09 मार्च, 2010

ajab dastaan

फिरोती में मांगी लड़की 
रवीन्द्र व्यास 

छतरपुर जिले के सरबाई  कस्बे से एक अनोखा अपहरण का मामला सामने आया है | अपहरण कर्ता फूल सिंह ने डेढ़ साल के दलित लडके का अपहरण कर फिरोती के रूप में उसकी १८ वर्षीया  बहिन [सुमन } की मांग की है | पुलिस अपहरण कर्ता की तलाश में जुटी है |
घटना की कहानी बताते हुए सुमन ने बताया 
१५ अगस्त ०९ के दूसरे दिन रात १२ बजे फूल सिंह दरवाजे तोड़ कर मुझे उठा ले गया था ,पहले जंगल ले गया फिर बांदा ले गया ३-४ दिन रखे रहा ' वो मेरे साथ गलत काम करता रहा और दूसरों से भी कराता रहा | कल बरबंद घाट पर हम को पुलिस ने सादा वर्दी में पहुँच कर बचाया वो तो पुलिस को देख कर भाग गया हम वह्नी खडे रहे \ रात में वो हमारे मामा के लडके मोहित  को उठा ले गया और कह रहा है की तुम आ जाओ तो इसे छोड़ देंगे |
ये वो कहानी है जो सुमन ने मीडिया को बताई है | सरबाई थाना प्रभारी ए.राय के अनुसार सुमन का परिवार गोहानी में फूल सिंह के यहाँ कटाई का ,खेती का काम करता था वहीँ इन दोनों के बीच सम्बन्ध बने और फूल सिंह इसे ले गया ,बहर हाल पुलिस अप्रहत बच्चे की तलाश कर रही है |
छतरपुर जिले का यह वह इलाका है जहाँ स्त्री -पुरुष संतुलन सर्वाधिक गड़बड़ है | इस इलाके में लोग अपनी बेटी भी नहीं देना चाहते है जिसके चलते इस इलाके में कुंवारों की तादाद भी अच्छी खाशी है |  यह अपहरण और बहिन की मांग भी इसी से जुडी एक वो कहानी है जिसे सहज रूप में नहीं लिया जा  सकता |
पुलिस के आला अधिकारी इस मामले में यह कह कर चुप्पी धारण कर लेते है की मामला बच्चे का है इस कारण बहुत ही संवेदन शील है \हमारा प्रयाश बच्चे को बचाने का है \ पुलिस ने ९-१० मार्च की रात १ बजे केन के किनारे से बच्चे को छुडा लिया हमेशा की तरह अपराधी भागने में कामयाब रहा |
बुंदेलखंड मीडिया रिसोर्स नेटवर्क /९मर्च१० 


