26 मई, 2022

Famliy _ टूटते संयुक्त परिवार:: बढ़ते एकल परिवार

-डॉ. सौरभ मालवीय मनुष्य जिस तीव्र गति से उन्नति कर रहा है, उसी गति से उसके संबंध पीछे छूटते जा रहे हैं. भौतिक सुख-सुविधाओं की बढ़ती इच्छाओं के कारण संयुक्त परिवार टूट रहे हैं. माता-पिता बड़ी लगन से अपने बच्चों का पालन-पोषण करते हैं. उन्हें उच्च शिक्षा दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं. परिवार में लड़कियां हैं, तो वे विवाह के पश्चात ससुराल चली जाती हैं और लड़के नौकरी की खोज में बड़े शहरों में चले जाते हैं. इस प्रकार वृद्धावस्था में माता-पिता अकेले रह जाते हैं. इसी प्रकार शहरों में उनके बेटे भी अकेले हो जाते हैं. संयुक्त परिवार टूटने के कारण एकल परिवार बढ़ते जा रहे हैं. एकल परिवारों के कारण संबंध टूट रहे हैं. संयुक्त परिवारों में बहुत से रिश्ते होते थे. दादा-दादी, ताया-ताई, चाचा-चाची, बुआ-फूफा, नाना-नानी, मामा-मामी, मौसी-मौसा तथा उनके बच्चे अर्थात बहुत से भाई-बहन. बच्चे बचपन से ही इन सभी संबंधों को जानते थे, परन्तु अब एकल परिवारों में माता-पिता और उनके दो या एक बच्चे ही हैं. संयुक्त परिवार टूटने के अनेक कारण हैं. रोजगार के अतिरिक्त परिवार के सदस्यों में बढ़ते मतभेद, कटुता एवं स्वार्थ आदि के कारण भी एकल परिवार बढ़ते जा रहे हैं. ऐसी परिस्थितियों में व्यक्ति नितांत अकेला पड़ता जा रहा है. संयुक्त परिवार में समस्याएं सांझी होती थीं. व्यक्ति किसी कठिनाई या समस्या होने पर परिवार के सदस्यों के साथ विचार-विमर्श कर लेता था. इस प्रकार उसे समस्या का समाधान घर में ही मिल जाता था. संयुक्त परिवार के बहुत से लाभ हैं. परिवार के प्रत्येक सदस्य की सुरक्षा का दायित्व सबका होता है. किसी भी सदस्य की समस्या पूरे परिवार की होती है. यदि किसी को पैसे आदि की आवश्यकता है, तो पैसे बाहर किसी से मांगने नहीं पड़ते. परिवार के सदस्य ही मिलजुल कर सहयोग कर देते हैं. परिवार में सदस्यों की संख्या अधिक होने के कारण घर और बाहर के कार्यों का विभाजन हो जाता है. प्रत्येक सदस्य अपनी योग्यता और क्षमता के अनुसार कार्य कर लेता है तथा अन्य कार्यों से मुक्त रहता है. ऐसे में उसे अपने लिए पर्याप्त समय मिल जाता है. इसके अतिरिक्त संयुक्त परिवार में रसोई एक होने के कारण खर्च भी कम हो जाता है. उदाहरण के लिए दो या तीन एकल परिवार यदि संयुक्त परिवार के रूप में रहते हैं, तो उन्हें अधिक सामान की आवश्यकता होगी. थोक में अधिक सामान लेने पर वह सस्ता पड़ता है. इसी प्रकार तीन के बजाय एक ही फ्रिज से काम चल जाता है. ऐसी ही और भी चीजें हैं. परिवार के किसी सदस्य के बीमार होने पर उसकी ठीक से देखभाल हो जाती है. परिवार के सदस्य साथ रहते हैं, तो उनमें भावनात्मक लगाव भी बना रहता है. इसके अतिरिक्त बच्चों का पालन-पोषण भी भली-भांति आसानी से हो जाता है. उनमें अच्छे संस्कार पैदा होते हैं. वे यह भी सीख जाते हैं कि किस व्यक्ति के साथ किस प्रकार का व्यवहार करना चाहिए. इसमें बड़ों का सम्मान करना, अपनी आयु के लोगों के साथ मित्रवत व्यवहार करना तथा छोटों से स्नेह रखना आदि सम्मिलित हैं. आज परिस्थितियां पृथक हैं. मनुष्य किसी भी कठिनाई या किसी संकट के समय स्वयं को अकेला ही पाता है. यदि परिवार में महिला का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, तो तब भी उसे घर का सारा कार्य स्वयं करना पड़ता है, जबकि संयुक्त परिवार में अन्य महिलाएं होने के कारण उसे आराम करने का समय मिल जाता था. साथ ही उसकी भी