कोरोना काल :: ये दिन भी ना रहेंगे
रवींद्र व्यास
कोरोना की दूसरी लहर इतनी घातक होगी इसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की होगी | हर दिन बढ़ते आंकड़ों ने लोगों का चैन छीन लिया है , मौत के जो मंजर देखने और सुनने को मिल रहे हैं वो बेचैन करने वाले हैं , उस पर इलाज के लिए आवश्यक सामग्री का अभाव , और इन अभावों से होती मौते नेताओं को भले ही एक राजनैतिक हथियार की तरह लग रही हों पर जनमानस बेचैन है | ऐसे में भी बुंदेलखंड इलाके के लोग भी इस समस्या से जूझ रहे हैं , हर तरह की आर्थिक ,सामजिक,और मानसिक समस्या का सामना कर वे कोरोना से जंग लड़ रहें हैं |
शनिवार को देश में 2,60,553 कोरोना के नए मामले 24 घंटे में आये और 1493 लोगों की मौत हुई | जबकि 16 सितम्बर 2020 को सर्वाधिक 1290 मौते हुई थी | देश में कोरोना काल के बाद से यह पहला मौका है जब एक दिन में इतनी बड़ी संख्या में मामले आये हों | कोरोना से ठीक होने वालों की दर भी घट कर 86.6 फीसदी रह गई है | मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां पोजीविटी रेट लगभग 22 फीसदी हो गया है ,जबकि विश्व स्वाथ्य संगठन के अनुसार 3 फीसदी ज्यादा नहीं होना चाहिए | प्रदेश में एक्टिव मरीजों की संख्या जहां लगातार बढ़ती जा रही है वही मौत के आंकड़े भी बाद रहे हैं | उस पर आक्सीजन की कमी से हो रही मौते व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं |
बुंदेलखंड की स्वाथ्य सेवाओं को लेकर भी स्थिति कोई संतोषजनक नहीं कही जायेगी | पिछले दिनों सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कालेज में आक्सीजन की कमी से मौतों का मामला खूब सुर्खियों में रहा | इस पर सियासत भी खूब हुई पर किसी विपक्षी दल के राजनेता ने मेडिकल कालेज जा कर स्थिति की वास्तविकता को समझने की जरुरत नहीं समझी | इसी बीच खबर आई की मध्य प्रदेश के शहडोल में देर रात आक्सीजन ख़त्म होने से दस लोगों की मौत हो गई | मध्य प्रदेश ही नहीं देश के अनेकों राज्य आक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं | अब इसे कमी किसकी मानी जाए सिस्टम की या सरकार की ? देखा जाए तो देश और प्रदेश के सरकारी तंत्र ने कोरोना की इस दूसरी लहर को शुरूआती दौर में गंभीरता से लिया ही नहीं | और जब ये बेकाबू हो गया तो प्यास लगने पर कुआं खोदने की स्थिति देखने को मिल रही है |
यही हाल बुंदेलखंड इलाके में भी देखने को मिल रहा है , जहा वैसे भी बुनियादी स्वास्थ्य सेवायें लगभग ना के बराबर हैं | सागर संभाग मुख्यालय वा उसके जिलों के जिला अस्पतालों में २० फीसदी से ५० फीसदी चिकित्स्कों का अभाव है | हालात तो तब और बद्द्तर हो जाती है जब जिला चिकित्सालयों में तकनीशियन पदों पर तैनात लोगों से कार्यालयीन कार्य कराया जाने लगता है | इसके कई उदाहरण छतरपुर जिला अस्पताल में देखने को मिलते हैं | जब जिलों की ये दशा हो तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति का अनुमान स्वयं लगाया जा सकता है | इन विपरीत हालातों में भी स्वाथ्य अमला जुटा हुआ |
बुंदेलखंड में आने वाले समय में चुनौतियां और गंभीर होने वाली हैं | इसकी मूल वजह महानगरों से वापस लौट रहे लोग और मजदूरों को माना जा रहा है | जिनकी इस बार ना स्क्रीनिंग हो रही है और ना ही उन्हें क्वैरेन्टाइन किया जा रहा है | इसका सबसे ताजा उदाहरण खजुराहो और राजनगर में देखने को मिला | खजुराहो औऱ राजनगरकोरोना वायरस संक्रमित क्षेत्र घोषितकिसी भी व्यक्ति को घर से बाहर निकलने की अनुमति नही ,खजुराहो राजनगर की सभी सीमाएं सील,| यह आदेश यहां के एसडीएम को 17 अप्रेल को जारी करना पड़ा | असल में खजुराहो एवं राजनगर में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़ने और कोरोना के कारण मृत्यू के प्रकरणों में इजाफा होने से सम्पूर्ण नगरीय क्षेत्र की समस्त सीमाओं को 17 अप्रैल की शाम 6 बजे से 22 अप्रैल की प्रातः 6 बजे तक तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित करते हुए निषेधाज्ञा आदेश जारी करते हुए तत्काल प्रभाव से कोरोना वायरस संक्रमित क्षेत्र घोषित किया गया |
दरअसल मध्य प्रदेश सागर ,छतरपुर ,दमोह, टीकमगढ़, निवाड़ी ,पन्ना ,दतिया और उत्तर प्रदेश झाँसी ,ललितपुर,महोबा ,हमीरपुर ,बांदा ,उरई और चित्रकूट जैसे जिलों से बड़ी संख्या में मजदूर रोजगार की तलाश में पलायन करते हैं | पिछले वर्ष जब देश में लॉक डाउन लगा था तो बड़ी संख्या में बुंदेलखंड के लोग अपने साधनो से और पैदल चल कर वापस गाँव आये थे बाद में सरकार ने विशेष ट्रेनों से इनको भेजने की व्यवस्था की थी | इस बार भी देश के महानगरों में लगते लॉक डाउन के कारण ये मजदुर बड़ी संख्या में वापस आ रहे हैं | झांसी रेलवे स्टेशन पर वापस लौट रहे मजदूरों की जांच में हर बीसवां व्यक्ति कोरोना पॉजिटव मिल रहा है | इनमे से अधिकाँश महाराष्ट्र से आये थे , झांसी रेलवे स्टेशन से ये लोग अपने अपने गाँव के लिए चले जाते हैं |
इन सबके चलते बुंदेलखंड में हालात चिंता जनक बने हुए हैं उस पर बुंदेलखंड में पोजीविटी रेट और मृत्यु दर भी निरंतर बढ़ रही है | , और संक्रमित होने वाले अधिकाँश लोग 15 से 40 आयु वर्ग के हैं | शनिवार को सागर में 172 कोरोना पॉजिटिव पाए गए उनमे से 161 ऐसे मरीज थे जिनकी उम्र 16 से 39 साल के बीच की थी | ये हालत बेशक चिंताजनक है की अब कोरोना के लक्षण नोजवानो और बच्चों में ज्यादा देखने को मिल रहे हैं | ये भी तय है की इस समस्या से हम सब निपट लेंगे , जहां समस्या है वहां समाधान भी निकलता है इसीलिए तो कहा जाता है हर कुछ स्थाई नहीं रहता , ये दिन भी ना रहेंगे |