12 अप्रैल, 2011

Ram

         
राम से बड़ा राम का नाम
रवीन्द्र व्यास
चैत्र शुक्ल नवमी का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। आज ही के दिन तेत्रा युग में अयोध्या के रघुकुल शिरोमणि महाराज दशरथ एवं महारानी कौशल्या के यहाँ भगवान् श्री राम  ने पुत्र के रूप में जन्म लिया था। कहते हें की दिन के बारह बजे जैसे हीशंख , चक्र, गदा, पद्म धारण कि‌ए हु‌ए चतुर्भुजधारी श्रीराम प्रकट हु‌ए तो मानो माता कौशल्या उन्हें देखकर विस्मित हो ग‌ईं। उनके सौंदर्य व तेज को देखकर उनके नेत्र तृप्त नहीं हो रहे थे।श्रीराम के जन्मोत्सव में  देवता, ऋषि, किन्नार, चारण सभी  ने शामिल होकर आनंद उठाया था | वेशे तो अयोध्या सहित सारे देश में राम नवमी का ये त्यौहार परम्परागत ढंग से मनाया जाता है ,पर  बुंदेलखंड में  राम जन्मोत्सव एक अनोखे अंदाज में मनाया जाने लगा है | छतरपुर से शुरू हुई ये परम्परा अब सारे बुंदेलखंड इलाके में फ़ैल गई है | यहाँ एसा लगने लगता है की वास्तव में क्या भगवान् श्री राम फिर से जन्म ले रहे हें , उनके जन्म के बाद लोगों के उत्साह और उम्मंग को देखकर यही लगता है जेसे भगवान् ने ही अवतार ले लिया हो | सारा शहर  राममय हो जाता है | 
भगवान् श्री राम के जन्मोत्सव पर  छतरपुर शहर को धार्मिक स्थल की तरह सजाया जाता है| जगह जगह केशरिया पताकाएं लगाईं जाती हें , नगर में वंदन वार बाँधी जाती हें , लाइट की  व्यवस्था , जगह जगह  श्री राम के कट-आउट लगाए जाते हें , नगर के मुख्य गांधी चौक बाजार में राम दरबार सजाया जाता है | राम जन्म के बाद जब श्रद्धा से सराबोर लोग केशरिया पताकाएं लेकर निकले , आगे भगवान् श्री गणेश का रथ चल रहा था , इसके बाद देवी देवताओं की झांकियां , ठीक वेसे ही जैसे  राम जन्म को देखने आये देवताओं आगमन अयोध्या में हुआ था | फर्क इतना  था वो त्रेता युग की बात थी और ये कलयुग की बात है जहाँ  उनके प्रतीक को ही मान कर मानव माँ संतोष कर लेता है | सारे नगर वासी सड़कों पर निकल कर अपनी ख़ुशी का इजहार करते हें और  राम जन्मोत्सव के इस भव्य समारोह में भाग लेते हें | इस समारोह को देखने के लिए अब दूर -दूर से लोग भी आने लगे हें | छतरपुर में यह आयोजन तो पिछले दो सौ सालों से हो रहा था ., किन्तु पिछले पांच सालों में इसे एक अनोखी भव्यता  और दिव्यता मिली ,  जिसका असर ये हुआ की यह शोभा यात्रा  अब छतरपुर ,के अलावा ,पन्ना ,टीकम गण ,सागर , मऊरानीपुर ,महोबा  में भी इसी भव्यता से निकलने लगा है |  
भगवान राम को उनके सुख-समृद्धि पूर्ण व सदाचार युक्‍त शासन के लिए याद किया जाता है। उन्‍हें भगवान विष्‍णु का अवतार माना जाता है, जिन्होंने  पृथ्‍वी पर अजेय रावण के नाश के  लिए अवतार लिया था । राम राज्‍य शांति व समृद्धि  का पर्यायवाची बन गया है\उन्होंने आजीवन मर्यादा का पालन किया, इसीलिये उनको मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम कहते हैं.भगवान राम  बहुत बड़े पितृभक्त थे. अयोध्या के राजकुमार होते हुए भी वे अपने पिता के वचनों को पूरा करने के लिए संपूर्ण वैभव को त्यागकर चौदह वर्षों के लिए अपने छोटे भई लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ वन चले गये. वन में जाकर रक्षसों के सबसे बड़े राजा रावण का सर्वनाश करके उसका राज्य विभीषण को सौंपकर वापस अयोध्या आ गये. हनुमान भगवान श्रीराम के परमभक्त तथा सुग्रीव परममित्र थे.

