बुंदेलखंड की डायरी
रवीन्द्र व्यास
उमा भारती के गृह नगर में किसानो के साथ हुई बर्बरता के पीछे की कहानी भी कम चौकाने वाली नहीं है | बुंदेलखंड में लगातार पड़ते सूखे और सरकार की मनमानी ने कांग्रेस को मौका दिया | कांग्रेस ने " खेत बचाओ _किसान बचाओ " का नारा दिया | बेबस किसानो को कांग्रेस की इस बात पर भरोषा हुआ और वह बड़ी तादाद में टीकमगढ़ में पहुंचे | यह भी पहला मौका था कि किसी बड़े राष्ट्रीय कांग्रेसी नेता के ना होने के बावजूद 10 _12 हजार किसान सभा में पहुंचे | किसानो की यही संख्या बीजेपी नेताओं की चिंता का कारण बन गई | फिर शुरू हुआ सियासत का ऐसा खेल जिसमे बीजेपी तो उलझी पर बुंदेलखंड में कांग्रेस को संजीवनी प्रदान कर गई |बुंदेलखंड के अन्नदाता को कूटने पीटने और कपडे उतारने के बाद अब बीजेपी के दिगज्ज नेता डेमेज कंट्रोल में जुट गए हैं |

बुंदेलखंड सहित टीकमगढ़ जिला के किसान पिछले दस सालों में सात बार सूखे की त्रासदी झेलते झेलते टूट चुके हैं | उस पर सरकार के थोथे आश्वासनों ने उस के घावों पर नमक छिड़कने का ही काम किया | बीमा और मुआवजा के नाम पर , २४ घंटे बिजली के नाम पर उसे करेंट मारने वाले बिजली बिल थमाए गए , दिन बा दिन खेती में लागत बड़ी और आमदनी घटी , इन सब हालातों से भी उसने लड़ने का प्रयास किया | कभी कर्ज लिया तो कभी मजदूरी भी की टीकमगढ़ में नहीं मिली तो बाहर जा कर मजदूरी की | जिन लोगों को इन सबके बावजूद जिंदगी में सुरक्षा की कोई आस नजर नहीं आई और कर्ज से हार मानने को मजबूर हुए ऐसे अनेकों किसानो ने मौत को गले लगा लिया | जिले के किसानो वा उनके परिवार के सामने इस बार की अवर्षा ने एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है | यह फसल तो गई आगे भी कुछ मिलने की उम्मीद नहीं , सिवाय सरकार के शब्दों के भ्रम जाल के | हालातों से हताश किसानो का बीजेपी सरकार से होते मोह भंग में एक बड़ा कारण बेलगाम ब्यूरो क्रेसी भी मानी जा रही है |
बीते दिनों टीकमगढ़ के राजेंद्र पार्क में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह (राहुल) मंच से मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार को किसान विरोधी बता रहे थे | वे किसानो को मंदसौर में किसानो पर हुए गोली काण्ड की याद भी ताजा कर रहे थे | शायद उन्हें पता नहीं था कि जो शब्द वे मंच से बोल रहे हैं उसकी एक बानगी टीकमगढ़ में ही कुछ समय बाद देखने को मिलेगी | सभा के बाद कांग्रेस नेता , अजय सिंह , पूर्व मंत्री यादवेंद्र सिंह , कुणाल चौधरी , कांग्रेस के महामंत्री ब्रजेन्द्र सिंह राठौर , के नेतृत्व में किसान और कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे | मुख्य द्धार पर इनको रोक दिया गया कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल ने ज्ञापन लेने के लिए एस डी एम् आदित्य सिंह को भेज दिया था | नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मंत्री ने इसे किसानो का अपमान मानते हुए कलेक्टर को बुलाने की मांग की | लगभग घंटे भर तक यह सब चलता रहा , बड़ी मशक्कत के बाद कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को