08 अक्टूबर, 2017

बुंदेलखंड मे किसान आन्दोलन _ बीजेपी डेमेज कंट्रोल मे जुटी


बुंदेलखंड की डायरी



रवीन्द्र व्यास 

 उमा भारती के गृह नगर में किसानो के साथ हुई बर्बरता के पीछे की कहानी भी कम चौकाने वाली नहीं है | बुंदेलखंड में लगातार पड़ते सूखे और सरकार की मनमानी ने कांग्रेस को मौका दिया | कांग्रेस ने " खेत बचाओ _किसान बचाओ " का नारा दिया | बेबस किसानो को कांग्रेस की इस बात पर भरोषा हुआ और वह बड़ी तादाद में टीकमगढ़ में पहुंचे |  यह भी पहला मौका था कि किसी बड़े  राष्ट्रीय कांग्रेसी नेता के ना होने  के बावजूद  10 _12 हजार किसान सभा में पहुंचे | किसानो की यही संख्या बीजेपी नेताओं की चिंता का कारण  बन गई |  फिर शुरू हुआ सियासत का ऐसा खेल जिसमे बीजेपी तो उलझी पर बुंदेलखंड में कांग्रेस को संजीवनी प्रदान कर गई  |बुंदेलखंड के अन्नदाता को कूटने पीटने और कपडे उतारने  के बाद अब बीजेपी के दिगज्ज नेता डेमेज कंट्रोल में जुट गए हैं | 

                                                        बुंदेलखंड  सहित  टीकमगढ़  जिला के किसान    पिछले दस सालों में सात बार  सूखे की त्रासदी झेलते झेलते  टूट चुके हैं | उस पर सरकार के थोथे आश्वासनों ने उस के घावों पर नमक छिड़कने का ही काम किया |  बीमा और मुआवजा के नाम पर , २४ घंटे बिजली के नाम पर  उसे करेंट मारने वाले बिजली बिल थमाए गए , दिन बा दिन खेती में लागत बड़ी और आमदनी घटी , इन सब हालातों  से भी उसने लड़ने का प्रयास किया | कभी कर्ज लिया तो कभी  मजदूरी भी की टीकमगढ़ में नहीं मिली तो बाहर जा कर मजदूरी की |  जिन लोगों को इन सबके बावजूद  जिंदगी में सुरक्षा  की  कोई आस नजर नहीं आई  और कर्ज  से हार मानने को मजबूर हुए ऐसे  अनेकों  किसानो ने मौत को गले लगा लिया |  जिले के  किसानो  वा उनके परिवार  के सामने इस बार  की अवर्षा ने  एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है |  यह फसल तो गई आगे भी कुछ मिलने की उम्मीद नहीं , सिवाय सरकार के शब्दों के भ्रम जाल के | हालातों से हताश किसानो का  बीजेपी सरकार से होते मोह भंग में एक बड़ा कारण बेलगाम ब्यूरो क्रेसी भी मानी जा रही है  | 
          बीते दिनों टीकमगढ़ के राजेंद्र पार्क में  नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह (राहुल) मंच से मध्य प्रदेश की शिवराज  सरकार  को  किसान विरोधी बता रहे थे | वे किसानो को मंदसौर में किसानो पर हुए गोली काण्ड की याद भी ताजा कर रहे थे | शायद उन्हें पता नहीं था कि जो शब्द वे मंच से बोल रहे हैं  उसकी एक बानगी टीकमगढ़ में ही कुछ समय बाद देखने को मिलेगी | सभा के बाद  कांग्रेस नेता , अजय सिंह , पूर्व मंत्री यादवेंद्र सिंह , कुणाल चौधरी , कांग्रेस के महामंत्री ब्रजेन्द्र सिंह राठौर , के नेतृत्व में   किसान और कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे |  मुख्य द्धार पर  इनको रोक दिया गया  कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल ने ज्ञापन लेने के लिए एस डी एम्  आदित्य सिंह को भेज दिया था | नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मंत्री ने इसे किसानो का अपमान मानते हुए कलेक्टर को बुलाने की मांग की | लगभग घंटे भर तक यह सब चलता रहा , बड़ी मशक्कत के बाद कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को कलेक्ट्रेट में प्रवेश दिया गया l लम्बे इतजार के बाद  कलेक्टर साहब ज्ञापन लेने नीचे उतरे ।  कलेक्टर ने पांच सूत्री मांगो वाला यह ज्ञापन भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच चैनल के पीछे से लिया ।   ज्ञापन में कांग्रेस नेता मांग कर रहे थे की जिले को सूखा ग्रस्त घोषित किया जाए , खराब फसलों का मुआवजा दिया जाए ,  फसल बीमा की राशि खातों में डाली जाए ,बिजली बिल माफ़ किये जाएँ , और बेरोजगारों को रोजगार दिया जाए | जिस समय ज्ञापन लेने देने का कार्यक्रम चल रहा था उसी समय पुलिस की लाठियां किसानो पर पड़ रही थी |   
                                                      
