28 फ़रवरी, 2021

watar_संकल्प से सफलता सूखे गाँव को पानी दार बनाया



 ​रवीन्द्र व्यास ​

अब और तेज़ी से जल संरक्षण क़े लिये कार्य करूंगी

  आज प्रधान मंत्री  नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में बुंदेलखंड के  छतरपुर जिले के  अंगरोठा गाँव की जिस युवती बबिता राजपूत का जल संरक्षण के लिए जिक्र किया वह  अपने आपको भाग्य शाली मानने लगी है | वह बताती है की मेने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की  हमारे काम की वजह से मोदी जी हमारा नाम लेंगे ||  मुझे यह सुनकर बहुत अच्छा लगा ,|  भविष्य के जल संरक्षण के कार्य के लिए उसने बताया कि  हम लोग खेत का पानी खेत में रोकने के स्ट्रेच बनवा रहे हैं | उस तालाब में और पानी बढ़  जाए इसके लिए  दूसरी तरफ के पहाड़ को काट कर नहर बनाएंगे | अब और तेज़ी से जल संरक्षण क़े लिये कार्य करूंगी।

                         
  
बीए  द्वितीय वर्ष की क्षात्रा  बबिता राजपूत बताती है कि वह एक गरीब परिवार से है इसलिए बाहर पड़ने नहीं जा सकी घुवारा के कालेज से ही  बी ए कर रही हूँ | तालब में  पानी की स्थिति के बारे में उसने बताया कि अभी तो तालाब में पानी कम है पर दूसरी पहाड़ी से नहर बनने के बाद तालाब में पर्याप्त पानी रहेगा ।

 बुंदेलखंड में पानी का संकट सदैव बना रहता है इसी को ध्यान में रख कर इस गाँव की  लगभग 200 महिलाओं ने  पहाड़ी को काटा और अपने गांव को पानी की समस्या से निजात दिला दी।  19 साल की लड़की बबीता राजपूत ने गांव की महिलाओं को   प्रेरित किया था

दरअसल  अंगरौठा गांव  वर्षो से  पानी के संकट का सामना कर रहा था | बुंदेलखंड के गाँवों की बसाहट की तरह ही भेल्दा पंचायत का यह गाँव भी पहाड़ी तलहटी में बसा हुआ है | पहाड़ की तलहटी में बना तालाब और तालाब से निकलने वाली बछेड़ी नदी एक तरह से बरसाती जल श्रोत बन कर रह गए थे | गर्मी के मौसम में गाँव के लोगों और गाँव के जानवरों के सामने पानी का विकराल संकट खड़ा हो जाता था | इन हालातों को देख गाँव  की लड़की बबीता राजपूत ने  हालात बदलने  का निश्चय कर लिया ऐसे में उसको साथ मिला परमार्थ स्वयं सेवी संस्था का | 

 बबीता  ने ​गाँव की  ​महिलाओं को ​ जोड़ा  और समझाया  कि  अगर गाँव की इस पहाड़ी को काटकर एक नहर बनाई जाय तो जो पानी दूसरी ओर बाह कर बर्बाद जाता है वह तालाब में पहुँचने लगेगा |  ​गाँव की  ​महिलाओं को बात समझ में आई और वे इसके लिए तैयार हो गई |  ग्रामीण बताते हैं की शुरूआती दौर में पहाड़ी काटना असंभव लग रहा था इसलिए  बड़े पत्थर हटाने और खुदाई शुरू करने के लिए जेसीबी मशीन का उपयोग किया था | बाद में ​ गांव की ​ लगभग ​200 महिलाओं ​ने ​ 107 मीटर लंबी खाई खोदकर पहाड़ को काट दिया। ​बबिता की प्रेरणा और गाँव की महिलाओं के इन प्रयासों के कारण अब  ना सिर्फ वह तालाब पानी का प्रमुख श्रोत बन गया है बल्कि तालाब से निकलने वाली बछेड़ी नदी को भी नव जीवन मिला है |  इसका सबसे बड़ा लाभ गाँव वालों को यह भी मिला कि ​ गाँव के जो  10 कुएं और पांच बोरवेल ​ सर्दी की विदाई तक सूख जाते थे अब उनमे भी पानी है | ​


​     ​बबीता ​ को तालाब के पानी के श्रोत को विकसित करने के लिए भी बड़ी मशक्कत करनी पड़ी | असल में पहाड़ी और यह तालाब वन क्षेत्र में आते हैं , इसके लिए  वन विभाग से अनुमति ​ प्राप्त करना भी जरूरी था , जिसे पाने के लिए भी उसे ​  मशक्कत करनी पड़ी। लोगों को इकट्ठा करने और पानी संरक्षण के लिए बबीता और अन्य लोगों को जागृत करने में परमार्थ समाजसेवी संस्थान ने बड़ी भूमिका निभाई। सामूहिक प्रयास हुए और पहाड़ी को काट दिया गया। एक खाई के जरिए नदी को तालाब से जोड़ दिया गया है।