19 मार्च, 2011

faag

सिमित होते फाग के स्वर 
रवीन्द्र व्यास 


जब मौसम में मादकता हो ,पलास फूला, हो आम बोराया हो और खेत पर गदराई फसल खडी  हो तब किसका मन मस्ती में नहीं डूबेगा | बुंदेलखंड की लोक परम्परा में फाग का अपना महत्व रहा है | कभी यह परम्परा बसंतोत्सव से शुरू हो जाती थी | बसंत के आगमन के साथ गाँव -गाँव में फाग के स्वर सुनाई देने लगते थे  जो बसंत पंचमी तक चलते रहते | अब ये सिर्फ होलिका दहन के आस पास तक सिमित हो कर रह गए हें | शुद्ध शात्रीय शैली की फागों का स्थान अब अश्लील फागों और फागों की सी.डी.ने ले लिया है |इस अंचल में बसंत पंचमी के साथ ही मस्ती का आलम शुरू हो जाता था , मस्ती के रस में सराबोर गाँव -गाँव में फागों की फड बाजी होती थी | जबाबी फागों की यह शैली अरसे से समाप्त हो चुकी है |
गाँव की चौपालों पर नगड़िया -ढोलक ,झींका,मजीरा ,की लय पर फाग की तान अब कम सुनाई पड़ती है | बुन्देली लोक जीवन से जुडी फागों का अपना एक सम्रद्ध इतिहास है | फाग की वर्तमान परम्परा ईसुरी और गंगा धर व्यास की फागों तक सिमित सिमित हो कर रह गई हें | गाँव -गाँव में मूलतः ईसुरी रचित फागें ही गई जाती हें |ठेट- बुन्देली समरसता वा माधुर्य के साथ ईसुरी की फागों में श्रृंगार वा भावों की अभिव्यक्ति का अनूठा सम्मिश्रण देखने को मिलता है | ईसुरी रचित फागों को चोकडिया   फाग भी कहते हें ,फागों को गाने वाले फगुवारे लक्ष्मण सिंह (८५) इस उत्सव में अपनी उम्र को बाधक नहीं मानते | वे कहते हें की फागों की मस्ती का आलम ही कुछ और होता है ,हम तो वेसा ही आनंद लेते हें जैसा जिन्दगी भर होली के माह में लेते रहे हें | काल गी गति के साथ अब सब कुछ बदल गया है ,अब वैसा उत्साह और उल्लास लोगों में नहीं रहा |
बुंदेलखंड में डेढ़ सौ वर्ष पूर्व ईसुरी रचित फागों  की श्रन्गारिता ने इसे लोक जीवन की फागें बना दिया | इस दौर में लोग प्राचीनतम छंद माऊ,डिडखुरयाऊ,रपयाऊ,लापडिया,और खडी फागों को भूल गए |यह ईसुरी की फागों की ही खासियत थी की लोक जीवन से सीधी जुड़ गई |फाग मंडलियों की प्रतियोगी फाग गायन के आयोजन से इसको व्यापकता मिली |पर समय के साथ यह परम्परा समाप्त हो रही है |अब गांवों में साहित्यिक  और लोक जीवन की फागों का स्थान अश्लील फागों ने और सी.डी.ने  ले लिया है  \\
प्रमुख साहित्यकार सुरेन्द्र शर्मा "शिरीष"अश्लील फाग गायन को श्रृंगार की ही उपाधि देते हें ,वे कहते हें की यह भी जीवन का एक अंग है | और इसका कोई बुरा भी नहीं मानता | है की  अब गांवों की चौपालों पर फागों के फड नहीं जमते  धोके से ही कुछ गाँवों में फागों के स्वर सुनाई देते हें |जब की बुन्देल्खाद की यह लोक परम्परा फाग गायन सबसे निराली है,यह ब्रज की होली से भी कहीं ज्यादा आकर्षक है | होली पर लोक गायन की जो परम्परा बुंदेलखंड में  है,वह अन्यत्र कहीं नहीं है | फिर भी इसे वह स्थान नहीं मिल पाया जो इसे मिलना चाहिए था |ईसुरी की फागों में लोक जीवन ही नहीं देखने को मिलता है बल्की करारा व्यंग्य भी देखने को मिलता है | 
अब लोगों के पास वक्त की कमी है ,आपसी मेल जोल का भी समय नहीं है ,घर -घर टी.वी. ,सी.डी.प्लेयर पहुँच गए हें एसे में गाँव की चौपाल पर भला किसे बैठने की फुर्सत है | 