उचित प्रकार से देखभाल भी हो जाती थी. एकल परिवार में अकेले पड़ जाने के कारण व्यक्ति अवसाद का शिकार हो जाता है. अवसाद एक मानसिक रोग है. इस अवस्था में व्यक्ति स्वयं को निराश अनुभव करता है. वह स्वयं को अत्यधिक लाचार समझने लगता है. ऐसी स्थिति में प्रसन्नता एवं आशा उसे व्यर्थ लगती है. वे अपने आप में गूम रहने लगता है. वह किसी से बात करना पसंद नहीं करता. हर समय चिड़चिड़ा रहता है. यदि कोई उससे बात करने का प्रयास करता है, तो वे क्रोधित हो जाता है. कभी वह उसके साथ असभ्य अथवा उग्र व्यवहार भी करता है. मनोचिकित्सकों के अनुसार अवसाद के भौतिक कारण भी होते हैं, जिनमें आनुवांशिकता, कुपोषण, गंभीर रोग, नशा, कार्य का बोझ, अप्रिय स्थितियां आदि प्रमुख हैं. अवसाद की अधिकता होने पर व्यक्ति आत्महत्या तक कर लेता है. अवसाद के कारण आत्महत्या करने के अप्रिय समाचार सुनने को मिलते रहते हैं. ऐसे विचलित करने वाले समाचार भी मिलते हैं कि अमुक व्यक्ति ने सपरिवार आत्महत्या कर ली या परिवार के सदस्यों की हत्या करने के पश्चात स्वयं भी आत्महत्या कर ली. कोरोना काल में जहां संयुक्त परिवारों के लोग एक-दूसरे के साथ मिलजुल कर रहे, वहीं एकल परिवारों के लोग अवसाद का शिकार होने लगे. ‘द लैंसेट पब्लिक हेल्थ’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में अवसाद एवं घबराहट की शिकायतें देखने को मिल रही है. सात दिन या उससे अधिक समय तक कोरोना वायरस संक्रमण से पीड़ित रहे लोगों में अवसाद एवं घबराहट की दर उन लोगों की तुलना में अधिक थी, जो संक्रमित रोगी कभी अस्पताल में भर्ती नहीं हुए अर्थात वे अपने परिजनों के मध्य ही रहे. रिपोर्ट के अनुसार सार्स-कोव-2 संक्रमण वाले ऐसे रोगी जो अस्पताल में भर्ती हुए उनमें 16 महीने तक अवसाद के लक्षण देखे गए, परन्तु जिन रोगियों को अस्पताल में भर्ती नहीं होना पड़ा, उनमें अवसाद और घबराहट के लक्षण दो महीने के भीतर ही कम हो गए. सात दिनों या उससे अधिक समय तक बिस्तर पर रहने वाले लोगों में 16 महीने तक अवसाद और घबराहट की समस्या 50 से 60 प्रतिशत अधिक थी. मनोचिकित्सकों के अनुसार अवसाद से निकलने के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति अपने परिजनों एवं मित्रों के साथ समय व्यतीत करे. किसी भी समस्या या संकट के समय परिजनों से बात करे. स्वयं को अकेला न समझे. सकारात्मक विचारों वाले व्यक्तियों से बात करे. परिजनों को भी चाहिए कि वे अवसादग्रस्त लोगों में सकारात्मक विचार पैदा करने का प्रयास करें, उन्हें अकेला न छोड़ें, क्योंकि ऐसे लोग आसानी से अपराध की ओर अग्रसर हो सकते हैं. उन्हें उनकी किसी भी नाकामी के लिए तानें न दें, अपितु उनको प्रोत्साहित करें तथा उनके आत्मविश्वास को बढ़ाएं. वास्तव में आज तकनीकी ने समस्त संसार के लोगों को जितना समीप कर दिया है, उतना ही एक-दूसरे से दूर भी कर दिया है. मोबाइल के माध्यम से व्यक्ति क्षण भर में विदेश में बैठे व्यक्ति से भी बात कर लेता है. परन्तु मोबाइल के कारण ही लोगों को परिवार के सदस्यों से बात करने का समय नहीं मिल पाता. प्रत्येक स्थान पर लोग अपने मोबाइल के साथ व्यस्त दिखाई देते हैं. परिणामस्वरूप व्यक्ति का अकेलापन बढ़ता जा रहा है. व्यक्ति व्यक्ति से दूर होता चला जा रहा है. आवश्यकता है सामूहिक संवाद की प्रत्यक्ष संवाद मन से भाव से विचार से हमे जोड़ता है दुख :सुख में सहायक होकर साथ होने की अनुभूति प्रदान करता है। ( लेखक- हैपीनेस/ अनुभूति कार्यक्रम के प्रभारी है- बेसिक शिक्षा, उत्तर- प्रदेश )

