25 मई, 2025

जासूसी का जाल :: दमोह की आई डी से बन रहे थे फर्जी आधार कार्ड

 जासूसी का जाल 

दमोह की आई डी से बन रहे थे फर्जी आधार कार्ड 

रवीन्द्र व्यास 

 देश में जासूसी का नेटवर्क तोड़ने का कार्य तेजी से चलाया जा रहा है | देश के अलग हिस्सों से देश के साथ गद्दारी करने वाले एक दर्जन से ज्यादा जासूसों  को गिरफ्तार किया गया | ये वो लोग हैं जो  पैसों के लिए अपने ही देश के साथ धोखा देने में परहेज नहीं करते | जासूसी के इस नेटवर्क के तार  बुंदेलखंड  और मध्य प्रदेश   से भी जुड़े होने के संकेत मिल रहे हैं | इस मामले की तह तक जाने का प्रयास सरकार अपने स्तर पर कर रही है बुंदेलखंड में फर्जी आधार आई डी से सिम ,और स्थानीय होने का रास्ता खुल रहा था

      दरअसल  दमोह  जिले  के लिए आधार कार्ड बनाने के हेतु दो आईडी जनरेट की गई थी दमोह की इन  आईडी से  देश के 6 प्रदेशों (पश्चिम बंगाल,बिहारदिल्लीराजस्थानहरियाणा और झारखंड) और  मध्य प्रदेश के  19 से अधिक जिलों और  में फर्जी  आधार कार्ड बनाए गए हैं।  7 अप्रैल को दमोह कले€टर को एक गोपनीय शिकायत मिलीजिसमें बताया गया कि दमोह में आधार कार्ड बनाने वाली आईडी 29026 से भिंड में आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं। 16 अप्रैल को ई-मेल से प्राप्त हुई रिपोर्ट में हैरान करने वाले तथ्य सामने आए। इसमें बताया गया कि 29026नाम की आधार आईडी से मध्य प्रदेश के भिंड, उज्जैन, देवास, इंदौर, छतरपुर, जबलपुर, पन्ना, सागर, कटनी,शाहजहांपुर (यूपी) , धार, रायसेन, गुना, दतिया, पश्चिम निमाड़, छिंदवाड़ा, मुरैना, भोपाल और झाबुआ में आधार कार्ड बनाए गए हैं। 15 अप्रैल को आई  शिकायत में दमोह की दूसरी आधार आईडी 29832 की रिपोर्ट में बताया गया कि इस आईडी से प्रदेश के जिलों के अलावा पश्चिम बंगाल के जिला  दिनाजपुर, पश्चिम मेदिनीपुर, कूप, वेहर, मालदा, पुरुलिया बनकुरा, झारग्राम, नॉर्थ दिनाजपुर, कूचबिहार, दार्जिलिंग, मालदा, बिहार के कटिहार, मधेपुरा,सहरसा, पुरनिया, अररिया, खगरिया, किशनगंज, दिल्ली के दक्षिण पश्चिम दिल्ली, राजस्थान के बीकानेर, हरियाणा के पानीपत और झारखंड के पूर्व सिंहभूम में भी दमोह की इसी आईडी से आधार कार्ड बनाए गए हैं।

                                                 देखा जाए तो यह कोई साधारण मामला नहीं था , असल में देश में फर्जी घुसपैठ करने वाले ,आतंकवादी  , और फर्जी सिम का उपयोग करने लोग इसी तरह की आधार आईडी प्रूफ बनवाकर देश में बड़े षड्यंत्र रचते हैं  मामले को गंभीर मानते हुए दमोह कलेक्टर सुधीर कोचर ने मामले की   2 मई को कोतवाली थाने में अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई  

     असल में इस तरह के मामले को लेकर   ई-गवर्नेंस   से जुड़े लोग अब तक गंभीर नहीं है |   प्रदेश में करीब 1000 से अधिक मामले सामने आने की बात कही जा रही है | अधिकारियों के पास  जब भी ऐसी शिकायत आती है तो वो  यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया को शिकायत करते हैं। वह हर बार सॉफ्टवेयर अपडेट कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं || 

राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था 

   पाकिस्तान से ऑपरेशन सिंदूर के बाद देश भर की पुलिस को यह निर्देशित किया  गया था कि  वे हर गतिविधि पर पैनी नजर बनाये रखें | इसी क्रम में  होटल , लॉज , धर्मशाला , आधार कार्ड बनाने वाले , सिम बेचने वालों पर निगरानी रखने की बात कही गई थी | सरकार के निर्देश के बाद  छतरपुर सहित बुंदेलखंड और एमपी के जिलों  में   सिम बेचने वालों के  दस्तावेज चेक किए गए, सिम बेचने को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। सिम जिसे भी बेचे उसका आधार कार्ड सहित आवश्यक जानकारी सत्यापित जरूर करें। लोकल मार्केट में आसपास के गांव के ही लोग आते है। अगर किसी पर शक हो तो आधार कार्ड पर लिखे पते के जरिये उक्त गांव के संबंध में सिम खरीदने वाले से पूछें। अन्य राज्य का कोई व्यक्ति आधार कार्ड लेकर सिम लेना चाहे तो उसकी गहराई से जांच कर लें। वह क्या लोकल किसी स्थान से संबंधित है या किसी के घर आया है. आदि जानकारी लें। अगर वह आसपास किसी के घर या गांव आया है तो जांच पड़ताल करके ही सिम बेचे। उसकी फोटो जरूर खींच लें। इसके अलावा अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति समझ में आए तो तत्काल पुलिस को सूचित करें। 

जासूसी का नेटवर्क 

 भारत में जासूसी  के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है |जासूसी को लेकर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि  2014 में जहां सिर्फ 11 केस दर्ज किए गए थे, वहीं 2022 तक यह संख्या बढ़कर 55 पर पहुंच गई | देश के सुरक्षा तंत्र को धता बनाने वाले पकडे गए इन लोगों में ज्यादातर पाक एम्बेसी से संपर्क में थे | इन्हे कैसे इस कार्य के लिए तैयार किया गया इसकी अपनी एक अलग कहानी है | पर देश में बढ़ते जासूसी के मामले और देश के  खुफिया तंत्र पर प्रश्न चिन्ह जरूर लगाता है | 

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