03 मार्च, 2011

nasha nasbandi kaa

"नसबंदी" करवाओ  मोटर साईकिल मुफ्त पाओ

मध्य प्रदेश में इन दिनों नशबंदी करवाने का अभियान चल रहा है |सरकार ने  इसे  महा अभियान बना दिया है और साफ़ चेतावनी दी है कि जिन जिलों में लक्ष्य  कि पूर्ति नहीं होगी वहाँ के सी.एम्.एच .ओ . और कलेक्टर दोनों को दोषी माना जाएगा | जब सरकार इनको दोषी मानेगी तो गाज भी इन पर गिरेगी | भला कोई भी समझदार व्यक्ति मलाईदार जिले के मुखिया का पद  छोड़ कर भोपाल के मुख्यालय में बैठना क्यों पसंद करेगा | सरकार कि इस चेतावनी के बाद अधिकारी  लोग बढ चढ़ कर भाग लें रहे हें | लोगों को तरह -तरह के ऑफर दिए जा रहे हें | कंही मोटर साईकिल  दी जा रही हे तो कहीं बंदूक के लाइसेंस , कहीं लक्ष्य पाने के लिए नपुंसकों और विधवाओं की भी नसबंदी की जा रही है भिखारियों तक को नहीं छोड़ा जा रहा है |
पन्ना कलेक्टर के.सी.जैन ने एक मार्च से ६ मार्च तक का मेगा नसबंदी अभियान शुरू किया है |इस अभियान में २५ से ज्यादा लोगों की नसबंदी कराने वाले को एक हीरो होंडा मोटर साईकिल ,२० के ऊपर वाले को एल.सी.डी. टी.वी.,दस से ज्यादा वाले को कलर टी.वी.,पांच से ज्यादा करवाने  वाले प्रेरक को प्रशस्ति पत्र ,शाल श्रीफल से सम्मानित किया जाएगा | ६ मार्च के  बाद लाटरी भी खुलेगी जिसमे सभी हितग्राही  होंगे   जिसमे प्रथम को मिलेगी मोपेड ,द्वितीय  को मिलेगी एल.सी.डी.टी.वी., और तीसरे को मिलेगा  कलर टी.वी., |इसके बाद प्रत्येक विकाश खंड स्तर पर पांच -पांच लाटरी निकाली जाएँगी  और पाँचों विजेताओं को एक-एक प्रेशर कुकर  दिया जायेगा | शत- प्रतिशत उपलब्धि हासिल  करने वाले विभाग को दस हजार का नगद पुरुष्कार ,प्रशस्ति पत्र ,एवं शील्ड प्रदान की जाएगी |
कलेक्टर जैन ने अमानगंज  के एम्.पी.डब्लू. सरमन नामदेव और पडेरी ए.एन.एम्. श्री मति रामकुमारी  सेनी को लक्ष्य की पूर्ति ना करने के कारण निलंबित भी कर दिया | पन्ना जिले में इस वर्ष १०५०० नसबंदी कराने का लक्ष्य तय किया गया था ,अब तक ८५०० की नसबंदी की जा चुकी है |
 पन्ना जिले में जहाँ उपहारों की बोछार है वही सागर के कलेक्टर ने भी नया फंडा अपनाया है , नसबंदी करवाओ और बंदूक का लाइसेंस पाओ | वे जानते हें की बुंदेलखंड के लोगों का सबसे बड़ा शौक क्या है ? इस लिए यदि किसी को बंदूक का लाइसेंस चाहिए हो तो सागर आ जाये |
सरकार जहाँ बैठती है , जहाँ निर्णय होते हें प्रदेश के वहाँ तो और गजब का काम नसबंदी को लेकर हुआ है | भिखारियों , बुजुर्गो ,विधवाओं तक की नसबंदी करा डी गई आखिर लक्ष्य जो पाना था |
अब इस सरकार को कौन बताये की जब नसबंदी केम्पों का आयोजन होता है  तो वहां किस तरह से जानवरों की तरह व्योहार किया जाता है , नसबंदी कराने वाली महिलाओं के साथ | आपरेशन के बाद ना तो उनके लिए पलंग होते हें ना ही कपडे | ऊपर से उनको मिलने वाली मुफ्त दवा भी हड़प ली जाती है , टेस्ट के नाम पर निजी अवेध क्लीनिकों से टेस्ट कार्या जाता है | जिसका कमीशन अस्पताल के लोग लेते हें |
रवीन्द्र व्यास

