01 जून, 2023

Political_नेताओं की अंतर्कलह की आग में तपता बुंदेलखंड

 



नेताओं  की अंतर्कलह की आग में तपता बुंदेलखंड 

रवीन्द्र व्यास 

इन दिनों बुंदेलखंड प्रकृति के प्रचंड ताप से तप रहा है , वहीं राजनेता चुनावी ताप और अंतरकलह की आग  से तप रहे हैं | बीजेपी  जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं रूठने मनाने का सिलसिला जारी  है, | मुख्य मंत्री शिवराज सिंह ने बीते  ९ दिनों में बुंदेलखंड के ३ दौरे कर यह जताने का प्रयास किया है कि  हर कीमत पर चुनाव जितना है  | इस दौरान उन्होंने सैकड़ों करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण भी किया | महाकाल लोक की तर्ज पर बुंदेलखंड में भी कई लोक बनाये जाने के सब्ज बाग़ भी दिखाए | असल में कर्नाटक का करेंट इतना तेज लगा है कि कोंग्रेसी बौरा गए हैं तो बीजेपी विचलित हो गई है | जिसका असर लोक व्यवहार में दिखने लगा है |  

                                 

 सागर जिला संभाग का सबसे बड़ा जिला है यहां से तीन कैबिनेट मंत्री सरकार में हैं | यहाँ  पिछले एक दशक से जिस तरह के हालात बीजेपी  के नेताओं ने देखे और समझे उसको लेकर असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है |  यहां की खुरई विधानसभा से चुने गए बीजेपी के प्रमुख नेता और मंत्री भूपेंद्र सिंह की अपने ही जिले के मंत्री गोपाल भार्गव और गोविन्द राजपूत और विधायक प्रदीप लारिया , शैलेन्द्र जैन और महेश राय से नहीं बनती | असंतोष इतना बड़ा कि पिछले दिनों भोपाल में हुई केबिनेट बैठक के बाद लोकनिर्माण मंत्री गोपाल भार्गव , राजस्व मंत्री गोविन्द राजपूत और विधायक शैलेन्द्र जैन ,प्रदीप लारिया  मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान  से मिलने पहुँच गए | इन लोगों ने नगरीय विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह पर अनेकों गंभीर आरोप लगाते हुए  साफ़ कह  दिया कि  सागर के हालात अगर नहीं सुधरे और भूपेंद्र सिंह को नहीं समझाया गया तो हम लोग सामूहिक इस्तीफा देने को मजबूर होंगे | बीजेपी के ये नाराज नेता प्रदेश संगठन मंत्री हितानन्द , और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष वी डी शर्मा से भी मिले | 

हालंकि बाद में मंत्री गोपाल भार्गव ने एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि बैठक में  चुनावी चर्चा हुई , हमने बीते ४३ वर्षों में पार्टी की सेवा अपनी माँ की तरह से की है , बीजेपी के सभी मंत्री विधायक एक मुट्ठी की तरह हैं | उनका यह बयान जारी होने के दूसरे ही दिन गोविन्द राजपूत के पुत्र आकाश राजपूत का एक स्क्रीन शॉट वायरल होने लगा कि " अच्छा है हम खुरई में नहीं हैं ,वरना बात करने पर जेल चले जाते " हालंकि बाद में आकाश ने अपनी यह पोस्ट डिलीट कर दी | इस पर गोविन्द राजपूत ने साफ़ कहा कि ऐसी टिपण्णी नहीं करनी चाहिए | आकाश का यह विवाद शान्त भी नहीं हुआ था कि  सागर बीजेपी के जिला मंत्री देवेंद्र फुसकेले ने फेसबुक पर खुरई में चल रही तालिबानी विचारधारा पर लिख डाला | उन्होंने लिखा कि "" श्री बागेश्वर धाम की कृपा से खुरई क्षेत्र में चल रही तालिबानी विचारधारा से शीघ्र मुक्ति ,आप सभी का कल्याण , साधु जी सीताराम \\ |  

