19 मार्च, 2011

faag

सिमित होते फाग के स्वर 
रवीन्द्र व्यास 


जब मौसम में मादकता हो ,पलास फूला, हो आम बोराया हो और खेत पर गदराई फसल खडी  हो तब किसका मन मस्ती में नहीं डूबेगा | बुंदेलखंड की लोक परम्परा में फाग का अपना महत्व रहा है | कभी यह परम्परा बसंतोत्सव से शुरू हो जाती थी | बसंत के आगमन के साथ गाँव -गाँव में फाग के स्वर सुनाई देने लगते थे  जो बसंत पंचमी तक चलते रहते | अब ये सिर्फ होलिका दहन के आस पास तक सिमित हो कर रह गए हें | शुद्ध शात्रीय शैली की फागों का स्थान अब अश्लील फागों और फागों की सी.डी.ने ले लिया है |इस अंचल में बसंत पंचमी के साथ ही मस्ती का आलम शुरू हो जाता था , मस्ती के रस में सराबोर गाँव -गाँव में फागों की फड बाजी होती थी | जबाबी फागों की यह शैली अरसे से समाप्त हो चुकी है |
गाँव की चौपालों पर नगड़िया -ढोलक ,झींका,मजीरा ,की लय पर फाग की तान अब कम सुनाई पड़ती है | बुन्देली लोक जीवन से जुडी फागों का अपना एक सम्रद्ध इतिहास है | फाग की वर्तमान परम्परा ईसुरी और गंगा धर व्यास की फागों तक सिमित सिमित हो कर रह गई हें | गाँव -गाँव में मूलतः ईसुरी रचित फागें ही गई जाती हें |ठेट- बुन्देली समरसता वा माधुर्य के साथ ईसुरी की फागों में श्रृंगार वा भावों की अभिव्यक्ति का अनूठा सम्मिश्रण देखने को मिलता है | ईसुरी रचित फागों को चोकडिया   फाग भी कहते हें ,फागों को गाने वाले फगुवारे लक्ष्मण सिंह (८५) इस उत्सव में अपनी उम्र को बाधक नहीं मानते | वे कहते हें की फागों की मस्ती का आलम ही कुछ और होता है ,हम तो वेसा ही आनंद लेते हें जैसा जिन्दगी भर होली के माह में लेते रहे हें | काल गी गति के साथ अब सब कुछ बदल गया है ,अब वैसा उत्साह और उल्लास लोगों में नहीं रहा |
बुंदेलखंड में डेढ़ सौ वर्ष पूर्व ईसुरी रचित फागों  की श्रन्गारिता ने इसे लोक जीवन की फागें बना दिया | इस दौर में लोग प्राचीनतम छंद माऊ,डिडखुरयाऊ,रपयाऊ,लापडिया,और खडी फागों को भूल गए |यह ईसुरी की फागों की ही खासियत थी की लोक जीवन से सीधी जुड़ गई |फाग मंडलियों की प्रतियोगी फाग गायन के आयोजन से इसको व्यापकता मिली |पर समय के साथ यह परम्परा समाप्त हो रही है |अब गांवों में साहित्यिक  और लोक जीवन की फागों का स्थान अश्लील फागों ने और सी.डी.ने  ले लिया है  \\
प्रमुख साहित्यकार सुरेन्द्र शर्मा "शिरीष"अश्लील फाग गायन को श्रृंगार की ही उपाधि देते हें ,वे कहते हें की यह भी जीवन का एक अंग है | और इसका कोई बुरा भी नहीं मानता | है की  अब गांवों की चौपालों पर फागों के फड नहीं जमते  धोके से ही कुछ गाँवों में फागों के स्वर सुनाई देते हें |जब की बुन्देल्खाद की यह लोक परम्परा फाग गायन सबसे निराली है,यह ब्रज की होली से भी कहीं ज्यादा आकर्षक है | होली पर लोक गायन की जो परम्परा बुंदेलखंड में  है,वह अन्यत्र कहीं नहीं है | फिर भी इसे वह स्थान नहीं मिल पाया जो इसे मिलना चाहिए था |ईसुरी की फागों में लोक जीवन ही नहीं देखने को मिलता है बल्की करारा व्यंग्य भी देखने को मिलता है | 
अब लोगों के पास वक्त की कमी है ,आपसी मेल जोल का भी समय नहीं है ,घर -घर टी.वी. ,सी.डी.प्लेयर पहुँच गए हें एसे में गाँव की चौपाल पर भला किसे बैठने की फुर्सत है | 