21 फ़रवरी, 2011

: humen story


त्रासदी 
आयोग के निर्देशों को नाहीं मानती मध्य प्रदेश सरकार 
रवीन्द्र व्यास 

 ७० साल का वृद्ध जगदीश साहू उन बदनसीबों में से एक है  जिसे अपने ही जवान बेटे की अर्थी को कंधा देने को मजबूर होना पडा था | पिछले  ६ साल  से वह अपने बेटे के हत्यारे पुलिस वालों को सजा दिलाने के लिए भटक रहा है | मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग से मिला अधूरा न्याय  भी न्याय प्रिय  बी.जे.पी.सरकार की फाइलों में दफ़न हो कर रह गया है |
 नोगांव  निवासी उमेश साहू को पुलिस ने ३ जून ०६ की सुबह उसके ही घर से पकड़ा था |उसे यह कह कर पुलिस लाइ थी की सी.एस.पी. साहब को कुछ पूछ तांछ  करनी है दो घंटे में छोड़ देंगे | तत्कालीन सी.एस.पी. प्रमोद सिन्हा की गाडी से उसे छतरपुर कोतवाली लाया गया |पुलिस ने मानवता की सारी हदें पार करते हुए  उसे जानवरों की तरह पीटा, उसके गुप्तांग में कोकोकोला की बोतल डाली गई , जब इससे भी वर्दी वालों को संतोष नहीं हुआ तो पेट्रोल डाला गया | ४ जून की रात  उसकी धर्मेंद्रा सोनी के साथ गाँजा रखने के आरोप में छतरपुर के कुंदन लोज के पास से  गिरफ्तारी दिखाई |  ५ जून को उसे न्यायालय में पेस कर जेल भेज दिया गया |
जेल में उसका स्वास्थ्य परीक्षण नहीं किया गया ,और ना हीं उसके शरीर पर आई चोटों के निशान लिखे गए |हालात जब ज्यादा गंभीर हो गई  और उसके एनल एरिया से मवाद बहने के कारण बदबू आने लगी <तब २० जून को उसे अस्पताल भेजा गया ,जहां उसकी मोत हो गई |
प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने अपने पत्र क्र .२५७६४ दि.२०/१०/१० को इस मामले की जांच रिपोर्ट अपनी अनुशंषा के साथ प्रमुख सचिव मध्य प्रदेश शासन गृह (पुलिस) मंत्रालय  भोपाल को भेजी |पत्र में आयोग ने स्पष्ट किया की प्रमोद सिन्हा तत्कालीन नगर  पुलिस अधीक्षक छतरपुर ,राकेश तिवारी (प्रधान आरक्षक ) जितेन्द्र सिंह (आरक्षक), पर मानव अधिकार हन्नान के लिए अभियोजन की कार्यावाही की जाए  वा  उनके विभागीय  जांच की अनुशंषा की ,साथ ही उमेश साहू के आश्रितों को शासन ३ लाख की अंतरिम  छति पूर्ति  राशि प्रदान करे | शासन यदि चाहे तो यह राशी आरोपियों से वसूल कर सकता है |
आयोग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया था की अभियोजन ,विभागीय जांच ,संस्थित करने एवं मृतक के आश्रितों को अंतरिम छतिपूर्ति राशि अदा करने सम्बन्धी अनुशंषा एक माह में पूर्ण की जाए | आयोग के इस आदेश के बावजूद भी मध्य प्रदेश की जनहितकारी सरकार ने पीड़ित पक्छ को न्याय दिलाने की दिशा में कोई कार्यावाही नहीं की |आयोग ने ९ दिसम्बर को पुनः सरकार को स्मरण पत्र लिखा है | 
इस सारे मामले के पीछे की कहानी और  बाद की कहानी तंत्र के गिरोह तंत्र को उजागर करती है | उमेश साहू के पिता जगदीश साहू बताते हें  कि उमेश ने ०६-०७ के भाँग-घोंटा का ठेका  पहली बार उमेश ने लिया था | उसके इस ठेका लेने से नोगांव के वे लोग खाशे नाराज हो गए जो  अवेध रूप से गांजा बेंचने का कार्य वर्षों से करते आ रहे थे | इन लोगों से २ जून को उमेश झगडा 
भी हुआ था | अवेध काम करने वाले इन लोगों के सम्बन्ध पुलिस से काफी याराना थे | इसी के कारण पुलिस ३ जून को उमेश को वर्दी वाले गुंडों कि तर्ज पर उठा ले गई , और उसे इतना पीटा कि उसकी मोत हो गई |
उमेश कि मोत के बाद पुलिस प्रशासन ,जिला प्रशासन ने जिस तत्परता से आरोपी वर्दी धारियों को बचाने कि योजना बनाई उसकी मिशाल मिलना मुश्किल है | जिला प्रशासन ने मामले कि मजिस्ट्रियल जांच एस.ड़ी.एम्. छतरपुर से ,पुलिस जांच एस.ड़ी.ओ.पी. यू.एस.सिकरवार ,और एड्ड.एस.पी. ओ.पी.त्रिपाठी तथा जेल विभाग ने जेल उपमहानिरीक्षक से जांच कराइ | सभी जांच रिपोर्टों में पुलिस कर्मियों को बेदाग़ बताया गया |
जगदीश साहू कहते हें कि मेरे बेटे कि मोत के बाद से मेरी पत्नी भी अब बीमार रहने लगी है | बच्चे भी अब वर्दी वालों को देख कर दर जाते हें | मेरा सारा कारोबार चोपट हो गया है , मेरी जिंदगी कि सिर्फ यही तमन्ना रह गई है कि अपने बेटे के हत्यारों को सजा दिला सकूँ ,ताकि फिर कोई वर्दी वाले गुंडे किसी के बेटे किसी के भाई ,किसी के पति,किसी के पिता को ना मार सकें | 