                                               दरअसल सागर  में जो कुछ भी होता है उसका असर  देर सवेर  संभाग के अन्य जिलों में भी देखने को मिलता है |  सागर के लोग और यहाँ के बीजेपी नेता  इस बात को बहुत अच्छे से जानते हैं कि  यहां  मंत्री भूपेंद्र सिंह किसके इशारे पर इतने  बलशाली हुए और किसके इशारे पर  सागर के अन्य नेताओं और मंत्रियों को उपेक्षित किया गया  इसमें  लोग सीधे तौर पर सीएम शिवराज सिंह चौहान का नाम लेने से भी संकोच नहीं करते दूसरी तरफ अगर कांग्रेस को देखा जाए तो पिछले दिनों जब यहां कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने दौरा किया था उनके निशाने पर मंत्री भूपेंद्र सिंह ही थे | दिग्विजय ने खुरई विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेसियों पर दर्ज हो रहे झूठ प्रकरण के मुद्दे पर मंत्री भूपेंद्र सिंह पर निशाना साधा था |  अब तो बीजेपी के नेता ही कहने लगे हैं कि खुरई में तालिबानी विचारधारा चल रही है | पिछले दिनों सागर दौरे पर आये  बीजेपी के संघठन से जुड़े  एक पदाधिकारी ने सागर में चल रहे इस संघर्ष को महीनो पहले समझ लिया था सूत्रों की माने तो उन्होंने भूपेंद्र सिंह को सीधे तौर  पर समझाइस और चेतावनी भी दी थी , इसकी जानकारी  भी सीएम को दी गई थी | चुनाव के तीन माह पहले बीजेपी के अंदर मचे  घमासान को लेकर बीजेपी के सामने स्थिति " इधर गिरें तो कुआं उधर गिरें तो खाई " वाली हो गई है    ? 

 

 विवादों के बीच  बुंदेलखंड के गढ़ को मजबूत बनाने के लिए  मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान जुटे हैं | 9 दिनों में  बुंदेलखंड के  तीन  जिला का दौरा कर उन्होंने करोड़ों की योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया | पन्ना में महराज छत्रसाल की जयंती पर पन्ना गौरव दिवस मनाया गया | यहां उन्होंने घोषणा की पन्ना में बाबा महाकाल की तर्ज पर  जुगल किशोर लोक बनाया जाएगा | पन्ना में भी लोगों ने मेडिकल कालेज की मांग की इस पर  मुख्यमंत्री  श्री चैहान ने कहा कि जब 10 लाख तक की आबादी वाले शहरों जिलों में मेडिकल काॅलेज खोले जाने का फैसला होगातब उसमें पन्ना को भी शामिल किया जाएगा। दरअसल मेडिकल कालेज की ऐसी मांग है जिसकी हर जिले से मांग उठ रही है |  पन्ना आने के चार दिन  पहले  ही सीएम पृथ्वीपुर गए थे वहां उन्होंने कहा की 500 करोड़ से अधिक की लागत से ओरछा में राम राजा लोक का निर्माण किया जाएगा | 

      जाएगा निवाड़ी आने के तीन दिन पहले ही वे सागर आये थे उन्होंने सागर में उन्होंने कुशवाहा समाज के सम्मलेन में हिस्सा लिया और यहाँ उन्होंने लवकुश मंदिर बनाने के लिए 10 रूपये की राशि देने की घोषणा की | जिसमे 5 करोड़ की राशि मंदिर के लिए और 5 करोड़ की राशि धर्मशाला बनाने पर व्यय  होगी | कुशवाहा समाज कल्याण बोर्ड के गठन की घोषणा भी की | इसी दिन उन्होंने मुख्य मंत्री किसान ब्याज माफ़ी योजना का भी शुभारम्भ किया | सागर जिले की 866 करोड़ की तीन नल जल योजना का  भूमि पूजन किया |   करोड़ों की योजनाओं के माया जाल  का कितना असर होगा मतदाताओं पर होगा यह आने वाला वक्त ही बताएगा |


