रवीन्द्र व्यास
दरअसल अंगरौठा गांव वर्षो से पानी के संकट का सामना कर रहा था | बुंदेलखंड के गाँवों की बसाहट की तरह ही भेल्दा पंचायत का यह गाँव भी पहाड़ी तलहटी में बसा हुआ है | पहाड़ की तलहटी में बना तालाब और तालाब से निकलने वाली बछेड़ी नदी एक तरह से बरसाती जल श्रोत बन कर रह गए थे | गर्मी के मौसम में गाँव के लोगों और गाँव के जानवरों के सामने पानी का विकराल संकट खड़ा हो जाता था | इन हालातों को देख गाँव की लड़की बबीता राजपूत ने हालात बदलने का निश्चय कर लिया ऐसे में उसको साथ मिला परमार्थ स्वयं सेवी संस्था का |
बबीता ने गाँव की महिलाओं को जोड़ा और समझाया कि अगर गाँव की इस पहाड़ी को काटकर एक नहर बनाई जाय तो जो पानी दूसरी ओर बाह कर बर्बाद जाता है वह तालाब में पहुँचने लगेगा | गाँव की महिलाओं को बात समझ में आई और वे इसके लिए तैयार हो गई | ग्रामीण बताते हैं की शुरूआती दौर में पहाड़ी काटना असंभव लग रहा था इसलिए बड़े पत्थर हटाने और खुदाई शुरू करने के लिए जेसीबी मशीन का उपयोग किया था | बाद में गांव की लगभग 200 महिलाओं ने 107 मीटर लंबी खाई खोदकर पहाड़ को काट दिया। बबिता की प्रेरणा और गाँव की महिलाओं के इन प्रयासों के कारण अब ना सिर्फ वह तालाब पानी का प्रमुख श्रोत बन गया है बल्कि तालाब से निकलने वाली बछेड़ी नदी को भी नव जीवन मिला है | इसका सबसे बड़ा लाभ गाँव वालों को यह भी मिला कि गाँव के जो 10 कुएं और पांच बोरवेल सर्दी की विदाई तक सूख जाते थे अब उनमे भी पानी है |
बबीता को तालाब के पानी के श्रोत को विकसित करने के लिए भी बड़ी मशक्कत करनी पड़ी | असल में पहाड़ी और यह तालाब वन क्षेत्र में आते हैं , इसके लिए वन विभाग से अनुमति प्राप्त करना भी जरूरी था , जिसे पाने के लिए भी उसे मशक्कत करनी पड़ी। लोगों को इकट्ठा करने और पानी संरक्षण के लिए बबीता और अन्य लोगों को जागृत करने में परमार्थ समाजसेवी संस्थान ने बड़ी भूमिका निभाई। सामूहिक प्रयास हुए और पहाड़ी को काट दिया गया। एक खाई के जरिए नदी को तालाब से जोड़ दिया गया है।
महिलाओं द्वारा पहाड़ी को काट कर तालाब तक नहर बनाने की बात पर परमार्थ स्वयं सेवी संस्था ने खूब सुर्खिया बटोरी थी | पर इसका दुसरा पहलू इलाके के लोग बताते हैं कि पहाड़ी काटी गई है, बारिश का पानी तालाब तक लाने के प्रयास हुए हैं ,इसके लिए पहाड़ी को जेसीबी मशीन और डायनामाइट के जरिए काटा गया ,गाँव की महिलाओं ने मिट्टी खुदाई में मदद की। पर यह भी सत्य है कि बुंदेलखंड की सख्त चट्टानों को काटने के लिए मशीनी यंत्रों का उपयोग करना मज़बूरी होती है , अगर यह नहीं किया जाता तो इतना समय लग जाता कि लोग हताश हो जाते ,| तालाब को नया जीवन देने के लिए बबिता जैसी युवती और गाँव की महलाये बधाई की पात्र हैं | मोदी जी द्वारा आज मन की बात कार्यक्रम में उनका नाम लिए जाने से ना सिर्फ बबिता के अंदर नव ऊर्जा का संचार हुआ है बल्कि इससे अनेको युवाओं को प्रेरणा मिली है |
बड़ा मलहरा जनपद के सी ई ओ अजय सिंह बताते हैं कि गांव की महिलाओं ने पहाड़ को काटकर तालाब तक नहर बनाई जिस कारण सूखा रहनेवाला तालाब मैं पानी पहुंचा, वर्तमान में तालाब में पानी की स्थिति के बारे में वह कहते हैं कि फिलहाल तो पानी कम है । उन्होंने बताया के उस गांव में तालाब के लिए शीघ्र मनरेगा से भी काम कराया जाएगा।