05 मार्च, 2010

ladki ki bebasi



फिर जिन्दा जलाया लड़की को
-----------------रवीन्द्र व्यास --------
मध्य प्रदेश के छतरपुर में एक सत्रह साल की लड़की को जिन्दा जलादिया गया | शतप्रतिशत जली इस लड़की को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती किया गया जहाँ उसकी ४ मार्च को देर रात मोत हो गई |
 छतरपुर के पास  हमा गाँव में  शाम के समय रोज की तरह हलचल नहीं थी |गाँव में मातम का माहोल था \ आखिर इस गाँव में भी शहर की बीमारी जो लग गई थी \सत्रह साल की छात्रा संध्या रिछारिया को उसीके  घर में जिन्दा जला दिया गया | संध्या  के  पिता सरजू प्रसाद जब घर आए तो उन्हे अपनी बेटी जलती हुई मिली \ उसी ने अपने पिता और तहसीलदार को दिए बयानों में बताया कि कुछ लोगों ने घर में  घुसने का प्रयास  किया |दरवाजा ना खोले जाने पर रमाकांत रावत ,हीरालाल रावत [५८],अशोक रावत ,वा दीपक नायक  बगल वाले के घर से कूद कर अन्दर घुसे \ इन लोगों ने उसके साथ जोर जबरदस्ती का प्रयास  किया ,असफल होने पर केरोसिन डाल कर जिन्दा जला दिया | पिता सरजू प्रसाद रिछारिया ने इसकी खबर गाँव के सरपंच को दी उन्होंने वाहन का इंतजाम किया और संध्या को शतप्रतिशत जली दशा में छतरपुर जिला अस्पताल में भर्ती किया | अस्पताल में उपचार के दोरान देर रात उसने दम तोड़ दिया |
           ओरछा रोड थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है | पुलिस के सामने जो स्थितियां सामने आ रही है वे एक दूसरे से मेल नहीं खाती | ये हम नहीं बल्की जनता कि रक्षा का दावा करने वाली पुलिस कह रही है | सी.एस.पी.समीर यादव  हमेशा कि तरह इस मामले कि जाँच में मुस्तेद नजर आये वे बताने लगे कि मामले का वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर विश्लेषण किया जायेगा जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्यवाही कि जाएगी \
लड़की जली या जलाई गई 
संध्या के मामले में कई बातें उभर कर सामने आ रही है \ गाँव में कुछ लोग कहते है कि उसका चक्कर एक उमेश नाम के लडके से चल रहा था | घर के लोग जब खेत पर चले गए तो उसने उसको बुला लिया | इस नज़ारे को देख गाँव वालों ने दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया जब नहीं खुले तो अशोक बगल के घर से अन्दर कूदा और उसने दरवाजे कि कुण्डी खोली | इसी बीच उसने स्वयं पर तेल डाल कर आग लगा ली | वो सवाल करते है कि क्या अशोक रावत अपने पिता हीरा लाल रावत के साथ जा कर बलात्कार का प्रयास करता |
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जिन्दा जलाया 
२६ जून ०९ को छतरपुर के अमानगंज मोहल्ले में १५ साल कि रुकसाना को जिन्दा जला दिया गया था | सातवी की इस छात्रा का वहीँ के एक लडके के साथ चक्कर बताया गया था | पुलिस ने बयानों के आधार पर राजेश,ब्रजेश,सियाराम ,और नासिर को ३०२ में गिरफ्तार कर जेल भेजा था |
२७ जून ०९ को दमोह के पास राजकुमारी रेकवार को प्रकाश चौबे रखेल बना कर रखे था ,दोनों में विवाद हुआ | पहले उसे गला दबा कर मारना चाहा नहीं मरने पर उसके ऊपर तेल डाल कर जिन्दा जला दिया |पुलिस ने बाद में प्रकाश को गिरफ्तार कर लिया |
२६ जुने०९ के ही दिन छतरपुर जिले के ईशानगर थाना इलाके के निवारिया  नामक गाँव में प्रेम लाल की पत्नी चन्दा साहू [२०] को उसकी जेठानी ने तेल डाल कर जिन्दा जला दिया |
चंदोली [घुवारा ] में  ११ जुलाई ०९ को देव प्रकाश घोस की पत्नी रेखा घोष को उसकी ही सास रती बाई ,देवरानी कोशल्या  वा चंदा ने  मिलकर ज़िंदा जला कर मार डाला \ खेत की जमीन पर प्रकाश का विवाद अपने भाइयों से हुआ था |
दमोह के पिप्रोदा छक्का [पथरिया ] में ९ जुलाई ०९ की शाम श्रीमती  विनीता पटेल     के साथ छेड़ छाड़  गाँव के पुजारी देवकी तिवारी द्वारा की गई | बात ना बनने पर उसपर तेल डाल कर ज़िंदा जला दिया गया | पुलिस ने देवकी पर ३०६ का मामला दर्ज किया | 
इस मामले को लेकर  गाँव में कुर्मी समाज की पंचायत भी बेठी थी |
टीकमगण के प्रथ्विपुर के दरेठा तिराहा पर दो युवकों ने एक युवती को जिन्दा जलाया \
 समाज शास्त्री कहते है कि इस तरह के  अमानुषिक  कृत्य करने वाले वास्तव में मानसिक बीमारी के शिकार होते है |
बुंदेलखंड मीडिया रिसोर्स नेटवर्क  