                               बीजेपी में  विवाद के हालातों के बाद  कांग्रेस के नेता जरूर खुश हैं , पर अंदरूनी हालात कांग्रेस के भी कुछ कम नहीं है | कांग्रेस में भी अंतर्कलह खुलकर सामने आने लगा है | इसकी बानगी संभाग के प्रभारी के सामने भी  कई जिलों में देखन को मिले हैं | कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से तो कांग्रेस के नेता कुछ ज्यादा ही उत्साहित हो गए हैं ,  यही कारण है कि पिछले कुछ दिनों में चुनावी रण में उतरने वाले दावेदारों की संख्या बड़ी है , जो ना सिर्फ दीवाल लेखन कर रहे हैं बल्कि गाँव गाँव जनसम्पर्क अभियान में भी जुटे हैं | कांग्रेस में बढ़ते दावेदारों के कारण अब कांग्रेस में गुटबाजी भी खुलकर सामने आने लगी है | जिसका नुक्सान कांग्रेस को उठाना पढ़ सकता है | 

                       दरअसल इन दिनों बुंदेलखंड में  सत्ता  के समीकरण  कांग्रेस के अनुकूल माने जा रहे हैं  इसके पीछे  लोग  अपने अपने तरह से कारण भी  बताते हैं | 

   

 

Political_BINA_35बीना विधानसभा क्षेत्र _ आसान नहीं है बीजेपी के इस गढ़ को तोड़ना


  35_बीना (क्रं.35 )  

 मध्यप्रदेश के   सागर   जिले की 8  विधानसभा सीटों में से एक  बीना  विधानसभा  सीट है  |  बुंदेलखंड  की  सबसे चर्चित सीटों में शुमार यह विधानसभा क्षेत्र   एक अलग राजनैतिक चरित्र के लिए जाना जाता  है   |  2003 तक यह विधानसभा क्षेत्र सामान्य रहा इस दौरान यहां से अनेकों दिग्गज विधान सभा में पहुंचे |  जनसंघ के भगीरथ बिलगैया , श्याम नारायण मुश्रान  , सुधाकर बापट , प्रभु सिंह ठाकुर , और  ब्रजकिशोर पटेरिया  जैसे राजनेता विधानसभा पहुंचे इनमे से ज्यादातर मंत्री भी बने  |   परिसीमन के बाद 2008  में इसे अजा  के लिए सुरक्षित कर दिया  गया 1977 के बाद से ही यह  बीजेपी के  बर्चस्व वाली विधानसभा सीट बन गई  अजा के लिए सुरक्षित  सीट होने के बाद भी यहाँ बीजेपी का ही कब्जा रहा | पिछले दस चुनावों में यहां से एक बार जनता पार्टी ,दो बार कांग्रेस और ७ बार बीजेपी जीती है | 2018 के चुनाव में   बीजेपी के महेश राय  के मामूली अंतर से जीतने के कारण अब हर कोई यहां से अपनी दावेदारी जाता रहा है | 

 बीना का  अपना एक अलग  राजनैतिक और  ऐतिहासिक महत्व है  यहाँ  लगी बीना रिफाइनरी के कारण इसे देश दुनिया में जाना पहचाना जाता है इसी विधानसभा क्षेत्र की  ऐतिहासिक धरोहर  एरण  है ,  जिसका वर्णन पुराण में भी मिलता है यह भी कहा जाता है कि  देश में पहली सति यहाँ के एरण में ही हुई थी बीना के निकट खिमलासा का किला एक महत्वपूर्ण स्थल है |  बीना भी गेहूं की श्रेष्ठ फसलों के लिए प्रसिद्ध है बीना रेलवे जंक्शन के कारण यहां की अपनी एक अलग पहचान है |  राजनैतिक तौर पर यह इलाका गुना अशोक नगर क्षेत्र से लगा होने के कारण यहाँ सिंधिया राजघराने का  भी वर्चस्व माना जाता है | ग्रामीण क्षेत्र वाले इस  विधानसभा क्षेत्र में बीना तहसील और खुरई तहसील के  खिमलासा आर आई सर्कल के गाँव आते हैं | 


