रयास किये गये हैं । प्रशासन से भी फरियाद की  और यहां की विधायक रेखा यादव से भी फरियाद की पर कोई समाधान नहीं निकाला जा सका । आज भी लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं, बारिश में यह समस्या और भी विकराल हो जाती है ।असल में यह गांव बारिश के समय एक टापू में बदल जाता है । उन्होंने बताया कि गांव की आबादी 700 से ज्यादा है लगभग 400 मतदाता है । गांव में ज्यादातर दलित और पिछड़े वर्ग के लोग रहते हैं ,शायद इसी कारण हम लोगों की सहायता कोई नहीं करता ।



14 अगस्त, 2018

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 बुंदेलखंड  की डायरी 


बुंदेलखंड में गर्माती  सियासत 



रवीन्द्र व्यास 
बुंदेलखंड में इस बार फिर से वर्षा के मिजाज नाशाद है, अधिकांश जिले पिछले साल की अब तक की बारिश के आकड़े को पूर्ण नहीं कर पाये । तालाब सूखे है, कुओं का जल स्तर भी नहीं बङा है  पर सियासत का पारा गर्म है ।बुंदेलखंड के सागर संभाग की  26 विधान सभा सीटों में  चुनाव पूर्व सर्वेक्षण में  यह बात उभर कर सामने आई है की  बीजेपी  के लिए स्थितियां अनुकूल नहीं हैं | मुख्य मंत्री के तौर पर लोगों की पहली पसंद ज्योतरादित्य सिंधिया बने हैं |  इन हालातों को देख कर शिवराज सिंह ने बुंदेलखंड में ताबड़ तोड़ घोषणाओं का आभियान शुरू किया है | इसी क्रम में छतरपुर में मेडिकल कालेज की घोषणा की , पन्ना को मिनी स्मार्ट सिटी बनाने की बात कही तो सागर में बगैर किसी तैयारी के बीना  सिचाई परियोजना का शिलान्यास कर दिया , वहीँ टीकमगढ़ जिले के निवाड़ी को जिला बनाये जाने की प्रक्रिया शुरू करा दी |   बीजेपी विधायक और  नेता ,मंत्री इस चुनावी दौर में भगवान् की शरण में पहुंच रहे हैं | कोई पद यात्रा कर रहा है तो कोई कावड़ यात्रा निकाल रहा है |  विधायक पत्नियां  कहीं  सुहागलें करा रही हैं || तो कोई भागवत कथा से  अपने जनाधार को  बचाने में जुटा है | 
आंकड़ों को और सर्वक्षणो की बारीकियों को अगर समझा जाए तो २०१३ के चुनाव में कांग्रेस २६ विधान सभा में से ६ सीटों पर जीती थी | जीतने के साथ ही कांग्रेस पांच विधान सभा सीटों पर पांच हजार से कम के अंतर से हारी थी |  जबकि टीकमगढ़ जिले की जतारा सुरक्षित  विधान सभा सीट पर बीजेपी मंत्री हरिशंकर खटीक से  कांग्रेस 233  मतों से  ही जीत पाई थी | सागर जिले के सुरखी में कांग्रेस प्रत्यासी गोविन्द सिंह राजपूत 141 मतों से , छतरपुर जिले के बड़ा मलहरा से तिलक सिंह लोधी  1514 मतों से छतरपुर से आलोक चतुर्वेदी 2217 ,दमोह जिले के दमोह से चंद्रभान सिंह 4953 मतों से हटा  से हरिशंकर चौधरी 2852 मतों से और पन्ना जिले के  गुनौर विधान सभा क्षेत्र से शिवदयाल चौधरी मात्र 1337 मतों से चुनाव हारे थे | जहां कांग्रेस इन सीटों को हथियाने के लिए पूर्ण प्रयास में जुटी है वही बीजेपी की भी इन सीटों पर विशेष निगाह है | 2013  के  चुनाव में बीजेपी ने टीकमगढ़ जिले की निवाड़ी विधान सभा सीट पहली बार इस आश्वासन के साथ जीती  थी की  अगर चुनाव जीते तो निवाड़ी को जिला बना दिया जाएगा 2018 के चुनाव के पहले सरकार इस वायदे को पूर्ण करने में जुटी है | 