21 फ़रवरी, 2010

Fwd: Story Script/ Khajuraho Matangeswar

मतंगेस्वर मंदिर जहाँ हर मुराद होती है पूर्ण 
[रवीन्द्र व्यास ]
खजुराहो के मंदिर वेसे तो दुनिया भर में काम कला के मंदिरों के रूप में विख्यात है| किन्तु यंहां का  मतंगेस्वर शिव मंदिर हिन्दुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है |यही एक मात्र एसा मंदिर है जहाँ आदि काल से निरंतर पूजा होती चली आ रही है | चंदेल राजाओं द्वारा नोवी सदी  में बंनाये गए इस मंदिर में के शिव लिंग के नीचे एक एसी मणि है जो हर मनोकामना पूरी करती है \ कभी यहाँ भगवान् राम ने भी पूजा की थी | शिव रात्रि के दिन यहाँ शिव भक्तों का तांता लगा रहता | खजुराहो के सभी मंदिरों में सबसे ऊँची जगती पर बने इस मंदिर में जो भी आता है वो भक्ति में डूब जाता है चाहे वो हिन्दुस्तानी हो या विदेशी | कहते है की यह शिव लिंग किसी ने बनवाया नहीं है बल्कि यह स्वयंभू शिव लिंग है \ १८ फिट की मूर्ति है  जितना ऊपर है उतना ही नीचे भी है |ये मूर्ति प्रति वर्ष तिल के बराबर बढती भी है |
मतंग ऋषि करते थे पूजा 
 यंहां मतंग ऋषि इस शिव लिंग की पूजा करते थे | इसका नाम मतंगेस्वर स्वयं  भगवान् श्री राम ने मतंग ऋषि के नाम पर रखा था |हमे यहाँ मिले यमुना प्रसाद मिश्रा [योगी] जिनका जीवन ही यहाँ की आराधना के बाद बदल गया सिपाही से वे योगी बन गए |वे बताने लगे यहाँ की महिमा ,यंहां पर मूर्ति पहले से स्थापित थी ,त्रेता युग में इसका उलेख मिलता है ,रामायण में उल्लेख मिलता है ,यहाँ मतंग ऋषि थे उनसे मिलने भगवान् राम आए थे ,उन्होने भगवान शिव की पूजा अर्चना की और उन्होने मतंग  के नाम पर भगवान शिव को मतंगेस्वर नाम दिया |
मरकत मणि :
 यंहां के चंदेल राजाओं को  मरकत मणि  चन्द्र वंशी होने के कारण विरासत में मिली थी | चंदेल राजाओं ने इस मणि की सुरक्षा के लिए और नियमित पूजा अर्चना के लिए इसे शिव लिंग के नीचे रखवा दिया था ,लोक मान्यता है की  जो भी  आदमी मरकत मणि की पूजा करता है उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है |इंद्र  के द्वारा मरकत मणि युधिस्टर को दी गई थी , आगे जाकर यशो वर्मन ,चन्द्र वर्मन के पास रही है उन्होने उसकी सुरक्षा करने के हिसाब से वा पूजा अर्चना होती रहे इसलिए  शिव लिंग के नीचे स्थापित करा दिया था |
आज खजुराहो के इस मंदिर में हर कोई एक मनोकामना लेकर आता है ,भोले भंडारी  हर किसी की मनोकामना पूर्ण भी करते है एसा विश्वास यंहां के लोगों का है |लोगों की आस्थाए है  तभी तो यंहां हर शिव रात्रि ,अमावश्या पर यहाँ हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुडते है |पीड़ियों से यहाँ पुजारी का दायित्व निभाने वाले बाबूलाल गोतम यहाँ भक्तों के भाव काफी नजदीकी से देख रहे है ,वे बातों ही बातों में बताने लगे की किस तरह लोग यहाँ आकर अपनी मनोकामना व्यक्त करते है ,लोग उल्टे हाथे लगाकर अपनी मनोकामना व्यक्त करते है ,मनोकामना पूर्ण होने के बाद सीधे हाथे लगाते है |पंडित जी कब भावुक हो गए पता ही नहीं चला ,कहने लगे हमारे परिवार की प्रगति की जो रफ़्तार है वह इन्ही की कृपा से है |
खजुराहो के ही राम विशाल दीक्षित का काम पर्यटकों को घुमाना है ,उनकी आँखों के सामने आज भी वह द्रश्य घूम जाता है जब वो कुछ पाने और बनने के लिए खजुराहो आया था ,पर हताशा में उसे ३०० रु की नोकरी करना पड़ी तभी वह भी मतंगेस्वर के दरबार में फरियाद लेकर पहुंचा  तब से आज तक उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा ,वो अपनी तरह से अपनी बात समझाता है |देखिये ये १८ फिट uncha  शिव लिंग है जितना ऊपर है उतना ही नीचे है उसके नीचे मणि लगी है ,मणि के सामने आप मनसा वाचा कर्मणा से आप जाते है तो आपकी मनोकामना पूर्ण होगी |, जब में खजुराहो आया मुझे अंग्रेजी बोलना आती नहीं थी,में किसीको जनता नहीं था | मेने इनके दर्शन किये | इनकी कृपा से आज खजुराहो में मेरा मकान है ,गाड़ी है ,सब कुछ है|
में बहुत देर तक लोगों की आस्था और विश्वास को तोलने का प्रयाश करता रहा ,यह समझ नहीं पा रहा था की किस पर विश्वास करूँ और किस पर ना करूँ | तभी मुझे लगा की शंका का समाधान ए.एस.आइ. वालों से किया जा सकता है \ हम पहुंचे राहुल तिवारी के पास वे  यहाँ के अधिकारी है ,कहने लगे की हाँ यहाँ कई तरह की किवदंतियां है ,लोगों की आस्थाएं बहुत है ,आसपास के बहुत सारे लोग यहाँ आते है |
                                          