03 मार्च, 2011

nasha nasbandi kaa

"नसबंदी" करवाओ  मोटर साईकिल मुफ्त पाओ

मध्य प्रदेश में इन दिनों नशबंदी करवाने का अभियान चल रहा है |सरकार ने  इसे  महा अभियान बना दिया है और साफ़ चेतावनी दी है कि जिन जिलों में लक्ष्य  कि पूर्ति नहीं होगी वहाँ के सी.एम्.एच .ओ . और कलेक्टर दोनों को दोषी माना जाएगा | जब सरकार इनको दोषी मानेगी तो गाज भी इन पर गिरेगी | भला कोई भी समझदार व्यक्ति मलाईदार जिले के मुखिया का पद  छोड़ कर भोपाल के मुख्यालय में बैठना क्यों पसंद करेगा | सरकार कि इस चेतावनी के बाद अधिकारी  लोग बढ चढ़ कर भाग लें रहे हें | लोगों को तरह -तरह के ऑफर दिए जा रहे हें | कंही मोटर साईकिल  दी जा रही हे तो कहीं बंदूक के लाइसेंस , कहीं लक्ष्य पाने के लिए नपुंसकों और विधवाओं की भी नसबंदी की जा रही है भिखारियों तक को नहीं छोड़ा जा रहा है |
पन्ना कलेक्टर के.सी.जैन ने एक मार्च से ६ मार्च तक का मेगा नसबंदी अभियान शुरू किया है |इस अभियान में २५ से ज्यादा लोगों की नसबंदी कराने वाले को एक हीरो होंडा मोटर साईकिल ,२० के ऊपर वाले को एल.सी.डी. टी.वी.,दस से ज्यादा वाले को कलर टी.वी.,पांच से ज्यादा करवाने  वाले प्रेरक को प्रशस्ति पत्र ,शाल श्रीफल से सम्मानित किया जाएगा | ६ मार्च के  बाद लाटरी भी खुलेगी जिसमे सभी हितग्राही  होंगे   जिसमे प्रथम को मिलेगी मोपेड ,द्वितीय  को मिलेगी एल.सी.डी.टी.वी., और तीसरे को मिलेगा  कलर टी.वी., |इसके बाद प्रत्येक विकाश खंड स्तर पर पांच -पांच लाटरी निकाली जाएँगी  और पाँचों विजेताओं को एक-एक प्रेशर कुकर  दिया जायेगा | शत- प्रतिशत उपलब्धि हासिल  करने वाले विभाग को दस हजार का नगद पुरुष्कार ,प्रशस्ति पत्र ,एवं शील्ड प्रदान की जाएगी |
कलेक्टर जैन ने अमानगंज  के एम्.पी.डब्लू. सरमन नामदेव और पडेरी ए.एन.एम्. श्री मति रामकुमारी  सेनी को लक्ष्य की पूर्ति ना करने के कारण निलंबित भी कर दिया | पन्ना जिले में इस वर्ष १०५०० नसबंदी कराने का लक्ष्य तय किया गया था ,अब तक ८५०० की नसबंदी की जा चुकी है |
 पन्ना जिले में जहाँ उपहारों की बोछार है वही सागर के कलेक्टर ने भी नया फंडा अपनाया है , नसबंदी करवाओ और बंदूक का लाइसेंस पाओ | वे जानते हें की बुंदेलखंड के लोगों का सबसे बड़ा शौक क्या है ? इस लिए यदि किसी को बंदूक का लाइसेंस चाहिए हो तो सागर आ जाये |
सरकार जहाँ बैठती है , जहाँ निर्णय होते हें प्रदेश के वहाँ तो और गजब का काम नसबंदी को लेकर हुआ है | भिखारियों , बुजुर्गो ,विधवाओं तक की नसबंदी करा डी गई आखिर लक्ष्य जो पाना था |
अब इस सरकार को कौन बताये की जब नसबंदी केम्पों का आयोजन होता है  तो वहां किस तरह से जानवरों की तरह व्योहार किया जाता है , नसबंदी कराने वाली महिलाओं के साथ | आपरेशन के बाद ना तो उनके लिए पलंग होते हें ना ही कपडे | ऊपर से उनको मिलने वाली मुफ्त दवा भी हड़प ली जाती है , टेस्ट के नाम पर निजी अवेध क्लीनिकों से टेस्ट कार्या जाता है | जिसका कमीशन अस्पताल के लोग लेते हें |
रवीन्द्र व्यास

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

  बुंदेलखंड की डायरी  विकास की उमंग और चुनौतियों के  संघर्ष का  बुंदेलखंड  रवीन्द्र व्यास  दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए    2025  में कई...