09 जून, 2022

watar_crises जल से जुड़ा है जीवन और अर्थ

जल से जुड़ा है जीवन और अर्थ रवीन्द्र व्यास भारतीय संस्कृति के वेद और पुराणों में जल और उसके महत्व के बारे में विस्तार से लिखा गया है | लिखा ही नहीं गया बल्कि लोगों ने सदियों तक इसे आत्मसात भी किया | जीवन के आधार जल की महत्वत्ता को देखते हुए वैदिक काल से ही जल को धर्म से भी जोड़ दिया गया था | हिन्दू समाज के अधिकाँश संस्कार जल बिन अधूरे हैं | जन्म के समय कुआँ पूजन हो , विवाह के समय मागर माटी का संस्कार हो , अमावस्या, मकर संक्रांति का स्नान हो , अथवा कुम्भ का स्नान हो , कार्तिक स्नान , मृत्यु के बाद मोक्ष तभी मिलता है जब जल में अस्थियां प्रवाहित हो जाती हैं | यही कारण है कि नदियों को माता का दर्जा दिया जाता है | देश दुनिया में जहां भी सभ्यता और संस्कृति का विकाश हुआ है उसके मूल में जल तत्व प्रमुख रहा है | वराह मिहिर द्वारा रचित वृहद संहिता में जल के बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है | जिस जल के महत्व को सनातन काल से भारतीय जन मानस मानता रहा , इसके पीछे धर्म के साथ जीवन और अर्थ का चक्र भी जुड़ा था | उसी संस्कृति को जब देश के जनमानस के द्धारा लोभ और आधुनिकता के नाम पर तिरस्कृत किया जाने लगा तो उसके दुष्परिणाम भी सामने आने लगे | बढ़ते तापमान घटते वृक्षों ने हालातों को बेकाबू किया है | बुंदेलखंड सहित देश के अनेकों राज्य इन दिनों भीषण जल संकट का सामना कर रहे हैं | इन हालातों से निपटने के लिए शासन स्तर पर प्रयास किये जा रही हैं , पर जब तक जल संरक्षण और पर्वावरण के संरक्षण और संवर्धन में आम जन का जुड़ाव नहीं होगा इसके सार्थक परिणाम सामने नहीं आएंगे | पंचायत राज दिवस पर २४ अप्रेल २०२२ को प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने देश के प्रत्येक जिले में 75 _75 तालाब बनाने की घोषणा की | आजादी के आजादी अमृत महोत्सव को भी यादगार बनाने के लिए इन तालाबों को अमृत सरोवर नाम दिया गया | प्रधान मंत्री के इस अभियान का राज्यों में भी असर दिखा , मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रायसेन जिले के काहुला में एक जल संसद आयोजित की और जल अभिषेक अभियान की शुरुआत करते हुए कहा कि हमारी जल संस्कृति के अभिन्न अंग हैं तालाब | उन्होंने प्रदेश के 52 जिलों के 5000 अमृत सरोवरों का वर्चुअली शिलान्यास भी किया | वर्षा जल के संरक्षण के लिए ये अमृत सरोवर लाभ कारी सिद्ध होंगे |हालांकि केंद्र और राज्य सरकारों ने समय समय पर सरोवरों के संरक्षण की योजनाए बनाई और जिस तंत्र के भरोसे इनको पूर्ण करने का जतन किया गया उसी तंत्र ने इस पर पलीता लगाया | बुंदेलखंड क्षेत्र में सदियों पहले वर्षा जल संरक्षण के प्रयास किये गए थे | यह क्षेत्र विरासत में मिली अपनी जल संरक्षण निति के कारण जाना जाता रहा है | यहां की बसाहट भी कुछ इस तरह होती थी कि एक पहाड़ और उसकी तलहटी में गाँव , पानी की व्यवस्था के लिए एक सरोवर | अधिकाँश गाँवों की बसाहट कुछ इसी तरह देखने को मिलती है | गौड़ राजा और चन्देल , बुंदेला शासको के कालखंड को देखा जाए तो पानी के लिए तालाबों का