31 जनवरी, 2010

Rani hui farar

राजा गए जेल ,रानी हुई फरार
खबर दर खबर - बुंदेलखंड
[रवीन्द्र व्यास ]
मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में इन दिनों पंचायत चुनाव के बाद यदि किसी की चर्चा सबसे ज्यादा है तो वो है भैया राजा, अपनी ही नातिन वसुंधरा की हत्या के षड्यंत्र के आरोप में जेल में बंद भैया राजा पर ये एक एसा कलंक लगा है जो उनके द्वारा किये गए तमाम अपराधों पर भारी पडा इस मुश्किल से वे निजात पाते की उनके एक और पाप की फाइल खुल गई , उन्होने अपने साथियों की मदद से साटा[पन्ना]गाँव से १३ साल पहले विवाहिता तिज्जी बाई का अपहरण कराया उसे बंधक बना कर रखा ,२१ /०५/०७ को उसने आग लगा कर भोपाल में आत्महत्या कर ली उनके इस पाप में उनकी पहली पत्नी विधायक आशा रानी की भी सहभागिता बताई जाती है , भोपाल पुलिस ने उनके ऊपर भी मामला दर्ज कर लिया है , फिलहाल विधायिका जी की तलाश में पुलिस घूम रही है और वे बी.जे.पी.के राजनाथ सिंह से मदद की गुहार लगा रही है भैया राजा की दूसरी पत्नी की इस तरह के आपराधिक मामले में भूमिका तलाशने में पुलिस जुटी है
अशोक वीर विक्रम सिंह उर्फ़ भैया राजा ने अपनी राजनीत का मुकाम अपराध से पाया है दिसंबर 1950 में जन्मे भैया राजा ने अपराध की दुनिया में 1968 से ही कदम रख दिया था उनके बडे भाई इंद्र विक्रम सिंह मध्य प्रदेश पुलिस में डी.आई.जी. थे ,जिस कारण पुलिस में उनका खाशा रुतबा था ,पुलिस ने उनके छोटे -मोटे अपराधों को हमेशा अनदेखा किया इसके बावजूद जब अपराध और उनके अत्याचार बडे तो छतरपुर कलेक्टर ने 1970 में पहली बार प्रतिबंधात्मक कार्यवाही की ,हालांकि यह कार्यवाही उनपर 1972 में दो बार ,1987 में एक बार तथा 1989 में रासुका के तहत गिरफ्तार किया गया था छतरपुर पुलिस ने हाई कोर्ट में कहा था की विक्रम सिंह के आतंक के चलते कई गंभीर अपराध दर्ज ही नहीं हो पाते है उनपर दर्ज यदि आपराधिक मामलों को देखा जाये तो एसा कोई अपराध नहीं है जो उनपर दर्ज ना हुआ हो अपहरण ,हत्या ,हत्या का प्रयाश ,बलात्कार ,लूट ,डकेती,पुलिस की पिटाई तक के मामले दर्ज हो चूके है भैया राजा पर अपनी ही मोसी के दो लड़कों के अपहरण वा हत्या का भी अपराध महराजपुर थाने में दर्ज हो चुका है 1982 में अपराध क्रमांक 110/82 धारा - 364, 302 ,201 ता.हि. के तहत ये मामला दर्ज हुआ था 1986 में छतरपुर सिविल लाइन पुलिस थाने में अप.क्र.21/86 धारा 353,293,506 b. के तहत एस.डी.ओ. पुलिस के साथ मारपीट का मामला दर्ज हुआ १९८९ में किच्छा नेनीताल [उत्तर प्रदेश ] में अप.क्र,67/८९ धारा , 302,307,201 के तहत तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री बूटा सिंह के भतीजे सिदार्थ राव सांगा की हत्या का मामला दर्ज हुआ गंभीर अपराध करने के बावजूद वो कानून की कमियों का फायदा उठाकर हमेशा बचता रहा
सियासत में कांग्रेस के नजदीकी रहने वाले भैया राजा को जब १९९० में टिकिट नहीं मिला तो निर्दलीय चुनाव पवई[पन्ना जिला] विधान सभा सीट से जेल में रहकर लड़ा और जीता1995-96 में इसी विधान सभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता पन्ना कापरेटिव बैंक पर वर्षों से अपना बर्चस्व बनाये रखने वाले भैया राजा ,ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ा था ,\बड़ा मलहरा के उप चुनाव में भाजपा .को उमा भारती की पार्टी जनशक्ति को हर कीमत पर शिकस्त देना थी ,जिसके चलते भाजपा के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भैया राजा से हाथ मिला लिया था जिसके एवज में प्रदेश के विधान सभा चुनाव में भैया राजा की पहली पत्नी आशा रानी को बिजावर विधानसभा से पार्टी का टिकिट दिया गया इस तरह भाजपा. ने अपराधियों को टिकिट दिये जाने के कलंक से मुक्ति तो पा ली किन्तु अब उनके कर्मों से मिल रहे कलंक से मुक्ति का मार्ग शायद भाजपा को नहीं सूझ रहा है |भैया राजा जेल में है पुलिस उनकी विधायक पत्नी वा उनके साथी नर्मदा प्रसाद ,गोपाल सिंह,कन्हैया लाल दुबे ,मिजाजी रैकवार ,भोंरी वा ख्वाजा की तलाश में जुटी है |
बुंदेलखंड अंचल के छतरपुर ,पन्ना ,और आस पास के जिलों में सामंतवाद आजादी के बाद से ही चरम पर रहा है|गाँव -गाँव में सामंतवाद के बल पर सियासत का निति निर्धारण होता रहा है |ठाकुर को राजा और पंडित को महराज का रुतबा मिलता रहा है \