04 फ़रवरी, 2011

Dance Festival




खजुराहो  की तीसरी शाम यास्मिन सिंह के नाम
संसार सारं सदा वसंतम
रवीन्द्र व्यास
खजुराहो डांस फेस्टिवल की तीसरी शाम  की शुरुआत प्रख्यात न्रत्यांगना लीना नंदा के ऑडसी नृत्य से हुई , पर इस शाम कत्थक
न्रत्यांगना यास्मिन सिंह वा आरती सिंह  की मनमोहक और भाव पूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा | तीसरी और आखरी प्रस्तुति ज्योत्सना जगन्नाथन के भरतनाट्यम की हुई |
कथक  शास्त्रीय न्रत्य की ऐसी विधा है जिसमे  कथा के कथानक पर नृत्य की भाव पूर्ण प्रस्तुति दी जाती है | रायपुर से आई यास्मिन सिंह ,और आरती सिंह के ग्रुप ने  ये प्रस्तुतियां  दी | जिसमे अनादी अनंत प्रभु की लीलाओं को विशुद्ध गीत की बंदिशों के साथ पेश किया | राजगढ़  घराने की कत्थक
न्रत्यांगना  यास्मिन सिंह वा आरती सिंह ने शिव आराधना के साथ नृत्य पेश किया | ठाट ,सवाल जबाब ,ठुमरी ,मध्यलय, गंगा अवतरण , आदि की प्रस्तुतियां दी | उन्होने द्रोपदी के चीर हरण के प्रसंग की प्रस्तुति दे कर दर्शकों को वाह वाह कहने पर मजबूर कर दिया|
घोडे की चाल ,हिरन की चाल , के बाद  गत निकाश की प्रस्तुति दी , जिसमे उन्होने श्री कृष्ण की गत ,मयूर की गत की कैसे  बादलों की पहली बूंद जमीन पर गिरती है और मयूर मिटटी की सोंधी खुसबू से कैसे  भाव विभोर हो कर  नाच उठता है  | एसा चित्रण था मानो स्वयं  मयूर मंच  पर आ गया हो | रुक्शार की गत  जिसमे हाथ की मुद्रा बनाकर तबले के साथ चलना होता है |  उनके साजिंदों ने भी उनका भरपूर साथ दिया , |
श्रीमती यास्मिन सिंह ने  इसे अपने लिए गोरव पूर्ण छड  बताया , उनका कहना है की पहली बार इस अंतरराष्ट्रीय  मंच पर प्रस्तुति देने का मौक़ा  मिला है, जिसकी अभिलाषा हर कलाकार की होती है | उनका मानना है की आज भी शास्त्रीय नृत्य शास्वत वा सत्य  है जिसे हर कोई पसंद करता है |
कार्यक्रम के प्रारम्भ में उस्ताद अलाउदीन खान संगीत एवं कला अकादमी के श्री तेलंग ने यास्मिन सिंह ,आरती सिंह,और आर.पी. सिंह का सम्मान किया |


03 फ़रवरी, 2011

( khajuraho Dance)

खजुराहो नृत्य समारोह
मेरा सपना था इस मंच पर प्रस्तुति देने का *= हेमा मालिनी
 रवीन्द्र व्यास