छतरपुर विधान सभा सीट परसीमन के बाद से बीजेपी के लिए सबसे अनुकूल क्षेत्र बन गया था | इसके बावजूद पिछला चुनाव बीजेपी प्रत्यासी ललिता यादव  महज २२१७ मतों से कांग्रेस के आलोक चतुर्वेदी को हरा पाई थी | बीजेपी इस सीट को हर कीमत पर जीतना चाहती है इसी के चलते   शिवराज  ने ललिता यादव को मंत्री बनाया |  और अब यहां के लोगों की सबसे बड़ी मांग  को   कैबिनेट की बैठक में छतरपुर  में मेडिकल कॉलेज खोलने को  मंजूरी दे कर एक बड़ा राजनैतिक एजेंडा  बीजेपी ने पूर्ण कर लिया है । अब मेडिकल कालेज के शिलान्यास के लिए झाँसी रोड पर गौरगांय गाँव के पास की जमीन भी तय कर ली गई है | असल में मेडिकल कालेज को लेकर जितना जन दबाव था उतना ही राजनैतिक दबाव भी सरकार पर था |  कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने  इसे कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने की बात कही  कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ  ने  राजनगर की सभा में घोषणा की   कांग्रेस सरकार बनने पर छतरपुर में मेडिकल कालेज खुलेगा |   देखा जाए तो  सरकार  इस बात का कतई ध्यान नहीं रखती की किस चीज की जरुरत कहाँ  सबसे ज्यादा है , और उससे समाज का बड़ा तबका कहाँ लाभान्वित होगा | छतरपुर के मामले में भी शिवराज सरकार का यही रवैया रहा , जब यहां के लोगों ने इसको लेकर संघर्ष का रास्ता अपनाया  और चुनावी दौर में बीजेपी को यहाँ अपना जनाधार खिसकता नजर आया तब यहाँ सरकार की नजरे इनायत हुई | 



धर्म के आसरे सियासत 

बिजावर  के बीजेपी विधायक पुष्पेंद्र नाथ पाठक अपने गृह नगर नौगांव के  माता मन्दिर में पूजा अर्चना  के बाद  १० अगस्त को   जटाशंकर धाम जलाभिषेक पदयात्रा पर निकल पड़े ।
 विधायक पुष्पेन्द्र नाथ गुड्डन पाठक मानते हैं कि अच्छे कामों में भगवान के साथ साथ सभी का सहयोग मिलता है और उसी सहयोग से सब कुछ निर्विघ्न सम्पन्न होता है।वे बताते हैं कि  इन यात्राओं के दौरान धार्मिक भावनाओं के अलावा मुझे सभी के साथ सुख दु:ख और करीब से देखने समझने का मौका मिलता है ।सबका साथ,सबका विकास के साथ ही सबका दु:ख मेरा सुख दु:ख ये ही मेरे जीवन का मूलमंत्र है, जिसमें क्षेत्र की जनता जनार्दन का साथ हमारे मन में बसी सेवा भावना को मजबूती प्रदान करता है। छतरपुर जिले में जहां पुष्पेंद्र नाथ पाठक  धार्मिक  पदयात्रा कर रहें हैं वहीँ टीकमगढ़ के बीजेपी विधायक के के श्रीवास्तव ने ठीक इसी दिन कावड़ यात्रा शुरू की  के के श्रीवास्तव की कावड़ यात्रा दस दिन चलेगी 110 गाँवों से गुजरेगी और 20 अगस्त को शिवधाम  में संम्पन्न होगी |  सागर जिले में कावड़ यात्रा निकाली जा रही है , तो सागर जिले में एक मंत्री जी की पत्नी सुहागलें कराकर महिलाओं को लुभाने का  जतन कर रही हैं | 


                                                         हालांकि इन यात्राओं और धार्मिक आयोजनों के पीछे वजह सर्व कल्याण की बताई जाती है ,अच्छी वर्षा की कामना बताई जाती है , पर  इसे सियासत से दूर बताने का ढोंग किया जाता है | ये अलग बात होती है की इसके आयोजक से लेकर प्रायोजक और इसके सहभागी सभी एक दल विशेष से जुड़े लोग  होते हैं | हालांकि अब कांग्रेस नेता भी इस तरह के आयोजनों में अब पीछे नहीं हैं | छतरपुर  के कांग्रेस नेता आलोक चतुर्वेदी ना सिर्फ नगर में सुन्दर काण्ड का पाठ  हर मोहल्ले में  करा चुके बल्कि हाल ही में उन्होंने  डेढ़ करोड़ से ज्यादा के शिवलिंग निर्माण भी प देवप्रभाकर जी के मार्ग दर्शन में निर्माण कराये |  खजुराहो में जैन मंदिर में पधारे जैन मुनि विद्द्या सागर जी महराज से आशीर्वाद लेने मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान , पूर्व मुख्य मंत्री दिग्विजय सिंह , कांग्रेस नेता कमल नाथ सहित अनेकों नेता पहुंचे | 
                                                       असल में धर्म एक ऐसा मामला है जिससे देश  का लगभग हर व्यक्ति कहीं ना कही जुड़ा है | बीजेपी ने इसको बड़ी ही गहराई से ना सिर्फ समझा बल्कि इसका कैसे उपयोग करना है यह भी जाना | 

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

  बुंदेलखंड की डायरी  विकास की उमंग और चुनौतियों के  संघर्ष का  बुंदेलखंड  रवीन्द्र व्यास  दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए    2025  में कई...