महिलाओं द्वारा पहाड़ी को ​काट कर तालाब तक नहर बनाने की  बात पर  परमार्थ  स्वयं सेवी संस्था ने खूब सुर्खिया बटोरी थी | पर इसका दुसरा पहलू  ​ ​इलाके के ​ ​लोग बताते हैं कि ​ पहाड़ी काटी गई है, ​बारिश का ​पानी तालाब तक लाने के प्रयास हुए हैं​   ,इसके लिए  पहाड़ी को जेसीबी मशीन और डायनामाइट के जरिए काटा गया ​ ,गाँव की ​ महिलाओं ने मिट्टी खुदाई में मदद  की।​ ​पर यह भी सत्य है कि  बुंदेलखंड की सख्त चट्टानों को काटने के लिए  मशीनी यंत्रों का उपयोग करना मज़बूरी होती है , अगर यह नहीं किया जाता तो  इतना समय लग जाता कि  लोग हताश हो जाते ,| तालाब को नया जीवन  देने  के लिए बबिता जैसी युवती और गाँव की महलाये बधाई की पात्र हैं |  मोदी जी द्वारा आज मन की बात कार्यक्रम में उनका नाम लिए जाने से ना सिर्फ बबिता  के अंदर नव ऊर्जा का संचार हुआ है बल्कि इससे  अनेको युवाओं को प्रेरणा मिली है | 

 बड़ा मलहरा   जनपद के सी ई ओ  अजय सिंह बताते हैं कि गांव की महिलाओं ने पहाड़ को काटकर तालाब तक नहर बनाई जिस कारण   सूखा  रहनेवाला तालाब मैं पानी पहुंचा, वर्तमान में तालाब में पानी की स्थिति के बारे में वह कहते हैं कि फिलहाल तो पानी कम है ।  उन्होंने बताया के उस गांव में तालाब के लिए शीघ्र मनरेगा से भी काम कराया जाएगा।

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25 फ़रवरी, 2021

Social_Gosala_Raysen_ ग्रामीणों ने बनाई गौ-शाला, फसल नुकसान और सड़क दुर्घटना घटी

 ग्रामीणों ने बनाई गौ-शाला, फसल नुकसान और सड़क दुर्घटना घटी

भोपाल : 

रायसेन जिले की सिलवानी तहसील के ग्राम जैथारी में ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से निराश्रित गायों के लिये गौ-शाला बनाकर एक अनुपम उदाहरण पेश किया है। गौ-शाला से 120 गायों को न केवल सहारा मिला है बल्कि खेतों में होने वाले फसल नुकसान और सड़क दुर्घटनाओं में काफी कमी आयी है।

हुआ यूँ कि ग्राम जैथारी के श्री कमलेश लोधी ने एक दिन देखा कि एक व्यक्ति निराश्रित गाय को डंडे से बड़ी बेरहमी से पीटते हुए खेत से भगा रहा है। उन्हें गाय पर हो रही हिंसा के साथ ही व्यक्ति की फसल नुकसानी पर भी बहुत दुख हुआ। उन्होंने गाँव के लोगों से बात की और समझाया कि थोड़े से सहयोग से गाँव और आस-पास के बेसहारा मवेशियों के लिये अस्थाई गौ-शाला बनाकर फसल नुकसान और सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। इससे बेसहारा गौ-वंश को आश्रय मिलने के साथ भरपेट चारा-पानी भी मिलेगा तो वे खेतों और सड़कों की ओर रूख नहीं करेंगे।


श्री कमलेश की कोशिश रंग लाईं। गौ-शाला के लिये श्री जसवंत धाकड़ ने अपनी भूमि दी, किसी ने लकड़ी, किसी ने प्लास्टिक तिरपाल दिया तो किसी ने चारा-पानी की व्यवस्था की। हाथों हाथ गौ-शाला बनकर तैयार हो गयी। गौ-शाला में 120 गाय हैं, जिनकी देखभाल के लिये तीन लोगों को रखा गया है। किसान खुश हैं। रखवाली के लिये अब हमेशा खेत पर नहीं रूकना पड़ता क्योंकि गायों ने खेत में चरने के लिये घुसना बंद कर दिया है। सड़क पर गायों के झुंड अब नहीं बैठते इससे दुर्घटनायें भी काफी कम हो चली है। गौ-शाला सतत् चलती रहे इसके लिये ग्रामवासी सर्वश्री विजय, राम लखन, वीरेन्द्र, भोजराज, मोहन मुरारी, महेश पाल, संजय और गंगाराम चौधरी सहित अन्य ग्रामीण निरन्तर सहयोग दे रहे हैं।

सुनीता दुबे

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

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