21 जून, 2025

Watar_मौत का कारण बनता पानी

 Watar_मौत का कारण बनता पानी 

रवीन्द्र व्यास // 21/06/2025

दुनिया की महान सभ्यताओं का विकाश नदी और सरोवरों के तट पर हुआ ।  कहीं गांव और शहर उजड़े भी तो पानी की कमी के कारण। भारत की धार्मिक परंपराओं में प्यासे को पानी पिलाना पुण्य का कार्य माना जाता था। आज वह जल जानलेवा  बनता जा रहा है।    दुनिया में जर , जोरू , जमीन संघर्ष और हत्या के तीन प्रमुख कारण सदियों तक माने जाते रहे हैं। अब इसमें एक और प्रमुख कारण जल भी जुड़ गया है।ये हम नहीं कहते बल्कि संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक हत्या अध्ययन रिपोर्ट कहती है।

2023 की इस रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भारत में 2019 से 2021 के मध्य 0.5 फीसदी हत्या के मामले पानी को लेकर हुए आपसी संघर्ष के कारण सामने आए हैं। ऐसा भी नहीं है कि २०२१ के बाद  इस तरह की घटनाएं रुक गई हो , आए दिन समाचार पत्रों में पानी पर फसाद को लेकर खबरें छपती रहती हैं। ये स्थिति तब है जब मोदी सरकार जल जीवन जैसा मिशन चलाकर हर घर तक पानी पहुंचाने का जतन कर रही है |  

पानी को लेकर ह्त्या 

 बुंदेलखंड के  सागर जिले के  महाराजपुर थाना क्षेत्र में एक गांव है  पनारी | इस गांव में गुरुवार की रात कल्याण अहिरवार (६५)  गांव में लगे हैंडपंप से   पानी भर रहे थे | तभी गाँव का युवक  रवि अहिरवार वहां आया और  बुजुर्ग के पीने वाले ड्रम से पानी निकालने लगा,| बुजुर्ग ने ड्रम से पानी  निकालने से मना किया तो वह भड़क गया।नाराज  युवक वापस अपने घर जाता है और मोहन ,रेवाराम ,उमेश ,आकाश और अपनी माँ प्रेम रानी अहिरवार को लेकर आता है | इन सभी लोगों ने आते ही बुजुर्ग पर लोहे की रॉड ,सब्बल से हमला कर दिया | घायल कल्याण को को उसके परिजन एम्बुलेंस से देवरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर जाते हैं जहाँ डॉक्टर उसे मृत घोषित कर देते हैं |  मृतक केभतीजे राजा अहिरवार की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया , सभी ६ आरोपियों को शुक्रवार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया

 जून माह के शुरुआत में झाँसी के प्रेम नगर थाना क्षेत्र के गोकुलपुरी में ऑटो चालक राहुल अहिरवार (२५) की कुल्हाड़ी से मारकर ह्त्या कर दी गई | राहुल का दोष सिर्फ इतना था कि उसने पडोसी रोहित गोस्वामी को  पानी नहीं दिया | जिस पर दोनों में कहा सुनी हुई विवाद इतना बड़ा कि  रोहित ने कुल्हाड़ी से हमला कर उसे बुरी तरह से घायल कर दिया | हालत गंभीर होने पर उसे झांसी से ग्वालियर रेफर किया गया रस्ते में ही उसकी मृत्यु हो गई | पुलिस ने आरोपी रोहित गोस्वामी को गिरफ्तार कर लिया |                                                                  

हाल ही में  बुंदेलखंड इलाके में ये कुछ घटनाएं देखीं और सुनी गई | पानी को हिंसक संघर्ष की ये कहानी सिर्फ बुंदेलखंड तक सीमित  नहीं है बिहार के  नवगछिया के जगतपुर में केंद्रीय गृह राज्यमंत्रीनित्यानंद राय के बहनोई के घर पानी को लेकर विवाद हुआ | विवाद इतना बड़ा कि मंत्री जी के  भांजे जयजीत यादव और विश्वजीत यादव उर्फ विकल यादव ने मार्च माह में  पिस्टल से एक-दूसरे को गोली मार दी । घटना में छोटे भाई विकलयादव की मौत हो गई थी, जबकि मंझले भाई जयजीत यादव की हालतगंभीर है। इस घटना में इनकी मां हिना देवी के हाथ में भी गोली लगी थी। ये घटनाएं बताती हैं कि पानी को लेकर पडोसी ही एक दूसरे के दुश्मन नहीं हो रहे बल्कि रिश्तों का भी पानी सूखने लगा है |              

संयुक्त राष्ट्र की वैश्विकहत्या अध्ययन रिपोर्ट

2023 के अनुसार, 2019 और 2021 के बीच भारत में हर पांच में से एक हत्यासंपत्ति या जमीन या पानी तक पहुंच को लेकर संघर्ष के कारण हुई।  2019-21 में भारत में दर्ज की गई हत्याओं में से लगभग 0.5प्रतिशत ( 300 )जल-संबंधी संघर्षों के कारण हुई  थीं। भारत में  विश्व की १८ से २० फीसदी आबादी होने के बावजूद जल स्रोत और संसाधन सीमित है | ऐसी दशा में देश में पानी को लेकर विवाद और खूनी संघर्ष  होना  एक तरह से प्रमुख घटनाओं में एक होता जा रहा है | राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के पिछले आंकड़े बताते हैं कि २०१७ में जितने मामले पानी को लेकर सामने आये थे उनकी संख्या २०१८ में दुगनी हो गई |  