Antim sanskar

हिन्दू रीति रिवाज से हुआ  विदेशियों का अंतिम संस्कार 
खजुराहो/२३ जन२०१० 
आज यंहां दक्षिण कोरिया की दो विदेशी महिलाओं का हिन्दू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार किया गया | दक्षिण कोरिया के बुसान [busan] की रहने वाली जोंग वा कोंग अपने साथियों के साथ हिंदुस्तान घूमने के लिए आई थी | १९ जनवरी को पन्ना के देवेन्द्र नगर कस्बे के पास एक सड़क हादसे में इन दोनों की मोत हो गई थी ,वा ड्राइवर सहित ५ लोग घायल हो गए थे | तब से इन दोनों के शवों को परिवार के लोगों का इंतजार था |
            दक्षिण कोरिया दूतावास के कौंसलर एच .एच.किम {h.h.kim] ने बताया की ये दोनों हाई स्कूल में शिक्षिका थी | इनके भाई वा चाचा शनिवार को  यंहा आये | इसाई होने के बाद हिन्दू रीति रिवाज से दाह संस्कार किये जाने के सवाल पर उनका कहना था की सभी भगवान एक है हिंदुस्तान में भगवान है तो ईसा भी है ,यही सब किया \अंतिम संस्कार कराने वाले पंडित विद्या प्रकाश अवस्थी ने बताया की खजुराहो पर्यटक क्षेत्र है ,यंहा आने वालों के साथ अतिथि देवो भवः मानते ही व्यहार किया जाता है |