                                        यहां आये किसानो की बातों  को माने तो किसानो ने पुलिस पर पथराव नहीं किया , पथराव की शुरुआत  नगर पालिका परिषद् की दीवाल के पीछे से हुई थी |  पुलिस पर पथरों के बाद पुलिस उग्र हो गई और उसने किसानो पर लाठी चार्ज कर दिया ,,किसानो को दौड़ा दौड़ा कर पीटा जाने लगा | जबाब में किसान भी पथराव करने लगे , पुलिस ने अश्रु गैस के गोले छोड़ कर लोगों को तितर बितर करने का प्रयास किया | किसानो को उन्ही के टेक्टरों में पकड़ कर थाने ले जाया गया और  थाने में उनके साथ मारपीट कर उनके कपडे उतरवाकर लाकअप में बंद कर दिया गया | कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री यादवेंद्र सिंह के थाना  पहुँचने के बाद पीड़ित किसानो को लाकअप से  और  पुलिसिया बदसलूकी से मुक्ति मिली | 
                                        टीकमगढ़  की इस घटना ने शिवराज  सरकार को तो  शर्म सार  किया ही  साथ ही  बीजेपी को भी बचाव की मुद्रा  में ला दिया , वहीँ   बुंदेलखंड में कांग्रेस को एक संजीवनी प्रदान कर दी | कांग्रेस इस मुद्दे को  गरमाये रखना चाहती है , इसी के चलते बुंदेलखंड के साथ मध्य प्रदेश में जगह जगह इस घटना के विरोध में शिवराज सरकार के पुतले फूंके जा रहे हैं और प्रदर्शन किये जा रहे हैं  | कांग्रेस के  बड़े नेता टीकमगढ़ की घटना को मदसौर की घटना से जोड़ कर यह बताने मे जुटे है कि शिवराज सरकार किसान विरोधी है । कमलनाथ ने तो किसानो के मसले पर मुख्य मंत्री  शिवराज सिंह से सवाल कर उनकी किसानों के हमदर्द होने की छवि पर ही बट्टा लगा दिया है । 
 टीकमगढ़ में सियासत के जानकार और पुलिस का खुफिया तंत्र  इस बात से हैरान है की किसी राजनैतिक दल के सामन्य से प्रदर्शन को विफल करने के लिए इस स्तर  के राजनीतिक षड्यंत्र भी  अब रचे जाने लगेगे । सरकार ने तीन दिन मे जाच करा कर रिपोर्ट देने की बात कही थी । अब तक हुई जांच मे  यह साबित करने का प्रयास किया जा रहा है कि जिनके कपड़े लाकअप मे  उतरे वह काग्रेसी थे,   और सुनियोजित तरीके से  इस मामले को तिल का ताड़ बनाया गया । असल में यह मामला मुख्य मंत्री की छवि के साथ गृह मंत्री की छवि पर भी  आघात करने वाला माना जा रहा है । गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह के संभाग क्षेत्र में हुई इस घटना को लेकर  जहा काग्रेस  आक्रामक हो गई है वहीं बीजेपी बचाव के रास्ते तलाश रही है ।  बीजेपी  के स्थानीय नेताओ  से लेकर सागर संभाग के दिग्गज  नेता  इस  आग को हर तरीके से ठंडा करने में जुटे हैं | समय बताएगा  कौन कितना सही था?  2017  Oct 08