खजुराहो में शास्त्रीय न्रत्यो के सात दिवसीय   महा कुम्भ में नृत्य समारोह का आगाज मंगलवार की शाम फिल्म अभिनेत्री हेमामलनी और उनकी बेटिया ईसा व आहना देवल के ओडिसी नृत्य के साथ हुआ ,| छत्तीसवे अंतर्राष्टीय नृत्य उत्सव का शुभारम्भ मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति मंत्री लक्ष्मी कान्त शर्मा ने द्वीप प्रज्जलित कर किया
इस  विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी में कला और संस्कृति को नया आयाम देने के लिए खजुराहो नृत्य समारोह का आयोजन किया जाता है|  देश के कोने - कोने से आये कलाकार अपनी नृत्य कला को प्रस्तुत कर अपने जीवन को धन्य बनाते है , उन्ही कलाकारों में से एक है फिल्म अभिनेत्री हेमामालनी जिन्होने  अपने  नृत्य साधना के इतिहास में खजुराहो के इस मुक्ताकाशी मंच पर पहली बार कला का जोहर अपनी दोनों बेटियों के साथ दिखाया | और स्वीकारा की  खजुराहो नृत्य समारोह प्राचीन काल से चला आ रहा है ,अभी तक अच्छी  तरह से कायम  रखा हुआ है , इस नृत्य समारोह में भाग लेना ही गर्व की बात है  बहुत ही सुन्दर सा अहशास होता है , कई नर्र्त्यांगना  इसके लिए वर्षों प्रेक्टिश करती हें | और कहती  हें मुझे खजुराहो नृत्य समारोह में भाग लेने को मिल जाये  |
  बहुत साल पहले मुझे भी इक्छा थी यहाँ डांस  करने की  ,लेकिन मुझे कभी यहाँ  डांस  का मोका नहीं मिला , मेरे से मेरी बेटियां ज्यादा लकी हें जिन्हें कुछ साल पहले यहाँ डांस  करने का मोका मिला , मुझे आज ये मोका मिला |
 नृत्य समारोह का शुभारम्भ करने पहुचे मद्य प्रदेश के संस्कृति मंत्री लक्ष्मी कान्त शर्मा ने अंतर्राष्टीय ख्याति प्राप्त खजुराहो नृत्य समारोह को समय के अनुसार विकसित करने की बात कही | उनका कहना है  की हेमा मालिनी सदी की महान कलाकार हें , सब चाहते थे की हेमा जी यहाँ आयें ,और कार्यक्रम की प्रस्तुति दें | तीन वर्ष पहले हमने यह तय किया था की हेमा जी यहाँ आयें | वो दिन आज साकार हुआ है |  यह मध्य प्रदेश के लिए पहला अवसर होगा | हमने देखा की समारोह का समय ठीक नहीं है इसलिए इसे एक माह पहले आयोजित किया गया है | अब हम देख रहे हें की मंच की व्यवस्था को सुधारना होगा ,विशिस्ट दीर्घा भी होना चाहिए | आगे इसके लिए प्रयाश किये जायेंगे |
समारोह की पहली शाम हेमा मालनी और उनकी बेटिया ईसा व आहना देवल के ओडिसी नृत्य के नाम रही |