panchayat prapanch

पंचायत प्रपंच 
[रवीन्द्र व्यास ]
आज अगर महत्मा गाँधी जिन्दा होते तो वे भी एसे पंचायती राज व्यवस्था से तोबा कर लेते \ मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव के दोरान हिंसा का जो तांडव देखने को मिला ,उसे देख कर यही लगता की अहिंसा के पुजारी गाँधी के नाम पर सिर्फ पंचायती राज व्यवस्था का प्रपंच  इस देश में रचा गया |वह वास्तव में  गाँव में सामजिक समरसता को समाप्त करने का एक षड्यंत्र था | इस की बानगी पिछले और इस बार के चुनावों में देखने को मिल गई \\ हम एसा भी नहीं मानते कि यह कदम गलत था ,किन्तु नेतिकता हीन हिंदुस्तान में पहली जरुरत वातावरण निर्माण की थी | किन्तु सिर्फ अपनी और अपने परिवार की सोच रखने वाले समाज से आये लोगों ,नेताओं ,अधिकरियों से हम किस तरह की उमीन्द कर सकते है |
---------------------खबर दर खबर[ बुंदेलखंड]
जनवरी के अंतिम सप्ताह में हुए पंचायत चुनावों में बूथ केप्चरिंग ,गोली चालन, मार पीट ,पुलिस अधिकारिओं के साथ मार पीट ,हत्या जेसे जघन्य कृत्य हुए | मसला पंचायत के पंच,जनपद सदस्य , जिला पंचायत सदस्य को लेकर उतना उग्र नहीं था| सारे फसाद की जड़ में सरपंची का रूतबा था \ सरपंची पाने के लिए कैसे -२ हथकंडे अपनाये गए ये लगभग हर कोई जनता है \ बुंदेलखंड अंचल के ही छतरपुर जिले में खजवा ग्राम पंचायत में पुलिस टी.आइ. से मिलकर वहां के सरपंच ने साजिस रची | नतीजे में अतरिक्त पुलिस अधीक्षक  एम्.एल.छारी ,सीईओ .जिला पंचायत रघुराज एम्.आर. ,पुलिस के टी.आई. वगेरह पिटे,पुलिस ने गोली चलाई पर बाद में इस गोली चालन की बात से पुलिस इंकार करने लगी | जिले के लोंड़ी ब्लाक के गुड़ाकला में  मत गड़ना के विवाद में एस.डी.एम्.,टी.आइ.सहित १० पुलिस कर्मियों ,मतदान कर्मियों को ग्रामीणों ने ना सिर्फ पीटा बल्की ९ घंटे तक बंधक बनाये रखा |छतरपुर के बारी गाँव में भी ग्रामीणों ने पुलिस बल पर हमला बोला ,पुलिस किसी तरह हवाई फायर कर जान बचा कर भागी \बडामलहरा के राजपुरा गाँव के भूरिया अहिरवार [४२] को गाँव के जीते सरपंच पहलवान यादव ,रामप्यारी यादव ने अपने साथियों के साथ मिलकर मार डाला | उसका कसूर इतना था की चुनावों में उसने पहलवान के प्रत्याशी का विरोध किया था \दलितों की रिपोर्ट १८ घंटे बाद तब लिखी गई जब उन लोगों ने सड़क पर लाश रख कर जाम लगाया ,बडामलहरा कस्बे में तोड़ फोड़ की \  सिंह पुर ग्राम पंचायत से राम पल अहिरवार सरपंच तो बन गए किन्तु अब उनके सामने नई मुसीबत आ गई है ,गाँव का दबंग नन्हे लोधी ५ लाख की मांग कर रहा है ,ना देने पर पूरी बस्ती को जलाने की धमकी दे रहा है |,बडामलहरा इलाके के घुवारा छेत्र  में आजादी के बाद से अपनी दबंगियत कायम रखने वाले लोगों ने आलोक जैन को पीटा \सेवडी गाँव में हारे और जीते गुट के बीच हुए संघर्ष में ४ लोग घायल हो गए |
टीकमगण जिले के पलेरा और जतारा जनपद  छेत्र में एक दर्जन से ज्यादा गांवों में हिंसक वारदाते हुई |भिंड  में २० स्थानों पर हिंसा हुई  गोलियां चली ,पीठासीन अधिकारी पीटा ,मुरेना में कई स्थानों पर गोलियां चली ,४ घायल हुए ,मतपेटियां लूट ली गई \ सागर के मल्थोंन ब्लाक में बिजरी गाँव में मतपेटियां कुए  में फेख डी गई |शिवपुरी  ,श्योपुर ,खंडवा में भी जम कर हिंसा का तांडव हुआ \
                                                 गाँव -गाँव में खून से सनी  लोकतंत्र की स्थापना हो गई है ,अब बारी है जनपद और जिला पंचायत की जिसमे जिले के राजनेता अपने बर्चस्व का परचम फहराएंगे | अपने आदमी को अध्यक्ष बनाने के लिए वो सारे हथकंडे अपनाये जायेंगे जो कानून के विपरीत माने जाते है |
00बुंदेलखंड मीडिया रिसोर्स नेटवर्क 