22 मई, 2022

Univrsity_विश्वविद्यालय में महराजा कालेज का संविलयन हुए 8 माह यू जी सी को जानकारी देंगे तीन साल की

 विश्वविद्यालय में  महराजा कालेज का संविलयन हुए 8 माह यू जी सी को जानकारी देंगे तीन साल की 

रवीन्द्र व्यास 

 छतरपुर  //  महराजा छत्रसाल  विश्वविद्यालय  अपने अस्तित्व के साथ ही विवादों का पर्याय रहा है | मामला चाहे जिस तरह का हो विवादों से इसका स्थाई नाता सा बन गया है | हाल ही में एक नया मामला सामने आया है जिसमे बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय किस तरह से यू जी सी को भ्रमित करने का षड्यंत्र रच रहा है | अब ये विश्वविद्यालय का षडयंत्री कारी कदम है अथवा विश्विद्यालय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की कोई योजना | यह जांच का विषय हो सकता है | 

     सन 2015 में   यह महराजा छत्रसाल   विश्वविद्यालय अस्तित्व में आया था, ऑटोनॉमस महाराजा कॉलेज को छोड़कर  संभाग के सभी 190 शासकी / अशासकीय कॉलेज जोड़े गए थे  विश्वविद्यालय  में  यू टी डी विभाग ना होने के कारण विश्वविद्यालय  2015 से 2021 तक सिर्फ परीक्षाओं का संचालन करता रहा|  मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा  विभाग ने पत्र क्र एफ 73 -4/2021 /38 -3  दिनांक  24 सितंबर 2021 को आदेश जारी कर महाराजा ऑटोनॉमस कॉलेज को विश्वविद्यालय में विलय करने का आदेश दिया | कुलसचिव ने 27/9/2021 को इसकी अधिसूचना जारी कर शासकीय महाराजा स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय छतरपुर के समस्त संसाधन (समस्त चल अचल संपत्ति)  समस्त अस्तियाँ  अभिलेख दायित्व तथा महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्र सत्र 2021-22 में महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय छतरपुर स्वीकार कर लिए  है | तथा महाविद्यालय छतरपुर  कार्यरत समस्त अधिकारी कर्मचारियों को महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय छतरपुर में संविलय कर लिया गया | इसकी जानकारी यू जी सी को नहीं दी गई |  