1975 se खजुराहो नृत्य समारोह क़ी शुरुआत क़ी गई थी | इसका मकसद यहाँ विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करना था | पहले यह मंदिरों के के मध्य हुआ करता था | बाद में इसे मंदिर परिसर से बाहर किया जाने लगा | पिछले काफी समय से इसमें दर्शक तक जुटना मुश्किल हो रहा था \ जिसके चलते इसे फरवरी माह में किया जाने लगा | पर इसका भी कोई  असर इस शास्त्रीय नृत्य समारोह पर नहीं हुआ | इसी के चलते फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी को मंच  प्रदानं किया गया | ड्रीम गर्ल क़ी झलक पाने के लिए दर्शक बेताब रहे |
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09 जनवरी, 2011

Ken Betva Link Project

शनि वार १६ अप्रैल ११ को केंद्रीय मंत्री जयरामरमेश क्या आये एक नईउम्मीद लोगों में जाग गई |- केन बेतवा लिंक परियोजना पर कई सालों से चर्चा चल रही है मेने खुद सलमान खुर्सिद  जो सिचाई मंत्री हें  से चर्चा कि है ,मेने पी.एम्.. को पत्र लिखा है कि अगर ये केन बेतवा लिंक बनेगा तो ये सारा पन्ना टाइगर रिजर्व ख़त्म हो जाएगा , करीब ६० वर्ग कि.मी.एरिया जो शेरों के रहवास छेत्र का प्रमुख स्थान है  इसका सत्यानाश हो जाएगा , केन बेतवा लिंक परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व को ख़तरा है हमारा मंत्रालय तो इसकी इज्जाजत  नहीं देगा | ये कहना है देश के पर्यावरण एवं वन राज्य मंत्री जय राम रमेश का | वे पन्ना टाइगर रिजर्व को देखने आये थे | उनके इस बयान के आते ही बी.जे.पी. सांसद जीतेन्द्र सिंह बुन्देला के नेतृत्व में बीजेपी.नेता  खजुराहो विमान तल पर  मंत्री से मिले | जय राम रमेश ने साफ़ शब्दों में कहा की ये इसी योजना है जिससे  पार्क का तीस फीसदी हिस्सा नस्ट हो जाएगा , में जानता हूँ की  हमारी पार्टी के कई नेता इस योजना को चाहते हें पर यह योजना ठीक नहीं है | 
इस साल के