सरकारे छिड़क रही है किसानो के जख्मों पर नमक


बुंदेलखंड की डायरी 


रवींद्र व्यास 

                  बुंदेलखंड के किसान इन दिनों नेताओं के  कृषि दर्शन और किसान के प्रति व्यक्त की जा रही चिन्ता के चक्रव्यू में उलझता जा रहा है | वो बात करता है कि  बुंदेलखड को सूखा ग्रस्त घोषित करो  तो उसे बताया जाता है कि चिन्ता मत करो  हमारी सरकार का लक्ष्य ही है किसानो की आय को दोगुना करना है | पानी के संकट पर आगाह करने पर , चिंता नहीं करो सरकार हर खेत में तालाब बनाने की योजना पर काम कर रही है | जनता के इन  प्रधान सेवक से लेकर सूबे के सेवक की किसानो के प्रति व्यक्त की जा रही चिन्ता को देखकर तो लगता है की बहुत जल्द किसानो की तक़दीर और तस्वीर बदलने वाली है | पर जमीन पर हालत जस के तस दिखते हैं | 

   बुंदेलखंड के ऐसे ही  दर्द की दवा तलाशने उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के जन प्रतिनिधि प्रधान मंत्री के पास भी हो आये | उसी दौर में मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड के नेताओं के पास इतना समय नहीं था कि  वे भी अपने इलाके के आम आदमी ,और किसानो की दशा से पी एम् को अवगत करा पाते | बुंदेलखंड के किसान सूखे से बेहाल हैं उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश  में विभक्त  बुंदेलखंड के किसान अपनी अपनी सरकारों से  इलाके को सूखा ग्रस्त घोषित करने की मांग कर रहे हैं | झांसी में तो किसानो ने मुंडन तक करवा लिया है | 
                                                                  पिछले दिनों दिल्ली में आयोजित बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में सम्मलित होने के लिए  यूपी वाले  बुंदेलखंड के तीन  सांसद और 19 विधायक भी गए थे | इन जन प्रतिनिधियों ने मौके का फायदा उठाते हुए , प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाक़ात की  ,इन लोगों ने  मोदी जी को बताया की इस बार भी बुंदेलखंड में बारिश कम होने से स्थिति काफी खराब है | , अन्ना मवेशियों की समस्या अलग से है जिनके कारण फसले तबाह होती हैं | इसी के साथ पानी की भी विकराल समस्या पैदा होने  संभावना भी  जताई। ,  नदियों के जल स्तर में सुधार के लिए मध्य प्रदेश के बाण सागर परियोजना से पानी दिलाये जाने की मांग की | किसानो की इन समस्याओ के अलावा इन जन सेवकों ने  दिल्ली से झाँसी तक के प्रस्तावित नेशनल हाइवे को  वाया चित्रकूट से इलाहबाद जोड़ने और सतना से वाया चित्रकूट से लखनऊ जोड़ने की मांग की | बताते हैं कि पीएम मोदी ने बुंदेलखंड के इन  सांसद और विधायकों की बातों को सुनने के बाद भरोसा  दिलाया कि बुंदेलखंड  इलाका उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है , इसके विकस  के लिए हर प्रयास होगा | पीएम द्धारा  विकास  का यह सपना कब साकार होगा और कब बुंदेलखंड के किसानो को त्रासदी से मुक्ति मिलेगी इसका इन्तजार है  | 

                                           जहां यूपी वाले बुंदेलखंड के विधायक सांसद पी एम् को अपनी समास्याएं बता रहे थे उसी दौर में  मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड के नेता  चुनावी दौर को देख कर पार्टी के आला नेताओं से अपनी पीआर बढ़ाने में व्यस्त थे | इन नेताओं के   पास इतना समय नहीं था कि  वे भी अपने इलाके के आम आदमी ,और किसानो की दशा से पी एम् को अवगत करा पाते  | इन्हे शायद इस बात का डर होगा की कहीं उनसे यह ना पूंछ लिया जाए की पिछले 14 साल से मध्य प्रदेश में बीजेपी की  सरकार है और फिर भी बुंदेलखंड इलाके में 1200 से ज्यादा किसानो ने आत्म ह्त्या क्यों की  |  यह हालात तब हैं जब अकेले एम् पी के बुंदेलखंड से छः  मंत्री हैं और सभी प्रमुख मंत्री हैं , जिनके पास वित्त व्यवस्था से लेकर पेयजल,जनसम्पर्क , पंचायत , सुरक्षा  और  महिला बाल विकास  तक की महत्व पूर्ण जिम्मेदारी है | ऐसे मंत्रियों के रहते एमपी के बुंदेलखंड की तक़दीर और तस्वीर सब बदल जाना चाहिए थी |  हालंकि ये  सवाल  यहाँ के मंत्री , विधायक  और सांसद  से नहीं पूंछे जाते | इनसे अगर पूंछा जाता तो यही कैसे मध्यप्रदेश में फिर से सरकार बनेगी , और बुंदेलखंड में बीजेपी के ग्राफ गिरने का कारण क्या है | 
                          