 27/9/2021 के बाद विश्वविद्यालय में कार्य की सभी विभागों को वरिष्ठता अनुसार विभाग अध्यक्ष तथा टीम बनाकर यूटीडी विभागों का संचालन  शुरू  किया गया | महराजा महाविद्यालय के विश्वविद्यालय में संविलयन के बाद महराजा छत्रसाल विश्वविद्यालय प्रदेश में सर्वाधिक छात्र संख्या वाला विश्विद्यालय  बन गया | पर विश्व विद्यालय के पास स्वयं के स्वामित्व का कोई भवन नहीं है , प्रोफ़ेसर भी प्रतिनयुक्ति पर हैं जिनका वेतन शासकीय कन्या महाविद्यालय से निकलता है | 

अब  23 -24 मई को यू जी सी का निरीक्षण दल विश्वविद्यालय के 12 (बी) के   निरीक्षण  हेतु आ रहा है | यूजीसी का 12( वीं) के  नियम  है कि किसी भी विश्वविद्यालय में जब यूटीडी का संचालन 3 वर्ष पूर्ण

 कर लेता है  तब उसका निरीक्षण किया जाता है | यह नियम कई सवाल खड़े करता है कि जब महविद्यालय  संविलयन 27 सितम्बर 2021 को किया गया , उसके बाद विश्वविद्यालय में कार्य की सभी विभागों को वरिष्ठता अनुसार विभाग अध्यक्ष तथा टीम बनाकर यूटीडी विभागों का संचालन शुरू  किया| इस आधार पर तो यू टी डी के संचालन को मात्र ८ माह ही हुए हैं | फिर ये तीन साल की रिपोर्ट किस आधार पर देंगे | ये भी दिलचस्प है कि   फरवरी 2021 में  उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने विश्वविद्यालय  में पांच विषयों मे स्नातकोत्तर  यूटीडी कक्षाओं का द्घाटन किया था | जिसमे 25_25 छात्रों  को प्रवेश दिया गया था | विश्व विश्वविद्यालय में 6 मा पूर्व ही  यूटीडी विभाग एवं संकाय के डीन बनाए गए हैं |

  यहां यह भी दिलचस्प है कि  16 मार्च  2022 को  विश्वविद्यालय ने जब  अपना प्रथम दीक्षांत समारोह आयोजित किया  था , उस समय महाराजा ऑटोनॉमस कॉलेज के मेरिट वाले छात्रों को उसमें शामिल नहीं किया गया था | कहा गया था  इनकी अंकसूची और छात्र यूटीडी  के नहीं हैं |  जबकि  संभाग के सभी कालेजों के स्नातकोत्तर कक्षाओं के मेरिट चार वाले छात्रों को राज्यपाल तथा उच्च शिक्षा मंत्री ने  गोल्ड मेडल तथा डिग्री प्रदान की थी | अब वही  कुलपति महोदय  सभी कालेज के विभागों के पिछले 3 वर्षों के परीक्षा परिणाम अकादमी की उपलब्धियां जिसमें सेमिनार, बेविनार , स्पोर्ट्स ,एनसीसी, एनएसएस की उपलब्धियों को 12वीं के प्रोफार्मा में भरकर जानकारी  मांग रहे हैं |

               16 मार्च 2022 को छतरपुर के महराजा छत्रशाल बुंदेलखंड विश्व विद्यालय का  प्रथम दीक्षां समारोह आयोजित हुआ समारोह में  कुलाधिपति और मध्य प्रदेश के राजयपाल मंगू भाई पटेल ने कहा था कि  विश्वविद्यालय की पहचान भवन भौतिक संसाधन से नहीं होती,, ल्कि वहां के संस्कारित छात्रों और शिक्षक से होती है |  शायद प्रदेश के कुलाधिपति और महामहिम राज्यपाल का यह ज्ञान छात्रों के लिए था  गुरु जी के लिए नहीं था |  

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

  बुंदेलखंड की डायरी  विकास की उमंग और चुनौतियों के  संघर्ष का  बुंदेलखंड  रवीन्द्र व्यास  दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए    2025  में कई...