निर्माण इन शासकों की पहली प्राथमिकता रही है | बुंदेलखंड के इन चन्देली तालाबों की संख्या हजारों में थी | जो अपनी बेजोड़ तकनीकी के लिए भी जाने जाते हैं | तालाबों के निर्माण और उनकी योजना को इस तरह बनाया जाता था कि एक तालाब का पानी भर जाने के बाद दूसरे तालाब में , कुंआ और बावड़ी में भी पहुंच जाता था | पन्ना नगर जो पत्थरो पर ही एक तरह से बसा है , पहाड़ी की तलहटी है , पानी का संकट यहां की स्थाई नियति है , यहां बने तालाबों का लिंक सिस्टम लोगों को तब पता चला जब एक कुंए को खाली कराने के लिए मोटर लगाईं गई और वह कुंआ खाली नहीं हो रहा था | पन्ना के तत्कालीन कलेक्टर ने जब इसकी खोज बीन कराई तो पता चला ये कुँए भूमिगत नहरों से तालाब से जुड़े हैं | टीकमगढ़ जिले में जहां सर्वाधिक चन्देली तालाब बने हैं , इन तालाबों को पानी से भरने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने नदी जोड़ो तालाब जोड़ो योजना के तहत प्रयास किये | दुखद पहलू ये है कि इनमे से अधिकाँश तालाब तक, अब भी नदी का पानी नहीं पहुँच पा रहा है |बान सुजारा बाँध से भूमिगत पाइप लाइनों से खेतों और गाँवों तक पानी पहुंचाने का जतन सरकार ने किया इसे आधुनिक तकनीकी का ही कमाल है कि अधिकाँश पाइप लाइने फूट रही हैं और खेतों और गाँवों तक पानी नहीं पहुंच रहा है | असल में बुंदेलखंड के सागर ,दमोह ,पन्ना , टीकमगढ़, निवाड़ी ,दतिया , क्षेत्र मध्य प्रदेश में आते हैं , जब कि झाँसी ,ललितपुर , बाँदा ,महोबा , हमीरपुर , उरई , जालौन , चित्रकूट उत्तर प्रदेश में आते हैं | देश के ये वो जिले हैं जो अपनी समृद्ध शाली परम्पराओं के कारण जाने जाते रहे हैं | मूलतः यह इलाका कृषि पर ही आधारित रहा है | पिछले तीन दशकों में यहां मौसम कुछ ऐसा मेहरबान रहा कि लोग एक दशक में आठ बार प्रकृति के प्रकोप के शिकार हुए | जिसके चलते लोगों को अलग अलग तरह की समस्याओं का समाना करना पद रहा है | ऐसा भी नहीं कि लोगों ने इस समस्या का अपने स्तर पर मुकाबला नहीं किया बांदा का जखनि गाँव इसका सबसे बड़ा उदाहरण है , जहाँ लोगों ने स्वयं जल संरक्षण , और वृक्षा रोपण की दिशा में सार्थक प्रयास किये जिसका उन्हें फायदा मिला | इस तरह की प्रेरणा और गाँव वालों को भी मिली है | ऐसे समय जबकि भूजल भी दिन प्रति दिन पाताल की और जा रहा है ,| केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट बताती है कि देश में 66 फीसदी जलाशयों में 40 फीसदी से भी कम पानी बचा है | मानसून अगर बिगड़ा तो खरीफ फसलों के लिए हालात चिंताजनक हो जाएंगे | नीति आयोग ने 2019 में एक रिपोर्ट में बताया था 2020 तक देश के 21 शहरो में भू जल समाप्त हो जाएगा | इस रिपोर्ट के बाद हड़कंप मच गया था | इन हालातों को देख कर केंद्र सरकार ने अटल भूजल योजना शुरू की थी | इसी साल अप्रेल में केंद्र की मोदी सरकार ने अमृत सरोवर योजना शुरू की है | जिसमे एक हेक्टेयर के तालाब में 10 क्यूबिक जल संरक्षण किया जाएगा | बुंदेलखंड में इस योजना से कितना लाभ होगा यह वक्त ही बताएगा |

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

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