 शुरुआत में इस परियोजना को लेकर हमने कुछ सवाल उठाये थे 



 केन- बेतवा लिंक परियोजना 
बुंदेलखंड के छतरपुर ,पन्ना,टीकमगण ,झाँसी जिले केलोगों की तक़दीर बदलने वाली  ,बुंदेलखंड की महत्वपूर्ण केन -बेतवा लिंक परियोजना पर भी सवाल उठने लगे हें | अटल जी के प्रधानमंत्रित्व काल में जब देश की ३७ नदियों को आपस में जोडने का फैसला लिया गया ,उनमे से एक यह भी थी | देश की इन ३७ नदियों को आपस में जोडने पर ५लख ६० हजार करोड़ रु .व्यय होने का अनुमान लगाया गया था | |यह देश की वह परियोजना है जिसे सबसे पहले शुरू होना था | परियोजना के सर्वेक्षण कार्य पर ३० करोड़ रु ,व्यय किये गए हें | ६ हजार करोड़ की इस परियोजना का मुख्य बाँध पन्ना टाइगर रिजर्व  के डोंदन गाँव में बनना है | बाँध वा नहरों के कारण सवा पांच हजार हेक्टेयर छेत्र  नष्ट हो जाएगा ,छतरपुर जिले के दस गाँव डूब जायेंगे |
केन बेतवा लिंक परियोजना में चार बाँध बनाए जायेंगे | केन नदी पर डोंदन बाँध बनेगा |७७ मी.ऊँचा वा १९६३३ वर्ग कि.मी. जलग्रहण छमता  वाले इस मुख्य बाँध में २८५३ एम्.सी.एम्.पानी भंडारण कि छमता होगी|२६१३.१९ करोड़ कि लागत वाले इस बाँध से दो  बिजली घर बनेंगे जिससे ३६ में.वा. बिजली बनेगी  |इन बिजली घर पर ३४१.५५ करोड़ कि  राशि व्यय  होगी  |इस बाँध के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व  कि ५२५८ हेक्टेयर जमीन  सहित कुल ९हजार जमीन डूब जाएगी | इस जमीन पर बसे सुकुवाहा ,भावर खुवा ,घुगारी ,वसोदा ,कुपी,शाहपुरा ,डोंदन ,पल्कोहा ,खरयानी,और मेनारी गाँव का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा | बाँध से २७०८.३६ करोड़ कि लागत से नहरें बनाई जाएँगी | २१८ कि.मी.लम्बी मुख्य  नहर उत्तर प्रदेश के बरुआ सागर में जाकर मिलेगी | इस नहर से १०७४ एम्.सी.एम्. पानी प्रति वर्ष भेजा जाएगा ,जिसमे से ६५९ एम्.सी.एम्. पानी बेतवा नदी में पहुंचेगा |
डोंदन बाँध के अलावा तीन और बाँध भी मध्य प्रदेश कि जमीन पर बेतवा नदी पर  बनेंगे | रायसेन वा विदिशा जिले में बनने वाले मकोडिया बाँध से ५६८५० हेक्टेयर छेत्र में,बरारी बेराज से २५०० हे.वा केसरी बेराज से २८८० हे. छेत्र में  सिचाई  होगी | लिंक नहर से मार्गों में ६०२९४ हे. छेत्र सिंचित होगा ,इसमे मध्यप्रदेश के ४६५९९ हे. वा उत्तर प्रदेश के १३६९५ हे.छेत्र में सिचाई होगी | डोंदन बाँध से छतरपुर और पन्ना जिले कि ३.२३ लाख हे. जमीन सिंचित होगी
 बाँध को पर्यावरण विद उचित नहीं मानते हें | इसे प्रकृति के के नियमों के विपरीत वा विनाशकारी  मानते हुए डॉ.वंदना शिवा  सेमिनारों में कह चुकी हें कि  सरकार यह सब विदेशी कम्पनियों के इशारे पर बुंदेलखंड कि जेव विभिद्द्ता को नष्ट करने कि साजिश कर रही हे | सरकार पानी पर से जनता के बुनियादी अधिकार को ख़त्म करना चाहती हे | केन और बेतवा  के पानी के निजीकरण की पहली सीडी है | इस परियोजना पर जितना पैसा लगाया जा रहा है यदि उसे गाँव का पानी गाँव में रोकने पर खर्च किया जाए तो बुंदेलखंड के हर गाँव में खुशहाली छा जायेगी |
अब यहाँ सरकार को यह बात समझ में शायद नहीं आती की ,या वह समझना नहीं चाहती की एक ओर पन्ना टाइगर रिजर्व हे , जिसको बचाए रखने का दावा सरकार  करती रहती है | बाघों को बचाने के लिए सरकार ने खजाना खोल रखा है  " दूसरी ओर वाही सरकार पार्क एरिया में बाँध बनाकर बाघों को भी विस्थापित करना चाहती है | 
अब लगता है जय राम रमेश के बयान के बाद की शायद यह पार्क बचा रहेगा |   

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