1962  में  अस्तित्व में आई बीना   विधानसभा सीट  से पहला विधायक जनसंघ पार्टी के भागीरथ रामदयाल बिलगैया  को चुना गया , हालांकि वे 1977 में जपा के टिकट पर भी चुनाव जीते || 1962 से 2003 तक यह सामान्य सीट रही | परिसीमन के बाद २००८ के चुनाव में यह अजा के लिए सुरक्षित विधानसभा सीट हो गई |  1977 से अब तक हुए विधानसभा के दस चुनावों में यहाँ से कांग्रेस के अरविंद भाई 1980 और प्रभु सिंह ठाकुर 1993  में चुनाव जीते |  बीजेपी के सुधाकर बापट यहाँ से तीन बार विधायक चुने गए    १९८५. 1990 और 1998 में  , 2003 में सुशीला राकेश सिरोठिया  यहां से चुनाव जीती |2008 में अजा के लिए सुरक्षित होने के बाद यहां से बीजेपी की   से 2018 तक लगातर चुनाव जीत रही है | इसे एक तरह से बीजेपी का गढ़ माना जाने लगा है |  1998 से यहाँ बीजेपी लगातार चुनाव जीत रही है | 2013 में बीजेपी के महेश राय जीते तो 2018 में भी पर उनके मत प्रतिशत में बड़ी गिरावट देखने को मिली वे  कांग्रेस के शशि कथोरिया से  मात्र 460  मत के अंतर से चुनाव पाए ,|  मत के आधार पर अगर कहा जाए तो इस विधानसभा क्षेत्र में  एक राजनैतिक परिवर्तन की आहट सुनाई दे रही है जमीनी धरातल पर यहाँ के लोगों का मानना है की बीजेपी विधायक सहज सरल हैं | जबकि कांग्रेस के जिन प्रत्यासी शशि कथोरिया  ने जबरदस्त टक्कर दी थी वे भी सिंधिया के साथ बीजेपी में आ आगये | इस समय उन्हें बीजेपी का बड़ा दावेदार माना जा रहा है | 

अतीत को देखे तो    1998  के विधानसभा चुनाव में 5. 66  % वोट पाने वाली बीएसपी ने  2003 के चुनाव में 19. 96  फीसदी वोट लेकर त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति बना दी थी | उस समय यह सामन्य सीट ही थी , दोनों ही दलों के सामने  एक बड़ी चुनौती बीएसपी के रूप में खड़ी हो गई थी | हालंकि मत प्रतिशत को लेकर बना यह संशय  2008 के चुनाव में भी देखने को मिला  था | 2008 में यह सीट अजा के लिए सुरक्षित हो गई थी और बीएसपी ने 20 . 74 फीसदी वोट लेकर कांग्रेस के सारे समीकरण बिगाड़ दिए थे बीते २५ वर्षों से जिस विधानसभा सीट पर कांग्रेस लगातार हार का सामना कर रही है अब उस पर फिर कब्जा करने की जुगत में लगी है  

 1998  के विधानसभा चुनाव में 5. 66  % वोट पाने वाली बीएसपी ने  2003 के चुनाव में 19. 96  फीसदी वोट लेकर त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति बना दी थी | उस समय यह सामन्य सीट ही थी , दोनों ही दलों के सामने  एक बड़ी चुनौती बीएसपी के रूप में खड़ी हो गई थी | हालंकि मत प्रतिशत को लेकर बना यह संशय  2008 के चुनाव में भी देखने को मिला  था | 2008 में यह सीट अजा के लिए सुरक्षित हो गई थी और बीएसपी ने 20 . 74 फीसदी वोट लेकर कांग्रेस के सारे समीकरण बिगाड़ दिए थे


 विधान सभा क्षेत्र में एक बड़ा मुद्दा बीना को जिला बनाने की मांग को लेकर है  | पिछले चुनाव के समय कम शिवराज सिंह ने यहां के लोगों को आशवस्त किया था कि बीना को जिला बनाया जाएगा | बीना वालों की यहाँ मांग बहुत पुरानी है | अब इस मांग को लेकर राजनीति भी खूब होने लगी है |  पिछले दिनों पूर्व मुख्य मंत्री ने बीना ने बीजेपी सरकार को इसी मुख्य मुद्दे पर आड़े हाथ लिया था , उन्होंने घोइश्ना भी की  कि कांग्रेस सरकार बानी तो बीना को जिला बनाया जाएगा जो उसका हक़ भी है |  राजनीति में  समय पर किया गया वार ज्यादा घातक होता है , कांग्रेस  ने इसी मौके का फायदा उठाया |  उसे मालुम था कि यहाँ के खुरई विधायक और मंत्री भूपेंद्र सिंह खुरई को जिला बनवाने के अभियान में जुटे हैं |     पानी ,बिजली , स्वास्थ्य ,शिक्षा, बेरोजगारी  जैसे बुनियादी मुद्दे  हैं बीना रिफायनरी में स्थानीय लोगों को रोजगार ना मिलना , सिचाई परियोजनाओ में विस्थापन का मुद्दा , एरण जैसे पुरातात्विक स्थल का विकाश ना हो पाना | ऐसे मुद्दे हैं जो लोगों को सोचने पर मजबूर कर देते हैं | 