10 जनवरी, 2010

पीडियों से खिलवाड़


रवीन्द्र व्यास
दुनिया के देश पानी की समस्या को लेकर भले ही चिंतित हो पर बुंदेलखंड अंचल के छतरपुर जिले में देश के भविष्य और पीडियों से केसे खिलवाड़ किया जा सकता है ,इसका नमूना देखना हो तो आप अवश्य छतरपुर आइये आप यंहा पाएँगे पैसा कमाने के नायाब नुस्खे ,इंजिनरी का कमाल ,मूल लक्ष्य से भटकने का चमत्कार ,वह सब भी छात्रों की जिन्दगी की कीमत पर
सुकुंवा गाँव के सेकेंडरी स्कूल में जमीन पर बनी टंकी देख कर कोतुहल जागा ,लगा सरकार ने बच्चों के पीने के पानी की अच्छी व्यवस्था कर दी है \ पास जाने पर जो पाया तो होश उड़ गए \ यह पानी की टंकी कुछ ऊपर कुछ नीचे बनी थी ,इसमे किसी टीउब वेल से पानी नहीं भरा जाता बल्की इसमे वर्षा का जल संरक्षित किया जाता है ,ताकि स्कूल के बच्चे वर्ष भर इस पानी से अपनी प्यास बुझा सकें \ वर्षा जल को संरक्षित करने के स्कूल की छत पर से दो कोने से पाइप लगाये गए थे \ पर स्कूल की छत की पट्टी टूटी देख कर हमने छात्रों से इसके टूटने का कारण पूंछा तो ,इन लोगों ने बताया की एक तो हमारे स्कूल की ऐसी तैसी कर दी अब आप पूंछ रहे है की पट्टी क्यों टूटी \ अगर पट्टी नहीं तोडते हमारा स्कूल गिर जाता \ स्कूल की छत पर पानी भर गया था ,दीवालों में सिडन आने लगी थी \ किसने बनवाई ये टंकी इन छात्रों को नहीं पता ये कोई अकेले सुकुवां गाँव की कहानी नहीं है ,किस-किस गाँव के स्कूल की बात करे लगभग हर जगह यही हालात मिले \ चाहे वे सिमरिया ,सहस्नगर ,बछर्वानी,मोराहा,प्रतापपुरा ,धमना ,चित्रही ,अतर्रा हो या सिमरधा \ मोराहा स्कूल में तो अजब नजारा देखने को मिला ,स्कूल की छत पर फसल सूख रही थी , टंकी में जाने वाले पाइप लाइन के मुहाने पर कचडे का ढेर था \यंहा के छात्र राजेश ने बताया की टंकी से कभी पानी नहीं मिला ,और ना कभी इसका उपयोग किया \ एक बार गाँव में कालेज के लड़का लड़कियां का केम्प लगा था ,तब पास के कुंए से इस टंकी को भरा गया थासल्लैया में स्कूल के पास सार्वजानिक कुआँ है ,जिसका उपयोग गाँव के लोग वा स्कूल के बच्चे करते है \यंहा भी जल संरक्षण के लिए टंकी बन गई पर पाइप लाइन नहीं जुडी प्राचार्य सुनील कुमार इस टंकी की उपयोगिता पर प्रश्न चिन्ह लगाते है \कीरतपुरा स्कूल भवन के बगल में टंकी तो बन गई पर मजे की बात ये है की इस भवन में स्कूल ही नहीं लगता ,भवन में छत ही नहीं है \ जिस स्कूल के लिए ये टंकी बनाई गई है वो स्कूल यंहा से एक किलोमीटर दूर लगता है \कहते है की स्कूल के जब अतरिक्त कच्छ बन जायेंगे तब उसकी छत से इस टंकी को जोड़ दिया जायेगा \ सामजिक सरोकार से जुडे इस मामले की तह तक जाने के लिए बुंदेलखंड मीडिया रिसोर्स नेटवर्क [बमरन.] ने खोज बीन की तो चोंकाने वाले तात्या उभर कर सामने आये \छतरपुर जिले का सुकुंवा कोई अकेला स्कूल नहीं था जिले के ७२ स्कूलों में इस तरह की टंकी निर्माण कर दो करोड़ ३७ लाख रुपये खर्च किये गए \ रूफ वाटर हार्वेस्टिंग ,ग्रामीण स्कूलों में जल संरक्षण योजना ,यह इस जिले में २००७-२००८ से शुरू की गई \४० स्कूलों में २.