विश्वविद्यालय में महराजा कालेज का संविलयन हुए 8 माह यू जी सी को जानकारी देंगे तीन साल की
रवीन्द्र व्यास
छतरपुर // महराजा छत्रसाल विश्वविद्यालय अपने अस्तित्व के साथ ही विवादों का पर्याय रहा है | मामला चाहे जिस तरह का हो विवादों से इसका स्थाई नाता सा बन गया है | हाल ही में एक नया मामला सामने आया है जिसमे बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय किस तरह से यू जी सी को भ्रमित करने का षड्यंत्र रच रहा है | अब ये विश्वविद्यालय का षडयंत्री कारी कदम है अथवा विश्विद्यालय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की कोई योजना | यह जांच का विषय हो सकता है |
सन 2015 में यह महराजा छत्रसाल विश्वविद्यालय अस्तित्व में आया था, ऑटोनॉमस महाराजा कॉलेज को छोड़कर संभाग के सभी 190 शासकीय / अशासकीय कॉलेज जोड़े गए थे | विश्वविद्यालय में यू टी डी विभाग ना होने के कारण विश्वविद्यालय 2015 से 2021 तक सिर्फ परीक्षाओं का संचालन करता रहा| मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने पत्र क्र एफ 73 -4/2021 /38 -3 दिनांक 24 सितंबर 2021 को आदेश जारी कर महाराजा ऑटोनॉमस कॉलेज को विश्वविद्यालय में विलय करने का आदेश दिया | कुलसचिव ने 27/9/2021 को इसकी अधिसूचना जारी कर शासकीय महाराजा स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय छतरपुर के समस्त संसाधन (समस्त चल अचल संपत्ति) समस्त अस्तियाँ अभिलेख दायित्व तथा महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्र सत्र 2021-22 में महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय छतरपुर स्वीकार कर लिए है | तथा महाविद्यालय छतरपुर कार्यरत समस्त अधिकारी कर्मचारियों को महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय छतरपुर में संविलय कर लिया गया | इसकी जानकारी यू जी सी को नहीं दी गई |
27/9/2021 के बाद विश्वविद्यालय में कार्य की सभी विभागों को वरिष्ठता अनुसार विभाग अध्यक्ष तथा टीम बनाकर यूटीडी विभागों का संचालन शुरू किया गया | महराजा महाविद्यालय के विश्वविद्यालय में संविलयन के बाद महराजा छत्रसाल विश्वविद्यालय प्रदेश में सर्वाधिक छात्र संख्या वाला विश्विद्यालय बन गया | पर विश्व विद्यालय के पास स्वयं के स्वामित्व का कोई भवन नहीं है , प्रोफ़ेसर भी प्रतिनयुक्ति पर हैं जिनका वेतन शासकीय कन्या महाविद्यालय से निकलता है |
अब 23 -24 मई को यू जी सी का निरीक्षण दल विश्वविद्यालय के 12 (बी) के निरीक्षण हेतु आ रहा है | यूजीसी का 12( वीं) के नियम है कि किसी भी विश्वविद्यालय में जब यूटीडी का संचालन 3 वर्ष पूर्ण
कर लेता है तब उसका निरीक्षण किया जाता है | यह नियम कई सवाल खड़े करता है कि जब महविद्यालय संविलयन 27 सितम्बर 2021 को किया गया , उसके बाद विश्वविद्यालय में कार्य की सभी विभागों को वरिष्ठता अनुसार विभाग अध्यक्ष तथा टीम बनाकर यूटीडी विभागों का संचालन शुरू किया| इस आधार पर तो यू टी डी के संचालन को मात्र ८ माह ही हुए हैं | फिर ये तीन साल की रिपोर्ट किस आधार पर देंगे | ये भी दिलचस्प है कि फरवरी 2021 में उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने विश्वविद्यालय में पांच विषयों मे स्नातकोत्तर यूटीडी कक्षाओं का उद्घाटन किया था | जिसमे 25_25 छात्रों को प्रवेश दिया गया था | विश्व विश्वविद्यालय में 6 माह पूर्व ही यूटीडी विभाग एवं संकाय के डीन बनाए गए हैं |
यहां यह भी दिलचस्प है कि 16 मार्च 2022 को विश्वविद्यालय ने जब अपना प्रथम दीक्षांत समारोह आयोजित किया था , उस समय महाराजा ऑटोनॉमस कॉलेज के मेरिट वाले छात्रों को उसमें शामिल नहीं किया गया था | कहा गया था इनकी अंकसूची और छात्र यूटीडी के नहीं हैं | जबकि संभाग के सभी कालेजों के स्नातकोत्तर कक्षाओं के मेरिट चार वाले छात्रों को राज्यपाल तथा उच्च शिक्षा मंत्री ने गोल्ड मेडल तथा डिग्री प्रदान की थी | अब वही कुलपति महोदय सभी कालेज के विभागों के पिछले 3 वर्षों के परीक्षा परिणाम अकादमी की उपलब्धियां जिसमें सेमिनार, बेविनार , स्पोर्ट्स ,एनसीसी, एनएसएस की उपलब्धियों को 12वीं के प्रोफार्मा में भरकर जानकारी मांग रहे हैं |
16 मार्च 2022 को छतरपुर के महराजा छत्रशाल बुंदेलखंड विश्व विद्यालय का प्रथम दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ समारोह में कुलाधिपति और मध्य प्रदेश के राजयपाल मंगू भाई पटेल ने कहा था कि विश्वविद्यालय की पहचान भवन भौतिक संसाधन से नहीं होती,, बल्कि वहां के संस्कारित छात्रों और शिक्षक से होती है | शायद प्रदेश के कुलाधिपति और महामहिम राज्यपाल का यह ज्ञान छात्रों के लिए था गुरु जी के लिए नहीं था |