 विधान सभा सीट पर जातीय समीकरण को लेकर क्षेत्र में लोगों की सक्रियता बड़ी है  | पिछले कुछ समय से यहाँ अहिरवार समाज से प्रत्यासी बनाये जाने की मांग तेजी से उभरी है | इसके अलावा यहाँ इस बात को लेकर भी लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है कि यहां की बीना रिफायनरी से उन्हें प्रदूषण तो मिल रहा है पर स्थानीय लोगों को रोजगार की दिशा में कोई सार्थक पहल नहीं हुई है | बीना शहर में लोगों को अब रात में निकलने से डर लगता है , कारण हे आवारा कुत्ते जिनने  2021 में एक हजार ,2022 में 1250 लोगों को अपना शिकार बनाया  सबसे बड़ी मांग और समीकरण बीना को जिला बनाये जाने की मांग को लेकर है जिसे लेकर यहाँ  ज्ञापन बाजी होती रहती है |  

                                                        लगभग पौने दो लाख मतदात वाले इस विधान सभा क्षेत्र में समय के साथ जातीय समीकरण भी अपना असर दिखाने लगे हैं | हिन्दू बाहुल्य विधान सभा क्षेत्र में 96 . 66 फीसदी हिन्दू हैं | जिनमे  सामान्य वर्ग में  38. 66  % ओबीसी- 35  %, एस सी. 21   % एस  टी 2   % अन्य 1 % मुस्लिम 2. 34   %

यहां की अधिकाँश आबादी  कृषि  और कारोबार पर आश्रित  हैं | बीना रिफाइनरी के कारण नगरीय क्षेत्र में बड़ी  संख्या में लोग नोकरियो और व्यापार पर आश्रित हैं  वहीँ ग्रामीण क्षेत्र की आबादी पूर्णतः कृषि और कृषि मजदूरी पर आश्रित है | बीना  रेलवे का एक बड़ा जंक्शन है , | यहाँ के ग्रामीण इलाके में  अनाज के साथ दलहन और तिलहन का उत्पादन यहाँ के किसानो की आर्थिक समृद्धि का मुख्य आधार माना जाता है |   


बीना के अब तक के विधायक 

1962 _      भागीरथ बिलगैया     _ जनसंघ 

1964 उप    श्याम नारायण मुश्रान _ कांग्रेस 

1967         ब्रज किशोर पटेरिया  _  कांग्रेस 

1972         डालचंद्र भगवानदास  _कांग्रेस 

1977         भागीरथ बिलगैया  _    जनता पार्टी 

1980         अरविन्द भाई          _कांग्रेस 

1985        सुधाकर बापट         _ बीजेपी 

 1990         सुधाकर बापट        _ बीजेपी 

1993        प्रभु सिंह ठाकुर        _ कांग्रेस 

1998         सुधाकर बापट        _ बीजेपी  

2003  सुशीला राकेश सिरोठिया _ बीजेपी 

2008 (सु)  डॉ श्रीमती विनोद पंथी _बीजेपी 

2013 (सु) महेश  राय                _बीजेपी 

 2018  (सु) महेश  राय                 _बीजेपी 

                               दावेदारों  की दम :: बीजेपी  से अब यहां कई दावेदार उभरकर सामने आने लगे हैं जिनमे शशि कथोरिया , पूर्व विधायक धरमु राय अपने पुत्र को टिकट   दिलवाना चाहते हैं , इनके अलावा गजेंद्र राय का नाम भी सुर्ख़ियों में है | कांग्रेस से निर्मला सप्रे और उमा का नाम प्रमुख  तौर पर  बताया जा रहा है  | २०२३ की चुनावी बिसात इतनी आसान नहीं मानी जा रही है | इसके पीछे माना जा रहा है की बिना के सहज सरल महेश राय का अगर पार्टी टिकट काटती है तो इसका असर बिना के अल्वा खुरई में सबसे ज्यादा देखने को मिलेगा | 

 


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