४७ लाख की लागत [प्रत्येक ] से बनाये गए इस स्ट्रक्चर में कुल ९८.८० लाख रु. व्यय हुए \ २००८-२००९ में ३२ स्कूलों में ४.३२ लाख के मान से १३८.२४ लाख रु. व्यय किये गए २००९-२०१० के लिए ४.३१ लाख के मान से २८ स्कूलों में जल संरक्षण की टंकी का निर्माण प्रस्तावित है इस पर १२१.४८ लाख रु. व्यय होंगे
यूनिसेफ ने इस योजना के लिए धन राशीमध्य प्रदेश सरकार को मुहैया कराई \ उसका मकसद था की जिले के एसे स्कूलों में जहाँ पानी के स्रोत नहीं है ,और बच्चों को पीने के पानी की समस्या है ,वहां वर्षा जल को संरक्षित किया जाये \ उद्देश्य अच्छा था ,पर सरकारी तंत्र ने इस योजना का एसा सत्यानाश किया की अब यूनिसेफ वालों को भी दुबारा सोचना पड़ेगा \वर्षा जल संरक्षण के नाम पर इस कार्य को कराने वाले लोक स्वस्थ्य एवं यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री श्रीवास्तव का कहना है की हमने तो शासन की योजना वा निर्धारित कार्य डिजायन के अनुशार कार्य कराया है \हम तो वाही करते है जो सरकार के दिशा निर्देश होते है ,यदि कुछ छुट -पुट परेशानी है तो उसे ठीक करेंगे जल संरक्षण के इस तमासे की सत्यता जानने के लिए एक सर्वे स्वयं सेवी संस्था ने कराया ६० से ज्यादा स्कूलों के प्राचार्यों ने इस संरक्षित जल को पीने के लिए उपयोगी नहीं माना उनका कहना है की गन्दी छत से आने वाला पानी कैसे पीने योग्य हो सकता है \ जल संरक्षण के लिए कार्य करने वाली संस्था ग्लोबल विलेज फौंड़ेशन के प्रमुख अजय अवस्थी ने बताया की हमने अनेक स्कूलों का सर्वे किया है जिसमे विभाग ने "एक रचना सब पर लागु के सिधान्थ के तहत काम किया है वर्षा जल संरक्षण के लिए भारत सरकार के वाटर रिसोर्स मंत्रालय का जो मेनुअल है ,उसका यहाँ पालन नहीं हुआ छत पर साफ़ सफाई नहीं ,स्लोप नहीं ,कई टंकियों में पाइप नहीं लगे ,टंकी पाइप खुले छोडे गए ,टंकियों को जमीन के ऊपर बनना चाहिए पर नीचे बना दी गई टंकियों की साफ़ सफाई की कोई व्यवस्था नहीं हैजरुरी था स्कूलों में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग के प्रति बच्चों को जागरूक करना जो नहीं किया गया \यह टंकिया वहां ज्यादा उपयोगी थी ,जहाँ भू -जल बिलकुल नीचे चला गया है \इससे कंही ज्यादा बेहतर होता वाटर हार्वेस्टिंग पर कार्य किया जाता ,इतनी राशी में जिले के एक हजार विद्यालयों में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग का काम हो सकता था जो कंही ज्यादा उपयोगी होता \योजनाकारों वा धन मुहय्या कराने वाली सरकार को शायद होने वाले कार्यों की उपयोगिता से कोई सरोकार नहीं रह गया है होता तो पानी जैसी अमूल्य निधि पर लुट का यह खेल नहीं खेला जाता ,क्योंकि इससे जुड़ा है हमारी भावी पीणी का भविष्य

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