कलेक्ट्रेट में प्रवेश दिया गया l लम्बे इतजार के बाद कलेक्टर साहब ज्ञापन लेने नीचे उतरे । कलेक्टर ने पांच सूत्री मांगो वाला यह ज्ञापन भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच चैनल के पीछे से लिया । ज्ञापन में कांग्रेस नेता मांग कर रहे थे की जिले को सूखा ग्रस्त घोषित किया जाए , खराब फसलों का मुआवजा दिया जाए , फसल बीमा की राशि खातों में डाली जाए ,बिजली बिल माफ़ किये जाएँ , और बेरोजगारों को रोजगार दिया जाए | जिस समय ज्ञापन लेने देने का कार्यक्रम चल रहा था उसी समय पुलिस की लाठियां किसानो पर पड़ रही थी |
यहां आये किसानो की बातों को माने तो किसानो ने पुलिस पर पथराव नहीं किया , पथराव की शुरुआत नगर पालिका परिषद् की दीवाल के पीछे से हुई थी | पुलिस पर पथरों के बाद पुलिस उग्र हो गई और उसने किसानो पर लाठी चार्ज कर दिया ,,किसानो को दौड़ा दौड़ा कर पीटा जाने लगा | जबाब में किसान भी पथराव करने लगे , पुलिस ने अश्रु गैस के गोले छोड़ कर लोगों को तितर बितर करने का प्रयास किया | किसानो को उन्ही के टेक्टरों में पकड़ कर थाने ले जाया गया और थाने में उनके साथ मारपीट कर उनके कपडे उतरवाकर लाकअप में बंद कर दिया गया | कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री यादवेंद्र सिंह के थाना पहुँचने के बाद पीड़ित किसानो को लाकअप से और पुलिसिया बदसलूकी से मुक्ति मिली |
टीकमगढ़ की इस घटना ने शिवराज सरकार को तो शर्म सार किया ही साथ ही बीजेपी को भी बचाव की मुद्रा में ला दिया , वहीँ बुंदेलखंड में कांग्रेस को एक संजीवनी प्रदान कर दी | कांग्रेस इस मुद्दे को गरमाये रखना चाहती है , इसी के चलते बुंदेलखंड के साथ मध्य प्रदेश में जगह जगह इस घटना के विरोध में शिवराज सरकार के पुतले फूंके जा रहे हैं और प्रदर्शन किये जा रहे हैं | कांग्रेस के बड़े नेता टीकमगढ़ की घटना को मदसौर की घटना से जोड़ कर यह बताने मे जुटे है कि शिवराज सरकार किसान विरोधी है । कमलनाथ ने तो किसानो के मसले पर मुख्य मंत्री शिवराज सिंह से सवाल कर उनकी किसानों के हमदर्द होने की छवि पर ही बट्टा लगा दिया है ।
टीकमगढ़ में सियासत के जानकार और पुलिस का खुफिया तंत्र इस बात से हैरान है की किसी राजनैतिक दल के सामन्य से प्रदर्शन को विफल करने के लिए इस स्तर के राजनीतिक षड्यंत्र भी अब रचे जाने लगेगे । सरकार ने तीन दिन मे जाच करा कर रिपोर्ट देने की बात कही थी । अब तक हुई जांच मे यह साबित करने का प्रयास किया जा रहा है कि जिनके कपड़े लाकअप मे उतरे वह काग्रेसी थे, और सुनियोजित तरीके से इस मामले को तिल का ताड़ बनाया गया । असल में यह मामला मुख्य मंत्री की छवि के साथ गृह मंत्री की छवि पर भी आघात करने वाला माना जा रहा है । गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह के संभाग क्षेत्र में हुई इस घटना को लेकर जहा काग्रेस आक्रामक हो गई है वहीं बीजेपी बचाव के रास्ते तलाश रही है । बीजेपी के स्थानीय नेताओ से लेकर सागर संभाग के दिग्गज नेता इस आग को हर तरीके से ठंडा करने में जुटे हैं | समय बताएगा कौन कितना सही था? 2017 Oct 08