पानी को लेकर पहल

 ऐसा भी नहीं है कि सरकार इन हालातों से अनजान है सरकार ने इस दिशा में कई सकारात्मक कदम उठाये हैं  | भूजल बढ़ाने के लिए तालाब योजना , हर घर तक जल पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन योजना बनाई गई | कई क्षेत्रों में इस योजना के बड़े सकारत्मक परिणाम सामने आये हैं | कई  प्रदेश और जिलों में इसे लेकर बेहतर कार्य नहीं हुआ है |                      

   हाल ही में  झांसी  बुंदेलखंड विश्वविद्यालय केसमाज कार्य विभाग ने जल जीवन मिशन योजना  पर एक रिपोर्ट जारी की | रिपोर्ट में   स्वास्थ्य , शिक्षा ,आर्थिक व सामाजिक परिवर्तन, सामाजिकसामंजस्य व दृष्टिकोण, रोजगार समेत पांच पहलुओं को लेकर विस्तार से जारी की गई । यूपी के  राज्य जलव स्वच्छता मिशन कार्यालय के आग्रह पर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने  यूपी बुंदेलखंड के  सातों जिलों  के 10-10 गांवों में जाकर सर्वे कर रिपोर्ट को तैयार किया गया | रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि जल जीवन मिशन योजना  लागू होने के बाद से लोगों की जीवन शैली में एक बड़ा सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है | स्वछ जल मिलने से जल जनित बीमारियों से छुटकारा मिला है , जिसका असर परिवार के अर्थ तंत्र पर पड़ा है ,रहन सहन के स्तर में बदलाव आया है  | शिक्षा के क्षेत्र में स्कूलों में बालिकाओं का नामांकन बड़ा है ,वहीँ ड्राप आउट कम हुआ है | जातिगत भेद भाव कम हुआ , पलायन के स्तर में कमी आई है \                                                  

एमपी के बुंदेलखंड में भी जिन गाँवों तक जल जीवन मिशन का जल पहुंच रहा है उसके सकारात्मक परिणाम सामने आये हैं | पर एम् पी के वाले बुंदेलखंड के जिलों में जल जीवन मिशन का कार्य उतनी प्राथमिकता से नहीं हो रहा है जितना कि उत्तर प्रदेश वाले बुंदेलखंड इलाके में हो रहा है | सागर संभाग के हर जिले में स्थिति एक जैसी है हर जिला के कलेक्टर आये दिन जल जीवन मिशन के कार्य को मिशन मोड़ में करने की हिदायत देते हैं पर हालात व्यवस्था के आगे मजबूर हैं |  

 

01 जून, 2025

Global_warming_प्रकृति का कोप :बढ़ता तापमान

 प्रकृति का कोप :बढ़ता तापमान  

 रवीन्द्र व्यास 

       बढ़ता तापमान  दुनिया भर के लिए संकट की चेतावनी लेकर आया है |आने वाले पांच वर्षो में तापमान लगभग 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ने की संभावना जताई जा रही है | जिसका सीधा असर  अनेकों स्तरों पर देखने को मिलेगा | प्रकृति ही प्रकृति की व्यवस्थाओं को  ठीक करती है , यह बात आज के  जलवायुपरिवर्तन में देखने को मिल रही है ,  प्रकृति भी मानव से उसके किये गए कार्यों का हिसाब चुकाने पर आमादा है | हाल ही में विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO ) ने विश्व के बढ़ते तापमान को लेकर  रिपोर्ट जारी की है | रिपोर्ट  में आने वाले ५ वर्षो में तापमान 1.5      से १. 9 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहने का दावा किया किया गया है | बढ़ते तापमान का असर हिमालय हिन्दुकुश पर्वत श्रंखला में देखने को मिल रहा है , जहाँ तीसरे साल भी हिमपात कम रहा ,इस वर्ष तो और ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है | नवम्बर से मार्च के मध्य हिमपात २३. फीसदी कम हुआ है ये सारी स्थितियां बताती हैं कि आने वाले समय  में मानव को बहुत सारे  सबक प्रकृति सिखाएगी

 विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO ) ने   2025-2029 के लिए जारी रिपोर्ट में  वैश्विक तापमान में वृद्धि की उम्मीद जताई है | यही नहीं  अगले पांच वर्षों में रिकॉर्ड स्तर पर या उसके निकट बने रहने की संभावना व्यक्त की है रिपोर्ट में पूर्वानुमान लगाया गया है कि 2025 और 2029 के  प्रत्येक वर्ष के लिए वार्षिक औसत ,वैश्विक औसत सतही तापमान 1850-1900 के वर्षों के औसत से 1.2°C और 1.9°C अधिक होने का अनुमान है। 8० फीसदी  संभावना यह  है कि 2025 और 2029 के बीच कम से कम एक वर्ष रिकॉर्ड पर सबसे गर्म वर्ष (वर्तमान में 2024) से अधिक गर्म होगा। और 8६ फीसदी  संभावना है कि कम से कम एक वर्ष पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5°C से अधिक होगा। इस  रिपोर्ट में अलग-अलग वर्षों के लिए वैश्विक पूर्वानुमान नहीं दिए गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, 2025-2029 के लिए पांच साल की औसत वार्मिंग 1.5°C से अधिक होने की 70 फीसदी  संभावना है। जो  पिछले साल की रिपोर्ट (2024-2028 अवधि के लिए) में 47 फीसदी  से और 2023-2027 अवधि के लिए 2023 रिपोर्ट में 3२ फीसदी  से अधिक है। 

 2015 में पेरिस में हुए अंतरराष्ट्रीय जलवायु सम्मेलन में विश्व के 196  नेताओं ने सहमति जताई थी कि ग्लोबल वार्मिंग को दो डिग्री सेल्सियस से ज्यादा नहीं होने देंगे और वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी को 1.5 डिग्री सेल्सियस के भीतर रखने के लिए प्रयास जारी रखेंगे | एक दशक बाद हालत जस के तस हैं बल्कि और ज्यादा विनाशक हैं | अगर देखा जाए तो जिला स्तर से लेकर  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर  ऐसी कमरों में बैठ कर चिंता जताने वाले लोगों की दुनिया में कमी नहीं है |  

                                                                 दरअसल २०२४ भारत ही नहीं विश्व का सबसे गर्म वर्ष रहा है | भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने १५ जनवरी २०२५ को  वार्षिक क्लाइमेट समरी में जानकारी देते हुए स्पष्ट किया था कि वर्ष 2024 भारत के लिए अब तक का सबसे गर्म वर्ष रहा है | तापमान को लेकर विश्व के अनेकों संगठन भी 2024 को सबसे गर्म वर्ष घोषित कर चुके हैं २०२४ में २१ जुलाई का वो दिन था जब  84 वर्षों में दुनिया में  सबसे गर्म दिन के रूप में रिकॉर्ड किया गया   21 जुलाई को वैश्विक औसत तापमान 17.09 डिग्री सेल्सियस के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया था ।

बढ़ते तापमान का असर : 

आईसीआईएमओडी ( इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलोपमेन्ट) ने अप्रैल माह में एक रिपोर्ट जारी की थी | रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि हिमालय पर्वत श्रृंखला में  बर्फबारी में कमी आई है पिछले तीन वर्षो से यह सिलसिला लगातार जारी है इस वर्ष  इसमें २३.६ फीसदी की गिरावट देखने को मिली जो बीते २३ वर्ष में सबसे कम है

तापमान में एक डिग्री की  अतिरिक्त वृद्धि  कई तरह की प्राकृतिक समस्या पैदा कर सकती हैं | जिनमे  हानिकारक हीटवेव, अत्यधिक वर्षा की घटना,  सूखा के हालात ,  बर्फ और ग्लेशियरों के पिघलने का सिलसिला बाद सकता है , जिसके असर से  समुद्र के गर्म होने और समुद्र के जलस्तर में वृद्धि होगी और कई इलाके डूबेंगे

 बढ़ते तापमान के कारण कम होती बर्फ़बारी भी एक गंभीर संकट खड़ा कर रही है | इसके कारण  हिमालय से निकलने वाली नदियों के  प्रवाह में  कमी आएगी , करोड़ों लोगों के सामने पानी का संकट खड़ा होगा भूजल पर निर्भरता में  बढ़ेगी और  सूखे जैसे हालात बनेगे

                                          सीएसई की  भारत को लेकर स्टेट ऑफ एक्सट्रीम वेदर रिपोर्ट  के अनुसार मौसमी घटनाएं 2022 और 2023 की तुलना में २०२४ में ज्यादा हुई | जिसके चलते 2024 के जनवरी से सितंबर  के ९ माह के 274 दिन में से 255  दिन भारत के लोगों को गर्मी ,ठंडी हवाओं ,चक्रवात , बिजली ,भारी बारिश।,बाढ़ , और भूस्खलन का सामना करना पड़ा है | इन प्राकृतिक घटनाओं के कारण 3238 लोगों की अकाल मृत्यु हुई और लगभग 32 लाख हेक्टेयर फसलें प्रभावित हुई |  इसके बावजूद भी मौसम का कहर कम नहीं हुआ था , वर्ष २०२४ का अक्टूबर माह भी 1901 के बाद सबसे गर्म रहा |  

बढ़ता  वैश्विक तापमान इस बात को बताता है कि हमारी पृथ्वी भी तेजी से गर्म हो रही है | डब्लूएचओ ने भी बढ़ते तापमान को लेकर चिंता जताई है , कि अधिक तापमान दुनियाभर में मृत्यु  का एक बड़ा कारण बन सकता है | आशंका जताई गई है कि 2030 से 2050 के मध्य  २ लाख ५० हजार अतरिक्त मौतें सिर्फ जलवायु परिवर्तन के कारण हो सकती हैं | 

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