21 जून, 2016

Bimar Bhagvaan

भगवान हुए बीमार


जगन्नाथ स्वामी रथ यात्रा पन्ना 

रवीन्द्र व्यास

 मध्य प्रदेश के पन्ना  में भगवान  जगन्नाथ जी स्वामी को सोमवार को  लू लग गई  उनको यहलू तब लगी जब उन्हें इस भीषण गर्मी में और खुले में स्नान कराया गया  अब भगवान बीमारहो गए हैं और उनका इलाज शुरू हो चुका है , लिहाज वे अब अपने भक्तो को कम से कम 15 दिनोंतक दर्शन नहीं देंगे 
 पुरी की तरह  पवित्र नगरी पन्ना  में सोमवार को  रथयात्रा महोत्सव का शुभारम्भ  के  स्नान  केसाथ होता है  रथयात्रा समारोह के प्रथम दिवस भगवान जगन्नाथ स्वामी के पूजा अर्चना के बादभगवान को  मंदिर परिसर में लाया जाता है  उन्हें परम्परा के अनुसार सहस्र छिद्रों वाले कलश मेंजिसमे  औषधियुक्त जल होता है उससे  स्नान कराया गया  स्नान के बाद विधिवत पूजा अर्चनाकी गई। स्नान के बाद उन्हें लू लग जाती है और  भगवान बीमार हो जाते हैं | वे अगले 15 दिनतक रोगी अवस्था में रहेंगे। उनके पट 15 दिन बाद दर्शन के लिए पुनखुलेंगे।


        हर साल की तरह इस साल भी भगवान् जगन्नाथ स्वामी अपने भाई बलदाऊ .बहिन सुभद्राके साथ मंदिर से बाहर आते  हैं \ स्वामी जी के इस स्वरुप को देखने के लिए श्रद्धालु बड़ी संख्या मेंजुटते हैं | उनका शंख झालर बजा कर स्वागत किया जाता है | उनके स्नान के बाद जब उन्हेबैठाया जाता है तभी उन्हे लू लग जाती है | और  भगवान् को वापिस मंदिर में ले जाया जाता है |भगवान् का १५ दिन जड़ी बूटियों से इलाज होता है , इन १५ दिनों तक किसी को दर्शन नहींमिलते |

 भगवान्  की बीमारी से भक्त लोग बेहाल हैं , अब उन्हे  १५ दिनों तक  देव दर्शन नहीं हो सकेंगे ,भक्तों को एसा लगता है जेसे सारा संसार ही बीमार हो गया है | यह कहना है यहां के एक भक्तमनीष मिश्रा का वे बताते हैं  की  भगवान जगन्नाथ  स्वामी  जिस दिन से बीमार पड़ जाते हैं,हम लोग रोज दर्शन करने वाले हैं  और जब पता चलता है की दर्शन तो मिलना नहीं क्योंकिभगवान् तो बीमार पड़ गए हैं | तब इतनी व्याकुलता होती है की कुछ कह नहीं सकते लगता हैकी सारा संसार बीमार हो गया है | तब हम लोग उन्ही से  प्रार्थना करते हैं की हे जगत के नाथआप जल्दी ठीक  हो   और दर्शन दीजिये |

-पन्ना के जगन्नाथ स्वामी मंदिर का निर्माण १८१७ में यहाँ के तत्कालीन राजा  किशोर सिंह नेकराया था | चंदन की लकड़ी से बनी इन मूर्तियों को उड़ीसा के पूरी से लाया गया था | तभी से यहाँउड़ीसा के जगन्नाथ पूरी की तरह ही  भगवान् की पूजा अर्चंना की जाती है | यहाँ  पूरी की तरह हीअटका प्रसाद बांटा जाता था ,| आज भी यह प्रसाद लुटाया  जाता है | कहते हैं की जिसको भी यहप्रसाद मिल जाता है उसकी सभी मनो कामना पूर्ण होती है |पूरी की रथ यात्रा की तरह यहाँ भी रथयात्रा निकाली जाती है |
          पन्ना के एक भक्त आर के  मिश्रा बताते हैं की पुरी से   इन  को किशोर सिंह राजा केशासन काल में लाया गया था उन्होने ही ये मंदिर बनवाया था , किवदन्ती है की  यहाँ भगवान् केप्रसाद का उस समय जो अटका बना था वह    सब  पक  गया  था , जब की उसी वर्ष पुरी में जो प्रसाद का अटका बना वह लाख जतन के बाद भी नहीं पका था |  जिस कारण इसका बड़ा महत्त्वहो गया था , एक बार भगवान् ने स्वयं राजा को सपना दिया था की  इससे  पूरी धाम का  प्रभावघट जाएगा , तब से इसे बनाया तो जाता है पर उस रूप में नहीं | अब भगवान को अंकुरित मूंगका प्रसाद चढ़ाया जाने लगा जो परम्परा आज भी कायम है |

                          पन्ना के जगन्नाथ स्वामी की यह रथ यात्रा पूरी की रथ यात्रा की तरह हीअनूठी और बेमिसाल मानी जाती है | १५ दिन की बीमारी के बाद भगवान को 4 जुलाई को पथ्यदिया जाएगा | 5 जुलाई को धूप कपूर की आरती होगी  और 6 जुलाई की शाम भगवान बलभद्र ,भगवान जगन्नाथ और देवी सुभद्रा का परम्परागत तरीके से पूजन के बाद , रथयात्रा काशुभारम्भ होगा | प्रथम दिवस बड़ा दिवाला से प्रस्थान कर लखूरन में विश्राम करेंगे | 7 जुलाई कीशाम लखूरन से प्रस्थान कर चौपरा पहुंचेगी और विश्राम करेगी |यहां से  8 जुलाई की शामजनकपुर मंदिर रथ यात्रा  पहुंचेगीजहां भगवान का पूजन और स्वागत होगा |    रथ यात्रा कायह आयोजन बुंदेलखंड और बघेलखण्ड इलाके का सबसे विशाल धार्मिक आयोजन माना जाता हैइसे देखने दूर दराज से श्रद्धालु आते हैं | ये अलग बात है की अब इस रथ यात्रा का राजशी शासनकाल जैसा वैभव नहीं रहा , जब राजा के हाथी घोड़े भी रथ यात्रा में सम्मलित होते थे , औरगजराज स्वय भगवान के लिए चवर हिलाता था | राज परिवार के सदस्य आज भी रथ खींचते हैं |


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