                                          देखा जाए तो बुंदेलखंड के दोनों इलाकों में दर्द  एक सा ही है कहीं कुछ कम है तो कहीं कुछ ज्यादा है | उत्तर प्रदेश के झांसी में किसान  बुंदेलखंड को सूखा ग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर मुण्डन करवा रहे  हैं जगह जगह प्रदर्शन कर रहें हैं | वही एमपी  के बुंदेलखंड के किसान भी  सूखा ग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर आंदोलन और प्रदर्शन कर रहे हैं | सीएम शिवराज सिंह चौहान इस बीच बुंदेलखंड के दौरे पर भी आये , उन्होंने किसानो को भरोसा  दिलाया की सरकार उनके साथ है , सरकार का लक्ष्य किसानो की आय दो गुना करना है , रही बात सूखा की तो रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही की जायेगी |  सीएम योगी आदित्यनाथ ने सूखे का आंकलन करने के लिए तीन टीमों का गठन किया है ,| कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने  बुंदेलखंड में ४२ हजार दलहन तिलहन के मिनी किट्स  किसानो को बांटने की बात कही है | 

                                    असल में बुंदेलखंड  लगातार सूखा और प्राकृतिक प्रकोप का शिकार  है |  वर्षा की चंद बूंदें उसे राहत देती हैं तो सूरज की तीखी तपन उसकी राहत छीन लेती हैं | प्रकृति  और सरकार का रवैया भी बुंदेलखंड के प्रति एक सा ही अब यहां के किसानो को लगने लगा है | प्रकृति रुष्ट है इस कारण कभी सूखा तो कभी ओला तो कभी अतिवृष्टि का उसे सामना करना पड़ता है | सरकार चुनावी साल में उसके लिए विशेष चिंतित हो जाती है , जिस कारण उस पर मेहरबानियों की बरसात  हो जाती है जो उस तक तो नहीं पहुँचती अलबत्ता कागजो में जरूर दिख जाती है | उसे छलने के लिए भी शासन नायाब नुस्खे तलाशती है , किसान को कहा गया की फसल बीमा कराओ तो तुम्हे फसल का पूरा मुआवजा मिलेगा | बीमा करा लिया जब मुआवजा लेने गया तो उसके आने जाने का किराया भी नहीं निकला |  

                                      
                                                     यूपीए शासन काल में बुंदेलखंड को सूखा से मुकाबला करने के लिए सात हजार करोड़ का पैकेज राहुल गांधी की पहल पर दिया गया था | इस पैकेज में प्रमुख कार्य जल  सरचनाओं के विकास  , पेयजल व्यवस्था , पशु पालन के लिए थे , उम्मीद थी कि इस व्यवस्था से फसलों का उत्पादन बढ़ेगा , उनके भडारण की समस्या आएगी इसलिए वेयर हाउस बड़ी तादाद में बनवाये गए | अधिकारियों की कृपा और जन सेवकों के सहयोग से बुंदेलखंड पैकेज का ऐसा सत्यानाश किया कि  जिसकी कोई दूसरी मिसाल तलाशने पर भी नहीं मिलेगी | सरकार की इन योजनाओ का क्रियान्वयन ही सही तरीके से हो जाता तो बुंदेलखंड की तस्वीर इतनी भयानक नहीं होती | बुंदेलखंड के किसान भी  लगातार पड़ते सूखे और प्राकृतिक प्रकोप का मुकाबला करने में  कुछ तो सक्षम होते | 2017 Oct 1 
 


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